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Wednesday, September 28, 2016

The people of the new millennium congratulation to all of you with a short information! On the base of initial to final investigation I found that no one could moved a bit more in forward direction than a distance allowed by his behavior and personality gained from his family and social environment around them and neither they can faced the forced superimposed condition arised during this transition phase of the changing the World for pre- preparedness for the new millennium but they continued the routine behavior of their local conditional states and also they wanted to harvest the crops of this change which they certainly harvested on the base of the lives of the simplest person like myself.

The people of the new millennium congratulation to all of you with a short information!
On the base of initial to final investigation I found that no one
could moved a bit more in forward direction than a distance allowed by his behavior and personality gained from his family and social environment around them and neither they can faced the forced superimposed condition arised during this transition phase of the changing the World for pre- preparedness for the new millennium but they continued the routine behavior of their local conditional states and also they wanted to harvest the crops of this change which they certainly harvested on the base of the lives of the simplest person like myself.

Tuesday, September 27, 2016

कश्यप/मारीच (शब्द सह नामार्थ जिसका सूर्य=आदित्य=भानु=रवि=मित्र=खगा=पुष्ण=हिरण्यगर्भा=सवित (न की सविता जिसका अर्थ सूर्यपत्नी गायत्री होता है)=अर्क=भास्कर=सवितापति सूर्यनारायण) ही सातों सप्तर्षियों में सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं अगर इसमे आठवे ऋषी अगस्त्य=कुम्भज (अशोकचक्र=धर्मचक्र=समयचक्र=समतामूलकचक्र=कालचक्र के 8X3=24 ऋषि मतलब मूल विभाग 3 ही हुए हर ऋषि में जिसमे विश्वामित्र प्रथम और याज्ञवल्क चौबीसवें ऋषी हैं जबकी अब इन 24 ऋषि गोत्र से सुदर्शन चक्र की 108 धारीदार आरियों की तर्ज पर लगभग अधिकतम 108 गोत्र इस विश्व मानव समाज में हो चुके हैं। अतः अशोकचक्र और सुदर्शन चक्र समानार्थी हो जा रहे है यदि हम मूल 24 पर वापस आते हैं| इन चक्र/चक्रों के सदा सर्वदा धारणकर्ता भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् महादेव शिव है और इस प्रकार यहां भी ये एक दूसरे के इष्टदेव एक दूसरे से अन्योन्य सम्बन्ध में ही जुड़े हैं) को भी सामिल कर लिया जाय तो भी इस अष्टक ऋषि समूह में भी कश्यप/मारीच सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं :---- त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति भगवान् विष्णु (श्रीधर) को समर्पित "ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय" जिसमे स्वयं में ही लक्ष्मी, गायत्री और गीता (जिसमे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ज्ञान का सार समाहित है) समाहित हों और जो विष्णु समस्त देवी जगत के सबसे प्रिय देव और उनके सबसे बड़े मित्र है उनके निकटस्थों (जिनको विष्णु प्रिय हैं) में ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति भी सामिल हैं जो नारी=देवी जगत के मूल स्रोत हैं और स्वयं उनकी पुत्री सती:पारवती: गौरी:उमा:गिरिजा:अपर्णा: समेत उनकी अन्य सभी 13 पुत्रियाँ भी सामिल हैं (जिनसे कश्यप ने पिता मारीच के आदेश से उनके द्वारा ब्रह्मा को दिए वरदान को पूर्ण करने हेतु विवाह किया था जिनका विवाह शिव और सती:उमा:गिरिजा:अपर्णा प्रकरण के कारण रुका था)| और ऐसे महिमावान विष्णु (श्रीधर) स्वयं में ही प्रदीप हैं मतलब सूर्य की भी आंतरिक ऊर्जा का स्वयं निहित स्रोत हैं ((ॐ मरीचये (मारीच:कश्यप/मारीच)) नमः, ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये (रवि) नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, , ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ आदित्याय नमः, सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः|>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विश्वरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पार कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया|>>>>>>>>>>>>देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ( सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार।>>>>>>>>>>>>>> यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंशीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु); और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है? जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ/मानव घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=(सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

कश्यप/मारीच (शब्द सह नामार्थ जिसका सूर्य=आदित्य=भानु=रवि=मित्र=खगा=पुष्ण=हिरण्यगर्भा=सवित (न की सविता जिसका अर्थ सूर्यपत्नी गायत्री होता है)=अर्क=भास्कर=सवितापति सूर्यनारायण) ही सातों सप्तर्षियों में सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं अगर इसमे आठवे ऋषी अगस्त्य=कुम्भज (अशोकचक्र=धर्मचक्र=समयचक्र=समतामूलकचक्र=कालचक्र के 8X3=24 ऋषि मतलब मूल विभाग 3 ही हुए हर ऋषि में जिसमे विश्वामित्र प्रथम और याज्ञवल्क चौबीसवें ऋषी हैं जबकी अब इन 24 ऋषि गोत्र से सुदर्शन चक्र की 108 धारीदार आरियों की तर्ज पर लगभग अधिकतम 108 गोत्र  इस विश्व मानव समाज में हो चुके हैं।  अतः अशोकचक्र और सुदर्शन चक्र समानार्थी हो जा रहे है यदि हम मूल 24 पर वापस आते हैं| इन चक्र/चक्रों के सदा सर्वदा धारणकर्ता भगवान् विष्णु और रक्षक भगवान् महादेव शिव है और इस प्रकार यहां भी ये एक दूसरे के इष्टदेव एक दूसरे से अन्योन्य सम्बन्ध में ही जुड़े हैं) को भी सामिल कर लिया जाय तो भी इस अष्टक ऋषि समूह में भी कश्यप/मारीच सबसे वरिष्ठ, श्रेष्ठ और ज्येष्ठ हैं :---- त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति भगवान् विष्णु (श्रीधर) को समर्पित "ॐ नमः भगवते वाशुदेवाय" जिसमे स्वयं में ही लक्ष्मी, गायत्री और गीता (जिसमे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ज्ञान का सार समाहित है) समाहित हों और जो विष्णु समस्त देवी जगत के सबसे प्रिय देव और उनके सबसे बड़े मित्र है उनके निकटस्थों (जिनको विष्णु प्रिय हैं) में ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति भी सामिल हैं जो नारी=देवी जगत के मूल स्रोत हैं और स्वयं उनकी पुत्री सती:पारवती: गौरी:उमा:गिरिजा:अपर्णा: समेत उनकी अन्य सभी 13 पुत्रियाँ भी सामिल हैं (जिनसे कश्यप ने पिता मारीच के आदेश से उनके द्वारा ब्रह्मा को दिए वरदान को पूर्ण करने हेतु विवाह किया था जिनका विवाह शिव और सती:उमा:गिरिजा:अपर्णा प्रकरण के कारण रुका था)| और ऐसे महिमावान विष्णु (श्रीधर) स्वयं में ही प्रदीप हैं  मतलब सूर्य की भी आंतरिक ऊर्जा का स्वयं निहित स्रोत हैं ((ॐ मरीचये (मारीच:कश्यप/मारीच)) नमः, ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये (रवि) नमः, ॐ सूर्याय नमः, ॐ भानवे नमः, ॐ खगाय नमः, ॐ पूष्णे नमः, , ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, ॐ आदित्याय नमः, सवित्रे नमः, ॐ अर्काय नमः, ॐ भास्कराय नमः, ॐ श्री सवितृसूर्यनारायणाय नमः|>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विश्वरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पार कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया|>>>>>>>>>>>>देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ( सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार।>>>>>>>>>>>>>> यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंशीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु); और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है? जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ/मानव घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=(सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन  तिथि:  रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Monday, September 26, 2016

देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने "मानवता" और "सत्य" दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंसीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक/जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। >>>>>>>>>>जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती: गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: रविवार दिनांक 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

देवी कुल मैं देवव्रत कुल से हूँ गोत्र जो भी हो पर पूर्ण सिद्ध है देवीकुल ने गलती की थी तो कष्ट दोनों को हुआ मैं राम (विष्णुकांत) और कृष्ण(कृष्णकांत) को पाल रहा हूँ तो आप को लव और कुश को पालना ही पडेगा यही हमारा और आप का प्रायश्चित तथा नियति है।>>>>>>>>>>>>>>>>>> जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (ब्राह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने "मानवता" और "सत्य" दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर चंद्रवंसीय/कश्यप गोत्रीय पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से| तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक/जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ  को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों की रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। >>>>>>>>>>जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी(=सरस्वती+लक्ष्मी+गौर:सती:पार्वती: गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: रविवार दिनांक 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Sunday, September 25, 2016

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी (:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (बर्ह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल को ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज के सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी(:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी (:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार।>>>>>>>>>श्रेष्ठता क्रम :कश्यप/मारीच (पुरुषार्थ), गौतम (मानवता), व्यासः/शांडिल्य/उपमन्यु/वशिष्ठ (ज्ञान), आंगिरस/भरद्वाज/वृहस्पति/धन्वन्तरि (दर्शन एवं विज्ञान) , भृगु/जमदग्नि (बर्ह्मणत्व गुण त्याग), अत्रि/कृष्णात्रेय(दुर्वाषा)/दत्तात्रेय/सोमात्रेय (तेज), कौशिक/विशरथ/विश्वामित्र (आयुध कौसल): और इन सातों से आठवे ऋषि अगस्त्य=कुंभज इन सभी गुणों के औसत धारणकर्ता थे और जो पहले ऋषि हैं जिन्होंने पहली बार विंध्यक्षेत्र को पर कर केरल/तमिल/तेलगू क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया--- यह सत्य है कि मानवता श्रेष्ठ है गौतम अनुसार और यह भी सत्य है कि सत्य श्रेष्ठ है कश्यप अनुसार >>>पर>>>>>> जिसने मानवता और सत्य दोनों को श्रेष्ठ शिध्ध कर दिया हो व्यवहार में अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(व्यास से व्यासी जो वशिष्ठ के वंसज होने से कश्यप गोत्रीय के गुरु हो सकते हैं और उदहारण के तौर पर पाण्डुपुत्र उनको आध्यात्मिक गुरु मानते भी थे) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल के श्रध्धेय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पांडेय ब्राह्मण सारंगधर(चंद्रशेखर:शिव)/.../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल के श्रध्धेय डॉ. प्रेमचंद(शिव) के कृपा से तो उसके सम्बन्ध में आप की क्या राय है जिसने अपने कुल का दीपक बुझा दूसरों के कुल  को ज्योतिर्मय किया हो और कर भी रहा हो? पर यह भी सत्य है की उसका भी कुल गुरुजन ने ज्योतिर्मय किया हुआ है और आशा है की आगे भी हम इसे जारी रखेंगे पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ। >>>>>>>>जिस तरह से सूर्य पांचो मूल तत्वों (सभी तत्वों का स्रोत ऊर्जा है जिसका मूल स्रोत सूर्य है) का स्रोत है उसी तरह मैंने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और इस प्रकार ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, इस्लाम और ईसाइयत तथा इस सभी के संगत सभी मानवता घटक को अपनी ऊर्जा दिया हूँ और प्रकार आप कह सकते है की विश्व समाज के सभी पांचो घटकों को ऊर्जा देने के कार्य में ही लीन हूँ। यह जरूर है की कश्यप गोत्रीय होने के नाते कश्यप ऋषि द्वारा भृगुवंशी परशुराम को दिए वरदान के नाते ब्राह्मणों की रक्षा करना मेरा विशेष दायित्व है पर रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद जैसे रावणी लीला वालों रक्षा मैं नहीं करता वरन उनको ब्राह्मण होने पर भी उद्धधार की प्रक्रिया में दंड देता रहता हूँ। राक्षसी व्यवहार कोई व्यक्ति या स्वयं ब्राह्मण भी यदि किया है व्यवहार में तो उसे व्यवहार में दंड मेरे द्वारा अवश्य मिलेगा या मिला होगा। जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत ((सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी(:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा)=जगदम्बा=दुर्गा)) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Wednesday, September 21, 2016

एक सनातन पूर्ण ब्राह्मण का पुत्र पूरी दुनिया पर भारी पड़ा था और उसी से ही सुरक्षा के गुहार लगायी गयी थी प्रयागराज में स्थिर हो स्थिति को नियंत्रित करने हेतु सभी व्यवसायिक सेवावालों के पुत्रों/पुत्रियों के वस में कुछ नहीं था पर पुनः कुचक्र चलाया जा रहा है उसके विरुध्ध उसका भी परिणाम मिलेगा लेकिन उस समय यह आप लोगों के षडयंत्र के तहत ढाल बनकर आप की सुरक्षा नहीं करेगा वरन अबकी वार व्यवसायिक सेवा वालों के पुत्रों/पुत्रियों की बारी है जो कुछ भी कर जाय तो आप सब ठीक मान लेते है:->>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

एक सनातन पूर्ण ब्राह्मण का पुत्र पूरी दुनिया पर भारी पड़ा था और उसी से ही सुरक्षा के गुहार लगायी गयी थी प्रयागराज में स्थिर हो स्थिति को नियंत्रित करने हेतु सभी व्यवसायिक सेवावालों के पुत्रों/पुत्रियों के वस में कुछ नहीं था पर पुनः कुचक्र चलाया जा रहा है उसके विरुध्ध उसका भी परिणाम मिलेगा लेकिन उस समय यह आप लोगों के षडयंत्र के तहत ढाल बनकर आप की सुरक्षा नहीं करेगा वरन अबकी वार व्यवसायिक सेवा वालों के पुत्रों/पुत्रियों की बारी है जो कुछ भी कर जाय तो आप सब ठीक मान लेते है:->>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Tuesday, September 20, 2016

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका ज्येष्ठ व् वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और उस समय के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी संचालित हो रहा यह सृष्टिगत (सीता=जगतजननी=सरस्वती+लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा:उमा:अपर्णा=जगदम्बा=दुर्गा ) संसार। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया।>>>>>>>वैसे तो मैं सितंबर 2000 से ही इस प्रयागराज में उपस्थित हूँ 11 सितंबर, 2001 से यहां के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र, प्रयागराज विश्विद्यालय के अनुसंधान सहायक पद (अस्थायी पद) पर नियुक्त हुआ किन्तु अगर मेरा ज्येष्ठ व् वरिष्ठ इस प्रयागराज में मौजूद था तो फिर मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा, श्रीश्रीधर (विष्णु) और मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के माध्यम से फरवरी, 2003 में मुझे रोकने की युक्ती प्रयोग में क्यों लाई गयी। पारिवारिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के संघर्स के बावजूद जिस अवस्था में जाकर पूर्ण ब्राह्मण (व्यवसाय विहीन: व्यवसाय विहीन खेती परंतु वह भी आजीविका मात्र) पुत्र मैं स्वयं बचपन से विवाह तक आजीवन अखंड ब्रह्मचारी वापस लौट आया अपने लिए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ती के साथ वह इस जगत में किशी अन्य व्यक्ति से सम्भव नहीं है। मुझे जिस बड़े भाई के सहयोग हेतु उनकी गुरुता में कार्यरत रहने को कहा गया था वे स्वयं ही ऐसे कार्यपूर्ति में सक्षम नहीं थे जानकार लोगों को प्रमाण देने की जरूरत नहीं पर आम जन के लिए यह सत्य है की वे सतह पर सबसे अधिक क्रियाशील दिखाई दिए। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है की जो स्वयं विवेक है जिसका इस केंद्र स्थापना हेतु संकल्प हुआ उसको 2001 से 2014 तक अनगिनत घृणित उपाधी मिली इस प्रयागराज में और सबसे बड़ी बात की विवेक को ही "पागल" की उपाधी मिलती रही जो और किशी को नहीं मिली है जो इस केंद्र से सम्बंधित रहे है। और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया। >>>>>> आज के ठीक 19 वर्ष पूर्व एक शिक्षार्थी के साथ काशी/वाराणसी समूह में लिखित परिक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए भारतीय सैन्य शिक्षा दल (96 UP BN, NCC Jaunpur, Varanasi Group) का सैन्यसेवी (कैडेट) बना था मतलब क्षत्रिय स्वरुप को धारण किया था और तब से ही व्यापक मानव मूल्यों और राष्ट्रीय हित हेतु स्थापित सत्यगत तथ्य पर आंच करने वाले किशी भी व्यक्ति, व्यक्तिसमूह/राष्ट्र/राष्ट्र समूह के अधीन होकर न कोई कार्य किया हूँ और न करूंगा| जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मेरी दृष्टिगत दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता पर अवश्य पड़ा है अज्ञान लोगों के असहयोग करने से जबकी वास्तविक दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता मेरी संरक्षित ही है जिसमे किशी को प्रथम से द्वितीय बनाने का अवसर चाह कर भी नहीं मिल सकता तो लोग बेबस हैं। उनकी अज्ञानता इस लिए क्योंकि मेरी द्रीढ़ प्रतिज्ञा का अभीष्ठ लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय हित हेतु व् व्यापक मानव मूल्यों हेतु ही है। >>>>>>>>>>>>> की विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया।>>>>>>>वैसे तो मैं सितंबर 2000 से ही इस प्रयागराज में उपस्थित हूँ 11 सितंबर, 2001 से यहां के केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र, प्रयागराज विश्विद्यालय के  अनुसंधान सहायक पद (अस्थायी पद) पर नियुक्त हुआ किन्तु अगर मेरा ज्येष्ठ व् वरिष्ठ इस प्रयागराज में मौजूद था तो फिर मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर मेरे मामा, श्रीश्रीधर (विष्णु) और मेरे परमपिता परमेश्वर मेरे ताऊजी, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के माध्यम से फरवरी, 2003 में मुझे रोकने की युक्ती प्रयोग में क्यों लाई गयी। पारिवारिक से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के संघर्स के बावजूद जिस अवस्था में जाकर पूर्ण ब्राह्मण (व्यवसाय विहीन: व्यवसाय विहीन खेती परंतु वह भी आजीविका मात्र) पुत्र मैं स्वयं बचपन से विवाह तक आजीवन अखंड ब्रह्मचारी वापस लौट आया अपने लिए निर्धारित लक्ष्य की पूर्ती के साथ वह इस जगत में किशी अन्य व्यक्ति से सम्भव नहीं है। मुझे जिस बड़े भाई के सहयोग हेतु उनकी गुरुता में कार्यरत रहने को कहा गया था वे  स्वयं ही ऐसे कार्यपूर्ति में सक्षम नहीं थे जानकार लोगों को प्रमाण देने की जरूरत नहीं पर आम जन के लिए यह सत्य है की वे सतह पर सबसे अधिक क्रियाशील दिखाई दिए। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है की जो स्वयं विवेक है जिसका इस केंद्र स्थापना हेतु संकल्प हुआ उसको 2001 से 2014 तक अनगिनत घृणित उपाधी मिली इस प्रयागराज में और सबसे बड़ी बात की विवेक को ही "पागल" की उपाधी मिलती रही जो और किशी को नहीं मिली है जो इस केंद्र से सम्बंधित रहे है। और इस पागल उपाधी पाने वाले ने ही सत्य "केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र "को संरक्षित रखा और उसको स्थायी जीवन दिया। >>>>>> आज के ठीक 19 वर्ष पूर्व एक शिक्षार्थी के साथ काशी/वाराणसी समूह में लिखित परिक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए भारतीय सैन्य शिक्षा दल  (96 UP BN, NCC Jaunpur, Varanasi Group) का सैन्यसेवी (कैडेट) बना था मतलब क्षत्रिय स्वरुप को धारण किया था और तब से ही व्यापक मानव मूल्यों और राष्ट्रीय हित हेतु स्थापित सत्यगत तथ्य पर आंच करने वाले किशी भी व्यक्ति, व्यक्तिसमूह/राष्ट्र/राष्ट्र समूह के अधीन होकर न कोई कार्य किया हूँ और न करूंगा| जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मेरी दृष्टिगत दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता पर अवश्य पड़ा है अज्ञान लोगों के असहयोग करने से जबकी वास्तविक दक्षता, प्रतिभा और कुशाग्रता मेरी संरक्षित ही है जिसमे किशी को प्रथम से द्वितीय बनाने का अवसर चाह कर भी नहीं मिल सकता तो लोग बेबस हैं। उनकी अज्ञानता इस लिए क्योंकि मेरी द्रीढ़ प्रतिज्ञा का अभीष्ठ लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय हित हेतु व् व्यापक मानव मूल्यों हेतु ही है। >>>>>>>>>>>>> की विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Wednesday, September 7, 2016

महादेवी ही तो आद्या मतलब आदिदेवी है मतलब महादेवी सरस्वती ही है कोई और देवी नहीं मतलब लक्ष्मी और पारवती:सती:गौरी (सरस्वती की पौत्री हैं) नहीं| सरस्वती की मानस सन्तान विवेक (संगत बहन प्रज्ञा) और ज्ञान(संगत बहन विद्या) हैं| सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक संतान काशिराज दक्ष प्रजापति हैं जिनकी पुत्री हैं सती:पारवती:गौरी। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||


महादेवी ही तो आद्या मतलब आदिदेवी है मतलब महादेवी सरस्वती ही है कोई और देवी नहीं मतलब लक्ष्मी और पारवती:सती:गौरी (सरस्वती की पौत्री हैं) नहीं| सरस्वती की मानस सन्तान विवेक (संगत बहन प्रज्ञा) और ज्ञान(संगत बहन विद्या) हैं| सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक संतान काशिराज दक्ष प्रजापति हैं जिनकी पुत्री हैं सती:पारवती:गौरी। >>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

आजमगढ़ वाले का जन्म जौनपुर/जमदग्निपुर और जमदग्निपुर/जौनपुर वाले का जन्म आजमगढ़ में हो गया तो गुरु अब शिष्य और शिष्य अब गुरु हो चुका फिर भी दोनों एक दूसरे के इष्टदेव हैं। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||



आजमगढ़ वाले का जन्म जौनपुर/जमदग्निपुर और जमदग्निपुर/जौनपुर वाले का जन्म आजमगढ़ में हो गया तो गुरु अब शिष्य और शिष्य अब गुरु हो चुका फिर भी दोनों एक दूसरे के इष्टदेव हैं। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Message by my BLOG "Vivekanand and Modern Tradition" Since 2006 to 2013 (that posts were deleted in May, 2013 which was revised posts of post at Indian Institute of Science Bangalore:TOP Scientific Institution of India during 2007-2009) and similar message/matter are in the present posts on it (blog) since August, 2013 to present which have ~1 Lacs (100000) visits in number from all around the world in which Top most visit from India and then United States of America and then other countries. Because these post are the repeated version of the primary posts on Orkut and then similar matter posted at present time on facebook. Thus this matter have multiple number of visits. That is why we can conclude and suppose that near about 3-4 Lacs visits occurred of these matters. I do not demoralize the people of Prayagraj/Allahabad but arise/awoke then to be more capable and adaptive more quickly than places like Bangalore or so called Mini United States of America or so called Mini Silicon valley to govern the situations which were/are as resultant occurring/arising due to changes in world community (Adaptation and capacity building should be occur necessarily but without fundamental changes in the Indian Culture). >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||



Message by my BLOG "Vivekanand and Modern Tradition" Since 2006 to 2013 (that posts were deleted in May, 2013 which was revised posts of post at Indian Institute of Science Bangalore:TOP Scientific Institution of India during 2007-2009) and similar message/matter are in the present posts on it (blog) since August, 2013 to present which have ~1 Lacs (100000) visits in number from all around the world in which Top most visit from India and then United States of America and then other countries. Because these post are the repeated version of the primary posts on Orkut and then similar matter posted at present time on facebook. Thus this matter have multiple number of visits. That is why we can conclude and suppose that near about 3-4 Lacs visits occurred of these matters. I do not demoralize the people of Prayagraj/Allahabad but arise/awoke then to be more capable and adaptive more quickly than places like Bangalore or so called Mini United States of America or so called Mini Silicon valley to govern the situations which were/are as resultant occurring/arising due to changes in world community (Adaptation and capacity building should be occur necessarily but without fundamental changes in the Indian Culture). >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

http://research.omicsgroup.org/index.php/K._Banerjee_Centre_of_Atmospheric_and_Ocean_Studies 
http://live.dbpedia.org/page/Vivek_Kumar_Pandey 
https://allduniv.academia.edu/DrVivekKumarPandey/CurriculumVitae 
http://allduniv.ac.in/old/images/employees/Vivek_kumar_Pandey_KBCAOS.pdf 
http://alumni.iisc.ernet.in/profile/view/vivek-chandran-k-p 
https://en.wikipedia.org/wiki/Bishunpur-Jaunpur 
https://en.wikipedia.org/wiki/Ramapur 

कालचक्र=समयचक्र=धर्मचक्र=सुदर्शन चक्र (108 दाँतेदार किनारों वाला)~24 ऋषियों के चक्र=24 त्रिजीय तीलियों वाला अशोकचक्र के धारी/धारणकर्ता सच्चिदानंदघन लक्ष्मीनारायण/श्रीधर(विष्णु) के कालचक्र=समयचक्र=धर्मचक्र=सुदर्शन चक्र (108 दाँतेदार किनारों वाला)~24 ऋषियों के चक्र=24 त्रिजीय तीलियों वाला अशोकचक्र की रक्षा करता कोई और नहीं वरन स्वयं विष्णु के ईष्टदेव महादेव शिव हैं जिनके स्वयं के ईष्टदेव विष्णु है जो अपने में ही एक चक्रीय क्रम है। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||


कालचक्र=समयचक्र=धर्मचक्र=सुदर्शन चक्र (108 दाँतेदार किनारों वाला)~24 ऋषियों के चक्र=24 त्रिजीय तीलियों वाला अशोकचक्र के धारी/धारणकर्ता सच्चिदानंदघन लक्ष्मीनारायण/श्रीधर(विष्णु) के कालचक्र=समयचक्र=धर्मचक्र=सुदर्शन चक्र (108 दाँतेदार किनारों वाला)~24 ऋषियों के चक्र=24 त्रिजीय तीलियों वाला अशोकचक्र की रक्षा करता कोई और नहीं वरन स्वयं विष्णु के ईष्टदेव महादेव शिव हैं जिनके स्वयं के ईष्टदेव विष्णु है जो अपने में ही एक चक्रीय क्रम है। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| 

Tuesday, September 6, 2016

मेरे ऊपर और ज्ञान भाई के ऊपर अद्वितीय प्रेम की वर्षा करने वाले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के कार्यालयाध्यक्ष- मऊ के आदरणीय ए. के. राय साहब केवल आप ही नहीं आप की तर्ज पर मुझको (विवेक) को और ज्ञान भाई को बहुत से लोग सगे भाई-भाई कहते थे। और उसमे से बहुतों का तो याद नहीं पर भौतिकी विभाग में प्रत्र वाहक के रूप में आने वाले व्यक्ति ने कई लोगों के सामने पूंछा था तो फिर मेरा उत्तर था की हाँ भाई तो हैं ही ज्ञान मेरे पर सहोदर नहीं हुए तो क्या हुआ ? लेकिन ज्ञान में उस समय बहुत बचपना था जो काफी दिन रहा जबकि मैं कक्षा 5 मतलब 11 वर्ष से ही पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति अति संवेदनशील भले ही दूर रहता था और उस जिम्मेदारी को भी 15 वर्ष की अवस्था से निभाया कुल के मूल्यों का पूर्ण पालन करते हुए मतलब शिक्षा और सुविधा हेतु खेती नहीं बेची है कुल की मर्यादा तो दूर की बात है। फिर भी मैं किशी को आइना नहीं दिखा रहा पर आशा इतना अवश्य करता हूँ की शांतिमय, संतुलित और संयमित जीवन जीना चाहते हो तो कम से कम प्रगतिशील सच्चाई का पालन तो करो और इस प्रकार व्यवहारिक सत्य-जीवन जीने की कोशिस कीजिये समुचित क्षमता और आचरण में सर्वांगसम न होने पर भी प्रदर्शन और प्रचार के लिए किशी को प्रयोग करना उसके जीवन की भलाई के काम नहीं आता है। टिप्पणी: यहाँ के. बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र में उन लोगों भी अति बचपना देखा हूँ जो मेरी मेधा, प्रतिभा और दक्षता पर टिप्पणी करते रहते हैं और छोटे बच्चे और छोटे भाई जैसा व्यवहार किये तो मैं उनको अपना क्या मानू? >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

मेरे ऊपर और ज्ञान भाई के ऊपर अद्वितीय प्रेम की वर्षा करने वाले काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के कार्यालयाध्यक्ष- मऊ के आदरणीय ए. के. राय साहब केवल आप ही नहीं आप की तर्ज पर मुझको (विवेक) को और ज्ञान भाई को बहुत से लोग सगे भाई-भाई कहते थे। और उसमे से बहुतों का तो याद नहीं पर भौतिकी विभाग में प्रत्र वाहक के रूप में आने वाले व्यक्ति ने कई लोगों के सामने पूंछा था तो फिर मेरा उत्तर था की हाँ भाई तो हैं ही ज्ञान मेरे पर सहोदर नहीं हुए तो क्या हुआ ? लेकिन ज्ञान में उस समय बहुत बचपना था जो काफी दिन रहा जबकि मैं कक्षा 5 मतलब 11 वर्ष से ही पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति अति संवेदनशील भले ही दूर रहता था और उस जिम्मेदारी को भी 15 वर्ष की अवस्था से निभाया कुल के मूल्यों का पूर्ण पालन करते हुए मतलब शिक्षा और सुविधा हेतु खेती नहीं बेची है कुल की मर्यादा तो दूर की बात है। फिर भी मैं किशी को आइना नहीं दिखा रहा पर आशा इतना अवश्य करता हूँ की शांतिमय, संतुलित और संयमित जीवन जीना चाहते हो तो कम से कम प्रगतिशील सच्चाई का पालन तो करो और इस प्रकार व्यवहारिक सत्य-जीवन जीने की कोशिस कीजिये समुचित क्षमता और आचरण में सर्वांगसम न होने पर भी प्रदर्शन और प्रचार के लिए किशी को प्रयोग करना उसके जीवन की भलाई के काम नहीं आता है। टिप्पणी: यहाँ के. बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागरीय अध्ध्य्यन केंद्र में उन लोगों भी अति बचपना देखा हूँ जो मेरी मेधा, प्रतिभा और दक्षता पर टिप्पणी करते रहते हैं और छोटे बच्चे और छोटे भाई जैसा व्यवहार किये तो मैं उनको अपना क्या मानू? >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

एक योग्य गृहस्थ और वैष्णवमति के लिए बहुत पुरानी लोकोक्ति है जो व्यवहारिक तो है ही उसके साथ ही साथ आध्यात्मिक माने में सार्थक भी रही वह यह है "धन देखिये जात तो शीघ्र लीजिये बाँट"। इसका सफल प्रयोग है इस वेबपेज में बध्ध शीर्षक और उसकी उपयोगिता जिसमें यह लोकोक्ति 2009 से प्रयोग में लाते हुए इस केदारेश्वर बनर्जी एवं महासागरीय अध्धययन केंद्र को शैक्षणिक और सामाजिक सहमति के साथ ही साथ वैधानिक विधी द्वारा भी इसे प्रयागराज विश्विद्यालय का स्थायी और अटल केंद्र बना दिया गया उच्चतम अनुभवशील व्यक्तियों द्वारा:>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

एक योग्य गृहस्थ और वैष्णवमति के लिए बहुत पुरानी लोकोक्ति है जो व्यवहारिक तो है ही उसके साथ ही साथ आध्यात्मिक माने में सार्थक भी रही वह यह है "धन देखिये जात तो शीघ्र लीजिये बाँट"। इसका सफल प्रयोग है इस वेबपेज में बध्ध शीर्षक और उसकी उपयोगिता जिसमें यह लोकोक्ति 2009 से प्रयोग में लाते हुए इस केदारेश्वर बनर्जी एवं महासागरीय अध्धययन केंद्र को शैक्षणिक और सामाजिक सहमति के साथ ही साथ वैधानिक विधी द्वारा भी इसे प्रयागराज विश्विद्यालय का स्थायी और अटल केंद्र बना दिया गया उच्चतम अनुभवशील व्यक्तियों द्वारा:>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||
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Monday, September 5, 2016

मेरे आज के दिन विश्वगुरु जौनपुर/जमदग्निपुर को श्रद्धायुक्त नमन।>>>>>>>मेरे गुरु और मेरे माई-बाप आप को ज्ञात हो गया है की सृष्टि=सीता=राधा=जगतजननी (जगमाता=जगदम्बा=दुर्गा(सरस्वती+ लक्ष्मी+सती:गिरिजा:उमा:अपर्णा:पार्वती:गौरी)की सामाजिक स्वरूपा ) अभी अस्तित्व में है तो फिर मेरे सम्बन्ध में ही एकदूसरे के लिए बने पक्ष व् विपक्ष जानलीजिये की 16 वर्ष ही नहीं कम से कम 18 या 20 वर्ष से जो यह खोज थी की संसार का मूलबिंदु (मानवता मूल श्रोत) प्रयाग और काशी है की नहीं तो अब यह पूर्ण रूपेण सत्य साबित चुका है। और अगर यह साबित हो ही चुका है तो फिर यह बता दूं की मैं तेजस्वी अत्रि और परमसती अनुसूइया पुत्र कृष्णात्रेय (दुर्वाशा) की प्रथम भूमि आज़मगढ़ (भरद्वाज का निवास प्रयागराज ही दुर्वाशा का द्वितीय निवास है) का पैतृक निवासी मैं स्वयं अपने गुरु जौनपुर/जमदग्निपुर के सामने ही झुका था मतलब मातृक्षेत्र मतलब अपनी माता के सामने झुका था मतलब मैंने उसी गुरु (आध्यात्मिक व् भौतिक ज्ञान और सामाजिक रूप स्वरूप के लिए गुरु)) और माता (पारिवारिक और सामाजिक स्वरूप के लिए गुरु) के वास्ते स्वयं मैं माँ सरस्वती के आगे झुका था और इस प्रकार स्वयं सृष्टि=सीता=राधा= जगतजननी((जगमाता=जगदम्बा= दुर्गा(सरस्वती+लक्ष्मी +सती: गिरिजा:उमा: अपर्णा: पार्वती:गौरी)) की ही रक्षा हेतु ज्ञान, वैभव और शक्ति स्वरूपा इसी सृष्टि=सीता=राधा= जगतजननी((जगमाता=जगदम्बा= दुर्गा(सरस्वती+लक्ष्मी +सती: गिरिजा:उमा:अपर्णा :पार्वती:गौरी)) सामने झुका था पर स्वयं सृष्टि को यदि मेरा कार्य और उस हेतु लगन पूर्ण और अद्वितीय लगा हो तो मैं फिर यह भी मैं स्वयं बता दूं की मैं स्वयं अपने आगे भी झुका था जैसे श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान समेत पूरा रघुवंश/इक्षाकुवंश/सूर्यवंश/आदित्यवंश/कश्यप गोत्र झुका था मतलब सम्पूर्ण मानवता झुकी थी मतलब मैंने स्वयं अपने को उसी सृष्टि में विलीन कर लिया जिसको नवजीवन दिया और फिर यह मेरा आगे का स्वरुप है जो कभी विलीन होकर भी विलीन नही होता है और आगे आने वाली मानव पीढी हेतु समर्पित है। अतः आज के दिन विश्वगुरु जौनपुर/जमदग्निपुर को श्रद्धायुक्त नमन।Note---- The area of the India which is under the influence of son of Jamadagni Rishi i.e. Lord Parashuram i.e. under the influence of Keral, Konkan, Goa, Vidarbh, Marathavada, Gurjar, Uttar Pradesh itself and Uttranchal/Uttarakand to North East Himalayan Belt, Orrish-Telangana(Andhra) belt/Mahendra Giri:Mountain area effected belt (Where Parashuram Disapeared in search of peace on the Direction of Kahsyap rishi after kashyap's oath to protect the Brahmins) are the evidence of enriched Gurukul System framed by the personality/ personalities who was hiself a mobiled Gurukul i.e. the son of Jamadagni Rishi i.e. son of land of Jamadagnipur/Jaunpur who was allowed to leave this land forever on the order of his Grand Father Bhrigu Rishi due to a bloody revenging activity by Parashuram and this Lord Vishnu incarnation never entered here till today. This is one of the another principle attribute of highest Tyagsheel/forgiving deed (main deed of Brahminism) Rishi culture in which Dadhichi like divine personality has taken birth. Thus in face to face teaching this land is World Guru althogh we never denie that Lord Ram (Guru by his deed and land mark) and Lord Krishna (Guru by his 16 action) are themself Paramguru quivalent to Lord Vishnu (Guru Vrahaspati in Tridev=Trimurt)|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

मेरे आज के दिन विश्वगुरु जौनपुर/जमदग्निपुर को श्रद्धायुक्त नमन।>>>>>>>मेरे गुरु और मेरे माई-बाप आप को ज्ञात हो गया है की सृष्टि=सीता=राधा=जगतजननी (जगमाता=जगदम्बा=दुर्गा(सरस्वती+ लक्ष्मी+सती:गिरिजा:उमा:अपर्णा:पार्वती:गौरी)की सामाजिक स्वरूपा ) अभी अस्तित्व में है तो फिर मेरे सम्बन्ध में ही एकदूसरे के लिए बने पक्ष व् विपक्ष जानलीजिये की 16 वर्ष ही नहीं कम से कम 18 या 20 वर्ष से जो यह खोज थी की संसार का मूलबिंदु (मानवता मूल श्रोत) प्रयाग और काशी है की नहीं तो अब यह पूर्ण रूपेण सत्य साबित चुका है। और अगर यह साबित हो ही चुका है तो फिर यह बता दूं की मैं तेजस्वी अत्रि और परमसती अनुसूइया पुत्र कृष्णात्रेय (दुर्वाशा) की प्रथम भूमि आज़मगढ़ (भरद्वाज का निवास प्रयागराज ही दुर्वाशा का द्वितीय निवास है) का पैतृक निवासी मैं स्वयं अपने गुरु जौनपुर/जमदग्निपुर के सामने ही झुका था मतलब मातृक्षेत्र मतलब अपनी माता के सामने झुका था मतलब मैंने उसी गुरु (आध्यात्मिक व् भौतिक ज्ञान और सामाजिक रूप स्वरूप के लिए गुरु)) और माता (पारिवारिक और सामाजिक स्वरूप के लिए गुरु) के वास्ते स्वयं मैं माँ सरस्वती के आगे झुका था और इस प्रकार स्वयं सृष्टि=सीता=राधा= जगतजननी((जगमाता=जगदम्बा= दुर्गा(सरस्वती+लक्ष्मी +सती: गिरिजा:उमा: अपर्णा: पार्वती:गौरी)) की ही रक्षा हेतु ज्ञान, वैभव और शक्ति स्वरूपा इसी सृष्टि=सीता=राधा= जगतजननी((जगमाता=जगदम्बा= दुर्गा(सरस्वती+लक्ष्मी +सती: गिरिजा:उमा:अपर्णा :पार्वती:गौरी)) सामने झुका था पर स्वयं सृष्टि को यदि मेरा कार्य और उस हेतु लगन पूर्ण और अद्वितीय लगा हो तो मैं फिर यह भी मैं स्वयं बता दूं की मैं स्वयं अपने आगे भी झुका था जैसे श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान समेत पूरा रघुवंश/इक्षाकुवंश/सूर्यवंश/आदित्यवंश/कश्यप गोत्र झुका था मतलब सम्पूर्ण मानवता झुकी थी मतलब मैंने स्वयं अपने को उसी सृष्टि में विलीन कर लिया जिसको नवजीवन दिया और फिर यह मेरा आगे का स्वरुप है जो कभी विलीन होकर भी विलीन नही होता है और आगे आने वाली मानव पीढी हेतु समर्पित है। अतः आज के दिन विश्वगुरु जौनपुर/जमदग्निपुर को श्रद्धायुक्त नमन।Note---- The area of the India which is under the influence of son of Jamadagni Rishi i.e. Lord Parashuram i.e. under the influence of Keral, Konkan, Goa, Vidarbh, Marathavada, Gurjar, Uttar Pradesh itself and Uttranchal/Uttarakand to North East Himalayan Belt, Orrish-Telangana(Andhra) belt/Mahendra Giri:Mountain area effected belt (Where Parashuram Disapeared in search of peace on the Direction of Kahsyap rishi after kashyap's oath to protect the Brahmins) are the evidence of enriched Gurukul System framed by the personality/ personalities who was hiself a mobiled Gurukul i.e. the son of Jamadagni Rishi i.e. son of land of Jamadagnipur/Jaunpur who was allowed to leave this land forever on the order of his Grand Father Bhrigu Rishi due to a bloody revenging activity by Parashuram and this Lord Vishnu incarnation never entered here till today. This is one of the another principle attribute of highest Tyagsheel/forgiving deed (main deed of Brahminism) Rishi culture in which Dadhichi like divine personality has taken birth. Thus in face to face teaching this land is World Guru althogh we never denie that Lord Ram (Guru by his deed and land mark) and Lord Krishna (Guru by his 16 action) are themself Paramguru quivalent to Lord Vishnu (Guru Vrahaspati in Tridev=Trimurt)|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)


१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|


२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|


3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।


4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.


5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Near about 100000 (1 Lac) visits of my blog "Vivekanand and Modern Tradition" within 3 years(2013-2016) from all around the world in which India is on top and United States of America in on the second top position in visiting this blog. (Note-Actually the post in this blog is repeated post on my facebook which have already so many visits and also it accumulates the matter on the Orkut at Indian Institute of Science Bangalore (2007-2009) and its same version posted on this blog till May, 2013.)>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

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 (Note-Actually the post in this blog is repeated post on my facebook which have already so many visits and also it accumulates the matter on the Orkut at Indian Institute of Science Bangalore (2007-2009) and its same version posted on this blog till May, 2013.)>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Sunday, September 4, 2016

आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
गुरुर  ब्रह्मा गुरुर  विष्णु
गुरुर देवो महेश्वरा
गुरुर  शाक्षात परब्रम्ह((ब्रह्मा+विष्णु+महादेव:शिव)/ब्रह्म
तस्मै श्री गुरुवे नमः|>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Saturday, September 3, 2016

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Thursday, September 1, 2016

I do not leave any possible ways for escaping others but needs consensus of the peoples. I am still waiting for consensus and also evaluating those who are against my Judgement represented here:

I do not leave any possible ways for escaping others but needs consensus of the peoples. I am still waiting for consensus and also evaluating those who are against my Judgement represented here: http://research.omicsgroup.org/index.php/K._Banerjee_Centre_of_Atmospheric_and_Ocean_Studies
Vivek_Kumar_Pandey
http://allduniv.ac.in/old/images/employees/Vivek_kumar_Pandey_KBCAOS.pdf
Dr. Vivek Kumar pandey
Dr. Vivek Kumar Pandey as Indian Institute of Science Alumni

 >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सम्पूर्ण संसार जान और समझ ले की विगत दो दशक में सम्पूर्ण वैश्विकरन में मैं हरिशंकर=शिव प्रताप+विष्णु प्रताप भी था क्योंकि शिव का प्रताप बिना विष्णु के और विष्णु प्रताप मतलब विष्णु का प्रताप बिना शिव के संभव ही नहीं मतलब दोनों दूसरे के इष्टदेव हैं और इस प्रकार मैं ओमप्रकाश और इब्राहिम दोनों था मतलब सम्पूर्ण सनातन हिन्दू (हिन्दू व् उनके संगत + इस्लाम व् संगत+ईसाइयत व् उनके संगत) था और इस सम्पूर्ण विश्व जीवन का सूत्रधार था जिसकी युक्ति गुरुदेव ब्रह्मा की थी मतलब मैं प्रदीप:सूर्यकांत:रविकांत/ सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र विवेक/राम(महाशिव)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन था। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सम्पूर्ण संसार जान और समझ ले की विगत दो दशक में सम्पूर्ण वैश्विकरन में मैं हरिशंकर=शिव प्रताप+विष्णु प्रताप भी था क्योंकि शिव का प्रताप बिना विष्णु के और विष्णु प्रताप मतलब विष्णु का प्रताप बिना शिव के संभव ही नहीं मतलब दोनों दूसरे के इष्टदेव हैं और इस प्रकार मैं ओमप्रकाश और इब्राहिम दोनों था मतलब सम्पूर्ण सनातन हिन्दू (हिन्दू व् उनके संगत + इस्लाम व् संगत+ईसाइयत व् उनके संगत) था और इस सम्पूर्ण विश्व जीवन का सूत्रधार था जिसकी युक्ति गुरुदेव ब्रह्मा की थी मतलब मैं प्रदीप:सूर्यकांत:रविकांत/ सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र विवेक/राम(महाशिव)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन था। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

PARAMPITA PARAMESWAR: परमपिता परमेश्वर (डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय:शिव): केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या:------विश्व का प्रथम जीव जो अथाह तरल के बीच कीचड के रूप में विश्व के प्रथम स्थल काशी को स्वयं का आधार लिए हुए प्रकट हो विश्वाधार बना वह थे केदारेश्वर जिनका रूपांतरण हुआ महामृत्युंजय के रूप में और अंतिम स्वरुप विश्वेश्वर=विश्वनाथ को प्राप्त हुआ तो इस प्रकार उसके इन तीन क्रम में केदारेश्वर ही प्रथम शिव=शंकर स्वरुप हुआ और उस प्रथम स्वरुप को ही आदिशंकर या आद्यशंकर कहते हैं या सामान्यतया प्रथम त्रिदेवी सरस्वती की तरह इनको संक्षिप्त में पुरुषों में आद्या कह काम चला लेते हैं जिस तरह से नारी जगत में सरस्वती को आद्या कह काम चलाते है या संक्षिप्त संबोधित करते हैं। अगर कश्यप के वंसज इंद्र थे तो पंचभूतों के स्वामी शिव=शंकर को महेंद्र कहते हैं क्योंकि इंद्रा पञ्च भूतों के पांच देवताओं का केवल नेतृत्व करते हैं न की वे पञ्च देवताओं के स्वामी हैं तो इस प्रकार इंद्र और विश्वकर्मा के समकक्ष ही कश्यप के वंसज ये पंचदेव: वरुण, ज्वाला, धरणी/थल, अनिल और पवन/समीर भी हुए जिनका नेतृत्व मात्र ही इंद्र के पास है जबकी ये जिन पञ्च भूत देवता हैं उस पञ्च भूत के स्वामी महादेव=शिव=शंकर=महा इंद्र =महेंद्र ही हैं और इस प्रकार इनके पञ्च देवता के वास्तविक स्वामी भी महादेव=शिव=शंकर=महा इंद्र =महेंद्र ही हैं जिनका सबसे प्रिय और विनम्रता भरा और कर्णप्रिय नाम शिव ही है। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

PARAMPITA PARAMESWAR: परमपिता परमेश्वर (डॉ. प्रेमचंद पाण्डेय:शिव): केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या:------विश्व का प्रथम जीव जो अथाह तरल के बीच कीचड के रूप में विश्व के प्रथम स्थल काशी को स्वयं का आधार लिए हुए प्रकट हो विश्वाधार बना वह थे केदारेश्वर जिनका रूपांतरण हुआ महामृत्युंजय के रूप में और अंतिम स्वरुप विश्वेश्वर=विश्वनाथ को प्राप्त हुआ तो इस प्रकार उसके इन तीन क्रम में केदारेश्वर ही प्रथम शिव=शंकर स्वरुप हुआ और उस प्रथम स्वरुप को ही आदिशंकर या आद्यशंकर कहते हैं या सामान्यतया प्रथम त्रिदेवी सरस्वती की तरह इनको संक्षिप्त में पुरुषों में आद्या कह काम चला लेते हैं जिस तरह से नारी जगत में सरस्वती को आद्या कह काम चलाते है या संक्षिप्त  संबोधित करते हैं।  अगर कश्यप के वंसज इंद्र थे तो पंचभूतों के स्वामी शिव=शंकर को महेंद्र कहते हैं क्योंकि इंद्रा पञ्च भूतों के पांच देवताओं का केवल नेतृत्व करते हैं न की वे पञ्च देवताओं के स्वामी हैं तो इस प्रकार इंद्र और विश्वकर्मा के समकक्ष ही कश्यप के वंसज ये पंचदेव: वरुण, ज्वाला, धरणी/थल, अनिल और पवन/समीर भी हुए जिनका नेतृत्व मात्र ही इंद्र के पास है जबकी ये जिन पञ्च भूत देवता हैं उस पञ्च भूत के स्वामी महादेव=शिव=शंकर=महा इंद्र =महेंद्र ही हैं और इस प्रकार इनके पञ्च देवता के वास्तविक स्वामी भी महादेव=शिव=शंकर=महा इंद्र =महेंद्र ही हैं जिनका सबसे प्रिय और विनम्रता भरा और कर्णप्रिय नाम शिव ही है।   >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

PARAMGURU PARAMPITA PARAMESHWAR (SHRADHDHEY SHRI SHRIDHAR MISHRA=VISHNU=GURU VRAHASPATI IN TRIDEV): केवल भारतभूमि नहीं इस धरती माँ पर मानवता संचित और अबाधगति से चलती रहे उसके लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष किस जाती/धर्म के मानव का महामानव के रूप में नमन और अभिवादन नहीं किया हूँ तो किसी के सामने झुकने में मुझे क्या रखा है? लेकिन तथ्य जो समाज हित, रास्त्र हिट और विश्व मानवता के हित में नहीं हो उसके लिए किसी व्यक्ति, रास्त्र, समाज या स्वयं अपने सामने भी नहीं झुकना चाहिए। झुकना उस गुरु के सामने चाहिए जो तथ्य से अवगत हो मानवता के अभीष्ट हित मतलब समाज हित, रास्त्र हिट और विश्व मानवता के हित उस तथ्य का अभीष्टतम प्रयोग कर सके। पर अगर उस व्यक्ति का ऐसा गुरु स्वयं इस्वर हो गया तो इस्वर और गुरु में कोई अंतर रहा। तो वह गुरु विश्व व्यापक हुआ की नहीं? >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

PARAMGURU PARAMPITA PARAMESHWAR (SHRADHDHEY SHRI SHRIDHAR MISHRA=VISHNU=GURU VRAHASPATI IN TRIDEV): केवल भारतभूमि नहीं इस धरती माँ पर मानवता संचित और अबाधगति से चलती रहे उसके लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष किस जाती/धर्म के मानव का महामानव के रूप में नमन और अभिवादन नहीं किया हूँ तो किसी के सामने झुकने में मुझे क्या रखा है? लेकिन तथ्य जो समाज हित, रास्त्र हिट और विश्व मानवता के हित में नहीं हो उसके लिए किसी व्यक्ति, रास्त्र, समाज या स्वयं अपने सामने भी नहीं झुकना चाहिए। झुकना उस गुरु के सामने चाहिए जो तथ्य से अवगत हो मानवता के अभीष्ट हित मतलब समाज हित, रास्त्र हिट और विश्व मानवता के हित उस तथ्य का अभीष्टतम प्रयोग कर सके। पर अगर उस व्यक्ति का ऐसा गुरु स्वयं इस्वर हो गया तो इस्वर और गुरु में कोई अंतर रहा। तो वह गुरु विश्व व्यापक हुआ की नहीं? >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

अगर मेरी मनोभावनाएं पावन और निर्मल है तो हृषिकेश(ऋषिकेश)=श्रीकृष्ण भाई दुनिया का हर विवेकानंद (विवेक+आनंद) कितनी भी ऊंचाइयां क्यों न हांशिल कर लिया हो लेकिन उसका स्थान रामानंद के कदमों में ही रहता है। तो हे भ्राता हृषिकेश(ऋषिकेश)=श्रीकृष्ण मैंने तो शिव से श्रीकृष्ण होते हुए तो राम के रिक्त स्थान को भरा है तो इस प्रकार मैं स्वयं शिवरामकृष्ण /श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम (महाशिव)=त्रिलोचन=त्रयम्बक=त्रिनेत्र उस रामानंद कुल का स्वामि भक्त और भूरिभूरि प्रसंसक और स्वयं उनका संरक्षक हूँ जिनके कुल का सानिध्य, संरक्षण और पोषण मैंने 11 वर्ष प्रत्यक्ष और 40 वर्ष की अवश्था तक मतलब अभी तक प्रत्यक्ष प्राप्त करता रहा हूँ। धन्य है वह भूमि जिसकी जितनी भी प्रसंशा जाय तो कम है जिस रामानंद कुल की मूल भूमि पर जन्म लेने मात्र की इक्षा मात्र युगों-युगों से शेष है। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

अगर मेरी मनोभावनाएं पावन और निर्मल है तो हृषिकेश(ऋषिकेश)=श्रीकृष्ण भाई दुनिया का हर विवेकानंद (विवेक+आनंद) कितनी भी ऊंचाइयां क्यों न हांशिल कर लिया हो लेकिन उसका स्थान रामानंद के कदमों में ही रहता है। तो हे भ्राता हृषिकेश(ऋषिकेश)=श्रीकृष्ण मैंने तो शिव से श्रीकृष्ण होते हुए तो राम के रिक्त स्थान को भरा है तो इस प्रकार मैं स्वयं शिवरामकृष्ण /श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम (महाशिव)=त्रिलोचन=त्रयम्बक=त्रिनेत्र उस रामानंद कुल का स्वामि भक्त और भूरिभूरि प्रसंसक और स्वयं उनका संरक्षक हूँ जिनके कुल का सानिध्य, संरक्षण और पोषण मैंने 11 वर्ष प्रत्यक्ष और 40 वर्ष की अवश्था तक मतलब अभी तक प्रत्यक्ष प्राप्त करता रहा हूँ। धन्य है वह भूमि जिसकी जितनी भी प्रसंशा जाय तो कम है जिस रामानंद कुल की मूल भूमि पर जन्म लेने मात्र की इक्षा मात्र युगों-युगों से शेष है। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

काशी के सन्दर्भ में जौनपुर/जमदग्निपुर का महत्त्व शिव और शिवा:सती:उमा:अपर्णा :गिरिजा:पार्वती:गौरी के तीसरे नेत्र त्रिनेत्र/त्रिलोचन/त्रयम्बक/विवेक से ही है जो शिव:देवादिदेव महादेव और शिवा की भी सुरक्षा की आतंरिक शक्ति है। मतलब काशी की आतंरिक सुरक्षा शक्ति का मूल केंद्र भी जौनपुर/जमदग्निपुर (त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र स्थल) ही है। >>>>>>>>>>>एक ब्राह्मण को या किशी प्रबुद्ध को जाति मानने की क्या जरूरत अगर परिवार, समाज, देश/राज्य और अंतरास्ट्रीय परिवार बिना जाति/धर्म माने चल सकता और पारिवारिक संस्कार व् पारिवारिक रीति- रिवाज , संस्कृति आचरण और कर्म सबके आधार पर ऊंचा और नीचा की परिकल्पना के बिना निम्नमार्गी समाज को संतुलित किया जा सकता? मैं सब कुछ सामाजिक सुसंचालन के लिए मानता हूँ स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक के संचालन को ध्यान में रखकर पर खेतों में पाटा चलाने तर्ज पर समाज चलाना है तो चलाकर दिखाइए सामाजिक न्याय के पैरोकार और वर्तमान संवैधानिक व्यस्था के उस दौर में भी पोषक जब वैश्वीकरण/भूमंडलीकरक हो चुका है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो इस संसार से सभी वास्तविक ब्राह्मण/सज्जन लोग मिट जाएंगे और उनके साथ यह संसार भी मिट जाएगा तो कम से कम ग्रामीण क्षेत्र के ब्राह्मणों/सज्जनों के संरक्षण के बारे में सोचो मैं तो पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए क्षत्रिय और वैश्य बन लिया जो उदहारण है की हर सनातन ब्राह्मण भी चाहे तो ऐसा कर अपना जीवन जी सकता है पर तब ब्राह्मण बने रहने का कस्ट कौन झेलेगा और जब ब्राह्मण ही नहीं तो तो मानवता का मूल बीज ही नहीं रहेगा और जब मानवता का मूल बीज जब नहीं तो संसार पुनः उसी परंब्रह्न/ब्रह्म में समाहित होगा जिसे मुझे ब्रह्मास्त्र बना बचा लिया गया था आज से ठीक 15 वर्ष पूर्व। >>>>>>>>>>>>>>सांसारिक रूप से प्रयागराज में नाना के नेतृत्व में काम करने आया था बड़े भाई और जीजा तथा एक मामा के दिशानिर्देश पर कार्यकिया और अब एक मामा के नेतृत्व के छात्रावास अधीक्षक व् विश्विद्यालय सह कुलानुशासक हूँ तो जिस अब सामाजिक न्याय और संविधान की मैं रक्षा किया जीवन भर और उसने उसके बाद उसकी रक्षा करने की कीमत पर उलझाया स्वयं अपने में जब की मैं बता चुका हूँ की मैं सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म बन चुका हूँ मतलब शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हो चुका हूँ पर विष्णु और ब्रह्मा के अधिकार का अधिग्रहण कभी भी नहीं किया हूँ और न ब्राह्मण धर्म कभी भी छोड़ा हूँ मतलब व्यवहारिक रूप से पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए ही पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य हो चुका हूँ तो अब वह सामाजिक न्याय के करता धरता और संविधान निर्माता व् उसके पालनहार स्वयम प्रभावित हों मेरे तथ्यों से। कारण स्पस्ट है >>>>>>>>>>>>>>>>>जौनपुर के एक भाई ने मातृ पक्ष पर प्रकाश डालने को कहा है: तो सबसे पहले हम यह बता दे की ""बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव"" का विवाह जिस दादी मतलब पाँचों गाँवों की कुल माता से हुआ था वे जौनपुर/जमदग्निपुर से ही थी तो हम सभी पांच + एक मूल गाँव ओरिल के समकुलीन वंसजों के गाँव का मातृकुल जौनपुर/जमदग्निपुर ही है ((भृगु ऋषी जिनकी मूल भूमि बलिया है के पुत्र जमदग्निऋषि की भूमि मतलब इस संसार में वह विष्णु अवतार जो ब्रह्मक्षत्रिय हो सबसे बड़ा और विस्तृत क्षेत्र का गुरु कहलाया उस परशुराम जो देवादिदेव महादेव के सबसे प्रिय शिष्य थे के पिता की कर्म भूमि मतलब जिस परशुराम को क्षत्रिय कुल द्रोही हो जाने पर भृगु ऋषी द्वारा जौनपुर/जमदग्निपुर निकाला हुआ था और कभी वापस जौनपुर/जमदग्निपुर नहीं आने को कहा गया था और वे आज तक वहां नहीं आये पर केरल से लेकर कोंकण, गोवा, मराठवाड़ा, गुजरात होते हुए उत्तराँचल होते हुए हिमालय श्रृंखला पकड़े पूर्वोत्तर भारत और ओडिशा/आंध्र/तेलंगाना के महेंद्र गिरी/पर्वत तक के क्षेत्र के गुरु बन शैक्षणिक व् सांस्कृतिक संरक्षण व् संवर्धन किये यह जरूर है की अपने क्रोध पर नियंत्रण न सकने की वजह से सशरीर परमब्रह (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) का परमपद श्रीराम (आचरण द्वारा) और श्रीकृष्ण (16 कलाओं द्वारा) का पद प्राप्त नहीं कर सके जो भगवान् विष्णु (प्रथम गुरु वृहस्पति या त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति का परमपद) की तरह जगत गुरु कहे जाते हैं फिर भी परशुराम ने अद्वितीय सघन विश्वाधारीय वैयक्तिक उपस्थिति द्वारा में देश व्यापी शैक्षिक व् सांस्कृतिक सम्वर्धन जरूर किया जो है))। यही नहीं मेरे स्वयं के बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/..../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल की 80% माताएं जौनपुर/जमदग्निपुर की ही हैं जिसमे से वरिष्ठ माताओं में प्रमुख हैं मेरे स्वयं की माता का मायका और मेरी ही दादी का ननिहाल बिशुनपुर (पट्टीनरेंद्रपुर/शाहगंज क्षेत्र) और घराने की एक वरिष्ठ दिवंगत दादी का मायका जगदीशपुर (पट्टीनरेंद्रपुर /शाहगंज क्षेत्र) और दूसरी प्रमुख वर्तमान दिवंगत दादी का मायका रामनगर (पट्टीनरेंद्रपुर /शाहगंज क्षेत्र) और कई वर्तमान माताओं का भी मायका जौनपुर ही है। >>>>>>>>> अब आती हैं बात मेरी माता की तो मेरी माता रामानंद/.../रामप्रसाद/रमानाथ(विष्णु) कुल की सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी मिश्रा ब्राह्मण (वर्तमान में पाण्डेय) और दादी सनातन रमाकांत(+लालता प्रसाद) कुल की वशिष्ठ गोत्रीय मिश्रा ब्राह्मण (मेरे कुल में आने के बाद पांडेय)। >>>>>>हिन्दू रीती में नाम की अपनी धार्मिक महिमा और महत्त्व है और इसी प्रकार मेरी स्वयं की माता का नाम पुष्पा है जिस नाम के अर्थ पर बहुत से लोगों को भ्रम होता है तो मैं उनका भ्रम दूर कर देता हूँ: पुष्प या कुसुम शब्द कह देने मात्र से नर व् मादा दोनों पुष्प का बोध होता है उसके लिए पुष्पा शब्द अलग से नहीं है पर पुष्पा का हिंदी साहित्य के अनुसार शाब्दिक अर्थ पुष्प पर आसीन देवी होता है अतएव इससे सरस्वती (ब्रह्मा), लक्ष्मी(विष्णु), गायत्री/सविता(सूर्य) व् दुर्गा का नौवा अवतार सिद्धदात्री देवी का बोध होता है जिनसे आशीर्वाद लिए बिना नौरात्रि की सिध्धी (फल) ही नहीं मिलता है। >>>>>>>और मेरी नानी का नाम है ब्रह्मादेवी जिसका शाब्दिक अर्थ है सरस्वती और मेरी सासु माँ सीधा नाम ही "सरस्वती" है तो अब मेरा सरस्वती नाम से क्या सम्बन्ध जन्म जन्मान्तर है यह अब आप स्वयं समझ सकते हैं। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

काशी के सन्दर्भ में जौनपुर/जमदग्निपुर का महत्त्व शिव और शिवा:सती:उमा:अपर्णा :गिरिजा:पार्वती:गौरी के तीसरे नेत्र त्रिनेत्र/त्रिलोचन/त्रयम्बक/विवेक से ही है जो शिव:देवादिदेव महादेव और शिवा की भी सुरक्षा की आतंरिक शक्ति है। मतलब काशी की आतंरिक सुरक्षा शक्ति का मूल केंद्र भी जौनपुर/जमदग्निपुर (त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र स्थल) ही है। >>>>>>>>>>>एक ब्राह्मण को या किशी प्रबुद्ध को जाति मानने की क्या जरूरत अगर परिवार, समाज, देश/राज्य और अंतरास्ट्रीय परिवार बिना जाति/धर्म माने चल सकता और पारिवारिक संस्कार व् पारिवारिक रीति- रिवाज , संस्कृति आचरण और कर्म सबके आधार पर ऊंचा और नीचा की परिकल्पना के बिना निम्नमार्गी समाज को संतुलित किया जा सकता? मैं सब कुछ सामाजिक सुसंचालन के लिए मानता हूँ स्थानीय से लेकर वैश्विक स्तर तक के संचालन को ध्यान में रखकर पर खेतों में पाटा चलाने तर्ज पर समाज चलाना है तो चलाकर दिखाइए सामाजिक न्याय के पैरोकार और वर्तमान संवैधानिक व्यस्था के उस दौर में भी पोषक जब वैश्वीकरण/भूमंडलीकरक हो चुका है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो इस संसार से सभी वास्तविक ब्राह्मण/सज्जन लोग मिट जाएंगे और उनके साथ यह संसार भी मिट जाएगा तो कम से कम ग्रामीण क्षेत्र के ब्राह्मणों/सज्जनों के संरक्षण के बारे में सोचो मैं तो पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए क्षत्रिय और वैश्य बन लिया जो उदहारण है की हर सनातन ब्राह्मण भी चाहे तो ऐसा कर अपना जीवन जी सकता है पर तब ब्राह्मण बने रहने का कस्ट कौन झेलेगा और जब ब्राह्मण ही नहीं तो तो मानवता का मूल बीज ही नहीं रहेगा और जब मानवता का मूल बीज जब नहीं तो संसार पुनः उसी परंब्रह्न/ब्रह्म में समाहित होगा जिसे मुझे ब्रह्मास्त्र बना बचा लिया गया था आज से ठीक 15 वर्ष पूर्व। >>>>>>>>>>>>>>सांसारिक रूप से प्रयागराज में नाना के नेतृत्व में काम करने आया था बड़े भाई और जीजा तथा एक मामा के दिशानिर्देश पर कार्यकिया और अब एक मामा के नेतृत्व के छात्रावास अधीक्षक व् विश्विद्यालय सह कुलानुशासक हूँ तो जिस अब सामाजिक न्याय और संविधान की मैं रक्षा किया जीवन भर और उसने उसके बाद उसकी रक्षा करने की कीमत पर उलझाया स्वयं अपने में जब की मैं बता चुका हूँ की मैं सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म बन चुका हूँ मतलब शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हो चुका हूँ पर विष्णु और ब्रह्मा के अधिकार का अधिग्रहण कभी भी नहीं किया हूँ और न ब्राह्मण धर्म कभी भी छोड़ा हूँ मतलब व्यवहारिक रूप से पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए ही पूर्ण क्षत्रिय और पूर्ण वैश्य हो चुका हूँ तो अब वह सामाजिक न्याय के करता धरता और संविधान निर्माता व् उसके पालनहार स्वयम प्रभावित हों मेरे तथ्यों से। कारण स्पस्ट है >>>>>>>>>>>>>>>>>जौनपुर के एक भाई ने मातृ पक्ष पर प्रकाश डालने को कहा है: तो सबसे पहले हम यह बता दे की ""बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव"" का विवाह जिस दादी मतलब पाँचों गाँवों की कुल माता से हुआ था वे जौनपुर/जमदग्निपुर से ही थी तो हम सभी पांच + एक मूल गाँव ओरिल के समकुलीन वंसजों के गाँव का मातृकुल जौनपुर/जमदग्निपुर ही है ((भृगु ऋषी जिनकी मूल भूमि बलिया है के पुत्र जमदग्निऋषि की भूमि मतलब इस संसार में वह विष्णु अवतार जो ब्रह्मक्षत्रिय हो सबसे बड़ा और विस्तृत क्षेत्र का गुरु कहलाया उस परशुराम जो देवादिदेव महादेव के सबसे प्रिय शिष्य थे के पिता की कर्म भूमि मतलब जिस परशुराम को क्षत्रिय कुल द्रोही हो जाने पर भृगु ऋषी द्वारा जौनपुर/जमदग्निपुर निकाला हुआ था और कभी वापस जौनपुर/जमदग्निपुर नहीं आने को कहा गया था और वे आज तक वहां नहीं आये पर केरल से लेकर कोंकण, गोवा, मराठवाड़ा, गुजरात होते हुए उत्तराँचल होते हुए हिमालय श्रृंखला पकड़े पूर्वोत्तर भारत और ओडिशा/आंध्र/तेलंगाना के महेंद्र गिरी/पर्वत तक के क्षेत्र के गुरु बन शैक्षणिक व् सांस्कृतिक संरक्षण व् संवर्धन किये यह जरूर है की अपने क्रोध पर नियंत्रण न सकने की वजह से सशरीर परमब्रह (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) का परमपद श्रीराम (आचरण द्वारा) और श्रीकृष्ण (16 कलाओं द्वारा) का पद प्राप्त नहीं कर सके जो भगवान् विष्णु (प्रथम गुरु वृहस्पति या त्रिदेवों में गुरु वृहस्पति का परमपद) की तरह जगत गुरु कहे जाते हैं फिर भी परशुराम ने अद्वितीय सघन विश्वाधारीय वैयक्तिक उपस्थिति द्वारा में देश व्यापी शैक्षिक व् सांस्कृतिक सम्वर्धन जरूर किया जो है))। यही नहीं मेरे स्वयं के बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/..../देवव्रत(गंगापुत्र) कुल की 80% माताएं जौनपुर/जमदग्निपुर की ही हैं जिसमे से वरिष्ठ माताओं में प्रमुख हैं मेरे स्वयं की माता का मायका और मेरी ही दादी का ननिहाल बिशुनपुर (पट्टीनरेंद्रपुर/शाहगंज क्षेत्र) और घराने की एक वरिष्ठ दिवंगत दादी का मायका जगदीशपुर (पट्टीनरेंद्रपुर /शाहगंज क्षेत्र) और दूसरी प्रमुख वर्तमान दिवंगत दादी का मायका रामनगर (पट्टीनरेंद्रपुर /शाहगंज क्षेत्र) और कई वर्तमान माताओं का भी मायका जौनपुर ही है। >>>>>>>>> अब आती हैं बात मेरी माता की तो मेरी माता रामानंद/.../रामप्रसाद/रमानाथ(विष्णु) कुल की सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी मिश्रा ब्राह्मण (वर्तमान में पाण्डेय) और दादी सनातन रमाकांत(+लालता प्रसाद) कुल की वशिष्ठ गोत्रीय मिश्रा ब्राह्मण (मेरे कुल में आने के बाद पांडेय)। >>>>>>हिन्दू रीती में नाम की अपनी धार्मिक महिमा और महत्त्व है और इसी प्रकार मेरी स्वयं की माता का नाम पुष्पा है जिस नाम के अर्थ पर बहुत से लोगों को भ्रम होता है तो मैं उनका भ्रम दूर कर देता हूँ: पुष्प या कुसुम शब्द कह देने मात्र से नर व् मादा दोनों पुष्प का बोध होता है उसके लिए पुष्पा शब्द अलग से नहीं है पर पुष्पा का हिंदी साहित्य के अनुसार शाब्दिक अर्थ पुष्प पर आसीन देवी होता है अतएव इससे सरस्वती (ब्रह्मा), लक्ष्मी(विष्णु), गायत्री/सविता(सूर्य) व् दुर्गा का नौवा अवतार सिद्धदात्री देवी का बोध होता है जिनसे आशीर्वाद लिए बिना नौरात्रि की सिध्धी (फल) ही नहीं मिलता है। >>>>>>>और मेरी नानी का नाम है ब्रह्मादेवी जिसका शाब्दिक अर्थ है सरस्वती और मेरी सासु माँ सीधा नाम ही "सरस्वती" है तो अब मेरा सरस्वती नाम से क्या सम्बन्ध जन्म जन्मान्तर है यह अब आप स्वयं समझ सकते हैं। >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।