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Saturday, May 21, 2016

राजा जनक के सामने न्याय दर्शन के प्रणेता गौतम ऋषी द्वारा जगत श्रिष्टि=जगत जननी=सीता=सीत:हल से जिनका नाम हुआ हो=जानकी के गुरु होने के प्रस्ताव सीता के गुरुकुल में जाने से पहले दिया गया था जिसको जानकी=सीता ने गौतम ऋषि की भार्या, देवी अहिल्या के साथ हुए व्यवहार को नारी के साथ हुए अन्याय के रूप देते हुए ठुकराया था की जो अपनी पत्नी के साथ न्याय नहीं कर सका वह दूसरों को जो शिक्षा देगा उससे भी नारी समाज को हानि पन्हुंचेगी और मैं भी एक नारी ही तो हूँ तो उनसे शिक्षा कैसे लूँ? इस प्रकार सीता द्वारा गौतम ऋषि के उनके गुरु होने के प्रस्ताब को ठुकराया गया था? उसी जगत सृस्टि समान जननी जानकी के साथ जगत पिता सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म राम के द्वारा राम के न चाहते हुए भी लगभग वही व्यवहार हुआ और ये वही राम थे जिन्होंने गौतम ऋषि द्वारा परितक्त्या पाषाण समान जीवन जीती हुयी (जिनका जीवन पथ्थर के समान हो गया था गौरवशाली ऋषि द्वारा परितक्य होकर) अहिल्या को ऋषि गौतम से मिलाकर नया जीवन दिया था। तो मित्रों अगर कश्यप गोत्रीय राम को अगर गौतम गोत्रीय नारी विरोधी सिध्ध करते हैं साम्यवाद( मार्क्सवाद= किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूप से अंकवाद=किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूपअंक घटा दो और बढ़ा दो तथा किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूप से भौतिक संसार में उसका पद और मान घटा दो और बढ़ा दो ) द्वारा तो क्या गौतम ने अहिल्या के साथ वही व्यवहार नहीं किया था और कश्यप गोत्रीय भी गौतम ऋषि को नारी विरोधी सिध्ध कर सकते है तो यह आरोप प्रत्यारोप चलता रहता है। वास्तविकता यह हैं की न गौतम ने और न राम ने ही ह्रदय से या जान बूझकर ऐसा कुछ किया था और यही कारण था की न्यायदर्शन के प्रणेता गौतम को नारी विरोधी होने का आरोप लगा सीता द्वारा उनको गुरु न मानना स्वयं सीता के जीवन में ऐसा दिन लाया तो अब राम के बारे में भी ऐसा किसी के द्वारा या गौतम या उनके अनुयायियों द्वारा न कहा जाय क्योंकि न गौतम गलत थे न राम और हकीकत यह की सांसारिक रूप से मदी, दम्भी, व्यभिचारी, लोभी और अज्ञानी लोग ही इसके कारन थे और वे ही गलत थे दोनों के सन्दर्भ में।

राजा जनक के सामने न्याय दर्शन के प्रणेता गौतम ऋषी द्वारा जगत श्रिष्टि=जगत जननी=सीता=सीत:हल से जिनका नाम हुआ हो=जानकी के गुरु होने के प्रस्ताव सीता के गुरुकुल में जाने से पहले दिया गया था जिसको जानकी=सीता ने गौतम ऋषि की भार्या, देवी अहिल्या के साथ हुए व्यवहार को नारी के साथ हुए अन्याय के रूप देते हुए ठुकराया था की जो अपनी पत्नी के साथ न्याय नहीं कर सका वह दूसरों को जो शिक्षा देगा उससे भी नारी समाज को हानि पन्हुंचेगी और मैं भी एक नारी ही तो हूँ तो उनसे शिक्षा कैसे लूँ? इस प्रकार सीता द्वारा गौतम ऋषि के उनके गुरु होने के प्रस्ताब को ठुकराया गया था? उसी जगत सृस्टि समान जननी जानकी के साथ जगत पिता सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म राम के द्वारा राम के न चाहते हुए भी लगभग वही व्यवहार हुआ और ये वही राम थे जिन्होंने गौतम ऋषि द्वारा परितक्त्या पाषाण समान जीवन जीती हुयी (जिनका जीवन पथ्थर के समान हो गया था गौरवशाली ऋषि द्वारा परितक्य होकर) अहिल्या को ऋषि गौतम से मिलाकर नया जीवन दिया था। तो मित्रों अगर कश्यप गोत्रीय राम को अगर गौतम गोत्रीय नारी विरोधी सिध्ध करते हैं साम्यवाद( मार्क्सवाद= किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूप से अंकवाद=किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूपअंक घटा दो और बढ़ा दो तथा किसी को नियंत्रित करने हेतु सांसारिक रूप से भौतिक संसार में उसका पद और मान घटा दो और बढ़ा दो ) द्वारा तो क्या गौतम ने अहिल्या के साथ वही व्यवहार नहीं किया था और कश्यप गोत्रीय भी गौतम ऋषि को नारी विरोधी सिध्ध कर सकते है तो यह आरोप प्रत्यारोप चलता रहता है। वास्तविकता यह हैं की न गौतम ने और न राम ने ही ह्रदय से या जान बूझकर ऐसा कुछ किया था और यही कारण था की न्यायदर्शन के प्रणेता गौतम को नारी विरोधी होने का आरोप लगा सीता द्वारा उनको गुरु न मानना स्वयं सीता के जीवन में ऐसा दिन लाया तो अब राम के बारे में भी ऐसा किसी के द्वारा या गौतम या उनके अनुयायियों द्वारा न कहा जाय क्योंकि न गौतम गलत थे न राम और हकीकत यह की सांसारिक रूप से मदी, दम्भी, व्यभिचारी, लोभी और अज्ञानी लोग ही इसके कारन थे और वे ही गलत थे दोनों के सन्दर्भ में।

Friday, May 20, 2016

इस वर्तमान दुनियाँ का अदृश्य सर्वकालिक सर्वव्यापक डॉन(भगवाध्वज:धर्मध्वज) गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर:विष्वगुरू क्षेत्र) गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद कुल ((रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल मतलब विष्णु कुल) के दरवाजे पर निर्मल और निर्बाध गति से लहराता है और उस दरवाजे पर मुझे 11 वर्ष(कक्षा 5 से लेकर परास्नातक तक मतलब 14 वर्ष (1985-2000) तक का अवसर मिला है और उसके बाद से पुनः 14 वर्ष (2001-2014) तक भी मुझे पूर्ण स्थायित्व पाने तक पूर्ण समर्थन और ऊर्जा मिलती रही| और वर्तमान में भी मैं उसी की छाया में ही जीवन रत हूँ। उस गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्रा ब्राह्मण कुल के दरवाजे के वंसज की संतति के रूप में जन्म की अभीष्ट इक्षा मात्र ही शेष रही है।>>>>>>>>>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय)धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

इस वर्तमान दुनियाँ का अदृश्य सर्वकालिक सर्वव्यापक डॉन(भगवाध्वज:धर्मध्वज) गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर:विष्वगुरू क्षेत्र) गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद कुल ((रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल मतलब विष्णु कुल) के दरवाजे पर निर्मल और निर्बाध गति से लहराता है और उस दरवाजे पर मुझे 11 वर्ष(कक्षा 5 से लेकर परास्नातक तक मतलब 14 वर्ष (1985-2000) तक का अवसर मिला है और उसके बाद से पुनः 14 वर्ष (2001-2014) तक भी मुझे पूर्ण स्थायित्व पाने तक पूर्ण समर्थन और ऊर्जा मिलती रही| और वर्तमान में भी मैं उसी की छाया में ही जीवन रत हूँ। उस गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्रा ब्राह्मण कुल के दरवाजे के वंसज की संतति के रूप में जन्म की अभीष्ट इक्षा मात्र ही शेष रही है।>>>>>>>>>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय)धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Wednesday, May 11, 2016

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राजा दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>यह रामप्रशाद(सनातन ब्राह्मण) और उसी एक गाँव के आनुवंशिक वंसज काशीराम (दलित) का संघर्ष तब तक चलेगा जब तक की काशीराम (दलित) अपने जीवन में सदाचार अपनाते हुए भारतीय संस्कृति को अपनाते हुए सतत लम्बे प्रयत्न से अपना सांस्कारिक उन्ययन/उत्थान नही करेंगे।>>>>>>जो देवकाली मतलब महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा का एकल स्वरुूप (गौर वर्णीय देवी दुर्गा/त्रिदेवियों का एकल स्वरुप, का वह रूद्र रूप जो दैत्यों की उद्दण्डता से कुपित हो अपनी ऊर्जा के समन से ही स्वयं काली हो गयीं थी) की सिध्धि करने वाला और उनका कुल नियमानुसार पूजक हो वह एक साथ तीन देवियों का पूजक और सम्मान देने वाला होता और इस प्रकार तीन देवियों की छाया और ऊर्जा:आशीर्वाद लेने वाला हो उसपर नारीवादी नारी विरोधी और के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हों तो वह सब इस संसार का दोष है जिसमे से कुछ लोग सत्य से परिचित होते हैं, कुछ अपनी अज्ञानता वश अपरिचित, कुछ लोग परिचित होकर भी अपरिचित होने का नाटक करते है तो ऐसे में पूर्ण सत्य सबके लिए अधूरा सत्य हो जाता है और फिर ऐसे में पूर्ण सत्य से सभी विश्व नागरिकों को कैसे परिचित कराया जाय इसे सशरीर परमब्रह्म भगवान श्रीराम भी नहीं कर सके और सत्य को ही पूर्ण कर दिखाने में वे उस परम सशरीर सत्य से ही वंचित हो गए जिसको वे हर क्षण अपने से कभी अलग नहीं कर सके थे। तो फिर इस मूल त्रिदेवी/तीन देवियों के एकल स्वरुप के पूजक को भी तथाकथित नारीवादी लोग कभी भी नारी विरोधी और नारी के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार वाला कहें तो कोई आश्चर्य नही होना चाहिए? नोट:-मुझे तो अब तक यही आज तक ज्ञात है की दशरथ और कौशल्या नंदन श्रीराम के रघुकुल/इक्षाकु/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय की भी कुल देवी हमारी कुल देवी की तरह देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा) ही थीं।>>>>>>>>>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय)धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है।  तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम  रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राजा दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं।  अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>यह रामप्रशाद(सनातन ब्राह्मण) और उसी एक गाँव के आनुवंशिक वंसज काशीराम (दलित) का संघर्ष तब तक चलेगा जब तक की काशीराम (दलित) अपने जीवन में सदाचार अपनाते हुए भारतीय संस्कृति को अपनाते हुए सतत लम्बे प्रयत्न से अपना सांस्कारिक उन्ययन/उत्थान नही करेंगे।>>>>>>जो देवकाली  मतलब  महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा  का एकल स्वरुूप (गौर वर्णीय देवी दुर्गा/त्रिदेवियों का एकल स्वरुप,  का वह रूद्र रूप जो दैत्यों की उद्दण्डता से कुपित हो अपनी ऊर्जा के समन से ही स्वयं काली हो गयीं थी) की सिध्धि करने वाला और उनका कुल नियमानुसार पूजक हो वह एक साथ तीन देवियों का पूजक और सम्मान देने वाला होता और  इस प्रकार तीन देवियों की छाया और ऊर्जा:आशीर्वाद लेने वाला हो उसपर नारीवादी नारी विरोधी और के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हों तो वह सब इस संसार का दोष है जिसमे से कुछ लोग सत्य से परिचित होते हैं, कुछ अपनी अज्ञानता वश अपरिचित, कुछ लोग परिचित होकर भी अपरिचित होने का नाटक करते है तो ऐसे में पूर्ण सत्य सबके लिए अधूरा सत्य हो जाता है और फिर ऐसे में पूर्ण सत्य से सभी विश्व नागरिकों को कैसे परिचित कराया जाय इसे सशरीर परमब्रह्म भगवान श्रीराम भी नहीं कर सके और सत्य को ही पूर्ण कर दिखाने में वे उस परम सशरीर सत्य से ही वंचित हो गए जिसको वे हर क्षण अपने से कभी अलग नहीं कर सके थे। तो फिर इस मूल त्रिदेवी/तीन देवियों के एकल स्वरुप के पूजक को भी तथाकथित नारीवादी लोग कभी भी नारी विरोधी और नारी के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार वाला कहें तो कोई आश्चर्य नही होना चाहिए? नोट:-मुझे तो अब तक यही आज तक ज्ञात है की दशरथ और कौशल्या नंदन श्रीराम के रघुकुल/इक्षाकु/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय की भी कुल देवी हमारी कुल देवी की तरह देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा) ही थीं।>>>>>>>>>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय)धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो अपने द्वारा किसी भी संभावित त्याग, तप और बलिदान के बल पर लगातार अपने किसी विशेष अभीष्ट लक्ष्य और इस संसार के मानवतावादी स्वरुप के अस्तित्व को भी अपने द्वारा किसी भी संभावित त्याग, तप और बलिदान के बल पर संरक्षित और संवर्धित और बनाए रखने हेतु लिए गए संकल्प के कारण अनेकोनेक संख्याबल से एक-एक कर अकेले लड़ाया जाता रहा हो उसका अभीष्ट पुरुषार्थ और मेधा और प्रतिभा और महत्तम उपलब्धि जो भी समझिए उसका वह सब कुछ उस लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति और मानवतावादी संसार के वर्तमान में भी अस्तित्व में बने रहना ही है और इस परम सत्य की प्राप्ति अगर उसे हो ही चुकी है तो अब वे जो अमानवीय संसार और अवसरवादिता के समर्थक थे के द्वारा उस सतयनिष्ठ व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाना कायराना और घृणित कार्य है और उसकी जितनी भी निंदा की जाय कम ही है? और अगर वे इस तथ्य से अवगत हो ऐसा करने से बाज आ जाते हैं तो यह उनके स्वयं के और इस मानवता के भी हित में है।

जो अपने द्वारा किसी भी संभावित त्याग, तप और बलिदान के बल पर लगातार अपने किसी विशेष अभीष्ट लक्ष्य और इस संसार के मानवतावादी स्वरुप के अस्तित्व को भी अपने द्वारा किसी भी संभावित त्याग, तप और बलिदान के बल पर संरक्षित और संवर्धित और बनाए रखने हेतु लिए गए संकल्प के कारण अनेकोनेक संख्याबल से एक-एक कर अकेले लड़ाया जाता रहा हो उसका अभीष्ट पुरुषार्थ और मेधा और प्रतिभा और महत्तम उपलब्धि जो भी समझिए उसका वह सब कुछ उस लक्ष्य की पूर्ण प्राप्ति और मानवतावादी संसार के वर्तमान में भी अस्तित्व में बने रहना ही है और इस परम सत्य की प्राप्ति अगर उसे हो ही चुकी है तो अब वे जो अमानवीय संसार और अवसरवादिता के समर्थक थे के द्वारा उस सतयनिष्ठ व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाना कायराना और घृणित कार्य है और उसकी जितनी भी निंदा की जाय कम ही है? और अगर वे इस तथ्य से अवगत हो ऐसा करने से बाज आ जाते हैं तो यह उनके स्वयं के और इस मानवता के भी हित में है। 

यह रामप्रशाद(सनातन ब्राह्मण) और उसी एक गाँव के आनुवंशिक वंसज काशीराम (दलित) का संघर्ष तब तक चलेगा जब तक की काशीराम (दलित) अपने जीवन में सदाचार अपनाते हुए भारतीय संस्कृति को अपनाते हुए सतत लम्बे प्रयत्न से अपना सांस्कारिक उन्ययन/उत्थान नही करेंगे।>>>>>>जो देवकाली मतलब महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा का एकल स्वरुूप (गौर वर्णीय देवी दुर्गा/त्रिदेवियों का एकल स्वरुप, का वह रूद्र रूप जो दैत्यों की उद्दण्डता से कुपित हो अपनी ऊर्जा के समन से ही स्वयं काली हो गयीं थी) की सिध्धि करने वाला और उनका कुल नियमानुसार पूजक हो वह एक साथ तीन देवियों का पूजक और सम्मान देने वाला होता और इस प्रकार तीन देवियों की छाया और ऊर्जा:आशीर्वाद लेने वाला हो उसपर नारीवादी नारी विरोधी और के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हों तो वह सब इस संसार का दोष है जिसमे से कुछ लोग सत्य से परिचित होते हैं, कुछ अपनी अज्ञानता वश अपरिचित, कुछ लोग परिचित होकर भी अपरिचित होने का नाटक करते है तो ऐसे में पूर्ण सत्य सबके लिए अधूरा सत्य हो जाता है और फिर ऐसे में पूर्ण सत्य से सभी विश्व नागरिकों को कैसे परिचित कराया जाय इसे सशरीर परमब्रह्म भगवान श्रीराम भी नहीं कर सके और सत्य को ही पूर्ण कर दिखाने में वे उस परम सशरीर सत्य से ही वंचित हो गए जिसको वे हर क्षण अपने से कभी अलग नहीं कर सके थे। तो फिर इस मूल त्रिदेवी/तीन देवियों के एकल स्वरुप के पूजक को भी तथाकथित नारीवादी लोग कभी भी नारी विरोधी और नारी के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार वाला कहें तो कोई आश्चर्य नही होना चाहिए? नोट:-मुझे तो अब तक यही आज तक ज्ञात है की दशरथ और कौशल्या नंदन श्रीराम के रघुकुल/इक्षाकु/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय की भी कुल देवी हमारी कुल देवी की तरह देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा) ही थीं।>>>>>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

यह रामप्रशाद(सनातन ब्राह्मण) और उसी एक गाँव के आनुवंशिक वंसज काशीराम (दलित) का संघर्ष तब तक चलेगा जब तक की काशीराम (दलित) अपने जीवन में सदाचार अपनाते हुए भारतीय संस्कृति को अपनाते हुए सतत लम्बे प्रयत्न से अपना सांस्कारिक उन्ययन/उत्थान नही करेंगे।>>>>>>जो देवकाली  मतलब  महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा  का एकल स्वरुूप (गौर वर्णीय देवी दुर्गा/त्रिदेवियों का एकल स्वरुप,  का वह रूद्र रूप जो दैत्यों की उद्दण्डता से कुपित हो अपनी ऊर्जा के समन से ही स्वयं काली हो गयीं थी) की सिध्धि करने वाला और उनका कुल नियमानुसार पूजक हो वह एक साथ तीन देवियों का पूजक और सम्मान देने वाला होता और  इस प्रकार तीन देवियों की छाया और ऊर्जा:आशीर्वाद लेने वाला हो उसपर नारीवादी नारी विरोधी और के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हों तो वह सब इस संसार का दोष है जिसमे से कुछ लोग सत्य से परिचित होते हैं, कुछ अपनी अज्ञानता वश अपरिचित, कुछ लोग परिचित होकर भी अपरिचित होने का नाटक करते है तो ऐसे में पूर्ण सत्य सबके लिए अधूरा सत्य हो जाता है और फिर ऐसे में पूर्ण सत्य से सभी विश्व नागरिकों को कैसे परिचित कराया जाय इसे सशरीर परमब्रह्म भगवान श्रीराम भी नहीं कर सके और सत्य को ही पूर्ण कर दिखाने में वे उस परम सशरीर सत्य से ही वंचित हो गए जिसको वे हर क्षण अपने से कभी अलग नहीं कर सके थे। तो फिर इस मूल त्रिदेवी/तीन देवियों के एकल स्वरुप के पूजक को भी तथाकथित नारीवादी लोग कभी भी नारी विरोधी और नारी के साथ अत्याचार/अमानवीय व्यवहार वाला कहें तो कोई आश्चर्य नही होना चाहिए? नोट:-मुझे तो अब तक यही आज तक ज्ञात है की दशरथ और कौशल्या नंदन श्रीराम के रघुकुल/इक्षाकु/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय की भी कुल देवी हमारी कुल देवी की तरह देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी:पारवती:सती:गिरिजा: अपर्णा: उमा) ही थीं।>>>>>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है।  तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही  रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं।  अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| 

Tuesday, May 10, 2016

इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से यदि कोई सनातन ब्राह्मण से उच्च हो जाता है या उसमे से विशेष रूप से कोई दलित ईसाई या ईसाई समर्थित दलित विश्व के किसी सर्वोच्च ब्राह्मण से भी उच्च हो जाता है तो एक सामान्य ब्राह्मण की ही तरह ऐसे लोगों को उनके परिवार के समूह सहित शिक्षा में प्रवेश से लेकर सेवा क्षेत्र में प्रवेश और अन्य नागरिकों से अलग मिलने वाली विशेष सरकारी सुविधा बंचित कर देना चाहिए या वे स्वयं स्वाभिमानी हो तो इसे न स्वयं लें न अपने परिवार/कुटुम्ब समूह को लेने दें? जिन विशेष और विशेष स्थान के ब्राह्मणों को ब्राह्मण में ही वर्गीकृत अन्य ब्राह्मण में भेद करने और अपमानित करने में कोई हिचक किसी समय नहीं हुई और स्वयं के वर्गीकृत ब्राह्मण समूह पर बड़ा अभिमान और गर्व था, ऐसे ब्राह्मण लोग जो जाति में वर्गवाद करने वाले स्वयं रहे हों उनका ह्रदय परिवर्तन इतने कम समय में कैसे हो गया और वे दूसरे वर्ग के ब्राह्मणों को जातिवादी कहने के अधिकारी कैसे हो गए? आज जब उनका पैर कीचड में स्वयं सन/चला गया तो फिर उनको ब्राह्मणो के अन्य वर्ग के लोग जातिवादी नजर आने लगे वह तब और उस समय जब बहुत से ब्राह्मण लोग अपनी अज्ञानता वश अपने को ब्राह्मण कहने से डरने लगते है की कहीं कोई दूसरी जाति और धर्म वाले उसका अहित न कर दें और उसका हुक्का और पानी न बंद कर दें अपने समाज से। तो मित्रों आज के युग में जो अपने को सदाचारी होते हुए ब्राह्मण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है वह ब्राह्मण ही सर्वोच्च मानव है इस युग का और मैं केवल इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से किसी को किसी सनातन ब्राह्मण से उच्च नहीं मानता और अगर ऐसा मान लिया जाता तो विकसित देश के बहुसंख्य लोग सनातन ब्राह्मण से उच्च हो जाते और उन देशों की संस्कृति आज हम भारतीयों की भारतीय संस्कृति मतलब सनातन संस्कृति से भी उच्च संस्कृति हो जाती। मैं केवल इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से किसी को किसी सनातन ब्राह्मण से उच्च नहीं मानता क्योंकि ये लोग येन केन प्रकारेण अपने व्यवसाय की सुरक्षा और सतता तथा स्वार्थ्य पूर्ती हेतु ही सबके सामने झुकते हुए अति विनम्र नजर आये और तथाकथित महामण्डित मानवतावादी नजर आये और अपने ज्ञान कौसल और वाक्पटुता से आम मानव समाज के सामने छाये रहे बहुत दिनों तक पर समर्पण कहीं नजर नहीं आया अगर कुछ एक व्यक्तित्व को किसी विशेष कारन से नजर अंदाज किया जाय तो। हकीकत तो यह हैं की सच्चाई के लिए लड़ने में सत्य के प्रति कट्टरता ही वास्तविक विनम्रता और मानववाद है जो विश्व के सर्वोच्च ब्राह्मण में ही नजर आया। सामान्य जीवन जहाँ आप के साथ सतत संघर्ष न चल रहा हो तो उस समय की विनम्रता तो हर कोई पहचान लेता है पर सत्य के प्रति संघर्ष के साथ विनम्रता तो आप के सत्य को जानने और समझने वाला ही पहचान सकता है। आप अब सोच सकते हैं की एक सनातन ब्राह्मण ज्यादा पुरुषार्थी और सामर्थ्यवान है या इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य-अन्य विद्या में डिग्री धारी? कम से कम एक जन्म का अंतर होता है सनातन ब्राह्मण में और अन्य जाति/धर्म में जिस अंतर को कोई तथाकथित विश्व महाशक्ति या सरकार पूर्णरूप में चाह कर भी समाप्त नहीं कर सकती है किसी भी युग में जैसे विश्व मानवता के केंद्र प्रयागराज और काशी की समानता विश्व का कोई स्थान न प्राप्त कर सका, न सका है और न पायेगा?

इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से यदि कोई सनातन ब्राह्मण से उच्च हो जाता है या उसमे से विशेष रूप से कोई दलित ईसाई या ईसाई समर्थित दलित विश्व के किसी सर्वोच्च ब्राह्मण से भी उच्च हो जाता है तो एक सामान्य ब्राह्मण की ही तरह ऐसे लोगों को उनके परिवार के समूह सहित शिक्षा में प्रवेश से लेकर सेवा क्षेत्र में प्रवेश और अन्य नागरिकों से अलग मिलने वाली विशेष सरकारी सुविधा  बंचित कर देना चाहिए या वे स्वयं स्वाभिमानी हो तो इसे न स्वयं लें न अपने परिवार/कुटुम्ब समूह को लेने दें?  जिन विशेष और विशेष स्थान के ब्राह्मणों को ब्राह्मण में ही वर्गीकृत अन्य ब्राह्मण में भेद करने और अपमानित करने में कोई हिचक किसी समय नहीं हुई और स्वयं के वर्गीकृत ब्राह्मण समूह पर बड़ा अभिमान और गर्व था, ऐसे ब्राह्मण लोग जो जाति में वर्गवाद करने वाले स्वयं रहे हों उनका ह्रदय परिवर्तन इतने कम समय में कैसे हो गया और वे दूसरे वर्ग के ब्राह्मणों को जातिवादी कहने के अधिकारी कैसे हो गए? आज जब उनका पैर कीचड में स्वयं सन/चला गया तो फिर उनको ब्राह्मणो के अन्य वर्ग के लोग जातिवादी नजर आने लगे वह तब और उस  समय जब बहुत से ब्राह्मण लोग अपनी अज्ञानता वश अपने को ब्राह्मण कहने से डरने लगते है की कहीं कोई दूसरी जाति और धर्म वाले उसका अहित न कर दें और उसका हुक्का और पानी न बंद कर दें अपने समाज से। तो मित्रों आज के युग में जो अपने को सदाचारी होते हुए ब्राह्मण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है वह ब्राह्मण ही सर्वोच्च मानव है इस युग का और मैं केवल इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से किसी को किसी सनातन ब्राह्मण से उच्च नहीं मानता और अगर ऐसा मान लिया जाता तो विकसित देश के बहुसंख्य लोग सनातन ब्राह्मण से उच्च हो जाते और उन देशों की संस्कृति आज हम भारतीयों की भारतीय संस्कृति मतलब सनातन संस्कृति से भी उच्च संस्कृति हो जाती। मैं  केवल इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य विद्या में डिग्री धारी होने से किसी को किसी सनातन ब्राह्मण से उच्च नहीं मानता क्योंकि ये लोग येन केन प्रकारेण अपने व्यवसाय की सुरक्षा और सतता तथा स्वार्थ्य पूर्ती हेतु ही सबके सामने झुकते हुए अति विनम्र नजर आये और तथाकथित महामण्डित मानवतावादी नजर आये और अपने ज्ञान कौसल और वाक्पटुता से आम मानव समाज के सामने छाये रहे बहुत दिनों तक पर समर्पण कहीं नजर नहीं आया अगर कुछ एक व्यक्तित्व को किसी विशेष कारन से नजर अंदाज किया जाय तो। हकीकत तो यह हैं की सच्चाई के लिए लड़ने में सत्य के प्रति कट्टरता ही वास्तविक विनम्रता और मानववाद है जो विश्व के सर्वोच्च ब्राह्मण में ही नजर आया।  सामान्य जीवन जहाँ आप के साथ सतत संघर्ष न चल रहा हो तो उस समय की विनम्रता तो हर कोई पहचान लेता है पर सत्य के प्रति संघर्ष के साथ विनम्रता तो आप के सत्य को जानने और समझने वाला ही पहचान सकता है। आप अब सोच सकते हैं की एक सनातन ब्राह्मण ज्यादा पुरुषार्थी और सामर्थ्यवान है या इंजीनयर, डॉक्टर या कोई अन्य-अन्य विद्या में डिग्री धारी? कम से कम एक जन्म का अंतर होता है सनातन ब्राह्मण में और अन्य जाति/धर्म में जिस अंतर को कोई तथाकथित विश्व महाशक्ति या सरकार पूर्णरूप में चाह कर भी समाप्त नहीं कर सकती है किसी भी युग में जैसे विश्व मानवता के केंद्र प्रयागराज और काशी की समानता विश्व का कोई स्थान न प्राप्त कर सका, न सका है और न पायेगा? 

जिनको लव और कुश को पालने की आदत जिनको हो गयी है वे सभी मेरे सन्दर्भ में (जो स्वयं मुझसे उच्च शक्ति श्रोत और वैचारिक सामंजस्यवान न होने पर भी ) लड़ने और लड़ाने से बाज कैसे आते? वही था, वही है और वही हुआतरह-तरह के सभी यत्न कर डालने पर भी मेरा कोई विकल्प उनको नहीं मिला था उस समय जब यह दुनिया नष्ट होने वाली थी जिसे निरन्तर अबाधगतिशील आम मानव जीवन अवस्था के साथ संरक्षित और संवर्धित करने हेतु मेरा प्रयोग हुआ और उसके बाद इस समय भी मेरा कोई विकल्प उनको नहीं मिल रहा है यह जरूर है की वे किसी राह चलते को भी पकड़ कर मेरे समकक्ष बनाने हेतु महामूर्खता भरा निर्लज्ज प्रयास जारी रखे हैं? आप लव-कुश को पालिये और मैं राम(विष्णुकांत= विष्णुस्वामी=परमब्रह्म=ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश) और कृष्णकान्त (स्वामी कृष्ण= श्रीकृष्ण=परमब्रह्म= ब्रह्म =ब्रह्मा+विष्णु+महेश) को पाल रहा हूँ। आप अब अपनी क्षमता का आंकलन कर लीजिए जो गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव) कुल के मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर(विष्णु) और बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा के पुत्र विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु) को अपनी ईर्ष्या और द्वेष भावना से भरपूर विचार के कारन पचा नहीं पा रहे थे और उनसे बदला लेने के काबिल बन गए थे और अगर उसका परिणाम उस कर्णपुर जिसका की प्रयोग हुआ था, को और आप को पता चल गया हो तो भविष्य में ऐसा कदम मत उठाइएगा की लेने के देने पड़ जाय आपको और फिर उसी मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर (विष्णु) और परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी डॉ प्रेमचंद(शिव) की ही शरण में आप की रक्षा निहित हो क्योंकि इस बार कोई विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु)) ऐसा नहीं होगा जो इस प्रयागराज में उनके चाहने पर भी टिकेगा जैसा की उसके यहाँ टिकने और आप के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से टिकवाने (डॉ प्रेमचंद:शिव और श्रीधर:विष्णु माध्यम से) के बाद जो टिका उसे के साथ व्यवहार और परिणाम रहा? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||<<<<<<<<<राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।

जिनको लव और कुश को पालने की आदत जिनको हो गयी है वे सभी मेरे सन्दर्भ में (जो स्वयं मुझसे उच्च शक्ति श्रोत और वैचारिक सामंजस्यवान न होने पर भी ) लड़ने और लड़ाने से बाज कैसे आते? वही था, वही है और वही हुआतरह-तरह के सभी यत्न कर डालने पर भी मेरा कोई विकल्प उनको नहीं मिला था उस समय जब यह दुनिया नष्ट होने वाली थी जिसे निरन्तर अबाधगतिशील आम मानव जीवन अवस्था के साथ संरक्षित और संवर्धित करने हेतु मेरा प्रयोग हुआ और उसके बाद इस समय भी मेरा कोई विकल्प उनको नहीं मिल रहा है यह जरूर है की वे किसी राह चलते को भी पकड़ कर मेरे समकक्ष  बनाने हेतु महामूर्खता भरा निर्लज्ज प्रयास जारी रखे हैं? आप लव-कुश को पालिये और मैं राम(विष्णुकांत= विष्णुस्वामी=परमब्रह्म=ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश) और कृष्णकान्त (स्वामी कृष्ण= श्रीकृष्ण=परमब्रह्म= ब्रह्म =ब्रह्मा+विष्णु+महेश) को पाल रहा हूँ। आप अब अपनी क्षमता का आंकलन कर लीजिए जो  गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव) कुल के  मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर(विष्णु) और बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा के पुत्र विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु) को अपनी ईर्ष्या और द्वेष भावना से भरपूर विचार के कारन पचा नहीं पा रहे थे और उनसे बदला लेने के काबिल बन गए थे और अगर उसका परिणाम उस कर्णपुर जिसका की प्रयोग हुआ था, को और आप को पता चल गया हो तो भविष्य में ऐसा कदम मत उठाइएगा की लेने के देने पड़ जाय आपको और फिर उसी मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर (विष्णु) और परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी डॉ प्रेमचंद(शिव) की ही शरण में आप की रक्षा निहित हो क्योंकि इस बार कोई विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु)) ऐसा नहीं होगा जो इस प्रयागराज में उनके चाहने पर भी टिकेगा जैसा की उसके यहाँ टिकने और आप के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से टिकवाने (डॉ प्रेमचंद:शिव और श्रीधर:विष्णु माध्यम से) के बाद जो टिका उसे के साथ व्यवहार और परिणाम रहा? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||<<<<<<<<<राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है।  तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही  रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं।  अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।  

Monday, May 9, 2016

"राम नाम मणिदीप धरु, जींह देहरी द्वार । तुलसी भीतर बाहेरहु जौं चाहसि उजियार ।।" जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया उसी ने मेरे घर की लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती का अनैतिक साधनों और कुटिल नीतियों के प्रयोग से चरित्र हनन/पतन करा छल करते हुए अपने घर में अपहृत कर लिया तो एहसान किस बात का? यह तो कभी न स्थापित हो पाने वाली समानता को समानता प्राप्त कर लिया सिद्ध करने हेतु किया गया अमर्यादित और निंदनीय आचरण हुआ जिसकी जितनी भी निंदा की जाय तो कम होगा? क्योंकि समाज को आप केवल समरस बना सकते हैं न की हर प्रकार से समानता को स्थापित कर सकते है जिस समानता से पंगु समाज का निर्माण ही केवल एक परिणाम हो सकता है? और ऐसे समर्थ लोगों जो लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती को अपहृत कर या करवा अपने घर में ले लेते है ऐसे समर्थ लोगों को आरक्षण किस बात का दिया जाय वह भी तब जब यदि लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती स्वयं उनके ही घर पहुँच गयी हैं? मैंने उन लोगों को जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया है उनको क्या-क्या अमूल्य रत्न विरासत के रूप में दिया वह भी सुन लें साहित्य, संगीत, ज्ञान, विज्ञान, यम, नियम और जीवन-धर्म दर्शन जो हर सभ्य समाज को रुचिकर और व्यवस्थित बनाने में अत्यन्त जरूरी है अमानुस, दानविक और पशुविक जीवन से मानवीय जीवन जीने के लिए और ये सब खेत में काम करने, सेवा करने और घर-द्वार बनाने से ज्यादा महत्त्व के है। अतः अब निर्धारित किया जाय की महत्ता किसकी ज्यादा है जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया ऐसे समाज की या जो साहित्य, संगीत, ज्ञान, विज्ञान, यम, नियम और जीवन-धर्म दर्शन दिया जो हर सभ्य समाज को रुचिकर और व्यवस्थित बनाने में अत्यन्त जरूरी है अमानुस, दानविक और पशुविक जीवन से मानवीय जीवन जीने के लिए जिसका की अधिकाँश लाभ वह समाज उसी तरह ले रहा है जैसे की अपनी संख्या अनुसार प्राकृतिक संशाधनो का भी उपयोग कर रहा है।>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

"राम नाम मणिदीप धरु, जींह देहरी द्वार ।  तुलसी भीतर बाहेरहु जौं चाहसि उजियार ।।" जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया उसी ने मेरे घर की लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती का अनैतिक साधनों और कुटिल नीतियों के प्रयोग से चरित्र हनन/पतन  करा छल करते हुए अपने घर में अपहृत कर लिया तो एहसान किस बात का? यह तो कभी न स्थापित हो पाने वाली समानता को समानता प्राप्त कर लिया सिद्ध करने हेतु किया गया अमर्यादित और निंदनीय आचरण हुआ जिसकी जितनी भी निंदा की जाय तो कम होगा? क्योंकि समाज को आप केवल समरस बना सकते हैं न की हर प्रकार से समानता को स्थापित कर सकते है जिस समानता से पंगु समाज का निर्माण ही केवल एक परिणाम हो सकता है?  और ऐसे समर्थ लोगों जो लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती को अपहृत कर या करवा अपने घर में ले लेते है ऐसे समर्थ लोगों को आरक्षण किस बात का दिया जाय वह भी तब जब यदि लक्ष्मी/पार्वती/सरस्वती स्वयं उनके ही घर पहुँच गयी हैं? मैंने उन लोगों को जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया है उनको क्या-क्या अमूल्य रत्न विरासत के रूप में दिया वह भी सुन लें साहित्य, संगीत, ज्ञान, विज्ञान, यम,  नियम और जीवन-धर्म दर्शन जो हर सभ्य समाज को रुचिकर और व्यवस्थित बनाने में अत्यन्त जरूरी है अमानुस, दानविक और पशुविक जीवन से मानवीय जीवन जीने के लिए  और ये सब खेत में काम करने, सेवा करने और घर-द्वार बनाने से ज्यादा महत्त्व के है। अतः अब निर्धारित किया जाय की महत्ता किसकी ज्यादा है जिसने हमारे खेत में काम किया और जिसने हमारे घर-द्वारा को बनाने में सहयोग किया ऐसे समाज की या जो साहित्य, संगीत, ज्ञान, विज्ञान, यम,  नियम और जीवन-धर्म  दर्शन दिया जो हर सभ्य समाज को रुचिकर और व्यवस्थित बनाने में अत्यन्त जरूरी है अमानुस, दानविक और पशुविक जीवन से मानवीय जीवन जीने के लिए जिसका की अधिकाँश लाभ वह समाज उसी तरह  ले रहा है जैसे की अपनी संख्या अनुसार प्राकृतिक संशाधनो का भी उपयोग कर रहा है।>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||  

रामप्रशाद (सनातन ब्राह्मण) प्रति काशीराम (दलित):-----दलित शक्ति और सहयोग के बदौलत दो पीढ़ी पूर्ण रूपेण जिसकी बीत गयी वह दलित समाज को जितना भी कटु बोला है वह यही निरुपित करता है की काशीराम और उनके वंसज को दलित होने पर जितना कष्ट है रामप्रशाद और उनके वंसज को को सनातन ह्मण बने रहने पर उससे कुछ कम कष्ट नहीं होता है और बिना ब्राह्मण के यह श्रष्टि तो कदापि नहीं चल सकती है चाहे दलित बिना भले चल जाय। ब्राह्मण समाज से आने के कारन सम्पूर्ण समाज का जीवन दर्शन उच्च बनाए रखने के फल स्वरुप रामप्रशाद के कुल से दलित समाज को अपने प्रति अन्यायजरूर लग सकता है पर उस स्थिति में काशीराम के जो वंसज आ गए हैं आज वह भी तो वही गलतियां कर रहे हैं और सांस्कृतिक संरक्षण के अपने दायित्व को भी नहीं समझ रहे हैं उच्च्श्रृंखला में डूबे जा रहे है। तो ब्राह्मण समाज को मिटाने की कोशिश से ज्यादा आप अपनी ऊर्जा को स्वयं अपने को व्यवहारिक और मर्यादित तरीके के जन्मजात न सही कर्मणैव ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य बनने में लगाइए जिससे आप की आने वाली पीढ़िया और ब्राह्मणो पीढ़िया समान आचार-विचार होने की वजह से समरस जीवन जी सकें। तो >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।

रामप्रशाद (सनातन ब्राह्मण) प्रति काशीराम (दलित):-----दलित शक्ति और सहयोग के बदौलत दो पीढ़ी पूर्ण रूपेण जिसकी बीत गयी वह दलित समाज को जितना भी कटु बोला है वह यही निरुपित करता है की काशीराम और उनके वंसज को दलित होने पर जितना कष्ट है रामप्रशाद और उनके वंसज को को सनातन ह्मण बने रहने पर उससे कुछ कम कष्ट नहीं होता है और बिना ब्राह्मण के यह श्रष्टि तो कदापि नहीं चल सकती है चाहे दलित बिना भले चल जाय। ब्राह्मण समाज से आने के कारन सम्पूर्ण समाज का जीवन दर्शन उच्च बनाए रखने के फल स्वरुप रामप्रशाद के कुल से दलित समाज को अपने प्रति अन्यायजरूर लग सकता है पर उस स्थिति में काशीराम के जो वंसज आ गए हैं आज वह भी तो वही गलतियां कर रहे हैं और सांस्कृतिक संरक्षण के अपने दायित्व  को भी नहीं समझ रहे हैं उच्च्श्रृंखला में डूबे जा रहे है। तो ब्राह्मण समाज को मिटाने की कोशिश से ज्यादा आप अपनी ऊर्जा को स्वयं अपने को व्यवहारिक और मर्यादित तरीके के जन्मजात न सही कर्मणैव ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य बनने में लगाइए जिससे आप की आने वाली पीढ़िया और ब्राह्मणो  पीढ़िया समान आचार-विचार होने की वजह से समरस जीवन जी सकें।  तो  >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है।  तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही  रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं।  अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।

विष्णु को जगतगुरु मतलब परमगुरु कहा गया है तो वह सामान्य जैसे व्यक्तित्व के दिखने वाले जगतगुरु गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव) कुल के मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर(विष्णु) और बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../गजाधर(गणेश) कुल के मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेमचंद(शिव) का आदेश और निर्देश के लिए उसी कुल के रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र मुझ विवेक (सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु) के लिए शिरोधार्य था जबकि उसका प्रतिफल मेरा अंत तो हो सकता था पर यह अंत ही नहीं वरन इस वाह्य भौतिकतावादी जगत में जीवन के प्रारम्भ से अर्जित यश-सुयश के साथ सर्वस्व नाश के साथ अपमान और तिरस्कार भरा जीवन और अपमान झेलने के बाद और तो तिरस्कार भरी याद के साथ जीवन का अंत जिसका मूल कारन होता आम जन तक पूर्ण सत्य का न आ पाना (पूर्ण सत्य को तो केवल ईस्वर ही जान सकता है तो मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर और परमपिता परमेश्वर दोनों एक साथ होकर ही मेरे पूर्ण सत्य को समझते थे/है और समझेंगे) जिसे मैं अब आम दुनिया को मैं कुछ हद तक समझा चुका हूँ। लेकिन यह भी संभव था की मेरे अंत के साथ सम्पूर्ण मानवता का भी अंत भी निश्चित हो सकता था क्योंकि यह श्रिष्टि मेरा अंत सहन न कर सकती और मुझमे ही समा जाती जो अभी सांसारिकता को बनाये रखने हेतु आदर्श स्थिति को धारण किये हुए थी/है।<<<<<<<< [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

विष्णु को जगतगुरु मतलब परमगुरु कहा गया है तो वह सामान्य जैसे व्यक्तित्व के दिखने वाले जगतगुरु गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव) कुल के मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा श्रीधर(विष्णु) और बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../गजाधर(गणेश) कुल के मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊ जी श्रद्धेय डॉ प्रेमचंद(शिव)  का आदेश और निर्देश के लिए उसी कुल के रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र मुझ विवेक (सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु) के लिए शिरोधार्य था जबकि उसका प्रतिफल मेरा अंत तो हो सकता था पर यह अंत ही नहीं वरन इस वाह्य भौतिकतावादी जगत में जीवन के प्रारम्भ से अर्जित यश-सुयश के साथ सर्वस्व नाश के साथ अपमान और तिरस्कार भरा जीवन और अपमान झेलने के बाद और तो तिरस्कार भरी याद के साथ जीवन का अंत जिसका मूल कारन होता आम जन तक पूर्ण सत्य का न आ पाना (पूर्ण सत्य को तो केवल ईस्वर ही जान सकता है तो मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर और परमपिता परमेश्वर दोनों एक साथ होकर ही मेरे पूर्ण सत्य को समझते थे/है और समझेंगे)  जिसे मैं अब आम दुनिया को मैं कुछ हद तक समझा चुका हूँ। लेकिन यह भी संभव था की मेरे अंत के साथ सम्पूर्ण मानवता का भी अंत भी निश्चित हो सकता था क्योंकि यह श्रिष्टि मेरा अंत सहन न कर सकती और मुझमे ही समा जाती जो अभी सांसारिकता को बनाये रखने हेतु आदर्श स्थिति को धारण किये हुए थी/है।<<<<<<<< [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सती:पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने हेतु प्राप्त करने हेतु त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र का भोजन करती थी मतलब उनका भोज्य/भोजन त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र मात्र ही था। आगे चलकर अपर्णा अवस्था में वह त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र का भी भोजन बंद कर दी थी और और अधिक तप करना प्रारम्भ कर दी थी और इसके बाद जब इनके तप की और अति हो गयी इनकी माँ के इनको उमा (शिव को पाने का इतना कठिन ब्रत छोड़ भी दो) नाम दिया। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सती:पार्वती  भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने हेतु प्राप्त करने हेतु त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र का भोजन करती थी मतलब उनका भोज्य/भोजन त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र मात्र ही था। आगे चलकर अपर्णा अवस्था में वह त्रिफला पत्र=विलवापत्र=बेलपत्र का भी भोजन बंद कर दी थी और और अधिक तप करना प्रारम्भ कर दी थी और इसके बाद जब इनके तप की और अति हो गयी इनकी माँ के इनको उमा (शिव को पाने का इतना कठिन ब्रत छोड़ भी दो)  नाम दिया।  >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||  

किसी के द्वारा एक लम्बे समय तक घूर घूर कर किसी को देखने का मतलब अगर कुछ नहीं होता था/है/होगा तो फिर मेरे इस ब्लॉग को पढ़ने से भी कुछ नहीं होना चाहिए पर विगत केवल तीन वर्ष में 76000 से अधिक लोगों ने इसे पढ़ा है इस ब्लॉग के आंकड़े के अनुसार। तो इसका यही मतलब है की मेरे ब्लॉग को पढ़ने से लोगों को कुछ तो होता है तभी रुचिकर लगता है और लोग पढ़ते है। यह सिध्ध करता है की घूर-घूर कर देखने वाले को भी कुछ हुआ था/है/होगा और इस तथ्य से कोई भी इंकार नहीं कर सकता और इस प्रकार जिसे उसने घूर-घूर कर देखा गया होगा वह स्वयं को देखने वाले के जीवन का भला कुछ हद तक जरूर सोचा होगा अपने अंदर निहित मानवता के कारन इस सत्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता है और वह न तो तब, न तो अब और न आगे भी उसकी सामाजिक अवनति देख और सुन सकने की बात क्या सोच भी नहीं सकता है यह अलग तथ्य है की वह उसकी आर्थिक और शैक्षणिक अवनति नजर अंदाज भले कर देगा जो की लम्बे जीवन के लिए क्षण भंगुर है? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

किसी के द्वारा एक लम्बे समय तक घूर घूर कर किसी को देखने का मतलब अगर कुछ नहीं होता था/है/होगा तो फिर मेरे इस ब्लॉग को पढ़ने से भी कुछ नहीं होना चाहिए पर विगत केवल तीन वर्ष में 76000 से अधिक लोगों ने इसे पढ़ा है इस ब्लॉग के आंकड़े के अनुसार।  तो इसका यही मतलब है की मेरे ब्लॉग को पढ़ने से लोगों को कुछ तो होता है तभी रुचिकर लगता है और लोग पढ़ते है। यह सिध्ध करता है की घूर-घूर कर देखने वाले को भी कुछ हुआ था/है/होगा और इस तथ्य से कोई भी इंकार नहीं कर सकता और इस प्रकार जिसे उसने घूर-घूर कर देखा गया होगा वह स्वयं को देखने वाले के जीवन का भला कुछ हद तक जरूर सोचा होगा अपने अंदर निहित मानवता के कारन इस सत्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता है और वह न तो तब, न तो अब और न आगे भी उसकी सामाजिक अवनति देख और सुन सकने की बात क्या सोच भी नहीं सकता है यह अलग तथ्य है की वह उसकी आर्थिक और शैक्षणिक अवनति नजर अंदाज भले कर देगा जो की लम्बे जीवन के लिए क्षण भंगुर है? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||  

सभी तीन मूल देवियों (सरस्वती, लक्ष्मी, सती:पार्वती) में आदि देवी सरस्वती के इन त्रिदेवियों में आद्या या स्त्री/नारी जगत से सम्पूर्ण जगत की स्त्रीगत आद्या हो जाने से त्रिदेवों में ब्रह्मा/सरस्वती , विष्णु/लक्ष्मी और महेश/सती:पार्वती क्रम प्रयागराज और महेश/सती:पार्वती, विष्णु/लक्ष्मी और ब्रह्मा/सरस्वती क्रम काशी में मान्य है। तो फिर ब्रह्मा तो त्रिदेवों में आद्या मतलब महादेव/महेश से जिस प्रकार छोटे है उसी प्रकार आदिदेवी/आद्या, सरस्वती से भी छोटे हैं तो फिर उनका विवाह उनकी किस पुत्री से होने की चर्चा की जाती है? निश्चित रूप सरस्वती उनकी पुत्री नहीं है अगर वे त्रिदेवियों में आद्या स्वयं हैं तो फिर निराधर प्रचार जो आज तक चला है उसे शीघ्रातिशीघ्र बंद किया जाना चाहिए। और जानकारी हेतु अपने संयोगी अवस्था में सभी त्रिदेव और त्रिदेविया समान वरिष्ठता श्रेणी में ही आते है सरस्वती के आद्या होने से और सती:पार्वती के सबसे कनिष्ठ होने के कारण से (सती:पार्वती स्वयं ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशिराज दक्ष प्रजापति की पुत्री हैं मतलब ब्रम्हा और सरस्वती की पौत्री हैं)। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सभी तीन मूल देवियों (सरस्वती, लक्ष्मी, सती:पार्वती) में आदि देवी सरस्वती के इन त्रिदेवियों में आद्या या स्त्री/नारी जगत से सम्पूर्ण जगत की स्त्रीगत आद्या हो जाने से त्रिदेवों में ब्रह्मा/सरस्वती , विष्णु/लक्ष्मी  और महेश/सती:पार्वती क्रम प्रयागराज और महेश/सती:पार्वती, विष्णु/लक्ष्मी  और ब्रह्मा/सरस्वती क्रम काशी में मान्य है। तो फिर ब्रह्मा तो त्रिदेवों में आद्या मतलब महादेव/महेश से जिस प्रकार छोटे है उसी प्रकार आदिदेवी/आद्या, सरस्वती से भी छोटे हैं तो फिर उनका विवाह उनकी किस पुत्री से होने की चर्चा की जाती है? निश्चित रूप  सरस्वती उनकी पुत्री नहीं है अगर वे त्रिदेवियों में आद्या स्वयं हैं तो फिर निराधर प्रचार जो आज तक चला है उसे शीघ्रातिशीघ्र बंद किया जाना चाहिए। और जानकारी हेतु अपने संयोगी अवस्था में सभी त्रिदेव और त्रिदेविया समान वरिष्ठता श्रेणी में ही आते है सरस्वती के आद्या होने से और सती:पार्वती के सबसे कनिष्ठ होने के कारण से (सती:पार्वती स्वयं ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशिराज दक्ष प्रजापति की पुत्री हैं मतलब ब्रम्हा और सरस्वती की पौत्री हैं)।  >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||  

Thursday, May 5, 2016

कौन सा पेपर और कैसा पेपर निकालूँ और कितना निकालूँ क्योकि जब यह दुनिया तास के पत्तों की तरह ढहने वाली थी तो किसी का कितना पेपर रहा हो वह काम नहीं आने वाला था यदि मैं अपने को समूल समर्पित नहीं कर देता विश्व मानवता के मूल केंद्र, प्रयागराज में। इस दुनिया में बहुत से लोग है जो अनगिनत पेपर निकाल सकते है पर मैं जब सर्वस्व समर्पण के बाद भी शेष रह गया हूँ तो अब केवल वही पेपर निकल रहा था/हूँ जिससे की यह दुनिया पुनः तास के पत्तों की तरह ढहने के कगार पर न खड़ी हो कई सौ/हजार वर्षों के लिए और इस दुनिया को दिखाने वाले और जीविका चलाने वाले विषय के लिए प्रोन्नति हेतु पेपर केवल सीमित मात्रा में निकाल रहा हूँ जबकि जीविका चलाने वाले विषय के लिए और पेपर निकाल सकता हूँ। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

कौन सा पेपर और कैसा पेपर निकालूँ और कितना निकालूँ क्योकि जब यह दुनिया तास के पत्तों की तरह ढहने वाली थी तो किसी का कितना पेपर रहा हो वह काम नहीं आने वाला था यदि मैं अपने को समूल समर्पित नहीं कर देता विश्व मानवता के मूल केंद्र, प्रयागराज में। इस दुनिया में बहुत से लोग है जो अनगिनत पेपर निकाल सकते है पर मैं जब सर्वस्व समर्पण के बाद भी शेष रह गया हूँ तो अब केवल वही पेपर निकल रहा था/हूँ जिससे की यह दुनिया पुनः तास के पत्तों की तरह ढहने के कगार पर न खड़ी हो कई सौ/हजार वर्षों के लिए और इस दुनिया को दिखाने वाले और जीविका चलाने वाले विषय के लिए प्रोन्नति हेतु पेपर केवल सीमित मात्रा में निकाल रहा हूँ जबकि जीविका चलाने वाले विषय के लिए और पेपर निकाल सकता हूँ। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| 

जो लोग सनातन ब्राह्मण परिवार से व्यवसायिक परिवार में आ जाते है तो उनके लिए ब्राह्मणत्व की पूर्ण सिध्धि हेतु त्याग की सर्वोच्च परिक्षा होनी चाहिए पर उलटे मुझ पूर्ण सनातन ब्राह्मण के पुत्र (पूर्ण सनातन ब्राह्मण) की ही परीक्षा प्रयागराज के तथाकथित जिम्मेदार ब्राह्मण समुदाय द्वारा ले ली गयी तो उनको भी तो विश्व व्यापक परिवर्तन झेलना ही पडेगा न? मैं सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण स्वयं कश्यप गोत्रीय (जिसका धर्म है ब्राह्मण, गाय, गंगा, गायत्री, और गौरी की रक्षा) होने के नाते ब्राह्मण समुदाय की रक्षा के प्रति बचन बध्ध जरूर हूँ लेकिन अपने द्वारा किये हुए कृत्य का परिणाम सबको मिलना चाहिए। लेकिन हर दृष्टि से विचार के बाद किसी सज्जन ब्राह्मण या ब्राह्मण समूह के साथ अन्याय हुआ पाया गया तो पुनः रक्षा हेतु उतरना पडेगा इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है? >>>>>>मेरे द्वारा सनातन ब्राह्मणत्व की सर्वश्रेष्ठ परिक्षा को उत्तीर्ण कर विश्व के सर्वोच्च ब्राह्मण सिद्ध हो जाने से कुछ लोगों को (जो अकूत संसाधनों का प्रयोग मेरे ऊपर परीक्षा संचालित करने में किये प्रायोजक मंडल के लोगों से लेकर) आशानुरूप परिणाम न मिलने से व्यथा जरूर होगी और वे उसी तरह के लोग है जो स्वयं द्वारा कोई कार्य सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो पूर्ण रूपेण समझ लेते हैं की उसे सिध्ध कर ले जाने वाला कोई कपोल कल्पित कहानी बता रहा है जो भौतिक रूप में सम्भव नहीं है। --------सबका उत्तर है की सर्व समर्थ गोत्र कश्यप का कोई भी एक सप्तर्षि सनातन कश्यप गोत्रीय जरूर होगा जो अपने सम्पूर्ण कश्यप कुल के लिए और सप्तर्षि सनातन ब्राह्मण से जनित श्रिष्टि मतलब उनकी संतानो के लिए भी ऊर्जा का स्रोत होगा और अगर वह असीमित ऊर्जा वाला हो चुका था तो फिर वह लोगों के कृत्य के सामूहिक परिणाम को रोकने हेतु सज्जनों से शक्ति अर्जित करने के कारण ही हुआ जो सब गुण अर्जित कर सब गुण अागर हो चुका तो अगर उसका तेज आप सह न सके तो फिर उसकी परिक्षा लेने लगेंगे सनातन ब्राह्मण और ब्राह्मण होने की? अन्य लोग जिनकी परिक्षा लेनी थी उनकी नहीं ली गयी आप द्वारा तो हो सकता है समय उनकी परिक्षा अवश्य ले ? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो लोग  सनातन ब्राह्मण परिवार से व्यवसायिक परिवार में आ जाते है तो उनके लिए ब्राह्मणत्व की पूर्ण सिध्धि हेतु त्याग की सर्वोच्च परिक्षा होनी चाहिए पर उलटे मुझ पूर्ण सनातन ब्राह्मण के पुत्र (पूर्ण सनातन ब्राह्मण) की ही परीक्षा प्रयागराज के तथाकथित जिम्मेदार ब्राह्मण समुदाय द्वारा ले ली गयी तो उनको भी तो विश्व व्यापक परिवर्तन झेलना ही पडेगा न? मैं सनातन कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण स्वयं कश्यप गोत्रीय (जिसका धर्म है ब्राह्मण, गाय, गंगा, गायत्री, और गौरी की रक्षा) होने के नाते ब्राह्मण समुदाय की रक्षा के प्रति बचन बध्ध जरूर हूँ लेकिन अपने द्वारा किये हुए कृत्य का परिणाम सबको मिलना चाहिए। लेकिन हर दृष्टि से विचार के बाद किसी सज्जन ब्राह्मण या ब्राह्मण समूह के साथ अन्याय हुआ पाया गया तो पुनः रक्षा हेतु उतरना पडेगा इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है? >>>>>>मेरे द्वारा सनातन ब्राह्मणत्व की सर्वश्रेष्ठ परिक्षा को उत्तीर्ण कर विश्व के सर्वोच्च ब्राह्मण सिद्ध हो जाने से कुछ लोगों को (जो अकूत संसाधनों का प्रयोग मेरे ऊपर परीक्षा संचालित करने में किये प्रायोजक मंडल के लोगों से लेकर) आशानुरूप परिणाम न मिलने से व्यथा जरूर होगी और वे उसी तरह के लोग है जो स्वयं द्वारा कोई कार्य सिद्ध नहीं कर पाते हैं तो पूर्ण रूपेण समझ लेते हैं की उसे सिध्ध कर ले जाने वाला कोई कपोल कल्पित कहानी बता रहा है जो भौतिक रूप में सम्भव नहीं है। --------सबका उत्तर है की सर्व समर्थ गोत्र कश्यप का कोई भी एक सप्तर्षि सनातन कश्यप गोत्रीय जरूर होगा जो अपने सम्पूर्ण कश्यप कुल के लिए और सप्तर्षि सनातन ब्राह्मण से जनित श्रिष्टि मतलब उनकी संतानो के लिए भी ऊर्जा का स्रोत होगा और अगर वह असीमित ऊर्जा वाला हो चुका था तो फिर वह लोगों के कृत्य के सामूहिक परिणाम को रोकने हेतु सज्जनों से शक्ति अर्जित करने के कारण ही हुआ जो सब गुण अर्जित कर सब गुण अागर हो चुका तो अगर उसका तेज आप सह न सके तो फिर उसकी परिक्षा लेने लगेंगे सनातन ब्राह्मण और ब्राह्मण होने की? अन्य लोग जिनकी परिक्षा लेनी थी उनकी नहीं ली गयी आप द्वारा तो  हो सकता है समय उनकी परिक्षा अवश्य ले ? >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||   

आतंरिक और अनुवांशिक रूप से मानवता विरोधी लोगों के अनगिनत प्रयासों के बावजूद अगर इस दुनिया में मेरा अस्तित्व है तो ये तथ्य सत्य है :---मित्रों जो स्वयं सनातन राम हो मतलब विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र हो/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा:उमा:अपर्णा की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) हो; मतलब जो अपने में ही शिव भी है, राम भी है और कृष्ण सभी है तो उसका अभीष्ट लक्ष्य पूर्ण कैसे नहीं होता तो उसके 16 मई, 2006 के पत्र व्यवहार पर ही केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र को 7 स्थायी शिक्षक पद समेत उनके अपने समकालीन सभी केंद्रों/विभागों को लगभग 7 दहाई=70 स्थायी शिक्षक पद प्राप्त हुए थे तो अब जिसको नहीं कुछ मिला तो उसकी अपनी कोई खता तो अवश्य ही रही होगी न? 11/18 सितंबर, 2007 को केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र सैध्दांतिक रूप से प्रयागराज विश्विद्यालय का पूर्ण वायुमंडलीय एवं महासागर विज्ञान/अध्ययन केंद्र का दर्जा प्राप किया और 29/30 अक्टूबर, 2009 को उन 7 में से तीन स्थाई शिक्षक पदभार ग्रहण करने के साथ भौतिक रूप से प्रयागराज विश्विद्यालय के पूर्ण अध्ययन/अध्यापन और शोध केंद्र के रूप में विधिवत मान्यता प्राप्त किया और दो शिक्षक 17 नवम्बर और 19 दिसंबर, 2009 को पद भार ग्रहण किये और अभी दो पद रिक्त है। >>>>जैसे इन तीनों में से एक और सबसे प्रिमिटिव स्थान मेरा नहीं माना जा रहा है कुछ विशेष गुरु जी लोगों के द्वारा उसी तरह से केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र के साथ तो व्यवहार नहीं किया जा रहा है? क्योंकि गुरुजी लोगों को अपनी राजनीतीक रस्सी बुनने का स्थान ही नहीं छूटा है और न झूटता है मेरे जैसे विवेक=सनातन राम द्वारा फिर भी मैं अपना अभीष्ट कार्य पूर्ण मानते हुए उन गुरु जी लोगों को अपनी राजनीती करने और राजनैतिक रस्सी बुनने का कार्य उनपर छोड़ देता हूँ पर इतना जरूर उनको ज्ञात हो की वह उनका कार्य सत्यम शिवम सुंदरम होते हुए "सतयमेव जयते" को अभीष्ट रूप में अंत तक प्राप्त हो। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|

आतंरिक और अनुवांशिक रूप से मानवता विरोधी लोगों के अनगिनत प्रयासों के बावजूद अगर इस दुनिया में मेरा अस्तित्व है तो ये तथ्य सत्य है :---मित्रों जो स्वयं सनातन राम हो मतलब विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र हो/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा:उमा:अपर्णा की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) हो; मतलब जो अपने में ही शिव भी है, राम भी है और कृष्ण सभी है तो उसका अभीष्ट लक्ष्य पूर्ण कैसे नहीं होता तो उसके 16 मई, 2006 के पत्र व्यवहार पर ही केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र को 7 स्थायी शिक्षक पद समेत उनके अपने समकालीन सभी केंद्रों/विभागों को लगभग 7 दहाई=70 स्थायी शिक्षक पद प्राप्त हुए थे तो अब जिसको नहीं कुछ मिला तो उसकी अपनी कोई खता तो अवश्य ही रही होगी न? 11/18 सितंबर, 2007 को केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र सैध्दांतिक रूप से प्रयागराज विश्विद्यालय का पूर्ण वायुमंडलीय एवं महासागर विज्ञान/अध्ययन केंद्र का दर्जा प्राप किया और 29/30 अक्टूबर, 2009 को उन 7 में से तीन स्थाई शिक्षक पदभार ग्रहण करने के साथ भौतिक रूप से प्रयागराज विश्विद्यालय के पूर्ण अध्ययन/अध्यापन और शोध केंद्र के रूप में विधिवत मान्यता प्राप्त किया और दो शिक्षक 17 नवम्बर और 19 दिसंबर, 2009 को पद भार ग्रहण किये और अभी दो पद रिक्त है। >>>>जैसे इन तीनों में से एक और सबसे प्रिमिटिव स्थान मेरा नहीं माना जा रहा है कुछ विशेष गुरु जी लोगों के द्वारा उसी तरह से केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र के साथ तो व्यवहार नहीं किया जा रहा है? क्योंकि गुरुजी लोगों को अपनी राजनीतीक रस्सी बुनने का स्थान ही नहीं छूटा है और न झूटता है मेरे जैसे विवेक=सनातन राम द्वारा फिर भी मैं अपना अभीष्ट कार्य पूर्ण मानते हुए उन गुरु जी लोगों को अपनी राजनीती करने और राजनैतिक रस्सी बुनने का कार्य उनपर छोड़ देता हूँ पर इतना जरूर उनको ज्ञात हो की वह उनका कार्य सत्यम शिवम सुंदरम होते हुए "सतयमेव जयते" को अभीष्ट रूप में अंत तक प्राप्त हो। >>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|

Wednesday, May 4, 2016

जब मैं विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति); मतलब शिव भी है, राम भी है और कृष्ण भी है और इस प्रकार शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब सनातन राम इस समस्त नारी जगत और पुरुष जगत से श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाने पर भी सरस्वती का मानस पुत्र हो सकता हो मतलब उनको माँ मानते हुए शीश झुका सकता हूँ तो बहनो के आगे भी नतमस्तक हो उन अपनी बहनों के इसारे पर स्वनियंत्रित अवस्था धारण कर सकता हूँ।>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]

जब मैं  विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति); मतलब शिव भी है, राम भी है और कृष्ण भी है और इस प्रकार शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब सनातन राम इस समस्त नारी जगत और पुरुष जगत से श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाने पर भी सरस्वती का मानस पुत्र हो सकता हो मतलब उनको माँ मानते हुए शीश झुका सकता हूँ तो बहनो के आगे भी नतमस्तक हो उन अपनी बहनों के इसारे पर स्वनियंत्रित अवस्था धारण कर सकता हूँ।>>>>>>>>विवेक (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से रामापुर-223225, आजमगढ़ समेत 5 गाँव को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ: सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से बिशुनपुर-223103, जौनपुर गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----रामप्रसाद रमानाथ (+पराशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरीधारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))||  [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस Nakshatra: Dhanistha Rashi: 1/2 of Kumbh and 1/2 of Makar Rashi and Rashi Name:Giridhari ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) Date of Birth Official: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]] 

5 मई, 2006-4 मई, 2016: 11 वर्ष पूर्ण हुए मेरे सामाजिक वैचारिक तंत्र पर लेखों के लिखने के: प्रयागराज विश्विद्यालय से 5 मई, 2006 से प्रारम्भकरते हुए भारतीय संस्थान बैंगलोर (2007-2009) और पुनः प्रयागराज विश्विद्यालय मई, 2013 तक पहले ऑरकुट और उसी को ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" पर और इस ब्लॉग से सभी पोस्ट मिटाकर अगस्त, 2013 से लेकर आज तक उसी से मिलते जुलते विचारों पर फेसबुक के पोस्ट को पुन "Vivekanand and Modern Tradition" ब्लॉग पर:------------इस प्रयागराज में जिस ब्राह्मण समाज ने मुझे स्वयं को सनातन ब्राह्मण कहने की कीमत वसूल की 2001 से लेकर आज तक और पूरे विश्व का सर्वोच्च ब्राह्मण (अभीष्ट त्याग जो ब्राह्मणत्व का पर्याय है) बना दिया किसी विशेष दौर में तो उसको मैं बताना चाहता हूँ की सहस्राब्दी संक्रमण /विश्व्परिवर्तन के दौर से लेकर आज तक ब्राह्मणों के सर्वोच्च कर्तव्य अपने समाज और देश की सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक विरासत की रक्षा और उसको अटूट आधार देने में मैंने एक प्रतीक और आधार के रूप में अभिष्ठतम् कार्य प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर तरह के अंतर्राष्ट्रीय स्तर अभिकर्ताओं द्वारा पूर्ण रूप से मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त किये जाने वाले प्रभावकारी परिस्थितिओं का सामना करते हुए इस विश्व मानवता के केंद्र प्रयागराज में रहकर किया है। मेरे लिए प्रमाणपत्र उनसे क्या मिलेगा जो उस संस्कृति जिसको मैंने आइना दिखा दिया है उनके प्रभाव में आकर स्वयं मेरे घर से प्रारम्भकर दुनिया के कोने-कोने तक जाल बुने पर मुझे कार्य सिध्धि से विरत न सके। अब उस जैसी संस्कृति के पोशकों को भी अंदाज हो गया होगा की उनके हाँथ किस सनातन ब्राह्मण के पुत्र पर पड़े थे और यह भी की ब्राह्मण इस दुनिया की सर्वोच्च शक्ति मतलब विश्व महाशक्ति है न की कोई देश और यह भी की उस सनातन ब्राह्मण की आगे आने वाली संतानों पर भूलकर भविष्य में हाँथ नहीं डालना है न भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ करना है?

5 मई, 2006-4 मई, 2016:  11 वर्ष पूर्ण हुए मेरे सामाजिक वैचारिक तंत्र पर लेखों के लिखने के: प्रयागराज विश्विद्यालय से 5 मई, 2006 से प्रारम्भकरते हुए भारतीय संस्थान बैंगलोर (2007-2009) और पुनः प्रयागराज विश्विद्यालय मई, 2013 तक पहले ऑरकुट और उसी को ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" पर और  इस ब्लॉग से सभी पोस्ट मिटाकर अगस्त, 2013 से लेकर आज तक उसी से मिलते जुलते विचारों पर फेसबुक के पोस्ट को पुन "Vivekanand and Modern Tradition" ब्लॉग पर:------------इस प्रयागराज में जिस ब्राह्मण समाज ने मुझे स्वयं को सनातन ब्राह्मण कहने की कीमत वसूल की  2001 से लेकर आज तक और पूरे विश्व का सर्वोच्च ब्राह्मण (अभीष्ट त्याग जो ब्राह्मणत्व का पर्याय है) बना दिया किसी विशेष दौर में तो उसको मैं बताना चाहता हूँ की सहस्राब्दी संक्रमण /विश्व्परिवर्तन के  दौर से लेकर आज तक ब्राह्मणों के सर्वोच्च कर्तव्य अपने समाज और देश की  सांस्कृतिक, शैक्षिक और वैज्ञानिक विरासत की रक्षा और उसको अटूट आधार देने में मैंने एक प्रतीक और आधार के रूप में अभिष्ठतम् कार्य प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हर तरह के अंतर्राष्ट्रीय स्तर अभिकर्ताओं द्वारा पूर्ण रूप से मानसिक रूप से अवसाद ग्रस्त किये जाने वाले प्रभावकारी परिस्थितिओं का सामना करते हुए इस विश्व मानवता के केंद्र प्रयागराज में रहकर किया है।  मेरे लिए प्रमाणपत्र उनसे क्या मिलेगा जो उस संस्कृति जिसको मैंने आइना दिखा दिया है उनके प्रभाव में आकर स्वयं मेरे घर से प्रारम्भकर दुनिया के कोने-कोने तक जाल बुने पर मुझे कार्य सिध्धि से विरत न सके। अब उस जैसी संस्कृति के पोशकों को भी अंदाज हो गया होगा की उनके हाँथ किस सनातन ब्राह्मण के पुत्र पर पड़े थे और यह भी की ब्राह्मण इस दुनिया की सर्वोच्च शक्ति मतलब विश्व महाशक्ति है न की कोई देश और यह भी की उस सनातन ब्राह्मण की आगे आने वाली संतानों पर भूलकर भविष्य में हाँथ नहीं डालना है न भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ करना है?

आप किस क्षेत्र से है और आप का कितना अनुभव है और किस संस्था से आप अपनी उपाधि पाये हैं यह क्यों पूंछा जाता है ? केवल कुछ विशेष मात्रा में उपस्थित अपवाद को छोड़कर समाजिक संदर्भ में मैं जन्म और कर्म दोनों मानता हूँ तथ्य को कोई भी संगठन और सरकार या संस्था अनगिनत प्रयास भी कर ले तो झूंठा साबित नहीं कर सकती है यह अलग की अति सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान को सबके उथ्थान हेतु लगाया जाता रहा है पर यदि ऐसे सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान लोग जिस अपने निश्चित परिवार या स्थान की सुसंस्कृति/संस्कार/सदाचार को छोड़ कर दूसरों का उत्थान करेंगे तो उनसे भी उस समाज का उथ्थान नहीं हो सकेगा? और इसी कभी न मिलने वालीं समानता हेतु ही प्रयास जारी रहता है सभी संगठन/सरकार/संस्था का लेकिन जो अपने पर अस्थिर और अविश्वासी है वह विनष्ट स्वयं हो जा रहा पर जिसकी सनातन संस्कृति/संस्कार/सदाचरण अटल है उसकी समानता कोई कभी प्राप्त ही नहीं कर सकता है। क्योंकि जन्म जिस घर और जिस स्थान पर होता है जहाँ जिस घर और स्थान पर हमारा जीवन गुजरता है वहां के संस्कार, संस्कृति और आचरण बहुतों को प्रभावित करते है और इस सबके प्रभाव से हम इंकार नही कर सकते हैं अगर हम ही नहीं अधिकाँश विश्व यही कहता और वही हम सब भी मानते हैं की भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोच्च संस्कृति हैं। पर कर्म भी अपना प्रभाव दिखाता है और कभी कभी इतना भी दिखा सकता है की जन्म से मिले संस्कार, संस्कृति और आचरण छोटे पड़ जाएँ| लेकिन आप गीता के उस श्लोक के आधार पर जन्म प्रभाव मना नहीं कर सकते जिसमे कहा गया है की रूप-रंग; स्पर्श; गंध; स्वर:सुमधुर या करकस ध्वनि; और रस मानव को क्या ईस्वर को भी प्रभावित करते है पर जो इनमे संतुलन स्थापित कर अपने पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है वह पुरुष योगी है। मैं दोनों पर इसलिए विश्व्वास करता हूँ क्योंकि मैं पूर्ण विस्वास से कहता हूँ की मैं इस प्रयागराज में जिस अवस्था में हूँ और जो कुछ लिखकर सामान्य मानव जीवन जी रहा हूँ वह तब न हो पाता जब मुझे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास) मिश्रा ब्राह्मण मेरे मामा के घर/गाँव, बिशुनपुर-223103 और स्वयं सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र:विलवापत्र--शिव/शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा: उमा:अपर्णा का भोज्य या उनका आहार या उनपर अर्पणेय और शेष बचा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण अपने घर/गाँव, रामापुर-223225 में रहने और पिता जी के ननिहाल भर्रारी/शाहगंज-223103 के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय पूर्ण धर्म भीरु ब्राह्मण परिवार के घर में जन्म ले 3/4 वर्ष रहने का अवसर न मिल पाता। >>>>>>>>>>>>>अगर आप उपयुक्त कर्तव्य, आचरण और संस्कार में से कुछ भी अनुकूल रखते हैं तो आप अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और उन तीनो से किसी भी संयोग की संतति की कोई जाति/धर्म, मुस्लिम या ईसाई अपने को मानाने या उस जाति/धर्म से होना स्वीकार करने से या उसका कहने से कभी न डरें। क्योंकि अगर इनमे से कोई एक हैं आप तो अन्य कोई एक बन सकते हैं अपने कर्तव्य, आचरण और संस्कार द्वारा इसी जन्म में पर यह जरूर है की आप सनातन ब्राह्मण केवल नहीं हो सकते उसी जन्म में जिसके लिए दूसरे जन्म की आवश्यता होती है।>>>>>>>>>>आप किस क्षेत्र से है और आप का कितना अनुभव है और किस संस्था से आप अपनी उपाधि पाये हैं यह क्यों पूंछा जाता है ? केवल कुछ विशेष मात्रा में उपस्थित अपवाद को छोड़कर समाजिक संदर्भ में मैं जन्म और कर्म दोनों मानता हूँ तथ्य को कोई भी संगठन और सरकार या संस्था अनगिनत प्रयास भी कर ले तो झूंठा साबित नहीं कर सकती है यह अलग की अति सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान को सबके उथ्थान हेतु लगाया जाता रहा है पर यदि ऐसे सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान लोग जिस अपने निश्चित परिवार या स्थान की सुसंस्कृति/संस्कार/सदाचार को छोड़ कर दूसरों का उत्थान करेंगे तो उनसे भी उस समाज का उथ्थान नहीं हो सकेगा? और इसी कभी न मिलने वालीं समानता हेतु ही प्रयास जारी रहता है सभी संगठन/सरकार/संस्था का लेकिन जो अपने पर अस्थिर और अविश्वासी है वह विनष्ट स्वयं हो जा रहा पर जिसकी सनातन संस्कृति/संस्कार/सदाचरण अटल है उसकी समानता कोई कभी प्राप्त ही नहीं कर सकता है। क्योंकि जन्म जिस घर और जिस स्थान पर होता है जहाँ जिस घर और स्थान पर हमारा जीवन गुजरता है वहां के संस्कार, संस्कृति और आचरण बहुतों को प्रभावित करते है और इस सबके प्रभाव से हम इंकार नही कर सकते हैं अगर हम ही नहीं अधिकाँश विश्व यही कहता और वही हम सब भी मानते हैं की भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोच्च संस्कृति हैं। पर कर्म भी अपना प्रभाव दिखाता है और कभी कभी इतना भी दिखा सकता है की जन्म से मिले संस्कार, संस्कृति और आचरण छोटे पड़ जाएँ| लेकिन आप गीता के उस श्लोक के आधार पर जन्म प्रभाव मना नहीं कर सकते जिसमे कहा गया है की रूप, रंग, स्पर्श, गंध और रस मानव को क्या ईस्वर को भी प्रभावित करते है पर जो इनमे संतुलन स्थापित कर अपने पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है वह पुरुष योगी है। मैं दोनों पर इसलिए विश्व्वास करता हूँ क्योंकि मैं पूर्ण विस्वास से कहता हूँ की मैं इस प्रयागराज में जिस अवस्था में हूँ और जो कुछ लिखकर सामान्य मानव जीवन जी रहा हूँ वह तब न हो पाता जब मुझे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास) मिश्रा ब्राह्मण मेरे मामा के घर/गाँव, बिशुनपुर-223103 और स्वयं सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र:विलवापत्र--शिव/शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा: उमा:अपर्णा का भोज्य या उनका आहार या उनपर अर्पणेय और शेष बचा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण अपने घर/गाँव, रामापुर-223225 में रहने और पिता जी के ननिहाल भर्रारी/शाहगंज-223103 के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय पूर्ण धर्म भीरु ब्राह्मण परिवार के घर में जन्म ले 3/4 वर्ष रहने का अवसर न मिल पाता।

आप किस क्षेत्र से है और आप का कितना अनुभव है और किस संस्था से आप अपनी उपाधि पाये हैं यह क्यों पूंछा जाता है ? केवल कुछ विशेष मात्रा में उपस्थित अपवाद को छोड़कर समाजिक संदर्भ में मैं जन्म और कर्म दोनों मानता हूँ तथ्य को कोई भी संगठन और सरकार या संस्था अनगिनत प्रयास भी कर ले तो झूंठा साबित नहीं कर सकती है यह अलग की अति सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान को सबके उथ्थान हेतु लगाया जाता रहा है पर यदि ऐसे सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान लोग जिस अपने निश्चित परिवार या स्थान की सुसंस्कृति/संस्कार/सदाचार को छोड़ कर दूसरों का उत्थान करेंगे तो उनसे भी उस समाज का उथ्थान नहीं हो सकेगा? और इसी कभी न मिलने वालीं समानता हेतु ही प्रयास जारी रहता है सभी संगठन/सरकार/संस्था का लेकिन जो अपने पर अस्थिर और अविश्वासी है वह विनष्ट स्वयं हो जा रहा पर जिसकी सनातन संस्कृति/संस्कार/सदाचरण अटल है उसकी समानता कोई कभी प्राप्त ही नहीं कर सकता है।  क्योंकि जन्म जिस घर और जिस स्थान पर होता है जहाँ जिस घर और स्थान पर हमारा जीवन गुजरता है वहां के संस्कार, संस्कृति और आचरण बहुतों को प्रभावित करते है और इस सबके प्रभाव से हम इंकार नही कर सकते हैं अगर हम ही नहीं अधिकाँश विश्व यही कहता और वही हम सब भी मानते हैं की भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोच्च संस्कृति हैं। पर कर्म भी अपना प्रभाव दिखाता है और कभी कभी इतना भी दिखा सकता है की जन्म से मिले संस्कार, संस्कृति और आचरण छोटे पड़ जाएँ| लेकिन आप गीता के उस श्लोक के आधार पर जन्म प्रभाव मना नहीं कर सकते जिसमे कहा गया है की रूप-रंग; स्पर्श; गंध; स्वर:सुमधुर या करकस ध्वनि;  और रस मानव को क्या ईस्वर को भी प्रभावित करते है पर जो इनमे संतुलन स्थापित कर अपने पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है वह पुरुष योगी है। मैं दोनों पर इसलिए विश्व्वास करता हूँ क्योंकि मैं पूर्ण विस्वास से कहता हूँ की मैं इस प्रयागराज में जिस अवस्था में हूँ और जो कुछ लिखकर सामान्य मानव जीवन जी रहा हूँ वह तब न हो पाता जब मुझे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास) मिश्रा ब्राह्मण मेरे मामा के घर/गाँव, बिशुनपुर-223103 और स्वयं सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र:विलवापत्र--शिव/शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा: उमा:अपर्णा का भोज्य या उनका आहार या उनपर अर्पणेय और शेष बचा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण अपने घर/गाँव, रामापुर-223225 में रहने और पिता जी के ननिहाल भर्रारी/शाहगंज-223103 के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय पूर्ण धर्म भीरु ब्राह्मण परिवार के घर में जन्म ले 3/4 वर्ष रहने का अवसर न मिल पाता। >>>>>>>>>>>>>अगर आप उपयुक्त कर्तव्य, आचरण और संस्कार में से कुछ भी अनुकूल रखते हैं तो आप अपने को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और उन तीनो से किसी भी संयोग की संतति की कोई जाति/धर्म, मुस्लिम या ईसाई अपने को मानाने या उस जाति/धर्म से होना स्वीकार करने से या उसका कहने से कभी न डरें। क्योंकि अगर इनमे से कोई एक हैं आप तो अन्य कोई एक बन सकते हैं अपने कर्तव्य, आचरण और संस्कार द्वारा इसी जन्म में पर यह जरूर है की आप सनातन ब्राह्मण केवल नहीं हो सकते उसी जन्म में जिसके लिए दूसरे जन्म की आवश्यता होती है।>>>>>>>>>>आप किस क्षेत्र से है और आप का कितना अनुभव है और किस संस्था से आप अपनी उपाधि पाये हैं यह क्यों पूंछा जाता है ? केवल कुछ विशेष मात्रा में उपस्थित अपवाद को छोड़कर समाजिक संदर्भ में मैं जन्म और कर्म दोनों मानता हूँ तथ्य को कोई भी संगठन और सरकार या संस्था अनगिनत प्रयास भी कर ले तो झूंठा साबित नहीं कर सकती है यह अलग की अति सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान को सबके उथ्थान हेतु लगाया जाता रहा है पर यदि ऐसे सुसंस्कृति/संस्कारवान/सदाचारवान लोग जिस अपने निश्चित परिवार या स्थान की सुसंस्कृति/संस्कार/सदाचार को छोड़ कर दूसरों का उत्थान करेंगे तो उनसे भी उस समाज का उथ्थान नहीं हो सकेगा? और इसी कभी न मिलने वालीं समानता हेतु ही प्रयास जारी रहता है सभी संगठन/सरकार/संस्था का लेकिन जो अपने पर अस्थिर और अविश्वासी है वह विनष्ट स्वयं हो जा रहा पर जिसकी सनातन संस्कृति/संस्कार/सदाचरण अटल है उसकी समानता कोई कभी प्राप्त ही नहीं कर सकता है।  क्योंकि जन्म जिस घर और जिस स्थान पर होता है जहाँ जिस घर और स्थान पर हमारा जीवन गुजरता है वहां के संस्कार, संस्कृति और आचरण बहुतों को प्रभावित करते है और इस सबके प्रभाव से हम इंकार नही कर सकते हैं अगर हम ही नहीं अधिकाँश विश्व यही कहता और वही हम सब भी मानते हैं की भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वोच्च संस्कृति हैं। पर कर्म भी अपना प्रभाव दिखाता है और कभी कभी इतना भी दिखा सकता है की जन्म से मिले संस्कार, संस्कृति और आचरण छोटे पड़ जाएँ| लेकिन आप गीता के उस श्लोक के आधार पर जन्म प्रभाव मना नहीं कर सकते जिसमे कहा गया है की रूप, रंग, स्पर्श, गंध और रस मानव को क्या ईस्वर को भी प्रभावित करते है पर जो इनमे संतुलन स्थापित कर अपने पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है वह पुरुष योगी है। मैं दोनों पर इसलिए विश्व्वास करता हूँ क्योंकि मैं पूर्ण विस्वास से कहता हूँ की मैं इस प्रयागराज में जिस अवस्था में हूँ और जो कुछ लिखकर सामान्य मानव जीवन जी रहा हूँ वह तब न हो पाता जब मुझे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास) मिश्रा ब्राह्मण मेरे मामा के घर/गाँव, बिशुनपुर-223103 और स्वयं सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र:विलवापत्र--शिव/शिवा:सती:पार्वती:गौरी:गिरिजा: उमा:अपर्णा का भोज्य या उनका आहार या उनपर अर्पणेय और शेष बचा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण अपने घर/गाँव, रामापुर-223225 में रहने और पिता जी के ननिहाल भर्रारी/शाहगंज-223103 के सनातन वशिष्ठ गोत्रीय पूर्ण धर्म भीरु ब्राह्मण परिवार के घर में जन्म ले 3/4 वर्ष रहने का अवसर न मिल पाता।