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Sunday, August 31, 2014

अम्बेडकर/अम्बावडेकर/हनुमान के नाम का जाप करने वालों के जीवन में चरित्र और सेवा का अगर अभाव हो तो अम्बेडकर/अम्बवादेकर/हनुमान के नाम पर मिलाने वाली सुविधा से अगर उनको वंचित ही कर दिया जाय तो इसमें गलत ही क्या है? तुमको को मुसलमान(मुसल्लम ईमान जिसमे प्रेम को भी ईमान से टोला जाता हो)/इस्लाम अनुयायी से डर लगता था, ईसाइयत और तथाकथित दलित से आज तक डर लगता है पर जिसकी संस्कृति मुझसे निम्न हो उससे मुझे कभी डर नहीं लगा। पर डर इस बात का था और है भी की तुम अपने से निम्न सस्कृति वाले का अनुसरण कर रहे थे जिससे उसको स्वयं भी धरातल नहीं मिल रहा था जिसके किये स्वयं तुम ही धरातल हो और इस प्रकार तुम सब एक साथ मिलकर अधह पतन को प्राप्त हो रहे थे। और मेरे अनुसार जब इस्लाम श्रीराम शाखा के समानांतर और ईसाइयत श्री कृष्ण शाखा के सामानांतर चलता है तो जिसमे श्रीराम और श्रीकृष्ण सामान रूप से अनुकरणीय हों वह समाज सभी धर्मों के लिए धरातल और मिलान बिंदु है की नहीं और इस प्रकार हिंदुत्व के क्षरण से पृथ्वी पर सभी धर्मों का नाश होगा की नहीं और इस प्रकार धर्म विहीन विश्व का विनाश ही हो जाय तो इसमें गलत ही क्या है 11 और 9 के विरोधियों। गुलामी और स्वामिभक्ति जारी है कुछ ऐसे देशों की देश के स्वाभिमान के विपरीत कार्य लिप्तता के साथ।

अम्बेडकर/अम्बावडेकर/हनुमान के नाम का जाप करने वालों के जीवन में चरित्र और सेवा का अगर अभाव हो तो अम्बेडकर/अम्बवादेकर/हनुमान के नाम पर मिलाने वाली सुविधा से अगर उनको वंचित ही कर दिया जाय तो इसमें गलत ही क्या है? तुमको को मुसलमान(मुसल्लम ईमान जिसमे प्रेम को भी ईमान से टोला जाता हो)/इस्लाम अनुयायी से डर लगता था, ईसाइयत और तथाकथित दलित से आज तक डर लगता है पर जिसकी संस्कृति मुझसे निम्न हो उससे मुझे कभी डर नहीं लगा। पर डर इस बात का था और है भी की तुम अपने से निम्न सस्कृति वाले का अनुसरण कर रहे थे जिससे उसको स्वयं भी धरातल नहीं मिल रहा था जिसके किये स्वयं तुम ही धरातल हो और इस प्रकार तुम सब एक साथ मिलकर अधह पतन को प्राप्त हो रहे थे। और मेरे अनुसार जब इस्लाम श्रीराम शाखा के समानांतर और ईसाइयत श्री कृष्ण शाखा के सामानांतर चलता है तो जिसमे श्रीराम और श्रीकृष्ण सामान रूप से अनुकरणीय हों वह समाज सभी धर्मों के लिए धरातल और मिलान बिंदु है की नहीं और इस प्रकार हिंदुत्व के क्षरण से पृथ्वी पर सभी धर्मों का नाश होगा की नहीं और इस प्रकार धर्म विहीन विश्व का विनाश ही हो जाय तो इसमें गलत ही क्या है 11 और 9 के विरोधियों।  गुलामी और स्वामिभक्ति जारी है कुछ ऐसे देशों की देश के स्वाभिमान के विपरीत कार्य लिप्तता के साथ।

परबाबा रामप्रशाद पाण्डेय के निर्देशानुसार अपने पिता श्री प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी) कुमार पाण्डेय के आदेशनुसार मैंने अपनी शिक्षा के लिए न पैतृक जमीन (मुस्लिम:इस्लाम अनुयायी के द्वारा बाबा शारंगधर=शिव को मिले 5 गाँव में से एक गाँव रामपुर-223225 की दान में मिली 500 बीघे पूरे गाँव की जमीन में से अपने हिस्से की जमीन जो गाँव के किशी भी प्रति व्यक्ति से ज्यादा हिस्से का था) और न बाबा बचनराम पाण्डेय द्वारा खरीदी हुई जमीन को मैंने बेचा है और न अपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर पूरक परियोजना के गुरु प्रोफेसर सुबोध(विवेक) कांत बोस के निर्देश अनुसार कभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका का भ्रमण किया है और न कभी वहां का भ्रमण करूंगा। अभी तक इन सामाजिक निर्देशों का पालन किया हूँ। माता और परमगुरु परमपिता परमेश्वर विष्णु, मामा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा के अनुसार विवाह कर संतानोत्पत्ति कर पितृ ऋण का निवारण किया हूँ। -----परमपिता शिव, ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय की आज्ञानुसार प्रयागराज विश्वविद्यालय में विज्ञान परियोजना में शोध सहायक की अस्थायी सेवा में आया 2001 और तत्कालीन प्रयागराज विश्वविद्यालय के ब्रह्मा (श्रद्धेय जोशी जी-श्रीवास्तव जी-पाण्डेय जी) और परमगुरु परमपिता परमेश्वर अपने सनातन गौतम गोत्रीय मामा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा और परमपिता शिव, सनातन कश्यप गोत्रीय ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय की आज्ञानुसार (जो यही के पुराछात्र हैं) प्रयागराज विश्वविद्यालय में केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्यन केंद्र के शोध हेतु नामांकित(2003) हो प्रथम शोध छात्र बना 2007 जहां मेरी उपस्थिति अनिवार्य थी शोध कार्य को करने वालों के लिए एक प्रहरी की भाँती पर केंद्र की पूर्ण सफलता(केंद्र को स्थायी शिक्षक पद प्राप्ति और स्वयं के शोध की पूर्णता) के लिए मै स्वयंपर ही निर्भर न होकर औरों के सहयोग पर निर्भर था लेकिन अन्य लोगों से अलग मै अपना शोध कार्य भारत में ही रहकर ओसियन मॉडलिंग का जटिल कार्य गुरु निर्देेशन और आशीर्वाद से स्वयं बिना किशी समूह में शामिल हुए पूर्ण किया विना किसी अंतर्राष्ट्रीय/विदेशी प्रयोगशाला में प्रशिक्षण लिए। इसके बाद 2 वर्ष पराशोधक के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरु में प्रशिक्षण लेते हुए 29 अक्टूबर, 2009 से आज तक प्रयागराज/अलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। इसके साथ ही साथ सामाजिक परिवर्तन हेतु "Vivekanand and Modern Tradition" ब्लॉग 2006 से आज तक लिखता-मिटता रहता हूँ समय के साथ-2 अनुकूल सामाजिक परिवर्तन को देखते हुए(यह सम्पुट हे मेरे ऑरकुट और फेसबुक पोस्ट का संचित सार का)। वैसे यह मै अपनी शिक्षा के प्रारम्भ से ही मित्रों और विद्यालय/विश्वविद्यालय कुल के अपने विषय और अन्य विषय के छात्रों के बीच भी मौखिक रूप से ऐसा करता आया हूँ विद्यालय/विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्थान पर बैठकर ऐसा करता आया हूँ।----------जिस व्यक्ति में अपने गुरु श्रद्धेय श्री अमरजीत वर्मा की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की गणित की कक्षा (4 वर्ष) में मित्रों द्वारा पूंछे गए अधिकांश प्रश्नो को ब्लैक बोर्ड पर हल किया हो गुरु जी की आज्ञा पाकर जिसमे एक -दो ही ऐसे प्रश्न होते जो उसे न आते रहे हों उसे ही वे हल करते; उसकी मेधा शक्ति पर प्रश्न चिन्ह वही लगाएगा जिसके नेतृत्व में ऐसे व्यक्ति का विरोध किया गया हो। और यही गुरु जी जिन्होंने उसे अपने जीवन में पढ़ाये सभी छत्रों में सबसे यशस्वी होने की बात कही थी और उनके उसी शिष्य की ऊर्जा का प्रयोग करने के बाद अनुपयोगी और कम मेधा शक्ति का बताया जा रहा है। ज़रा बगल नजर उठा के तो देखो धृतराष्ट्रों और अगर न देख पाते हो संजय की दृस्टि से देखो क्या से क्या हो गया है समाज में 2000 से 2014 के बीच। वैसे कहा जाता है की ब्रह्मा की दूरदृस्ति सबसे ज्यादा थी पर अब तो धृतराष्ट्र से भी कम दिखाई देता है क्योंकि वह तो कदमो की आहट से पहचान लेते थे व्यक्ति को और आप को नयी दुनिया की आहत भी नहीं आ रही है।

परबाबा रामप्रशाद पाण्डेय के निर्देशानुसार अपने पिता श्री प्रदीप(सूर्यकांत:रामजानकी) कुमार पाण्डेय के आदेशनुसार मैंने अपनी शिक्षा के लिए न पैतृक जमीन (मुस्लिम:इस्लाम अनुयायी के द्वारा बाबा शारंगधर=शिव को मिले 5 गाँव में से एक गाँव रामपुर-223225 की दान में मिली 500 बीघे पूरे गाँव की जमीन में से अपने हिस्से की जमीन जो गाँव के किशी भी प्रति व्यक्ति से ज्यादा हिस्से का था) और न बाबा बचनराम पाण्डेय द्वारा खरीदी हुई जमीन को मैंने बेचा है और न अपने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर पूरक परियोजना के गुरु प्रोफेसर सुबोध(विवेक) कांत बोस के निर्देश अनुसार कभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका का भ्रमण किया है और न कभी वहां का भ्रमण करूंगा। अभी तक इन सामाजिक निर्देशों का पालन किया हूँ। माता और परमगुरु परमपिता परमेश्वर विष्णु, मामा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा के अनुसार विवाह कर संतानोत्पत्ति कर पितृ ऋण का निवारण किया हूँ। -----परमपिता शिव, ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय की आज्ञानुसार प्रयागराज विश्वविद्यालय में विज्ञान परियोजना में शोध सहायक की अस्थायी सेवा में आया 2001 और तत्कालीन प्रयागराज विश्वविद्यालय के ब्रह्मा (श्रद्धेय जोशी जी-श्रीवास्तव जी-पाण्डेय जी) और परमगुरु परमपिता परमेश्वर अपने सनातन गौतम गोत्रीय मामा श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्रा और परमपिता शिव, सनातन कश्यप गोत्रीय ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय की आज्ञानुसार (जो यही के पुराछात्र हैं) प्रयागराज विश्वविद्यालय में केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्यन केंद्र के शोध हेतु नामांकित(2003) हो प्रथम शोध छात्र बना 2007 जहां मेरी उपस्थिति अनिवार्य थी शोध कार्य को करने वालों के लिए एक प्रहरी की भाँती पर केंद्र की पूर्ण सफलता(केंद्र को स्थायी शिक्षक पद प्राप्ति और स्वयं के शोध की पूर्णता) के लिए मै स्वयंपर ही निर्भर न होकर औरों के सहयोग पर निर्भर था लेकिन अन्य लोगों से अलग मै अपना शोध कार्य भारत में ही रहकर ओसियन मॉडलिंग का जटिल कार्य गुरु निर्देेशन और आशीर्वाद से स्वयं बिना किशी समूह में शामिल हुए पूर्ण किया विना किसी अंतर्राष्ट्रीय/विदेशी प्रयोगशाला में प्रशिक्षण लिए। इसके बाद 2 वर्ष पराशोधक के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलुरु में प्रशिक्षण लेते हुए 29 अक्टूबर, 2009 से आज तक प्रयागराज/अलाहाबाद विश्वविद्यालय में एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। इसके साथ ही साथ सामाजिक परिवर्तन हेतु "Vivekanand and Modern Tradition" ब्लॉग 2006 से आज तक लिखता-मिटता रहता हूँ समय के साथ-2 अनुकूल सामाजिक परिवर्तन को देखते हुए(यह सम्पुट हे मेरे ऑरकुट और फेसबुक पोस्ट का संचित सार का)। वैसे यह मै अपनी शिक्षा के प्रारम्भ से ही मित्रों और विद्यालय/विश्वविद्यालय कुल के अपने विषय और अन्य विषय के छात्रों के बीच भी मौखिक रूप से ऐसा करता आया हूँ विद्यालय/विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्थान पर बैठकर ऐसा करता आया हूँ।----------जिस व्यक्ति में अपने गुरु श्रद्धेय श्री अमरजीत वर्मा की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की गणित की कक्षा (4 वर्ष) में मित्रों द्वारा पूंछे गए अधिकांश प्रश्नो को ब्लैक बोर्ड पर हल किया हो गुरु जी की आज्ञा पाकर जिसमे एक -दो ही ऐसे प्रश्न होते जो उसे न आते रहे हों उसे ही वे हल करते; उसकी मेधा शक्ति पर प्रश्न चिन्ह वही लगाएगा जिसके नेतृत्व में ऐसे व्यक्ति का विरोध किया गया हो। और यही गुरु जी जिन्होंने उसे अपने जीवन में पढ़ाये सभी छत्रों में सबसे यशस्वी होने की बात कही थी और उनके उसी शिष्य की ऊर्जा का प्रयोग करने के बाद अनुपयोगी और कम मेधा शक्ति का बताया जा रहा है। ज़रा बगल नजर उठा के तो देखो धृतराष्ट्रों और अगर न देख पाते हो संजय की दृस्टि से देखो क्या से क्या हो गया है समाज में 2000 से 2014 के बीच। वैसे कहा जाता है की ब्रह्मा की दूरदृस्ति सबसे ज्यादा थी पर अब तो धृतराष्ट्र से भी कम दिखाई देता है क्योंकि वह तो कदमो की आहट से पहचान लेते थे व्यक्ति को और आप को नयी दुनिया की आहत भी नहीं आ रही है।

Saturday, August 30, 2014

If my Guru, Gurukul, Guru-Bhai, Bhai and honourable Society have maintained their gravity then for maintenance of their respect and rights I have paid my life not only any position of this world and I promise that this will be continue in the future too. >>>>> पहले अपना गुरुत्व तो स्वयं संरक्षित रखे ये लोग।

If my Guru, Gurukul, Guru-Bhai, Bhai and honourable Society have maintained their gravity then for maintenance of their respect and rights I have paid my life not only any position of this world and I promise that this will be continue in the future too. >>>>> पहले अपना गुरुत्व तो स्वयं संरक्षित रखे ये लोग।

Thursday, August 28, 2014

मै भारद्वाज/अंगिरास को बताना चाहता हूँ की आप महादेव शिव पुत्र गणेश की तरह अपने पिता ब्रह्मा के प्रयागराज में ही निवास (आश्रम) बना सदा के लिए निवाश किये और ब्रह्मा के सबसे प्यारे और दुलारे पुत्र कहलाये पर आप यहां अकेले नहीं थे अपितु आप के रक्षार्थ अत्रि पुत्र कृष्णात्रेय (दुर्वाशा) जिनका निवास (आश्रम) फूलपुर-आजमगढ़(आर्यमगढ़) भी इसे अपना द्वितीय स्थान बनाये हुए थे और जिनकी रक्षा में आप स्वक्षंद और निर्भीकता पूर्वक अपनी ज्ञान और विज्ञानं वृद्धि करते हुए पुष्पक विमान बनाने जैसे वैज्ञानिक कार्यों की दक्षता हाशिल किये थे। और इस युग में भी भरद्वाज/आंगिरस चाहे स्वयं को ब्रह्मा का सबसे प्यारा या दुलारा पुत्र समझे या स्वयं को ब्रह्मा ही समझे उन्ही के बचनो के पालन में ही सब कुछ कृष्णात्रेय ने ही किया मानवता की स्थिति को नियंत्रीय करने के लिए विश्व व्यापक घटना को अंजाम देकर मतलब न्यूनतम हानि से महत्तम सृजन स्थापित करने हेतु और अभी भी कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के रहते महादेव को कस्ट नहीं करना पडेगा इस सृष्टि को महाविनाश में धकेलने के लिये।--------लेकिन अगर आप को मदांधता छाई ब्रह्मा से ज्यादा प्रेम और महत्त्व मिलाने के नाते तो न कृष्णात्रेय आप को बचा पाएंगे और न स्वयं विष्णु और महादेव शिव। क्यंकि लघुता से प्रभुता मिले और प्रभुता से प्रभु दूर।। उछल-कूद ज्यादा न मचाइए आख्या प्रस्तुत कर दी गयी है परमब्रह्म परमेश्वर के पास जो सबके पिता है। मै कभी इतने भी कम दिमाग और मेधा का नहीं था की जो मुझसे छोटे मुझको नियंत्रित करे यह तो मेरे स्वनियंत्रीय होने का परिणाम है कि कोई असहज स्थिति न आये जिससे की लोक निंदा हो। जब स्वयं ब्रह्मा को मेरी मेधा शक्ति और पुरुषार्थ का पता नहीं है जिसे वे वे मेरे अनुज को बता सकें की वे मेरा किस दीर्घ कालिक कार्य हेतु यहाँ है उपस्थिति रहना अनिवार्य है कृषि समय सीमा विशेष के लिए जो किशी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो मुझे अपने स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपनी कुछ कला दिखानी ही होगी क्योंकि मै भी उसी कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के पहले निवास दुर्वाशा आश्रम(फूलपुर/आज़मगढ़) का एक सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण ही हूँ न और क्योंकि आधारभूत कार्य ब्रह्मा का अब पूरा भी हो गया है।

मै भारद्वाज/अंगिरास को बताना चाहता हूँ की आप महादेव शिव पुत्र गणेश की तरह अपने पिता ब्रह्मा के प्रयागराज में ही निवास (आश्रम) बना सदा के लिए निवाश किये और ब्रह्मा के सबसे प्यारे और दुलारे पुत्र कहलाये पर आप यहां अकेले नहीं थे अपितु आप के रक्षार्थ अत्रि पुत्र कृष्णात्रेय (दुर्वाशा) जिनका निवास (आश्रम) फूलपुर-आजमगढ़(आर्यमगढ़) भी इसे अपना द्वितीय स्थान बनाये हुए थे और जिनकी रक्षा में आप स्वक्षंद और निर्भीकता पूर्वक अपनी ज्ञान और विज्ञानं वृद्धि करते हुए पुष्पक विमान बनाने जैसे वैज्ञानिक कार्यों की दक्षता हाशिल किये थे। और इस युग में भी भरद्वाज/आंगिरस चाहे स्वयं को ब्रह्मा का सबसे प्यारा या दुलारा पुत्र समझे या स्वयं को ब्रह्मा ही समझे उन्ही के बचनो के पालन में ही सब कुछ कृष्णात्रेय ने ही किया मानवता की स्थिति को नियंत्रीय करने के लिए विश्व व्यापक घटना को अंजाम देकर मतलब न्यूनतम हानि से महत्तम सृजन स्थापित करने हेतु और अभी भी कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के रहते महादेव को कस्ट नहीं करना पडेगा इस सृष्टि को महाविनाश में धकेलने के लिये।--------लेकिन अगर आप को मदांधता छाई ब्रह्मा से ज्यादा प्रेम और महत्त्व मिलाने के नाते तो न कृष्णात्रेय आप को बचा पाएंगे और न स्वयं विष्णु और महादेव शिव। क्यंकि लघुता से प्रभुता मिले और प्रभुता से प्रभु दूर।। उछल-कूद ज्यादा न मचाइए आख्या प्रस्तुत कर दी गयी है परमब्रह्म परमेश्वर के पास जो सबके पिता है।  मै कभी इतने भी कम दिमाग और मेधा का नहीं था की जो मुझसे छोटे मुझको नियंत्रित करे यह तो मेरे स्वनियंत्रीय होने का परिणाम है कि कोई असहज स्थिति न आये जिससे की लोक निंदा हो। जब स्वयं ब्रह्मा को मेरी मेधा शक्ति और पुरुषार्थ का पता नहीं है जिसे वे वे मेरे अनुज को बता सकें की वे मेरा किस दीर्घ कालिक कार्य हेतु यहाँ है उपस्थिति रहना अनिवार्य है कृषि समय सीमा विशेष के लिए जो किशी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है, तो मुझे अपने स्वाभिमान की रक्षा हेतु अपनी कुछ कला दिखानी ही होगी क्योंकि मै भी उसी कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के पहले निवास दुर्वाशा आश्रम(फूलपुर/आज़मगढ़) का एक सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण ही हूँ न और क्योंकि आधारभूत कार्य ब्रह्मा का अब पूरा भी हो गया है। 

जाती और धर्म बदलने पर कितना मजा है और कब तक यह मजा मिलता है और ब्राह्मण होने का भी कितना मजा है यह भी मुझे बहुत अच्छी तरह से पता है और सत्य का सामना करना पड़ता है राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने पर तो जाती और धर्म बदलकर जो मजा मिलता है वह समझ में आ जाता है । स्थान विशेष पर ईसाई समृध्द परिवार की लड़की को अंतर्राष्ट्रीय स्थान रखने वाले संस्थान की प्रयोगशाला में 2 वर्ष में दर्जनो बार सिसक-सिसक कर रोते देखा हूँ जिसका परिवार देशी और विदेशी दोनों था पर जैसा हिन्दुस्तान के अल्प संख्यक धर्म परिवर्तन के हिस्सा हैं तो वह भी हम लोगों के घर की लड़कियों जैसे रूप-रंग की थी और नाम से भी हिन्दू ही लगती थी।

जाती और धर्म बदलने पर कितना मजा है और कब तक यह मजा मिलता है और ब्राह्मण होने का भी कितना मजा है यह भी मुझे बहुत अच्छी तरह से पता है और सत्य का सामना  करना पड़ता है राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने पर तो जाती और धर्म बदलकर जो मजा मिलता है वह समझ में आ जाता है । स्थान विशेष पर ईसाई समृध्द परिवार की लड़की को अंतर्राष्ट्रीय स्थान रखने वाले संस्थान की प्रयोगशाला में 2 वर्ष में दर्जनो बार सिसक-सिसक कर रोते देखा हूँ जिसका परिवार देशी और विदेशी दोनों था पर जैसा  हिन्दुस्तान के अल्प संख्यक धर्म परिवर्तन के हिस्सा हैं तो वह भी हम लोगों के घर की लड़कियों जैसे रूप-रंग की थी और नाम से भी हिन्दू ही लगती थी।    

TODAY is 28th August, 2014 and its the Birth Day of my son, Krishnakant Pandey, Who was born on the day of Shri Krishna Janmastami (28th August, 2013 at 8.12 PM, the unique Tithi totally identical to the Devaki Nandan Lord Krishna)>>>>>>>>>>>>>>>>>Old post: मै कह दिया जी 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) और 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) दोनों मेरी संतान हो गए तो किशी से मेरा दुराव रह ही कहाँ गया और मै किस वैश्य से कम रहा जिसके घर विष्णुकांत और कृष्णकांत आ गए हों। पर गलत का विरोध तो शब्दों से करूंगा ही और उसे चरितार्थ कोई दूसरा करेगा ही जो मेरे शब्दों से प्रभावित होगा और मेरे शब्द अंदर से उसके अंदर सत्य तक पहुँचने की जिज्ञाषा जाहिर करेंगे कर्तव्य के रूप में।>>>>>>>>>>>>विष्णुकांत का राशिनाम जन्म तिथि और स्थान: वेंकटेश 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) Nazareth Hospital Allahabad, 13/A, Nr Haathi Park, Company Bagh, Kamla Nehru Road, Allahabad – 211002. (Christian Minority Hospital)>>>>>>>>> कृष्णकांत का राशिनाम, जन्मतिथि और स्थान: वाशुदेव 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) SAKET MATERNITY & NURSING HOME (P) TLD. 1203, Bhaghambari Housing Scheme, Kidwai Nagar, Allahpur,. Allahabad - 211006, U.P., India. (Hospital managed by Hindu)|>>>>>>>>>>>>>>>>>>मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

TODAY is 28th August, 2014 and its the Birth Day of my son, Krishnakant Pandey, Who was born on the day of Shri Krishna Janmastami (28th August, 2013 at 8.12 PM, the unique Tithi totally identical to the Devaki Nandan Lord Krishna)>>>>>>>>>>>>>>>>>Old post: मै कह दिया जी 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) और 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) दोनों मेरी संतान हो गए तो किशी से मेरा दुराव रह ही कहाँ गया और मै किस वैश्य से कम रहा जिसके घर विष्णुकांत और कृष्णकांत आ गए हों। पर गलत का विरोध तो शब्दों से करूंगा ही और उसे चरितार्थ कोई दूसरा करेगा ही जो मेरे शब्दों से प्रभावित होगा और मेरे शब्द अंदर से उसके अंदर सत्य तक पहुँचने की जिज्ञाषा जाहिर करेंगे कर्तव्य के रूप में।>>>>>>>>>>>>विष्णुकांत का राशिनाम जन्म तिथि और स्थान: वेंकटेश 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) Nazareth Hospital Allahabad, 13/A, Nr Haathi Park, Company Bagh, Kamla Nehru Road, Allahabad – 211002. (Christian Minority Hospital)>>>>>>>>> कृष्णकांत का राशिनाम, जन्मतिथि और स्थान: वाशुदेव 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) SAKET MATERNITY & NURSING HOME (P) TLD. 1203, Bhaghambari Housing Scheme, Kidwai Nagar, Allahpur,. Allahabad - 211006, U.P., India. (Hospital managed by Hindu)|>>>>>>>>>>>>>>>>>>मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

अंतर्जातीय विवाह मान्य नहीं है यह कहा मैंने कहा पर हम उससे अंतरजीतीय विवाह नहीं करते जो अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य नहीं मान लेता शादी पूर्व मतलब सनातन शास्त्रीय विवाह में हम कम से कम वैश्य(विष्णु) बन ही जाते हैं(इसके साथ जाम्बुदेश:यूरेशिया देश मतलब यूरोप+ एशिया मतलब हिन्द देश के नागरिक और उसके भरतखण्ड=अखंड भारत=भारतवर्ष हिस्से में हम निवेश करते हैं यह भी मानते हैं) और यदि आप सनातन धर्म में मान्य शास्त्रीय रीती से शादी कर लेते हैं तो आप को अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से सदा के लिए कम से कम एक वैस्य होना स्वीकार होना चाहिए नैतिक रूप से। न की ब्राह्मण की पुत्री के नाम के आगे बंदुगुला विशेष रूप से लिखवाना चाहिए परिवार के राजपत्रित अभिलेखों में जबकि परिवार के अन्य लोगों के नाम के आगे वहा बंदुगुला शब्द न लिखवाये हों आप जो वास्तविक रूप से बंदुगुला थे/हैं या सम्बन्ध से स्थापित समतुल्य जाती से हों पूर्व में।

अंतर्जातीय विवाह मान्य नहीं है यह कहा मैंने कहा पर हम उससे अंतरजीतीय विवाह नहीं करते जो अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य नहीं मान लेता शादी पूर्व मतलब सनातन शास्त्रीय विवाह में हम कम से कम वैश्य(विष्णु) बन ही जाते हैं(इसके साथ जाम्बुदेश:यूरेशिया देश मतलब यूरोप+ एशिया मतलब हिन्द देश के नागरिक और उसके भरतखण्ड=अखंड भारत=भारतवर्ष हिस्से में हम निवेश करते हैं यह भी मानते हैं) और यदि आप सनातन धर्म में मान्य शास्त्रीय रीती से शादी कर लेते हैं तो आप को अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से सदा के लिए कम से कम एक वैस्य होना स्वीकार होना चाहिए नैतिक रूप से। न की ब्राह्मण की पुत्री के नाम के आगे बंदुगुला विशेष रूप से लिखवाना चाहिए परिवार के राजपत्रित अभिलेखों में जबकि परिवार के अन्य लोगों के नाम के आगे वहा बंदुगुला शब्द न लिखवाये हों आप जो वास्तविक रूप से बंदुगुला थे/हैं या सम्बन्ध से स्थापित समतुल्य जाती से हों पूर्व में। 

ब्रह्मा के जेष्ठ पुत्र मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप की दूसरी पत्नी अदिति के सभी पुत्र आदित्य कहलाये जिसमे इंद्र, विश्वकर्मा, वरुण, अग्नि, पवनदेव व् अन्य अन्य और इसी आदित्य के वंसज में चन्द्र देव और सूर्यदेव भी आते हैं जिनसे चन्द्रवंश और सूर्यवंश की नीव पड़ती है और इसी आदित्य के वंसज में सावर्ण ऋषि भी आते है जिनसे सावर्ण गोत्र का प्रादुर्भाव हुआ इस चन्द्र और सूर्यवंश के भाई के रूप में। इसी कश्यप/आदित्य के वंसज में आने वाले सूर्यवंश में इक्शाकुवंश/रघुवंश आता है जिसमे भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था और इसी कश्यप/आदित्य के वंसज में आने वाले चन्द्रवंश के यदुवंश के वृष्णि वंस में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। मै उसी कश्यप गोत्र का सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण हूँ जिससे जब यह सृष्टि नहीं संभालती है तो दुर्वाशा और महादेव जैसी विनाशक परन्तु कल्याणकारी शक्तियों का आह्वान होता है लेकिन इसके साथ युगपरिवर्तन का कास्ट भी झेलना पड़ता है सृजनकारी शक्तियों को। और ऐसे ब्रह्मा के जेष्ठ पुत्र मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप स्वयं वशिष्ठ और गौतम गोत्रीय के चरणो में झुकर सृजनात्मक शक्ति अर्जित करते हैं। ऐसा हैं गुरु वशिष्ठ और महामानव गौतम का गोत्र।

ब्रह्मा के जेष्ठ पुत्र मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप की दूसरी पत्नी अदिति के सभी पुत्र आदित्य कहलाये जिसमे इंद्र, विश्वकर्मा, वरुण, अग्नि, पवनदेव व् अन्य अन्य और इसी आदित्य के वंसज में चन्द्र देव और सूर्यदेव भी आते हैं जिनसे चन्द्रवंश और सूर्यवंश की नीव पड़ती है और इसी आदित्य के वंसज में सावर्ण ऋषि भी आते है जिनसे सावर्ण गोत्र का प्रादुर्भाव हुआ इस चन्द्र और सूर्यवंश के भाई के रूप में। इसी कश्यप/आदित्य के वंसज में आने वाले सूर्यवंश में इक्शाकुवंश/रघुवंश आता है जिसमे भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था और इसी कश्यप/आदित्य के वंसज में आने वाले चन्द्रवंश के यदुवंश के वृष्णि वंस में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। मै उसी कश्यप गोत्र का सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण हूँ जिससे जब यह सृष्टि नहीं संभालती है तो दुर्वाशा और महादेव जैसी विनाशक परन्तु कल्याणकारी शक्तियों का आह्वान होता है लेकिन इसके साथ युगपरिवर्तन का कास्ट भी झेलना पड़ता है सृजनकारी शक्तियों को। और ऐसे ब्रह्मा के जेष्ठ पुत्र मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप स्वयं वशिष्ठ और गौतम गोत्रीय के चरणो में झुकर सृजनात्मक शक्ति अर्जित करते हैं। ऐसा हैं गुरु वशिष्ठ और महामानव गौतम का गोत्र।


Wednesday, August 27, 2014

तुम्हारी विश्व शक्ति तुंझे मुबारक पर अपना भला चाहते हो तो भविष्य में बिशुनपुर-जौनपुर-223103 और रामपुर-आजमगढ़-223225 पर हाँथ न लगाइयेगा नहीं तो कुछ भी हो सकता है तुम्हारी जुआड़ टेक्नोलॉजी अब नहीं काम कर पाएगी।

 तुम्हारी विश्व शक्ति तुंझे मुबारक पर अपना भला चाहते हो तो भविष्य में बिशुनपुर-जौनपुर-223103 और रामपुर-आजमगढ़-223225 पर हाँथ न लगाइयेगा नहीं तो कुछ भी हो सकता है तुम्हारी जुआड़ टेक्नोलॉजी अब नहीं काम कर पाएगी।

पिछले क्रम में आगे बढ़ाते हुए कुछ लोग हिन्दू तथा कथित दलित(क्योंकि वह दलित वास्तव में है नहीं केवल कहा जा रहा है या स्वयं वह अपने निजी स्वार्थ हेतु अपने क दलित कहता है) नेता का पाँव छूने को लेकर ब्राह्मण नेताओं की आलोचना करते हैं पर वे अपने उस कर्म को भूल जाते हैं जिसके हेतु एक सर्वोच्च विश्वविद्यालय की विश्वविद्यालय के एक विभाग विशेष में शीर्ष स्थान रखने वाली छात्रा के माता-पिता जो उत्तर भारत के सर्वोच्च ब्राह्मणों में आते हैं और पेशे से डॉक्टर और शिक्षक भी हैं और पुत्र भी डॉक्टर है के द्वारा दक्षिण भारत के एक ईसाई दलित तुल्य बंदुगुला परिवार का अपने सम्बन्धियों सहित कर्णपुर के एसेल पैलेस में पाँव पखार उसी विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान रखने वाली कन्या का कन्यादान करने को बाध्य किया जाता है अपने संरक्षण में कुटिल प्रेम प्रसंग चलवाकर।---------मै पुनः कहता हूँ की जब 10 वर्ष पूर्व एक दलित/ईसाई दलित द्वारा यह लव जेहाद किया जाता है तो वह मान्य है और बंदुगुला परिवार रिस्तेदार और ब्राह्मण तुल्य हो जाता है पर जब मुस्लिम करता है तो रशूखदार दलित और ईसाई दोनों को अच्छा नहीं लग रहा है। -------मुझे भी न तब अच्छा लगा था और न अब अच्छा लग रहा है जिसमे एक ईसाई और दलित की लड़की के साथ भी हो रहा है। और तभी मेरी सीख है की अपने घर की लक्ष्मी को सुसंस्कृत और शिक्षित बनाइये अपने समाज के सभ्य लोगों की बहु योग्य बनने के लिए आप चाहे जिस जाती और धर्म से हो और तभी आप का भी सम्मान बचेगा और समाज के लोग भी ससम्मान शांति से जीवित रह पाएंगे।--------कुछ लोग अपने को ब्रह्मा समझते थे प्रयागराज में पर उनको आभास तक नहीं था की ऐसा प्रायोजित है लेकिन मुझे स्वप्न में ही आभास हुआ था और संकेत भी दिया गया 11 को विश्व व्यापक सन्देश द्वारा की यह बिशुनपुर-जौनपुर और रामपुर है लेकिन उसके बाद भी जब नहीं रुकने वाला तो मै 2003 में प्रयागराज से जाने वाला था लेकिन तब प्रयागराज के किशी मेधावी में प्रयागराज-काशी से होने वाले विस्व परिवर्तन की धुरी बनने के लिए मेरा स्थान लेने की क्षमता न होने से मुझे रोकने की जुआड़ टेक्नोलॉजी अपनाई गयी और मेरे परमगुरु परमेश्वर मां श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्र और मेरे परमपितामह महादेव शिव श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय से संपर्क कर प्रयागराज में बने रहने को आदेशित किया जाता है और मई यही का रह गया और उस घटना विशेष को अंजाम दिया गया। अप्रत्यक्ष रूप से भी मई उस घटना को रुकवा देता पर उसके लिए कर्णपुर ने मामा से अनुरोध किया था की किशी की कन्या के जीवन के साथ खिलवाड़ मत करो। -----------जब कोई केवल किशी की कन्या कोई रह गया तो मेरा उससे क्या सम्बन्ध पर मई समाज के ठीकेदारों को आगाह कर रहा की मेरी शक्ति को तोलने वाला कोई अब हजारों वर्ष में जन्म लेगा। अतः प्रयागराज में हर किशी के द्वारा ट्रेनिंग पाये छांगू और मांगू से मेरी तुलना न कीजिये इसी में आप लोगों का भला है।

पिछले क्रम में आगे बढ़ाते हुए कुछ लोग हिन्दू तथा कथित दलित(क्योंकि वह दलित वास्तव में है नहीं केवल कहा जा रहा है या स्वयं वह अपने निजी स्वार्थ हेतु अपने क दलित कहता है) नेता का पाँव छूने को लेकर ब्राह्मण नेताओं की आलोचना करते हैं पर वे अपने उस कर्म को भूल जाते हैं जिसके हेतु एक सर्वोच्च विश्वविद्यालय की विश्वविद्यालय के एक विभाग विशेष में शीर्ष स्थान रखने वाली छात्रा के माता-पिता जो उत्तर भारत केसर्वोच्च ब्राह्मणों में आते हैं और पेशे से डॉक्टर और शिक्षक भी हैं और पुत्र भी डॉक्टर है के द्वारा दक्षिण भारत के एक ईसाई दलित तुल्य बंदुगुला परिवार का अपने सम्बन्धियों सहित कर्णपुर के एसेल पैलेस में पाँव पखार उसी विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान रखने वाली कन्या का कन्यादान करने को बाध्य किया जाता है अपने संरक्षण में कुटिल प्रेम प्रसंग चलवाकर।---------मै पुनः कहता हूँ की जब 10 वर्ष पूर्व एक दलित/ईसाई दलित द्वारा यह लव जेहाद किया जाता है तो वह मान्य है और बंदुगुला परिवार रिस्तेदार और ब्राह्मण तुल्य हो जाता है पर जब मुस्लिम करता है तो रशूखदार दलित और ईसाई दोनों को अच्छा नहीं लग रहा है। -------मुझे भी न तब अच्छा लगा था और न अब अच्छा लग रहा है जिसमे एक ईसाई और दलित की लड़की के साथ भी हो रहा है। और तभी मेरी सीख है की अपने घर की लक्ष्मी को सुसंस्कृत और शिक्षित बनाइये अपने समाज के सभ्य लोगों की बहु योग्य बनने के लिए आप चाहे जिस जाती और धर्म से हो और तभी आप का भी सम्मान बचेगा और समाज के लोग भी ससम्मान शांति से जीवित रह पाएंगे।--------कुछ लोग अपने को ब्रह्मा समझते थे प्रयागराज में पर उनको आभास तक नहीं था की ऐसा प्रायोजित है लेकिन मुझे स्वप्न में ही आभास हुआ था और संकेत भी दिया गया 11 को विश्व व्यापक सन्देश द्वारा की यह बिशुनपुर-जौनपुर और रामपुर है लेकिन उसके बाद भी जब नहीं रुकने वाला तो मै 2003 में प्रयागराज से जाने वाला था लेकिन तब प्रयागराज के किशी मेधावी में प्रयागराज-काशी से होने वाले विस्व परिवर्तन की धुरी बनने के लिए मेरा स्थान लेने की क्षमता न होने से मुझे रोकने की जुआड़ टेक्नोलॉजी अपनाई गयी और मेरे परमगुरु परमेश्वर मां श्रद्धेय श्री श्रीधर मिश्र और मेरे परमपितामह महादेव शिव श्रद्धेय डॉ प्रेम चंद पाण्डेय से संपर्क कर प्रयागराज में बने रहने को आदेशित किया जाता है और मई यही का रह गया और उस घटना विशेष को अंजाम दिया गया। अप्रत्यक्ष रूप से भी मई उस घटना को रुकवा देता पर उसके लिए कर्णपुर ने मामा से अनुरोध किया था की किशी की कन्या के जीवन के साथ खिलवाड़ मत करो। -----------जब कोई केवल किशी की कन्या कोई रह गया तो मेरा उससे क्या सम्बन्ध पर मई समाज के ठीकेदारों को आगाह कर रहा की मेरी शक्ति को तोलने वाला कोई अब हजारों वर्ष में जन्म लेगा। अतः प्रयागराज में हर किशी के द्वारा ट्रेनिंग पाये छांगू और मांगू से मेरी तुलना न कीजिये इसी में आप लोगों का भला है।

Tuesday, August 26, 2014

जहां तक मेधा शक्ति की बात है वह इस केदारेश्वर बनर्जी केंद्र ही नहीं मेघनाद सहा केंद्र पर भी आज के दिन तक शैक्षिक रूप से सबसे अच्छी सम्पूर्ण मेरिट गौतम गोत्रीय अंशु प्रकाश मिश्रा की ही रही है शिक्षको से लेकर शोधकर्ता तक जो केंद्रीय जल आयोग, भारत सरकार में कार्यरत है और आशा हा की बहुत दिनों तक रहेगी भी।

जहां तक मेधा शक्ति की बात है वह इस केदारेश्वर बनर्जी केंद्र ही नहीं मेघनाद सहा केंद्र पर भी आज के दिन तक शैक्षिक रूप से सबसे अच्छी सम्पूर्ण मेरिट गौतम गोत्रीय अंशु प्रकाश मिश्रा की ही रही है शिक्षको से लेकर शोधकर्ता तक जो केंद्रीय जल आयोग, भारत सरकार  में कार्यरत है और आशा हा की बहुत दिनों तक रहेगी भी।  

सनातन धर्म में शास्त्रीय विवाह में कम से कम हर किशी को वैस्य (गृहस्थ) बन्ना मान्य होना चाहिए मतलब विष्णु बने बिना शादी हो ही नहीं पाती सभी जातियों के लिए और शर्मा बने बिना शादी हो ही नहीं पाती कम से कम ब्राह्मणों के लिए।


 

आज से 8-9 वर्ष पूर्व एक-दलित ईसाई तुल्य बंदुगुला समुदाय का तथाकथित दलित एक ब्राहण की लड़की से शादी करता है प्रेम प्रपंच कर 2001-2005 तक उसी ब्राह्मण के घर ही आकर हिन्दू शास्त्रीय नियमों से विवाह रचा लेता है (यह एक ईसाई समुदाय है जो किशी भी जाती- धर्म की रीती से हुई शादी मान्य करता है अन्यथा एक हिन्दू दलित भी इस रीती से शादी इसलिए नहीं करता की उसे कम से कम एक ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य इस रीती से बना लिया जाएगा और सरकारी सहायता बंद हो जाएगी दलित के नाम पर:सनातन धर्म में शास्त्रीय विवाह में कम से कम हर किशी को वैस्य (गृहस्थ) बन्ना मान्य होना चाहिए मतलब विष्णु बने बिना शादी हो ही नहीं पाती सभी जातियों के लिए और शर्मा कम से मक ब्राह्मणों के लिए। ) और अपने पैतृक अभिलेख में परिवार के किशी भी सदस्य के नाम के आगे बंदुगुला शब्द जाती सूचक के रूप में नहीं जुड़वाता किन्तु उस ब्राह्मण की पुत्री जो उसकी बहु बन गयी है उसके नाम के आगे विशेष रूप से बंदुगुला शब्द जुड़वाता है। --------मै पूंछता हूँ की क्या यह एक जातिवाद या धर्म वाद नहीं है जो की बंदुगुला शब्द विशेस रूप से उसी के नाम के साथ लिखवाया गया। -----------क्या लव जेहाद केवल मुस्लिम के लिए ही है? उस सन्दर्भ में नहीं था और जातिवाद मेरे लिए ही है क्योंकि ऐसा प्रतिशोध पूर्ण कार्य मै घृणित कार्य समझ मई बचपन से ही निंदा करता आया हूँ। ---------पुनः दुहराता हूँ की संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नस्ल है अतः आप अपने घर की लक्ष्मी जी को स्वयं अपने समुदाय के हित हेतु संस्कारित और शिक्षित बनाइये और सर्वोच्च स्थान कक्षा में दिलवाइए दूसरे का घर न उजाड़िये नही तो आप स्वयं उजड़ जाएंगे। -----------इस सम्बन्ध में मै प्रोफेसर अशोक कुमार (राय अन्तर्निहित शब्द), शुक्राचार्य, परशुराम और बलराम की प्रतिक्रिया चाहते हैं जो ब्राह्मण समाज का अधिकार लेकर जीत हैं और ब्राह्मण समाज के ठीकेदार थे उस समय इस केदारेश्वर से इसे सबंधित होने के कारन। ----ब्राह्मण की लड़की को मूर्ख बनाया जा सकता है पर ब्राह्मण कुमार को नहीं और वह ब्रामण कुमार जो कम से कम पुलिस अधीक्षक या उपाधीक्षक तो अवश्य बनने की क्षमता रखता था यदि शिक्षा और शोध में न आया होता।>>>>>>>>>>>>>.. जो कृष्ण राधा से शादी के लिए पागल हो वह मूर्ख है पर वह कृष्ण मूर्ख नहीं जो राधा के साथ अन्याय हो जाने से दुखी हो। देवकी नंदन कृष्ण की राधा स्वयं कृष्ण के समान कुल में यशोदा माँ के रिस्तेदार के घर में व्याही गयी थीं।

आज से 8-9 वर्ष पूर्व एक-दलित ईसाई तुल्य बंदुगुला समुदाय का तथाकथित दलित एक ब्राहण की लड़की से शादी करता है प्रेम प्रपंच कर 2001-2005 तक उसी ब्राह्मण के घर ही आकर हिन्दू शास्त्रीय नियमों से विवाह रचा लेता है (यह एक ईसाई समुदाय है जो किशी भी जाती- धर्म की रीती से हुई शादी मान्य करता है अन्यथा एक हिन्दू दलित भी इस रीती से शादी इसलिए नहीं करता की उसे कम से कम एक ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य इस रीती से बना लिया जाएगा और सरकारी सहायता बंद हो जाएगी दलित के नाम पर:
सनातन धर्म में शास्त्रीय विवाह में कम से कम हर किशी को वैस्य (गृहस्थ) बन्ना मान्य होना चाहिए मतलब विष्णु  बने बिना शादी हो ही नहीं पाती सभी जातियों के लिए और शर्मा कम से मक ब्राह्मणों के लिए) और अपने पैतृक अभिलेख में परिवार के किशी भी सदस्य के नाम के आगे बंदुगुला शब्द जाती सूचक के रूप में नहीं जुड़वाता किन्तु उस ब्राह्मण की पुत्री जो उसकी बहु बन गयी है उसके नाम के आगे विशेष रूप से बंदुगुला शब्द जुड़वाता है। --------मै पूंछता हूँ की क्या यह एक जातिवाद या धर्म वाद नहीं है जो की बंदुगुला शब्द विशेस रूप से उसी के नाम के साथ लिखवाया गया। -----------क्या लव जेहाद केवल मुस्लिम के लिए ही है? उस सन्दर्भ में नहीं था और जातिवाद मेरे लिए ही है क्योंकि ऐसा प्रतिशोध पूर्ण कार्य मै घृणित कार्य समझ मई बचपन से ही निंदा करता आया हूँ। ---------पुनः दुहराता हूँ की संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नस्ल है अतः आप अपने घर की लक्ष्मी जी को स्वयं अपने समुदाय के हित हेतु संस्कारित और शिक्षित बनाइये और सर्वोच्च स्थान कक्षा में दिलवाइए दूसरे का घर न उजाड़िये नही तो आप स्वयं उजड़ जाएंगे। -----------इस सम्बन्ध में मै प्रोफेसर अशोक कुमार (राय अन्तर्निहित शब्द), शुक्राचार्य, परशुराम और बलराम की प्रतिक्रिया चाहते हैं जो ब्राह्मण समाज का अधिकार लेकर जीते हैं और ब्राह्मण समाज के ठीकेदार थे उस समय इस केदारेश्वर से इसे सबंधित होने के कारन। ----ब्राह्मण की लड़की को मूर्ख बनाया जा सकता है पर ब्राह्मण कुमार को नहीं और वह ब्रामण कुमार जो कम से कम पुलिस अधीक्षक या उपाधीक्षक तो अवश्य बनने की क्षमता रखता था यदि शिक्षा और शोध में न आया होता।>>>>>>>>>>>>>.. जो कृष्ण राधा से शादी के लिए पागल हो वह मूर्ख है पर वह कृष्ण मूर्ख नहीं जो राधा के साथ अन्याय हो जाने से दुखी हो। देवकी नंदन कृष्ण की राधा स्वयं कृष्ण के समान कुल में यशोदा माँ के रिस्तेदार के घर में व्याही गयी थीं।
 सनातन धर्म में शास्त्रीय विवाह में कम से कम हर किशी को वैस्य (गृहस्थ) बन्ना मान्य होना चाहिए मतलब विष्णु बने बिना शादी हो ही नहीं पाती सभी जातियों के लिए और शर्मा बने बिना शादी हो ही नहीं पाती कम से कम ब्राह्मणों के लिए।
आरक्षण की सुविधा लेकर आई. आई. टी  में और उसके बाद विदेश अध्ध्य्यन करने  वालों के लिए देशीय सीमा ख़त्म होने पर नियम बदल जाते हों पर पुनः देश में बिना विदेशी नागरिकता लिए शास्त्रीय विवाह के माने क्या बदल जाते हैं? क्या ऐसे में सरकारी दस्तावेज में आरक्षित श्रेणी में नाम दर्ज करवाना अपने जाती सूचक शब्द के साथ विशेष कर अपनी पत्नी का ही जिसमे और किसी के नाम के आगे जाती सूचक शब्द आप ने नहीं लिखवाया है तो क्या यह जातिवाद/धर्मवाद में नहीं आता है?  और क्या  मै सजातीय विवाह जहां तक हो सके अधिक-से- अधिक करने की सलाह दूँ तो वह जाती  धर्म वाद है? 

काले गोर का युद्ध मुझसे मत करो मै क्योंकि मई उसका हिस्सा नहीं वरन मै पूरे ब्रह्माण्ड/विश्व/देश/घर की समूर्ण शक्ति और संप्रभुता का 1 /8 भाग काले लोगों को देने को तैयार हूँ वे चाहे मिलकर रहें मेरे घरों में या अलग। अत्यधिक सांख्यवृद्धि से अधिकार नहीं मिलाने वाला है यह संसार को सुन्दर बनाये रखने का भी एक तकाजा है जिसे वे भी सुन्दर ही देखना चाहते हैं और मेरे पास अनगिनत प्रमाण है की उनको भी सुंदरता उतनी ही प्यारी है जितनी हमको।-------यह सिद्धांत तब मेरा है जब की मेरी कुल देवी देवकाली हैं जो लक्ष्मी, सरस्वती और पारवती की सामूहिक शक्ति रखती हैं पर काले ही स्वरुप की ही होती हैं।

काले गोर का युद्ध मुझसे मत करो मै क्योंकि मई उसका हिस्सा नहीं वरन मै पूरे ब्रह्माण्ड/विश्व/देश/घर की समूर्ण शक्ति और संप्रभुता का 1 /8 भाग काले लोगों को देने को तैयार हूँ वे चाहे मिलकर रहें मेरे घरों में या अलग। अत्यधिक सांख्यवृद्धि से अधिकार नहीं मिलाने वाला है यह संसार को सुन्दर बनाये रखने का भी एक तकाजा है जिसे वे भी सुन्दर ही देखना चाहते हैं और मेरे पास अनगिनत प्रमाण है की उनको भी सुंदरता उतनी ही प्यारी है जितनी हमको।-------यह सिद्धांत तब मेरा है जब की मेरी कुल देवी देवकाली हैं जो लक्ष्मी, सरस्वती और पारवती की सामूहिक शक्ति रखती हैं पर काले ही स्वरुप की ही होती हैं।

जिसने 2001 से सतत प्रयास करते हुए 2008 में सप्रमाण अशोक चक्र तोड़ा वह अशोक कुमार (राय) का शिष्य और जिसने केदारेश्वर का ही विरोध किया वे परशुराम और शुक्राचार्य दोनों केदारेश्वर के ही शिष्य तो दंड किसे दिया जाय यह विश्व समाज को तह करना है मुझे नहीं। -------मेरा काम केवल सम्बन्ध स्थापित करवाना था और मेरा दोनों परिवार प्रोफेसर जोशी से बड़ा ऋषि राजनीती करने वाला है जो सब कार्य स्वयं करने की मुझे शक्ति दिया और उसे मै सार्वजनिक रूप से लिख भी रहा हूँ।

जिसने 2001 से सतत प्रयास करते हुए 2008 में सप्रमाण अशोक चक्र तोड़ा वह अशोक कुमार (राय) का शिष्य और जिसने केदारेश्वर का ही विरोध किया वे परशुराम और शुक्राचार्य दोनों केदारेश्वर के ही शिष्य तो दंड किसे दिया जाय यह विश्व समाज को तह करना है मुझे नहीं। -------मेरा काम केवल सम्बन्ध स्थापित करवाना था और मेरा दोनों परिवार प्रोफेसर जोशी से बड़ा ऋषि राजनीती करने वाला है जो सब कार्य स्वयं करने की मुझे शक्ति दिया और उसे मै सार्वजनिक रूप से लिख भी रहा हूँ।

विश्व का कोई भी धार्मिक नेता बताये की शुक्राचार्य ने दैत्यों से देवताओं की लड़ाई करवाने में सहयोग करने के अलावा कोई समाजहित में नवनिर्माण किया हो? वे तो दैत्यों को देवताओ के बनाये साम्राज्य पर केवल अधिकार की माँग करना और लड़ाना सिखाया हैं सदा से उनको क्या पता की नवनिर्माण में कितना कस्ट होता है और उसमे कितना अपमान और तिरस्कार सहकर लगे रहना पड़ता है सब कुछ त्याग कर एक कच्छप की चाल से परहित के भाव से जिसमे कुछ स्वहित भी जुड़ा रहता है।

विश्व का कोई भी धार्मिक नेता बताये की शुक्राचार्य ने दैत्यों से देवताओं की लड़ाई करवाने में सहयोग करने के अलावा कोई समाजहित में नवनिर्माण किया हो? वे तो दैत्यों को देवताओ के बनाये साम्राज्य पर केवल अधिकार की माँग करना और लड़ाना सिखाया हैं सदा से उनको क्या पता की नवनिर्माण में कितना कस्ट होता है और उसमे कितना अपमान और तिरस्कार सहकर लगे रहना पड़ता है सब कुछ त्याग कर एक कच्छप की चाल से परहित के भाव से जिसमे कुछ स्वहित भी जुड़ा रहता है।

पूरे विश्व में हर वैज्ञानिक और शैक्षणिक संस्थान में किशी चेयर के लिए योग्य वैज्ञानिक और शिक्षक मिल जाते हैं पर प्रयाग विश्वविद्यालय में मेघनाद साहा चेयर है जिस पद के लिए योग्य व्यक्ति का अकाल है और अकाल है तो ऐसा क्या है इस नाम और चेयर में जो खाली ही पडी रहती है?

पूरे विश्व में हर वैज्ञानिक और शैक्षणिक संस्थान में किशी चेयर के लिए योग्य वैज्ञानिक और शिक्षक मिल जाते हैं पर प्रयाग विश्वविद्यालय में मेघनाद साहा चेयर है जिस पद के लिए योग्य व्यक्ति का अकाल है और अकाल है तो ऐसा क्या है इस नाम और चेयर में जो खाली ही पडी रहती है?

Monday, August 25, 2014

प्रोफेसर राम-गोपाल और प्रोफेसर जोशी---------शुक्राचार्य जो आपके गोत्रीय है और आप लोगों के ही अप्रत्यक्ष कार्यवाहक हैं वे अपने शिष्यकुल से सम्बंधित मेघनाद जैसे विभूति के शब्द नाम से नामित बने केंद्र मेघनाद साहा अंतरिक्ष केंद्र में स्थायी शिक्षक पद लाने का प्रयास करते तो शायद यह एक सार्थक कदम होता अन्यथा उनको पता होना चाहिए की महादेव केदारेश्वर उनके गुरु थे और वे अपने अनिस्ट के लिए अपने गुरु से न टकराएं और स्वयं उन्ही को मूर्ख बनाने का प्रयत्न न करें। ---मेरी यह सलाह आप उनतक पहुंचा दीजिये नहीं तो पुनः अगले 14 वर्ष में केदारेश्वर उनको क्षमा करने योग्य स्वयं नहीं रहेंगे और क्षमा की सीमा पार हो जाएगी अगर यही रवैया रहा उनका।

प्रोफेसर राम-गोपाल और प्रोफेसर जोशी---------शुक्राचार्य जो आपके गोत्रीय है और आप लोगों के ही अप्रत्यक्ष कार्यवाहक हैं वे अपने शिष्यकुल से सम्बंधित मेघनाद जैसे विभूति के शब्द नाम से नामित बने केंद्र मेघनाद साहा अंतरिक्ष केंद्र में स्थायी शिक्षक पद लाने का प्रयास करते तो शायद यह एक सार्थक कदम होता अन्यथा उनको पता होना चाहिए की महादेव केदारेश्वर उनके गुरु थे और वे अपने अनिस्ट के लिए अपने गुरु से न टकराएं और स्वयं उन्ही को मूर्ख बनाने का प्रयत्न न करें। ---मेरी यह सलाह आप उनतक पहुंचा दीजिये नहीं तो पुनः अगले 14 वर्ष में केदारेश्वर उनको क्षमा करने योग्य स्वयं नहीं रहेंगे और क्षमा की सीमा पार हो जाएगी अगर यही रवैया रहा उनका।

जब मै कह दिया जी 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) और 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) दोनों मेरी संतान हो गए तो किशी से मेरा दुराव रह ही कहाँ गया और मै किस वैश्य से कम रहा जिसके घर विष्णुकांत और कृष्णकांत आ गए हों। पर गलत का विरोध तो शब्दों से करूंगा ही और उसे चरितार्थ कोई दूसरा करेगा ही जो मेरे शब्दों से प्रभावित होगा और मेरे शब्द अंदर से उसके अंदर सत्य तक पहुँचने की जिज्ञाषा जाहिर करेंगे कर्तव्य के रूप में।>>>>>>>>>>>>विष्णुकांत का राशिनाम जन्म तिथि और स्थान: वेंकटेश 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) Nazareth Hospital Allahabad, 13/A, Nr Haathi Park, Company Bagh, Kamla Nehru Road, Allahabad – 211002. (Christian Minority Hospital)>>>>>>>>> कृष्णकांत का राशिनाम, जन्मतिथि और स्थान: वाशुदेव 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) SAKET MATERNITY & NURSING HOME (P) TLD. 1203, Bhaghambari Housing Scheme, Kidwai Nagar, Allahpur,. Allahabad - 211006, U.P., India. (Hospital managed by Hindu)

जब मै कह दिया जी 30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) और 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) दोनों मेरी संतान हो गए तो किशी से मेरा दुराव रह ही कहाँ गया और मै किस वैश्य से कम रहा जिसके घर विष्णुकांत और कृष्णकांत आ गए हों। पर गलत का विरोध तो शब्दों से करूंगा ही और उसे चरितार्थ कोई दूसरा करेगा ही जो मेरे शब्दों से प्रभावित होगा और मेरे शब्द अंदर से उसके अंदर सत्य तक पहुँचने की जिज्ञाषा जाहिर करेंगे कर्तव्य के रूप में।>>>>>>>>>>>>विष्णुकांत का राशिनाम जन्म तिथि और स्थान:  वेंकटेश  30(30-9-2010:श्रीराम जन्मभूमि सम्बन्धी निर्णय जो अधिकतम सकारात्मक रहा) Nazareth Hospital Allahabad, 13/A, Nr Haathi Park, Company Bagh, Kamla Nehru Road, Allahabad – 211002. (Christian Minority Hospital)>>>>>>>>> कृष्णकांत का राशिनाम, जन्मतिथि और स्थान: वाशुदेव 28 (28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्मास्टमी ) SAKET MATERNITY & NURSING HOME (P) TLD. 1203, Bhaghambari Housing Scheme, Kidwai Nagar, Allahpur,. Allahabad - 211006, U.P., India. (Hospital managed by Hindu)

First Mahadev Shiva comes then Narayan Vishnu Comes and Then Srishtikarta Brahma comes in the existence in this Universe from the Parambrahma Parameshwar(The form of highest Energy which included all the matter living and none-living of this Universe a whole).--------But Vishnu called the Gurushreshtha or Paramguru in the Tridev although the knowledge of Brahma is Highest. Guru in other Devas is Guru Brahaspati and thus Vishnu is treated as the Gurubrahaspati in Tridev and also in all Devas and Thus Guru Brahspati comes at the second position in Gurus after Vishnu. (Important to note that Daityas Guru Sukracharya was more meritorious than the Guru Brahspati but by culture he was affected with the Daityas and avails less honor than Guru Brahaspati).

First Mahadev Shiva comes then Narayan Vishnu Comes and Then Srishtikarta Brahma comes in the existence in this Universe from the Parambrahma Parameshwar(The form of highest Energy which included all the matter living and none-living of this Universe a whole).--------But Vishnu called the Gurushreshtha or Paramguru in the Tridev although the knowledge of Brahma is Highest. Guru in other Devas is Guru Brahaspati and thus Vishnu is treated as the Gurubrahaspati in Tridev and also in all Devas and Thus Guru Brahspati comes at the second position in Gurus after Vishnu. (Important to note that Daityas Guru Sukracharya was more meritorious than the Guru Brahspati but by culture he was affected with the Daityas and avails less honor than Guru Brahaspati).

दुनिया में आप सबको एक ही धरातल पर कैसे ला सकते हैं: मेरे जिस परिवार ने 1957 से लेकर आज तक जो जीवन जिया है एक गाँव विशेष के सर्वोच्च कुल से होकर और मेरे स्वयं के पिता श्री प्रदीप(सूर्यकांत:राम-जानकी) कुमार पाण्डेय उस अवस्था में हैं 40 वर्ष से जिसको मै मात्र 14 वर्ष (2000-2014) तक विश्व के उच्चतम सांस्कृतिक केंद्र तथा शिक्षित समाज में आत्मनिर्भर जीवन पाकर भी नहीं बर्दास्त कर सका उस अवस्था में वे आज भी जीवित है। मेरे में उनमे एक ही अंतर है की मेरा मातृत्व सनातन गौतम गोत्र है और उनका सनातन वशिष्ठ गोत्र और मैं उन्ही के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय मामा के यहां जन्म लिया हूँ और वे हम दोनों के सनातन कश्यप गोत्रीय घर में। ----------मेरे बाबा अपने खानदान के गुरु और ताऊ(बड़े पिता) के रक्षार्थ समर्पित हुए जिनका जन्म प्रोफेसर जोशी के समतुल्य हुआ था 1933-1934. इस प्रकार मै तेन पीढ़ी की ऊर्जा लेकर जीवित हूँ और आप उसे जमीदोज करना चाहते हैं या मेरा जीवन आप अपने अनुसार किसी भी तोल रहे हैं रहे है और जिसका मन चाहे उसी से मेरे को सामना करवा रहे हैं।---------अब केवल एक रास्ता है की दुनिया में जो सबसे शक्तिशाली हो या सबसे बुद्धिमान हो या सबसे समृद्ध हो उन तीनों को(क्योंकि मई तीन पीढ़ी की शक्ति लिए हूँ तो उनको भी तीन होना चाहिए पर वे वाह्य दुनिया के किशी व्यक्ति के संपर्क में मेरी तरह न रहें उस दौरान) मेरे साथ 1 वर्स के लिए एक साथ भेज दीजिये मै उसे मेरे पिता महत्त्व समझाते हुए उनके चरण को छूने को बाध्य न कर दूँ तो यह जीवन त्याग दूंगा सशरीर।-----वैसे भी जान लीजिये की दुनिया में यदि ब्रह्मा हैं तो उनको मेरे शिवा कोई ब्राह्मण नहीं मिला जो पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य का गुण रखता था प्रयागराज-काशी/अल्लाहबाद-वाराणसी में विश्व परिवर्तन की धुरी बनने के लिए (2000 -2014 के दौरान)।

दुनिया में आप सबको एक ही धरातल पर कैसे ला सकते हैं: मेरे जिस परिवार ने 1957 से लेकर आज तक जो जीवन जिया है एक गाँव विशेष के सर्वोच्च कुल से होकर और मेरे स्वयं के पिता श्री प्रदीप(सूर्यकांत:राम-जानकी) कुमार पाण्डेय उस अवस्था में हैं 40 वर्ष से जिसको मै मात्र 14 वर्ष (2000-2014) तक विश्व के उच्चतम सांस्कृतिक केंद्र तथा शिक्षित समाज में आत्मनिर्भर जीवन पाकर भी नहीं बर्दास्त कर सका उस अवस्था में वे आज भी जीवित है। मेरे में उनमे एक ही अंतर है की मेरा मातृत्व सनातन गौतम गोत्र है और उनका सनातन वशिष्ठ गोत्र और मैं उन्ही के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय मामा के यहां जन्म लिया हूँ और वे हम दोनों के सनातन कश्यप गोत्रीय घर में। ----------मेरे बाबा अपने खानदान के गुरु और ताऊ(बड़े पिता) के रक्षार्थ समर्पित हुए जिनका जन्म प्रोफेसर जोशी के समतुल्य हुआ था 1933-1934. इस प्रकार मै तेन पीढ़ी की ऊर्जा लेकर जीवित हूँ और आप उसे जमीदोज करना चाहते हैं या मेरा जीवन आप अपने अनुसार किसी भी तोल रहे हैं रहे है और जिसका मन चाहे उसी से मेरे को सामना करवा रहे हैं।---------अब केवल एक रास्ता है की दुनिया में जो सबसे शक्तिशाली हो या सबसे बुद्धिमान हो या सबसे समृद्ध हो उन तीनों को(क्योंकि मई तीन पीढ़ी की शक्ति लिए हूँ तो उनको भी तीन होना चाहिए पर वे वाह्य दुनिया के किशी व्यक्ति के संपर्क में मेरी तरह न रहें उस दौरान) मेरे साथ 1 वर्स के लिए एक साथ भेज दीजिये मै उसे मेरे पिता महत्त्व समझाते हुए उनके चरण को छूने को बाध्य न कर दूँ तो यह जीवन त्याग दूंगा सशरीर।-----वैसे भी जान लीजिये की दुनिया में यदि ब्रह्मा हैं तो उनको मेरे शिवा कोई ब्राह्मण नहीं मिला जो पूर्ण ब्राह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य का गुण रखता था प्रयागराज-काशी/अल्लाहबाद-वाराणसी में विश्व परिवर्तन की धुरी बनने के लिए (2000 -2014 के दौरान)।

Sunday, August 24, 2014

सबसे कठिन है मानव बनकर जीना, उससे भी कठिन है सम्मान सहित जीना, उससे भी कठिन है एक सज्जन व्यक्ति बनकर जीना, और सबसे कठिन है एक ब्राह्मण बनकर जीना जिसका जीवन ही त्याग हो जिसमे केवल तपश्या और बलिदान ही मुक्ति न मिल पाती हो। अतः एक ब्राह्मण में कम एक सज्जन व्यक्ति का गन अपने आप समाहित होता है और अगर ऐसा नहीं है रावण की तरह तो वह रावण की तरह एक राक्षस ही कहलाता है। -------पर अगर हम जब जन्म से ही किशी को ब्राह्मण मानने से ऊपर उठकर कर्म से ब्राह्मण/शिक्षक की चर्चा में आते हैं मतलब सनातन ब्राह्मण संस्कृति से आधुनिक ब्राह्मण की दुनिया में आते हैं जिनको सरकारें तैयार कर रही है और जो जन्म से लगभग सभी जाती और सभी धर्म से हैं तो उनके चरित्र में सबसे बड़ी गिरावट आ गयी है उन लोगों की तुलना में जिनको सरकारें एक क्षत्रिय/सुरक्षा कर्मी बना रही हैं या वैस्य/उद्यमी बना रही हैं।---------तो आधुनिक ब्राह्मण मित्रों आप का चरित्र आज के वर्तमान समाज से परिलक्षित हो रहा है जिसे आप के रहते हुए तैयार किया जा रहा है तो ऐसे में आप सनातन ब्राह्मण संस्कृति मतलब जन्म से ब्राह्मण समाज पर आप किस तरह से अंगुली उठाते थे। आप ने पद हथियाया है मतलब अधिकार हथियाया है पर संस्कृति नहीं हथियाया मतलब आप अपने कर्त्तव्य को भूल रहे हैं जो एक ब्राह्मण होते हुए आप को करना चाहिए और आप इससे अपना बच रहे हैं और दूसरों के भरोसे छोड़ रहे हैं अपने क्षणिक स्वार्थ को बचाये रखने के लिए लेकिन आप और आप की संतानें भी इससे प्रभावित हो रही हैं अतएव आप सनातन ब्राह्मणों की तरह समाज दिशा दीजिये और भारतीय संस्कृति और विश्व संस्कृति को बचाने हेतु सब समश्याओं से लोहा लीजिये और विश्व तथा भारतीय संस्कृति को अक्षुण् रखने में अपना अमूल्य योगदान और जीवन दीजिये तथा त्याग की प्रतिमूर्ति बनिए जो बलिदान और तपश्या से भी उच्च स्थान रखता है और एक ब्राह्मण की पहचान है।

सबसे कठिन है मानव बनकर जीना, उससे भी कठिन है सम्मान सहित जीना, उससे भी कठिन है एक सज्जन व्यक्ति बनकर जीना, और सबसे कठिन है एक ब्राह्मण बनकर जीना जिसका जीवन ही त्याग हो जिसमे केवल तपश्या और बलिदान ही मुक्ति न मिल पाती हो। अतः एक ब्राह्मण में कम एक सज्जन व्यक्ति का गन अपने आप समाहित होता है और अगर ऐसा नहीं है रावण की तरह तो वह रावण की तरह एक राक्षस ही कहलाता है। -------पर अगर हम जब जन्म से ही किशी को ब्राह्मण मानने से ऊपर उठकर कर्म से ब्राह्मण/शिक्षक  की चर्चा में आते हैं मतलब सनातन ब्राह्मण संस्कृति से आधुनिक ब्राह्मण की दुनिया में आते हैं जिनको सरकारें तैयार कर रही है और जो जन्म से लगभग सभी जाती और सभी धर्म से हैं तो उनके चरित्र में सबसे बड़ी गिरावट आ गयी है उन लोगों की तुलना में जिनको सरकारें एक क्षत्रिय/सुरक्षा कर्मी बना रही हैं या वैस्य/उद्यमी  बना रही हैं।---------तो आधुनिक ब्राह्मण मित्रों आप का चरित्र आज के वर्तमान समाज से परिलक्षित हो रहा है जिसे आप के रहते हुए तैयार किया जा रहा है तो ऐसे में आप सनातन ब्राह्मण संस्कृति मतलब जन्म से ब्राह्मण समाज पर आप किस तरह से अंगुली उठाते थे। आप ने पद हथियाया है मतलब अधिकार हथियाया है पर संस्कृति नहीं हथियाया मतलब आप अपने कर्त्तव्य को भूल रहे हैं जो एक ब्राह्मण होते हुए आप को करना चाहिए और आप इससे अपना बच रहे हैं और दूसरों के भरोसे छोड़ रहे हैं अपने क्षणिक स्वार्थ को बचाये रखने के लिए लेकिन आप और आप की संतानें भी इससे प्रभावित हो रही हैं अतएव आप सनातन ब्राह्मणों की तरह समाज दिशा दीजिये और भारतीय संस्कृति और विश्व संस्कृति को बचाने हेतु सब समश्याओं से लोहा लीजिये और विश्व तथा भारतीय संस्कृति को अक्षुण् रखने में अपना अमूल्य योगदान और जीवन दीजिये तथा त्याग की प्रतिमूर्ति बनिए जो बलिदान और तपश्या से भी उच्च स्थान रखता है और एक ब्राह्मण की पहचान है। 

ISWAR PAR SE BHAROSA JISKA UDHA GAYA US RAKSHAS KO SANSAR SE UTHA MANE AUR USAKE BAHKAVE ME KRIPAYA AAP SWAYAM RAKSHAS YA SHAITAN N BANE KYOKI USAKA VARTMAN ASTITV USKE PRARABDH PAR HAI JISKA TVARIT CHHARAN HORAHA HAI

ISWAR PAR SE BHAROSA JISKA UDHA GAYA US RAKSHAS KO SANSAR SE UTHA MANE AUR USAKE BAHKAVE ME KRIPAYA AAP SWAYAM RAKSHAS YA SHAITAN N BANE KYOKI USAKA VARTMAN ASTITV USKE PRARABDH PAR HAI JISKA TVARIT CHHARAN HORAHA HAI

Saturday, August 23, 2014

संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नश्ल की पहचान है और संस्कार चोरी से से नहीं मिलता है वरन इसके लिए सतत प्रयत्न करना पड़ता है पीढ़ी दर-पीढ़ी पर क्षरण जल्दी से हो भी जाता है लेकिन उच्च संस्कार पुनः संभलने की शक्ति देता है। >>>>>>तुलसी भाई के पोस्ट के सन्दर्भ में और तुलसी भाई के समर्थन में: सार्वजनिक भाष्य:>>>>>>>>>>>>>>>>मै भारत समेत विश्व के सभी मूर्खों का मतभेद दूर कर दिया हूँ अपने ब्लॉग में बहुत में बहुत पहले ही और अब पुनः दूर कर देता हूँ: संसार में जब-जब मानव जीवन का प्रारम्भ हुआ है उसमे लडकिया हमेशा ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र दक्ष की ही रही हैं चाहे वह काशी के दक्ष प्रजापति ही रहे हों या अन्य लगभग एक दर्जन दक्ष। अतः इस संसार की सभी लडकिया ब्राह्मण कन्या ही रही हैं केवल सच्चिदानंद विष्णु की अर्धांगिनी लक्ष्मी को छोड़कर (वे समुद्रदेव की पुत्री थी) चाहे वह सती(पारवती) हो जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय महादेव शिव की अर्धांगिनी हों। ---------अतः आप को यदि ज़रा भी विवेक छू गया हो तो इतना समझ लीजिये की जिन लड़कियों की नस्ल आप अच्छी और निम्न पा रहे हैं वह आप जैसे मूर्खों के कुकृत्य और शूद्रता की परिणाम हैं इन हजारों-हजारों वर्षों के दौरान उनके प्रति आचरण का। अतः आप अपनी सीमा में रहिये अन्यथा सर्वनाश निश्चित है एक बार तो महादेव केदारेश्वर और ब्रह्मा मुरली मनोहर ने आप को बचा लिया सर्व विनाश सृस्टि से पर अब आप लोग विशेस रूप से खोज कर मारे जाएंगे और कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा। तुम्हारा सब जातीवाद हम मिटा देंगे उस कश्यप गोत्र में होने के नाते जो ब्रह्मा के प्राकट्य पुत्रों में ज्येष्ठ थे और जिसमे विष्णु के सर्वाधिक अवतार हुए हैं और जिस गोत्र में वे सभी लोग शामिल हैं जिनका कोई धर्म जाती है अथवा नहीं है; या कोई धर्म मानते हैं अथवा नहीं मानते है अथवा किशी भी धर्म से निष्काषित किये गए हैं। अतः मेरे यहां सब मौजूद हैं और सबकी औकात पता है। अतः गोस्त मत समझिए लड़कियों को अन्यथा रेत-रेत कर हलाल करते हुए मारे जाओगे। अगर लड़कियों को गोस्त ही समझते हो सही पर क्या आप अपने घर की लड़की को वैश्यालय भेजना चाहते हो या शैतानी करना चाहते है यदि आप दूसरे की लड़कियों से ही शादी करोगे तो क्योंकि वे आप की लड़कियां दूसरे लड़कों को भी गोस्त समझती होंगी जैसा की आप के संस्कार से प्रतीत होता है।-------------कुछ तो शर्म हैं महानुभाव आप के पास या आप अपना सर्व नास ही चाह रहे हो अपने जीवन से ऊबकर पर आप को इतने आशानी से भी संसार से ऊपर उठने नहीं दिया जाएगा।--------संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नश्ल की पहचान है और संस्कार चोरी से नहीं मिलता है वरन इसके लिए सतत प्रयत्न करना पड़ता है पीढ़ी दर-पीढ़ी पर क्षरण जल्दी से हो भी जाता है लेकिन उच्च संस्कार पुनः संभलने की शक्ति देता है। >>>>.मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नश्ल की पहचान है और संस्कार चोरी से से नहीं मिलता है वरन इसके लिए सतत प्रयत्न करना पड़ता है पीढ़ी दर-पीढ़ी पर क्षरण जल्दी से हो भी जाता है लेकिन उच्च संस्कार पुनः संभलने की शक्ति देता है।
>>>>>>तुलसी भाई के पोस्ट के सन्दर्भ में और तुलसी भाई के समर्थन में: सार्वजनिक भाष्य:>>>>>>>>>>>>>>>>मै भारत समेत विश्व के सभी मूर्खों का मतभेद दूर कर दिया हूँ अपने ब्लॉग में बहुत में बहुत पहले ही और अब पुनः दूर कर देता हूँ: संसार में जब-जब मानव जीवन का प्रारम्भ हुआ है उसमे लडकिया हमेशा ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र दक्ष की ही रही हैं चाहे वह काशी के दक्ष प्रजापति ही रहे हों या अन्य लगभग एक दर्जन दक्ष। अतः इस संसार की सभी लडकिया ब्राह्मण कन्या ही रही हैं केवल सच्चिदानंद विष्णु की अर्धांगिनी लक्ष्मी को छोड़कर (वे समुद्रदेव की पुत्री थी) चाहे वह सती(पारवती) हो जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय महादेव शिव की अर्धांगिनी हों। ---------अतः आप को यदि ज़रा भी विवेक छू गया हो तो इतना समझ लीजिये की जिन लड़कियों की नस्ल आप अच्छी और निम्न पा रहे हैं वह आप जैसे मूर्खों के कुकृत्य और शूद्रता की परिणाम हैं इन हजारों-हजारों वर्षों के दौरान उनके प्रति आचरण का। अतः आप अपनी सीमा में रहिये अन्यथा सर्वनाश निश्चित है एक बार तो महादेव केदारेश्वर और ब्रह्मा मुरली मनोहर ने आप को बचा लिया सर्व विनाश सृस्टि से पर अब आप लोग विशेस रूप से खोज कर मारे जाएंगे और कोई बचाने वाला नहीं मिलेगा। तुम्हारा सब जातीवाद हम मिटा देंगे उस कश्यप गोत्र में होने के नाते जो ब्रह्मा के प्राकट्य पुत्रों में ज्येष्ठ थे और जिसमे विष्णु के सर्वाधिक अवतार हुए हैं और जिस गोत्र में वे सभी लोग शामिल हैं जिनका कोई धर्म जाती है अथवा नहीं है; या कोई धर्म मानते हैं अथवा नहीं मानते है अथवा किशी भी धर्म से निष्काषित किये गए हैं। अतः मेरे यहां सब मौजूद हैं और सबकी औकात पता है। अतः गोस्त मत समझिए लड़कियों को अन्यथा रेत-रेत कर हलाल करते हुए मारे जाओगे। अगर लड़कियों को गोस्त ही समझते हो सही पर क्या आप अपने घर की लड़की को वैश्यालय भेजना चाहते हो या शैतानी करना चाहते है यदि आप दूसरे की लड़कियों से ही शादी करोगे तो क्योंकि वे आप की लड़कियां दूसरे लड़कों को भी गोस्त समझती होंगी जैसा की आप के संस्कार से प्रतीत होता है।-------------कुछ तो शर्म हैं महानुभाव आप के पास या आप अपना सर्व नास ही चाह रहे हो अपने जीवन से ऊबकर पर आप को इतने आशानी से भी संसार से ऊपर उठने नहीं दिया जाएगा।--------संस्कारित संतान ही सर्वोच्च नश्ल की पहचान है और संस्कार चोरी से नहीं मिलता है वरन इसके लिए सतत प्रयत्न करना पड़ता है पीढ़ी दर-पीढ़ी पर क्षरण जल्दी से हो भी जाता है लेकिन उच्च संस्कार पुनः संभलने की शक्ति देता है।
>>>>.मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

Friday, August 22, 2014

Nehru means one who have loving character

old post in 2012 as a reaction of the others behaviour which not suited for a person like me who have not feeling of a racism but person of opposite were doing bad on this base for harming me" 
http://archive.today/ULN0

नेहरू=नेह: प्रेम करने वाला)


Thursday, August 21, 2014

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ॥ भावार्थ:- उन परमेश्वर स्वरूपी शिव संग भवानीको मेरा नमन है जिनका वर्ण कर्पूर समान गौर है, जो करुणाके प्रतिमूर्ति हैं, जो सारे जगतके सार हैं, जिन्होने गलेमें सर्पके हार धारण कर रखे हैं और जो हमारे हृदय रूपी कमलमें सदैव विद्यमान रहते हैं | Meaning: I salute to that Ishwar along with Bhavani (Shiva and Parvati), who is as white as camphor, an incarnation of compassion, the essence of this world, who wears a serpant around his neck and is ever present in the lotus abode of our hearts.RS. कर्पूरगौरं = White like Kapoor; करुणावतारं = embodiment of mercy; संसारसारं = the essence of worldly or familly-life; भुजगेन्द्रहारं = one who is having the king of snake as the garland or necklace, Shiva; सदा = always; ever; वसन्तं = the one who is living or dwelling or the spring season; हृदयारविन्दे = in the lotus like heart; भवं = the chain or ocean of births and deaths or the one God who causes it;; भवानीसहितं = one who has BhavAnI alongside; नमामि = I bow; salute; pay my respects; >>>>>>>Shiva have one and only form i.e. गौरं (White:Gaur) and also is the only standard form. But some people in some part of India give him Black body like one and only one special form of Bhavani in total of Nine forms i.e. the Kaali. Bhavani in eight forms are Gaur and only one form she is the Kaali. >>>>>>>>>> Ab bhi koi sandeh hai SHIVA ke Varn ke baare me?

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् । सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ॥ भावार्थ:- उन परमेश्वर स्वरूपी शिव संग भवानीको मेरा नमन है जिनका वर्ण कर्पूर समान गौर है, जो करुणाके प्रतिमूर्ति हैं, जो सारे जगतके सार हैं, जिन्होने गलेमें सर्पके हार धारण कर रखे हैं और जो हमारे हृदय रूपी कमलमें सदैव विद्यमान रहते हैं |
Meaning: I salute to that Ishwar along with Bhavani (Shiva and Parvati),
who is as white as camphor, an incarnation of compassion,
the essence of this world, who wears a serpant around
his neck and is ever present in the lotus abode of our hearts.RS.
कर्पूरगौरं = White like Kapoor;
करुणावतारं = embodiment of mercy;
संसारसारं = the essence of worldly or familly-life;
भुजगेन्द्रहारं = one who is having the king of snake as the garland or necklace, Shiva;
सदा = always; ever;
वसन्तं = the one who is living or dwelling or the spring season;
हृदयारविन्दे = in the lotus like heart;
भवं = the chain or ocean of births and deaths or the one God who causes it;;
भवानीसहितं = one who has BhavAnI alongside;
नमामि = I bow; salute; pay my respects;

>>>>>>>Shiva have one and only form i.e. गौरं (White:Gaur) and also is the only standard form. But some people in some part of India give him Black body like one and only one special form of Bhavani in total  of Nine forms i.e. the Kaali. Bhavani in eight forms are Gaur and only one form she is the Kaali. >>>>>>>>>> Ab bhi koi sandeh hai SHIVA ke Varn ke baare me?

इसे अन्यथा न लें और न व्यक्ति विशेष के लिए इसे समझें चाहे वह हम हों या आप पर प्रयागराज में जन्म लिए सात ब्रह्मर्षियों मतलब सप्तर्षियों की सभी औलादों के बारे में है जो पूरे विश्व में घूम रहे हैं: बुलबुल के तड़पने से सैय्याद पिघलता है,आहों में असर हो तो औलाद/फौलाद पिघलता है।औलाद/फौलाद के भी दिल में उलफत की आग भर दूँ,अरे मैं वो-------

इसे अन्यथा न लें और न व्यक्ति विशेष के लिए इसे समझें चाहे वह हम हों या आप पर प्रयागराज में जन्म लिए सात ब्रह्मर्षियों मतलब सप्तर्षियों की सभी औलादों के बारे में है जो पूरे विश्व में घूम रहे हैं:

बुलबुल के तड़पने से सैय्याद पिघलता है,आहों में असर हो तो औलाद/फौलाद पिघलता है।औलाद/फौलाद के भी दिल में उलफत की आग भर दूँ,अरे मैं वो-------

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के कार्यालय-1998 के राय साहब आप जिस विवेक बाबू और ज्ञान बाबू से आप अप्रतिम प्रेम करते थे वे आज प्रयागराज/अल्लाहाबाद में ही हैं पर आप लोगों का यह कैसा व्यवहार मेरे प्रति। वैसे जब कश्यप और महादेव केदारेश्वर आ जाय तो परशुराम को मैदान छोड़ देना चाहिए पर ऐसा क्यों नहीं हुआ और कोई कश्यप ऋषि स्वयं केदारेश्वर का घर कैसे उजाड़ने पर लग गया स्वयं का घर उजाड़ने के लिए वह कैसा कश्यप गोत्रीय। उस कश्यप के घर अभी भी मंगल इस लिए है की उनकी पत्नी अदिति स्वयं सती(पारवती) की बहन हैं।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के कार्यालय-1998 के राय साहब आप जिस विवेक बाबू और ज्ञान बाबू से आप अप्रतिम प्रेम करते थे वे आज प्रयागराज/अल्लाहाबाद में ही हैं पर आप लोगों का यह कैसा व्यवहार मेरे प्रति। वैसे जब कश्यप और महादेव केदारेश्वर आ जाय तो परशुराम को मैदान छोड़ देना चाहिए पर ऐसा क्यों नहीं हुआ और कोई कश्यप ऋषि स्वयं केदारेश्वर का घर कैसे उजाड़ने पर लग गया स्वयं का घर उजाड़ने के लिए वह कैसा कश्यप गोत्रीय। उस कश्यप के घर अभी भी मंगल इस लिए है की उनकी पत्नी अदिति स्वयं सती(पारवती) की बहन हैं। 

Special post for BHU, University of Allahabad and IISc Bangalore and Veer Bahadur Singh Purvanchal University friends and Gurujan: जब दुनिया के सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ नेहरू(नेह: प्रेम करने वाला) महादेव-शिव-शंकर हों और दूसरे स्थान पर श्रीराम/कृष्ण आते हों तो महादेव-शिव-शंकर में भी आदि मतलब पुरातन कौन है यह प्रश्न उठता ही है और उठना आवश्यक भी है। जब स्पस्ट है की शिव अपनी तीन शक्तियों के साथ सर्व प्रथम काशी में प्रकट हुए थे न की कैलाश पर जिसमे क्रमशः केदारेश्वर, महामृत्युंजय और विश्वेश्वर:विश्वनाथ आते हैं तो आदिशंकर:आद्यशंकर तो केदारेश्वर ही हुए न मतलब आद्यशंकर केदारेश्वर को ही कहा जाएगा।

Special post for BHU, University of Allahabad and IISc Bangalore and Veer Bahadur Singh Purvanchal University friends and Gurujan: जब दुनिया के सर्वप्रथम और सर्वश्रेष्ठ नेहरू(नेह: प्रेम करने वाला) महादेव-शिव-शंकर हों और दूसरे स्थान पर श्रीराम/कृष्ण आते हों तो महादेव-शिव-शंकर में भी आदि मतलब पुरातन कौन है यह प्रश्न उठता ही है और उठना आवश्यक भी है। जब स्पस्ट है की शिव अपनी तीन शक्तियों के साथ सर्व प्रथम काशी में प्रकट हुए थे न की कैलाश पर जिसमे क्रमशः केदारेश्वर, महामृत्युंजय और विश्वेश्वर:विश्वनाथ आते हैं तो आदिशंकर:आद्यशंकर तो केदारेश्वर ही हुए न मतलब आद्यशंकर केदारेश्वर को ही कहा जाएगा।
Malin basti ke Rajkumar and Rajkumari just behind green tied Guru Professor Ashok Kumar (Rai .means Bhoomihar Brahman of AARA District Bihar and Alumni IIT Kanpur) : Krishna Radha se shadi ke liye pagal ho to vah moorkha hai par Radhaa malin basti me hee bhej deen jaay usake liye yadi unako dukh hai to yah koi ashchary kaa vishay nahee kyonki unako Krishn ke samaan kul me hee bhejnaan  uchit kadam hai jaisaa ki ve dwapar me Yashodaa ke hee kul me gayee thee kyoki Sanatan Hindu Dharm me Brahman, Kshatriy aur Vashya se pare shadiyaan shadi to hotee hain par shashtriy shaadi yaa dharm pati-patni ve nahee kahe jaa sakte Shardaa Kabir(Saraswat Brahman) aur Ambavaadekar/Ambedakar/hanuman(Not accepted himself in a Brahmin, Kshatriya and Vashya category even he can but accepted even he accepted the Baudhdh vichar originated by a Gautam Gotriy Shaya Vansheey Kshatriy i.e. Sidhdharth Gautam) ki tarah jab tak ki shaadi se poorv samajik, samvaidhanik aur dharmik roop se koi apane ko Brahman, Kshatriy yaa vaishya nahee manata hai.  https://plus.google.com/photos/+MikhailLadanov/albums/4988817849341247505/5482662259585081234?banner=pwa&authkey=CI601YKWhq6zMg&pid=5482662259585081234&oid=110086076954568644060

Monday, August 18, 2014

NAND Baba ke Kulguru Garg Rishi ne Govind(VAASHUDEV) ko Krishna nam diya aur VASHUDEV ke Kulguru Shandilya gotriy Sandipani Rishi ne Shiksha diya ((Jisame Shandilya swayam Kashyap Rishi kee kul ki kanya aur Vashishth Rishi ke putra the jo Kashmir me Janm liye the; tathaa Garg rishi Bharadwaj Rishi ke shishya the jo Kashyap Gotriy Valmiki(Garg was disciple of Bharadwaj who was disciple of Valmiki/Varun/Kashyap rishi) ki shishya parampara me aate hain. Aur isee Valmiki kaa Bithoor Ashram Sita Van-Gaman ke samay ashray kaa praman liye huye hai jahaan Lav aur Kush janm liye the))|

NAND Baba ke Kulguru Garg Rishi ne Govind(VAASHUDEV) ko Krishna nam diya aur VASHUDEV ke Kulguru Shandilya gotriy Sandipani Rishi ne Shiksha diya ((Jisame Shandilya swayam Kashyap Rishi kee kul ki kanya aur Vashishth Rishi ke putra the jo Kashmir me Janm liye the; tathaa Garg rishi Bharadwaj Rishi ke shishya the jo Kashyap Gotriy Valmiki(Garg was disciple of Bharadwaj who was disciple of Valmiki/Varun/Kashyap rishi) ki shishya parampara me aate hain. Aur isee Valmiki kaa Bithoor Ashram Sita Van-Gaman ke samay ashray kaa praman liye huye hai jahaan Lav aur Kush janm liye the))|

Shiva aur Parvati(Sati:Gauri) ke do putra hai Ganesh:Vivek( has wives Ridhdhi aur Sidhdhi) aur Kartikey: Purusharth jo Shiv ke hee rup hai.

Shiva aur Parvati(Sati:Gauri) ke do putra hai Ganesh:Vivek( has wives Ridhdhi aur Sidhdhi) aur Kartikey: Purusharth jo Shiv ke hee rup hai.

SHIVA:TRINETRA:TRILOCHAN:VIVEK hi jisase rooth gaye ho sansar me use kaun prem aur samman Dega uske sath dhokha aur tiraskar hi hoga: SATI (Parvati) AUR PITA DAKSH PRAJAPATI prakaran jisame Shiv ko naraj kar Sati apane mayka apane pita ke yagya me shamil hone gayee thee jo Shiv ko apamaanit kliyaa karate the aur us yagya me Shiva aur Sati ko bulaaye bhee nahee the.

SHIVA:TRINETRA:TRILOCHAN:VIVEK hi jisase rooth gaye ho sansar me use kaun prem aur samman Dega uske sath dhokha aur tiraskar hi hoga: SATI (Parvati) AUR PITA DAKSH PRAJAPATI prakaran jisame Shiv ko naraj kar Sati apane mayka apane pita ke yagya me shamil hone gayee thee jo Shiv ko apamaanit kliyaa karate the aur us yagya me Shiva aur Sati ko bulaaye bhee nahee the.

Shiva Puran me Mahadev Shiva ne kaha hai ki Shri Ram mere Iswar par Shri Krishna aur mujh me koi antar nahi agar paristhiyan saman hon. Sampoorn Manavata ko saprem Shubh Shri Krishn Janmastami. RADHE-KRISHN/SITA-RAM/RAM-JANKI/SHRI RAM.

Shiva Puran me Mahadev Shiva ne kaha hai ki Shri Ram mere Iswar par Shri Krishna aur mujh me koi antar nahi agar paristhiyan saman hon. Sampoorn Manavata ko saprem Shubh Shri Krishn Janmastami. RADHE-KRISHN/SITA-RAM/RAM-JANKI/SHRI RAM.

Samman pane se jyada kathin hai samman bachana aur samman pana chahte ho bhavishya me to apane se shresth ko samman dena shikho kam se kam. Sarvajanik karyon me risk bhara kadam lena seekho n ki niji swarth aur samman ko hi sarvopari samajhen. Vidammabana yah ki apane se badon ke karya me laghu roda banjaate hain aur garron ki thekedari ka hissa ban jaate hai badon ka kam bigadne me.

Samman pane se jyada kathin hai samman bachana aur samman pana chahte ho bhavishya me to apane se shresth ko samman dena shikho kam se kam. Sarvajanik karyon me risk bhara kadam lena seekho n ki niji swarth aur samman ko hi sarvopari samajhen. Vidammabana yah ki apane se badon ke
karya me laghu roda banjaate hain aur garron ki thekedari ka hissa ban jaate hai badon ka kam bigadne me.

Saturday, August 16, 2014

जिस विवेक:त्रिनेत्र:त्रिलोचन ने 2001-2002 के समय में ही पूरे प्रयागराज/अल्लाहाबाद विश्वविद्यालय और प्रयागराज/अल्लाहाबाद की रिपोर्ट तैयार किया हो चित्रगुप्त की तरह और 2003 में अंतरिम रिपोर्ट और विरोध जाता दिया हो यहाँ नामांकन करवाने को लेकर(उस समय की मेरी मेधा पर ध्यान दीजिये मेधा और कुशाग्रता में किशी से कम नहीं था जो स्वयं आत्म हत्या करूँ विना पूर्ण ध्यान दिए सार्वजनिक हित वाले काम में ) पर मेरा कोई अन्य समुचित विकल्प जो नीव की पहली ईंट बन सके बन सके न होने से गुरुजन(ब्रह्मा: जोशी-श्रीवास्तव-पाण्डेय अविनाश; विष्णु:श्रीधर; महेश: पाण्डेय प्रेम मतलब वास्तविक तात्कालिक त्रिदेव:परमब्रह्म) के आदेश स्वरुप स्वयं को यही का बना लिया और शिक्षा के पहले ही गुरुदक्षिणा भी दे दिया इसके परिणाम स्वरुप मेरे ऊपर होने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जो अवस्य-संभाव था ही वाह्य विरोध को देखते हुए । प्रयागराज और प्रयागराज विश्वविद्यालय को विश्व परिवर्तन और नवनिर्माण के महायज्ञ के लिए उचित स्थान चुने जाने की तुलना में काशी को उचित स्थान मैंने पाया था इस कार्यविशेष के लिए जैसा की यह प्रयागराज विश्वविद्यालय एक राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय के स्तर का ही माहौल में था और यहाँ की तत्कालीन व्यापक जन-जन में राजनीती सोच जिसमे की अधिकार ज्यादा और कर्त्तव्य उसके मुकाबले कम माँगा जा रहा था और प्रयाग से दूर के व्यक्ति को काम करके आंका जाता था। अतः मित्रो मैंने रिस्क शोध में भी लिया और सेवा हेतु पद ग्रहण में भी लिया पूर्ण विश्वास के साथ कि कदम आगे बढ़ा रहा हूँ और कार्य अवस्य पूर्ण होगा और इसीलिये यह भी बताना चाहूँगा की 2004 के बाद रिस्क केंद्रीय सरकार के मंत्रालय में संपर्क और पत्र-व्यवहार करके भी लिया हूँ इस विशेष सार्वजनिक हित को पूर्ण करने के लिए जिसे पिछली सरकार का लक्ष्य मानकर बंद किया जा सकता था बिना किशी पूर्ण उपयोगिता के व्याख्या के अभाव में और जिसमे मेरा भी हित समाहित था क्योंकि विना विवेक:त्रिनेत्र:त्रिलोचन के दुनिया ही मृतक समान है कोई पार्टी मुझसे अछूती ही क्यों यद्यपि मै पार्टी स्तर पर एक विशेष राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का विचार रखता हूँ जो तब सत्ता में नहीं थी और मेरा प्रयास रंग लाया अन्य-गण्यमान महानुभावों के प्रयास में शामिल हो और इस विश्वविद्यालय में आज एक शिक्षक भी हूँ इसका ही एक शोधछात्र होकर।-------------Now report on myself is being prepared by whom?

जिस विवेक:त्रिनेत्र:त्रिलोचन ने 2001-2002 के समय में ही पूरे प्रयागराज/अल्लाहाबाद विश्वविद्यालय और प्रयागराज/अल्लाहाबाद की रिपोर्ट तैयार किया हो चित्रगुप्त की तरह और 2003 में अंतरिम रिपोर्ट और विरोध जाता दिया हो यहाँ नामांकन करवाने को लेकर(उस समय की मेरी मेधा पर ध्यान दीजिये मेधा और कुशाग्रता में किशी से कम नहीं था जो स्वयं आत्म हत्या करूँ विना पूर्ण ध्यान दिए सार्वजनिक हित वाले काम में ) पर मेरा कोई अन्य समुचित विकल्प जो नीव की पहली ईंट बन सके बन सके न होने से गुरुजन(ब्रह्मा: जोशी-श्रीवास्तव-पाण्डेय अविनाश; विष्णु:श्रीधर; महेश: पाण्डेय प्रेम मतलब वास्तविक तात्कालिक त्रिदेव:परमब्रह्म) के आदेश स्वरुप स्वयं को यही का बना लिया और शिक्षा के पहले ही गुरुदक्षिणा भी दे दिया इसके परिणाम स्वरुप मेरे ऊपर होने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए जो अवस्य-संभाव था ही वाह्य विरोध को देखते हुए । प्रयागराज और प्रयागराज विश्वविद्यालय को विश्व परिवर्तन और नवनिर्माण के महायज्ञ के लिए उचित स्थान चुने जाने की तुलना में काशी को उचित स्थान मैंने पाया था इस कार्यविशेष के लिए जैसा की यह प्रयागराज विश्वविद्यालय एक राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय के स्तर का ही माहौल में था और यहाँ की तत्कालीन व्यापक जन-जन में राजनीती सोच जिसमे की अधिकार ज्यादा और कर्त्तव्य उसके मुकाबले कम माँगा जा रहा था और प्रयाग से दूर के व्यक्ति को काम करके आंका जाता था। अतः मित्रो मैंने रिस्क शोध में भी लिया और सेवा हेतु पद ग्रहण में भी लिया पूर्ण विश्वास के साथ कि कदम आगे बढ़ा रहा हूँ और कार्य अवस्य पूर्ण होगा और इसीलिये यह भी बताना चाहूँगा की 2004 के बाद रिस्क केंद्रीय सरकार के मंत्रालय में संपर्क और पत्र-व्यवहार करके भी लिया हूँ इस विशेष सार्वजनिक हित को पूर्ण करने के लिए जिसे पिछली सरकार का लक्ष्य मानकर बंद किया जा सकता था बिना किशी पूर्ण उपयोगिता के व्याख्या के अभाव में और जिसमे मेरा भी हित समाहित था क्योंकि विना विवेक:त्रिनेत्र:त्रिलोचन के दुनिया ही मृतक समान है कोई पार्टी मुझसे अछूती ही क्यों यद्यपि मै पार्टी स्तर पर एक विशेष राष्ट्रीय स्तर की पार्टी का विचार रखता हूँ जो तब सत्ता में नहीं थी और मेरा प्रयास रंग लाया अन्य-गण्यमान महानुभावों के प्रयास में शामिल हो और इस विश्वविद्यालय में आज एक शिक्षक भी हूँ इसका ही एक शोधछात्र होकर।-------------Now report on myself is being prepared by whom?

Friday, August 15, 2014

Find who is Primister of India and who was first VC of the University of Allahabad as a regained status of Central University: दामोदर=श्रीकृष्ण, गोविन्द=श्रीकृष्ण, राजेंद्र=नरेंद्र=राजन=राजा >> राजेंद्र गोविन्द=नरेंद्र दामोदर


Man Mohan=ShriKrishan; Atal Bihari=Shri Krishna as Rashi name Shri Krishna is Bihari/Viahari, Lal Krishana=Shri Krishna; Murali Manohar=Shri Krishna

मित्रों धर्म पत्नी की ही बात है आज रमा बाई के नाम से पार्क और योजनाएं बहुत है पर "शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण)=सविता अम्बेडकर" के नाम से क्या और कितना? >>>>>>> गेस्ट हाउस काण्ड पर उनका खून खौलना चाहिए जिनके अंतर रंचमात्र मानवता शेष बची हो परन्तु वे शैतानी आत्मा वाले लोग जो सदा इस बात की फिराक में रहते हैं की अगर मै तो न सही पर मेरे पुत्र और आने वाली मेरी अन्य संताने कम से कम सवर्णों की बहु-बेटियों-पत्नियों के साथ जन्म-जन्मान्तर के लिए बलात्कार जरूर कर सके या वे स्वयं कर चुके हैं या उनके पुत्र किये कर रहे हैं; तो ऐसे शैतानी आत्मा की खून में उबाल कैसे आ जाता है जब किशी तथाकथित दलित की लड़की के साथ किशी एक क्षण विशेष ऐसा किये जाने का प्रयास किया गया हो? अगर आप की शैतानी आत्मा की यही तलाश है और आप तथाकथित दलित में आते हैं तो एक बहुत ही सरल रास्ता है की आप संवैधानिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से अपने लाभ को त्यागते हुए अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य कर्म के साथ विलय कर लीजिये अन्यथा किशी के भी बलात्कार पर घड़ियाली आंशू मटबहईये और न क्रोध कीजिये जब आप कृषि के जन्म-जन्मान्तर बलात्कार के लिए यह मानसिकता स्वयं पाले हुए हैं। >>>>>>>>>और ऐसे सवर्ण मेरे ऊपर कृपा करने के बजाय अपने स्वयं के हित का चिंतन करें जो दिग्भ्रमित हो गए थे और मेरे विरोध के लिए अपनी बहु-बेटियों-पत्नियों का सौदा इनसे साथ किये थे मेरे विरोध के लिए शक्ति अर्जित करने के लिए इन शेर की खाल ओढ़े हुए श्रृंगालों और शैतानी आत्माओं से और कितनों को तो आप सवर्ण इनके पास जन्म-जन्मान्तर के लिए बलात्कार के लिए परोस भी दिया है उसका थोड़ा सा प्रायश्चित कर लीजिये मेर ऊपर दया करने की स्थान पर।--------गिरधारी (कृष्ण-हनुमान/अंबेडकर/अम्बवादेकर-शेषनाग) तो मै जन्म से था पर आप राम न बन सके तो वह भी मुझे बनने का कस्ट निभाना पड़ा बना लेकिन आप मुझे मेरे जैसा एक हनुमान/अंबेडकर/अम्बवादेकर दे दीजिये जो एक भी विवाह नहीं करना चाहता था और एक हाईस्कूल-इण्टमीडिएट के छात्र की अवस्था में ही कहा करता था कभी-कभी की मई विवेकानंद की तरह शादी नहीं करूँगा पर माँ रोने लगती थी और माँ और रामप्रशाद/बचनराम/प्रदीप पाण्डेय के कुलकमल को ज़िंदा रखने और उनकी इक्षा और एक मात्र पुत्र होन की ही वजह से विवाह का मन बनाया था। आप ने एक अम्बेडकर तो दिया वह भी दूसरा विवाह किये जीवन में जरूरत के अनुसार पर क्या एक विवाह हनुमान/अम्बावडेकर/अम्बेडकर के लिए उचित नहीं था? जो भी हो वे अम्बेडकर चरित्रहीन नहीं थे और प्रतिशोध जरूर हो सकता था तत्कालीन परिस्थिति के अनुरूप सवर्णों के व्यवहार से तंग आकर जो उन्होंने अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य स्वीकार नहीं किया फिर भी हिन्दू के अनुसांगिक बौद्ध धर्म ग्रहण किये जिसे एक गौतम गोत्रीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ने ही चलाया था तो वह भी हिन्दू धर्म की ही सीमा थी जिसमे शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण) ने अपना नाम सविता अम्बेडकर रखा। पर मेरे सन्दर्भ में तथा कथित दलित सत्ता के जाल में सवर्णों ने ही अन्याय किया तो वे तथा कथित दलित किश तरह क्षमा योग्य है? ----------मित्रों धर्म पत्नी की ही बात है आज रमा बाई के नाम से पार्क और योजनाएं बहुत है पर "शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण)=सविता अम्बेडकर" के नाम से क्या और कितना?----अगर रामप्रसाद पाण्डेय के कुल वाले पाप किये थे तो मेरे खानदान में पागल जन्म लिए थे और मई भी आप लोगों की नजर में पागल ही था जो आप लोगों का पागलपन देखकर दुखी था तो काशीराम अपने जीवन के अंतिम अवस्था में किस मानसिक अवस्था में थे जो मुझे खानदानी पागल कहा गया था प्रयागराज/अल्लाहाबाद में और किसके इसारे पर? माँ गौरी के पुत्र प्रदीप पागल तो अब काली माई का पुत्र द्वितीया का चन्द्रमा भी पागल हुआ है मेरे खानदान में उस पर आप क्या कहेंगे? और जो वास्तविक दलित भी पागल हो रहे हैं और होते है उनके बारे में आप की क्या राय है? मानव जीवन ही चुनौतीपूर्ण है अतः इसे चुनौती के साथ जिओ। इस दुनिया में हर कोई आप को नहीं सता सकता: कम से कम वह तो कभी नहीं जिसे पने अपने सदकर्मों से हनुमान/अम्बेडकर की तरह जीत लिया हो और स्वयं श्रीराम गले लगा के कहें की "तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई" और बहुत से परमब्रह्म राम के लिए ऐसे द्वितीय परमब्रह्म हनुमान भाई भरत की तरह मौजूद है इस संसार में और तभी यह संसार चल रहा है।

मित्रों धर्म पत्नी की ही बात है आज रमा बाई के नाम से पार्क और योजनाएं बहुत है पर "शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण)=सविता अम्बेडकर" के नाम से क्या और कितना? >>>>>>> गेस्ट हाउस काण्ड पर उनका खून खौलना चाहिए जिनके अंतर रंचमात्र मानवता शेष बची हो परन्तु वे शैतानी आत्मा वाले लोग जो सदा इस बात की फिराक में रहते हैं की अगर मै तो न सही पर मेरे पुत्र और आने वाली मेरी अन्य संताने कम से कम सवर्णों की बहु-बेटियों-पत्नियों के साथ जन्म-जन्मान्तर के लिए बलात्कार जरूर कर सके या वे स्वयं कर चुके हैं या उनके पुत्र किये कर रहे हैं; तो ऐसे शैतानी आत्मा की खून में उबाल कैसे आ जाता है जब किशी तथाकथित दलित की लड़की के साथ किशी एक क्षण विशेष ऐसा किये जाने का प्रयास किया गया हो? अगर आप की शैतानी आत्मा की यही तलाश है और आप तथाकथित दलित में आते हैं तो एक बहुत ही सरल रास्ता है की आप संवैधानिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से अपने लाभ को त्यागते हुए अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैस्य कर्म के साथ विलय कर लीजिये अन्यथा किशी के भी बलात्कार पर घड़ियाली आंशू मटबहईये और न क्रोध कीजिये जब आप कृषि के जन्म-जन्मान्तर बलात्कार के लिए यह मानसिकता स्वयं पाले हुए हैं। >>>>>>>>>और ऐसे सवर्ण मेरे ऊपर कृपा करने के बजाय अपने स्वयं के हित का चिंतन करें जो दिग्भ्रमित हो गए थे और मेरे विरोध के लिए अपनी बहु-बेटियों-पत्नियों का सौदा इनसे साथ किये थे मेरे विरोध के लिए शक्ति अर्जित करने के लिए इन शेर की खाल ओढ़े हुए श्रृंगालों और शैतानी आत्माओं से और कितनों को तो आप सवर्ण इनके पास जन्म-जन्मान्तर के लिए बलात्कार के लिए परोस भी दिया है उसका थोड़ा सा प्रायश्चित कर लीजिये मेर ऊपर दया करने की स्थान पर।--------गिरधारी (कृष्ण-हनुमान/अंबेडकर/अम्बवादेकर-शेषनाग) तो मै जन्म से था पर आप राम न बन सके तो वह भी मुझे बनने का कस्ट निभाना पड़ा बना लेकिन आप मुझे मेरे जैसा एक हनुमान/अंबेडकर/अम्बवादेकर दे दीजिये जो एक भी विवाह नहीं करना चाहता था और एक हाईस्कूल-इण्टमीडिएट के छात्र की अवस्था में ही कहा करता था कभी-कभी की मई विवेकानंद की तरह शादी नहीं करूँगा पर माँ रोने लगती थी और माँ और रामप्रशाद/बचनराम/प्रदीप पाण्डेय के कुलकमल को ज़िंदा रखने और उनकी इक्षा और एक मात्र पुत्र होन की ही वजह से विवाह का मन बनाया था। आप ने एक अम्बेडकर तो दिया वह भी दूसरा विवाह किये जीवन में जरूरत के अनुसार पर क्या एक विवाह हनुमान/अम्बावडेकर/अम्बेडकर के लिए उचित नहीं था? जो भी हो वे अम्बेडकर चरित्रहीन नहीं थे और प्रतिशोध जरूर हो सकता था तत्कालीन परिस्थिति के अनुरूप सवर्णों के व्यवहार से तंग आकर जो उन्होंने अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य स्वीकार नहीं किया फिर भी हिन्दू के अनुसांगिक बौद्ध धर्म ग्रहण किये जिसे एक गौतम गोत्रीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ने ही चलाया था तो वह भी हिन्दू धर्म की ही सीमा थी जिसमे शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण) ने अपना नाम सविता अम्बेडकर रखा। पर मेरे सन्दर्भ में तथा कथित दलित सत्ता के जाल में सवर्णों ने ही अन्याय किया तो वे तथा कथित दलित किश तरह क्षमा योग्य है? ----------मित्रों धर्म पत्नी की ही बात है आज रमा बाई के नाम से पार्क और योजनाएं बहुत है पर "शारदा कबीर (सारस्वत ब्राह्मण)=सविता अम्बेडकर" के नाम से क्या और कितना?----अगर रामप्रसाद पाण्डेय के कुल वाले पाप किये थे तो मेरे खानदान में पागल जन्म लिए थे और मई भी आप लोगों की नजर में पागल ही था जो आप लोगों का पागलपन देखकर दुखी था तो काशीराम अपने जीवन के अंतिम अवस्था में किस मानसिक अवस्था में थे जो मुझे खानदानी पागल कहा गया था प्रयागराज/अल्लाहाबाद में और किसके इसारे पर? माँ गौरी के पुत्र प्रदीप पागल तो अब काली माई का पुत्र द्वितीया का चन्द्रमा भी पागल हुआ है मेरे खानदान में उस पर आप क्या कहेंगे? और जो वास्तविक दलित भी पागल हो रहे हैं और होते है उनके बारे में आप की क्या राय है? मानव जीवन ही चुनौतीपूर्ण है अतः इसे चुनौती के साथ जिओ।  इस दुनिया में हर कोई आप को नहीं सता  सकता: कम से कम वह तो कभी नहीं जिसे पने अपने सदकर्मों से हनुमान/अम्बेडकर की तरह जीत लिया हो और स्वयं श्रीराम गले लगा के कहें की "तुम मम प्रिय भरतहि सम  भाई" और बहुत से परमब्रह्म राम के लिए ऐसे द्वितीय परमब्रह्म हनुमान भाई भरत की तरह मौजूद है इस संसार में और तभी यह संसार चल रहा है।

Thursday, August 14, 2014

9-9 and 11-11 in University of Allahabad: राम का काम ही सही हनुमान/अम्बेडकर/अम्बावडेकर/द्वितीय सशरीर परमब्रह्म की पूंछ:सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लंका जलाया जाना यदि उचित है, कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के सम्मान में ज़रा सी देरी के लिए पूरा कौसल=अवध राज्य जलाया जाना यदि उचित हो सकता है तो क्या श्रीराम/श्रीकृष्ण के स्वाभिमान के लिए इस सम्पूर्ण संसार को नहीं जलाया जा सकता है? क्या ऐसे में कोई छद्म सामाजिक न्यायकर्ता और तथाकथित दलित अपने को जीवित पा सकता था? अतः तिरंगे का सम्मान कीजिये क्योंकि श्रीराम और श्रीकृष्ण स्वयं परमब्रह्म का पद (पूर्ण सत्य और पूर्ण प्रेम) प्राप्त होने तक स्वयं तिरंगा/त्रिदेव(तीनों पूर्ण आदर्श को प्राप्त हुए थे मतलब पूर्ण ब्रह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैस्य हो गए थे जो एक आम व्यक्ति होने के बाद त्याग, बलिदान और तपस्या की अवस्था प्राप्त होने पर प्राप्त होता है ) हो गए थे यह जरूर है की भारतीय तिरंगा अल्पभाग में नीलांचल होने से चौरंगा जरूर होता है पर तिरंगा ही कहा जाता है।अतः मै ऐसे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की बात करता हूँ जिसमे अपने को समाज में अत्यल्प संख्या में मौजूद व्यक्ति यदि अपने उच्च कर्मों के बदले सबसे अगल ही सही उच्च और आदर्श जीवन जीना चाहता है और उसका मूल्य जो होता है उससे ज्यादा मूल्य भी समाज में चुकता किया हो अपने कर्मों से तो उसे भी अपने ढंग से जीने का हक़ हो चाहे वह ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैस्य हो या अन्य समाज और धर्म का व्यति हो या अत्यल्प संख्या में मौजूद वैज्ञानिक समाज हो जिसके शोध और अनुसंधान की गुणवत्ता में संख्याबल का कोई विशेष महत्त्व नहीं और जो हर समाज को उच्चतम जीवन देने का एक विशेष साधन है और विदेशों में जाकर स्वयं सीखकर आप को उच्च जीवन शैली भी दी हो विशेस कर उस भारतदेश में जहां संशाधनों के अभाव में अंतर्राष्ट्रीय समाज से तुलनात्मन वैज्ञानिक अनुसन्धान प्रस्तुत किये गए हों जिसमे विशेषकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, भारतीय रक्षा अनुसंधान विकास विभाग, भारतीय अभियांत्रिकी विभाग व् अन्य-अन्य वैज्ञानिक संगठन। मै एक मजदूर और किसान की भी भूमिका में रहा हूँ 10- 15 वर्ष से 23 वर्ष के तक और कठोर परिश्रम भी किया हूँ तथा सैन्य-शिक्षार्थी भी रहा हूँ तो मुझे पता है इन सबके वारे में लेकिन एक वैज्ञानिक/ऋषि-महर्षि की पीड़ा और समाज के हर मोर्चे पर और हर वर्ग के प्रति कर्त्तव्य के प्रति इनके त्यागपूर्ण जीवन से होने वाले संरचनात्मक विकाश को मैंने सर्वोपरि पाया है। अतः सूर्य और मंगल पर इनको भेजने से पहले आप इनके पारिवारिक ढाँचे पर ध्यान दीजिये और इनके पारिवारिक मनोबल को छद्म सामाजिक न्याय और तथा कथित दलित उत्थान हेतु प्रतिशोध हेतु मत तोडिये जो इनको ऊर्जा देते है परोक्ष रूप से अन्यथा जिस संख्याबल पर आप इनको तोडना लोकतंत्र की गलत परिभासा गढ़ कर वह संख्याबल रंचमात्र समय में इस दुनिया से विलुप्त हो जाएगा इनके अपने स्वाभिमान की रक्षा में आत्मघाती हो जाने पर। यह ऐसा ही मैंने नहीं वरन आप भी इस समुदाय में शामिल जिस दिन होंगे महसूस करेंगे इस तथ्य पर मै वैज्ञानिक/ऋषि-महर्षि को एक से भी ज्यादा महत्व दिया दूँ और यही तक नहीं हर समाज की तुलना में ये सर्वश्रेष्ठ है जिनका स्वयं का पारिवारिक अस्तित्व भी बहुत जरूरी है इनको परोक्षा ऊर्जा देने के लिए अगर प्रतिभापलायन रोकना है वैज्ञानिक क्षेत्र में। काम से कम इनमे राजनीती यदि करें भी तो सत्य की राजनीती करें जिससे आने पीढ़ी भी भारतीय वैज्ञानिक के रूप में इस क्षेत्र में आने को उत्साहित हो|>>>>>वन्दे मातरम: विजयी विश्व तिरंगा प्यारा-झंडा ऊंचा रहे हमारा।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप=युरेसिआ=यूरोप+एशिया=या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी), जय भारत(भरतवर्स=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

9-9 and 11-11 in University of Allahabad: राम का काम ही सही हनुमान/अम्बेडकर/अम्बावडेकर/द्वितीय सशरीर परमब्रह्म की पूंछ:सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लंका जलाया जाना यदि उचित है, कृष्णात्रेय(दुर्वाशा) के सम्मान में ज़रा सी देरी के लिए पूरा कौसल=अवध राज्य जलाया जाना यदि उचित हो सकता है तो क्या श्रीराम/श्रीकृष्ण के स्वाभिमान के लिए इस सम्पूर्ण संसार को नहीं जलाया जा सकता है? क्या ऐसे में कोई छद्म सामाजिक न्यायकर्ता और तथाकथित दलित अपने को जीवित पा सकता था? अतः तिरंगे का सम्मान कीजिये क्योंकि श्रीराम और श्रीकृष्ण स्वयं परमब्रह्म का पद (पूर्ण सत्य और पूर्ण प्रेम) प्राप्त होने तक स्वयं तिरंगा/त्रिदेव(तीनों पूर्ण आदर्श को प्राप्त हुए थे मतलब पूर्ण ब्रह्मण, पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैस्य हो गए थे जो एक आम व्यक्ति होने के बाद त्याग, बलिदान और तपस्या की अवस्था प्राप्त होने पर प्राप्त होता है ) हो गए थे यह जरूर है की भारतीय तिरंगा अल्पभाग में नीलांचल होने से चौरंगा जरूर होता है पर तिरंगा ही कहा जाता है।अतः मै ऐसे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की बात करता हूँ जिसमे अपने को समाज में अत्यल्प संख्या में मौजूद व्यक्ति यदि अपने उच्च कर्मों के बदले सबसे अगल ही सही उच्च और आदर्श जीवन जीना चाहता है और उसका मूल्य जो होता है उससे ज्यादा मूल्य भी समाज में चुकता किया हो अपने कर्मों से तो उसे भी अपने ढंग से जीने का हक़ हो चाहे वह ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैस्य हो या अन्य समाज और धर्म का व्यति हो या अत्यल्प संख्या में मौजूद वैज्ञानिक समाज हो जिसके शोध और अनुसंधान की गुणवत्ता में संख्याबल का कोई विशेष महत्त्व नहीं और जो हर समाज को उच्चतम जीवन देने का एक विशेष साधन है और विदेशों में जाकर स्वयं सीखकर आप को उच्च जीवन शैली भी दी हो विशेस कर उस भारतदेश में जहां संशाधनों के अभाव में अंतर्राष्ट्रीय समाज से तुलनात्मन वैज्ञानिक अनुसन्धान प्रस्तुत किये गए हों जिसमे विशेषकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, भारतीय रक्षा अनुसंधान विकास विभाग, भारतीय अभियांत्रिकी विभाग व् अन्य-अन्य वैज्ञानिक संगठन। मै एक मजदूर और किसान की भी भूमिका में रहा हूँ 10- 15 वर्ष से 23 वर्ष के तक और कठोर परिश्रम भी किया हूँ तथा सैन्य-शिक्षार्थी भी रहा हूँ तो मुझे पता है इन सबके वारे में लेकिन एक वैज्ञानिक/ऋषि-महर्षि की पीड़ा और समाज के हर मोर्चे पर और हर वर्ग के प्रति कर्त्तव्य के प्रति इनके त्यागपूर्ण जीवन से होने वाले संरचनात्मक विकाश को मैंने सर्वोपरि पाया है। अतः सूर्य और मंगल पर इनको भेजने से पहले आप इनके पारिवारिक ढाँचे पर ध्यान दीजिये और इनके पारिवारिक मनोबल को छद्म सामाजिक न्याय और तथा कथित दलित उत्थान हेतु प्रतिशोध हेतु मत तोडिये जो इनको ऊर्जा देते है परोक्ष रूप से अन्यथा जिस संख्याबल पर आप इनको तोडना लोकतंत्र की गलत परिभासा गढ़ कर वह संख्याबल रंचमात्र समय में इस दुनिया से विलुप्त हो जाएगा इनके अपने स्वाभिमान की रक्षा में आत्मघाती हो जाने पर। यह ऐसा ही मैंने नहीं वरन आप भी इस समुदाय में शामिल जिस दिन होंगे महसूस करेंगे इस तथ्य पर मै वैज्ञानिक/ऋषि-महर्षि को एक से भी ज्यादा महत्व दिया दूँ और यही तक नहीं हर समाज की तुलना में ये सर्वश्रेष्ठ है जिनका स्वयं का पारिवारिक अस्तित्व भी बहुत जरूरी है इनको परोक्षा ऊर्जा देने के लिए अगर प्रतिभापलायन रोकना है वैज्ञानिक क्षेत्र में। काम से कम इनमे राजनीती यदि करें भी तो सत्य की राजनीती करें जिससे आने पीढ़ी भी भारतीय वैज्ञानिक के रूप में इस क्षेत्र में आने को उत्साहित हो|>>>>>वन्दे मातरम: विजयी विश्व तिरंगा प्यारा-झंडा ऊंचा रहे हमारा।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप=युरेसिआ=यूरोप+एशिया=या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी), जय भारत(भरतवर्स=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

Indirect Assignment to kill Ravan (demon by work) was given to Ram in Prayag(at Bharadwaj/Aangiras i.e. the Shishya:Student of Valmiki/Varun Kashyapa's Ashram i.e. Garg Rishi's Gurukul) by Bharadwaj Rishi giving him suggestion to meet with Agastya/Kumbhaj Rishi whom the weapon to kill Ravan( at the suitable time) was given by Brahma(these are those weapon which were once used to kill Ravan by the Suryavansiy/Ikshakuvanshiy kings of Ayodhya i.e. Raghu and Aja i.e. ancestors of Ram but Brahma taken these weapon with him by saying them that it is not a suitable time to kill Ravana but these weapon surely kill him at that particular time and same Suryavanshiy/Ikshakuvanshiy prince will kill him). ---------In my case there was no task given by Aangrisaa/Bharadwaj to kill any Ravana (Ravan was a royal enemy of Ram who strictly followed the royal rule of war) but to stay in Prayagraj/Allahabad until a satisfactory social reconstruction and reform of the world would takes place or until there is my requirement for the society.

Indirect Assignment to kill Ravan (demon by work) was given to Ram in Prayag(at Bharadwaj/Aangiras i.e. the Shishya:Student of Valmiki/Varun Kashyapa's Ashram i.e. Garg Rishi's Gurukul) by Bharadwaj Rishi giving him suggestion to meet with Agastya/Kumbhaj Rishi whom the weapon to kill Ravan( at the suitable time) was given by Brahma(these are those weapon which were once used to kill Ravan by the Suryavansiy/Ikshakuvanshiy kings of Ayodhya i.e. Raghu and Aja i.e. ancestors of Ram but Brahma taken these weapon with him by saying them that it is not a suitable time to kill Ravana but these weapon surely kill him at that particular time and same Suryavanshiy/Ikshakuvanshiy prince will kill him). ---------In my case there was no task given by Aangrisaa/Bharadwaj to kill any Ravana (Ravan was a royal enemy of Ram who strictly followed the royal rule of war) but to stay in Prayagraj/Allahabad until a satisfactory social reconstruction and reform of the world would takes place or until there is my requirement for the society.

Tuesday, August 12, 2014

ब्रह्मा से तो आप सब जन्म पा चुके थे पर आप काँप रहे थे सूर्य आप को अपनी ऊर्जा/टॉप/प्रकाश नहीं दे रहा था, आप प्यास से व्याकुल थे वरुणदेव आप को जल नहीं दे रहे थे, आप की सांस रुकी हुई थी पवनदेव आप को प्राणवायु नहीं दे रहे थे, आप चलना चाहते थे पर पृथ्वी आप को आश्रय नहीं दे रही थी अतः आप गिरते ही जा रहे थे, आप उड़ाना छह रहे थे गिरने से बचने के लिए पर आप को आकाश भी शरण नहीं दे रहा था और आप कुछ कहना चाह रहे थे पर आप को सरस्वती पुत्र होने पर भी मुख से शब्द नहीं निकल रहे थे । और ऐसी अवस्था में आप अपने को मृत्यु से भी विकत अवस्था में पाकर उसी ब्रह्मा से मृत्यु माँग रहे थे पर यमराज/महाकाल उसको भी देने से मना कर रहे थे। इस प्रकार ऐसी अवस्था आप सबकी थी की आप मृत्यु से भी गयी गुज़री अवस्था में आप थे। -----यह मेरा वर्णन है आज के 14 वर्ष पूर्व में सम्पूर्ण श्रिस्टी एक व्यक्ति की अवस्था का जिसे मैंने देखा है और यह हाल था आप जैसे छद्म शिव भक्तों को जो केदारेश्वर का विरोध कर रहे थे जिनको की प्रयागराज विश्वविद्यालय में स्थापित करने की जिम्मेदारी कोई सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय(पंच तत्व) ब्राह्मण लिया हो अपने गुर के आदेश पर और उसे त्रिफला(बेल पत्र) की तरह एक बाल ब्रह्मचारी सनातन ब्राह्मण पुत्र अपने को शिव के चरणों में अर्पित कर उस महा विनाश से आप को यहाँ पहुंचा दिया शिव के क्रोध को नियंत्रित करवा कर विश्व का अति शूक्ष्म विनाश से ही अपने त्याग, बलिदान और तपश्या से तो आप पुनः उसकी शक्ति पूंछ रहे हैं की " तुम कौन हो ख्याल=आप की औकात क्या है ?"

ब्रह्मा से तो आप सब जन्म पा चुके थे पर आप काँप रहे थे सूर्य आप को अपनी ऊर्जा/टॉप/प्रकाश नहीं दे रहा था, आप प्यास से व्याकुल थे वरुणदेव आप को जल नहीं दे रहे थे, आप की सांस रुकी हुई थी पवनदेव आप को प्राणवायु नहीं दे रहे थे, आप चलना चाहते थे पर पृथ्वी आप को आश्रय नहीं दे रही थी अतः आप गिरते ही जा रहे थे, आप उड़ाना छह रहे थे गिरने से बचने के लिए पर आप को आकाश भी शरण नहीं दे रहा था और आप कुछ कहना चाह रहे थे पर आप को सरस्वती पुत्र होने पर भी मुख से शब्द नहीं निकल रहे थे । और ऐसी अवस्था में आप अपने को मृत्यु से भी विकत अवस्था में पाकर उसी ब्रह्मा से मृत्यु माँग रहे थे पर यमराज/महाकाल उसको भी देने से मना कर रहे थे। इस प्रकार ऐसी अवस्था आप सबकी थी की आप मृत्यु से भी गयी गुज़री अवस्था में आप थे। -----यह मेरा वर्णन है आज के 14 वर्ष पूर्व में सम्पूर्ण श्रिस्टी एक व्यक्ति की अवस्था का जिसे मैंने देखा है और यह हाल था आप जैसे छद्म शिव भक्तों को जो केदारेश्वर का विरोध कर रहे थे जिनको की प्रयागराज विश्वविद्यालय में स्थापित करने की जिम्मेदारी कोई सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय(पंच तत्व) ब्राह्मण लिया हो अपने गुर के आदेश पर और उसे त्रिफला(बेल पत्र) की तरह एक बाल ब्रह्मचारी सनातन ब्राह्मण पुत्र अपने को शिव के चरणों में अर्पित कर उस महा विनाश से आप को यहाँ पहुंचा दिया शिव के क्रोध को नियंत्रित करवा कर विश्व का अति शूक्ष्म विनाश से ही अपने त्याग, बलिदान और तपश्या से तो आप पुनः उसकी शक्ति पूंछ रहे हैं की " तुम कौन हो ख्याल=आप की औकात क्या है ?"

Friday, August 8, 2014

People of the world say that the majority of the people of Bengal is communist even those communist not kept the institute of Nuclear Physics name with name of Megh Nad but kept it Saha Institute of Nuclear Physics although it is named in the honour of Professor Megh Nad Saha. How the communist is less religious than Professor Joshi and his think tank of Prayag Vishvavidyalay(Allahabad University) i.e people of RSS and BJP. This is Andh Guru Bhakti to kept the name of any centre in Prayag Vishvavidyalay(University of Allahabad) as a Megh Nad Centre of Space Studies or same name M N Saha Centre of Space Studies. ----------Then in the same manner of Guru Bhakti of Professor Joshi what soever the activity done by Professor Prem Chand Pandey can also be justified. ------- And also I am free to write Kedareshwar at the place of K. of the name K. Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies and not even any International law can deny to write me it as Kedareshwar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies. Because of the Kedareshwar(Lord Shiva) and Lord Brahama but not Lord Vishnu supports Ravan and his son thus Kedareshwar is giving him support but Ravan Kul can not be member of family of Lord Shiva(Kedarswar) thus these are not twin but Kedareswar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies(2000) is senior than Megh Nad Saha Centre of Space Studies(2001) thus not twin(born at the same time). Lord Shiva is base of the all.----------I am writing on behalf of the Kashyap Gotra and also want to tell that Megh Nad's Nana MAYA who was ruler of the present Meerut was also Kashyap Gotirya thus Ravan's wife Mandodari was from Kashyap Gotriya and thus Megh Nad was 1/2 also related with Kashyapa Gotriya but not found support with Kashyap Gotriya although he is among the best son category of the human history. I don't think how the Aangarisa/Bharadwaj have more affinity to Ravan and Ravan's sons while it is clear that not only Aangarisa/Bharadwaj have relation with Ravan's Kul before and after Pulastya Rishi but Kahsyap Gotriya also had relation as main lady ravan's wife was from Kashyap Gotra.------------------------Matter is clear that sacrifice power of Kashyapa is greatest even it is need to kill Shoorya Vanshiya(Kashyap Gotriya) Bali or Maya(Kashyap gotriya)'s son-in-law Ravans killing. The Judgement power according the situation and for the benefit of the society is very spontaneous in Kashyap although the Nyay Darshan given by the Brahamarshi Gautam.------------Moh kishi pe itana theek nahee ki aap kishi ko bhi apane me samahit kar lijiye.

People of the world say that the majority of the people of Bengal is communist even those communist not kept the institute of Nuclear Physics name with name of Megh Nad but kept it Saha Institute of Nuclear Physics although it is named in the honour of Professor Megh Nad Saha. How the communist is less religious than Professor Joshi and his think tank of Prayag Vishvavidyalay(Allahabad University) i.e people of RSS and BJP. This is Andh Guru Bhakti to kept the name of any centre in Prayag Vishvavidyalay(University of Allahabad) as a Megh Nad Centre of Space Studies or same name M N Saha Centre of Space Studies. ----------Then in the same manner of Guru Bhakti of Professor Joshi what soever the activity done by Professor Prem Chand Pandey can also be justified. ------- And also I am free to write Kedareshwar at the place of K. of the name K. Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies and not even any International law can deny to write me it as Kedareshwar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies. Because of the Kedareshwar(Lord Shiva) and Lord Brahama but not Lord Vishnu supports Ravan and his son thus Kedareshwar is giving him support but Ravan Kul can not be member of family of Lord Shiva(Kedarswar) thus these are not twin but Kedareswar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies(2000) is senior than Megh Nad Saha Centre of Space Studies(2001) thus not twin(born at the same time). Lord Shiva is base of the all.----------I am writing on behalf of the Kashyap Gotra and also want to tell that Megh Nad's Nana MAYA who was ruler of the present Meerut was also Kashyap Gotirya thus Ravan's wife Mandodari was from Kashyap Gotriya and thus Megh Nad was 1/2 also related with Kashyapa Gotriya but not found support with Kashyap Gotriya although he is among the best son category of the human history. I don't think how the Aangarisa/Bharadwaj have more affinity to Ravan and Ravan's sons while it is clear that not only Aangarisa/Bharadwaj have relation with Ravan's Kul before and after Pulastya Rishi but Kahsyap Gotriya also had relation as main lady ravan's wife was from Kashyap Gotra.------------------------Matter is clear that sacrifice power of Kashyapa is greatest even it is need to kill Shoorya Vanshiya(Kashyap Gotriya) Bali or Maya(Kashyap gotriya)'s son-in-law Ravans killing. The Judgement power according the situation and for the benefit of the society is very spontaneous in Kashyap although the Nyay Darshan given by the Brahamarshi Gautam.------------Moh kishi pe itana theek nahee ki aap kishi ko bhi apane me samahit kar lijiye.

Gautam, Vashistha/Parashar/Upamanyu, Marich/Kashyap, Aangiras/Bharadwaj, Bhrigu/Jamadagni, Atri/Krishnatrya/Somatreya/Dattatreya, Vishvamitra/Kaushik| 1st point to be noted that these are the Seven Brahmarshi/Saptarshi on the base of merit in which Marich/Kashyap is elder one among Saptarshi even then Gautam and Vashishth are more great and Marich/Kashyap comes on 3rd place and name after / are their sons or grand sons thus we find the Gautam is the best Gotra in over all humanity. and also we find that Professor Murali Manohar Joshi comes from Saptarshi Gotra as Aangiras is the Saptarshi and its derivative is Bharadwaj, and Shri Atal Bihari Bajpai(Upamanyu decedent of Vashishtha) is not comes under the Saptarshi Gotra. There is one sub-caste of Brahmin in North India called as best sub-caste of Brahmin because of the only three gotra Gautam, Garg and Shandilya comes under it. Thus they should noted that the Only son of Marich i.e. the Kashyap is superior than Garg and Shandilya because of the Garg are the students of the Bharadwaaj, Bharadwaj are student of Valmiki who is son of Varun and Varun is the son of Kashyapa. Thus only son of Marich is itself in Saptarshi due to single son but he is in lower category than Gautam and Vashishtha thus due to Gautam that sub caste of Brahmin is superior than other excluding Vashishtha and Kashyapa who have only three gotra (Gautam, Garag, Shandilya)| Here only gautam Gotriya of that sub-Caste of Brahmin is superior than the Kashyapa because the Shandilya is taken birth in Kashmir who was son of Vashishtha and Sister of Kashyapa. Thus only Gautam Gotriya of that sub-caste of Brahmins i.e Gautam Gotriya Shukla is superior than Kashyap gotriya Brahmina.---------------Megh Nad/Megh Nad Saha se Moh Aangiras/ Bharadwaj ko to hogaa hee|

Gautam, Vashistha/Parashar/Upamanyu, Marich/Kashyap, Aangiras/Bharadwaj, Bhrigu/Jamadagni, Atri/Krishnatrya/Somatreya/Dattatreya, Vishvamitra/Kaushik| 1st point to be noted that these are the Seven Brahmarshi/Saptarshi on the base of merit in which Marich/Kashyap is elder one among Saptarshi even then Gautam and Vashishth are more great and Marich/Kashyap comes on 3rd place and name after / are their sons or grand sons thus we find the Gautam is the best Gotra in over all humanity. and also we find that Professor Murali Manohar Joshi comes from Saptarshi Gotra as Aangiras is the Saptarshi and its derivative is Bharadwaj, and Shri Atal Bihari Bajpai(Upamanyu decedent of Vashishtha) is not comes under the Saptarshi Gotra. There is one sub-caste of Brahmin in North India called as best sub-caste of Brahmin because of the only three gotra Gautam, Garg and Shandilya comes under it. Thus they should noted that the Only son of Marich i.e. the Kashyap is superior than Garg and Shandilya because of the Garg are the students of the Bharadwaaj, Bharadwaj are student of Valmiki who is son of Varun and Varun is the son of Kashyapa. Thus only son of Marich is itself in Saptarshi due to single son but he is in lower category than Gautam and Vashishtha thus due to Gautam that sub caste of Brahmin is superior than other excluding Vashishtha and Kashyapa who have only three gotra (Gautam, Garag, Shandilya)| Here only gautam Gotriya of that sub-Caste of Brahmin is superior than the Kashyapa because the Shandilya is taken birth in Kashmir who was son of Vashishtha and Sister of Kashyapa. Thus only Gautam Gotriya of that sub-caste of Brahmins i.e Gautam Gotriya Shukla is superior than Kashyap gotriya Brahmina.---------------
Megh Nad/Megh Nad Saha se Moh Aangiras/ Bharadwaj ko to hogaa hee|