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Thursday, November 16, 2017

जब बहुत दिनों से संकेत दे रहा हूँ की मैं महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर) हूँ और यहाँ हर किसी का अस्तित्व मेरे ऊपर निर्भर है तो सहअस्तित्व के धर्म के नाते आपका अस्तित्व बनाये रखना चाहता था और चाहता हूँ तो अभिमान वस् आप मेरे ही अस्तित्व को प्रभावित करने का दुस्साहस 1991 से आज तक किये जा रहे हैं और आपको समझ लेना चाहिए की मेरी वास्तविक मेरिट/इंटेलिजेंस(प्रतिभा/मेधा) और पुरुषार्थ इस संसार में सर्वोच्च और किसी से पचाये नहीं पच पाता है युगों-युगों से तो आप हैं की उसे खाये जाने का ही दुस्साहस करते हैं बारम्बार तो आप अपनी क्षमता से हर प्रकार का लाभ अर्जित कीजिये या अपना अस्तित्व बचाइए दो में से केवल एक होगा क्योंकि आप की वास्तविक धारिता और पुरुषार्थ मुझसे कम है तो कम समझिये अंदर से फिर भी एक छाया विशेष है जिसका मैं सम्मान करता हूँ मानवता की दृष्टिकोण से प्रकृति में उसका मूल रूप तो नहीं हैं आप फिर भी आप मेरे बराबरी का जीवन जिया कीजिये मैं आप के अस्तित्व पर कोई पहली चोट नहीं करूंगा लेकिन अपने से मजबूत की तवहीनी सदा-सदा और युगों-युगों तक ठीक नहीं होती है|

जब बहुत दिनों से संकेत दे रहा हूँ की मैं महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर) हूँ और यहाँ हर किसी का अस्तित्व मेरे ऊपर निर्भर है तो सहअस्तित्व के धर्म के नाते आपका अस्तित्व बनाये रखना चाहता था और चाहता हूँ तो अभिमान वस् आप मेरे ही अस्तित्व को प्रभावित करने का दुस्साहस 1991 से आज तक किये जा रहे हैं और आपको समझ लेना चाहिए की मेरी वास्तविक मेरिट/इंटेलिजेंस(प्रतिभा/मेधा) और पुरुषार्थ इस संसार में सर्वोच्च और किसी से पचाये नहीं पच पाता है युगों-युगों से तो आप हैं की उसे खाये जाने का ही दुस्साहस करते हैं बारम्बार तो आप अपनी क्षमता से हर प्रकार का लाभ अर्जित कीजिये या अपना अस्तित्व बचाइए दो में से केवल एक होगा क्योंकि आप की वास्तविक धारिता और पुरुषार्थ मुझसे कम है तो कम समझिये अंदर से फिर भी एक छाया विशेष है जिसका मैं सम्मान करता हूँ मानवता की दृष्टिकोण से प्रकृति में उसका मूल रूप तो नहीं हैं आप फिर भी आप मेरे बराबरी का जीवन जिया कीजिये मैं आप के अस्तित्व पर कोई पहली चोट नहीं करूंगा लेकिन अपने से मजबूत की तवहीनी सदा-सदा और युगों-युगों तक ठीक नहीं होती है| 
The 24 spokes of the Ashoka Chakra represent
1. Love
2. Courage
3. Patience
4. Peacefulness
5. Magnanimity
6. Goodness
7. Faithfulness
8. Gentleness
9. Selflessness
10. Self-Control
11. Self Sacrifice
12. Truthfulness
13. Righteousness
14. Justice
15. Mercy
16. Gracefulness
17. Humility
18. Empathy
19. Sympathy
20. Spiritual Knowledge
21. Moral Values
22. Spiritual Wisdom
23. The Fear of God
24. Faith or Belief or Hope->>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Wednesday, November 15, 2017

वर्तमान में कितनो ही चक्के पास हो किन्तु आपको केवल इतना बताना है की सायकिल के दो चक्के में से एक चक्के को समाप्त कर दिए जाने पर भी एक चक्के के बलपर मानवता हित में इसी प्रयागराज में अभीष्ठ सफलता प्राप्त हुई और अर्जुन और कृष्ण समेत सम्पूर्ण मानवता शिक्षा बाद गुरुदक्षिणा देती है किन्तु यह मानवता इतिहास में अप्रतिम संयोग था की किसी ने शिक्षा लेने से पहले ही गुरु दक्षिणा अर्पित किया अपने गुरु कुल को| तो समझियेगा की ऐसा व्यक्तित्व कौन हो सकता है जो प्रयागराज का भी बाप और इस विश्वमानवता का बाप रहा हो| तो ऐसा प्रयागराज के इतिहास में न कभी हुआ था और न होगा|------------------------अगर भारतीय सामाजिक व्यवस्था जारी है न कि सामाजिक व्यवस्था अन्तर्गत जातिवाद(सार्वजनिक स्वामित्व और धनराशि से सम्बंधित पद:दायित्व में समुचित योग्यता को ध्यान में रखे बिना केवल अपने चुनिंदा जाति/समाज के लोगों का ही चुन-चुन के अनधिकृत उथ्थान)/जातिअपनाम/अमानवीयता (जिसमे दलित उथ्थान के लिए उच्चतम स्तर पर प्रयास जारी हैं जिसकी परिणति में कम से कम उनको अपने समाज का प्रथम उथ्थान का कर्तव्य बनाता है उसके बाद ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनके अन्य व्युत्पन्न का उथ्थान करने का कर्तव्य आता है किन्तु उनको जातिवादी भी नहीं होना चाहिए) तो ऐसे में अन्य किसी जाति से तो पहले से मान्य है किन्तु कम से कम एक ईसाई(दलित) युवक से एक ब्राह्मण संतति का हिन्दू शास्त्रीय विधि से विवाह केवल और केवल अपरिहार्य कारणों में आता है उसको विशेष सामाजिक मान्यता और उसका महिमामण्डन मै किसी भी अवस्था में नहीं कर सकता हूँ और न तो ब्राह्मण समाज या हिन्दू समाज को हिन्दू शास्त्रीय विधि से विवाह मान्यकरने की सामर्थ्य रखता है क्योंकि भारतीय सामाजिक व्यवस्था और उसकी संस्कृति को सर्वोच्च बनाये रखने के लिए बहुतों द्वारा अभीष्ट त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम/साधना जारी है| अगर भारतीय संस्कृति और संस्कार को समाप्त मानकर अन्य संस्कृति का वर्चस्व स्वीकार भी कर लिया जाता है भारतीय समाज के बहुसंख्यक लोगों द्वारा उसमे भी किसी पर अपने निजी विचार संख्याबल:बाहुबल/धनबल/बुद्धिबल के आधार पर आप नहीं थोप सकते हैं|---------वर्तमान में कितनो ही चक्के पास हो किन्तु आपको केवल इतना बताना है की सायकिल के दो चक्के में से एक चक्के को समाप्त कर दिए जाने पर भी एक चक्के के बलपर मानवता हित में इसी प्रयागराज में अभीष्ठ सफलता प्राप्त हुई और अर्जुन और कृष्ण समेत सम्पूर्ण मानवता शिक्षा बाद गुरुदक्षिणा देती है किन्तु यह मानवता इतिहास में अप्रतिम संयोग था की किसी ने शिक्षा लेने से पहले ही गुरु दक्षिणा अर्पित किया अपने गुरु कुल को| तो समझियेगा की ऐसा व्यक्तित्व कौन हो सकता है जो प्रयागराज का भी बाप और इस विश्वमानवता का बाप रहा हो| तो ऐसा प्रयागराज के इतिहास में न कभी हुआ था और न होगा|

वर्तमान में कितनो ही चक्के पास हो किन्तु आपको केवल इतना बताना है की सायकिल के दो चक्के में से एक चक्के को समाप्त कर दिए जाने पर भी एक चक्के के बलपर मानवता हित में इसी प्रयागराज में अभीष्ठ सफलता प्राप्त हुई और अर्जुन और कृष्ण समेत सम्पूर्ण मानवता शिक्षा बाद गुरुदक्षिणा देती है किन्तु यह मानवता इतिहास में अप्रतिम संयोग था की किसी ने शिक्षा लेने से पहले ही गुरु दक्षिणा अर्पित किया अपने गुरु कुल को| तो समझियेगा की ऐसा व्यक्तित्व कौन हो सकता है जो प्रयागराज का भी बाप और इस विश्वमानवता का बाप रहा हो| तो ऐसा प्रयागराज के इतिहास में न कभी हुआ था और न होगा|------------------------अगर भारतीय सामाजिक व्यवस्था जारी है न कि सामाजिक व्यवस्था अन्तर्गत जातिवाद(सार्वजनिक स्वामित्व और धनराशि से सम्बंधित पद:दायित्व में समुचित योग्यता को ध्यान में रखे बिना केवल अपने चुनिंदा जाति/समाज के लोगों का ही चुन-चुन के अनधिकृत उथ्थान)/जातिअपनाम/अमानवीयता (जिसमे दलित उथ्थान के लिए उच्चतम स्तर पर प्रयास जारी हैं जिसकी परिणति में कम से कम उनको अपने समाज का प्रथम उथ्थान का कर्तव्य बनाता है उसके बाद ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनके अन्य व्युत्पन्न का उथ्थान करने का कर्तव्य आता है किन्तु उनको जातिवादी भी नहीं होना चाहिए) तो ऐसे में अन्य किसी जाति से तो पहले से मान्य है किन्तु कम से कम एक ईसाई(दलित) युवक से एक ब्राह्मण संतति का हिन्दू शास्त्रीय विधि से विवाह केवल और केवल अपरिहार्य कारणों में आता है उसको विशेष सामाजिक मान्यता और उसका महिमामण्डन मै किसी भी अवस्था में नहीं कर सकता हूँ और न तो ब्राह्मण समाज या हिन्दू समाज को हिन्दू शास्त्रीय विधि से विवाह मान्यकरने की सामर्थ्य रखता है क्योंकि भारतीय सामाजिक व्यवस्था और उसकी संस्कृति को सर्वोच्च बनाये रखने के लिए बहुतों द्वारा अभीष्ट त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम/साधना जारी है| अगर भारतीय संस्कृति और संस्कार को समाप्त मानकर अन्य संस्कृति का वर्चस्व स्वीकार भी कर लिया जाता है भारतीय समाज के बहुसंख्यक लोगों द्वारा उसमे भी किसी पर अपने निजी विचार संख्याबल:बाहुबल/धनबल/बुद्धिबल के आधार पर आप नहीं थोप सकते हैं|---------वर्तमान में कितनो ही चक्के पास हो किन्तु आपको केवल इतना बताना है की सायकिल के दो चक्के में से एक चक्के को समाप्त कर दिए जाने पर भी एक चक्के के बलपर मानवता हित में इसी प्रयागराज में अभीष्ठ सफलता प्राप्त हुई और अर्जुन और कृष्ण समेत सम्पूर्ण मानवता शिक्षा बाद गुरुदक्षिणा देती है किन्तु यह मानवता इतिहास में अप्रतिम संयोग था की किसी ने शिक्षा लेने से पहले ही गुरु दक्षिणा अर्पित किया अपने गुरु कुल को| तो समझियेगा की ऐसा व्यक्तित्व कौन हो सकता है जो प्रयागराज का भी बाप और इस विश्वमानवता का बाप रहा हो| तो ऐसा प्रयागराज के इतिहास में न कभी हुआ था और न होगा|
The 24 spokes of the Ashoka Chakra represent
1. Love
2. Courage
3. Patience
4. Peacefulness
5. Magnanimity
6. Goodness
7. Faithfulness
8. Gentleness
9. Selflessness
10. Self-Control
11. Self Sacrifice
12. Truthfulness
13. Righteousness
14. Justice
15. Mercy
16. Gracefulness
17. Humility
18. Empathy
19. Sympathy
20. Spiritual Knowledge
21. Moral Values
22. Spiritual Wisdom
23. The Fear of God
24. Faith or Belief or Hope>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

अवरोही/निम्न प्रवृत्ति है आपकी जिसके कारन सम्पूर्ण मानवता पीछे गयी और हर पहली गलती आप की तरफ से होती है तो ऐसे में या तो आप वर्तमान नैसर्गिक/प्राकृतिक नियम माने या अपने स्वार्थ्य में नैसर्गिक/प्राकृतिक नियम बदलवाने का सामाजिक दोष ग्रहण करें, जिसके लिए आप मेरे द्वारा बाध्य तो किये ही जाएंगे क्योंकि यह की मेरा नैसर्गिक अधिकार है कारण कि आप अभी तक नैसर्गिक नियम को अमान्य कर रहे हैं|

अवरोही/निम्न प्रवृत्ति है आपकी जिसके कारन सम्पूर्ण मानवता पीछे गयी और हर पहली गलती आप की तरफ से होती है तो ऐसे में या तो आप वर्तमान नैसर्गिक/प्राकृतिक नियम माने या अपने स्वार्थ्य में नैसर्गिक/प्राकृतिक नियम बदलवाने का सामाजिक दोष ग्रहण करें, जिसके लिए आप मेरे द्वारा बाध्य तो किये ही जाएंगे क्योंकि यह की मेरा नैसर्गिक अधिकार है कारण कि आप अभी तक नैसर्गिक नियम को अमान्य कर रहे हैं|>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

धार्मिक नहीं राजनैतिक इतिहास की दृष्टि से: सुभाष, तिलक और टैगोर तथा नेहरू, गांधी और पटेल शब्द किशी जबाने में जो गाँव रटता था और कालांतर जोशी, अटल और आडवाणी रटता था उस गाँव से हूँ जिस गाँव में धार्मिक दृष्टि से महेश, विष्णु और ब्रह्मा तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तर्ज पर रटा जाता था और और है भी समकालीन लोगों द्वारा तो उसे अब कोई और भी राजनैतिक पाठ पढ़ायेगा तो फिर उसी महेश, विष्णु और ब्रह्मा तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तर्ज पर रटेगा पर अभी समय लगेगा। और ये दो गाँव ऐसे हैं जहां एक के इष्टदेव (विष्णु आस्थावान) शिव दूसरे के इष्टदेवी (राम और रामा:सीता में आस्थावान) देवकाली (महासरस्वती + महालक्ष्मी+महागौरी) है और इसमें एक ननिहाल है मेरा दूसरा पैतृक गाँव।>>>>>>>>>>वरीयताक्रम: ब्रह्मा, विष्णु और महादेव(शिव:महेश)---प्रयागराज/त्रिवेणी:त्रि संगम:तीर्थराज/अल्लाह आबाद/इलाहाबाद/अल्लाह आवास/इला आवास/इला आबाद पर काशी/वाराणसी अनुसार वरीयताक्रम महादेव(शिव:महेश), विष्णु और ब्रह्मा है | किन्तु जैसा की देवों में आदिदेव महादेव शिव है और देवियों में आदिदेवी महादेवी सरस्वती है,विष्णु और लक्ष्मी काशी और प्रयागराज दोनों स्थान पर मध्यक्रम में विराजमान ब्रह्मा और शिव से सदा जुड़े रहते हैं तो इस प्रकार ब्रह्मा और सती:पार्वती:गौरी के छोटे होने के बावजूद सहयोगी अवस्था में तीनो का बराबर का महत्त्व है। >>>>>परंतु ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशिराज दक्ष प्रजापति ही हैं जिनकी पुत्री सती:पार्वती:गौरी से लेकर कश्यप से विवाहित अन्य सभी 13 कन्यायें है जिनसे सम्पूर्ण नारी जगत का प्रादुर्भाव हुआ है तो कहने का मतलब काशिराज दक्षप्रजापति ही सती:पार्वती:गौरी समेत सम्पूर्ण नारी जाति के मुख्य स्रोत हैं। काशी शंकर जी का प्रथम प्रकट स्थल और ससुराल दोनों होने से ही लोग कहते हैं की जब सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता महादेव जब अपनी ससुराल में ही रहते हैं तो अन्य लोग रहें तो क्या गलत है? (टिप्पणी: शिव का प्रादुर्भाव पहले हुआ और उसके बाद विष्णु का और तब ब्रह्मा का पर सहयोगी अवस्था में सब बरावर का महत्त्व रखते है तो किशी को विशेषाधिकार नहीं की दो लोग मिलकर तीसरे को नकार दें।>>.जब अवस्था ऐसी आ चुकी है की कोई त्रिफला (बेलपत्र: त्रिशक्ति सम्पन्न:मतलब महासरस्वती +महालक्ष्मी+महागौरी तीनो मतलब देवकाली की सक्ति से सम्पन्न) तीनो शक्तियां धारण कर चुका है तो उसे दुनिया का हर पुट/सम्पुट और ज्ञान पता हो चुका है तो ऐसे में वह अकेले में ही सर्वशक्तिमान रह चुका है तो उसे घेर कर कोई उसका क्या कर सकता है? हां वह अपना क्षरण/ह्रास, काल और नास अपने आप बुला एकता है इसके शिवा और कुछ नहीं कर सकता वह ?)

धार्मिक नहीं राजनैतिक इतिहास की दृष्टि से: सुभाष, तिलक और टैगोर तथा नेहरू, गांधी और पटेल शब्द किशी जबाने में जो गाँव रटता था और कालांतर जोशी, अटल और आडवाणी रटता था उस गाँव से हूँ जिस गाँव में धार्मिक दृष्टि से महेश, विष्णु और ब्रह्मा तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तर्ज पर रटा जाता था और और है भी समकालीन लोगों द्वारा तो उसे अब कोई और भी राजनैतिक पाठ पढ़ायेगा तो फिर उसी महेश, विष्णु और ब्रह्मा तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तर्ज पर रटेगा पर अभी समय लगेगा। और ये दो गाँव ऐसे हैं जहां एक के इष्टदेव (विष्णु आस्थावान) शिव दूसरे के इष्टदेवी (राम और रामा:सीता में आस्थावान) देवकाली (महासरस्वती + महालक्ष्मी+महागौरी) है और इसमें एक ननिहाल है मेरा दूसरा पैतृक गाँव।>>>>>>>>>>वरीयताक्रम: ब्रह्मा, विष्णु और महादेव(शिव:महेश)---प्रयागराज/त्रिवेणी:त्रि संगम:तीर्थराज/अल्लाह आबाद/इलाहाबाद/अल्लाह आवास/इला आवास/इला आबाद पर काशी/वाराणसी अनुसार वरीयताक्रम महादेव(शिव:महेश), विष्णु और ब्रह्मा है | किन्तु जैसा की देवों में आदिदेव महादेव शिव है और देवियों में आदिदेवी महादेवी सरस्वती है,विष्णु और लक्ष्मी काशी और प्रयागराज दोनों स्थान पर मध्यक्रम में विराजमान ब्रह्मा और शिव से सदा जुड़े रहते हैं तो इस प्रकार ब्रह्मा और सती:पार्वती:गौरी के छोटे होने के बावजूद सहयोगी अवस्था में तीनो का बराबर का महत्त्व है। >>>>>परंतु ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशिराज दक्ष प्रजापति ही हैं जिनकी पुत्री सती:पार्वती:गौरी से लेकर कश्यप से विवाहित अन्य सभी 13 कन्यायें है जिनसे सम्पूर्ण नारी जगत का प्रादुर्भाव हुआ है तो कहने का मतलब काशिराज दक्षप्रजापति ही सती:पार्वती:गौरी समेत सम्पूर्ण नारी जाति के मुख्य स्रोत हैं। काशी शंकर जी का प्रथम प्रकट स्थल और ससुराल दोनों होने से ही लोग कहते हैं की जब सनातन धर्म के सबसे बड़े देवता महादेव जब अपनी ससुराल में ही रहते हैं तो अन्य लोग रहें तो क्या गलत है? (टिप्पणी: शिव का प्रादुर्भाव पहले हुआ और उसके बाद विष्णु का और तब ब्रह्मा का पर सहयोगी अवस्था में सब बरावर का महत्त्व रखते है तो किशी को विशेषाधिकार नहीं की दो लोग मिलकर तीसरे को नकार दें।>>.जब अवस्था ऐसी आ चुकी है की कोई त्रिफला (बेलपत्र: त्रिशक्ति सम्पन्न:मतलब महासरस्वती +महालक्ष्मी+महागौरी तीनो मतलब देवकाली की सक्ति से सम्पन्न) तीनो शक्तियां धारण कर चुका है तो उसे दुनिया का हर पुट/सम्पुट और ज्ञान पता हो चुका है तो ऐसे में वह अकेले में ही सर्वशक्तिमान रह चुका है तो उसे घेर कर कोई उसका क्या कर सकता है? हां वह अपना क्षरण/ह्रास, काल और नास अपने आप बुला एकता है इसके शिवा और कुछ नहीं कर सकता वह ?) >>>>>>>विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| >>****** जय हिन्द(जम्बूद्वीप=यूरेशिया =यूरोप+एशिया या कम से कम ईरान से सिंगापूर और कश्मीर से कन्याकुमारी , जय भारत(अखंड भारत=भरतखंड), जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।

जो लोग रूप-रंग के आधार पर भारतीय सत्ता पर अपना हक़ बिना श्रेष्ठ कर्तव्य किये हुए जताते है उनका भरम दूर करने हेतु>>>> "कर्पूरगौरम करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारम। सदा वसंतं हृदया रविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामी। इस संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व और सबसे गोरा व्यक्तित्व जिसकी की गौर वर्ण के शिवा कोई अन्य परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है ऐसा गोरा व्यक्ति स्वयं काशी की भूमि को महाजल प्रलय के उपरांत सबसे पहले सबसे ऊपर (जल सतह से ऊपर) लेकर प्रकट हुआ और इस व्यक्तित्व मतलब सांसारिक व्यक्ति को आदिशकंर=आद्यशंकर=केदारेश्वर (+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) और अन्य-अन्य नामों से जानते है और इनको महादेव मतलब त्रिदेवों में सबसे बड़ा देवता या महेश कहे जाते है तो ऐसे भगवान् चंद्रशेखर:सारंगधर भोले शिव शंकर जो काशी ही नहीं इस संसार के आदिवाशी है उनके बारे में विदेशी इतिहास प्रकाशकों, भारतीय प्रकासको और इतिहासकारों और छद्म राजनीतिकारों का क्या मत है जो रूप-रंग के आधार पर हम जैसे लोगों मतलब आर्यों को विदेशी बना देने की राजनैतिक निकृष्ट चाल में प्रत्यक्ष और परोक्ष निशि-वासर लगे रहते हैं अपनी आदि से लेकर अंत तक के जिंदगी में पीढी दर पीढी बहाने अपना उल्लू सीधा करते हुए द्रविण राजनीती की कुचाल को धार देते हुए निम्ममार्गी द्रविण संस्कृति वालों के प्रभुत्व का विस्तार करते जा रहे हैं? और इसके साथ ही साथ अयोध्या में जन्म लिए राम और मथुरा में जन्म लिए कृष्ण भी आर्य थे जो हजारो-हजारों वर्ष पूर्व का मानवजीवन का इतिहास है जब इस्लामियत और ईसाइयत भी नहीं जन्म ले पाए थे तो इन श्यामलगात वालों के आर्य होने पर आप को कोई संदेह है क्या या इसे भी अदालत में आप ले जाएंगे की ये परमब्रह्म स्वरुप भी आर्य नहीं थे जिस तरह से इनके जन्मभूमि के निर्धारण कार्य को भी अदालत में डाल दिए हैं आप लोग? >>>> अगर मेरी तरह सायकिल का एक चक्का हमेशा निकाल लिए जाने के बावजूद रेस जीत लेना सीख लेंगे मेरे दोनों/तीनो राजनैतिक बड़े/छोटे भाई तो सर्वोच्च सत्ता एक दिन उनके हाँथ में अवश्य होगी और अंतरराष्ट्रीय हनक भी उनको हांसिल होगी। >>>>>>>>>>बात भगवा:डॉन (1 ) से 3 (तिरंगा) और 3 से 5 (पाण्डव: अंजुली) व्यवस्था की हो या की फिर सामाजिक रूप से उस तिरंगा के केंद्र में अवस्थिति 1 (केंद्र:डॉन:भगवा) से 7 (सप्तर्षि) की हो और फिर 7 से 7+1= 8 अष्टक ऋषि की और फिर आठों से हर 1 के 3 और इस प्रकार 24 (अशोकचक्र/समयचक्र/कालचक्र/धर्म चक्र की हो जिसके धारणकर्ता सच्चिदानंदघन भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् शिव हों) व्यवस्था की हो मतलब उस 24 और इसके केंद्र::डॉन:भगवा को लेकर 25 की या फिर केवल एक मतलब केवल डॉन (भगवा) व्यवस्था की हो या फिर एक केंद्र:भगवा:डॉन (1) से सुदर्शन चक्र के 108 आरियों सरीखे विश्व मानवजीवन के सम्पूर्ण 108 गोत्र व्यवस्था की इन सभी में "सत्यमेव जयते" से किशी भी प्रकार छूट नहीं मिलनी है और जब सामाजिक सत्यता के आधार पर हम अपना अधिकार इस सामाजिक व्यवस्था के तहत मौजूद संशाधनो पर जताते हैं तो फिर हमें कर्तव्य स्वरुप सामाजिक नियमों का पालन करना ही होगा और अगर आप नहीं करते हैं ऐसा तो फिर अशोकचक्र/समयचक्र/कालचक्र/धर्म चक्र की हो जिसके धारणकर्ता सच्चिदानंदघन भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् शिव हों वह आप से "सत्यमेव जयते" का पालन करवाकर ही रहेगा उसके लिए भौगोलिक सीमा कोई बाध्यता नहीं बना पायेगी इसके लिए समाज के अन्य लोगों के जीवन में भले न आये पर आपके अपने जीवन में आपकी अपनी आत्मा हेतु भीषण संहारक ताण्डव अवस्था अवश्य लाएगा। तो कम से कम जिस सामाजिक व्यवस्था के कारन आपने कोई अधिकार इस समाज से प्राप्त किये हैं तो उसी सामाजिक व्यवस्था के लिए अपने कर्तव्य को और अधिकार को भी संतुलित करने का प्रयास कीजिये क्योंकि जो सभ्य सामाजिक व्यवस्था आप देख रहे हैं और सांस्कृतिक रूप से अपने को इस संसार में सर्वोच्च प् रहे हैं वह आज के दिन भी न जाने कितने अत्यंत सज्जनतायुक्त आम जनता में पाए जाने वाले राम/कृष्ण और सीता/राधा/रुक्मिणी के अपने अनन्य जीवन कौसल और सदाचार तथा त्याग, तप और बलिदान के परिणाम स्वरुप बना हुआ है बहुतायत व्यवस्था भले ही विगाड़ गयी हो। रासलीला आध्यात्मिक है इसे भौतिक जीवन को भी न जी पाने वाले आप सामान्य जन उसी अवस्था में कल्पना कर सकते है जिसमे आपने पूर्ण सामाजिक हित हेतु जीवन को स्वीकार किया हो अन्यथा भौतिक देहसुख को आप रासलीला का नाम दे इस रासलीला शब्द को शर्मसार न करें और न इसका अनुचित लाभ उठाये और अगर उठाते हैं तो फिर उसके भुगतान को तैयार रहें। सामाजिक न्याय होना चाहिए पर देश, काल और परिस्थिति के अनुसार और जब एक दो वर्ष में ही बनी बनायी बुनियादी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जा रही है तो फिर सामाजिक न्याय का क्या स्वरुप होगा इस प्रश्न पर गहन विचार होना चाहिए और इस सामाजिक न्याय को पाने वाला यदि कीचक, दुशासन, रावण और दुर्योधन बनेगा तो उसका निराकरण तो किया ही जाएगा उसके लिए संख्यबल की जरूरत नहीं पड़ती है जिस तरह से कृष्ण और राम तो अकेले युद्ध जीत सकते थे पर कुछ संख्या तो लोकानुकरण हेतु जुताई थी तो अल्पमात्र संख्या ही कीचक, दुशासन, रावण और दुर्योधन के संहार और उद्धार हेतु ही काफी है। >>>>>>>>>>> अब भी मूर्धन्य पंडित जी लोगों के समझ में आ जाय की जो राम/कृष्ण(परमब्रह्म:ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश) हो चुका हो वह पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य अपने आप हो चुका है और जब पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य हो चुका है तो फिर इस तीन और इनके व्युत्पन्न से जनित पाँच:- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लामिक और इसायते सबका प्रतिनिधि हो चुका है और प्रकार समाज के हर अंग का प्रतिनिधि हो चुका है पूर्ण सनातन ब्राह्मण (+ पूर्ण सनातन क्षत्रिय और पूर्ण सनातन वैश्य) ही रहते हुए।>>>>>>>> राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>>>>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|

जो लोग रूप-रंग के आधार पर भारतीय सत्ता पर अपना हक़ बिना श्रेष्ठ कर्तव्य किये हुए जताते है उनका भरम दूर करने हेतु>>>> "कर्पूरगौरम करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्र हारम। सदा वसंतं हृदया रविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामी। इस संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व और सबसे गोरा व्यक्तित्व जिसकी की गौर वर्ण के शिवा कोई अन्य परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है ऐसा गोरा व्यक्ति स्वयं काशी की भूमि को महाजल प्रलय के उपरांत सबसे पहले सबसे ऊपर (जल सतह से ऊपर) लेकर प्रकट हुआ और इस व्यक्तित्व मतलब सांसारिक व्यक्ति को आदिशकंर=आद्यशंकर=केदारेश्वर (+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) और अन्य-अन्य नामों से जानते है और इनको महादेव मतलब त्रिदेवों में सबसे बड़ा देवता या महेश कहे जाते है तो ऐसे भगवान् चंद्रशेखर:सारंगधर भोले शिव शंकर जो काशी ही नहीं इस संसार के आदिवाशी है उनके बारे में विदेशी इतिहास प्रकाशकों, भारतीय प्रकासको और इतिहासकारों और छद्म राजनीतिकारों का क्या मत है जो रूप-रंग के आधार पर हम जैसे लोगों मतलब आर्यों को विदेशी बना देने की राजनैतिक निकृष्ट चाल में प्रत्यक्ष और परोक्ष निशि-वासर लगे रहते हैं अपनी आदि से लेकर अंत तक के जिंदगी में पीढी दर पीढी बहाने अपना उल्लू सीधा करते हुए द्रविण राजनीती की कुचाल को धार देते हुए निम्ममार्गी द्रविण संस्कृति वालों के प्रभुत्व का विस्तार करते जा रहे हैं? और इसके साथ ही साथ अयोध्या में जन्म लिए राम और मथुरा में जन्म लिए कृष्ण भी आर्य थे जो हजारो-हजारों वर्ष पूर्व का मानवजीवन का इतिहास है जब इस्लामियत और ईसाइयत भी नहीं जन्म ले पाए थे तो इन श्यामलगात वालों के आर्य होने पर आप को कोई संदेह है क्या या इसे भी अदालत में आप ले जाएंगे की ये परमब्रह्म स्वरुप भी आर्य नहीं थे जिस तरह से इनके जन्मभूमि के निर्धारण कार्य को भी अदालत में डाल दिए हैं आप लोग? >>>> अगर मेरी तरह सायकिल का एक चक्का हमेशा निकाल लिए जाने के बावजूद रेस जीत लेना सीख लेंगे मेरे दोनों/तीनो राजनैतिक बड़े/छोटे भाई तो सर्वोच्च सत्ता एक दिन उनके हाँथ में अवश्य होगी और अंतरराष्ट्रीय हनक भी उनको हांसिल होगी। >>>>>>>>>>बात भगवा:डॉन (1 ) से 3 (तिरंगा) और 3 से 5 (पाण्डव: अंजुली) व्यवस्था की हो या की फिर सामाजिक रूप से उस तिरंगा के केंद्र में अवस्थिति 1 (केंद्र:डॉन:भगवा) से 7 (सप्तर्षि) की हो और फिर 7 से 7+1= 8 अष्टक ऋषि की और फिर आठों से हर 1 के 3 और इस प्रकार 24 (अशोकचक्र/समयचक्र/कालचक्र/धर्म चक्र की हो जिसके धारणकर्ता सच्चिदानंदघन भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् शिव हों) व्यवस्था की हो मतलब उस 24 और इसके केंद्र::डॉन:भगवा को लेकर 25 की या फिर केवल एक मतलब केवल डॉन (भगवा) व्यवस्था की हो या फिर एक केंद्र:भगवा:डॉन (1) से सुदर्शन चक्र के 108 आरियों सरीखे विश्व मानवजीवन के सम्पूर्ण 108 गोत्र व्यवस्था की इन सभी में "सत्यमेव जयते" से किशी भी प्रकार छूट नहीं मिलनी है और जब सामाजिक सत्यता के आधार पर हम अपना अधिकार इस सामाजिक व्यवस्था के तहत मौजूद संशाधनो पर जताते हैं तो फिर हमें कर्तव्य स्वरुप सामाजिक नियमों का पालन करना ही होगा और अगर आप नहीं करते हैं ऐसा तो फिर अशोकचक्र/समयचक्र/कालचक्र/धर्म चक्र की हो जिसके धारणकर्ता सच्चिदानंदघन भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् शिव हों वह आप से "सत्यमेव जयते" का पालन करवाकर ही रहेगा उसके लिए भौगोलिक सीमा कोई बाध्यता नहीं बना पायेगी इसके लिए समाज के अन्य लोगों के जीवन में भले न आये पर आपके अपने जीवन में आपकी अपनी आत्मा हेतु भीषण संहारक ताण्डव अवस्था अवश्य लाएगा। तो कम से कम जिस सामाजिक व्यवस्था के कारन आपने कोई अधिकार इस समाज से प्राप्त किये हैं तो उसी सामाजिक व्यवस्था के लिए अपने कर्तव्य को और अधिकार को भी संतुलित करने का प्रयास कीजिये क्योंकि जो सभ्य सामाजिक व्यवस्था आप देख रहे हैं और सांस्कृतिक रूप से अपने को इस संसार में सर्वोच्च प् रहे हैं वह आज के दिन भी न जाने कितने अत्यंत सज्जनतायुक्त आम जनता में पाए जाने वाले राम/कृष्ण और सीता/राधा/रुक्मिणी के अपने अनन्य जीवन कौसल और सदाचार तथा त्याग, तप और बलिदान के परिणाम स्वरुप बना हुआ है बहुतायत व्यवस्था भले ही विगाड़ गयी हो। रासलीला आध्यात्मिक है इसे भौतिक जीवन को भी न जी पाने वाले आप सामान्य जन उसी अवस्था में कल्पना कर सकते है जिसमे आपने पूर्ण सामाजिक हित हेतु जीवन को स्वीकार किया हो अन्यथा भौतिक देहसुख को आप रासलीला का नाम दे इस रासलीला शब्द को शर्मसार न करें और न इसका अनुचित लाभ उठाये और अगर उठाते हैं तो फिर उसके भुगतान को तैयार रहें। सामाजिक न्याय होना चाहिए पर देश, काल और परिस्थिति के अनुसार और जब एक दो वर्ष में ही बनी बनायी बुनियादी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जा रही है तो फिर सामाजिक न्याय का क्या स्वरुप होगा इस प्रश्न पर गहन विचार होना चाहिए और इस सामाजिक न्याय को पाने वाला यदि कीचक, दुशासन, रावण और दुर्योधन बनेगा तो उसका निराकरण तो किया ही जाएगा उसके लिए संख्यबल की जरूरत नहीं पड़ती है जिस तरह से कृष्ण और राम तो अकेले युद्ध जीत सकते थे पर कुछ संख्या तो लोकानुकरण हेतु जुताई थी तो अल्पमात्र संख्या ही कीचक, दुशासन, रावण और दुर्योधन के संहार और उद्धार हेतु ही काफी है। >>>>>>>>>>> अब भी मूर्धन्य पंडित जी लोगों के समझ में आ जाय की जो राम/कृष्ण(परमब्रह्म:ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश) हो चुका हो वह पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य अपने आप हो चुका है और जब पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य हो चुका है तो फिर इस तीन और इनके व्युत्पन्न से जनित पाँच:- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लामिक और इसायते सबका प्रतिनिधि हो चुका है और प्रकार समाज के हर अंग का प्रतिनिधि हो चुका है पूर्ण सनातन ब्राह्मण (+ पूर्ण सनातन क्षत्रिय और पूर्ण सनातन वैश्य) ही रहते हुए।>>>>>>>> राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>>>>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| >>****** जय हिन्द(जम्बूद्वीप=यूरेशिया =यूरोप+एशिया या कम से कम ईरान से सिंगापूर और कश्मीर से कन्याकुमारी , जय भारत(अखंड भारत=भरतखंड), जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।>>>>>>>>>>>>
जो स्वयं परमब्रह=ब्रह्म है वह ब्रह्मा से भी बड़ा ब्राह्मण है की नहीं? अतः विश्व का सबसे बड़े ब्राह्मण ब्रह्मा नहीं हैं परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) हैं जिसे आप ब्रह्म कहते है तथा जिससे ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी सृजन होता है और उस अवस्था को सशरीर प्राप्त कर सकने वाले आज तक केवल भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण ही हुए है और दोनों अस्त्रधारी हैं तो शंख, चक्र, पद्म(कमल), गदाधारी हमारा भगवान विष्णु स्वयं धनुर्धारी तथा सुदर्शन चक्रधारी होते हुए भी निरस्त्र सशरीर परमब्रह्म=ब्रह्म की अवस्था को प्राप्त हुए। मतलब श्रेष्ठतम कार्य त्याग और उपदेश के समय अस्त्र-सत्र धारी होते हुए उसका उपयोग नहीं किया वह अवस्था थी राजधर्म की मर्यादा हेतु भी प्रेम और सत्य की परिक्षा में उत्तीर्ण श्रीसीता का भी त्याग; अन्नय और श्रेष्ठतम प्रिय श्रीराधा का त्यागकर कंश वध हेतु जाना और महाभारत में समय को शून्य कर अर्जुन को उपदेश। इन सबमें क्या सस्त्र का उपयोग हुआ था? लेकिन जब शत्रु सामने खड़ा हो ललकारे तो गौतम बुध बन उसकी पूजा की जाय? तो रावण और कंश के साथ वह ही किया गया जो उचित था।
जो स्वयं परमब्रह=ब्रह्म है वह ब्रह्मा से भी बड़ा ब्राह्मण है की नहीं? अतः विश्व का सबसे बड़े ब्राह्मण ब्रह्मा नहीं हैं परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) हैं जिसे आप ब्रह्म कहते है तथा जिससे ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी सृजन होता है और उस अवस्था को सशरीर प्राप्त कर सकने वाले आज तक केवल भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण ही हुए है और दोनों अस्त्रधारी हैं तो शंख, चक्र, पद्म(कमल), गदाधारी हमारा भगवान विष्णु स्वयं धनुर्धारी तथा सुदर्शन चक्रधारी होते हुए भी निरस्त्र सशरीर परमब्रह्म=ब्रह्म की अवस्था को प्राप्त हुए। मतलब श्रेष्ठतम कार्य त्याग और उपदेश के समय अस्त्र-सत्र धारी होते हुए उसका उपयोग नहीं किया वह अवस्था थी राजधर्म की मर्यादा हेतु भी प्रेम और सत्य की परिक्षा में उत्तीर्ण श्रीसीता का भी त्याग; अन्नय और श्रेष्ठतम प्रिय श्रीराधा का त्यागकर कंश वध हेतु जाना और महाभारत में समय को शून्य कर अर्जुन को उपदेश। इन सबमें क्या सस्त्र का उपयोग हुआ था? लेकिन जब शत्रु सामने खड़ा हो ललकारे तो गौतम बुध बन उसकी पूजा की जाय? तो रावण और कंश के साथ वह ही किया गया जो उचित था।

Tuesday, November 14, 2017

PARAMBRAHM (1)>3(TRIDEV=BRAHMA+VISHNU +MAHESH)> 7 (SAPTARSHI=KASHYAP+GAUTAM+ VASHISHTHA+ANGIRAS+BHRIGU+ATRI+KAUSHIK(Vishvamitra))+1(AGASATYA:KUMBHAJ)=8X3=24 (24 Standard Rishi of Ashoka Chakra/Kal Chakra/Dharm Chakra/Samay Chakra>108(108 Rishi equal in number of 108 core of Sudarshan Chakra)| -------------कश्यप पुत्र वरुण के पुत्र मतलब कश्यप के पौत्र बाल्मीकि के शिष्य आंगिरस पुत्र भरद्वाज के शिष्य, गर्ग जी (+ वशिष्ठ वंसज शांडिल्य; तथा गौतम) व् उनके कुत्सित स्वार्थ की प्राप्ति हेतु उनसे लिप्त स्वार्थीजन व् सहयोगीजन शायद अब इस सम्बोधन से आप समझ गए होंगे आप परोक्ष मेरे भी शिष्य परम्परा में आते हैं ! रावणवध के बाद अपने अश्वमेध यज्ञ में भारद्वाज के प्रतिनिधि के तौर पर आपके शामिल होने के बाद आपका महिमा मण्डन रघुवंशी/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय श्रीराम ने किया था, किन्तु आप तब से लेकर आज तक आप अपने कर्तव्य और आचरण से विधिवत परिचित होंगे तो आप को यह परिणाम भी स्वीकार होगा की सांसारिक/भौतिक रूप से सभी संभव विधि, सिद्धांत और यम-नियम से प्रयागराज में मानवता के परमलक्ष्य की प्राप्ति की तिथि 30 नवम्बर, 2016 के बाद से ऋषि/गोत्र/ऋषि क्लान 3/13 के स्थान पर 7/24/108 की व्यवस्था पुनः बहाल कर दी गयी है| आप अपने कर्तव्य और आचरण का पुनर्मूल्यांकन करें| मैंने अपनी लेखनी बंद करने को कहा था पर अनाधृकित दबाव में पुनः लेखनी उठानी पडी और इसे बंद करना और उठाना जारी रखूंगा जब जब मानवता के हित पर चोट और मानवता के रक्षकों पर अनधिकृत वैश्विक व् स्थानीय दबाव बढ़ेगा|

PARAMBRAHM (1)>3(TRIDEV=BRAHMA+VISHNU +MAHESH)> 7 (SAPTARSHI=KASHYAP+GAUTAM+ VASHISHTHA+ANGIRAS+BHRIGU+ATRI+KAUSHIK(Vishvamitra))+1(AGASATYA:KUMBHAJ)=8X3=24 (24 Standard Rishi of Ashoka Chakra/Kal Chakra/Dharm Chakra/Samay Chakra>108(108 Rishi equal in number of 108 core of Sudarshan Chakra)| -------------कश्यप पुत्र वरुण के पुत्र मतलब कश्यप के पौत्र बाल्मीकि के शिष्य आंगिरस पुत्र भरद्वाज के शिष्य, गर्ग जी (+ वशिष्ठ वंसज शांडिल्य; तथा गौतम) व् उनके कुत्सित स्वार्थ की प्राप्ति हेतु उनसे लिप्त स्वार्थीजन व् सहयोगीजन शायद अब इस सम्बोधन से आप समझ गए होंगे आप परोक्ष मेरे भी शिष्य परम्परा में आते हैं ! रावणवध के बाद अपने अश्वमेध यज्ञ में भारद्वाज के प्रतिनिधि के तौर पर आपके शामिल होने के बाद आपका महिमा मण्डन रघुवंशी/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय श्रीराम ने किया था, किन्तु आप तब से लेकर आज तक आप अपने कर्तव्य और आचरण से विधिवत परिचित होंगे तो आप को यह परिणाम भी स्वीकार होगा की सांसारिक/भौतिक रूप से सभी संभव विधि, सिद्धांत और यम-नियम से प्रयागराज में मानवता के परमलक्ष्य की प्राप्ति की तिथि 30 नवम्बर, 2016 के बाद से ऋषि/गोत्र/ऋषि क्लान 3/13 के स्थान पर 7/24/108 की व्यवस्था पुनः बहाल कर दी गयी है| आप अपने कर्तव्य और आचरण का पुनर्मूल्यांकन करें| मैंने अपनी लेखनी बंद करने को कहा था पर अनाधृकित दबाव में पुनः लेखनी उठानी पडी और इसे बंद करना और उठाना जारी रखूंगा जब जब मानवता के हित पर चोट और मानवता के रक्षकों पर अनधिकृत वैश्विक व् स्थानीय दबाव बढ़ेगा| >>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

भगवाध्वज के सम्मान में कही भी जाना हो जाऊंगा किन्तु किस रूप-रँग का व्यक्ति कोई संगठन खड़ा किया है उसकी गुलामी करूंगा तो यह भूल जाइये और पुनः सुनलीजिये की मै बिशुनपुर-223103 अपने गुरुकुल, रामानन्द की मूल भूमि पर रामानन्द के व्यावहारिक चरित्र के भी आचरण करने वाले अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु द्वारा ही स्वैक्षिक रूप से नियंत्रित होता हूँ और उन्ही की ही छाया में अपने को समझता हूँ जैसे की प्रतीक रूप में गुरु भगवाध्वज की छाया में और प्रतीक गुरु भगवाध्वज से नियन्त्रिय होता हूँ मतलब स्वनियंत्रित हूँ|

भगवाध्वज के सम्मान में कही भी जाना हो जाऊंगा किन्तु किस रूप-रँग का व्यक्ति कोई संगठन खड़ा किया है उसकी गुलामी करूंगा तो यह भूल जाइये और पुनः सुनलीजिये की मै बिशुनपुर-223103 अपने गुरुकुल, रामानन्द की मूल भूमि पर रामानन्द के व्यावहारिक चरित्र के भी आचरण करने वाले अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु द्वारा ही स्वैक्षिक रूप से नियंत्रित होता हूँ और उन्ही की ही छाया में अपने को समझता हूँ जैसे की प्रतीक रूप में गुरु भगवाध्वज की छाया में और प्रतीक गुरु भगवाध्वज से नियन्त्रिय होता हूँ मतलब स्वनियंत्रित हूँ|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|