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Saturday, December 16, 2017

ॐ सारन्गधर का पुरूषत्व में शाब्दिक आसय नदीःगंगा, चन्द्रमा और धनुषःसारन्ग धारी के सन्दर्भ में क्रमसः गंगाधर:गंगानाथ शिव; गौरी शंकर शिव; विष्णु; राम और कृष्ण होगा|

ॐ  सारन्गधर का पुरूषत्व में  शाब्दिक आसय नदीःगंगा, चन्द्रमा और धनुषःसारन्ग  धारी के सन्दर्भ में क्रमसः गंगाधर:गंगानाथ शिव;  गौरी शंकर शिव; विष्णु; राम और कृष्ण होगा|

Thursday, December 14, 2017

सत्यमेव जयते को समाज पचा सके इस लिए 16/17 वर्ष दे दिया और आशा थी की लोग सत्यम शिवम सुंदरम परिकल्पना में सुख, शांति और समृद्धि पूर्वक जी लें और अपनी सहन शक्ति बढ़ा लें तथा सुमार्गगामी हो जाय पर उलटे मुझपर और मेरी शक्ति पर ही पलटवार? मेरी पहचान और स्थान ही मिटा देने का प्रयास करना कहाँ का न्याय है?


सत्यमेव जयते को समाज पचा सके इस लिए 16/17 वर्ष दे दिया और आशा थी की लोग सत्यम शिवम सुंदरम परिकल्पना में सुख, शांति और समृद्धि पूर्वक जी लें और अपनी सहन शक्ति बढ़ा लें तथा सुमार्गगामी हो जाय पर उलटे मुझपर और मेरी शक्ति पर ही पलटवार? मेरी पहचान और स्थान ही मिटा देने का प्रयास करना कहाँ का न्याय है?--------------Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।--------------Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

पूर्ण:ॐ नम: तत्सत|

पूर्णः ॐ नम: तत्सत|

श्रृजन का संकल्प


श्रृजन का संकल्प

अगर ज्यादा मात्रा वाले कीचड में अल्प/कम शुध्ध जल या केवल शुद्ध जल की कुछ बूॅद ही मिला दिया जाय शुद्धीकरण के उद्देश्य से तो भी वह कीचड परिणामतः कीचड ही रहता है शुध्ध जल नहीं बन पाता है और इस प्रकार अल्प/कम शुध्ध जल या केवल शुद्ध जल की कुछ बूॅद का भी अस्तित्व भी मिट जाता है| अतः कीचड को समाप्त करने हेतु अधिकतम मात्रा में शुद्ध जल का प्रबंधन ही श्रेश्कर है जिससे कम से कम जमे रहने वाले कीचड के बदले तुलनात्मक रूप से साफ पानी उपलब्ध हो सके और जल प्रवाह प्रारम्भ हो सके|

अगर ज्यादा मात्रा वाले कीचड में  अल्प/कम शुध्ध जल या केवल शुद्ध जल की कुछ बूॅद ही मिला दिया जाय शुद्धीकरण के उद्देश्य से तो भी वह कीचड परिणामतः कीचड ही रहता है शुध्ध जल नहीं बन पाता है और इस प्रकार अल्प/कम शुध्ध जल या केवल शुद्ध जल की कुछ बूॅद का भी अस्तित्व भी मिट जाता है| अतः कीचड को समाप्त करने हेतु अधिकतम मात्रा में शुद्ध जल का प्रबंधन ही श्रेश्कर है जिससे कम से कम जमे रहने वाले कीचड के बदले तुलनात्मक रूप से साफ पानी उपलब्ध हो सके और जल प्रवाह प्रारम्भ हो सके|  

स्वेतास्वरोपनिषद

     स्वेतास्वरोपनिषद : तेजस्विनावधीतमस्तु

Wednesday, December 13, 2017

अगर एकल व्यक्तित्व की बात की जाय तो इस विश्व के मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में वृद्ध लोगों की ऊर्जा कहाँ काम कर रही थी वे तो अपनी ऊर्जा का उपभोग या तो पूर्णतह कर चुके थे या तो दसको से उनकी ऊर्जा इंग्लैंड, अमेरिका, फ़्रांस, चीन और जापान और उनके अभिकर्ता तथा भारतीय जनता कर चुकी थी या इनको ये तथाकथित महाशक्तियां अपने जाल में फँसाये हुए थी जहाँ तक सत्य को पंहुंचने में 15/16 वर्ष लगे| यहाँ तो ऐसे सहस्राब्दी महापरिवर्तन (जैसा इस युग के दौरान रहा ऐसा कोई युग नहीं था जिसमे टेक्नोलॉजी अधितम व्यक्तियों के पास रही हो)/ विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन (जिसका मानवीय सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र का हर उचित परिणाम आया) तथा उसके संक्रमण काल में एक 25 वर्षीय अखंड ब्रह्मचर्य सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण पुत्र की पूर्ण ऊर्जा लगी हुयी थी जो अपनी तीन पीढी की ऊर्जा और उनके अरमान लिए हुए था/ है।



अगर एकल व्यक्तित्व की बात की जाय तो इस विश्व के मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में वृद्ध लोगों की ऊर्जा कहाँ काम कर रही थी वे तो अपनी ऊर्जा का उपभोग या तो पूर्णतह कर चुके थे या तो दसको से उनकी ऊर्जा इंग्लैंड, अमेरिका, फ़्रांस, चीन और जापान और उनके अभिकर्ता तथा भारतीय जनता कर चुकी थी या इनको ये तथाकथित महाशक्तियां अपने जाल में फँसाये हुए थी जहाँ तक सत्य को पंहुंचने में 15/16 वर्ष लगे| यहाँ तो ऐसे सहस्राब्दी महापरिवर्तन (जैसा इस युग के दौरान रहा ऐसा कोई युग नहीं था जिसमे टेक्नोलॉजी अधितम व्यक्तियों के पास रही हो)/ विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन (जिसका मानवीय सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र का हर उचित परिणाम आया) तथा उसके संक्रमण काल में एक 25 वर्षीय अखंड ब्रह्मचर्य सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण पुत्र की पूर्ण ऊर्जा लगी हुयी थी जो अपनी तीन पीढी की ऊर्जा और उनके अरमान लिए हुए था/ है।>>>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

ॐ महाशिव:सदाशिव(राम:कृष्ण):सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही त्रिदेव व त्रिदेवी का आविर्भाव होता है मतलब पुरुष और प्रकृति/श्रिष्टि का आविर्भाव होता है| मानवता के मूल बिंदु प्रयागराज की यह धरा इस तथ्य का प्रमाण है कि सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका के दिनों में महाशिव:सदाशिव(राम:कृष्ण):सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म ने एकल स्वरुप में पक्ष-विपक्ष समेत सम्पूर्ण संसार की शक्ति और पुरुषार्थ को स्वयं धारण किया था कोई देवी या कोई देवता तक उनके साथ नहीं था और सांसारिकता में व्यस्त होने के नाते इन देवी देवताओं को वास्तविक स्थिति का वास्तविक रूप में पूर्ण भान/ज्ञान भी नहीं था और तो यहाँ तक की गुरुदेव भी सांसारिकता में व्यस्त होने के नाते मूल स्थिति की गंभीरता से अवगत नहीं थे तो ऐसी अवस्था सशरीर परमब्रह्म को अपने अंदर ही गुरु प्राप्त करना पड़ा था स्थिति से निपटने के लिए| सभी देवी-देवता तब प्रकट होने सुरु हुए जब मई, 2006 में सशरीर परमब्रह्म का अभीष्ट लक्ष्य हेतु पूर्ण प्रकटी करन हुआ और अभीष्ट लक्ष्य सैद्धान्तिक और वास्तविक अर्थों में प्राप्त भी हुआ और सशरीर परमब्रह्म के प्रकटी करन के बाद ही सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका का संक्रमण काल आ गया जो 29/30 नवम्वर, 2016 तक चला मतलब अभीष्ट लक्ष्य के सांसारिक रूप में भी परिभाषित सभी सिद्धांतो, यम-नियम व् विधि-विधान तथा संविधान अनुरूप प्राप्ति तक ; तो फिर यह सत्य ही है कि महाशिव:सदाशिव(राम: कृष्ण): सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही त्रिदेव व त्रिदेवी का आविर्भाव होता है मतलब पुरुष और प्रकृति/श्रिष्टि का आविर्भाव होता है|

ॐ महाशिव:सदाशिव(राम:कृष्ण):सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही त्रिदेव व त्रिदेवी का आविर्भाव होता है मतलब पुरुष और प्रकृति/श्रिष्टि का आविर्भाव होता है| मानवता के मूल बिंदु प्रयागराज की यह धरा इस तथ्य का प्रमाण है कि सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका के दिनों में महाशिव:सदाशिव(राम:कृष्ण):सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म ने एकल स्वरुप में पक्ष-विपक्ष समेत सम्पूर्ण संसार की शक्ति और पुरुषार्थ को स्वयं धारण किया था कोई देवी या कोई देवता तक उनके साथ नहीं था और सांसारिकता में व्यस्त होने के नाते इन देवी देवताओं को वास्तविक स्थिति का वास्तविक रूप में पूर्ण भान/ज्ञान भी नहीं था और तो यहाँ तक की गुरुदेव भी सांसारिकता में व्यस्त होने के नाते मूल स्थिति की गंभीरता से अवगत नहीं थे तो ऐसी अवस्था सशरीर परमब्रह्म को अपने अंदर ही गुरु प्राप्त करना पड़ा था स्थिति से निपटने के लिए| सभी देवी-देवता तब प्रकट होने सुरु हुए जब मई, 2006 में सशरीर परमब्रह्म का अभीष्ट लक्ष्य हेतु पूर्ण प्रकटी करन हुआ और अभीष्ट लक्ष्य सैद्धान्तिक और वास्तविक अर्थों में प्राप्त भी हुआ और सशरीर परमब्रह्म के प्रकटी करन के बाद ही सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका का संक्रमण काल आ गया जो 29/30 नवम्वर, 2016 तक चला मतलब अभीष्ट लक्ष्य के सांसारिक रूप में भी परिभाषित सभी सिद्धांतो, यम-नियम व् विधि-विधान तथा संविधान अनुरूप प्राप्ति तक ; तो फिर यह सत्य ही है कि महाशिव:सदाशिव(राम: कृष्ण): सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म से ही त्रिदेव व त्रिदेवी का आविर्भाव होता है मतलब पुरुष और प्रकृति/श्रिष्टि का आविर्भाव होता है|>>>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

कृष्ण

राम मर्यादापुरुषोत्तम तो कृष्ण योगयोगेश्वर एक मर्यादित पूर्ण सत्य तो एक व्यवहारिक परिस्थिति से साक्षात्कार करते हुये सम्पूर्ण कलुष स्वयम हरते हुये पूर्ण सत्य को समर्पित|

राम

राम+कृष्ण=रामकृष्ण=राम=पूर्ण+पूर्ण=पूर्ण=सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म

पुरुषार्थी होने के साथ ही साथ जीवन्त और स्थिति प्रज्ञ बनो मतलब सुव्यक्तित्व बने या बनने का सदा प्रयास करे और इस प्रकार स्वयं और समस्त मानवता को सुखद और शांतिमय बनाने के लिए प्रयासरत रहें।

पुरुषार्थी होने के साथ ही साथ जीवन्त और स्थिति प्रज्ञ बनो मतलब सुव्यक्तित्व बने या बनने का सदा प्रयास करे और इस प्रकार स्वयं और समस्त मानवता को सुखद और शांतिमय बनाने के लिए प्रयासरत रहें। >>>>>>>>>--------Hi Five (Pandey)>>>>>>>>>>> A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Tuesday, December 12, 2017

सब प्रश्नों का उत्तर एक की हिन्दू ही मूल है मानवता का और हिन्दू सर्व शसक्त हो पर क्या हिन्दू व् हिन्दू समाज शसक्त और समर्थ रहना चाहता है या पानी की तरह अपने मूल सिद्धान्तों के प्रति भी आसानी से समझौता कर अतिसय सरल और अधः पतनगामी बन बिना शर्त अन्य धर्म की तरफ जा पलायनवादी तस्वीर इस संसार की पेश करना चाहता है? इस संसार की भयावह स्थिति सनातन हिन्दू या हिन्दू की संख्या की कमी से इसीलिए होती जा रही है। जैसे जैसे सनातन हिन्दू या हिन्दू बने रहने की प्रवृत्ति में कमी होती जाएगी संसार की मानवता के मूल सिद्धान्तों से पलायनवादी तस्वीर उभरती जाएगी और फिर मानवता समूल नाश की तरफ बढ़ती जाएगी।

सब प्रश्नों का उत्तर एक की हिन्दू ही मूल है मानवता का और हिन्दू सर्व शसक्त हो पर क्या हिन्दू व् हिन्दू समाज शसक्त और समर्थ रहना चाहता है या पानी की तरह अपने मूल सिद्धान्तों के प्रति भी आसानी से समझौता कर अतिसय सरल और अधः पतनगामी बन बिना शर्त अन्य धर्म की तरफ जा पलायनवादी तस्वीर इस संसार की पेश करना चाहता है? इस संसार की भयावह स्थिति सनातन हिन्दू या हिन्दू की संख्या की कमी से इसीलिए होती जा रही है। जैसे जैसे सनातन हिन्दू या हिन्दू बने रहने की प्रवृत्ति में कमी होती जाएगी संसार की मानवता के मूल सिद्धान्तों से पलायनवादी तस्वीर उभरती जाएगी और फिर मानवता समूल नाश की तरफ बढ़ती जाएगी।--------Hi Five (Pandey)<<<<<<<>>>>>>>>>>>>>>> A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Monday, December 11, 2017

मेरे तीनो विश्व स्तर के गुरु कुल (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, प्रयागराज विश्विद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान) में विद्वानों की कमी थी क्या उस युग में जिस हेतु मुझे समाधिष्ठ रहना पड़ा उस युग से लेकर आज तक?

मेरे तीनो विश्व स्तर के गुरु कुल (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, प्रयागराज विश्विद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान) में विद्वानों की कमी थी क्या उस युग में जिस हेतु मुझे समाधिष्ठ रहना पड़ा उस युग से लेकर आज तक? --------Hi Five (Pandey)<<<<<<<>>>>>>>>>>>>>>> A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| 

इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश की कृपापात्रता पर मेरा अस्तित्व नहीं हैं उन्होंने अपना सब अंश मुझसे वापस लेकर देख लिया है पर हाँ मेरे अस्तित्व पर उनका अस्तित्व अवश्य निर्भर था, निर्भर और और निर्भर रहेगा| -

इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश की कृपापात्रता पर मेरा अस्तित्व नहीं हैं उन्होंने अपना सब अंश मुझसे वापस लेकर देख लिया है पर हाँ मेरे अस्तित्व पर उनका अस्तित्व अवश्य निर्भर था, निर्भर और और निर्भर रहेगा| --------------Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

भारत स्थित लोगों के लिए ही नहीं इस विश्व के हर कोने में बैठे मानवता के हर क्षेत्र के हर महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व और वंसज के लिए मेरा उसके क्षेत्र में संभावित सांसारिक अस्तित्व इसलिए खटकता था क्योंकि शिव का ग्यारहवा अवतार हनुमान/अम्बवाडेकर/अम्बेडकर/अम्बवाडेकर(जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी अवस्था वाला पुरुषार्थी) तो केवल प्रारंभिक अवस्था है और एक अंश मात्र है पर वास्तविक रूप में विवेक(गिरिधर)/महाशिवःसदाशिव:सशरीर-परमब्रह्म/ब्रह्म(राम) यह हैं|

भारत स्थित लोगों के लिए ही नहीं इस विश्व के हर कोने में बैठे मानवता के हर क्षेत्र के हर महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व और वंसज के लिए मेरा उसके क्षेत्र में संभावित सांसारिक अस्तित्व इसलिए खटकता था क्योंकि शिव का ग्यारहवा अवतार हनुमान/अम्बवाडेकर/अम्बेडकर/अम्बवाडेकर(जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी अवस्था वाला पुरुषार्थी) तो केवल प्रारंभिक अवस्था है और एक अंश मात्र है पर वास्तविक रूप में  विवेक(गिरिधर)/महाशिवःसदाशिव:सशरीर-परमब्रह्म/ब्रह्म(राम) यह हैं:>>>> विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति)/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))||  Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार))|  अतः मैंने सबको अपने ऊपर नीचे और आगे तथा पीछे से गुजर जाने दिया और किसी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं किया तो आप मेरी सहनसीलता/सामर्थ्य और मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ व् मेरे एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ की परिकल्पना और आंकलन कर ही नहीं सके| लेकिन इतना तो था की वह अयोध्या, काशी, प्रयागराज और मथुरा से होगा तो मेरी सहमति है की केवल और केवल यही से ही हो सकता है और मैंने बता दिया की रामपुर(सुदामा:सौदामा:जिसका दामन सुन्दर हो), आजमगढ़ से है|--------------Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिवःसदाशिव(राम)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:सदाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

KBCAOS

K. Banerjee Center of Atmospheric and Ocean Studies

Kedareshwar Banerjee Center of Atmospheric and Ocean Studies

केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवम महासागरीय अध्ययन केंद्र

संसार को आकर्षक व् चमत्कारिक रूप में चलायमान रखना है तो कुछ पीड़ा मानवधर्म का वाहक और कर्तव्यनिष्ठ होने के नाते तो हम सभी को भी होगी ही होगी पर इसकी आड़ में किसी एक के अभीष्ट त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम के परिणामी अभीष्ट सफलता को नजरअंदाज कर उसे ही बारम्बार समाधिष्ठ किया जाता रहे तो यह ठीक नहीं| अतः इस हेतु उसके समाधिष्ठ होने का लाभ लेने वालों में से क्रमिक रूप से किसी को समाधिष्ठ होने का दायित्व लेना चाहिए|

संसार को आकर्षक व् चमत्कारिक रूप में चलायमान रखना है तो कुछ पीड़ा मानवधर्म का वाहक और कर्तव्यनिष्ठ होने के नाते तो हम सभी को भी होगी ही होगी पर इसकी आड़ में किसी एक के अभीष्ट त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम के परिणामी अभीष्ट सफलता को नजरअंदाज कर उसे ही बारम्बार समाधिष्ठ किया जाता रहे तो यह ठीक नहीं| अतः इस हेतु उसके समाधिष्ठ होने का लाभ लेने वालों में से क्रमिक रूप से किसी को समाधिष्ठ होने का दायित्व लेना चाहिए|    

मैंने मई, 2006 से लेकर आज तक निर्भीक रूप से कम से कम साइबर संसार के विश्वव्यापी हिन्दू संस्कारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मानने वाले ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य तथा उनकी व्युत्पन्न जाति/धर्म/पन्थ/सम्प्रदाय/मतावलम्बियों का संगठन किया है जिससे कम से कम प्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग लाभान्वित हुए है और सनातन धर्म और उसके अनुसांगिक जाति/धर्म/पन्थ/सम्प्रदाय/मतावलम्बी के अनुकूल माहौल के निर्माण का प्रथम स्थान भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (दक्षिण भारत) रहा है जहाँ प्रत्यक्ष रूप से विद्वत नवीन पीढ़ी के बीच मैंने पूरे दो वर्ष (2007-2009) प्रभावी रूप में बिताये जिसकी ही देन है मेरा ब्लॉग, "Vivekanand and Modern Tradition" आज संसार के हर भाग से पढ़ा जाता है जिसके सीधे 4 लाख पाठक हो चुके हैं जिसके साथ फेसबुक और ऑरकुट पर अतिरिक्त रूप से लाखों पाठको ने इस पढ़ा है | वैसे इसे विषय विशेष के साथ धर्म, दर्शन/अध्यात्म और यम-नियम सब जानने वाले ही समझ सकते हैं पर बहुत से मर्मस्पर्शी तथ्य है जो हर किसी के विश्वव्यापक और वैश्विक रूप से हर स्तर के जीवन से जुड़े है जो आज की वैश्विक परिश्थितियों से जुड़े है जिससे पाठक लाभान्वित हुए बिना नहीं रह सकते हैं|

मैंने मई, 2006 से लेकर आज तक निर्भीक रूप से कम से कम साइबर संसार के विश्वव्यापी हिन्दू संस्कारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मानने वाले ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य तथा उनकी व्युत्पन्न जाति/धर्म/पन्थ/सम्प्रदाय/मतावलम्बियों का संगठन किया है जिससे कम से कम प्रत्यक्ष रूप से लाखों लोग लाभान्वित हुए है और सनातन धर्म और उसके अनुसांगिक जाति/धर्म/पन्थ/सम्प्रदाय/मतावलम्बी के अनुकूल माहौल के निर्माण का प्रथम स्थान भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (दक्षिण भारत) रहा है जहाँ प्रत्यक्ष रूप से विद्वत नवीन पीढ़ी के बीच मैंने पूरे दो वर्ष (2007-2009) प्रभावी रूप में बिताये जिसकी ही देन है मेरा ब्लॉग, "Vivekanand and Modern Tradition" आज संसार के हर भाग से पढ़ा जाता है जिसके सीधे 4 लाख पाठक हो चुके हैं जिसके साथ फेसबुक और ऑरकुट पर अतिरिक्त रूप से लाखों पाठको ने इस पढ़ा है | वैसे इसे विषय विशेष के साथ धर्म, दर्शन/अध्यात्म और यम-नियम सब जानने वाले ही समझ सकते हैं पर बहुत से मर्मस्पर्शी तथ्य है जो हर किसी के विश्वव्यापक और वैश्विक रूप से हर स्तर के जीवन से जुड़े है जो आज की वैश्विक परिश्थितियों से जुड़े है जिससे पाठक लाभान्वित हुए बिना नहीं रह सकते हैं|

भाई हो तो रामपुर (सुदामा/सौदामा/जिसका दामन सुन्दर हो) आजमगढ़ जैसा हो और उस भाई को ज्ञात हो की हम और आप सितम्बर, 1998 (काशी आगमन) /2000(प्रयागराज आगमन) से लेकर 29/30 नवम्बर, 2016 तक में ही प्रयागराज में ही वैश्विक चुनौती का लक्ष्य भेद कर परमवैभव प्राप्त कर लिए है (संस्थागत की स्वयं के स्वीकृति-2011 के बाद संस्था द्वारा अधिशासी व्यवस्था तहत सार्वजनिक सूचना द्वारा दिए गए सार्वजनिक सूचना में स्वीकृति-2014; और उसके बाद अंतिम रूप से संस्था द्वारा 29/30 नवम्बर, 2016 को कानूनी स्वीकृति के साथ समस्त यम-नियम और सिद्धान्त से केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र के प्रयागराज विश्विद्यालय का एक पूर्ण शिक्षक युक्त शिक्षण व् शोध केंद्र/इकाई होने की स्वीकृति द्वारा परम् वैभव की पूर्ती) और अब बाकी लोगों को परम वैभव प्राप्त करना है और यह की आपका अंश मेरे पास है मतलब आप ही वास्तविकता में मेरे में आधे के हिस्सेदार है|

भाई हो तो रामपुर (सुदामा/सौदामा/जिसका दामन सुन्दर हो) आजमगढ़ जैसा हो और उस भाई को ज्ञात हो की हम और आप सितम्बर, 1998 (काशी आगमन) /2000(प्रयागराज आगमन) से लेकर 29/30 नवम्बर, 2016 तक में ही प्रयागराज में ही वैश्विक चुनौती का लक्ष्य भेद कर परमवैभव प्राप्त कर लिए है (संस्थागत की स्वयं के स्वीकृति-2011 के बाद संस्था द्वारा अधिशासी व्यवस्था तहत सार्वजनिक सूचना द्वारा दिए गए सार्वजनिक सूचना में स्वीकृति-2014; और उसके बाद अंतिम रूप से संस्था द्वारा 29/30 नवम्बर, 2016 को कानूनी स्वीकृति के साथ समस्त यम-नियम और सिद्धान्त से केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र के प्रयागराज विश्विद्यालय का एक पूर्ण शिक्षक युक्त शिक्षण व् शोध केंद्र/इकाई होने की स्वीकृति द्वारा परम् वैभव की पूर्ती) और अब बाकी लोगों को परम वैभव प्राप्त करना है और यह की आपका अंश मेरे पास है मतलब आप ही वास्तविकता में मेरे में आधे के हिस्सेदार है|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|
केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवम महासागर अध्ययन केंद्र
K. Banerjee Center of Atmospheric and Ocean Studies
Kedareshwar Banerjee Center of Atmospheric and Ocean Studies


ज्ञान, विज्ञान और कला, साहित्य और संगठन मानव समाज और उसकी संस्कृति और संस्कार को मजबूत और उन्नत बनाने के लिए होते हैं न की मानव समाज और उसकी संस्कृति और संस्कार का शमन कर हम ज्ञान, विज्ञान और कला, साहित्य और संगठन को आगे जारी रखें मतलब इनके वाहक और इनके वाहको की पीढ़ी और वंश क्या निर्भय और स्वस्थ्य वातावरण के जीवन जीते हुए रक्षित-संरक्षित-संवर्धित हो रही है समय और आम समाज के साथ या ध्वस्त हो चुकी है मतलब कहीं चिराग तले ही अन्धेरा तो नहीं है?

ज्ञान, विज्ञान और कला, साहित्य और संगठन मानव समाज और उसकी संस्कृति और संस्कार को मजबूत और उन्नत बनाने के लिए होते हैं न की मानव समाज और उसकी संस्कृति और संस्कार का शमन कर हम ज्ञान, विज्ञान और कला, साहित्य और संगठन को आगे जारी रखें मतलब इनके वाहक और इनके वाहको की पीढ़ी और वंश क्या निर्भय और स्वस्थ्य वातावरण के जीवन जीते हुए रक्षित-संरक्षित-संवर्धित हो रही है समय और आम समाज के साथ या ध्वस्त हो चुकी है मतलब कहीं चिराग तले ही अन्धेरा तो नहीं है?

85 वर्ष से अधिक की आयु को जीने वाले राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ और विश्वहिन्दु परिषद के मुझसे निकटतम सम्बंधित सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्रा ब्राह्मण, पारसनाथ(शाब्दिक अर्थ शिव) और सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण, अभयचंद (निडर चन्द्र=पूर्णचंद्र:पूर्णिमा के दिन वाला चन्द्रमा)) के इस दुनिया से जाने के बाद एक युग का अंत हुआ। काशीराम, नारायणन, जार्ज फर्नांडीज, अटल जी, कलाम गुरुदेव और अब जोशी जी और उनके भक्त तक के नाम का प्रयोग जिनके सामने काम नहीं आया मेरे सम्बन्ध में। जिसमे जिसकी सहन सीलता और पुरुषार्थ की जो अवकात थी उसी के अनुरूप अपना प्रदर्शन किया।

85 वर्ष से अधिक की आयु को जीने वाले राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ और विश्वहिन्दु परिषद के मुझसे निकटतम सम्बंधित सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी मिश्रा ब्राह्मण, पारसनाथ(शाब्दिक अर्थ शिव) और सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण, अभयचंद (निडर चन्द्र=पूर्णचंद्र:पूर्णिमा के दिन वाला चन्द्रमा)) के इस दुनिया से जाने के बाद एक युग का अंत हुआ। काशीराम, नारायणन, जार्ज फर्नांडीज, अटल जी, कलाम गुरुदेव और अब जोशी जी और उनके भक्त तक के नाम का प्रयोग जिनके सामने काम नहीं आया मेरे सम्बन्ध में। जिसमे जिसकी सहन सीलता और पुरुषार्थ की जो अवकात थी उसी के अनुरूप अपना प्रदर्शन किया।

जिन लोगों के डर वश किशी सवर्ण/ब्राह्मण/हिन्दू को अपनी कन्याओं का विवाह धार्मिक, सामाजिक और प्रकार संवैधानिक नियमों के विरुद्ध करना पड़ता है या पड़ रहा है और देश-विदेश के रास्ते आने-जाने में वे भी सबसे आगे मतलब वे देश रूपी बॉक्स में ही जीवन नहीं जी रहे हैं बल्कि उनको बाहर से प्रोत्साहित भी किया जा रहा है, तो उनको सार्वजनिक राजस्व से आये धन सम्पदा के आधार पर सृजित सेवापद, शिक्षाप्रवेश और तरह-तरह की निःशुल्क सुविधा को जारी रखे जाने का औचित्य किस आधार पर? और यह कौन से "सत्यमेव जयते" की नीति पर जारी है?

जिन लोगों के डर वश किशी सवर्ण/ब्राह्मण/हिन्दू को अपनी कन्याओं का विवाह धार्मिक, सामाजिक और प्रकार संवैधानिक नियमों के विरुद्ध करना पड़ता है या पड़ रहा है और देश-विदेश के रास्ते आने-जाने में वे भी सबसे आगे मतलब वे देश रूपी बॉक्स में ही जीवन नहीं जी रहे हैं बल्कि उनको बाहर से प्रोत्साहित भी किया जा रहा है, तो उनको सार्वजनिक राजस्व से आये धन सम्पदा के आधार पर सृजित सेवापद, शिक्षाप्रवेश और तरह-तरह की निःशुल्क सुविधा को जारी रखे जाने का औचित्य किस आधार पर? और यह कौन से "सत्यमेव जयते" की नीति पर जारी है?

Sunday, December 10, 2017

नारीवादी होना गलत नहीं पर नारीवादी होने की आंड में सम्पूर्ण विश्व को चरित्रहीनता के गोरख धंधे में धकेलना नितांत गलत है और यह बहुत ही जोर शोर से जारी वर्तमान युग में।

नारीवादी होना गलत नहीं पर नारीवादी होने की आंड में सम्पूर्ण विश्व को चरित्रहीनता के गोरख धंधे में धकेलना नितांत गलत है और यह बहुत ही जोर शोर से जारी वर्तमान युग में।

शादी न करना, ब्रह्मचर्य होना, अखंड ब्रह्मचर्य होना, और विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य होना सबमें अंतर है। कोई अविवाहित हैं इसका मतलब वह अखंड ब्रह्मचर्य या ब्रह्मचर्य ही हैं यह कोई निश्चित कारण, तथ्य या मापन नही है किसी के ब्रह्मचर्य होने का। और अविवाहित जो है उसका भी ब्रह्मचर्य जीवन में कई बार भंग हो सकता है जिसका भान/ज्ञान उसको स्वयं होता है अतः उसको वैसे मार्ग से स्वयं अपनी सुरक्षा हेतु बचना चाहिए जो केवल विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य तथा उसके बाद भी "जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी" के लिए ही निहित होता है हनुमान/आंबेडकर/अम्बवादेकर जी की तरह।

शादी न करना, ब्रह्मचर्य होना, अखंड ब्रह्मचर्य होना, और विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य होना सबमें अंतर है। कोई अविवाहित हैं इसका मतलब वह अखंड ब्रह्मचर्य या ब्रह्मचर्य ही हैं यह कोई निश्चित कारण, तथ्य या मापन नही है किसी के ब्रह्मचर्य होने का। और अविवाहित जो है उसका भी ब्रह्मचर्य जीवन में कई बार भंग हो सकता है जिसका भान/ज्ञान उसको स्वयं होता है अतः उसको वैसे मार्ग से स्वयं अपनी सुरक्षा हेतु बचना चाहिए जो केवल विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य तथा उसके बाद भी "जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी" के लिए ही निहित होता है हनुमान/आंबेडकर/अम्बवादेकर जी की तरह।

हिंदुस्तान में कार्यरत इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश और उनके अभिकर्ताओं अगर मुझपर आप लोग वार करेंगे साम-दाम-दण्ड-भेद या येन केन प्रकारेण तो उसका परिणाम इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश को भुगतना ही पडेगा या उसका प्रायश्चित इस संसार को और स्वयं आप लोगों को करना ही पडेगा किसी न किशी प्रकार से। आप कितने भी समृद्ध है तो क्या पहले अपने यहाँ का मानवीय/सामाजिक पर्यावरण दूषित होने से पहले बचाये जिसका प्रसार होने से हमारा हिंदुस्तान भी काफी हद तक दूषित हो चुका है और दूषित होता ही जा रहा है तो आप पहले अपनी चिंता कीजिये जिसमे आप हमें लपेटे जा रहे हैं और हम भी दूषित होते जा रहे है? ऐसे में हम कोई सख्त कदम उठा आप के कृत्य के विरोध में खड़े होते हैं तो आप मेरे स्वाभिमान पर चोट करते हैं और प्रतिवार होने पर आप संसार के समक्ष अपनी दूषित मानवीय संस्कार/संस्कृति/सभ्यता को उजागर न कर केवल विरोध और प्रतिवार का रोना रोते हैं ? पहले अपनी गलती पर अपने को कोशो की जो हिन्दू (श्रेष्ठतम संस्कार/संस्कृति/सभ्यता युक्त व्यक्तित्व) बन के या सनातन हिन्दू आप के घर जाता है वह पुनः हिन्दू बनके पूर्णतः वापस नहीं आता है तो आप का परिवेश कैसा है इसी पर विचार कर लीजिये?

हिंदुस्तान में कार्यरत इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश और उनके अभिकर्ताओं अगर मुझपर आप लोग वार करेंगे साम-दाम-दण्ड-भेद या येन केन प्रकारेण तो उसका परिणाम इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ़्रांस, जापान, चीन और खाड़ी के देश को भुगतना ही पडेगा या उसका प्रायश्चित इस संसार को और स्वयं आप लोगों को करना ही पडेगा किसी न किशी प्रकार से। आप कितने भी समृद्ध है तो क्या पहले अपने यहाँ का मानवीय/सामाजिक पर्यावरण दूषित होने से पहले बचाये जिसका प्रसार होने से हमारा हिंदुस्तान भी काफी हद तक दूषित हो चुका है और दूषित होता ही जा रहा है तो आप पहले अपनी चिंता कीजिये जिसमे आप हमें लपेटे जा रहे हैं और हम भी दूषित होते जा रहे है? ऐसे में हम कोई सख्त कदम उठा आप के कृत्य के विरोध में खड़े होते हैं तो आप मेरे स्वाभिमान पर चोट करते हैं और प्रतिवार होने पर आप संसार के समक्ष अपनी दूषित मानवीय संस्कार/संस्कृति/सभ्यता को उजागर न कर केवल विरोध और प्रतिवार का रोना रोते हैं ? पहले अपनी गलती पर अपने को कोशो की जो हिन्दू (श्रेष्ठतम संस्कार/संस्कृति/सभ्यता युक्त व्यक्तित्व) बन के या सनातन हिन्दू आप के घर जाता है वह पुनः हिन्दू बनके पूर्णतः वापस नहीं आता है तो आप का परिवेश कैसा है इसी पर विचार कर लीजिये?

जहाँ तक किशी दौर में प्रयागराज विश्विद्यालय में एक विशेष दिन के लिए किशी आगंतुक संगणक प्रशिक्षक को एक रूपये का सिक्का देकर पढने की बात है तो उस समय उस दिन मेरे पास केवल एक रूपया ही पास था पर्श रूम पर छूट गया था नहीं तो और दिया होता। अभी तक मैंने जिस किशी भी गुरु से शिक्षा लिया हूँ उनसे उऋण नहीं हुआ हूँ क्योंकि वे सब भारत और भारतीयों में अपनी आस्था और ईमानदारी रखते है (इसका मतलब यह नहीं की वे विदेशियों से मानवता का व्यवहार नहीं करते हैं और उनको ठगते हैं) तो वह प्रशिक्षक जिसकी आस्था उस विदेश में है जो समय, काल और पारिस्थितिक रूप से मेरे विरोध में कार्यरत था और वह पैसा कमाऊं है उसकी शिक्षा का ऋण उसी समय देना उचित था। वैसे मै अपने राजस्व ब्राह्मण(वह ब्राह्मण जो रज=लक्ष्मी के बिना चलता ही नहीं है)/श्रीवास्तव/कायस्थ गुरुदेव के विशेष दबाव में उस प्रशिक्षक की कक्षा में बैठा था बहुत देर बाद और उनसे कुछ शिखा भी नही था। तो उस एक रूपये के सिक्के को देने के बदले मैं उनसे प्रशिक्षण की कक्षा में प्रशिक्षण लिया था और पैसा होता उस दिन मेरी जेब में तो और दिया होता।

जहाँ तक किशी दौर में प्रयागराज विश्विद्यालय में एक विशेष दिन के लिए किशी आगंतुक संगणक प्रशिक्षक को एक रूपये का सिक्का देकर पढने की बात है तो उस समय उस दिन मेरे पास केवल एक रूपया ही पास था पर्श रूम पर छूट गया था नहीं तो और दिया होता। अभी तक मैंने जिस किशी भी गुरु से शिक्षा लिया हूँ उनसे उऋण नहीं हुआ हूँ क्योंकि वे सब भारत और भारतीयों में अपनी आस्था और ईमानदारी रखते है (इसका मतलब यह नहीं की वे विदेशियों से मानवता का व्यवहार नहीं करते हैं और उनको ठगते हैं) तो वह प्रशिक्षक जिसकी आस्था उस विदेश में है जो समय, काल और पारिस्थितिक रूप से मेरे विरोध में कार्यरत था और वह पैसा कमाऊं है उसकी शिक्षा का ऋण उसी समय देना उचित था। वैसे मै अपने राजस्व ब्राह्मण(वह ब्राह्मण जो रज=लक्ष्मी के बिना चलता ही नहीं है)/श्रीवास्तव/कायस्थ गुरुदेव के विशेष दबाव में उस प्रशिक्षक की कक्षा में बैठा था बहुत देर बाद और उनसे कुछ शिखा भी नही था। तो उस एक रूपये के सिक्के को देने के बदले मैं उनसे प्रशिक्षण की कक्षा में प्रशिक्षण लिया था और पैसा होता उस दिन मेरी जेब में तो और दिया होता।

किशी तीसरे और चौथे व्यक्ति की गलती से मैं अपना कोई गुरुकुल छोड़ दूँ तो यह मेरी सबसे बड़ी मूर्खता साबित होती और मैं गुरुकुल के किशी पाढ़यक्रम में शामिल हो आत्मविभोर ही हुआ हूँ और उन गुरुओं से कक्षा में बैठकर मुझे पुनः शिक्षा लेने का शौभाग्य प्राप्त हुआ पर नए गुरुजन में से मुस्किल से एक दो को ही पढ़ सका जो मेरे समकक्ष उम्र के थे और उनमे मेरी रूचि भी उतनी नहीं थी जितनी की अपने समकालीन गुरुजन में|

किशी तीसरे और चौथे व्यक्ति की गलती से मैं अपना कोई गुरुकुल छोड़ दूँ तो यह मेरी सबसे बड़ी मूर्खता साबित होती और मैं गुरुकुल के किशी पाढ़यक्रम में शामिल हो आत्मविभोर ही हुआ हूँ और उन गुरुओं से कक्षा में बैठकर मुझे पुनः शिक्षा लेने का शौभाग्य प्राप्त हुआ पर नए गुरुजन में से मुस्किल से एक दो को ही पढ़ सका जो मेरे समकक्ष उम्र के थे और उनमे मेरी रूचि भी उतनी नहीं थी जितनी की अपने समकालीन गुरुजन में|

पहले दोआब:प्रयागराज-काशी तब पंजाब:सिंध यह तो मै बहुत पहले से कह रहा हूँ कोई जब सुने तब न। कश्यप=मनु ऋषि और उनकी पत्नी अदिति=श्रद्धा प्रथम ऋषि दंपत्ति हैं जो ऋषी सभ्यता से मानव सभ्यता का शुभारम्भ किये थे जिनसे कश्यप गोत्र परम्परा आरम्भ हुई जिसके बाद अन्य ऋषी दम्पति द्वारा मानव परम्परा का आरम्भ हुआ और उनके गोत्र से वंसज प्रथा सुरु हुई और इस प्रकार प्रयागराज-काशी के ऋषि परम्परा से कश्यप ऋषि के कश्मीर क्षेत्र के मैदानी और नदी घाटी क्षेत्र, सिंध-पंजाब से मानव परम्परा का प्रादुर्भाव हुआ पर मानवता का मूल बिंदु प्रयागराज-काशी ही है क्योंकि ऋषि परम्परा से ही मानव परम्परा का प्रादुर्भाव हुआ। पहले दोआब:प्रयागराज-काशी तब पंजाब:सिंध यह तो मै बहुत पहले से कह रहा हूँ कोई जब सुने तब न। तो यह विचार का विषय है की जिस मनु=कश्यप और श्रद्धा=अदिति दंपत्ति के प्रयास से हम मानवता की प्रथम श्रेणी से हम आज की इस अवस्था में पहुंचे है उन्ही को हम अपने द्वारा उठाये गए गलत नियमों और कर्मों के दंड से बचने हेतु गाली दें?

पहले दोआब:प्रयागराज-काशी तब पंजाब:सिंध यह तो मै बहुत पहले से कह रहा हूँ कोई जब सुने तब न। कश्यप=मनु ऋषि और उनकी पत्नी अदिति=श्रद्धा प्रथम ऋषि दंपत्ति हैं जो ऋषी सभ्यता से मानव सभ्यता का शुभारम्भ किये थे जिनसे कश्यप गोत्र परम्परा आरम्भ हुई जिसके बाद अन्य ऋषी दम्पति द्वारा मानव परम्परा का आरम्भ हुआ और उनके गोत्र से वंसज प्रथा सुरु हुई और इस प्रकार प्रयागराज-काशी के ऋषि परम्परा से कश्यप ऋषि के कश्मीर क्षेत्र के मैदानी और नदी घाटी क्षेत्र, सिंध-पंजाब से मानव परम्परा का प्रादुर्भाव हुआ पर मानवता का मूल बिंदु प्रयागराज-काशी ही है क्योंकि ऋषि परम्परा से ही मानव परम्परा का प्रादुर्भाव हुआ। पहले दोआब:प्रयागराज-काशी तब पंजाब:सिंध यह तो मै बहुत पहले से कह रहा हूँ कोई जब सुने तब न। तो यह विचार का विषय है की जिस मनु=कश्यप और श्रद्धा=अदिति दंपत्ति के प्रयास से हम मानवता की प्रथम श्रेणी से हम आज की इस अवस्था में पहुंचे है उन्ही को हम अपने द्वारा उठाये गए गलत नियमों और कर्मों के दंड से बचने हेतु गाली दें?

आप विनम्रता को किस प्रकार परिभाषित करते है? जो आप के सामने नत मस्तक हो सब कुछ सुन ले ? तो ऐसे बहुत से चरित्रहीन और स्वार्थी आप को मिल जाएंगे पर सच्चे विनम्र लोग नहीं मिलेंगे। कारन यह की चरित्रहीन और स्वार्थी चाहेगा की मेरे चरित्रहीनता के धंधे में आगे से बाधा न आये कुछ सुनने में क्या जा रहा और स्वार्थी समझेगा की मुझे इनसे कार्य लेना है तो जी हुजूरी में हाँ करने में क्या जा रहा ? पर सच्चे चरित्रवान और सच्चे व्यक्ति सही बात का समर्थन करेंगे और गलत तथ्यों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और आप सहमत न हों तो वे अगर आप का विरोध नहीं करेंगे तो उस विषय पर आप से दूरी अवश्य बना लेंगे।

आप विनम्रता को किस प्रकार परिभाषित करते है? जो आप के सामने नत मस्तक हो सब कुछ सुन ले ? तो ऐसे बहुत से चरित्रहीन और स्वार्थी आप को मिल जाएंगे पर सच्चे विनम्र लोग नहीं मिलेंगे। कारन यह की चरित्रहीन और स्वार्थी चाहेगा की मेरे चरित्रहीनता के धंधे में आगे से बाधा न आये कुछ सुनने में क्या जा रहा और स्वार्थी समझेगा की मुझे इनसे कार्य लेना है तो जी हुजूरी में हाँ करने में क्या जा रहा ? पर सच्चे चरित्रवान और सच्चे व्यक्ति सही बात का समर्थन करेंगे और गलत तथ्यों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और आप सहमत न हों तो वे अगर आप का विरोध नहीं करेंगे तो उस विषय पर आप से दूरी अवश्य बना लेंगे।

Thursday, December 7, 2017

अब शायद सब कुछ सही रहे ऐसी आशा है मुझे तो ऐसी स्थिति में मेरी लेखनी की दीर्घकालिक विरामावस्था में "Vivekanand and Modern Tradition" को आप देखते रहिएगा और जीवन के हर क्षेत्र के मर्म का मर्मज्ञ बनते रहिएगा और यह भी की मै "सत्यमेव् जयते"/परमसत्य और "सत्यम शिवम् सुन्दरम"/व्यवहारिक सत्य (व्यवहारिकसत्य से परमसत्य के पथ पर अग्रसर होना ही प्रगतिशीलसत्य के अनुसरणकर्ता की निसानी मतलब आर्य सत्य है) से 2008 तक परिचित हो गया था पर आप का जागरण करना था तो सबकुछ अभी तक जारी रहा लेकिन इन दोनों से बिना कोई प्रत्यक्ष व्यक्तिगत सहयोग लिए उनका परिचय आप से कराना मेरा परम् धर्म था तो आप सब मत-मतावलम्बी उनसे पूर्ण परिचित हो गए और मेरा कार्य पूर्ण हो गया|

अब शायद सब कुछ सही रहे ऐसी आशा है मुझे तो ऐसी स्थिति में मेरी लेखनी की दीर्घकालिक विरामावस्था में "Vivekanand and Modern Tradition" को आप देखते रहिएगा और जीवन के हर क्षेत्र के मर्म का मर्मज्ञ बनते रहिएगा और यह भी की मै "सत्यमेव् जयते"/परमसत्य  और "सत्यम शिवम् सुन्दरम"/व्यवहारिक सत्य (व्यवहारिकसत्य से परमसत्य के पथ पर अग्रसर होना ही प्रगतिशीलसत्य के अनुसरणकर्ता की निसानी मतलब आर्य सत्य है) से 2008 तक परिचित हो गया था पर आप का जागरण करना था तो सबकुछ अभी तक जारी रहा लेकिन इन दोनों से बिना कोई प्रत्यक्ष व्यक्तिगत सहयोग लिए उनका परिचय आप से कराना मेरा परम् धर्म था तो आप स मत-मतावलम्बी उनसे पूर्ण परिचित हो गए और मेरा कार्य पूर्ण हो गया|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

लोमड़ी/लोमस की तरह अतिसय चालाक और अतिसय बुद्धिमान बनने से अच्छा होता है शेर की तरह सामर्थ्ययुक्त बुध्दिमान होना जिसमे कम से कम सबको रक्षित-संरक्षित, नियंत्रित और दिशानिर्देश तथा नवनिर्माण करने का पुरुषार्थी जीवन तो निहित रहता है| -------यह सिर स्वेक्षा से मामा जी लोगों जो विश्वगुरु (जौनपुर) क्षेत्र से है उनके ही चरणों में ही झुकता है और इस हेतु मामा जी और मेरे गुरु जी रहे श्रीधर:विष्णु (जगतगुरु:त्रिदेवों में भी गुरु बृहस्पति) को परमगुरु परमपिता परमेश्वर और ताऊजी प्रेमचंद:चन्द्रप्रेमी:सोमेश्वर: सोमनाथ:शिव को केवल परमपिता परमेश्वर कहता हूँ जिन दो लोगों ने मुझे मेरे शोध गुरु से मुझे उन दिनों परिचत कराया था सगोत्रीय बड़े भाई और अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्वयंसेवक की दृष्टि से जीजा जी के तौर पर|

लोमड़ी/लोमस की तरह अतिसय चालाक और अतिसय बुद्धिमान बनने से अच्छा होता है शेर की तरह सामर्थ्ययुक्त बुध्दिमान होना जिसमे कम से कम सबको रक्षित-संरक्षित, नियंत्रित और दिशानिर्देश तथा नवनिर्माण करने का पुरुषार्थी जीवन तो निहित रहता है| -------यह सिर स्वेक्षा से मामा जी लोगों जो विश्वगुरु (जौनपुर) क्षेत्र से है उनके ही चरणों में ही झुकता है और इस हेतु मामा जी और मेरे गुरु जी रहे श्रीधर:विष्णु (जगतगुरु:त्रिदेवों में भी गुरु बृहस्पति) को परमगुरु परमपिता परमेश्वर और ताऊजी प्रेमचंद:चन्द्रप्रेमी:सोमेश्वर: सोमनाथ:शिव को केवल परमपिता परमेश्वर कहता हूँ जिन दो लोगों ने मुझे मेरे शोध गुरु से मुझे उन दिनों परिचत कराया था सगोत्रीय बड़े भाई और अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय स्वयंसेवक की दृष्टि से जीजा जी के तौर पर| >>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

ॐ सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म रामःसदाशिवःमहाशिव सनातन संस्कृति है हमारी जिनकी उपज हैं शिव, विष्णु व ब्रह्मा तो फिर राम को जो को अनुचित लगे वह तीनो मे से किसी एक या दो के चाहने से उचित कैसे हो सकता है? मैने बिशुनपुर-223103 के रामानन्द और रामापुर-223225 के सारन्गधर(शिवःगंगाधरः गंगानाथ; विष्णु; राम व कृष्ण) के मूल भूमि वासी रामप्रसाद मिश्र प्रति रामप्रसाद पाण्डेय कुल का प्रतिनिधित्व किया था इस मानवता के मूल केन्द्र प्रयागराज मे विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन व उसके सन्क्रमण काल मे व अद्यतन जिसमे एक व्याशी(वशिष्ठ पौत्र)-गौतम मिश्र सनातन ब्राह्मण और एक त्रिफला(त्रिदेवःत्रिदेवी:विल्वापत्रःबेलपत्रःशिव व शिवा को अर्पणेय/आहार और अस्तित्व रहा तो स्वयम शिव बना)-कश्यप पाण्डेय सनातन ब्राह्मण है|

ॐ सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म रामःसदाशिवःमहाशिव सनातन संस्कृति है हमारी जिनकी उपज हैं शिव, विष्णु व ब्रह्मा तो फिर राम को जो को अनुचित लगे वह तीनो मे से किसी एक या दो के चाहने से उचित कैसे हो सकता है? मैने बिशुनपुर-223103 के रामानन्द और रामापुर-223225 के सारन्गधर(शिवःगंगाधरः गंगानाथ; विष्णु; राम व कृष्ण) के मूल भूमि वासी रामप्रसाद मिश्र प्रति रामप्रसाद पाण्डेय कुल का प्रतिनिधित्व किया था इस मानवता के मूल केन्द्र प्रयागराज मे विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन व उसके सन्क्रमण काल मे व अद्यतन जिसमे एक व्याशी(वशिष्ठ पौत्र)-गौतम मिश्र सनातन ब्राह्मण और एक त्रिफला(त्रिदेवःत्रिदेवी:विल्वापत्रःबेलपत्रःशिव व शिवा को अर्पणेय/आहार और अस्तित्व रहा तो स्वयम शिव बना)-कश्यप पाण्डेय सनातन ब्राह्मण है|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

नेता जी! भाई ने प्रत्यक्ष/परोक्ष भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर में जनवरी माह, 2008 में (जब मेरा विवाह अवध क्षेत्र में तय हो चुका था) कहा था /कहवाया था की तुम्हारा कार्य पूर्ण हो चुका है और इस दुनिया के किसी देश में भी तुम आशियाना बना सकते हो उसकी जिम्मेदारी मेरी है केवल तुम्हारे पास पासपोर्ट होना चाहिए आज रात भर सोच लो तो मुझे रातभर बिशुनपुर-223103 और रामापुर-223225 का प्राथमिक विद्यालय नजर आ रहा था और सुबह जब भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर, जिमखाना के ग्राउंड से गुजर रहा था तो मुझे वहाँ अजीव सा आभास हुआ की दो तीन स्थान पर खुले में बच्चे पेड़ों के नीचे एक दो पुरुष और महिला द्वारा पढ़ाये जा रहे हैं (यह उसी प्रकार से प्रतीत होता है जैसे केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र के उद्भव के प्रारंभिक दिनों में इस केंद्र पर अलग अलग व्यक्तित्व के आने से मुझे केंद्र में बैठे ही अलग अलग एहसास हो रहा था आंधी, घनघोर वृष्टि/वर्षा, आकाशीय कड़क के साथ विजली की चमक, तूफान, चक्रवात और भूकंप आने का आभास होता था और कुछ लोगों के आने से लगता था की मुझपर ज्वलनशील पदार्थ लोग डाल रहे है और अतिसय और असहनीय जलन हो रही है फिर भी मै सलामत हूँ) और इस प्रकार मुझे इस मिट्टी से अथाह प्रेम प्रतीत हुआ की उसी शाम तक उनको बता दिया की मुझे किसी देश में नहीं जाना केवल यहीं रहना है और इस प्रकार 2004 में बने पासपोर्ट को 2014 में वैधता समाप्त होने पर भी जान बूझकर रिन्यू नहीं करवाया हूँ जबकि वैश्विक युग है यह इसे सब जानते हैं अच्छी तरह से| तो मेरी लेखनी स्थानीय शांति और सम्पन्नता के साथ वैश्विक शांति और सम्पन्नता को समर्पित है क्योंकि ये एक दूसरे को जाने और अनजाने प्रभावित करते हैं जिसका उदाहरण है की साधन सम्पन्नता की हमारे अंदर ललक है और उसका उपभोग कर रहे हैं जो हम दूसरे देशों से प्राप्त किये हैं अपनी कुछ मात्रा में संस्कृति और मानवीय संशाधन लुटाते हुए तो वैश्विक मानवता के साथ समुचित न्याय के साथ अतीव देश भक्ति रखने वाले ऐसे व्यक्ति के देश भक्ति और मानव भक्ति, सहनसीलता और पुरुषार्थ पर संदेह मत कीजिये यह मानिये की जहाँ भी हूँ वहाँ परमसत्य और व्यावहारिक सत्य का अनुपालन मतलब "सत्यमेव जयते" और "सत्यम शिवम् सुंदरम" की पूर्ण प्राप्ति हेतु ही समर्पित हूँ और वैसे भी भगवा की छाया जहां भी है वहाँ जाना मेरा कर्तव्य है पर इतना भी जानता हूँ की भगवाधारी या भगवा की छाया की आड़ में कोई निम्न या अमानवीय और अशोभनीय कृत्य करता भी है तो वह अपने आत्मिक, मानसिक नाश को भौतिक नाश से ज्यादा बुलावा देता है और उसका क्रमिक क्षरण स्वयं होता है|

नेता जी! भाई ने प्रत्यक्ष/परोक्ष भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर में जनवरी माह, 2008 में (जब मेरा विवाह अवध क्षेत्र में तय हो चुका था) कहा था /कहवाया था की तुम्हारा कार्य पूर्ण हो चुका है और इस दुनिया के किसी देश में भी तुम आशियाना बना सकते हो उसकी जिम्मेदारी मेरी है केवल तुम्हारे पास पासपोर्ट होना चाहिए आज रात भर सोच लो तो मुझे रातभर बिशुनपुर-223103 और रामापुर-223225 का प्राथमिक विद्यालय नजर आ रहा था और सुबह जब भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर, जिमखाना के ग्राउंड से गुजर रहा था तो मुझे वहाँ अजीव सा आभास हुआ की दो तीन स्थान पर खुले में बच्चे पेड़ों के नीचे एक दो पुरुष और महिला द्वारा पढ़ाये जा रहे हैं (यह उसी प्रकार से प्रतीत होता है जैसे केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र के उद्भव के प्रारंभिक दिनों में इस केंद्र पर अलग अलग व्यक्तित्व के आने से मुझे केंद्र में बैठे ही अलग अलग एहसास हो रहा था आंधी, घनघोर वृष्टि/वर्षा, आकाशीय कड़क के साथ विजली की चमक, तूफान, चक्रवात और भूकंप आने का आभास होता था और कुछ लोगों के आने से लगता था की मुझपर ज्वलनशील पदार्थ लोग डाल रहे है और अतिसय और असहनीय जलन हो रही है फिर भी मै सलामत हूँ) और इस प्रकार मुझे इस मिट्टी से अथाह प्रेम प्रतीत हुआ की उसी शाम तक उनको बता दिया की मुझे किसी देश में नहीं जाना केवल यहीं रहना है और इस प्रकार 2004 में बने पासपोर्ट को 2014 में वैधता समाप्त होने पर भी जान बूझकर रिन्यू नहीं करवाया हूँ जबकि वैश्विक युग है यह इसे सब जानते हैं अच्छी तरह से| तो मेरी लेखनी स्थानीय शांति और सम्पन्नता के साथ वैश्विक शांति और सम्पन्नता को समर्पित है क्योंकि ये एक दूसरे को जाने और अनजाने प्रभावित करते हैं जिसका उदाहरण है की साधन सम्पन्नता की हमारे अंदर ललक है और उसका उपभोग कर रहे हैं जो हम दूसरे देशों से प्राप्त किये हैं अपनी कुछ मात्रा में संस्कृति और मानवीय संशाधन लुटाते हुए तो वैश्विक मानवता के साथ समुचित न्याय के साथ अतीव देश भक्ति रखने वाले ऐसे व्यक्ति के देश भक्ति और मानव भक्ति, सहनसीलता और पुरुषार्थ पर संदेह मत कीजिये यह मानिये की जहाँ भी हूँ वहाँ परमसत्य और व्यावहारिक सत्य का अनुपालन मतलब "सत्यमेव जयते" और "सत्यम शिवम् सुंदरम" की पूर्ण प्राप्ति हेतु ही समर्पित हूँ और वैसे भी भगवा की छाया जहां भी है वहाँ जाना मेरा कर्तव्य है पर इतना भी जानता हूँ की भगवाधारी या भगवा की छाया की आड़ में कोई निम्न या अमानवीय और अशोभनीय कृत्य करता भी है तो वह अपने आत्मिक, मानसिक नाश को भौतिक नाश से ज्यादा बुलावा देता है और उसका क्रमिक क्षरण स्वयं होता है|

Wednesday, December 6, 2017

I love the sun for it warms my bones; yet I love the rain for it cleanses my spirit. I love the light for it shows me the way; yet I love the darkness for it shows me the stars. I welcome happiness for it enlarges my heart; yet I endure sadness for it opens my soul. I acknowledge rewards for they are my due; yet I welcome obstacles for they are my challenge.

I love the sun for it warms my bones; yet I love the rain for it cleanses my spirit. I love the light for it shows me the way; yet I love the darkness for it shows me the stars. I welcome happiness for it enlarges my heart; yet I endure sadness for it opens my soul. I acknowledge rewards for they are my due; yet I welcome obstacles for they are my challenge.

अगर मानवता हित का सम्यक प्रयोजन न हो और उस सर्वोच्च सत्ता मतलब परमसत्य जिसकी प्रत्यक्ष और परोक्ष छाया मेरे ऊपर रही के सम्मान का प्रयोजन न हो तो मै व्यक्तिगत हित और व्यक्तिगत अधिकार के लिए कुछ नहीं करता और अगर मेरे ऐसे प्रयोजन रहे हैं और उस हेतु मैंने कोई प्रयास किया है तो फिर वास्तविक विजय श्री मेरी हो चुकी है और आगे भी मेरी ही होगी और सत्यमेव जयते और सत्यम शिवम् सुंदरम दोनों अपनी अभीष्टता को प्राप्त होंगे ही होंगे|

अगर मानवता हित का सम्यक प्रयोजन न हो और उस सर्वोच्च सत्ता मतलब परमसत्य जिसकी प्रत्यक्ष और परोक्ष छाया मेरे ऊपर रही के सम्मान का प्रयोजन न हो तो मै व्यक्तिगत हित और व्यक्तिगत अधिकार के लिए कुछ नहीं करता और अगर मेरे ऐसे प्रयोजन रहे हैं और उस हेतु मैंने कोई प्रयास किया है तो फिर वास्तविक विजय श्री मेरी हो चुकी है और आगे भी मेरी ही होगी और सत्यमेव जयते और सत्यम शिवम् सुंदरम दोनों अपनी अभीष्टता को प्राप्त होंगे ही होंगे|

ट्रांसफार्मर में सभी तार सही स्थान पर रहे तो वह उच्च विद्युत् प्रवाह जारी रखता है और यदि तार अपने मूल स्थान से थोड़ा भी विचलित हुए तो उस ट्रांसफार्मर का विध्ध्वंश हो जाता है तो मानवता रूपी ट्रांसफार्मर के साथ एक बार ऐसा ही हो चुका है जिसको अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(चन्द्रप्रेमी:सोमेश्वर:सोमनाथ:शिव) के निर्देश और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) के विशेष आदेश पर और जोशी(ब्रह्मा) और सहकर्मियों (संगठन विशेष) की युक्ति पर स्वयं ढाल बनते हुए स्वयं सशरीर परमब्रह्म अवश्था में जाकर इस प्रयागराज में ही उन दिनों से लेकर आज तक केंद्रित कर बचा चुका हूँ तो अब आप समझ जाइये की जो परमब्रह्म/ब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वयं बन चुका हो संसार में और जिसका तात्कालिक कोई विकल्प नहीं था तो उसकी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ उच्चतम है तथा उसके इस संसार में सभी का एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने पर संदेह नहीं करते हैं पर हाँ जो समुचित रूप से मानवता के लिए हितकारी और व्यवहारिक है उसे करना चाहिए और उसे किया जा रहा है और मेरे किसी पाले में भौतिक रूप से देखे जाने से परम सत्य नहीं बदलता है किन्तु व्यावहारिक सत्य अवश्य बदलता है तो व्यावहारिक सत्य को ही बदलना केवल ब्रह्मा या किसी संगठन के हाँथ में है| स्वयं परमब्रह्म अवस्था में गया था और इसी निमित्त अपने प्रथम पुत्र का नाम विष्णुकांत:विष्णुस्वामी(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश~ राम) रखा और आप की ही युक्ति और आशा थी दोनों पक्ष को संतुलित करने हेतु द्वितीय पुत्र का नाम कृष्णकान्त=कृष्णस्वामी=कृष्ण(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश~कृष्ण) रखा तो अब आप अगर गलत युक्ति का प्रयोग करते है परम सत्य "सत्यमेव जयते" और व्यावहारिक सत्य "सत्यम शिवम् सुंदरम" के साथ तो आप उसके आवश्यक परिणाम पाने के हकदार होंगे|

ट्रांसफार्मर में सभी तार सही स्थान पर रहे तो वह उच्च विद्युत् प्रवाह जारी रखता है और यदि तार अपने मूल स्थान से थोड़ा भी विचलित हुए तो उस ट्रांसफार्मर का विध्ध्वंश हो जाता है तो मानवता रूपी ट्रांसफार्मर के साथ एक बार ऐसा ही हो चुका है जिसको अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(चन्द्रप्रेमी:सोमेश्वर:सोमनाथ:शिव) के निर्देश और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) के विशेष आदेश पर और जोशी(ब्रह्मा) और सहकर्मियों (संगठन विशेष) की युक्ति पर स्वयं ढाल बनते हुए स्वयं सशरीर परमब्रह्म अवश्था में जाकर इस प्रयागराज में ही उन दिनों से लेकर आज तक केंद्रित कर बचा चुका हूँ तो अब आप समझ जाइये की जो परमब्रह्म/ब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वयं बन चुका हो संसार में और जिसका तात्कालिक कोई विकल्प नहीं था तो उसकी मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ उच्चतम है तथा उसके इस संसार में सभी का एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने पर संदेह नहीं करते हैं पर हाँ जो समुचित रूप से मानवता के लिए हितकारी और व्यवहारिक है उसे करना चाहिए और उसे किया जा रहा है और मेरे किसी पाले में भौतिक रूप से देखे जाने से परम सत्य नहीं बदलता है किन्तु व्यावहारिक सत्य अवश्य बदलता है तो व्यावहारिक सत्य को ही बदलना केवल ब्रह्मा या किसी संगठन के हाँथ में है| स्वयं परमब्रह्म अवस्था में गया था और इसी निमित्त अपने प्रथम पुत्र का नाम विष्णुकांत:विष्णुस्वामी(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश~ राम) रखा और आप की ही युक्ति और आशा थी दोनों पक्ष को संतुलित करने हेतु द्वितीय पुत्र का नाम कृष्णकान्त=कृष्णस्वामी=कृष्ण(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश~कृष्ण) रखा तो अब आप अगर गलत युक्ति का प्रयोग करते है परम सत्य "सत्यमेव जयते" और व्यावहारिक सत्य "सत्यम शिवम् सुंदरम" के साथ तो आप उसके आवश्यक परिणाम पाने के हकदार होंगे|

प्रयागराज में उस समय मुझ जैसे व्यक्ति को नियंत्रण करने की तकनीकी मे अब सुधार करना अति अनिवार्य और अपेक्षित है समयानुसार व्यक्ति नियंत्रण की अन्य विधियाँ आ जाने पर जिसमे व्यक्ति के सम्पूर्ण पुरुषार्थ का पूर्ण सदुपयोग हो सके|

प्रयागराज में उस समय मुझ जैसे व्यक्ति को नियंत्रण करने की तकनीकी मे अब सुधार करना अति अनिवार्य और अपेक्षित है समयानुसार व्यक्ति नियंत्रण की अन्य विधियाँ आ जाने पर जिसमे व्यक्ति के सम्पूर्ण पुरुषार्थ का पूर्ण सदुपयोग हो सके|

मेरा स्थान ग्रहण करने के लिए कम से कम विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य (जन्म से 33 वर्ष तक) रहना पडेगा पर जिन लोगों को इस श्रेणी में लाया जा रहा है उनको ऐसा होने के लिए दूसरा जन्म लेना पड़ेगा और अब इससे ज्यादा उनकी महिमा का मल्हार मुझसे मत करवाइये केवल अंध प्रतियोगिता से उनको महिमा मंडित करना हो तो करते रहिये|

मेरा स्थान ग्रहण करने के लिए कम से कम विवाह पूर्व तक अखंड ब्रह्मचर्य (जन्म से 33 वर्ष तक) रहना पडेगा पर जिन लोगों को इस श्रेणी में लाया जा रहा है उनको ऐसा होने के लिए दूसरा जन्म लेना पड़ेगा और अब इससे ज्यादा उनकी महिमा का मल्हार मुझसे मत करवाइये केवल अंध प्रतियोगिता से उनको महिमा मंडित करना हो तो करते रहिये|

सोमवंश/दुर्वाशा(कृष्णात्रेय)/अत्रि (+दत्तात्रेय/अत्रि+सोमात्रेय/अत्रि) और चन्द्रवंश(यदुवंश/वृष्णिवंश)/आदित्य/कश्यप में अंतर है जबकि दोनों चन्द्रमा के अंश से निकले है पर सोमवंश, अत्रि/सोमात्रेय/अत्रि गोत्रीय होगा और चन्द्रवंश(यदुवंश/वृष्णिवंश), कश्यप गोत्रीय होगा।

सोमवंश/दुर्वाशा(कृष्णात्रेय)/अत्रि (+दत्तात्रेय/अत्रि+सोमात्रेय/अत्रि) और चन्द्रवंश(यदुवंश/वृष्णिवंश)/आदित्य/कश्यप में अंतर है जबकि दोनों चन्द्रमा के अंश से निकले है पर सोमवंश, अत्रि/सोमात्रेय/अत्रि गोत्रीय होगा और चन्द्रवंश(यदुवंश/वृष्णिवंश), कश्यप गोत्रीय होगा।

Tuesday, December 5, 2017

सत्यमेव जयते/सत्यम शिवम सुंदरम:-----सुंदरता किसको अच्छी नहीं लगती वह भौतिक हो या आध्यात्मिक हो या मानसिक हो या बौद्धिक हो या सांस्कृतिक रूप से हो? भारत में एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय पार्टी है और कुछ क्षेत्रीय पार्टियाँ और कुछ नामीगिरामी संगठन हैं जिनका हिडेन एजेंडा है गोरे और काले की राजनीती का और वह तीन दसक से उसके शासन में पूर्णतः परिलक्षित होता है रहा है और अगर वह जारी रहा तो उत्तर भारत की संस्कृति भी दक्षिण भारतीय संस्कृति हो जाएगी और उनके ऐसे काम के दूरगामी परिणाम स्वरुप भारतीय लोग पश्चिमी चमड़ियों वालियों/वालों के दास एक दिन होकर रहेंगे स्वयं जिनके केवल जलवायुवीय भिन्नता वाले प्रतिरूप और नश्ल से द्वेष और वि्द्वेष वश यह आतंरिक राजनीती और द्वन्द जारी है और यह भारतीय संस्कृति अतीत की बात होगी जिसके लक्षण गाँव से प्रारम्भ हो गए हैं जो सांस्कृतिक गिरावट की भरपाई करते थे लेकिन आज स्वयं भारतीय सांस्कृतिक रूप से दरिद्रता की तरफ बढ़ रहे हैं मतलब पश्चिमी संस्कृति का प्रभुत्व निर्धन व्यक्ति तक कायम हो रहा है जो प्रतीक है मानवता के समाप्ति का|

सत्यमेव जयते/सत्यम शिवम सुंदरम:-----सुंदरता किसको अच्छी नहीं लगती वह भौतिक हो या आध्यात्मिक हो या मानसिक हो या बौद्धिक हो या सांस्कृतिक रूप से हो? भारत में एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय पार्टी है और कुछ क्षेत्रीय पार्टियाँ और कुछ नामीगिरामी संगठन हैं जिनका हिडेन एजेंडा है गोरे और काले की राजनीती का और वह तीन दसक से उसके शासन में पूर्णतः परिलक्षित होता है रहा है और अगर वह जारी रहा तो उत्तर भारत की संस्कृति भी दक्षिण भारतीय संस्कृति हो जाएगी और उनके ऐसे काम के दूरगामी परिणाम स्वरुप भारतीय लोग पश्चिमी चमड़ियों वालियों/वालों के दास एक दिन होकर रहेंगे स्वयं जिनके केवल जलवायुवीय भिन्नता वाले प्रतिरूप और नश्ल से द्वेष और वि्द्वेष वश यह आतंरिक राजनीती और द्वन्द जारी है और यह भारतीय संस्कृति अतीत की बात होगी जिसके लक्षण गाँव से प्रारम्भ हो गए हैं जो सांस्कृतिक गिरावट की भरपाई करते थे लेकिन आज स्वयं भारतीय सांस्कृतिक रूप से दरिद्रता की तरफ बढ़ रहे हैं मतलब पश्चिमी संस्कृति का प्रभुत्व निर्धन व्यक्ति तक कायम हो रहा है जो प्रतीक है मानवता के समाप्ति का|>>>>>>>>Hi Five (Pandey)<<<<<<< A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>महाशिव(राम:सदाशिव)/विवेक(गिरिधर)>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम:सदाशिव(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|