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Saturday, January 24, 2015

सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।



सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।

विष्णु के सहस्र(एक हजार प्रचलित नाम) नाम में से एक नाम नारायण है जिसका अर्थ है नर का अवतार लेने वाला परन्तु सर्वोच्च नाम "विष्णु" है तभी तो इनके नाम से बने पुराण का नाम "विष्णु पुराण" रखा गया है न की नारायण पुराण और उनके सबसे प्रिय मानव भक्त ध्रुव ने विष्णु नाम का ही जाप किया था और उसे ही सर्वोच्च बताया था जवकि इसका उच्चारण कुछ कठिन जरूर है। ---उसी प्रकार दिगंबर/नीलकंठ/नीलाम्बर महादेव के भी अनेको नाम है पर "शिव" नाम सर्वोच्च है और तभी इनके नाम से बने पुराण का नाम भी "शिव पुराण" है। ---------नारायण बहुत से देवताओं के नाम के आगे लगा दिया जाता है जिसका अर्थ है उस देवता का मानव अवतार न की वह देवता जबकि विशेष रूप से विष्णु का मानव अवतार ही इस संसार को दृस्टिगट होता है ।



विष्णु के सहस्र(एक हजार प्रचलित नाम) नाम में से एक नाम नारायण है जिसका अर्थ है नर का अवतार लेने वाला परन्तु सर्वोच्च नाम "विष्णु" है तभी तो इनके नाम से बने पुराण का नाम "विष्णु पुराण" रखा गया है न की नारायण पुराण और उनके सबसे प्रिय मानव भक्त ध्रुव ने विष्णु नाम का ही जाप किया था और उसे ही सर्वोच्च बताया था जवकि इसका उच्चारण कुछ कठिन जरूर है। ---उसी प्रकार दिगंबर/नीलकंठ/नीलाम्बर महादेव के भी अनेको नाम है पर "शिव" नाम सर्वोच्च है और तभी इनके नाम से बने पुराण का नाम भी "शिव पुराण" है। ---------नारायण बहुत से देवताओं के नाम के आगे लगा दिया जाता है जिसका अर्थ है उस देवता का मानव अवतार न की वह देवता जबकि विशेष रूप से विष्णु का मानव अवतार ही इस संसार को दृस्टिगट होता है ।

शाण्डिया(शान:पूर्ण + दिल्य:चन्द्रमा= पूर्ण चन्द्र) तो समझ में आ गया होगा की वृष्णि/यदु/चन्द्रवंशीय श्रीकृष्ण के गुरु वर्तमान मध्य प्रदेश के शांडिल्य आश्रम के तत्कालीन शांडिल्य गोत्रीय संदीपन ऋषि से शिक्षा क्यों दिलवा? क्यों राश्लीला और कंश वध बाद उनके भौतिक पिता वशुदेव/देवकी ने वाशुदेव श्रीकृष्ण को बाबा नंदराय/यशोदा के कुलगुरु गर्ग से शिक्षा न दिलवा अपने कुलगुरु शांडिल्य ऋषि के पास भेजा था ?

शाण्डिया(शान:पूर्ण + दिल्य:चन्द्रमा= पूर्ण चन्द्र) तो समझ में आ गया होगा की वृष्णि/यदु/चन्द्रवंशीय श्रीकृष्ण के गुरु वर्तमान मध्य प्रदेश के शांडिल्य आश्रम के तत्कालीन शांडिल्य गोत्रीय संदीपन ऋषि से शिक्षा क्यों दिलवा?  क्यों राश्लीला और कंश वध बाद उनके भौतिक पिता वशुदेव/देवकी ने वाशुदेव श्रीकृष्ण को बाबा नंदराय/यशोदा के कुलगुरु गर्ग से शिक्षा न दिलवा अपने कुलगुरु शांडिल्य ऋषि के पास भेजा था ?

एक बार पुनः कश्यप कुल की कन्या का वशिष्ठ से विवाह होता है और शाण्डिय का कश्मीर (modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India) में जन्म होता है। अतः शांडिल्य कश्यप और वशिष्ठ युग्म की उत्पत्ति हुए और सप्तर्षि के व्युत्पन हुए। One rishi was a son of the Sage/Rishi Vashistha and grandson(dauther's son) of the Sage/RishiKashyapa| Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town| Rishi/Sage Kashyapa is Originator of Kashmir| जो मामा को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से छोटे और जो भांजे को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से बड़े( कश्यप ऋषि ही दशरथ और वशुदेव के रूप में अवतार लिए थे विष्णु के आह्वान पर उनका पिता बनने के लिए अतः कुछ लोग भ्रान्ति फैलाते हैं की दशरथ के बहन का विवाह वशिष्ठ से हुआ था)। ------गर्ग स्वयं भारद्वाज की शिष्य परम्परा के पुत्र हुए थे और भारद्वाज स्वयं बाल्मीकि के शिष्य और यही बाल्मीकि कश्यप के पुत्र वरुणदेव के पुत्र थे जो वन गमन किये थे किंचित कारणों से अतः गर्ग ऋषि भी कश्यप से सम्बंधित है और कश्यप कुल की शिष्य परम्परा में आते हैं। ---------अतः गर्ग, गौतम और शांडिल्य की श्रेणी होते हुए भी गौतम सप्तर्षि में आते हैं न की गर्ग और शांडिल्य की तरह व्युत्पन है और इस प्रकार कश्यप से श्रेष्ठ और पूज्य क्रमशः गौतम और वशिष्ठ ही हुए और इस प्रकार अन्य चार सप्तर्षियों या सनातन गोत्रियों के लिए तथा व्युत्पन गोत्रियों के लिए भी गौतम और वशिष्ठ श्रेष्ठ हुए लेकिन उनके लिए गर्ग, गौतम और शांडिल्य का क्रम विशेष माने रखता है शूर्यवंश/इक्शाकुवंश/रघुवंश/रामकुल में रावण जैसे ब्राह्मणकुल का नाश काने के उपरांत उनके अश्वमेध यज्ञ में शामिल होने और खान-पान करने के कारन। Sandilya (Rishi): Śāṇḍilya (Sanskrit: शाण्डिल्य) was the name of at least two prominent rishis. One of the rishis was the progenitor of the Sandilya gotra. The name was derived from the Sanskrit words śaṇ, full and dilam, the moon, with the derivative ya added, meaning the one of the full moon, thereby implying a priest or a descendant of the Moon God. Progenitor of Sandilya Gotra :----One rishi was a son of the sage Vashistha and grandson(dauther's son) of the rishi Kashyapa, and the founder of the Śāṇḍilya gotra. Brihadaranyaka Upanishad states that he was a disciple of Vaatsya rishi. His other Acharyas include Kaushika, Gautama Maharishi, Kaishorya Kaapya, Vatsya Vaijavap, and Kushri. His disciples include Kaudinya, Agnivesa, Vatsya Vamakakshayan, Vaishthapureya, and Bharadwaj. He was also the composer of the Śāṇḍilya Upanishad.[3] According to the Bhagavata Purana, he was instrumental in settling certain metaphysical doubts of King Parikshit of Hastinapura and King Vajra of Dwaraka. Rishi from Shāradāvanam: ---Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town.Acording to Sanatan Sanskriti/Culture all the TRIPATHI/TIWARI/TRIPAD comes under Shandilya and All the Shukla's Comes under Garg Gotra. But others may have these gotra even Brahmins and in other castes too. Origin of all the Seven Brahmarshi i.e. the Saptarshi(Gautam, Vashishth, Kashyap, Bharadwaj/Angarisa, Jamadagni/Bhrigu, Krishnatrey:Durvash/Atri, Vishvamitra/Kaushik)/ is Prayagral/Allahaaabad.

एक बार पुनः कश्यप कुल की कन्या का वशिष्ठ से विवाह होता है और शाण्डिय का कश्मीर (modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India) में जन्म होता है। अतः शांडिल्य कश्यप और वशिष्ठ युग्म की उत्पत्ति हुए और सप्तर्षि के व्युत्पन हुए। One rishi was a son of the Sage/Rishi Vashistha and grandson(dauther's son) of the Sage/RishiKashyapa| Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town| Rishi/Sage Kashyapa is Originator of Kashmir| जो मामा को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से छोटे और जो भांजे को बड़ा मानता है उसके लिए शांडिल्य कश्यप से बड़े( कश्यप ऋषि ही दशरथ और वशुदेव के रूप में अवतार लिए थे विष्णु के आह्वान पर उनका पिता बनने के लिए अतः कुछ लोग भ्रान्ति फैलाते हैं की दशरथ के बहन का विवाह वशिष्ठ से हुआ था)। ------गर्ग स्वयं भारद्वाज की शिष्य परम्परा के पुत्र हुए थे और भारद्वाज स्वयं बाल्मीकि के शिष्य और यही बाल्मीकि कश्यप के पुत्र वरुणदेव के पुत्र थे जो वन गमन किये थे किंचित कारणों से अतः गर्ग ऋषि भी कश्यप से सम्बंधित है और कश्यप कुल की शिष्य परम्परा में आते हैं। ---------अतः गर्ग, गौतम और शांडिल्य की श्रेणी होते हुए भी गौतम सप्तर्षि में आते हैं न की गर्ग और शांडिल्य की तरह व्युत्पन है और इस प्रकार कश्यप से श्रेष्ठ और पूज्य क्रमशः गौतम और वशिष्ठ ही हुए और इस प्रकार अन्य चार सप्तर्षियों या सनातन गोत्रियों के लिए तथा व्युत्पन गोत्रियों के लिए भी गौतम और वशिष्ठ श्रेष्ठ हुए लेकिन उनके लिए गर्ग, गौतम और शांडिल्य का क्रम विशेष माने रखता है शूर्यवंश/इक्शाकुवंश/रघुवंश/रामकुल में रावण जैसे ब्राह्मणकुल का नाश काने के उपरांत उनके अश्वमेध यज्ञ में शामिल होने और खान-पान करने के कारन।
Sandilya (Rishi): Śāṇḍilya (Sanskrit: शाण्डिल्य) was the name of at least two prominent rishis. One of the rishis was the progenitor of the Sandilya gotra.
The name was derived from the Sanskrit words śaṇ, full and dilam, the moon, with the derivative ya added, meaning the one of the full moon, thereby implying a priest or a descendant of the Moon God.
Progenitor of Sandilya Gotra :----One rishi was a son of the sage Vashistha and grandson(dauther's son) of the rishi Kashyapa, and the founder of the Śāṇḍilya gotra. Brihadaranyaka Upanishad states that he was a disciple of Vaatsya rishi. His other Acharyas include Kaushika, Gautama Maharishi, Kaishorya Kaapya, Vatsya Vaijavap, and Kushri. His disciples include Kaudinya, Agnivesa, Vatsya Vamakakshayan, Vaishthapureya, and Bharadwaj. He was also the composer of the Śāṇḍilya Upanishad.[3] According to the Bhagavata Purana, he was instrumental in settling certain metaphysical doubts of King Parikshit of Hastinapura and King Vajra of Dwaraka.
Rishi from Shāradāvanam: ---Shandilya was a son of the sage Vasistha, had his hermitage in the Saradavanam, or forest of Sharada, of a village in the Bolair Valley of Kashmir.The village has been identified with the modern town of Sharda, on the banks of the River Kishanganga, in Pakistan Occupied Kashmir, India. The goddess Sharada is said to have manifested herself to him, here, after severe penance by him, to confer upon him his yagnopaveetham, an event that was commemorated in the temple of Sharada Peeth in the town.Acording to Sanatan Sanskriti/Culture all the TRIPATHI/TIWARI/TRIPAD comes under Shandilya and All the Shukla's Comes under Garg Gotra. But others may have these gotra even Brahmins and in other castes too. O

Wednesday, January 21, 2015

मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप पूँजीवाद, समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया कि नहीं अभी?----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ। ----------किसी घटना के घटित होने पर कौन पहुंचा और क्या हुआ इसे देखने और इस पर ऊर्जा व्यर्थ करने के बजाय ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं और उनको प्रोन्नत करने वाले और करने वाले कौन हैं उनको दंड देना उचित है/था न कि कौन पहुंचा और क्या हुआ और जो उबाल हुआ उसका कौन जिम्मेदार है उसको दंड और उसका पोस्ट-मार्टम किया जाय यह उचित। अगर बाद में कुछ हुआ तो उसे तात्कालिक रूप से संभालने और तात्कालिक सजा देने की प्रक्रिया होनी चाहिए न की परोक्ष प्रतिक्रिया। ----------मुझसे पूँछिये की क्या वजह थी जिसकी भर्त्सना मै कई बार कर चुका था घटना से पहले पर बहुमत उस समय उधर था जो ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यतित्व स्वयं रखते है और ऐसे व्यक्तित के विकास में मदद करते हैं। -------मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया नहीं अभी।----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ।

मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप पूँजीवाद, समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया कि नहीं अभी?----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ। ----------किसी घटना के घटित होने पर कौन पहुंचा और क्या हुआ इसे देखने और इस पर ऊर्जा व्यर्थ करने के बजाय ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं और उनको प्रोन्नत करने वाले और करने वाले कौन हैं उनको दंड देना उचित है/था न कि कौन पहुंचा और क्या हुआ और जो उबाल हुआ उसका कौन जिम्मेदार है उसको दंड और उसका पोस्ट-मार्टम किया जाय यह उचित। अगर बाद में कुछ हुआ तो उसे तात्कालिक रूप से संभालने और तात्कालिक सजा देने की प्रक्रिया होनी चाहिए न की परोक्ष प्रतिक्रिया। ----------मुझसे पूँछिये की क्या वजह थी जिसकी भर्त्सना मै कई बार कर चुका था घटना से पहले पर बहुमत उस समय उधर था जो ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यतित्व स्वयं रखते है और ऐसे व्यक्तित के विकास में मदद करते हैं। -------मै मानवीय संवेदना के कारन कदम रखा था ऐसी घृणित घटना होने पर और मेरा प्रभावी व्यक्तित्व मुझे अन्याय और किशी अभिमानी प्रशासक के प्रशासनिक गुरुर के आगे लाया था जो केंद्र से पोषित था लेकिन किशी को क्या पता की इस संसार के असली केंद्र सनातन ब्राह्मण है और कम से कम एक सनातन ब्राह्मण बिना यह संसार और समाज ही नही तो आप समाजवाद, बहुजन समाजवाद, मार्क्सवाद, लेनिनवाद और संघवाद या अन्य अन्य वाद किस जगह प्रयोग करेंगे और आप सबका यह सब वाद मुझ पर आकर अनुत्तीर्ण हो गया नहीं अभी।----------14 वर्ष पूर्व ही अनुमान था की क्या होगा मतलब आप सब फेल थे मेरा आंकलन करने में उसे बताना शेष था जिसे "विवेकानंद और वर्तमान चलन"= "Vivekanand and Modern Trdition" में सार गर्भित कर दिया हूँ और आप जान लीजिये की मै डॉन (भगवा) भी हूँ और बबलू (अशोकचक्र वाला तिरंगा जो साथ मिलने पर भगवा ही होता है) भी मै ही था/हूँ तो आप के सब वाद अनुत्तीर्ण हुए मुझ पर आकर क्योंकि मै सत्य था/हूँ क्योंकि मै प्रदीप/सूर्यकांत/लक्ष्मीनारायण/रामजानकी/सत्यनारायण पुत्र हूँ।

Tuesday, January 20, 2015

The people of the present time judging whom-------the existence of even lord Shiv/ Shiva in broader way the existance of Universe was/is dependent on whose Tolerance i.e. the Vivek:Trilochan:Trayambak:Trinetra i.e one of the son of Saraswati i.e. elder brother of Gyan and Vidya|



The people of the present time judging whom-------the existence of even lord Shiv/ Shiva in broader way the existance of Universe was/is dependent on whose Tolerance i.e. the Vivek:Trilochan:Trayambak:Trinetra i.e one of the son of Saraswati i.e. elder brother of Gyan and Vidya|

April, 2000 event in Department of Physics, Banaras Hindu University was occurred not by my involvement but by the promotion of activities of western culture and also promotion of activities anti-Brahmin in the both state UP and Bihar specially and in whole India generally on the world level to demolish the Indian culture because if Brahmin protect himself then the Indian culture with suffer by the foreign culture resultantly. ---Any world wide event against western countries was due to greediness of the western countries to development his culture in the whole world without having power to control the people's by only their own culture. Therefore the Western countries should punish his agents who promote the people promotion of activities of western culture and also promotion of activities anti-Brahmin in the both state UP and Bihar specially and in whole India generally on the world level to demolish the Indian culture. --In last I can say that only the Indian culture have power to control the whole world and thus Indian culture and Brahmin should preserved as in past other wise no one want to remain as a Brahmin in situation of war like environment and thus there will be no existence of India Culture and reluctantly no existence of the world.-----------All the events as described was happening already and if event occurred then due to emotion I was involved on humanitarian back ground but not due to I was guilty in any way in that case.



April, 2000 event in Department of Physics, Banaras Hindu University was occurred not by my involvement but by the promotion of activities of western culture and also promotion of activities anti-Brahmin in the both state UP and Bihar specially and in whole India generally on the world level to demolish the Indian culture because if Brahmin protect himself then the Indian culture with suffer by the foreign culture resultantly. ---Any world wide event against western countries was due to greediness of the western countries to development his culture in the whole world without having power to control the people's by only their own culture. Therefore the Western countries should punish his agents who promote the people promotion of activities of western culture and also promotion of activities anti-Brahmin in the both state UP and Bihar specially and in whole India generally on the world level to demolish the Indian culture. --In last I can say that only the Indian culture have power to control the whole world and thus Indian culture and Brahmin should preserved as in past other wise no one want to remain as a Brahmin in situation of war like environment and thus there will be no existence of India Culture and reluctantly no existence of the world.-----------All the events as described was happening already and if event occurred then due to emotion I was involved on humanitarian back ground but not due to I was guilty in any way in that case.

Sunday, January 18, 2015

People only remember the Saptarshi=Seven Brahmarshi of Prayagraj as Brahmadatt but forget the actual Brahmadatt(Daksha Prajapati) of Kashi who is physical son of Brahma and Saraswati and father of almost all the females of the world including Sati:Parvati/Lord Shiva. In this connection we should remember the greatest father and greatest Rajarshi, Janak(Father of Sita) although the first Rajarshi from Saptarshi is Vishvamitra/Vishvarath/Kausik.

People only remember the Saptarshi=Seven Brahmarshi of Prayagraj as Brahmadatt but forget the actual Brahmadatt(Daksha Prajapati) of Kashi who is physical son of Brahma and Saraswati and father of almost all the females of the world including Sati:Parvati/Lord Shiva. In this connection we should remember the greatest father and greatest Rajarshi, Janak(Father of Sita) although the first Rajarshi from Saptarshi is Vishvamitra/Vishvarath/Kausik.

First from Parambrahm=Brahm it was Shiva comes in existence at Kashi then from Shiva it was Vishnu comes in existence at Prayagraj(at that time Ksheer Sagar was here according shifting of the plate theory you can know it well) and them from Vishnu it was Brahma also comes in existence at Prayagraj. Shiva's God is Vishnu(Shriram) and Vishnu(Shriram)'s God is Shiva thus Prayagraj and Kashi are interrelated but due to Brahma also at Prayagraj Prayagraj get's more importance although the Kashi is the first city of the world and even too Kashi as place of Brahma and Saraswati's Physical son, Daksha Prajapati's who is father the whole girls/women of the world including Sati (Parvati).



First from Parambrahm=Brahm it was Shiva comes in existence at Kashi then from Shiva it was Vishnu comes in existence at Prayagraj(at that time Ksheer Sagar was here according shifting of the plate theory you can know it well) and them from Vishnu it was Brahma also comes in existence at Prayagraj. Shiva's God is Vishnu(Shriram) and Vishnu(Shriram)'s God is Shiva thus Prayagraj and Kashi are interrelated but due to Brahma also at Prayagraj Prayagraj get's more importance although the Kashi is the first city of the world and even too Kashi as place of Brahma and Saraswati's Physical son, Daksha Prajapati's who is father the whole girls/women of the world including Sati (Parvati).

Guruvar=Vrihaspativar: Vishnu is the greatest Guru in the world and treated as Guru Vrihaspati(Guru of Deva's) in the Tridev=Trimurti although the Brahma is super source of knowledge.-----Although the concept of Brahmin, Kshatriya and Vaisya comes from three part of Parambrahm i.e. Brahm means Brahmaa , Vishnu and Mahesh but Brahma, Vishnu and Mahesh not comes under the any of Brahmin, Kshatriya and Vaisya but super source of Knowledge, Power and Wealth. First VARN concept comes when one of the Saptarshi=7 Brahmarshi Vishvamitra/Vishvarath/Kaushik begin to play role of Rajarshi and then post situation came of Maharshi thus Brahmarshi, Rajarshi and Maharshi laid us to the situation of Brahman, Kshatriya and Vaisya. Once Again Brahma is super source of Knowledge, Mahesh is super source of Power and Vishnu is super source of Wealth but not under any VARN(i.e. Brahmin, Kshatriya and Vaishya) after all Vishnu is the greatest Guru and treated as Guru Vrihaspati in the Tridev=Trimurti although the Brahma is super source of knowledge.



Guruvar=Vrihaspativar: Vishnu is the greatest Guru in the world and treated as Guru Vrihaspati(Guru of Deva's) in the Tridev=Trimurti although the Brahma is super source of knowledge.-----Although the concept of Brahmin, Kshatriya and Vaisya comes from three part of Parambrahm i.e. Brahm means Brahmaa , Vishnu and Mahesh but Brahma, Vishnu and Mahesh not comes under the any of Brahmin, Kshatriya and Vaisya but super source of Knowledge, Power and Wealth. First VARN concept comes when one of the Saptarshi=7 Brahmarshi Vishvamitra/Vishvarath/Kaushik begin to play role of Rajarshi and then post situation came of Maharshi thus Brahmarshi, Rajarshi and Maharshi laid us to the situation of Brahman, Kshatriya and Vaisya. Once Again Brahma is super source of Knowledge, Mahesh is super source of Power and Vishnu is super source of Wealth but not under any VARN(i.e. Brahmin, Kshatriya and Vaishya) after all Vishnu is the greatest Guru and treated as Guru Vrihaspati in the Tridev=Trimurti although the Brahma is super source of knowledge.

Saturday, January 17, 2015

Hanuman's marriage Publicized by me due to wrong step of his son, Makaradwaj's(So-Called World's Super Power)'s activities other wise people know him Akhand Brahmachari.



Hanuman's marriage Publicized by me due to wrong step of his son, Makaradwaj's(So-Called World's Super Power)'s activities other wise people know him Akhand Brahmachari.

My Merit: 5th level top position in all schools whos examination Centre was Primary School Bishunpur, Top 8th Examination self Centre, Top the college National Inter College, Pattinarendrapur, Jaunpur in High School Self Centre with 74 percent and got National Merit Scholarship in which other students are bellow 70 percent in my class and top in entrance examination of Intermediate and over all 2 year performance in 12th is on Top but second position in college. Second position in college Gandhi Smarak Degree College, Samodhpur Jaunpur with 69 percent with Top position in written in over all Group of Varanasi Zone in Army wing NCC. M. Sc. 59 percent from Physics Department of Banaras Hindu Univerity in which was resultant of understanding of social matter of Varanasi of a vice Chancellor who has taken PHD in 6 month from foreign in criminology and nephew of the Indian President (I forcefully send bellow 60 percent due to miss conception)+ All these performance with a best best Brahmin being at the most Indian cultured part of India with proud to be not only Brahmin but also to be proud of Sanatan Brahmin.



My Merit: 5th level top position in all schools whos examination Centre was Primary School Bishunpur, Top 8th Examination self Centre, Top the college National Inter College, Pattinarendrapur, Jaunpur in High School Self Centre with 74 percent and got National Merit Scholarship in which other students are bellow 70 percent in my class and top in entrance examination of Intermediate and over all 2 year performance in 12th is on Top but second position in college. Second position in college Gandhi Smarak Degree College, Samodhpur Jaunpur with 69 percent with Top position in written in over all Group of Varanasi Zone in Army wing NCC. M. Sc. 59 percent from Physics Department of Banaras Hindu Univerity in which was resultant of understanding of social matter of Varanasi of a vice Chancellor who has taken PHD in 6 month from foreign in criminology and nephew of the Indian President (I forcefully send bellow 60 percent due to miss conception)+ All these performance with a best best Brahmin being at the most Indian cultured part of India with proud to be not only Brahmin but also to be proud of Sanatan Brahmin.

King of so called World Super Power=Son of Ambedakar: Ambavaadekar: Hanumaan: Mahaveer: Kesharinanadan=Marutinandan : Pawansut: Bajarangbali and Suwarchala i.e. the Makardhwaj it was Lav-Kush i.e. the Hindu-Kush i.e. son of Shriram: Satyanarayan: Suryakant: Lakshmi Narayan, who was enough to teach a lesson. -------Please do not play such act in future to i.e. come in the way of Shriram: Satyanarayan: Suryakant: Lakshminarayan whose destination is reach to Lord Shiv and Shiva otherwise it will be the responsibility of your father Ambedakar /Amba-Vaadekar/Hanumaan/ Kesharinandan to punish you himself. Please control the new born Ahirvans:World's highest Mafias i.e brother of Ravan's in your kingdom (They may be from origin of Shri Lanka or from South India)| Your near abour 3500 Shahids and huge loss world economy which leads world 14 year back is resultant of your Mafia's work and no other one is responsible for that.



King of so called World Super Power=Son of Ambedakar: Ambavaadekar: Hanumaan: Mahaveer: Kesharinanadan=Marutinandan : Pawansut: Bajarangbali and Suwarchala i.e. the Makardhwaj it was Lav-Kush i.e. the Hindu-Kush i.e. son of Shriram: Satyanarayan: Suryakant: Lakshmi Narayan, who was enough to teach a lesson. -------Please do not play such act in future to i.e. come in the way of Shriram: Satyanarayan: Suryakant: Lakshminarayan whose destination is reach to Lord Shiv and Shiva otherwise it will be the responsibility of your father Ambedakar /Amba-Vaadekar/Hanumaan/ Kesharinandan to punish you himself. Please control the new born Ahirvans:World's highest Mafias i.e brother of Ravan's in your kingdom (They may be from origin of Shri Lanka or from South India)| Your near abour 3500 Shahids and huge loss world economy which leads world 14 year back is resultant of your Mafia's work and no other one is responsible for that.

Friday, January 16, 2015

All the Devas (But not Trinity:Trimurti:Tridev:Brahma +Vishnu+Mahes) including Indra and Vishvakarma are son of Aditya. And also Suryadev:Suryavansh and Chandradev:Chandravansh and Sawarn Gotriya are also son of Aditya(son of Kashyapa and Aditi)

Kashyap / कश्यप(Following the words given to Lord Brahma by his father Marich he obeyed to marry with the daughters of Daksha Prajapati who was physical son of Lord Brahma and Saraswati but not like Saptarshi=Seven Brahmarshi; the Sati later known as Paravti:Shiva is also daughter of Daksha Prajati i.e. grand daughter of Lord Brahma).
Kashyap is one of the ancient sages who is mentioned once in Rigveda. This name is mentioned a number of times in other Samhitas (scripts) as well. He is always described as veryancient, religious and mystical character.
According to Aitareya Brahman, he performed the coronation of king ‘Vishvakarmabahuwan’. Aitareya Brahmanas have linked Kashyaps to Janmejay.
In Shatpath Brahman, the king is called Kashyap.
In context to the origin and hierarchy of Asurs, Mahabharata and Puranas say that Marichi was one of the seven sons of Brahma, who produced a son, Kashyap, a king.
Kashyap married the 17 daughters of Daksha. Following are the offspring of Kashyap from them:
Aditya from Aditi (Pandey Vivek Kumar All the Devas (But not Trinity:Trimurti:Tridev:Brahma +Vishnu+Mahes) including Indra and Vishvakarma are son of Aditya. And also Suryadev:Suryavansh and Chandradev:Chandravansh and Sawarn Gotriya are also son of Aditya(son of Kashyapa and Aditi)
Daitya (Daemon) from Diti
Danava from Danu
Ashva etc from Kashta
Gandharva from Anishtha
Daemon from Sursa
Vraksha from Ila
Apsaragana from Muni
Sarpa from Krodhavasha
Gau and Mahish from Surabhi
Shwapad from Saramaa
Shyen-Gradhra from Taamra
Yadogana from Timi
Garuda and Arun from Vinta
Naag from Kadru
Patang from Patangi
Shalabh from Yamini
According to Bhagavata Purana and Markandeya Purana, Kashyap had 13 wives:
Diti
Aditi
Danu
Vinta
Khasa
Kadru
Muni
Krodha
Rishtha
Ira
Taamra
Ila
Pradha
All was created from them.
Kashyap is the name of a clan as well. It is a prevailing clan. If somebody’s clan is not known, he/she is considered to be a Kashyap because according to tradition, all came from Kashyaps.
Once upon a time, Parsuram won the whole Earth and donated it to sage Kashyap. Kashyap said to him “Now you don’t stay on my land”. So Parsuram decided not to stay on Earth during night. He started going to Mahendra Parvat every night.[1]
Daksh had two daughters in Sat Yug: Kadru and Vinta. They both were married to Sage Kashyap. One day, happy with them, Kashyap granted them both a wish. Kadru asked for 100 courageous snake sons. Vinta asked for 2 sons but more courageous than the 100 sons of Kadru. After some time both Kadru and Vinta got 10 and 2 eggs respectively. Snakes emerged from Kadrus eggs after 500 years. As a result of jealousy, Vinta opened one of her egg. Out came a premature boy whose only upper body was developed. The underdeveloped son cursed his mother to be the servant of Kadru for 500 years and also said that if the other egg is not opened before time, then her other son will release her from the curse. First boy became Arun and was the charioteer of Surya and the second boy turned into Garuda and flew away.
One day Kadru and Vinta went out. After watching Uccheshrawa horse, they set a bet that whoever guesses the colour of the horse wrong; will be the maid of the winner of the bet. They decided to see the colour of the horse next day. Vinta said the horse was white but Kadru said that the horse was white with black tail. Kadru was fraud. She told her snake sons to wrap around horse’s tail so she doesn’t lose the bet. She cursed the snakes who didn’t follow her orders to turn to ash in the Janmejay’s Yagya (sacrifice). In approval of this curse, Brahma called Kashyap and told him “The counts of your snakes have increased too much. It was good that your wife cursed some of them, so don’t be angry with her.” Saying this, Brahma gave Kashyap the skill to take off the venom from the snakes. Next day when Kadru and Vinta went to see the horse, the tail appered to be black by the black snakes wrapped around it. So Vinta accepted to be Kadru’s maid as she lost her bet.
Garuda asked the snakes what he could do to release her mother from the curse. His snake brothers asked him to bring Amrut (ambrosia, makes immortal). Garuda left to find Amrut. He had to fight all the deities. He defeated all of them and reached where Amrut was. By turning himself into a miniscule, he crossed the Chakra rotating around the Amrut. He killed the two snake guards and flew way with the Amrut. He himself didn’t drink the Amrut, so Vishnu was happy with him and blessed him with immortality and a place in Vishnu’s flag. Garuda also accepted to be Vishnu’s carrier. On his way he met Indra. He asked him to return the Amrut because it will be a disaster if the snakes drank the Amrut. Garuda told Indra that he is taking the Amrut on a purpose. When he places it down, Indra may take it back with him. Indra was pleased with him and gave him a blessing that snakes will be his food. Garuda then reached his mother and told the snakes that he has brought the Amrut. He asked them to release her mother and take a bath. By the time when snakes returned, Indra stole the Amrut from the room. The snakes licked the cloth where the Amrut was kept, and their tongues split in two parts. [2]।
Indra was very jealous of Balkhilya Sages. Angry sages asked Kashyap to teach Indra a lesson. Kashyap married Suparna and Kadru. When they were pregnant, he advised them to stay at home decently, and left the house. The two ladies started going to the Yagyas (sacrifices) of the sages. They spoilt the sacrifices and by the curses from the ages, they turned into rivers. Kashyap came to know about it when he returned. They worshipped Shiva after Sages advice. Shiva was pleased and blessed them that they will turn into ladies again when they will meet River Ganga. At the time of their Yagyas, Kadru again insulted the sages with on eeye, so she lost her eye. Somehow Kasup pleased the sages again and turned them to ladies back again. [3]
References
↑ बाल्मीकि रामायण, बाल कांड, सर्ग 76, श्लोक 11-16
↑ महाभारत, आदिपर्व, अध्याय 28, अ0 29 श्लोक 1 से 14 तक, अ0 30, श्लोक 32 से 52 तक अध्याय 32, 33, 34
↑ ब्रह्म पुराण, 100 ।-

Thursday, January 15, 2015

ब्रह्मा के प्रथम(सात पुत्र में से प्रथम) पुत्र मारीच की प्रथम और एक मात्र संतान कश्यप जो पिता के श्रेश्ठतम आज्ञाकारी पुत्र थे के गोत्र से होने कारन दुनिया के हर जाल को तोड़ने की कला हाशिल है और वैसे भी अपने माता-पिता का भी एक मात्र पुत्र हूँ और दूसरी और अंतिम संतान मेरी बहन है। मेरी मेरिट क्या है इसे कोई अपने लगभग 3000 शहीदों से पूंछे जिसे उसने स्वयं मौत के मुह में धकेल दिया मुझे अनाथ, अकर्मण्य, अज्ञान और गरीब सिद्ध करने में।---------जो शिव और शिवा को समर्पित हो गया वह स्वयं शिव-शिवा हो गया तो जो त्रिफला (वेलपत्र=विल्वा पत्र) पाण्डेय शिव और शिवा पर समर्पित हुआ क्या वह शिव और शिवा मय अभी तक नहीं हुआ और इससे एक कदम आगे जब स्वयं शिव का अस्तित्व नहीं तो ब्रह्मा और विष्णु का अस्तित्व कैसे संभव और जब शिव, विष्णु और ब्रह्मा का अस्तिव नहीं तो इस समस्त ब्रह्माण्ड का अस्तित्व संभव कैसे(यहां उस त्रिफला पाण्डेय का प्रसंग है जो शिव और शिवा को समर्पित हुआ हो)। -------अगर रामपुर-223225 (आज़मगढ़) के प्रमुख परिवार का सबसे बड़ा पौत्र अगर दरिद्र तो इस गाव का कोई व्यक्ति और स्वयं यह गाँव अमीर कैसे हुआ और यह गाँव अगर अमीर नहीं तो भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व का कोई गांव अमीर कैसे और इस प्रकार सम्पूर्ण विश्व अमीर कैसे जिसका प्रथम परिवार शिव ही गरीब और दरिद्र(शिव जी का पारिवारिक जीवन प्रथम पारिवारिक परिकल्पना है और मेरे गाँव को नीव देने वाले बाबा सारंगधर=चन्द्रधर=चंद्रशेखर=राकेशधर भी तो शिव के ही नामधारी थे न)।---------अगर ब्रह्मा, विष्णु और महेश या इनका सम्मिलित स्वरुप हनुमान/अम्बवादेकर(अम्बेडकर)/महावीर/केशरीननदन चाहिए तो जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी अधिकाँश को रहना चाहिए कम से कम इस भारत में और विशेष कर भारतीय संस्कृति की ज्योति केंद्र भूमि प्रयाग-काशी में।

ब्रह्मा के प्रथम(सात पुत्र में से प्रथम) पुत्र मारीच की प्रथम और एक मात्र संतान कश्यप जो पिता के श्रेश्ठतम आज्ञाकारी पुत्र थे के गोत्र से होने कारन दुनिया के हर जाल को तोड़ने की कला हाशिल है और वैसे भी अपने माता-पिता का भी एक मात्र पुत्र हूँ और दूसरी और अंतिम संतान मेरी बहन है। मेरी मेरिट क्या है इसे कोई अपने लगभग 3000 शहीदों से पूंछे जिसे उसने स्वयं मौत के मुह में धकेल दिया मुझे अनाथ, अकर्मण्य, अज्ञान और गरीब सिद्ध करने में।---------जो शिव और शिवा को समर्पित हो गया वह स्वयं शिव-शिवा हो गया तो जो त्रिफला (वेलपत्र=विल्वा पत्र) पाण्डेय शिव और शिवा पर समर्पित हुआ क्या वह शिव और शिवा मय अभी तक नहीं हुआ और इससे एक कदम आगे जब स्वयं शिव का अस्तित्व नहीं तो ब्रह्मा और विष्णु का अस्तित्व कैसे संभव और जब शिव, विष्णु और ब्रह्मा का अस्तिव नहीं तो इस समस्त ब्रह्माण्ड का अस्तित्व संभव कैसे(यहां उस त्रिफला पाण्डेय का प्रसंग है जो शिव और शिवा को समर्पित हुआ हो)। -------अगर रामपुर-223225 (आज़मगढ़) के प्रमुख परिवार का सबसे बड़ा पौत्र अगर दरिद्र तो इस गाव का कोई व्यक्ति और स्वयं यह गाँव अमीर कैसे हुआ और यह गाँव अगर अमीर नहीं तो भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व का कोई गांव अमीर कैसे और इस प्रकार सम्पूर्ण विश्व अमीर कैसे जिसका प्रथम परिवार शिव ही गरीब और दरिद्र(शिव जी का पारिवारिक जीवन प्रथम पारिवारिक परिकल्पना है और मेरे गाँव को नीव देने वाले बाबा सारंगधर=चन्द्रधर=चंद्रशेखर=राकेशधर भी तो शिव के ही नामधारी थे न)।---------अगर ब्रह्मा, विष्णु और महेश या इनका सम्मिलित स्वरुप हनुमान/अम्बवादेकर(अम्बेडकर)/महावीर/केशरीननदन चाहिए तो जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी अधिकाँश को रहना चाहिए कम से कम इस भारत में और विशेष कर भारतीय संस्कृति की ज्योति केंद्र भूमि प्रयाग-काशी में।  

Friday, January 9, 2015

गौ इति गोत्रः: गौतम, व्यास/पारासर/वशिष्ट, कश्यप/मारीच, भारद्वाज/धन्वन्तरि/आंगिरस, जमदग्नि(दधीचि)/भार्गव/भृगु, कृष्णात्रेय(दुर्वाशा)/सोमात्रेय(सोम)/दत्तात्रेय(दत्त)/अत्रि, विश्वामित्र/विश्वरथ/कौशिक जैसे सप्तर्षि गोत्र सात सनातन ब्रह्मर्षि के नाम के सनातन गोत्र जिनका जन्म ब्रह्मा द्वारा आयोजित और आहूत प्राक-यज्ञ/प्रकृष्टा यज्ञ में हुआ था जिस स्थान को हम प्रयागराज/अल्लाहाबाद कहते हैं जिसमे सहभागिता और योगदान महादेव शिव-शंकर और विष्णु अपेक्षित थी और इस प्रकार इनकी संताने ब्रह्मा के साथ ही साथ महादेव/महेश/शिवशंकर और सच्चिदानंद/सत्यनारायण विष्णु की संताने भी कही जाती हैं। इस प्रकार सरस्वती/ब्रह्मा के उद्गम स्थल प्रयागराज के लिए इन तीनों देवों का क्रम ब्रह्मा, विष्णु और शिव:महेश हो जाता है जो की काशी में शिव, विष्णु और ब्रह्मा रहता है। और तभी इनकी संताने ब्रह्मा, विष्णु और महेश क्रम में नाम जाप करती हैं।


गौ इति गोत्रः: गौतम, व्यास/पारासर/वशिष्ट, कश्यप/मारीच, भारद्वाज/धन्वन्तरि/आंगिरस, जमदग्नि(दधीचि)/भार्गव/भृगु, कृष्णात्रेय(दुर्वाशा)/सोमात्रेय(सोम)/दत्तात्रेय(दत्त)/अत्रि, विश्वामित्र/विश्वरथ/कौशिक जैसे सप्तर्षि गोत्र सात सनातन ब्रह्मर्षि के नाम के सनातन गोत्र जिनका जन्म ब्रह्मा द्वारा आयोजित और आहूत प्राक-यज्ञ/प्रकृष्टा यज्ञ में हुआ था जिस स्थान को हम प्रयागराज/अल्लाहाबाद कहते हैं जिसमे सहभागिता और योगदान महादेव शिव-शंकर और विष्णु  अपेक्षित थी और इस प्रकार इनकी संताने ब्रह्मा के साथ ही साथ महादेव/महेश/शिवशंकर और सच्चिदानंद/सत्यनारायण विष्णु की संताने भी कही जाती हैं। इस प्रकार सरस्वती/ब्रह्मा के उद्गम स्थल प्रयागराज के लिए इन तीनों देवों का क्रम ब्रह्मा, विष्णु और शिव:महेश हो जाता है जो की काशी में शिव, विष्णु और ब्रह्मा रहता है। और तभी इनकी संताने ब्रह्मा, विष्णु और महेश क्रम में नाम जाप करती हैं।

Saturday, January 3, 2015

2007 में बहराइच के एक शादी समारोह में कई वर्ष के अपने ही एक सहपाठी के साथ बहुमत को देख अपने सत्य की शक्ति न पहचान दुम दबाकर भागने वाले लोग मुझे नियंत्रित करने के लिए लगा दिए गए और मै नियंत्रित हो गया जो स्वयं उनके स्थान पर मोर्चा संभाला और बात मनवा कर दम लिया जबकि प्रारंभिक रूचि मेरी नहीं थी वरन मोर्चा छोड़ने वालों की थी, यह तो गुरु के सम्मान की रक्षा है जिन्होंने उनको मुझे संभालने के लिए लगाया था। अतः बात दमदारी की हो और उस पर दम लगाया जाय वह नेतृत्व मुझे श्रेष्कर लगता है। अतः प्रयागराज ही शेर बनने के स्थान पर सार्वत्रिक रूप से सक्षम को ही उचित सम्मान दे पाउँगा जिसकी कथनी और करनी में अंतर न हो चाहे वह कम ज्ञानी हो चलेगा लेकिन दिल का स्वक्ष हो।



2007 में बहराइच के एक शादी समारोह में कई वर्ष के अपने ही एक सहपाठी के साथ बहुमत को देख अपने सत्य की शक्ति न पहचान दुम दबाकर भागने वाले लोग मुझे नियंत्रित करने के लिए लगा दिए गए और मै नियंत्रित हो गया जो स्वयं उनके स्थान पर मोर्चा संभाला और बात मनवा कर दम लिया जबकि प्रारंभिक रूचि मेरी नहीं थी वरन मोर्चा छोड़ने वालों की थी, यह तो गुरु के सम्मान की रक्षा है जिन्होंने उनको मुझे संभालने के लिए लगाया था। अतः बात दमदारी की हो और उस पर दम लगाया जाय वह नेतृत्व मुझे श्रेष्कर लगता है। अतः प्रयागराज ही शेर बनने के स्थान पर सार्वत्रिक रूप से सक्षम को ही उचित सम्मान दे पाउँगा जिसकी कथनी और करनी में अंतर न हो चाहे वह कम ज्ञानी हो चलेगा लेकिन दिल का स्वक्ष हो।

Friday, January 2, 2015

उपसंहार: परशुराम को अपने गुरु शिव और कश्यप ऋषि की बात माननी ही पड़ती है, इसके साथ ही साथ स्वयं भारद्वाज और उनके शिष्य गर्ग द्वारा और परशुराम द्वारा ध्रिस्टता वस कश्यप ((गर्ग (हर वर्ग के वे लोग जो शिस्य परम्परा के तहत ऋषित्व और ब्राह्मणत्व प्राप्त किये उनका समूह) के गुरु भारद्वाज के गुरु वाल्मीकि के पिता, वरुणदेव और उनके पिता, कश्यप ऋषि जो पारवती:सती:शक्ति/शिव के जीजा भी हैं सती/शिव और अदिति/कश्यप और अन्य सभी बहनों/कश्यप के बहन सम्बन्ध से )) और स्वयं शिव को चुनौती इस प्रयागराज में कैसे मिल जाती है ? और मिली तो झुकना ही था उनको और उनको प्रायश्चित करना ही था। अतः कश्यप ऋषि को चुनौती देने वाले भारद्वाज (ऋषियों में गणेश: ऋषियों के प्राकट्य हेतु किये गए प्रकृष्टा यज्ञ से प्रकट हुए सप्तर्षि:सात ब्रह्मर्षि के मुख्य स्थान प्रयागराज को ही सदा के लिए अपना आवास बना लेने वाले), गर्ग ऋषि और परशुराम को प्रायश्चित करने देना चाहिए।



उपसंहार: परशुराम को अपने गुरु शिव और कश्यप ऋषि की बात माननी ही पड़ती है, इसके साथ ही साथ स्वयं भारद्वाज और उनके शिष्य गर्ग द्वारा और परशुराम द्वारा ध्रिस्टता वस कश्यप ((गर्ग (हर वर्ग के वे लोग जो शिस्य परम्परा के तहत ऋषित्व और ब्राह्मणत्व प्राप्त किये उनका समूह) के गुरु भारद्वाज के गुरु वाल्मीकि के पिता, वरुणदेव और उनके पिता, कश्यप ऋषि जो पारवती:सती:शक्ति/शिव के जीजा भी हैं सती/शिव और अदिति/कश्यप और अन्य सभी बहनों/कश्यप के बहन सम्बन्ध से )) और स्वयं शिव को चुनौती इस प्रयागराज में कैसे मिल जाती है ? और मिली तो झुकना ही था उनको और उनको प्रायश्चित करना ही था। अतः कश्यप ऋषि को चुनौती देने वाले भारद्वाज (ऋषियों में गणेश: ऋषियों के प्राकट्य हेतु किये गए प्रकृष्टा यज्ञ से प्रकट हुए सप्तर्षि:सात ब्रह्मर्षि के मुख्य स्थान प्रयागराज को ही सदा के लिए अपना आवास बना लेने वाले), गर्ग ऋषि और परशुराम को प्रायश्चित करने देना चाहिए।

My 0th level 1st Guru was Shri Rajendra Prasad Yadva at Bishunpur Primary School and 1st level Guru at Ramapur Primary School was tathakathit Dalit, Shri Dhanraj Harijan who given me DOB 1-8-1976 at place of 11-11-1975.

My 0th level 1st Guru was Shri Rajendra Prasad Yadva at Bishunpur Primary School and 1st level Guru at Ramapur Primary School was tathakathit Dalit, Shri Dhanraj Harijan who given me DOB 1-8-1976 at place of 11-11-1975.