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Friday, February 28, 2014

अतः जितनी जिम्मेदारी किशी ब्राह्मण कि है उससे कुछ कम नहीं होती है इन दोनों कश्यप और अदिति के पुत्र कश्यप गोत्रियों(सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय और चद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय) की इस श्रिष्टि को सुचारुरूप से संचालित करने की। जय हिन्द(जम्बू द्वीप: ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भरतखंड+अखंड भारत), जय श्रीराम/सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय, जय श्रीक़ृष्ण/चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णिवंशीय।

अतः जितनी जिम्मेदारी किशी ब्राह्मण कि है उससे कुछ कम नहीं होती है इन दोनों कश्यप और अदिति के पुत्र कश्यप गोत्रियों(सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय और चद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय) की इस श्रिष्टि को सुचारुरूप से संचालित करने की। जय हिन्द(जम्बू द्वीप: ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भरतखंड+अखंड भारत), जय श्रीराम/सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय, जय श्रीक़ृष्ण/चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णिवंशीय।   

चन्द्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय और सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय सहित सभी क्षत्रिय समाज भाई-भाई हैं और एक ही पीता आदित्य कि संतान हैं जो स्वयं कश्यपऋषि और उनकी पत्नी अदिति कि संतान आदित्य कहलाते हैं। कश्यप ऋषि(मनु-दशरथ-वसुदेव ) सप्तर्षियों में आते हैं वर्त्तमान ऋषियुग में और ब्रह्मा कि मानस संतान हुए जो प्रयाग(प्राक-यज्ञ: सप्तर्षियों के प्रकट होने का प्रक्रिश्ठायज्ञ का स्थान) जो ब्रह्मा त्रिदेव/त्रिमूर्ति में आते है और ये त्रिदेव क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश अपने दायिनी, प्रजापालक और मोक्ष दायिनी/संघारक/रक्षक शक्तियों से पहचाने जाते हैं । और यह परमब्रह्म, परमेश्वर, परमात्मा, ईस्वर और अल्लाह नाम से जाने जाते हैं। और यही परमब्रह्म कि शक्ति त्रिदेव में और त्रिदेव कि शक्ति सप्तर्षियों और २४ ऋषिओं में समाहित है। -----------AUR YADI YAH BHEE VIDIT HAI KI PARASHURAM AUR DURVASHAA DODON KAA ANT KIYE THE, TO YAH BHEE SATYA HAI KI VE BRAHMAN THE, AUR YAH BHEE SATY HAI KI BRAHMAN SAMAAJ NE HEE PUNAH YADUVANSHEE AUR SHOORYA VANSHEEY KASHTIYON KAA PUNAH PRADURBHAAV IS JAGAT ME KIYAA.----------------------------------------------------------------अतः जितनी जिम्मेदारी किशी ब्राह्मण कि है उससे कुछ कम नहीं होती है इन दोनों कश्यप और अदिति के पुत्र कश्यप गोत्रियों(सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय और चद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय) की इस श्रिष्टि को सुचारुरूप से संचालित करने की। जय हिन्द(जम्बू द्वीप: ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भरतखंड+अखंड भारत), जय श्रीराम/सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय, जय श्रीक़ृष्ण/चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णिवंशीय।

चन्द्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय और सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय सहित सभी क्षत्रिय समाज भाई-भाई हैं और एक ही पीता आदित्य कि संतान हैं जो स्वयं कश्यपऋषि और उनकी पत्नी अदिति कि संतान  आदित्य कहलाते हैं। कश्यप ऋषि(मनु-दशरथ-वसुदेव )  सप्तर्षियों में आते हैं वर्त्तमान ऋषियुग में और ब्रह्मा कि मानस संतान हुए जो प्रयाग(प्राक-यज्ञ: सप्तर्षियों के प्रकट होने का प्रक्रिश्ठायज्ञ का स्थान) जो ब्रह्मा त्रिदेव/त्रिमूर्ति में आते है  और ये त्रिदेव क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश अपने  दायिनी, प्रजापालक और मोक्ष दायिनी/संघारक/रक्षक शक्तियों से पहचाने जाते हैं ।  और यह परमब्रह्म, परमेश्वर, परमात्मा, ईस्वर और अल्लाह नाम से जाने जाते हैं। और यही परमब्रह्म कि शक्ति त्रिदेव में और त्रिदेव कि शक्ति सप्तर्षियों और २४ ऋषिओं में समाहित है। -----------AUR YADI YAH BHEE VIDIT HAI KI PARASHURAM AUR DURVASHAA DODON KAA ANT KIYE THE, TO YAH BHEE SATYA HAI KI VE BRAHMAN THE, AUR YAH BHEE SATY HAI KI BRAHMAN SAMAAJ NE HEE PUNAH YADUVANSHEE AUR SHOORYA VANSHEEY KASHTIYON KAA PUNAH PRADURBHAAV IS JAGAT ME KIYAA.----------------------------------------------------------------अतः जितनी जिम्मेदारी किशी ब्राह्मण कि है उससे कुछ कम नहीं होती है इन दोनों कश्यप और अदिति के पुत्र कश्यप गोत्रियों(सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय और चद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णि वंशीय) की इस श्रिष्टि को सुचारुरूप से संचालित करने की। जय हिन्द(जम्बू द्वीप: ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भरतखंड+अखंड भारत), जय श्रीराम/सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंशीय/रघुवंशीय, जय श्रीक़ृष्ण/चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/वृष्णिवंशीय।

अर्जुन को उपदेश श्रीमद्भागवत गीता का जो संग्रह है उसमे चरों वेदों और प्रमानिंक सनातन ग्रंथों का संग्रह है पर गंगापुत्र भीष्मपितामह ने उनको पांचवा वेद पढ़ाने को मजबूर किया था और इस प्रकार भीष्म प्रतिज्ञा पूरी भी हुई लेकिन कृष्ण को भी इसी बीच अपने को परमब्रह्म होने का एहशास हुआ और भीष्मपितामह को दिया हुआ इक्षामृत्यु का वरदान भी ज्ञात हुआ (वैसे भी परमब्रह्म अपने ही भक्त कि जान स्वयं कैसे ही ले सकता था)। ---------AISE SHRIKRISHN PARAMBRAHM SHRIKRISHN THE JO BRAHMA KAA GYAAN AUR VISHNU KAA SAMANVAY AUR SHIV KI SHAKTI AUR KALYAAN BHAVNAA SE PARIPOORN DHARM DWAJ THAAME HANUMAAN/AMBAVAADEKAR KO SAYAHATAA DE RAHE THE DHARM KI SATHAAPANAA ME SWAYAM DHARMRAAJ YUDHISTHIR KE NETRITVA ME ARJUN JAISE MAHARATHEE KE SAATH.

अर्जुन को उपदेश श्रीमद्भागवत गीता का जो संग्रह है उसमे चरों वेदों और प्रमानिंक सनातन ग्रंथों का संग्रह है पर गंगापुत्र भीष्मपितामह ने उनको पांचवा वेद पढ़ाने को मजबूर किया था और इस प्रकार भीष्म प्रतिज्ञा पूरी भी हुई लेकिन कृष्ण को भी इसी बीच अपने को परमब्रह्म होने का एहशास हुआ और भीष्मपितामह को दिया हुआ इक्षामृत्यु का वरदान भी ज्ञात हुआ (वैसे भी परमब्रह्म अपने ही भक्त कि जान स्वयं कैसे ही ले सकता था)। ---------AISE SHRIKRISHN PARAMBRAHM SHRIKRISHN THE JO BRAHMA KAA GYAAN AUR VISHNU KAA SAMANVAY AUR SHIV KI SHAKTI AUR KALYAAN BHAVNAA SE PARIPOORN DHARM DWAJ THAAME HANUMAAN/AMBAVAADEKAR KO SAYAHATAA DE RAHE THE DHARM KI SATHAAPANAA ME SWAYAM DHARMRAAJ YUDHISTHIR KE NETRITVA ME ARJUN JAISE MAHARATHEE KE SAATH.

परशुराम और दुर्वाशा को याद कीजिये और बताइये कि क्षत्रिय सूर्यवंश वंश और यदुवंश का सफाया हो गया था तो यदुवंश और सूर्यवंश क्षत्रिय पुनः किसको ब्राह्मणों ने बनाया--जाहिर सी बात है उन लोगों से बना होगा जिसे ये सबसे अधिक प्रिय रहे होंगे। ----------मेरे श्रद्धेय गुरु डॉ गिरिजा शंकर दुबे ने कहा था कि जब यह लगे कि अमुक व्यक्ति जान बूझकर ऐसे प्रश्न कर रहा है जिससे आप उत्तेजित हों दुर्वश्स् ऋषि कि तरह तो वहाँ गौतम ऋषि के सिद्धांत का पालन करना चाहिए और प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को देने से बचना चाहिए और यही गौतम ऋषि को भी सप्तर्षियों में समसे सौम्य, मानवतावादी और प्रशिद्ध बनाया।

परशुराम और दुर्वाशा को याद कीजिये और बताइये कि क्षत्रिय सूर्यवंश वंश और यदुवंश का सफाया हो गया था तो  यदुवंश और सूर्यवंश क्षत्रिय पुनः किसको ब्राह्मणों ने बनाया--जाहिर सी बात है उन लोगों से बना होगा जिसे ये सबसे अधिक प्रिय रहे होंगे। ----------मेरे श्रद्धेय गुरु डॉ  गिरिजा शंकर दुबे ने कहा था कि जब यह लगे कि अमुक व्यक्ति जान बूझकर ऐसे प्रश्न कर रहा है जिससे आप उत्तेजित हों दुर्वश्स् ऋषि कि तरह तो वहाँ गौतम ऋषि के सिद्धांत का पालन करना चाहिए और प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को देने से बचना चाहिए और यही गौतम ऋषि को भी सप्तर्षियों में समसे सौम्य, मानवतावादी और प्रशिद्ध बनाया।  

दुनिया केवल चार वेद ही जानती है पर पांचवा वेद केवल पाण्डेय ही जनता है जो लिखित नहीं होता है और समय आने पर और सामने आने पर ही पता चलता है। अतः मंगल पाण्डेय को याद कीजिये। वे केवल एक सिपाही थे तो क्या सिपाही आम आदमी नहीं होता है और बहुत सारे माननीय जो देश को बेच रहे हैं विदेशी एजेंटों के साथ मिलकर वे कितने ज्ञानी है? जो मेरे सामने आने कि हिम्मत न कर सके उसकी बात का वकत क्या? वः करता रहे उत्तर/प्रतिउत्तर किशी को कौन रो सका है क्योंकि स्वामी विवेकानंद कि सभा में भी यह होता था। विवेक जिसके सामने तर्क-वितरक काम नहीं आते हैं उसके सामने तर्क-कुतर्क कहाँ टिकेंगे? अतः भविष्य में प्रश्न के लिए धन्यवाद कहूंगा तब जब आप मेरे सामने होंगे और मेरे साथ कुछ समय बिताएंगे।

दुनिया केवल चार वेद ही जानती है पर पांचवा वेद केवल पाण्डेय ही जनता है जो लिखित नहीं होता है और समय आने पर और सामने आने पर ही पता चलता है। अतः मंगल पाण्डेय को याद कीजिये। वे केवल एक सिपाही थे तो क्या सिपाही आम आदमी नहीं होता है और बहुत सारे माननीय जो देश को बेच रहे हैं विदेशी एजेंटों के साथ मिलकर वे कितने ज्ञानी है? जो मेरे सामने आने कि हिम्मत न कर सके उसकी बात का वकत क्या?  वः करता रहे उत्तर/प्रतिउत्तर किशी को कौन रो सका है क्योंकि स्वामी विवेकानंद कि सभा में भी यह होता था। विवेक जिसके सामने तर्क-वितरक काम नहीं आते हैं उसके सामने तर्क-कुतर्क कहाँ टिकेंगे? अतः भविष्य में प्रश्न के लिए धन्यवाद कहूंगा तब जब आप मेरे सामने होंगे और मेरे साथ कुछ समय बिताएंगे।   

जो संविधान श्रीमद्भागवत गीता कि कसम खाकर सत्य बोलने कि आशा करता है उस संविधान और श्रीमद्भागवत गीता से पूँछिये तो अच्छा होगा कि ईस्वर है कि नहीं है जिसमे श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है "एको देवो सर्व भूतानाम" और " सर्व भूतानाम" और अर्जुन से अपने किरदार को ईस्वर का ही पूर्ण स्वरुप बताते हैं। विज्ञानं ने भी माना है पुत्र में पिटा डीएनए के रूप में विद्यमान रहता है पर जिसका पीता मर गया है तो क्या उसका उत्तराधिकार दिलाने के लिए डीएनए परीक्षण अनिवार्य है या समाज को साक्षी मानते हुए जो निर्णय लिया जाय वह सही है? और क्या डीएनए टेस्ट लेना ही है तो यह विज्ञान समय चक्र/धर्म चक्र को पीछे ले जाकर पिटा पुत्र के डीएनए का भौतिक सत्यापन कर सकता है यह मेरी चुनौती है विज्ञान को कि वह बताये कि हर चीज का प्रमाण चाहिए तो उस पुत्र के साथ न्याय कैसे होगा? फिर भी यदि समाज कि बात मान भी ली जाती है ऐसी स्थिति में तो उस समाज में से कुछ लोग ओसे होते ही हैं जो संदेह व्यक्त करते हैं उस पुत्र के पिटा की वास्तविक पहचान पर क्योंकि समझना न चाहने वाले और जागते हुए सोने वाले को कौन जगा सका है। अगर ऐसा होता तो श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथी न संत और ब्राह्मण समाज से मजाक करते औ न दुर्वाशा के सामने गोपिका बनकर पेट में हांडी बांधकर दुर्वाशा ऋषि के चमत्कारी शक्ति का उपहास उड़ाने के लिए पेट में कौन सा बच्च और कितने बच्चे हैं यह प्रश्न पूंछते और न यदुवंश का नाश होता। और न श्रीकृष्ण के भक्त कृष्ण प्रेम में यदुवंशी बनते। --------- अंत में भारतीय संविधान से पूँछिये कि श्रीमद्भागवत गीता कि कसम क्यों खाई जाती है और विज्ञान से पूँछिये कि यदि यदि पिटा जीवित नहीं तो डीएनए परीक्षण कैसे करेंगे? जिसको श्रद्धेय श्री राम नरेश यादव जी नहीं समझा सके, माननीय बाहुबली यदुवंशीय योध्धा आजमगढ़ के अपने को समाज में बदनाम होकर भी कि ईस्वर है कि नहीं है उसे मई नहीं समझा सकता अगर इस पर भी नहीं समझता तो।- संविधान से पूँछिये कि अशोकचक्र /धर्मचककर क्यों लगा रखा है वे इसके स्थान पर हांथी और घोड़ा क्यों नहीं लगाए यदि धर्म ईस्वर को मानता है तब पर भी। ----वह सामाजिक और धार्मिक संघर्ष जो किशी को भूमिगत नहीं क्रियात्मक बनाता है उसे बढ़ावा देता हूँ। ---------धन्यवाद ----।

जो संविधान श्रीमद्भागवत गीता कि कसम खाकर सत्य बोलने कि आशा करता है उस संविधान और श्रीमद्भागवत गीता से पूँछिये तो अच्छा होगा कि ईस्वर है कि नहीं है जिसमे श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है "एको देवो सर्व भूतानाम" और " सर्व भूतानाम" और अर्जुन से अपने किरदार को ईस्वर का ही पूर्ण स्वरुप बताते हैं।     विज्ञानं ने भी माना है पुत्र में पिटा डीएनए के रूप में विद्यमान रहता है पर  जिसका पीता मर गया है तो क्या उसका उत्तराधिकार दिलाने के लिए डीएनए परीक्षण अनिवार्य है या समाज को साक्षी मानते हुए जो निर्णय लिया जाय वह सही है? और क्या डीएनए टेस्ट लेना ही है तो यह विज्ञान समय चक्र/धर्म चक्र को पीछे ले जाकर पिटा पुत्र के डीएनए का भौतिक सत्यापन कर सकता है यह मेरी चुनौती है विज्ञान को कि वह बताये कि हर चीज का प्रमाण चाहिए तो उस पुत्र के साथ न्याय कैसे होगा?   फिर भी यदि समाज कि बात मान भी ली जाती है ऐसी स्थिति में तो उस समाज में से कुछ लोग ओसे होते ही हैं जो संदेह व्यक्त करते हैं उस पुत्र के पिटा की वास्तविक पहचान पर क्योंकि समझना न चाहने वाले और जागते हुए सोने वाले को कौन जगा सका है। अगर ऐसा होता तो श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथी न संत और ब्राह्मण समाज से मजाक करते औ न दुर्वाशा के सामने गोपिका बनकर पेट में हांडी बांधकर दुर्वाशा ऋषि के चमत्कारी शक्ति का उपहास उड़ाने के लिए पेट में कौन सा बच्च और कितने बच्चे हैं यह प्रश्न पूंछते और न यदुवंश का नाश होता। और न श्रीकृष्ण के भक्त कृष्ण प्रेम में यदुवंशी बनते। --------- अंत में भारतीय संविधान से पूँछिये कि श्रीमद्भागवत गीता कि कसम क्यों खाई जाती है और विज्ञान से पूँछिये कि यदि यदि पिटा जीवित नहीं तो डीएनए परीक्षण कैसे करेंगे? जिसको श्रद्धेय श्री राम नरेश यादव जी नहीं समझा सके, माननीय बाहुबली यदुवंशीय योध्धा आजमगढ़ के अपने को समाज में बदनाम होकर भी कि ईस्वर है कि नहीं है उसे मई नहीं समझा सकता अगर इस पर भी नहीं समझता तो।-   संविधान से पूँछिये कि अशोकचक्र /धर्मचककर क्यों लगा रखा है वे इसके स्थान पर हांथी और घोड़ा क्यों नहीं लगाए यदि धर्म ईस्वर को मानता है तब पर भी। ----वह सामाजिक और धार्मिक संघर्ष जो किशी को भूमिगत नहीं क्रियात्मक बनाता है उसे बढ़ावा देता हूँ। ---------धन्यवाद ----। 

Wednesday, February 26, 2014

शिवशक्ति का दुरुपयोग करने वाले सतयुग के राजा केदार को काट कर केदारनाथ और पशुपतिनाथ बनाने का कारक सूर्यवंशीय ग्वाला मई ही हूँ और परमादरणीय गुरु और वैज्ञानिक को पत्र में बी एच यू में स्वीकार किया था ४ फरवरी, २०१२ को।|बेल पत्र: त्रिफला जो शिव को समर्पित हो शिवमय हो जाता है: कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय विवेक कुमार। Apni bua ko diye vade anusar 100 galati ke baad hi bua ke putra Shishupal ka vadh Shri Krishn ne kiya tha| पार्वती जी भी ना रही शेष, जाने वह कौन सा देश। मकरध्वज (हनुमान के पुत्र :अम्बावाडेकर के पुत्र) तुम वहाँ चले गए। अच्छा ना वहाँ का परिवेश जहाँ तुम चले गए। जहां -लक्ष्मी-सरस्वती-अनुसूइया-सावित्री के नहीं अवशेष, ऐसा है नर-नारी का वेश वहाँ तुम चले गए। चाहूँ तो मिटा दूं वहाँ का सब खेल जहां तुम चले गए।Jisako Hindu dharm me astha ho vah Ganga/Pavitra Jal achaman sath 5 bar Gayatri Mantra ka path kar Hindu ban sakta hai| Shiv=Kedareshwar (PAR KEDARNATH MEANS poorn SHIV JAROORI NAHI) Prakiti ke panch mool bhooton ke swami hain. Id Duniya ko to 1 ya 3 ya 4 ya 7 ya 8 ya 24 purush aur unaki Prakriti hi chala lenge. Kyon kast sah jee rahe ho? Aabadi badha bojh bane ho Prakriti Sansadhan par. Jeevan saphal karo agar mange the to. Shiv shakti ka durupayog karane vaale Satyug ke Raja Kedar ko kaat Kedarnath aur Pashupatinath banaane ka karak Shooryavanshi Gwala mai hi hoon aur Greatest Guru aur Scientist ko patra me BHU me|Pichhale post ke anusaar jab punarjanm hota hai to kau adhiktam 100 var se jada ka sataya hua? Jo hajaro varsh ka davaa karte hain|Vah samajik aur dharmik sanghars jo kishi ek ko Bhumhgat nahi creative banaye vahi badhaata hoon.

  • बेल पत्र: त्रिफला जो शिव को समर्पित हो शिवमय हो जाता है: कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय विवेक कुमार।
  • Raghu Yadva(Samajik Nyaay Morch ke sakriy sadasya aur Researcher at Ahmedabad from Purvanchal: Is Doodh ki jaroorat kishe hai?
  • Pandey Vivek Kumar doodh chadhane ka itihaas pashupatinath ke Gwale ne shuru kiyaa tha usase poonchhen aur jankari karen
  • Pandey Vivek Kumar Shiv ki to Bel patra-bhang-dhatur-ganne ka tukada aur jal ki prath hi thi purv me
  • Pandey Vivek Kumar Rahi bat avashyakata ki to unase poonchiye jo vishv ke mandiron se jyada dhoodh gatar me girate hai
  • Pandey Vivek Kumar Gatar me dhoodh aur sade huye Aanaaj is liye paaye jaate hain kyonki daam in sabhi ke n ghate
  • Pandey Vivek Kumar In sab ke peechhe bhi vahi jimmedar hai jo Mandir me doodh chadhane ko kahate hai kya?


पार्वती जी भी ना रही शेष, जाने वह कौन सा देश। मकरध्वज (हनुमान के पुत्र :अम्बावाडेकर के पुत्र) तुम वहाँ चले गए। अच्छा ना वहाँ का परिवेश जहाँ तुम चले गए। जहां -लक्ष्मी-सरस्वती-अनुसूइया-सावित्री के नहीं अवशेष, ऐसा है नर-नारी का वेश वहाँ तुम चले गए। चाहूँ तो मिटा दूं वहाँ का सब खेल जहां तुम चले गए।Jisako Hindu dharm me astha ho vah Ganga/Pavitra Jal achaman sath 5 bar Gayatri Mantra ka path kar Hindu ban sakta hai
  • Bipin Kumar Singh likes this.
  • Devendra Mishra Kahan aanaa hai Vivek ?
  • Pandey Vivek Kumar Hindu Dharm me Asth vaale me Gay-Ganga-Gayatri-Gauri me asth poorv nihit hai.
  • Pandey Vivek Kumar Duniya ka koi sthan par Ganga ka Prayag, Kashi aur Haridwar sabse upyukt hai
  • Raghu Yadav untold stories
  • Pandey Vivek Kumar yah ponga pandit ka vyang chitra bhejane se jada jaroori hai is jankari ka hona aur praman pana
  • Pandey Vivek Kumar Mishra ji ke comment se pahale vakya purnatah post nahi tha uske bad Hindu dharm me ana hai likha
  • Pandey Vivek Kumar Hindu Dharm ke Sajag prahari charon vedon ke gyata Maharshi Dayanand yaad hain
  • Pandey Vivek Kumar Aarya samaj ki prathmik sadasyata milati hai naye ko n ki vah sidhe Saptarshi Gotriy Sanatan Hindu ban jata hai any dharm ki tarj par
  • Shiv=Kedareshwar (PAR KEDARNATH MEANS poorn SHIV JAROORI NAHI) Prakiti ke panch mool bhooton ke swami hain
    • Pandey Vivek Kumar PANCH BHOOT: JAL/WATER-AKASH/SPACE-STHAL/EARTH-VAYU/GAS/WIND-AGNI/FIRE
    Apni bua ko diye vade anusar 100 galati ke baad hi bua ke putra Shishupal ka vadh Shri Krishn ne kiya tha

    • Pandey Vivek Kumar vaada yahi ki savaal jabaab aamne saamne karoonga agar koi himmat kare Prayag me kisi vivadit mudde par
    • Shiv=Kedareshwar (PAR KEDARNATH MEANS poorn SHIV JAROORI NAHI) Prakiti ke panch mool bhooton ke swami hain. Id Duniya ko to 1 ya 3 ya 4 ya 7 ya 8 ya 24 purush aur unaki Prakriti hi chala lenge. Kyon kast sah jee rahe ho? Aabadi badha bojh bane ho Prakriti Sansadhan par. Jeevan saphal karo agar mange the to.
      • Pandey Vivek Kumar PARAMBRAHM/BRAHM, BRAHMA VISHNU MAHESH, DEVARSHI Narad/HANUMAN/AMBVADEKAR, SAPTRSHI, ASTAKRISH, Gayatri upashak 24 rishi aur unaki prakriti

        • Shiv Shakti ka durupayog karane vaale Satyug ke Raja Kedar ko kaat Kedarnath aur Pashupatinath banaane ka karak Shooryavanshi Gwala mai hi hoon aur Greatest Guru aur Scientist ko patra me BHU me sweekar kiyaa 4 FEBRUARY, 2012|Is post ke anusaar jab punarjanm hota hai to kau adhiktam 100 var se jada ka sataya hua? Jo hajaro varsh ka davaa karte hain|Vah samajik aur dharmik sanghars jo kishi ek ko Bhumhgat nahi creative banaye vahi badhaata hoon.

        • Pandey Vivek Kumar 100-125
          varsh poorv ve kis jaati aur dharm vaale ke ghar me the yahi bataye yah
          alag ki Genetic gun vartman parivar valon se hi milata hai
        • Pandey Vivek Kumar Jo aabaadi ham logon ke samay me mool abaadi se jyaada badhi unako kaun sataaya? Kam se kam ek udaaharn dijiye jise mai sataya hoon. Satya Kadava hota hai.