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Wednesday, October 18, 2017

आप मेरा साक्षत्कार करना चाह रहे थे तो इसी प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्विद्यालय में ही सैध्दांतिक रूप में मई, 2006 में ही हो चुका था, फिर मार्च/सितम्बर/अक्टूबर, 2007 में पुनः प्रमाणित रूप से 29/30 अक्टूबर, 2009 में तथा 19/20 जुलाई, 2011 (संस्थागत), जुलाई/अगस्त, 2014 (सामाजिक, संवैधानिक) और 29/30 नवम्बर, 2016 को मानवता के इतिहास में वर्णित हर विधि और सिद्धांत से साक्षात्कार हो चुका है क्योंकि मै वह हूँ जो ब्रह्मा की संचार प्रणाली का अगर स्रोत और आश हूँ तो जगताधार व् संरक्षक/पोषक विष्णु के विष्णुवत्व का भी स्रोत हूँ और जगत रक्षक और जगत जीवन मोचक शिव का शिवत्व का भी स्रोत हूँ तो फिर जिसपर इन तीनो जगत नियंता का भी कोई ऋण शेष नहीं रहता है तो फिर गुरु, माता-पिता और किसी अन्य सम्बन्धी का कोई ऋण कहाँ शेष रहेगा? और एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ मेरा न कोई था और न है और न होगा; और होगा भी तो उसमे और मुझमे कोई अंतर नहीं होगा वैयक्तिक परिस्थितियों के अनुकूलन से इतर तो फिर भी जगत धर्म का पालन करना और करना मेरा कर्तव्य और अधिकार है और ब्रह्मा की इक्षा को बलवती रखना मेरा प्रथम दायित्व है की जगत जननी जानकी:सीता की छाया रूपी सृष्टि (सीता स्वयं सामाजिक स्वरुप है जगत जननी जगदम्बा:दुर्गा को जो स्वयं एकल स्वरुप है महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी की) अनवरत अबाधगति से संचालित रहे तो इस हेतु मेरा समर्पण था, है और रहेगा भी|

आप मेरा साक्षत्कार करना चाह रहे थे तो इसी प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्विद्यालय में ही सैध्दांतिक रूप में मई, 2006 में ही हो चुका था, फिर मार्च/सितम्बर/अक्टूबर, 2007 में पुनः प्रमाणित रूप से 29/30 अक्टूबर, 2009 में तथा 19/20 जुलाई, 2011 (संस्थागत), जुलाई/अगस्त, 2014 (सामाजिक, संवैधानिक) और 29/30 नवम्बर, 2016 को मानवता के इतिहास में वर्णित हर विधि और सिद्धांत से साक्षात्कार हो चुका है क्योंकि मै वह हूँ जो ब्रह्मा की संचार प्रणाली का अगर स्रोत और आश हूँ तो जगताधार व् संरक्षक/पोषक विष्णु के विष्णुवत्व का भी स्रोत हूँ और जगत रक्षक और जगत जीवन मोचक शिव का शिवत्व का भी स्रोत हूँ तो फिर जिसपर इन तीनो जगत नियंता का भी कोई ऋण शेष नहीं रहता है तो फिर गुरु, माता-पिता और किसी अन्य सम्बन्धी का कोई ऋण कहाँ शेष रहेगा? और एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ मेरा न कोई था और न है और न होगा; और होगा भी तो उसमे और मुझमे कोई अंतर नहीं होगा वैयक्तिक परिस्थितियों के अनुकूलन से इतर तो फिर भी जगत धर्म का पालन करना और करना मेरा कर्तव्य और अधिकार है और ब्रह्मा की इक्षा को बलवती रखना मेरा प्रथम दायित्व है की जगत जननी जानकी:सीता की छाया रूपी सृष्टि (सीता स्वयं सामाजिक स्वरुप है जगत जननी जगदम्बा:दुर्गा को जो स्वयं एकल स्वरुप है महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी की) अनवरत अबाधगति से संचालित रहे तो इस हेतु मेरा समर्पण था, है और रहेगा भी| >>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जो हमारे जीवन संजीविनी/संचारक, जीवन आधार और जीवन संरक्षक रहे हैं, आज भी है और आगे भी होंगे उनपर आरोप मढ़ना बहुत सरल है पर स्वयं निभाना और अपनो से अनुसरण करवाना बहुत ही कठिन और दुरूह है: ----------हर जाति/धर्म का आचार्य, सेनापति व् उद्योगपति, राजनायिक व् संविधान अध्यक्ष/संविधान के तहत जिसको शासन स्थापित करने की जिसकी जिम्मेदारी है एक बार पद पाए नहीं की पुनः ग्रामीण अंचल के वनवासी और ग्रांमवासी जीवन शैली तथा सुविधा और धन अभाव में शारीरिक श्रम कर जीवन जीने से स्वयं कतरा रहे और आने वाली पीढ़ी को भी उससे दूर करने का उपाय जीवन के अंतिमदिन तक सोच रहे है और इस प्रकार मत्स्य न्याय और बन्दर बाँट कर रहा है तो फिर इसमें इस राम को दोष क्यों देते हो अगर दोष देना है तो उनको दोष और सजा दो जो केवल आर्थिक और सामाजिक ही नहीं आप के घर ले लेकर बाहर तक चारित्रिक और नैतिक गन्दगी फैलाककर उसकी भयानक लपटों के बीच बलपूर्वक सम्पूर्ण भारत पर कब्जा कर लिए हैं| और अगर ऐसा हो रहा है तो जाहिर से बात है की हमारी संवैधानिक व्यवस्था जिन लोगों और जिन पांच देशों से उधार लेकर रची गयी है और परोक्ष किन्तु पूर्णसमर्थन और सहयोग से यह पंचमेल खिचड़ी तैयार की गयी है ऐसी व्यवस्था दूरदर्शी नहीं थी और न उसको निकट भविष्य के विज्ञान के संभावित चमत्कार का पूर्णतः ज्ञान और भान था|

जो हमारे जीवन संजीविनी/संचारक, जीवन आधार और जीवन संरक्षक रहे हैं, आज भी है और आगे भी होंगे उनपर आरोप मढ़ना बहुत सरल है पर स्वयं निभाना और अपनो से अनुसरण करवाना बहुत ही कठिन और दुरूह है: ----------हर जाति/धर्म का आचार्य, सेनापति व् उद्योगपति, राजनायिक व् संविधान अध्यक्ष/संविधान के तहत जिसको शासन स्थापित करने की जिसकी जिम्मेदारी है एक बार पद पाए नहीं की पुनः ग्रामीण अंचल के वनवासी और ग्रांमवासी जीवन शैली तथा सुविधा और धन अभाव में शारीरिक श्रम कर जीवन जीने से स्वयं कतरा रहे और आने वाली पीढ़ी को भी उससे दूर करने का उपाय जीवन के अंतिमदिन तक सोच रहे है और इस प्रकार मत्स्य न्याय और बन्दर बाँट कर रहा है तो फिर इसमें इस राम को दोष क्यों देते हो अगर दोष देना है तो उनको दोष और सजा दो जो केवल आर्थिक और सामाजिक ही नहीं आप के घर ले लेकर बाहर तक चारित्रिक और नैतिक गन्दगी फैलाककर उसकी भयानक लपटों के बीच बलपूर्वक सम्पूर्ण भारत पर कब्जा कर लिए हैं| और अगर ऐसा हो रहा है तो जाहिर से बात है की हमारी संवैधानिक व्यवस्था जिन लोगों और जिन पांच देशों से उधार लेकर रची गयी है और परोक्ष किन्तु पूर्णसमर्थन और सहयोग से यह पंचमेल खिचड़ी तैयार की गयी है ऐसी व्यवस्था दूरदर्शी नहीं थी और न उसको निकट भविष्य के विज्ञान के संभावित चमत्कार का पूर्णतः ज्ञान और भान था|>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

CAN YOU IMAGINE ABOUT THAT RAM/VIVEK(GIRIDHAR)/ TRAYAMBAK /TRINETRA /TRILOCHAN/SHIVRAMKRISHN /SHRIRAMKRISHN /RAMKRISHNA/ SHRIRAM/RAM (MAHASHIV) WHO NOT SLEPT (MENTALLY) IN MORE THAN 16 YEAR BATTLE OF CULTURAL, SOCIAL, RELIGIOUS, EDUCATIONAL, PHILOSOPHICAL AND THUS A BATTEL OF HUMAN CONSERVATION/ PRESERVATION/ EFFORT FOR EASILY MOOVING HUMANITY; LIKE WISE RAGHUVANSHI RAM(WHILE SLEEPING WHO WAS KIDNAPPED BY AHIRAVAN: A GREATEST MAFIA OF THE WORLD AND RESIDENT OF THE SO CALLED WORLD SUPER POWER COUNTRY AND UNDERGROUND BROTHER OF LANKESH ~ RAVAN ) WHO SLEPT UNDER THE SECURITY OF MONKEY GUARDS.

CAN YOU IMAGINE ABOUT THAT RAM/VIVEK(GIRIDHAR)/ TRAYAMBAK /TRINETRA /TRILOCHAN/SHIVRAMKRISHN /SHRIRAMKRISHN /RAMKRISHNA/ SHRIRAM/RAM (MAHASHIV) WHO NOT SLEPT (MENTALLY) IN MORE THAN 16 YEAR BATTLE OF CULTURAL, SOCIAL, RELIGIOUS, EDUCATIONAL, PHILOSOPHICAL AND THUS A BATTEL OF HUMAN CONSERVATION/ PRESERVATION/ EFFORT FOR EASILY MOOVING HUMANITY; LIKE WISE RAGHUVANSHI RAM(WHILE SLEEPING WHO WAS KIDNAPPED BY AHIRAVAN: A GREATEST MAFIA OF THE WORLD AND RESIDENT OF THE SO CALLED WORLD SUPER POWER COUNTRY AND UNDERGROUND BROTHER OF LANKESH ~ RAVAN ) WHO SLEPT UNDER THE SECURITY OF MONKEY GUARDS.>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Monday, October 16, 2017

सशरीर सनातन परमबह्म/ब्रह्म राम(कृष्ण)= शिव(ज्येष्ठ)+विष्णु (मध्यम)+ ब्रह्मा(कनिष्ठ) + सरस्वती(ज्येष्ठ)+लक्ष्मी(मध्यम)+सती:गौरी (कनिष्ठ) = समस्त मानवता, तो इससे परे संसार का अस्तित्व कहा से सम्भव है|

सशरीर सनातन परमबह्म/ब्रह्म राम(कृष्ण)= शिव(ज्येष्ठ)+विष्णु (मध्यम)+ ब्रह्मा(कनिष्ठ) + सरस्वती(ज्येष्ठ)+लक्ष्मी(मध्यम)+सती:गौरी (कनिष्ठ) = समस्त मानवता, तो इससे परे संसार का अस्तित्व कहा से सम्भव है|

ब्रह्मा, विष्णु व महेश :
शिक्षण-प्रशिक्षण और सुरक्षा बंद हो जाने पर कोई उद्दयम (आपूर्ति, भरण-पोषण,व्यवसाय और उद्योग) अधिक दिनों तक जारी रह सकता है क्या?
आपूर्ति (भरण- पोषण)/उद्यम/योग और सुरक्षा बंद हो जाने पर कोई शिक्षण-प्रशिक्षण और अनुसंधान अधिक दिनों तक जारी रह पायेगा क्या?
आपूर्ति (भरण- पोषण)/योग/उद्यम और शिक्षण-प्रशिक्षण बंद कर हो जाने पर सुरक्षा का काम अधिक दिनों तक जारी रहेगा क्या?



Friday, October 13, 2017

परसासूमाँ (सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी) और सासुमाँ बड़ी या क्रमसः दामाद या परदामाद(देवादिदेव महादेव) बड़ा होता है यह तो स्थान स्थान की संस्कृति और संस्कार पर निर्भर करता है पर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि), राम से स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी का प्रादुर्भाव ठीक वैसे होता है जैसे देवादिदेव महादेव का तो फिर जिस देवी सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी का मानस पुत्र विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) स्वयं को मानते हैं वे देवी सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी अपने आप वास्तविक रूप में देवादिदेव महादेव से बड़ी होंगी क्योंकि विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) स्वयं देवादिदेव महादेव के प्रादुर्भावकर्ता के साथ साथ देवादिदेव महादेव के मानसपुत्र नहीं हैं जैसा की वे सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी के प्रादुर्भावकर्ता के साथ साथ मानस पुत्र भी हैं और उनको ही मानस पुत्र योग्य पाती है अपने कसौटी के सर्वोच्च नियमानुसार| टिप्पणी:---जो व्यक्तित्व, स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी[ जिस देवी का प्रादुर्भाव परमब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि)/ब्रह्म से ठीक वैसे ही होता है जैसे की उसी देवी के परदामाद देवादिदेव महादेव (ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती:गौरी:पार्वती:उमा :गिरिजा:अपर्णा के पति)] का भौतिक पुत्र तो नहीं किन्तु मानस पुत्र, विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) है तो फिर उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं है और यह भी की ऐसा न कभी था, न है और न कभी होगा| अब यहाँ भी आप को माया दिखाई दे रही होगी की आदिदेवी:आद्या:सरस्वती: महादेवी:आदिदेवी के परदामाद स्वयं आदिदेव:आदितृदेव: देवादिदेव: महादेव स्वयं है और स्वयं जिस ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी का प्रादुर्भाव राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म से होता है वही राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म स्वयं ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी के मानस पुत्र हैं जैसे की ब्रह्मा के मानसपुत्र कश्यप/मारीच(सूर्य), गौतम, वशिष्ठ, आंगिरस, भृगु, अत्रि, कौसिक (और इनसातो के सम्मिलित गुण वाले अगस्त्य/कुम्भज और इसप्रकार आठ ऋषि मतलब सप्तर्षि से अष्टक(आठ ऋषि परम्परा) जिसके आगे 24 मानक ऋषि परम्परा होते हुए वर्तमान में वासुदेव कृष्ण के सुदर्शन चक्र की 108 आरियों के बराबर 108 मानक ऋषि परम्परा तक किन्तु मूल 7 ऋषि प्रारंभिक रूप से ब्रह्मा के मानस संतान है)| लेकिन क्या सरस्वती या ब्रह्मा का कोई मानस पुत्र सरस्वती और ब्रह्मा के भौतिक पुत्र काशिराज के अस्तित्व को नकार सकता है या मिटा सकता है? काशिराज को मिटाना या उनके अस्तित्व को नकारना स्वयं राम से भी नहीं हो सकता क्या? वे भी उनके किसी दुस्साहसिक कार्य हेतु उनको मात्र अस्थायी दण्ड ही दे सकते हैं|

परसासूमाँ (सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी) और सासुमाँ बड़ी या क्रमसः दामाद या परदामाद(देवादिदेव महादेव) बड़ा होता है यह तो स्थान स्थान की संस्कृति और संस्कार पर निर्भर करता है पर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि), राम से स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी का प्रादुर्भाव ठीक वैसे होता है जैसे देवादिदेव महादेव का तो फिर जिस देवी सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी का मानस पुत्र विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) स्वयं को मानते हैं वे देवी सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी अपने आप वास्तविक रूप में देवादिदेव महादेव से बड़ी होंगी क्योंकि विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) स्वयं देवादिदेव महादेव के प्रादुर्भावकर्ता के साथ साथ देवादिदेव महादेव के मानसपुत्र नहीं हैं जैसा की वे सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी के प्रादुर्भावकर्ता के साथ साथ मानस पुत्र भी हैं और उनको ही मानस पुत्र योग्य पाती है अपने कसौटी के सर्वोच्च नियमानुसार|
टिप्पणी:---जो व्यक्तित्व, स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी[ जिस देवी का प्रादुर्भाव परमब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि)/ब्रह्म से ठीक वैसे ही होता है जैसे की उसी देवी के परदामाद देवादिदेव महादेव (ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती:गौरी:पार्वती:उमा :गिरिजा:अपर्णा के पति)] का भौतिक पुत्र तो नहीं किन्तु मानस पुत्र, विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) है तो फिर उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं है और यह भी की ऐसा न कभी था, न है और न कभी होगा| अब यहाँ भी आप को माया दिखाई दे रही होगी की आदिदेवी:आद्या:सरस्वती: महादेवी:आदिदेवी के परदामाद स्वयं आदिदेव:आदितृदेव: देवादिदेव: महादेव स्वयं है और स्वयं जिस ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी का प्रादुर्भाव राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म से होता है वही राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म स्वयं ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी के मानस पुत्र हैं जैसे की ब्रह्मा के मानसपुत्र कश्यप/मारीच(सूर्य), गौतम, वशिष्ठ, आंगिरस, भृगु, अत्रि, कौसिक (और इनसातो के सम्मिलित गुण वाले अगस्त्य/कुम्भज और इसप्रकार आठ ऋषि मतलब सप्तर्षि से अष्टक(आठ ऋषि परम्परा) जिसके आगे 24 मानक ऋषि परम्परा होते हुए वर्तमान में वासुदेव कृष्ण के सुदर्शन चक्र की 108 आरियों के बराबर 108 मानक ऋषि परम्परा तक किन्तु मूल 7 ऋषि प्रारंभिक रूप से ब्रह्मा के मानस संतान है)| लेकिन क्या सरस्वती या ब्रह्मा का कोई मानस पुत्र सरस्वती और ब्रह्मा के भौतिक पुत्र काशिराज के अस्तित्व को नकार सकता है या मिटा सकता है? काशिराज को मिटाना या उनके अस्तित्व को नकारना स्वयं राम से भी नहीं हो सकता क्या? वे भी उनके किसी दुस्साहसिक कार्य हेतु उनको मात्र अस्थायी दण्ड ही दे सकते हैं|>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, October 12, 2017

कहा जाता है की साहसी बनना ठीक है पर दुष्साहसी बनना हानिकारक होता है उसी तरह से आज के इस आधुनिक/अतिवैज्ञानिक युग में चाहे जिस जाति/धर्म से आप हों आपका सम्मानित/इज्जाजतदार/मान-पद-प्रतिष्ठायुक्त और सज्जनं बनना तो ठीक है पर अगर आप अपनी आधी आबादी के सम्बन्ध में किसी प्रसंग में आप संवेदनशील और दूरदृष्टि रखने के बजाय अतिसय सम्मानित/इज्जाजतदार/मान-सम्मान-पद-प्रतिष्ठायुक्त और सज्जन बने रहे और अगर आप कठोर निर्णय न लेते हुए इस सम्बन्ध/प्रसंग में अपने और अपने कुल के वर्षो और युगों-युगों के अपने पारिवारिक संस्कार से समझौता किये तो यह भी आपका दुष्साहसी बनना है या आपकी कमजोरी है और इस प्रकार की कमजोरी से आप की आधी आबादी आप से निरंतर धीरे-धीरे आप से दूर जा आपको कमजोर करती रहेगी और आपका सम्मान/इज्जत/मान-पद-प्रतिष्ठा और सज्जनता पूर्णरूप से तो चली जाएगी या धीरे-धीरे दूर जाती रहेगी|

कहा जाता है की साहसी बनना ठीक है पर दुष्साहसी बनना हानिकारक होता है उसी तरह से आज के इस आधुनिक/अतिवैज्ञानिक युग में चाहे जिस जाति/धर्म से आप हों आपका सम्मानित/इज्जाजतदार/मान-पद-प्रतिष्ठायुक्त और सज्जनं बनना तो ठीक है पर अगर आप अपनी आधी आबादी के सम्बन्ध में किसी प्रसंग में आप संवेदनशील और दूरदृष्टि रखने के बजाय अतिसय सम्मानित/इज्जाजतदार/मान-सम्मान-पद-प्रतिष्ठायुक्त और सज्जन बने रहे और अगर आप कठोर निर्णय न लेते हुए इस सम्बन्ध/प्रसंग में अपने और अपने कुल के वर्षो और युगों-युगों के अपने पारिवारिक संस्कार से समझौता किये तो यह भी आपका दुष्साहसी बनना है या आपकी कमजोरी है और इस प्रकार की कमजोरी से आप की आधी आबादी आप से निरंतर धीरे-धीरे आप से दूर जा आपको कमजोर करती रहेगी और आपका सम्मान/इज्जत/मान-पद-प्रतिष्ठा और सज्जनता पूर्णरूप से तो चली जाएगी या धीरे-धीरे दूर जाती रहेगी|>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

विज्ञान कहता है की प्रयागराज में अगर मक्खी पंख फड़फड़ाती है तो उसका स्थानीय से लेकर सात समुद्र पार तक असर होता है तो उसके विपरीत क्रिया का भी स्थानीय से लेकर सातवें समुद्रपार असर होता मतलब अगर पंख फड़फड़ाने के बाद अपना पंख फड़फड़ाना बन्द कर देगी तो भी उसका असर स्थानीय से लेकर सातवे समुद्र के पार तक असर होता तो मैंने पंख फड़फड़ाया तो भी उसका अगर स्थानीय से लेकर सात समुद्र पार तक हुआ तो उसके विपरीत परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(सोमनाथ:सोमेश्वर:शिव) के कहने पर 09-09-2001 से और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(सोमनाथ:सोमेश्वर:शिव) और विशेष रूप से परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) के कहने पर 7 फरवरी, 2003 से अपना पंख फड़फड़ाना बंद कर अपने को प्रयागराज में पूर्णमनोयोग और समर्पणभाव से 29/30-11-2016 तक अपने को केंद्रित किये रखा पूर्ण मर्यादित रूप से तो उसका भी आज एक वर्ष से स्थानीय से लेकर सात समुन्द्र पार तक असर हो चुका है|

विज्ञान कहता है की प्रयागराज में अगर मक्खी पंख फड़फड़ाती है तो उसका स्थानीय से लेकर सात समुद्र पार तक असर होता है तो उसके विपरीत क्रिया का भी स्थानीय से लेकर सातवें समुद्रपार असर होता मतलब अगर पंख फड़फड़ाने के बाद अपना पंख फड़फड़ाना बन्द कर देगी तो भी उसका असर स्थानीय से लेकर सातवे समुद्र के पार तक असर होता तो मैंने पंख फड़फड़ाया तो भी उसका अगर स्थानीय से लेकर सात समुद्र पार तक हुआ तो उसके विपरीत परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(सोमनाथ:सोमेश्वर:शिव) के कहने पर 09-09-2001 से और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(सोमनाथ:सोमेश्वर:शिव) और विशेष रूप से परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) के कहने पर 7 फरवरी, 2003 से अपना पंख फड़फड़ाना बंद कर अपने को प्रयागराज में पूर्णमनोयोग और समर्पणभाव से 29/30-11-2016 तक अपने को केंद्रित किये रखा पूर्ण मर्यादित रूप से तो उसका भी आज एक वर्ष से स्थानीय से लेकर सात समुन्द्र पार तक असर हो चुका है| >>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

सम्पूर्ण भारत में मात्र 15-18 प्रतिसत आबादी वाले ब्राह्मणो की आधी आबादी पर अगर भारत और विश्व के हर जाति/धर्म वाले कल-बल-छल-साम-दाम-दण्ड-भेद से अपना आधिपत्य स्थापित भी करलिए या करलेंगे तो भी वह आधी सम्पूर्ण विश्व के सभी जाति/धर्म के 1 प्रतिसत लोगों का जीवन स्तर ब्राह्मणो के बराबर नहीं कर सकती है जैसा की 30 वर्षों में विशेष रूप से विदित हुआ है पर हाँ यदि सम्पूर्ण भारत और विश्व के हर जाति/धर्म वाले ब्राह्मणो की तरह अपने घर में ही लक्ष्मी, सरस्वती, पारवती/सती और सीता और अनुसुइया का प्रादुर्भाव अपने उच्चकर्मो और संस्कारों से स्वयं करेंगे थे उनका और ब्राह्मणो का भी जीवन स्तर ऊंचा उठेगा| और यह सर्वोचित कदम और सर्वोच्च योग/उद्द्यम होगा सुसंस्कारित विश्वनिर्माण के लिए| अगर हिमालय और समुद्र का ऊर्ध्वस्तर/ऊंचाई बलपूर्वक समान कर दी जाय तो प्राकृतिक विध्वंश और जलवायुगत विनाश का जन्म होगा और हिमालय का अपना महत्त्व है और समुद्र का अपना महत्त्व है हिमालय सीना तानकर सबकुछ सहन करता है तो समुद्र निम्नस्तर पर रहकर भी मदमस्त और गंम्भीर रहता है थोड़ी बहुत हलचल के साथ और हिमालय को अपने जल से ही ऊंचाई प्रदानकरता रहता है सूर्यद्वारा स्वयं को तपाये जाने पर अपना जलवाष्प हिमालय के ऊपर पंहुचाकर और फिर उसे हिमालय के ऊपर वर्फ के रूप में जमाकर यह अलग है की नदियों के माध्यम से उस जल को पुनः एक अंश तक पुनः प्राप्तकर अपना कोष भी संरक्षित रखता है|

सम्पूर्ण भारत में मात्र 15-18 प्रतिसत आबादी वाले ब्राह्मणो की आधी आबादी पर अगर भारत और विश्व के हर जाति/धर्म वाले कल-बल-छल-साम-दाम-दण्ड-भेद से अपना आधिपत्य स्थापित भी करलिए या करलेंगे तो भी वह आधी सम्पूर्ण विश्व के सभी जाति/धर्म के 1 प्रतिसत लोगों का जीवन स्तर ब्राह्मणो के बराबर नहीं कर सकती है जैसा की 30 वर्षों में विशेष रूप से विदित हुआ है पर हाँ यदि सम्पूर्ण भारत और विश्व के हर जाति/धर्म वाले ब्राह्मणो की तरह अपने घर में ही लक्ष्मी, सरस्वती, पारवती/सती और सीता और अनुसुइया का प्रादुर्भाव अपने उच्चकर्मो और संस्कारों से स्वयं करेंगे थे उनका और ब्राह्मणो का भी जीवन स्तर ऊंचा उठेगा| और यह सर्वोचित कदम और सर्वोच्च योग/उद्द्यम होगा सुसंस्कारित विश्वनिर्माण के लिए| अगर हिमालय और समुद्र का ऊर्ध्वस्तर/ऊंचाई बलपूर्वक समान कर दी जाय तो प्राकृतिक विध्वंश और जलवायुगत विनाश का जन्म होगा और हिमालय का अपना महत्त्व है और समुद्र का अपना महत्त्व है हिमालय सीना तानकर सबकुछ सहन करता है तो समुद्र निम्नस्तर पर रहकर भी मदमस्त और गंम्भीर रहता है थोड़ी बहुत हलचल के साथ और हिमालय को अपने जल से ही ऊंचाई प्रदानकरता रहता है सूर्यद्वारा स्वयं को तपाये जाने पर अपना जलवाष्प हिमालय के ऊपर पंहुचाकर और फिर उसे हिमालय के ऊपर वर्फ के रूप में जमाकर यह अलग है की नदियों के माध्यम से उस जल को पुनः एक अंश तक पुनः प्राप्तकर अपना कोष भी संरक्षित रखता है|>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

स्थानीय से लेकर संस्थागत, प्रदेश और देश के सत्तासीन लोग व् उनके लाभार्थी लोग और उनके विरोधी लोग अपने वास्तविक उत्तरदायित्व को निभाएं न की भारत में बैठे वैदेशिक अभिकर्ताओं और विदेश में बैठे अपने आकाओं के इसारे पर और उनके चंगुल में फंसकर अपनी हनक का एहसास मुझे कराये| अगर आप अपनी हनक का एहसास नहीं कराएंगे तो यह हमारे और आप दोनों के लिए ज्यादा अच्छा होगा?

स्थानीय से लेकर संस्थागत,  प्रदेश और देश के सत्तासीन लोग व् उनके लाभार्थी लोग और उनके विरोधी लोग अपने वास्तविक उत्तरदायित्व को निभाएं न की भारत में बैठे वैदेशिक अभिकर्ताओं और विदेश में बैठे अपने आकाओं के इसारे पर और उनके चंगुल में फंसकर अपनी हनक का एहसास मुझे कराये| अगर आप अपनी हनक का एहसास नहीं कराएंगे तो यह हमारे और आप दोनों के लिए ज्यादा अच्छा होगा? >>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण। 

क्या किसी संगठन/दल/पंथ/वैयक्तिक समूह और संख्याबल/बाहुबल, धनबल और बुध्दिबल से शाश्वत सत्य बदल सकता है और उस देश में जिस देश ने "सत्यमेव जयते" का परचम सम्पूर्ण संसार में फहराने का संकल्प लिया हो? पर हाँ आप व्यवहारिक स्वरुप में उस सत्यमेव जयते को केवल कुछ हद तक सत्यम शिवम् सुंदरम में केवल परिवर्तित कर सकते है दीर्घकालिक रूप में उसी सत्येमव जयते के पूर्ण पालन हेतु| जो संगठन/दल/पंथ/वैयक्तिक समूह और संख्याबल/बाहुबल, धनबल और बुध्दिबल अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को सत्यमेव जयते की पूर्णपरिणति तक पहुंचाने का लक्ष्य नहीं रखता वह स्वयं अस्तित्व विहीन हो जाता है|------------मै मर्यादा को निभा रहा हूँ व्यवहारिक स्तर पर और मानवता के सञ्चालन में अतिसय सहयोग कर रहा हूँ बराबरी की बात लोग करने लगे हैं उस स्थिति में भी| किन्तु मुझे सत्य उसयुग में भी मालुम था और इस युग में भी और मै ही सबका आधार और संरक्षक हूँ व्यवहार में सब कुछ स्वीकारता गया किसी बड़े लक्ष्य को लेकर तो मुझे स्वयं कुछ बताने के लिए बाध्य न किया जाय जिससे अपने और पराये भी चक्कर में आये पर परायों ने दुस्साहस तब भी किया था और आज भी कर और करवा रहे है: ------------मेरे गाँव रामापुर-223225 वाले और खानदान वाले और परिवार वाले और इस प्रकार ब्राह्मण समाज भी जान लें की यह परिवार, खानदान और गाँव जिनके साथ मै मर्यादा की रक्षा हेतु लाचार नजर आज तक आया हूँ विशेषकर 09-09-2001 से 29/30-11-2016 तक और उसके बाद आज तक भी शायद वह गाँव, परिवार, खानदान, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और देश इस उसी संसार में आता है जिसके रक्षण, संरक्षण, संवर्धन व् अनवरत संचालन हेतु ही इसी प्रयागराज में सशरीर परमब्रह्म बनकर जिया हूँ उस सहस्राब्दीमाहपरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन व् उसके संक्रमण काल के दौरान और उसके उत्तरोत्तर काल के दौरान भी मर्यादित जीवन ही जी रहा हूँ| तो ऐसे में मेरे गाँव रामापुर-223225 वाले और खानदान वाले और परिवार वाले और इस प्रकार ब्राह्मण समाज कोई ऐसी गलती मुझ विवेक(गिरिधर:राम-कृष्ण) को दीन -हीन समझकर मेरे साथ न करें दूसरों के बहकावे या अपने कुत्सित स्वार्थवस जैसा की बिशुनपुर-223103 वालों ने श्रीधर(विष्णु) के साथ किया था सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन से पूर्व और उसकी परिणति किस रूप में हुई तो ऐसा समझते हुए दुस्साहस अगर आप नहीं करते हैं तो इस विश्वमानवता पर महती कृपा होगी और उसके इस संयम से यह विश्वमानवता अतिसामर्थ्यवान व् दीर्घायु होगी|

क्या किसी संगठन/दल/पंथ/वैयक्तिक समूह और संख्याबल/बाहुबल, धनबल और बुध्दिबल से शाश्वत सत्य बदल सकता है और उस देश में जिस देश ने "सत्यमेव जयते" का परचम सम्पूर्ण संसार में फहराने का संकल्प लिया हो? पर हाँ आप व्यवहारिक स्वरुप में उस सत्यमेव जयते को केवल कुछ हद तक सत्यम शिवम् सुंदरम में केवल परिवर्तित कर सकते है दीर्घकालिक रूप में उसी सत्येमव जयते के पूर्ण पालन हेतु| जो संगठन/दल/पंथ/वैयक्तिक समूह और संख्याबल/बाहुबल, धनबल और बुध्दिबल अपने दीर्घकालिक लक्ष्य को सत्यमेव जयते की पूर्णपरिणति तक पहुंचाने का लक्ष्य नहीं रखता वह स्वयं अस्तित्व विहीन हो जाता है|------------मै मर्यादा को निभा रहा हूँ व्यवहारिक स्तर पर और मानवता के सञ्चालन में अतिसय सहयोग कर रहा हूँ बराबरी की बात लोग करने लगे हैं उस स्थिति में भी| किन्तु मुझे सत्य उसयुग में भी मालुम था और इस युग में भी और मै ही सबका आधार और संरक्षक हूँ व्यवहार में सब कुछ स्वीकारता गया किसी बड़े लक्ष्य को लेकर तो मुझे स्वयं कुछ बताने के लिए बाध्य न किया जाय जिससे अपने और पराये भी चक्कर में आये पर परायों ने दुस्साहस तब भी किया था और आज भी कर और करवा रहे है: ------------मेरे गाँव रामापुर-223225 वाले और खानदान वाले और परिवार वाले और इस प्रकार ब्राह्मण समाज भी जान लें की यह परिवार, खानदान और गाँव जिनके साथ मै मर्यादा की रक्षा हेतु लाचार नजर आज तक आया हूँ विशेषकर 09-09-2001 से 29/30-11-2016 तक और उसके बाद आज तक भी शायद वह गाँव, परिवार, खानदान, ब्लॉक, तहसील, जिला, प्रदेश और देश इस उसी संसार में आता है जिसके रक्षण, संरक्षण, संवर्धन व् अनवरत संचालन हेतु ही इसी प्रयागराज में सशरीर परमब्रह्म बनकर जिया हूँ उस सहस्राब्दीमाहपरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन व् उसके संक्रमण काल के दौरान और उसके उत्तरोत्तर काल के दौरान भी मर्यादित जीवन ही जी रहा हूँ| तो ऐसे में मेरे गाँव रामापुर-223225 वाले और खानदान वाले और परिवार वाले और इस प्रकार ब्राह्मण समाज कोई ऐसी गलती मुझ विवेक(गिरिधर:राम-कृष्ण) को दीन -हीन समझकर मेरे साथ न करें दूसरों के बहकावे या अपने कुत्सित स्वार्थवस जैसा की बिशुनपुर-223103 वालों ने श्रीधर(विष्णु) के साथ किया था सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन से पूर्व और उसकी परिणति किस रूप में हुई तो ऐसा समझते हुए दुस्साहस अगर आप नहीं करते हैं तो इस विश्वमानवता पर महती कृपा होगी और उसके इस संयम से यह विश्वमानवता अतिसामर्थ्यवान व् दीर्घायु होगी| >>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

Wednesday, October 11, 2017

अमोढ़ा के पाण्डेय (11-10) यह रामापुर-223225 (/बिशुनपुर-223103) का सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय(11-11-1975) है जिसकी उपश्थिति विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीपरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसके संक्रमणकाल के दौरान विश्वमानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में अभीष्टतम रूप में अतिआवश्यक थी जो की इस हेतु रामानुचारी अवस्था से मानवता की रक्षा हेतु वैश्विक समायोजन और संघर्ष में ही विषपान 2000/2001 में ही कर चुका था; और तदनुसार विषपानकर्ता नीलकंठ पहले से ही बन चुका था किन्तु प्रयागराज में समर्पण भावयुक्त उपयुक्त समर्थ व्यक्तित्व के अभाव में इसी प्रयागराज में अपने को कूर्मावतार /कच्छप की तरह मानवता हेतु सम्पूर्ण समर्पित भाव से केंद्रित करते हुए व्यक्तिगत मान, स्वाभिमान, आशा, आकांक्षा, प्रतिस्पर्धा और सम्मान सबकुछ त्याग दिया और श्रेष्ठतम ब्राह्मण के कर्तव्य का पालन करते हुए इस संसार का श्रेष्ठतम ब्राह्मण बना केवल प्रयाग-काशी की दृष्टि से ही नहीं सम्पूर्ण संसार की दृष्टि से; सजीव-निर्जीव रूप से जो कुछ भी अपना था उस सम्बन्ध और उस हेतु अपने दायित्व/कर्तव्य/अधिकार सबकुछ का बलिदान किया जिससे इस संसार का सर्वोच्च क्षत्रिय हुआ और इस सब कुछ का मूल उद्देश्य मानवता का संरक्षण, संवर्धन और अबाधगति से सञ्चालन रहा जिसकी पूर्ण प्राप्ति हुई जिसका प्रमाण है वर्तमान सृष्टि(छाया मात्र है जगत जननी सीता के जो स्वयं सांसारिक छाया है जगत जननी जगदम्बा =दुर्गा(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की) तो इस प्रकार इस संसार का सर्वश्रेष्ठ वैश्य हुआ और अंततः यह कालखण्ड 09-09-2001 से 29/30-11-2016 में ही अपनी पूर्ण अभीष्ठ सफलता के साथ ही साथ समाप्त हो गया मतलब विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीपरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसका संक्रमणकाल स्वयं 29/30-11-2016 को ही अपनी पूर्ण अभीष्ठ सफलता के साथ ही साथ समाप्त हो गया| तो फिर जो व्यक्तित्व स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी[ जिस देवी का प्रादुर्भाव परमब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि)/ब्रह्म से ठीक वैसे ही होता है जैसे की उसी देवी के परदामाद देवादिदेव महादेव (ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती:गौरी:पार्वती:उमा :गिरिजा:अपर्णा के पति) का] का भौतिक पुत्र तो नहीं किन्तु मानस पुत्र, विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) है तो फिर उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं है और यह भी की ऐसा न कभी था, न है और न कभी होगा| अब यहाँ भी आप को माया दिखाई दे रही होगी की आदिदेवी:आद्या:सरस्वती: महादेवी:आदिदेवी के परदामाद स्वयं आदिदेव:आदितृदेव: देवादिदेव: महादेव स्वयं है और स्वयं जिस ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी का प्रादुर्भाव राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म से होता है वही राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म स्वयं ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी के मानस पुत्र हैं जैसे की ब्रह्मा के मानसपुत्र कश्यप/मारीच(सूर्य), गौतम, वशिष्ठ, आंगिरस, भृगु, अत्रि, कौसिक (और इनसातो के सम्मिलित गुण वाले अगस्त्य/कुम्भज और इसप्रकार आठ ऋषि मतलब सप्तर्षि से अष्टक(आठ ऋषि परम्परा) जिसके आगे 24 मानक ऋषि परम्परा होते हुए वर्तमान में वासुदेव कृष्ण के सुदर्शन चक्र की 108 आरियों के बराबर 108 मानक ऋषि परम्परा तक किन्तु मूल 7 ऋषि प्रारंभिक रूप से ब्रह्मा के मानस संतान है)| लेकिन क्या सरस्वती या ब्रह्मा का कोई मानस पुत्र सरस्वती और ब्रह्मा के भौतिक पुत्र काशिराज के अस्तित्व को नकार सकता है या मिटा सकता है? काशिराज को मिटाना या उनके अस्तित्व को नकारना स्वयं राम से भी नहीं हो सकता क्या? वे भी उनके किसी दुस्साहसिक कार्य हेतु उनको मात्र अस्थायी दण्ड ही दे सकते हैं|

अमोढ़ा के पाण्डेय (11-10) यह रामापुर-223225 (/बिशुनपुर-223103) का सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय(11-11-1975) है जिसकी उपश्थिति विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीपरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसके संक्रमणकाल के दौरान विश्वमानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में अभीष्टतम रूप में अतिआवश्यक थी जो की इस हेतु रामानुचारी अवस्था से मानवता की रक्षा हेतु वैश्विक समायोजन और संघर्ष में ही विषपान 2000/2001 में ही कर चुका था; और तदनुसार विषपानकर्ता नीलकंठ पहले से ही बन चुका था किन्तु प्रयागराज में समर्पण भावयुक्त उपयुक्त समर्थ व्यक्तित्व के अभाव में इसी प्रयागराज में अपने को कूर्मावतार /कच्छप की तरह मानवता हेतु सम्पूर्ण समर्पित भाव से केंद्रित करते हुए व्यक्तिगत मान, स्वाभिमान, आशा, आकांक्षा, प्रतिस्पर्धा और सम्मान सबकुछ त्याग दिया और श्रेष्ठतम ब्राह्मण के कर्तव्य का पालन करते हुए इस संसार का श्रेष्ठतम ब्राह्मण बना केवल प्रयाग-काशी की दृष्टि से ही नहीं सम्पूर्ण संसार की दृष्टि से; सजीव-निर्जीव रूप से जो कुछ भी अपना था उस सम्बन्ध और उस हेतु अपने दायित्व/कर्तव्य/अधिकार सबकुछ का बलिदान किया जिससे इस संसार का सर्वोच्च क्षत्रिय हुआ और इस सब कुछ का मूल उद्देश्य मानवता का संरक्षण, संवर्धन और अबाधगति से सञ्चालन रहा जिसकी पूर्ण प्राप्ति हुई जिसका प्रमाण है वर्तमान सृष्टि(छाया मात्र है जगत जननी सीता के जो स्वयं सांसारिक छाया है जगत जननी जगदम्बा =दुर्गा(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की) तो इस प्रकार इस संसार का सर्वश्रेष्ठ वैश्य हुआ और अंततः यह कालखण्ड 09-09-2001 से 29/30-11-2016 में ही अपनी पूर्ण अभीष्ठ सफलता के साथ ही साथ समाप्त हो गया मतलब विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीपरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसका संक्रमणकाल स्वयं 29/30-11-2016 को ही अपनी पूर्ण अभीष्ठ सफलता के साथ ही साथ समाप्त हो गया| तो फिर जो व्यक्तित्व स्वयं सरस्वती/महादेवी/आदितृदेवी/आद्या/आदिदेवी/ब्रह्मदेवी[ जिस देवी का प्रादुर्भाव परमब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि)/ब्रह्म से ठीक वैसे ही होता है जैसे की उसी देवी के परदामाद देवादिदेव महादेव (ब्रह्मा और सरस्वती के भौतिक पुत्र काशीराज दक्ष प्रजापति की पुत्री सती:गौरी:पार्वती:उमा :गिरिजा:अपर्णा के पति) का] का भौतिक पुत्र तो नहीं किन्तु मानस पुत्र, विवेक(+ विवेक की संगत बहन प्रज्ञा+ भाई ज्ञान + ज्ञान की संगत बहन विद्या)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचल/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश समेत समस्त सृष्टि) है तो फिर उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव ही नहीं है और यह भी की ऐसा न कभी था, न है और न कभी होगा| अब यहाँ भी आप को माया दिखाई दे रही होगी की आदिदेवी:आद्या:सरस्वती: महादेवी:आदिदेवी के परदामाद स्वयं आदिदेव:आदितृदेव: देवादिदेव: महादेव स्वयं है और स्वयं जिस ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी का प्रादुर्भाव राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म से होता है वही राम(महाशिव)/सशरीर परमब्रह्म स्वयं ब्रह्मदेवी:आदिदेवी:आद्या:सरस्वती:महादेवी:आदिदेवी के मानस पुत्र हैं जैसे की ब्रह्मा के मानसपुत्र कश्यप/मारीच(सूर्य), गौतम, वशिष्ठ, आंगिरस, भृगु, अत्रि, कौसिक (और इनसातो के सम्मिलित गुण वाले अगस्त्य/कुम्भज और इसप्रकार आठ ऋषि मतलब सप्तर्षि से अष्टक(आठ ऋषि परम्परा) जिसके आगे 24 मानक ऋषि परम्परा होते हुए वर्तमान में वासुदेव कृष्ण के सुदर्शन चक्र की 108 आरियों के बराबर 108 मानक ऋषि परम्परा तक किन्तु मूल 7 ऋषि प्रारंभिक रूप से ब्रह्मा के मानस संतान है)| लेकिन क्या सरस्वती या ब्रह्मा का कोई मानस पुत्र सरस्वती और ब्रह्मा के भौतिक पुत्र काशिराज के अस्तित्व को नकार सकता है या मिटा सकता है? काशिराज को मिटाना या उनके अस्तित्व को नकारना स्वयं राम से भी नहीं हो सकता क्या? वे भी उनके किसी दुस्साहसिक कार्य हेतु उनको मात्र अस्थायी दण्ड ही दे सकते हैं| >>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।


जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ व वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और ऐसे उस विशेष और विषम समय, विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी जारी सृष्टिगत (जगतजननी जगदम्बा=दुर्गा=सरस्वती+ लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा की एकल स्वरूप की जगत छाया मतलब जगतजननी सीता की छाया) संसार के संचालन से|

जो शास्वत है, अटल है और जिसे अपदस्त नहीं किया जा सकता और इस संसार का कोई भी व्यक्तित्व स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पद प्राप्त कर भी उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ व वरिष्ठ नहीं हो सकता किशी भौतिक पद की बात ही क्या? क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत सम्पूर्ण चराचर का आविर्भाव उसी सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही है और यह प्रमाणित है दो दसकों से और ऐसे उस विशेष और विषम समय, विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन के अन्तर्गत अनगिनत उहापोह के बावजूद भी जारी सृष्टिगत (जगतजननी जगदम्बा=दुर्गा=सरस्वती+ लक्ष्मी+गौरी:सती:पार्वती:गिरिजा: उमा:अपर्णा की एकल स्वरूप की जगत छाया मतलब जगतजननी सीता की छाया) संसार के संचालन से|>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

जो राम का नहीं वह मेरे किसी काम का नहीं|

जो राम का नहीं वह मेरे किसी काम का नहीं:
मेघनाद(नामतः धार्मिक रूप में रावण पुत्र) साहा अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र में कनिष्ठ शोधकर्ता का आवेदन करने से मना किया था अपने परमपिता परमेश्वर से और उन्होंने सहमति भी जताई थी 2001 में मैंने केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र में ही आवेदन किया था और 2017 में इसी ही शीर्ष प्रतिज्ञा के क्रम में मैंने मेघनाद(धार्मिक रूप में रावणपुत्र) साहा अंतरिक्ष अध्ययन केंद्र में सहआचार्य(एसोसिएट प्रोफेसर) पद हेतु आवश्यक अर्हता रखते हुए भी आवेदन नहीं किया हूँ जिसका की आवेदन करने की तिथि 8-10-2017 ही थी और मैंने केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र में ही सहआचार्य(एसोसिएट प्रोफेसर) पद हेतु आवेदन किया है| अब आप को पता हो जाना चाहिए की मेरा निर्णय यदि स्वयं हेतु हो तो कितना स्पष्ट होता है और मुझे 09-09-2001 से 29/30-11-2016 तक आप लोग जो देखे थे वह सम्पूर्ण मानवता के अभीष्ट उद्देश्य पूर्ण करने हेतु मेरा समर्पण था जो इसी दिन (29/30-11-2016) पूर्ण हुआ था जिसमे मेरे कुल समेत रावण कुल और अन्य कुल हेतु भी समर्पण आता था/है और जिसमे सम्पूर्ण मानवता का आधार मैं ही था कारण यह की रावणकुल कभी आधार बनने हेतु आवश्यक समर्पण की क्षमता रखता ही नहीं है परजीवी भी रहेगा और आम जीवन में खलल भी डालेगा जिसका की प्रत्यक्षीकरण इस प्रयागराज में इन 16/17 वर्षों में विश्वव्यापक रूप से हो चुका है|>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman. >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप(सूर्य की ऊर्जा का भी स्वयं में आतंरिक स्रोत):सूर्यकांत: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।जय श्रीराम/कृष्ण।

Tuesday, October 10, 2017

मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: इस्लामियत और ईसाइयत के एडम/आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। दलित समाज समानान्तर चलता है हनुमान/अम्बवादेकर/अम्बेदकर के पर अब तो उन्हीं के नाम का जाप करता है पर उनसे यही नहीं सीखता कि इन्द्रिय निग्रह/नियन्त्रण ही उनका शक्ति स्रोत है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।

मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: इस्लामियत और ईसाइयत के एडम/आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)

१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का। दलित समाज समानान्तर चलता है हनुमान/अम्बवादेकर/अम्बेदकर के पर अब तो उन्हीं के नाम का जाप करता है पर उनसे यही नहीं सीखता कि इन्द्रिय निग्रह/नियन्त्रण ही उनका शक्ति स्रोत है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.

5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी, जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड), जय श्रीराम/कृष्ण।

Sunday, October 8, 2017

गंगानाथ/गंगेश्वर/गंगाधर(शिव)/ब्रह्मा की गंगा(अल्का: गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगेश्वर:गंगानाथ:शिव से भावार्थित अल्का/ अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) और कृष्ण/सूर्य की यमुना का परमब्रह्म/ब्रह्म की ब्रह्मदेवी/सरस्वती/आदिदेवी/आद्या/महादेवी के उदगम स्थल पर होने वाले त्रिसंगम की महत्ता को सरस्वती/ब्रह्मदेवी/आदिदेवी/आद्या/महादेवी के मानसपुत्र विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) मतलब स्वयं सशरीर परमब्रह्म/सशरीरब्रह्म ही समझ सकता है और यह की प्रयागराज/अल्लाहबाद/इलाहाबाद-काशी/वाराणसी और इसप्रकार अयोध्या-काशी-प्रयागराज-मथुरा पर और इस प्रकार सम्पूर्ण भारतवर्ष पर सम्पूर्ण विश्व मानवता के उन लोगों का भी परोक्ष और प्रत्यक्ष हक़ है जो इससे कतिपय कारणवस अलग हो चुके हैं|

गंगानाथ/गंगेश्वर/गंगाधर(शिव)/ब्रह्मा की गंगा(अल्का: गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगेश्वर:गंगानाथ:शिव से भावार्थित अल्का/ अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) और कृष्ण/सूर्य की यमुना का परमब्रह्म/ब्रह्म की ब्रह्मदेवी/सरस्वती/आदिदेवी/आद्या/महादेवी के उदगम स्थल पर होने वाले त्रिसंगम की महत्ता को सरस्वती/ब्रह्मदेवी/आदिदेवी/आद्या/महादेवी के मानसपुत्र विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) मतलब स्वयं सशरीर परमब्रह्म/सशरीरब्रह्म ही समझ सकता है और यह की प्रयागराज/अल्लाहबाद/इलाहाबाद-काशी/वाराणसी और इसप्रकार अयोध्या-काशी-प्रयागराज-मथुरा पर और इस प्रकार सम्पूर्ण भारतवर्ष पर सम्पूर्ण विश्व मानवता के उन लोगों का भी परोक्ष और प्रत्यक्ष हक़ है जो इससे कतिपय कारणवस अलग हो चुके हैं|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Thursday, October 5, 2017

शिव की संरचना और परोक्ष समर्पण के अंतर्गत विष्णु अगर परमब्रह्म/ब्रह्म बनते हैं तो विष्णु की संरचना और परोक्ष समर्पण के अंतर्गत शिव भी परमब्रह्म/ब्रह्म बन सकते हैं बशर्ते विष्णु की सहनशक्ति शिव के समतुल्य हो जाय मतलब शिव में विष्णु और विष्णु में शिव का दर्शन हो जाय|

शिव की संरचना और परोक्ष समर्पण के अंतर्गत विष्णु अगर परमब्रह्म/ब्रह्म बनते हैं तो विष्णु की संरचना और परोक्ष समर्पण के अंतर्गत शिव भी परमब्रह्म/ब्रह्म बन सकते हैं बशर्ते विष्णु की सहनशक्ति शिव के समतुल्य हो जाय मतलब शिव में विष्णु और विष्णु में शिव का दर्शन हो जाय| >>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

परमेश्वर/परमसत्ता/परमब्रह्म/ब्रह्म के सामने सांसारिक/भौतिक सत्ता, बाहुबल/संख्याबल, धनबल और बुद्धिबल की हनक ज्यादा दिखाने का प्रयास नहीं किया करते क्योंकि ये सब उसकी कृपा तक ही अस्तित्व में रह पाते और प्रभावी होते हैं|

परमेश्वर/परमसत्ता/परमब्रह्म/ब्रह्म के सामने सांसारिक/भौतिक सत्ता, बाहुबल/संख्याबल, धनबल और बुद्धिबल की हनक ज्यादा दिखाने का प्रयास नहीं किया करते क्योंकि ये सब उसकी कृपा तक ही अस्तित्व में रह पाते और प्रभावी होते हैं| >>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| 

परमेश्वर/परमसत्ता/परमब्रह्म/ब्रह्म के सामने सांसारिक/भौतिक सत्ता, बाहुबल/संख्याबल, धनबल और बुद्धिबल की हनक ज्यादा दिखाने का प्रयास नहीं किया करते क्योंकि ये सब उसकी कृपा तक ही अस्तित्व में रह पाते और प्रभावी होते हैं|

परमेश्वर/परमसत्ता/परमब्रह्म/ब्रह्म के सामने सांसारिक/भौतिक सत्ता, बाहुबल/संख्याबल, धनबल और बुद्धिबल की हनक ज्यादा दिखाने का प्रयास नहीं किया करते क्योंकि ये सब उसकी कृपा तक ही अस्तित्व में रह पाते और प्रभावी होते हैं| >>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Wednesday, October 4, 2017

29/30 नवम्बर, 2016 को प्रयागराज केंद्रित मेरा वह सब कार्य सम्पूर्ण विधियों और सिद्धांतों की पूर्ण परिभासा और भौतिकता और सांसारिकता के साथ पूर्ण हो गया जो मुझे कूर्मावतारी अवश्था में रहने हेतु बाध्य किया था गुरुजन और पितृजन आदेश और ऋण को पूर्ण करने की पूर्ण संकल्पना और इस प्रकार मानवता अभीष्ट उद्देश्य की पूर्ती हेतु भी| इस संसार के किसी भी प्राणी और विशेष रूप से देवी समूह और देवीकुल का ऋण 27-08-2017 को तिरुअनंतपुरम/त्रिवेंद्रम जाने मात्र से ही पूर्ण हो गया| याद कीजिये विपक्ष ने जिस जिम्मेदारी को संभालने का जिम्मा लिया था उसको भलीप्रकार न निभा पाने की वजह से 2008 के मध्य में अशोकचक्र विश्वव्यापक रूप से सप्रमाण टूट जाने पर सितम्बर, 2008 में अशोकचक्र/धर्मचक्र/कालचक्र/समयचक्र को मैंने ही जोड़ा था प्रयागराज-काशी के प्रमुख मन्दिर-मन्दिर चक्कर लगाकर मृत मंदिरों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कर जो मन्दिर संसार के समस्त मन्दिरों को जीवन्त करते हैं और इस प्रकार पुनः धर्म का राज्य कायम हो सका है और यह मानवता के पुनर्जीवंत किये जाने का कार्य युगो-युगों से मुझसे ही संभव हुआ है और होगा भी| इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में जिसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सम्भव हुआ ही नहीं तो उससे बराबरी की बात करना ही अपना परिहास करना और करवाना है बाकी आगे की बात ही छोड़ दीजिये| अब मै मानवीय मर्यादा की सीमा के अन्दर अपने अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हूँ तो सामने वाले को संभलकर पारी खेलनी होगी नहीं तो फिर सामने वाले और अपने को संभालने हेतु पुनः कूर्मावतारी बनना पडेगा जो की अबकी बार अनुभव के बावजूद पुनरुदड़ण्डता के किये जाने के कारण सामने वाले पर बहुत भारी पडेगा|

29/30 नवम्बर, 2016 को प्रयागराज केंद्रित मेरा वह सब कार्य सम्पूर्ण विधियों और सिद्धांतों की पूर्ण परिभासा और भौतिकता और सांसारिकता के साथ पूर्ण हो गया जो मुझे कूर्मावतारी अवश्था में रहने हेतु बाध्य किया था गुरुजन और पितृजन आदेश और ऋण को पूर्ण करने की पूर्ण संकल्पना और इस प्रकार मानवता अभीष्ट उद्देश्य की पूर्ती हेतु भी| इस संसार के किसी भी प्राणी और विशेष रूप से देवी समूह और देवीकुल का ऋण 27-08-2017  को तिरुअनंतपुरम/त्रिवेंद्रम जाने मात्र से ही पूर्ण हो गया|  याद कीजिये विपक्ष ने जिस जिम्मेदारी को संभालने का जिम्मा लिया था उसको भलीप्रकार न निभा पाने की वजह से 2008 के मध्य में अशोकचक्र विश्वव्यापक रूप से सप्रमाण टूट जाने पर सितम्बर, 2008 में अशोकचक्र/धर्मचक्र/कालचक्र/समयचक्र को मैंने ही जोड़ा था प्रयागराज-काशी के प्रमुख मन्दिर-मन्दिर चक्कर लगाकर मृत मंदिरों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कर जो मन्दिर संसार के समस्त मन्दिरों को जीवन्त करते हैं और इस प्रकार पुनः धर्म का राज्य कायम हो सका है और यह मानवता के पुनर्जीवंत किये जाने का कार्य युगो-युगों से मुझसे ही संभव हुआ है और होगा भी| इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में जिसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सम्भव हुआ ही नहीं तो उससे बराबरी की बात करना ही अपना परिहास करना और करवाना है बाकी आगे की बात ही छोड़ दीजिये| अब मै मानवीय मर्यादा की सीमा के अन्दर अपने अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हूँ तो सामने वाले को संभलकर पारी खेलनी होगी नहीं तो फिर सामने वाले  और अपने को संभालने हेतु पुनः कूर्मावतारी बनना पडेगा जो की अबकी बार अनुभव के बावजूद पुनरुदड़ण्डता के किये जाने के कारण सामने वाले पर बहुत भारी पडेगा| >>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

The people of the new millennium congratulation to all of you with a short information! On the base of initial to final investigation I found that no one could moved a bit more in forward direction than a distance allowed by his behavior and personality gained from his family and his social environment; and neither one could face that forced superimposed condition which was arised during transition phase of the changing World from past to present new millennium (pre- preparedness for the new millennium). That is why injustice with a person like me is continue treating this strongest person of the world as a weakest person of the world but having no debt of even Gurus and Parents too in his own life means who fully sacrificed, fully forgiven and fully struggled for all hunamity on the direction of his Parents and Gurus at the centre of world humanity i.e. the Prayagaraj/Allahabad.

The people of the new millennium congratulation to all of you with a short information! 
On the base of initial to final investigation I found that no one could moved a bit more in forward direction than a distance allowed by his behavior and personality gained from his family and his social environment; and neither one could face that forced superimposed condition which was arised during transition phase of the changing World from past to present new millennium (pre- preparedness for the new millennium). That is why injustice with a person like me is continue treating this strongest person of the world as a weakest person of the world but having no debt of even Gurus and Parents too in his own life means who fully sacrificed, fully forgiven and fully struggled for all hunamity on the direction of his Parents and Gurus at the centre of world humanity i.e. the Prayagaraj/Allahabad.>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Friday, September 22, 2017

मैंने कहाँ था मै स्वयं अपना आधार लेकर ऊपर आता हूँ और सबका आधार मतलब जीवन रेखा मैं ही हूँ तो किसी से बराबरी का प्रश्न ही नहीं; प्रश्न यह की मेरे बिना किसी का अस्तित्व संभव है क्या? जो की हर किसी को पकड़ कर मेरी बराबरी करने और उसे मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सिद्ध करने का नाटक कराया जा रहा है; पर हाँ बराबरी उस रामानन्द कुल की मूल भूमि के वासिंदे, बिशुनपुर-जौनपुर-223103 से हो सकती है किन्तु मैं उस कुल को अपना गुरु पहले से ही मानता हूँ, जो की मेरा मातृकुल है तो फिर उसके सिवा मेरी बराबरी करने वाला रहा कहाँ और मुझे ज्ञान और भान इतना रहता है की इस रामानन्द कुल की बराबरी करने कभी जाता भी नहीं हूँ मतलब बराबरी करने की धृष्टता नहीं करता हूँ क्योंकि मैं उस कुल का रक्षक स्वयं हूँ और उस सम्पूर्ण गुरुग्राम, बिशुनपुर-जौनपुर-223103 का कुलदेव हूँ और मेरे लिए रामानन्द पूज्यनीय और उस शेष गाँव वालों के लिए मैं पूज्यनीय हूँ|

मैंने कहाँ था मै स्वयं अपना आधार लेकर ऊपर आता हूँ और सबका आधार मतलब जीवन रेखा मैं ही हूँ तो किसी से बराबरी का प्रश्न ही नहीं; प्रश्न यह की मेरे बिना किसी का अस्तित्व संभव है क्या? जो की हर किसी को पकड़ कर मेरी बराबरी करने और उसे मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सिद्ध करने का नाटक कराया जा रहा है; पर हाँ बराबरी उस रामानन्द कुल की मूल भूमि के वासिंदे, बिशुनपुर-जौनपुर-223103 से हो सकती है किन्तु मैं उस कुल को अपना गुरु पहले से ही मानता हूँ, जो की मेरा मातृकुल है तो फिर उसके सिवा मेरी बराबरी करने वाला रहा कहाँ और मुझे ज्ञान और भान इतना रहता है की इस रामानन्द कुल की बराबरी करने कभी जाता भी नहीं हूँ मतलब बराबरी करने की धृष्टता नहीं करता हूँ क्योंकि मैं उस कुल का रक्षक स्वयं हूँ और उस सम्पूर्ण गुरुग्राम, बिशुनपुर-जौनपुर-223103 का कुलदेव हूँ और मेरे लिए रामानन्द पूज्यनीय और उस शेष गाँव वालों के लिए मैं पूज्यनीय हूँ|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जो घर दूषित बाहुबल/संख्याबल, दूषित धनबल, दूषित ज्ञानबल के वशीभूत हो किये गए लूट और डकैती की धन सम्पत्ति और मानवीय नश्लों से वैभवशाली हुआ होता है न की उस घर के सदस्यों के अपने वास्तविक अधिकार, कर्तव्य:निजी ज्ञान, निजी पौरुष और निजी श्रम/योग/उद्यम से तो उस घर के दीर्घकाल के लिए आबाद होने की कोई ठोस गारण्टी/जिम्मेदारी नहीं होती है:---------घर न की केवल ईंट पत्थरों का ढांचा:ईमारत केवल और केवल घरेलू सामान और पारिवारिक सदस्यों से ही नहीं आबाद रहता है वरन उस परिवार में रहने वालों पारिवारिक सदस्यों के संस्कार-संस्कृति और उच्च मानवीय गुण तथा परिवार के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और पवित्र संबंधों से दीर्घकाल तक आबाद रहता है-----------अपना और अपने कुल-समाज का घर अपने चरित्र, कर्म, और परिणामी परिस्थिति से लुटा ही रहता है तो सबका घर लुटजाय तभी हमें आह्लाद होगा जिसके लिए मानव समाज विरोधी हर उन स्थानीय व् अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से समझौता करते हुए सब कुछ करेंगे और इसप्रकार जब ऐसी समाजविरोधी शक्तियों के समर्थन से दूसरे का घर उजाड़ कर जब मेरा और मेरे समाज-कुल घर बस गया और उसमे अब नई पीढ़ी आने वाली है तो ऐसे में उसे अभिशाप न लगे तो जिसका घर उजाड़ के मेरा घर वसा था उसकी सांत्वना के लिए उसको की कोई निधान/आसरा मात्र जीने के लिए दे दिया जाय यह तो बहुत ही उच्चतम विचार है आपका, पर आप का वस तो चल नहीं सका जब उसके घर आजतक के दो मात्र परमानिधान/अनन्तरूप/परमपितापरमेश्वर/सशरीर परमब्रह्म/सशरीर ब्रह्म स्वयं ही आ गए तो फिर क्या था की आप को हार्ट अटैक या मानसिक दिवालियापन मतलब पागल होना तय ही था और तब आप से निम्न से निम्न हर स्तर पर जाने की आशा अपने आप ही कर ली जाती है|

जो घर दूषित बाहुबल/संख्याबल, दूषित धनबल, दूषित ज्ञानबल के वशीभूत हो किये गए लूट और डकैती की धन सम्पत्ति और मानवीय नश्लों से वैभवशाली हुआ होता है न की उस घर के सदस्यों के अपने वास्तविक अधिकार, कर्तव्य:निजी ज्ञान, निजी पौरुष और निजी श्रम/योग/उद्यम से तो उस घर के दीर्घकाल के लिए आबाद होने की कोई ठोस गारण्टी/जिम्मेदारी नहीं होती है:---------घर न की केवल ईंट पत्थरों का ढांचा:ईमारत केवल और केवल घरेलू सामान और पारिवारिक सदस्यों से ही नहीं आबाद रहता है वरन उस परिवार में रहने वालों पारिवारिक सदस्यों के संस्कार-संस्कृति और उच्च मानवीय गुण तथा परिवार के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और पवित्र संबंधों से दीर्घकाल तक आबाद रहता है-----------अपना और अपने कुल-समाज का घर अपने चरित्र, कर्म, और परिणामी परिस्थिति से लुटा ही रहता है तो सबका घर लुटजाय तभी हमें आह्लाद होगा जिसके लिए मानव समाज विरोधी हर उन स्थानीय व् अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से समझौता करते हुए सब कुछ करेंगे और इसप्रकार जब ऐसी समाजविरोधी शक्तियों के समर्थन से दूसरे का घर उजाड़ कर जब मेरा और मेरे समाज-कुल घर बस गया और उसमे अब नई पीढ़ी आने वाली है तो ऐसे में उसे अभिशाप न लगे तो जिसका घर उजाड़ के मेरा घर वसा था उसकी सांत्वना के लिए उसको की कोई निधान/आसरा मात्र जीने के लिए दे दिया जाय यह तो बहुत ही उच्चतम विचार है आपका, पर आप का वस तो चल नहीं सका जब उसके घर आजतक के दो मात्र परमानिधान/अनन्तरूप/परमपितापरमेश्वर/सशरीर परमब्रह्म/सशरीर ब्रह्म स्वयं ही आ गए तो फिर क्या था की आप को हार्ट अटैक या मानसिक दिवालियापन मतलब पागल होना तय ही था और तब आप से निम्न से निम्न हर स्तर पर जाने की आशा अपने आप ही कर ली जाती है|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|http://vandemataramvivekananddrvkprssbhupuau.blogspot.in/

घर न की केवल ईंट पत्थरों का ढांचा:ईमारत केवल और केवल घरेलू सामान और पारिवारिक सदस्यों से ही नहीं आबाद रहता है वरन उस परिवार में रहने वालों पारिवारिक सदस्यों के संस्कार-संस्कृति और उच्च मानवीय गुण तथा परिवार के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और पवित्र संबंधों से दीर्घकाल तक आबाद रहता है-----------अपना और अपने कुल-समाज का घर अपने चरित्र, कर्म, और परिणामी परिस्थिति से लुटा ही रहता है तो सबका घर लुटजाय तभी हमें आह्लाद होगा जिसके लिए मानव समाज विरोधी हर उन स्थानीय व् अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से समझौता करते हुए सब कुछ करेंगे और इसप्रकार जब ऐसी समाजविरोधी शक्तियों के समर्थन से दूसरे का घर उजाड़ कर जब मेरा और मेरे समाज-कुल घर बस गया और उसमे अब नई पीढ़ी आने वाली है तो ऐसे में उसे अभिशाप न लगे तो जिसका घर उजाड़ के मेरा घर वसा था उसकी सांत्वना के लिए उसको की कोई निधान/आसरा मात्र जीने के लिए दे दिया जाय यह तो बहुत ही उच्चतम विचार है आपका, पर आप का वस तो चल नहीं सका जब उसके घर आजतक के दो मात्र परमानिधान/अनन्तरूप/परमपितापरमेश्वर/सशरीर परमब्रह्म/सशरीर ब्रह्म स्वयं ही आ गए तो फिर क्या था की आप को हार्ट अटैक या मानसिक दिवालियापन मतलब पागल होना तय ही था और तब आप से निम्न से निम्न हर स्तर पर जाने की आशा अपने आप ही कर ली जाती है|

घर न की केवल ईंट पत्थरों का ढांचा:ईमारत केवल और केवल घरेलू सामान और पारिवारिक सदस्यों से ही नहीं आबाद रहता है वरन उस परिवार में रहने वालों पारिवारिक सदस्यों के संस्कार-संस्कृति और उच्च मानवीय गुण तथा परिवार के सदस्यों में एक दूसरे के प्रति प्रेम और पवित्र संबंधों से दीर्घकाल तक आबाद रहता है-----------अपना और अपने कुल-समाज का घर अपने चरित्र, कर्म, और परिणामी परिस्थिति से लुटा ही रहता है तो सबका घर लुटजाय तभी हमें आह्लाद होगा जिसके लिए मानव समाज विरोधी हर उन स्थानीय व् अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से समझौता करते हुए सब कुछ करेंगे और इसप्रकार जब ऐसी समाजविरोधी शक्तियों के समर्थन से दूसरे का घर उजाड़ कर जब मेरा और मेरे समाज-कुल घर बस गया और उसमे अब नई पीढ़ी आने वाली है तो ऐसे में उसे अभिशाप न लगे तो जिसका घर उजाड़ के मेरा घर वसा था उसकी सांत्वना के लिए उसको की कोई निधान/आसरा मात्र जीने के लिए दे दिया जाय यह तो बहुत ही उच्चतम विचार है आपका, पर आप का वस तो चल नहीं सका जब उसके घर आजतक के दो मात्र परमानिधान/अनन्तरूप/परमपितापरमेश्वर/सशरीर परमब्रह्म/सशरीर ब्रह्म स्वयं ही आ गए तो फिर क्या था की आप को हार्ट अटैक या मानसिक दिवालियापन मतलब पागल होना तय ही था और तब आप से निम्न से निम्न हर स्तर पर जाने की आशा अपने आप ही कर ली जाती है|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshariya and a perfect Vaishya in a perfectBrahman.>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|