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Monday, October 31, 2016

I contacted with the ministry with detail on 16-05-2006 and they accepted the correspondance and sanctionned near about 67/69 faculty positions on 29-05-2006:>>>>>> You feel dishonour by may be disorder in your seniority since 3/4 months but imagine about that person who is feeling these things by 8 years in position in the a centre having pemanancy based on the above said 67/69 faculty positions; and also in the house allottment preferences. Whose capacity of sacrifice and adjustment for a better humanity is larger one can easily imagine? Such persons ware south basd person or Kashmir (North) based person? Injustice from south initiated with me since 1998/1999 and was on extrem between 2001 to 2007 and their results are infront of the world people of the past and present world also. For doing juctice on any matter related with the other persons; the concerened judge should have perfect knowlege of that matter, person conceren and the conditions under which the things occurred; and when myself is only perfect person himself for that cases, then the full justice on myself should be from my side only, not from any others and that Justice is the "no one is elder, Superior, senior than me in this world" | But yes! I wants to obey the rule of society and therefore a least minimum fundamental and societally applicable truth about elderness, Superiority, seniorty on the postions in public issuse/conceren post should be maintain by the public, educational Institution or other Institutions including family (1st Institution). And Thus any of my Gurus, parents, elder brothers and sisteres are elder, superior and senior than me and even every true Brahmins are respectable for me. >>>>>>>हाँ मैं कश्मीरी मूल से हूँ पर उससे पहले जिस तरह इस सम्पूर्ण मानवता का मूल प्रयागराज है उसी तरह प्रयागराज मेरा भी प्रथम मूल है और कश्यप का वंसज होने के नाते इस प्रयागराज पर प्रथम अधिकार मेरा है और वह अधिकार मैंने कूर्मावतारियों से संघर्ष करके प्राप्त किया है। अतः वे धनबल, बुद्धिबल और बाहुबल से तिकडम रच रहे हैं और कुछ निरीह मूर्ख लोग उनका हथियार बन अपना अस्तित्व समाप्त करते चले जा रहे हैं मेरे विरोध में आने की वजह से। पर अब उन तथाकथित कूर्मावतारियों उनको मुझे प्रयागराज से भगाने से पहले अपना अस्तित्व समाप्त करना पडेगा मतलब मैं अब इस प्रयागराज से कही जाने वाला नहीं वरण पूर्ण अधिकार के साथ यही जन्म जन्मान्तर तक रहूँगा और शिव से संघर्षरत होते हुए आगे बढ़ त्रिदेव शक्ति को अर्जित कर पुनः ऋषि और अब मानव संस्कृति मतलब गोत्र संस्कृति में भी आ जाने पर उनको मुझे ब्रह्मा के प्रथम पुत्र के रूप में बर्दास्त करना ही पडेगा। वह दुनिया से सबसे अलग इकाई (परमऊर्जा निकाय/परमब्रह्म/ब्रह्म:ब्रह्मा+विष्णु+महेश एक इकाई स्वरुप में) जिसमे स्वयं यह दुनिया स्वयम समाहित है वह इकाई बन चुके व्यक्ति से स्वयं दुनिया का कोई कूर्मावतारी अलग अस्तित्व पा सकता है क्या? पर 3 से ज्यादा दसक से कूर्मावतारियों के शक्ति स्रोत तमिलनाडु और प्रयागराज से जो कूर्मावतारी खेल चल रहा था उसमे से तमिलनाडु के उस कूर्मावतारी ब्राह्मण जो विश्व का सबसे बड़ा कूर्मावतारी चेहरा था और ब्राह्मण था उसका उद्धार 2009 में किया जा चुका है और अब उसके बाद प्रयागराज के उस कूर्मावतारी हालांकि वह ब्राह्मण नहीं है /या ब्राह्मण हो ही नहीं सकता जाति/धर्म का है का अंत अब निश्चित हो सकता है उसी के कर्मों की वजह से अगर इस तरह से मेरा विरोध जारी रहा? आवास से लेकर पद मान तक के प्रथम और द्वितीय के खेल को और भी आगे बढ़ाते रहने की आदत उसकी पडी रही। अतः उसको हिदायत है की अब वह सुधर जाय अन्यथा कोई सत्ता व् सर्वोच्च महाशक्ति भी उस कूर्मावतारी स्रोत व् स्वयं कूर्मावतारियों का हित नहीं कर सकती है। विभाग/केंद्र से सायं/रात्रि 7/8 बजे घर जाते समय हर दस से पंद्रह दिन में एक दिन केवल एकतरफा यात्रा के दौरान ही सायकिल पंचर करने के राजनीती से उसने मेरे साथ अपनी राजनीतिक यात्रा प्रारम्भ की थी तो सायकिल पंचर करवाने और रेकी कर दुर्घटना ग्रस्त करवाने की राजनीती और अन्य तुच्छ राजनीती अपनी वापस ले लीजिये अन्यथा ईस्वरीय दंड भुगतने को तैयार रहिये? मैं मूर्खों को दण्ड नहीं देता वरन ऐसे ही कूर्मावतारी नेतृत्व को दण्ड देता हूँ और आज तक के मानवता इतिहास का स्वयं सबसे बड़ा वास्तविक कूर्मावतारी भी मैं ही हूँ कोई और नहीं पर मैं काला नहीं हुआ उस कूर्मावतारी विष्णु के तरह क्योंकि मई त्रिदेव शक्ति स्वरुप में था और त्रिशक्ति मुझमे हे समाहित हो सकी हैं और अल्प विनास से ही सब कुछ नियंत्रित हो गया हो और तांडव नृत्य न हुआ हो। बहुत से अल्पज्ञानी राजनैतिक सत्तासीन व्यक्ति/व्यक्ति समूह व् बहुत बड़ा संगठन व् राजनैतिक दल/पार्टी वाले जानते हैं की सदियों से कूर्मावतारियों के साथ अन्याय हुआ पर अब अब वही बताएं की जो लोग मेरे साथ अन्याय कर सकते हैं उनके साथ अन्याय कौन कर सकता है? मैं तो आज तक इस प्रयागराज में कूर्मावतारियों का ऐसा शासन पा रहा हूँ जो कश्यप ऋषि को ही बहिस्त्कृत कर उस भरद्वाज ऋषी को प्रतिष्ठित करते हैं जिनसे वे अपना उल्लू सदा से सीधा करते रहे हैं इस विश्व मानवता के केंद्र पर और अपना एक छत्र राज्य इस प्रयागराज और सम्पूर्ण भारत में कर रहे हैं अंदर से। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

I contacted with the ministry with detail on 16-05-2006 and they accepted the correspondance and sanctionned near about 67/69 faculty positions on 29-05-2006:>>>>>> You feel dishonour by may be disorder in your seniority since 3/4 months but imagine about that person who is feeling these things by 8 years in position in the a centre having pemanancy based on the above said 67/69 faculty positions; and also in the house allottment preferences. Whose capacity of sacrifice and adjustment for a better humanity is larger one can easily imagine? Such persons ware south basd person or Kashmir (North) based person? Injustice from south initiated with me since 1998/1999 and was on extrem between 2001 to 2007 and their results are infront of the world people of the past and present world also. For doing juctice on any matter related with the other persons; the concerened judge should have perfect knowlege of that matter, person conceren and the conditions under which the things occurred; and when myself is only perfect person himself for that cases, then the full justice on myself should be from my side only, not from any others and that Justice is the "no one is elder, Superior, senior than me in this world" | But yes! I wants to obey the rule of society and therefore a least minimum fundamental and societally applicable truth about elderness, Superiority, seniorty on the postions in public issuse/conceren post should be maintain by the public, educational Institution or other Institutions including family (1st Institution). And Thus any of my Gurus, parents, elder brothers and sisteres are elder, superior and senior than me and even every true Brahmins are respectable for me. >>>>>>>हाँ मैं कश्मीरी मूल से हूँ पर उससे पहले जिस तरह इस सम्पूर्ण मानवता का मूल प्रयागराज है उसी तरह प्रयागराज मेरा भी प्रथम मूल है और कश्यप का वंसज होने के नाते इस प्रयागराज पर प्रथम अधिकार मेरा है और वह अधिकार मैंने कूर्मावतारियों से संघर्ष करके प्राप्त किया है। अतः वे धनबल, बुद्धिबल और बाहुबल से तिकडम रच रहे हैं और कुछ निरीह मूर्ख लोग उनका हथियार बन अपना अस्तित्व समाप्त करते चले जा रहे हैं मेरे विरोध में आने की वजह से। पर अब उन तथाकथित कूर्मावतारियों उनको मुझे प्रयागराज से भगाने से पहले अपना अस्तित्व समाप्त करना पडेगा मतलब मैं अब इस प्रयागराज से कही जाने वाला नहीं वरण पूर्ण अधिकार के साथ यही जन्म जन्मान्तर तक रहूँगा और शिव से संघर्षरत होते हुए आगे बढ़ त्रिदेव शक्ति को अर्जित कर पुनः ऋषि और अब मानव संस्कृति मतलब गोत्र संस्कृति में भी आ जाने पर उनको मुझे ब्रह्मा के प्रथम पुत्र के रूप में बर्दास्त करना ही पडेगा। वह दुनिया से सबसे अलग इकाई (परमऊर्जा निकाय/परमब्रह्म/ब्रह्म:ब्रह्मा+विष्णु+महेश एक इकाई स्वरुप में) जिसमे स्वयं यह दुनिया स्वयम समाहित है वह इकाई बन चुके व्यक्ति से स्वयं दुनिया का कोई कूर्मावतारी अलग अस्तित्व पा सकता है क्या? पर 3 से ज्यादा दसक से कूर्मावतारियों के शक्ति स्रोत तमिलनाडु और प्रयागराज से जो कूर्मावतारी खेल चल रहा था उसमे से तमिलनाडु के उस कूर्मावतारी ब्राह्मण जो विश्व का सबसे बड़ा कूर्मावतारी चेहरा था और ब्राह्मण था उसका उद्धार 2009 में किया जा चुका है और अब उसके बाद प्रयागराज के उस कूर्मावतारी हालांकि वह ब्राह्मण नहीं है /या ब्राह्मण हो ही नहीं सकता जाति/धर्म का है का अंत अब निश्चित हो सकता है उसी के कर्मों की वजह से अगर इस तरह से मेरा विरोध जारी रहा? आवास से लेकर पद मान तक के प्रथम और द्वितीय के खेल को और भी आगे बढ़ाते रहने की आदत उसकी पडी रही। अतः उसको हिदायत है की अब वह सुधर जाय अन्यथा कोई सत्ता व् सर्वोच्च महाशक्ति भी उस कूर्मावतारी स्रोत व् स्वयं कूर्मावतारियों का हित नहीं कर सकती है। विभाग/केंद्र से सायं/रात्रि 7/8 बजे घर जाते समय हर दस से पंद्रह दिन में एक दिन केवल एकतरफा यात्रा के दौरान ही सायकिल पंचर करने के राजनीती से उसने मेरे साथ अपनी राजनीतिक यात्रा प्रारम्भ की थी तो सायकिल पंचर करवाने और रेकी कर दुर्घटना ग्रस्त करवाने की राजनीती और अन्य तुच्छ राजनीती अपनी वापस ले लीजिये अन्यथा ईस्वरीय दंड भुगतने को तैयार रहिये? मैं मूर्खों को दण्ड नहीं देता वरन ऐसे ही कूर्मावतारी नेतृत्व को दण्ड देता हूँ और आज तक के मानवता इतिहास का स्वयं सबसे बड़ा वास्तविक कूर्मावतारी भी मैं ही हूँ कोई और नहीं पर मैं काला नहीं हुआ उस कूर्मावतारी विष्णु के तरह क्योंकि मई त्रिदेव शक्ति स्वरुप में था और त्रिशक्ति मुझमे हे समाहित हो सकी हैं और अल्प विनास से ही सब कुछ नियंत्रित हो गया हो और तांडव नृत्य न हुआ हो। बहुत से अल्पज्ञानी राजनैतिक सत्तासीन व्यक्ति/व्यक्ति समूह व् बहुत बड़ा संगठन व् राजनैतिक दल/पार्टी वाले जानते हैं की सदियों से कूर्मावतारियों के साथ अन्याय हुआ पर अब अब वही बताएं की जो लोग मेरे साथ अन्याय कर सकते हैं उनके साथ अन्याय कौन कर सकता है? मैं तो आज तक इस प्रयागराज में कूर्मावतारियों का ऐसा शासन पा रहा हूँ जो कश्यप ऋषि को ही बहिस्त्कृत कर उस भरद्वाज ऋषी को प्रतिष्ठित करते हैं जिनसे वे अपना उल्लू सदा से सीधा करते रहे हैं इस विश्व मानवता के केंद्र पर और अपना एक छत्र राज्य इस प्रयागराज और सम्पूर्ण भारत में कर रहे हैं अंदर से। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Saturday, October 29, 2016

मित्रों मैं तो 29 अक्टूबर, 2009 को ही जीता हुआ मुकदमा लड़ रहा हूँ कुछ लोगों को जानने पहचानने के लिए न की जो मेरे भरोसे प्रयागराज में आश्रय पाए हैं उनसे मेरी कोई तुलना संभव है और उसको जिनको श्रीप्रकाश (चन्दा मामा से प्यारा मेरा मामा) नाम से जिसे घृणा हो न जीतने दे और ऐसे लोग जिनको श्रीप्रकाश (नामतः अर्थ विष्णु) नाम से घृणा है वे अब मुझको सराफत का पाठ पढ़ाएंगे और हम उसे पड़ते रहेंगे।>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

मित्रों मैं तो 29 अक्टूबर, 2009 को ही जीता हुआ मुकदमा लड़ रहा हूँ कुछ लोगों को जानने पहचानने के लिए न की जो मेरे भरोसे प्रयागराज में आश्रय पाए हैं उनसे मेरी कोई तुलना संभव है और उसको जिनको श्रीप्रकाश (चन्दा मामा से प्यारा मेरा मामा) नाम से जिसे घृणा हो न जीतने दे और ऐसे लोग जिनको श्रीप्रकाश (नामतः अर्थ विष्णु) नाम से घृणा है वे अब मुझको सराफत का पाठ पढ़ाएंगे और हम उसे पड़ते रहेंगे।>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| 

दुनियाँ की कोई भी दूसरी सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति तैयार हो गयी हो और उसकी शक्ति के बल पर कोई संगठन या व्यक्ति या व्यक्ति समूह या दल किशी गलत तथ्य को मेरे ऊपर न थोपें शक्ति, बुद्धि या धन के बल पर क्योंकि मुझपर थोपी गयी हर परिस्थिति आप और आप की उस तथाकथित विश्वमहाशक्ति पर भारी होगी क्योंकि आज तक के मानवता के इतिहास में सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति का समन करते हुए मैंने अपने सब कार्य पूर्ण करते हुए दूसरा जीवन दान उस सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति को मैंने ही दिया है। मुझे आशा है की अब उसपर भी गुरुर उसको न हो? राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>> >>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

दुनियाँ की कोई भी दूसरी सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति तैयार हो गयी हो और उसकी शक्ति के बल पर कोई संगठन या व्यक्ति या व्यक्ति समूह या दल किशी गलत तथ्य को मेरे ऊपर न थोपें शक्ति, बुद्धि या धन के बल पर क्योंकि मुझपर थोपी गयी हर परिस्थिति आप और आप की उस तथाकथित विश्वमहाशक्ति पर भारी होगी क्योंकि आज तक के मानवता के इतिहास में सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति का समन करते हुए मैंने अपने सब कार्य पूर्ण करते हुए दूसरा जीवन दान उस सर्वोच्च विश्वमहाशक्ति को मैंने ही दिया है। मुझे आशा है की अब उसपर भी गुरुर उसको न हो? राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>>
>>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Friday, October 28, 2016

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>> >>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)

१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|

२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|

3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।

4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.

5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>सामाजिक, धार्मिक, संवैधानिक वैध नियमों को स्वयं तोड़ने वालों के साथ भी विनम्रता से व्यवहार क्या व्यक्तित्व की विशालता में नहीं आता? अगर ऐसे व्यक्ति परहित जीवन छोड़ तुछ्य मानशिकता वालों के प्रतिशोध का जबाब गंभीर प्रतिशोधात्मक कार्यों से देते तो इस प्रयागराज विश्वविद्यालय, प्रयागराज, भारतवर्ष और विश्व एक गाँव तथा विश्व मानवता का भविष्य कैसा होता?>>>>>>>>>>टिप्पणी:>>>
>>>>>>>>>>>>>>>अंतर्धार्मिक और दलित समाज से शास्त्रीय हिन्दू विवाह वैध नहीं और वैध तब जब विवाह पूर्व वर अपने को सामजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का का स्वीकार कर लिया हो मतलब उसे उस समय(विवाह के पूर्व) तक सनातन धर्म के पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत समस्त अधिकतम देवी, देवता और नियम-क़ानून मान्य हो क्योंकि शास्त्रीय हिन्दू विवाह एक ऐसा कर्म-कांड है जिसमे पञ्चदेव (अग्नि, वरुण, पवन, आकाश, पृथ्वी) समेत लगभग समस्त अधिकतम देवी, देवता का आह्वान होता है अग्निदेव(ऊर्जा/प्रकाश) को शाक्षी मान हुए विवाह पध्धति के परिपालन में। और अगर वह विवाह पूर्व वर अपने को सामाजिक, संवैधानिक और धार्मिक रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या इन तीनों के व्युत्पन्न जाती/धर्म का स्वीकार कर लिया है तो फिर वह दलित या अन्य दूसरे धर्म का कहलाने का अधिकारी नहीं रह जाएगा मतलब दलित या अन्यधर्म के तहत लाभ से वंचित हो जाएगा और जब वह धर्मान्तरण करेगा तभी दूसरे धर्म में जा सकता है। इसके इतर कोई भी अन्य विधि से विवाह कर सकता है पर वह धर्म-पति/पत्नी नहीं कहे जा सकेंगे|>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

ब्रह्म लीक है यह लेख और यह केंद्र जिसे कोई भविष्य में मिटा नहीं सकता जैसे रामेश्वरम (राम के इस्वर शिव मतलब रामनाथ:शिव) के मंदिर को : >>>मैं 2001 से 2003 के बीच इस प्रयागराज विश्वविद्यालय को अपना गुरुकुल न समझ सका और न किशी में अपना गुरु पाया पर मैंने अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्र ब्राह्मण (वशिष्ठ के पुत्र व्यासः से व्याशी जो कश्यप का गुरु हो सकता है) मेरे माजी श्रध्धेय, श्री श्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र/शिव व् शिवा:पारवती का आहार/भोज्य/अर्पनेय/अर्पण किया जाने वाला) पांडेय ब्राह्मण, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के द्वारा संकेत किये जाने पर की बड़े भैया पांडेय जी मतलब जीजा जी भी कश्यप गोत्रीय हैं तो बड़े भैया को ही गुरु मान लो तो यह समझिये की मैंने उस बड़े भैया को दो वर्ष तक अपना गुरु नहीं समझा पर बड़ी दीदी के नाते सही या मामा के नाते उसी बड़े भाई साहब को अपना गुरु मानते हुए इस विश्विद्यालय में नामांकन लिया और हर सफला प्राप्त किया। तो सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्र ब्राह्मण (वशिष्ठ के पुत्र व्यासः से व्याशी जो कश्यप का गुरु हो सकता है) मेरे माजी श्रध्धेय श्री श्रीधर(विष्णु) मामा को बड़ा मानता हूँ यह तो ठीक है की उन्होंने मुझे मेरे योग्य मेरा विषय संबंधी गुरु दिया पर उससे ज्यादा अपने पूर्व गुरुकुल से और अपनी ही बड़ी दीदी को उससे ज्यादा सम्मान है की उनके नाते बड़े भैया पांडेय जी मेरे गुरु हो सके अन्यथा मैं तो प्रयागराज से जा रहा था और कम से कम संभावित रूप से काशी हिन्दू विश्विद्यालय के ओंकारनाथ(भोले शंकर) श्रीवास्तव जी मेरे पसंद के गुरु होते नाभिकीय विज्ञान और ठोस अवस्था भौतिकी विषय खंड सन्निकटता की वजह से और आज मैं कहीं और होता। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

ब्रह्म लीक है यह लेख और यह केंद्र जिसे कोई भविष्य में मिटा नहीं सकता जैसे रामेश्वरम (राम के इस्वर शिव मतलब रामनाथ:शिव) के मंदिर को : >>>मैं 2001 से 2003 के बीच इस प्रयागराज विश्वविद्यालय को अपना गुरुकुल न समझ सका और न किशी में अपना गुरु पाया पर मैंने अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्र ब्राह्मण (वशिष्ठ के पुत्र व्यासः से व्याशी जो कश्यप का गुरु हो सकता है) मेरे माजी श्रध्धेय, श्री श्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला (बेलपत्र/शिव व् शिवा:पारवती का आहार/भोज्य/अर्पनेय/अर्पण किया जाने वाला) पांडेय ब्राह्मण, डॉ. प्रेमचंद (शिव) के द्वारा संकेत किये जाने पर की बड़े भैया पांडेय जी मतलब जीजा जी भी कश्यप गोत्रीय हैं तो बड़े भैया को ही गुरु मान लो तो यह समझिये की मैंने उस बड़े भैया को दो वर्ष तक अपना गुरु नहीं समझा पर बड़ी दीदी के नाते सही या मामा के नाते उसी बड़े भाई साहब को अपना गुरु मानते हुए इस विश्विद्यालय में नामांकन लिया और हर सफला प्राप्त किया। तो सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्र ब्राह्मण (वशिष्ठ के पुत्र व्यासः से व्याशी जो कश्यप का गुरु हो सकता है) मेरे माजी श्रध्धेय श्री श्रीधर(विष्णु) मामा को बड़ा मानता हूँ यह तो ठीक है की उन्होंने मुझे मेरे योग्य मेरा विषय संबंधी गुरु दिया पर उससे ज्यादा अपने पूर्व गुरुकुल से और अपनी ही बड़ी दीदी को उससे ज्यादा सम्मान है की उनके नाते बड़े भैया पांडेय जी मेरे गुरु हो सके अन्यथा मैं तो प्रयागराज से जा रहा था और कम से कम संभावित रूप से काशी हिन्दू विश्विद्यालय के ओंकारनाथ(भोले शंकर) श्रीवास्तव जी मेरे पसंद के गुरु होते नाभिकीय विज्ञान और ठोस अवस्था भौतिकी विषय खंड सन्निकटता की वजह से और आज मैं कहीं और होता। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||
Kedareshwar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies

अंत में इस संसार को बताना चाहूँगा की श्रीधर(विष्णु) स्वयं सिद्ध रूप से गिरिधर(विवेक) से ज्येष्ठ, श्रेष्ठ व् वरिष्ठ है इसके लिए किशी प्रमाण की जरूरत नहीं जिनकी महती कृपा से सितंबर, 2000 (2001) से आज तक मैं इस प्रयागराज में रहते रहते आत्मनिर्भर हो अभय, अटल और अचल/अडिग/गिरि हो चुका हूँ। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

अंत में इस संसार को बताना चाहूँगा की श्रीधर(विष्णु) स्वयं सिद्ध रूप से गिरिधर(विवेक) से ज्येष्ठ, श्रेष्ठ व् वरिष्ठ है इसके लिए किशी प्रमाण की जरूरत नहीं जिनकी महती कृपा से सितंबर, 2000 (2001) से आज तक मैं इस प्रयागराज में रहते रहते आत्मनिर्भर हो अभय, अटल और अचल/अडिग/गिरि हो चुका हूँ। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

कर्णपुर के ब्राह्मण जो एक ब्राह्मण की कन्या का सनातन हिन्दू शास्त्रीय विधि से दलित ईसाई से विवाह करवा देते हैं ब्राह्मण पिता द्वारा पाँव पूजन विधि से (आर्य समाजी या विधि/कानूनी/न्यायलय विवाह/या अन्य विवाह तो हो सकता है) उनकी पुत्रियों का भी विवाह दक्षिण भारत के दलित ईसाई परिवार से करा देना चाहिए और जो उनको कुबेर बना देंगी और पंडिताई नहीं करनी पड़ेगी भविष्य में। "मेहमा जो हमारा होता है, हमें जान से प्यारा होता है तो फिर मित्र की क्या बात की उससे शादी की ही शर्त पर मित्रता हो पर उसका जीवन निष्कलंक हो यह संवेदना अवश्य होती है और ऐसे ब्राह्मण, घर वाले और दलित ईसाई जो उसे कलंकित किये मैं उनको किस जघन्य अपराधी की श्रेणी में रख सकता हूँ उसकी कोई परिकल्पना नहीं" >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

कर्णपुर के ब्राह्मण जो एक ब्राह्मण की कन्या का सनातन हिन्दू शास्त्रीय विधि से दलित ईसाई से विवाह करवा देते हैं ब्राह्मण पिता द्वारा पाँव पूजन विधि से (आर्य समाजी या विधि/कानूनी/न्यायलय विवाह/या अन्य विवाह तो हो सकता है) उनकी पुत्रियों का भी विवाह दक्षिण भारत के दलित ईसाई परिवार से करा देना चाहिए और जो उनको कुबेर बना देंगी और पंडिताई नहीं करनी पड़ेगी भविष्य में। "मेहमा जो हमारा होता है, हमें जान से प्यारा होता है तो फिर मित्र की क्या बात की उससे शादी की ही शर्त पर मित्रता हो पर उसका जीवन निष्कलंक हो यह संवेदना अवश्य होती है और ऐसे ब्राह्मण, घर वाले और दलित ईसाई जो उसे कलंकित किये मैं उनको किस जघन्य अपराधी की श्रेणी में रख सकता हूँ उसकी कोई परिकल्पना नहीं" >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सम्पूर्ण विश्व में मानवता रूप चादर/स्यामियाना/तंबू को ऊंचा उठाकर आशियाना बनाने हेतु सनातन मानवता के क्षेत्र भारतवर्ष (केंद्र प्रयागराज) से बहुत सारे तंबू के पोल (आधार) रूपी कच्चे/पक्के मानवीय संशाधन आवागमन के संशाधनो में बाढ़ आ जाने और किराया कम हो जाने की वजह से विगत तीन दशक में अधिकतम संख्या में विदेशों को पलायन कर गए हैं पर उनके सुखद जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मन, मष्तिष्क और सांस्कृतिक खाद्य भारतवर्ष से मुहैया कराना है तो फिर भारतवर्ष को कम से कम आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कारिक और सांस्कृतिक समृद्धि हर हालात में बनाये रखनी होगी अपने प्रवाशी जनों और विश्वमानवता नियंत्रक जानो के लिए और स्वयं अपने लिए भी और यही विश्वबंधुत्व के अपने सिद्धांत के प्रति इस देश का सर्वोच्च समर्पण और त्याग, तप और बलिदान होगा इस सृष्टि के सुगम संचलन हेतु।>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

सम्पूर्ण विश्व में मानवता रूप चादर/स्यामियाना/तंबू को ऊंचा उठाकर आशियाना बनाने हेतु सनातन मानवता के क्षेत्र भारतवर्ष (केंद्र प्रयागराज) से बहुत सारे तंबू के पोल (आधार) रूपी कच्चे/पक्के मानवीय संशाधन आवागमन के संशाधनो में बाढ़ आ जाने और किराया कम हो जाने की वजह से विगत तीन दशक में अधिकतम संख्या में विदेशों को पलायन कर गए हैं पर उनके सुखद जीवन और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मन, मष्तिष्क और सांस्कृतिक खाद्य भारतवर्ष से मुहैया कराना है तो फिर भारतवर्ष को कम से कम आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कारिक और सांस्कृतिक समृद्धि हर हालात में बनाये रखनी होगी अपने प्रवाशी जनों और विश्वमानवता नियंत्रक जानो के लिए और स्वयं अपने लिए भी और यही विश्वबंधुत्व के अपने सिद्धांत के प्रति इस देश का सर्वोच्च समर्पण और त्याग, तप और बलिदान होगा इस सृष्टि के सुगम संचलन हेतु।>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

Thursday, October 27, 2016

संगठन और पार्टी गत नहीं व्यक्तिगत दृष्टिकोण और अनुमान के तौर पर>>>>>>मैं नहीं जानता कैसे, कब, किस स्थिति में जाकर और किस पार्टी/दल से लेकिन जिन तीन भाइयों को राजनीति के माध्यम से देश की सर्वोच्च सत्ता पर जाना मैं भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर (2007 -2009) में ही तय कर दिया था उन्हें वह सर्वोच्च सत्ता मिलकर ही रहेगी आप उनको केवल किशी प्रदेश विशेष की ही सर्वोच्च सत्ता हेतु ही उलझा रहे हैं।>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

संगठन और पार्टी गत नहीं व्यक्तिगत दृष्टिकोण और अनुमान के तौर पर>>>>>>मैं नहीं जानता कैसे, कब, किस स्थिति में जाकर और किस पार्टी/दल से लेकिन जिन तीन भाइयों को राजनीति के माध्यम से देश की सर्वोच्च सत्ता पर जाना मैं भारतीय विज्ञान संस्थान  बैंगलोर (2007 -2009)  में ही तय कर दिया था उन्हें वह सर्वोच्च सत्ता मिलकर ही रहेगी आप उनको केवल किशी प्रदेश विशेष की ही सर्वोच्च सत्ता हेतु ही उलझा रहे हैं।>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||    

तो शरद पूर्णिमा का श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के नारकीय/अमानवीय व्यवहार से प्रताड़ित 16108 कृष्णभक्त गोपिकाओ को नरकासुर के बंधन से मुक्त करा उनके द्वारा शरद पूर्णिमा को किया गया महारास कोई भौतिक रास नहीं था न ही अपने से 13 वर्ष बड़ी राधा (श्रीराम सीता से उम्र में बड़े थे) के साथ उनका कोई भौतिक संयोग था अन्यथा परशुराम द्वारा प्रदान किया हुआ विष्णु का सुदर्शन चक्र उनके हाँथ न ठहरता?>>>>>>>>>>>>>>>>श्रीकृष्ण भौतिक रूप से जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी थे यह तो उनकी सुदर्शन चक्र धारण कर सकने की योग्यता पर ही सिद्ध है पर 16108 रानियों/गोपियों के साथ शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में रास की जहां तक बात है वह भौतिक रास नहीं वर्ण आध्यात्मिक रास था और यह श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के बंधन से मुक्त की गयी उन 16108 गोपिकाओं को श्रीकृष्ण द्वारा ही दिए गए वचन की स्वीकारोक्ति की शर्त पर था की नरकासुर ने उनको बंधक बना उनके साथ अमानवीय/नारकीय व्यवहार किया करता था तो उनको स्वीकारेगा कौन? अतः श्रीकृष्ण ने कहा था जिन्होंने मुझे सच्चे मन से याद किया उसे मैं मर्यादित ढंग से स्वीकार करूंगा अगर उनमे जीवन की तनिक भी लालसा शेष होगी और यही वचन गोपिकाओं को नारकीय जीवन से उबरने के बाद पति/पिता द्वारा अस्वीकार हो जाने के डर से आत्महत्या करने से रोक सका था अन्यथा वे आत्महत्या कर मर जाना चाहती थीं। जब कृष्ण ने नरकासुर संग्राम में नरकासुर को पराजित कर जिन 16108 गोपिकाओं को उसके बंधन से मुक्त कराया था जिनके साथ नरकासुर अमानवीय व्यवहार किया करता था तो ऐसे में उनको अपने वचन पालन हेतु यह आध्यात्मिक रास लीला करनी पडी थी गोपिकाओं को शेष जीवन कृष्णमय होकर बिताने और सामाजिक बंधन मुक्त होकर जीवन की आस न छोड़ने हेतु।>>>>>> तो शरद पूर्णिमा का श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के नारकीय/अमानवीय व्यवहार से प्रताड़ित 16108 कृष्णभक्त गोपिकाओ को नरकासुर के बंधन से मुक्त करा उनके द्वारा शरद पूर्णिमा को किया गया महारास कोई भौतिक रास नहीं था न ही अपने से 13 वर्ष बड़ी राधा (श्रीराम सीता से उम्र में बड़े थे) के साथ उनका कोई भौतिक संयोग था अन्यथा परशुराम द्वारा प्रदान किया हुआ विष्णु का सुदर्शन चक्र उनके हाँथ न ठहरता? >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

तो शरद पूर्णिमा का श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के नारकीय/अमानवीय व्यवहार से प्रताड़ित 16108 कृष्णभक्त गोपिकाओ को नरकासुर के बंधन से मुक्त करा उनके द्वारा शरद पूर्णिमा को किया गया महारास कोई भौतिक रास नहीं था न ही अपने से 13 वर्ष बड़ी राधा (श्रीराम सीता से उम्र में बड़े थे) के साथ उनका कोई भौतिक संयोग था अन्यथा परशुराम द्वारा प्रदान किया हुआ विष्णु का सुदर्शन चक्र उनके हाँथ न ठहरता?>>>>>>>>>>>>>>>>श्रीकृष्ण भौतिक रूप से जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी थे यह तो उनकी सुदर्शन चक्र धारण कर सकने की योग्यता पर ही सिद्ध है पर 16108 रानियों/गोपियों के साथ शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में रास की जहां तक बात है वह भौतिक रास नहीं वर्ण आध्यात्मिक रास था और यह श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के बंधन से मुक्त की गयी उन 16108 गोपिकाओं को श्रीकृष्ण द्वारा ही दिए गए वचन की स्वीकारोक्ति की शर्त पर था की नरकासुर ने उनको बंधक बना उनके साथ अमानवीय/नारकीय व्यवहार किया करता था तो उनको स्वीकारेगा कौन? अतः श्रीकृष्ण ने कहा था जिन्होंने मुझे सच्चे मन से याद किया उसे मैं मर्यादित ढंग से स्वीकार करूंगा अगर उनमे जीवन की तनिक भी लालसा शेष होगी और यही वचन गोपिकाओं को नारकीय जीवन से उबरने के बाद पति/पिता द्वारा अस्वीकार हो जाने के डर से आत्महत्या करने से रोक सका था अन्यथा वे आत्महत्या कर मर जाना चाहती थीं। जब कृष्ण ने नरकासुर संग्राम में नरकासुर को पराजित कर जिन 16108 गोपिकाओं को उसके बंधन से मुक्त कराया था जिनके साथ नरकासुर अमानवीय व्यवहार किया करता था तो ऐसे में उनको अपने वचन पालन हेतु यह आध्यात्मिक रास लीला करनी पडी थी गोपिकाओं को शेष जीवन कृष्णमय होकर बिताने और सामाजिक बंधन मुक्त होकर जीवन की आस न छोड़ने हेतु।>>>>>> तो शरद पूर्णिमा का श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के नारकीय/अमानवीय व्यवहार से प्रताड़ित 16108 कृष्णभक्त गोपिकाओ को नरकासुर के बंधन से मुक्त करा उनके द्वारा शरद पूर्णिमा को किया गया महारास कोई भौतिक रास नहीं था न ही अपने से 13 वर्ष बड़ी राधा (श्रीराम सीता से उम्र में बड़े थे) के साथ उनका कोई भौतिक संयोग था अन्यथा परशुराम द्वारा प्रदान किया हुआ विष्णु का सुदर्शन चक्र उनके हाँथ न ठहरता?  >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

बलिया (भृगुवंशीय बलि से बलिया ) और बिशुनपुर-जौनपुर (भृगु के सगे पुत्र जमदग्नि से जमदग्निपुर: जौनपुर): गीता सन्देश:---ऋषियों में मैं भृगु (ब्राह्मणत्व गुण त्याग में सप्तर्षियों (सात मूल ऋषि) या अष्टक (आठ) ऋषियों या आज तक के सम्पूर्ण 108 ऋषियों/गोत्रों में सर्वश्रेष्ठ) हूँ और मुनियों में नारद (सूचना तकनीति और संचार विभाग के आदिपुरुष): मुझ कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण जो पैतृक निवाशी आजमगढ़ का है और जो उसने जिस जमदग्निपुर में पिता के वशिष्ठ गोत्रीय ब्राह्मण परिवार वाले ननिहाल में मैं जन्म लिया और वहां 3/4 वर्ष रहा तद उपरान्त 4 वर्ष अपने पैतृक गाँव रामापुर में प्राथमिक शिक्षा ली पुनः स्नातक तक की सम्पूर्ण शिक्षा उसी जौनपुर में अपने गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ पुत्र) मिश्र ब्राह्मण स्वयं के ननिहाल में रहकर ली और परास्नातक काशी से पूर्ण लिया और आज तक आत्मनिर्भर होने के उपरांत भी 32 वर्ष से वैचारिक रूप से जौनपुर:जमदग्निपुर केंद्रित अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर (श्रीधर:विष्णु)) और परमपिता परमेश्वर (प्रेमचंद:शिव) के निर्देश और संरक्षण में चल रहा हूँ तो ऐसे में अगर मुझ गिरिधर ((((विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव))) ने श्रीधर(विष्णु) को अपना परमगुरु परमपिता परमेश्वर मान लिया है मतलब दुर्वाशा क्षेत्र आजमगढ़ ने अपने मूल कुल के मातृ क्षेत्र मतलब भृगुवंशीय क्षेत्र जमदग्निपुर:जौनपुर को अपना गुरु मान लिया है तो फिर यह भृगुवंशीय क्षेत्र जमदग्निपुर:जौनपुर विश्व गुरु कैसे नहीं हुआ। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

बलिया (भृगुवंशीय बलि से बलिया ) और बिशुनपुर-जौनपुर (भृगु के सगे पुत्र जमदग्नि से जमदग्निपुर: जौनपुर):  गीता सन्देश:---ऋषियों में मैं भृगु (ब्राह्मणत्व गुण त्याग में सप्तर्षियों (सात मूल ऋषि) या अष्टक (आठ)  ऋषियों या आज तक के सम्पूर्ण 108 ऋषियों/गोत्रों में सर्वश्रेष्ठ) हूँ और मुनियों में नारद (सूचना तकनीति और संचार विभाग के आदिपुरुष):   मुझ कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण जो पैतृक निवाशी आजमगढ़ का है और जो उसने जिस जमदग्निपुर में पिता के वशिष्ठ गोत्रीय ब्राह्मण परिवार वाले ननिहाल में मैं जन्म लिया और वहां 3/4 वर्ष रहा तद उपरान्त 4 वर्ष अपने पैतृक गाँव रामापुर में प्राथमिक शिक्षा ली पुनः स्नातक तक की सम्पूर्ण शिक्षा उसी जौनपुर में अपने गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ पुत्र) मिश्र ब्राह्मण स्वयं के ननिहाल में रहकर ली और परास्नातक काशी से पूर्ण लिया और आज तक आत्मनिर्भर होने के उपरांत भी 32 वर्ष से वैचारिक रूप से जौनपुर:जमदग्निपुर केंद्रित अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर (श्रीधर:विष्णु)) और परमपिता परमेश्वर (प्रेमचंद:शिव) के निर्देश और संरक्षण में चल रहा हूँ तो ऐसे में अगर मुझ गिरिधर ((((विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव))) ने श्रीधर(विष्णु) को अपना परमगुरु परमपिता परमेश्वर मान लिया है मतलब दुर्वाशा क्षेत्र आजमगढ़ ने अपने मूल कुल के मातृ क्षेत्र मतलब भृगुवंशीय क्षेत्र जमदग्निपुर:जौनपुर को अपना गुरु मान लिया है तो फिर यह  भृगुवंशीय क्षेत्र जमदग्निपुर:जौनपुर विश्व गुरु कैसे नहीं हुआ। >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

बलिया (भृगुवंशीय बलि से बलिया ) और बिशुनपुर-जौनपुर (भृगु के सगे पुत्र जमदग्नि से जमदग्निपुर: जौनपुर) के सम्बन्ध में कुछ लोग वर्तमान में एक अमेरिकी वैज्ञानिक जगदीश को ज्यादा तरजीह आज तक दिए पर मैंने कुछ नहीं कहा पर आज सुन लीजिये दाढी वाले पंडित जी जो सप्ताह में केवल एक दिन दाढी बनवाते थे या उससे कुछ ज्यादा ही हो जाता था और जिस दिन दाढी बनाती थी तो फिर विद्यालय में बच्चों की अच्छी खबर लेते थे और यही दाढी वाले पंडित जी जो प्रयागराज के सभी गुरुकुलों में स्नातक में प्रथम स्थान पाए थे तो उनसे दाढी वाले पंडित जी से दाढी वाले पूर्व प्रधानमंत्री तक चले जाइये सब कुछ पता चल जाएगा सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ वंसज) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल का? >>>>>>>>>>>>> जो स्वयं अपने में ही पूर्ण है उस पूर्ण को किसी अपूर्ण से क्या डर मतलब किशी दलित, ईसाई और मुस्लिम से या किशी अन्य जाति/धर्म के व्यक्ति से क्या डर वस् डर केवल और केवल एक की परमगुरु परमपिता परमेश्वर (श्रीधर:विष्णु) और परमपिता परमेश्वर (प्रेमचंद:शिव) ने जो कार्य सौपा था वह अपने आप कब सैद्धान्तिक और सामाजिक दोनों स्वरूपों में पूर्णता को प्राप्त करेगा और कही कोई सामाजिक व्यवहार गत आदर्श आचरण के पर जाकर कोई अमर्यादित आचरण न हो प्रयागराज या पैतृक निवास या अन्य किशी प्रवाशी स्थान पर भी किशी भी स्थिति में जबकी मेरे विरोधी समाजिक नियमों के प्रतिकूल आचरण जारी रखते हुए मेरा विरोध जरी रखे हों तो ऐसा इसी लिए हो सका की मैं अपने को पहचानता था और यह भी बता दें जब किशी की कोई मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ काम न आया था उस समय मेरी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ काम आया था जब इस पृथ्वी पर पक्ष और विपक्ष में घमासान मचा था और दोनों का आधार बन मैं सब कुछ अनुभव कर रहा था और हानि लाभ का भान होते हुए भी विरोधी पक्ष द्वारा हानि किये जाने के बाद भी दोनों का आधार और जीवन संबल संजीवनी बना रहा तो फिर मैं किसकी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ को जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ मानूं जो सब को नव जीवन दिया हो अपनी सहन शीलता और क्षमता के बल पर दोनों के लिए फिर मैं सामान्य सामाजिक व्यवहार कर रहा फिर भी नियति सामने वालों को मान्य नहीं तो मैं कर ही क्या सकता हूँ और समझा ही क्या सकता हूँ सामाजिक प्रक्रिया को मैं स्वाभिमान जारी रहने और मर्यादा हनन न होने हेतु अपना रहा हूँ। शान्ति मन्त्र: तेजस्विनावधीतमस्तु = May our studies be radiantly glorious! THIS PART OF SHANTI PATH IS FROM श्वेताश्वतरोपनिशद (Shvetashvatara Upanishad) | शान्ति मन्त्र वेदों के वे मंत्र हैं जो शान्ति की प्रार्थना करते हैं। प्राय: हिन्दुओं के धार्मिक कृत्यों के आरम्भ और अन्त में इनका पाठ किया जाता है। तैतरीय उपनिषद, कठोपनिषद, माण्डुक्योपनिषद तथा श्वेताश्वतरोपनिशद ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ OM. Let us both protect each other together! May both of us enjoy together! May both of us put our energies together! May our studies be radiantly glorious! May there be no hatred between us! OM Peace, Peace, Peace! वृहदारण्यक उपनिषद तथा ईशावास्य उपनिषद ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ That Creator is Absolute, Complete and Full. This Universe is Absolutely Complete and Full. Only Absolutely Complete springs off That Absolute! From That Absolute, even if Whole Absolute is taken out, only Absolute does remain! OM Peace, Peace, Peace. तैतरीय उपनिषद ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः। शं नो भवत्वर्यमा। शं न इन्द्रो वृहस्पतिः। शं नो विष्णुरुरुक्रमः। नमो ब्रह्मणे। नमस्ते वायो। त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वामेव प्रत्यक्षम् ब्रह्म वदिष्यामि। ॠतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु। तद्वक्तारमवतु। अवतु माम्। अवतु वक्तारम्। ''ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ OM may Mitra do good to us, may Varuna do good to us, May Aryama do good to us, May Indra do good to us, may Brihaspati do good to us, May Vishnu-who has vast coverage-do good to us, (I) Salute O Brahma!, Salutations to you O Vayu!, Only you (Vayu) are the visible Brahman. I say only you (Vayu) are the visible Brahman, I say rta (divine law), I say truth, May that (truth) protect me, May that (truth) protect teacher, May it protect me, May it protect teacher, OM Peace, Peace, Peace. केन उपनिषद तथा छान्द्योग्य उपनिषद ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि। सर्वम् ब्रह्मौपनिषदम् माऽहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणम् मेऽस्तु। तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ OM may my organs, speech, Prana, eyes and ears be nourished and be well, so should all (my) senses become strong. Upanishad says all this (world) is Brahman. I don't reject Brahman, may Brahma not reject me. Let there be no rejection, let there be no rejection at all in me, let me be concentrated on Self, all those ways of righteous living told in Upanishads be in me! Be in me, OM Peace, Peace, Peace. ऐतरेय उपनिषद ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठित-मावीरावीर्म एधि। वेदस्य म आणिस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान् संदधाम्यृतम् वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि तन्मामवतु तद्वक्तारमवत्ववतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ OM let my speech be established in (my) mind, and (my) mind be established in my speech, May Brahman (Supreme Reality) reveal itself to me! May I be able to grasp the truths of the Vedas! Let not what I have heard (studied) forsake me! May I spend both day and night in study! I say rta (divine law), I'll say the Truth; may that (truth) protect me! May that (truth) protect the teacher! May it protect me; and may it protect the speaker as well! OM Peace, Peace, Peace. मुण्डक उपनिषद, माण्डूक्य उपनिषद तथा प्रश्नोपनिषद ॐ भद्रं कर्णेभिः श्रुणुयाम देवाः। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरन्ङ्गैस्तुष्टुवागं सस्तनूभिः। व्यशेम देवहितम् यदायुः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो ब्रिहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ OM O gods! Let us hear good (auspicious) things from our ears! O worshipful ones! let us see good (auspicious) things with our eyes! May our organs and body be stable, healthy and strong! May we do in the life span allotted to us by gods what pleases them. May Indra (who is) extolled profusely in the scriptures do good to us! May Pushan (who is) knower of world do good to us! May Taarkshya (who) destroyer of enemies do good to us! May Brihaspati establish good in us! OM Peace, Peace, Peace. अन्य स्रोतो से There are various Other sources of Shanti Mantras, of which some of the most famous are: ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥ May peace radiate there in the whole sky, as well as in the vast ethereal space everywhere! May peace reign all over this earth, in waters and in all herbs, trees and creepers! May peace flow over the whole universe! May peace flow in from the Supreme Being Brahman! May there always exist peace in everything! It should be peace and peace alone! May that peace reach me too! Om May peace, peace and peace be there in material, physical and spiritual existences! (Translation by Swami Abhedananda, Ramakrishna Vedanta Math, India. Edited by Dr. Veda Vrata Aalok on 31st Jan. 2013.) ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥ OM! Lead us from the unreal to the real! Lead us from darkness to light! Lead us from death to immortality!! Om may peace, peace and peace be there in material, physical and spiritual existences!! >>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||

बलिया (भृगुवंशीय बलि से बलिया ) और बिशुनपुर-जौनपुर (भृगु के सगे पुत्र जमदग्नि से जमदग्निपुर: जौनपुर)  के सम्बन्ध में कुछ लोग वर्तमान में एक अमेरिकी वैज्ञानिक जगदीश को ज्यादा तरजीह आज तक दिए पर मैंने कुछ नहीं कहा पर आज सुन लीजिये दाढी वाले पंडित जी जो सप्ताह में केवल एक दिन दाढी बनवाते थे या उससे कुछ ज्यादा ही हो जाता था और जिस दिन दाढी बनाती थी तो फिर विद्यालय में बच्चों की अच्छी खबर लेते थे और यही दाढी वाले पंडित जी जो प्रयागराज के सभी गुरुकुलों में स्नातक में प्रथम स्थान पाए थे तो उनसे दाढी वाले पंडित जी से दाढी वाले पूर्व प्रधानमंत्री तक चले जाइये सब कुछ पता चल जाएगा सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ वंसज) मिश्र ब्राह्मण रामानंद कुल का?  >>>>>>>>>>>>> जो स्वयं अपने में ही पूर्ण है उस पूर्ण को किसी अपूर्ण से क्या डर मतलब किशी दलित, ईसाई और मुस्लिम से  या किशी अन्य जाति/धर्म के व्यक्ति से क्या डर वस् डर केवल और केवल एक की परमगुरु परमपिता परमेश्वर (श्रीधर:विष्णु) और परमपिता परमेश्वर (प्रेमचंद:शिव) ने जो कार्य सौपा था वह अपने आप कब सैद्धान्तिक और सामाजिक दोनों स्वरूपों में पूर्णता को प्राप्त करेगा और कही कोई सामाजिक व्यवहार गत आदर्श आचरण के पर जाकर कोई अमर्यादित आचरण न हो प्रयागराज या पैतृक निवास या अन्य किशी प्रवाशी स्थान पर भी किशी भी स्थिति में जबकी मेरे विरोधी समाजिक नियमों के प्रतिकूल आचरण जारी रखते हुए मेरा विरोध जरी रखे हों तो ऐसा इसी लिए हो सका की मैं अपने को पहचानता था और यह भी बता दें जब किशी की कोई मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ काम न आया था उस समय मेरी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ काम आया था जब इस पृथ्वी पर पक्ष और विपक्ष में घमासान मचा था और दोनों का आधार बन मैं सब कुछ अनुभव कर रहा था और हानि लाभ का भान होते हुए भी विरोधी पक्ष द्वारा हानि किये जाने के बाद भी दोनों का आधार और जीवन संबल संजीवनी बना रहा तो फिर मैं किसकी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ को जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ मानूं जो सब को नव जीवन दिया हो अपनी सहन शीलता और क्षमता के बल पर दोनों के लिए फिर मैं सामान्य सामाजिक व्यवहार कर रहा फिर भी नियति सामने वालों को मान्य नहीं तो मैं कर ही क्या सकता हूँ और समझा ही क्या सकता हूँ सामाजिक प्रक्रिया को मैं स्वाभिमान जारी रहने और मर्यादा हनन न होने हेतु अपना रहा हूँ।
शान्ति मन्त्र: तेजस्विनावधीतमस्तु = May our studies be radiantly glorious! THIS PART OF SHANTI PATH IS FROM श्वेताश्वतरोपनिशद (Shvetashvatara Upanishad) |
शान्ति मन्त्र वेदों के वे मंत्र हैं जो शान्ति की प्रार्थना करते हैं। प्राय: हिन्दुओं के धार्मिक कृत्यों के आरम्भ और अन्त में इनका पाठ किया जाता है।
तैतरीय उपनिषद, कठोपनिषद, माण्डुक्योपनिषद तथा श्वेताश्वतरोपनिशद
ॐ सह नाववतु ।
सह नौ भुनक्तु ।
सह वीर्यं करवावहै ।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
OM. Let us both protect each other together!
May both of us enjoy together!
May both of us put our energies together!
May our studies be radiantly glorious!
May there be no hatred between us!
OM Peace, Peace, Peace!
वृहदारण्यक उपनिषद तथा ईशावास्य उपनिषद
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम् पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
That Creator is Absolute, Complete and Full. This Universe is Absolutely Complete and Full. Only Absolutely Complete springs off That Absolute!
From That Absolute, even if Whole Absolute is taken out, only Absolute does remain!
OM Peace, Peace, Peace.
तैतरीय उपनिषद
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः।
शं नो भवत्वर्यमा।
शं न इन्द्रो वृहस्पतिः।
शं नो विष्णुरुरुक्रमः।
नमो ब्रह्मणे। नमस्ते वायो।
त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वामेव प्रत्यक्षम् ब्रह्म वदिष्यामि।
ॠतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि।
तन्मामवतु।
तद्वक्तारमवतु।
अवतु माम्।
अवतु वक्तारम्।
''ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
OM may Mitra do good to us, may Varuna do good to us,
May Aryama do good to us,
May Indra do good to us, may Brihaspati do good to us,
May Vishnu-who has vast coverage-do good to us,
(I) Salute O Brahma!,
Salutations to you O Vayu!,
Only you (Vayu) are the visible Brahman.
I say only you (Vayu) are the visible Brahman,
I say rta (divine law),
I say truth,
May that (truth) protect me,
May that (truth) protect teacher,
May it protect me,
May it protect teacher,
OM Peace, Peace, Peace.
केन उपनिषद तथा छान्द्योग्य उपनिषद
ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः
श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि।
सर्वम् ब्रह्मौपनिषदम् माऽहं ब्रह्म
निराकुर्यां मा मा ब्रह्म
निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणम् मेऽस्तु।
तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते
मयि सन्तु ते मयि सन्तु।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
OM may my organs, speech, Prana, eyes and ears be nourished and be well, so should all (my) senses become strong. Upanishad says all this (world) is Brahman. I don't reject Brahman, may Brahma not reject me. Let there be no rejection, let there be no rejection at all in me, let me be concentrated on Self, all those ways of righteous living told in Upanishads be in me! Be in me, OM Peace, Peace, Peace.
ऐतरेय उपनिषद
ॐ वाङ् मे मनसि प्रतिष्ठिता
मनो मे वाचि प्रतिष्ठित-मावीरावीर्म एधि।
वेदस्य म आणिस्थः श्रुतं मे मा प्रहासीरनेनाधीतेनाहोरात्रान्
संदधाम्यृतम् वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि तन्मामवतु
तद्वक्तारमवत्ववतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
OM let my speech be established in (my) mind, and (my) mind be established in my speech, May Brahman (Supreme Reality) reveal itself to me! May I be able to grasp the truths of the Vedas! Let not what I have heard (studied) forsake me! May I spend both day and night in study! I say rta (divine law), I'll say the Truth; may that (truth) protect me! May that (truth) protect the teacher! May it protect me; and may it protect the speaker as well! OM Peace, Peace, Peace.
मुण्डक उपनिषद, माण्डूक्य उपनिषद तथा प्रश्नोपनिषद
ॐ भद्रं कर्णेभिः श्रुणुयाम देवाः।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरन्ङ्गैस्तुष्टुवागं सस्तनूभिः।
व्यशेम देवहितम् यदायुः ।
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो ब्रिहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
OM O gods! Let us hear good (auspicious) things from our ears! O worshipful ones! let us see good (auspicious) things with our eyes! May our organs and body be stable, healthy and strong! May we do in the life span allotted to us by gods what pleases them.
May Indra (who is) extolled profusely in the scriptures do good to us!
May Pushan (who is) knower of world do good to us!
May Taarkshya (who) destroyer of enemies do good to us!
May Brihaspati establish good in us!
OM Peace, Peace, Peace.
अन्य स्रोतो से
There are various Other sources of Shanti Mantras, of which some of the most famous are:
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष शान्ति:
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:
सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
May peace radiate there in the whole sky, as well as in the vast ethereal space everywhere!
May peace reign all over this earth, in waters and in all herbs, trees and creepers!
May peace flow over the whole universe!
May peace flow in from the Supreme Being Brahman!
May there always exist peace in everything!
It should be peace and peace alone!
May that peace reach me too!
Om May peace, peace and peace be there in material, physical and spiritual existences!
(Translation by Swami Abhedananda, Ramakrishna Vedanta Math, India. Edited by Dr. Veda Vrata Aalok on 31st Jan. 2013.)
ॐ असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्माऽमृतं गमय।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
OM! Lead us from the unreal to the real!
Lead us from darkness to light!
Lead us from death to immortality!!
Om may peace, peace and peace be there in material, physical and spiritual existences!!
>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||