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Tuesday, January 31, 2017

आदिशक्ति(आद्या) देवी भगवती सरस्वती

आदिशक्ति(आद्या) देवी भगवती सरस्वती:-
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥
अर्थ : शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता हूं..
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
अर्थ : जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

फिर भी मुझे मानव समाज/समष्टि के हित हेतु जब 2003 में रोक ही दिया गया तो मानव समाज/समष्टि हित के साथ ही साथ यह मेरा घर तो नहीं मेरे इष्टदेव केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या का घर मतलब केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र अवश्य बन गया 2007 में और 2009 में स्थायित्व प्राप्त कर लिया और मुझे भी उसके माध्यम से स्थायित्व मिल गया इस प्रयागराज विश्विद्यालय में तो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ कौन है? राजनीती करने मात्र से सत्य कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है पर जो सनातन और सर्वकालिक है उसे कौन बदल सकता है?>>>>>>कोई सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव)/ब्रह्म सदृश शक्ति जिनसे स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, और महेश:महादेव का उद्भव हो इस प्रयागराज से गुज़री थी/है तो वह शक्ति स्वयं मैं ही हूँ जिसका न कोई ज्येष्ठ है, न वरिष्ठ है और न श्रेष्ठ है भाई आप लघु विचार वालों की बातें बार बार क्यों करते हो? 2000/2001 में यहाँ आकर 2003 में यहाँ से जाने वाला था इसका कोई एक कारन नहीं पर कई कारन थे लेकिन यह कारन कभी भी नहीं था की मैं किशी से डर रहा था या किशी विभीषिका से डर रहा था लेकिन मेरा रुकना उस सर्त के तहत था जिसमे की शांतिभंग न हो और न मैं आक्रामक बनूँ और न समय मुझे विलीन कर सके आकाश की बदली की तरह और ऐसे में मान-सम्मान-स्वाभिमान सब कुछ लुटा देने के बाद भी आरोप लगे की यह केंद्र मेरे लिए बन रहा है तो मुझे नहीं चाहिए था? क्योंकि मैं अपना घर अपने अंदर लिए घूमता फिरता हूँ वह दिखावे और प्रदर्शन की वस्तु नहीं। >>>>>>>>>>फिर भी मुझे मानव समाज/समष्टि के हित हेतु जब 2003 में रोक ही दिया गया तो मानव समाज/समष्टि हित के साथ ही साथ यह मेरा घर तो नहीं मेरे इष्टदेव केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या का घर मतलब केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र अवश्य बन गया 2007 में और 2009 में स्थायित्व प्राप्त कर लिया और मुझे भी उसके माध्यम से स्थायित्व मिल गया इस प्रयागराज विश्विद्यालय में तो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ कौन है? राजनीती करने मात्र से सत्य कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है पर जो सनातन और सर्वकालिक है उसे कौन बदल सकता है?

फिर भी मुझे मानव समाज/समष्टि के हित हेतु जब 2003 में रोक ही दिया गया तो मानव समाज/समष्टि हित के साथ ही साथ यह मेरा घर तो नहीं मेरे इष्टदेव केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या का घर मतलब केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र अवश्य बन गया 2007 में और 2009 में स्थायित्व प्राप्त कर लिया और मुझे भी उसके माध्यम से स्थायित्व मिल गया इस प्रयागराज विश्विद्यालय में तो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ कौन है? राजनीती करने मात्र से सत्य कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है पर जो सनातन और सर्वकालिक है उसे कौन बदल सकता है?>>>>>>कोई सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव)/ब्रह्म सदृश शक्ति जिनसे स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, और महेश:महादेव का उद्भव हो इस प्रयागराज से गुज़री थी/है तो वह शक्ति स्वयं मैं ही हूँ जिसका न कोई ज्येष्ठ है, न वरिष्ठ है और न श्रेष्ठ है भाई आप लघु विचार वालों की बातें बार बार क्यों करते हो? 2000/2001 में यहाँ आकर 2003 में यहाँ से जाने वाला था इसका कोई एक कारन नहीं पर कई कारन थे लेकिन यह कारन कभी भी नहीं था की मैं किशी से डर रहा था या किशी विभीषिका से डर रहा था लेकिन मेरा रुकना उस सर्त के तहत था जिसमे की शांतिभंग न हो और न मैं आक्रामक बनूँ और न समय मुझे विलीन कर सके आकाश की बदली की तरह और ऐसे में मान-सम्मान-स्वाभिमान सब कुछ लुटा देने के बाद भी आरोप लगे की यह केंद्र मेरे लिए बन रहा है तो मुझे नहीं चाहिए था? क्योंकि मैं अपना घर अपने अंदर लिए घूमता फिरता हूँ वह दिखावे और प्रदर्शन की वस्तु नहीं। >>>>>>>>>>फिर भी मुझे मानव समाज/समष्टि के हित हेतु जब 2003 में रोक ही दिया गया तो मानव समाज/समष्टि हित के साथ ही साथ यह मेरा घर तो नहीं मेरे इष्टदेव केदारेश्वर=आदिशंकर= आद्यशंकर=आद्या का घर मतलब केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्ययन केंद्र अवश्य बन गया 2007 में और 2009 में स्थायित्व प्राप्त कर लिया और मुझे भी उसके माध्यम से स्थायित्व मिल गया इस प्रयागराज विश्विद्यालय में तो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ कौन है? राजनीती करने मात्र से सत्य कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है पर जो सनातन और सर्वकालिक है उसे कौन बदल सकता है? >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।https://vandemataramvivekananddrvkprssbhupuau.blogspot.in/   

Monday, January 30, 2017

चन्द्रभान और चिंतामणि जी! आप विवेकानन्द, महावीर हनुमान, महादेव शिव, गौरा पार्वती, विष्णु, लक्ष्मी और सरस्वती की काली मूर्ती जब बनवाएंगे तो मेरी विषयवार मेरिट आप कैसे पाएंगे? या तो फिर की विध्वंश होगा इस समाज का आप के इस कृत्य से जिसके जिम्मेदार आप होंगे या विध्वंश न करने की गुजारिस होगी तो मेरी वास्तविक मेरिट सामाजिक चेतना को जगाने में जाएगी?

चन्द्रभान और चिंतामणि जी! आप विवेकानन्द, महावीर हनुमान, महादेव शिव, गौरा पार्वती, विष्णु, लक्ष्मी और सरस्वती की काली मूर्ती जब बनवाएंगे तो मेरी विषयवार मेरिट आप कैसे पाएंगे?  या तो फिर की विध्वंश होगा इस समाज का आप के इस कृत्य से जिसके जिम्मेदार आप होंगे या विध्वंश न करने की गुजारिस होगी तो मेरी वास्तविक मेरिट सामाजिक चेतना को जगाने में जाएगी?>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा  सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।https://vandemataramvivekananddrvkprssbhupuau.blogspot.in/ 

मैं कैसे न कहूँ की संभ्रान्त/प्रतिष्ठित व्यक्ति और परिवार तथा संभ्रान्त गाँव की अच्छी नस्लों को कुत्सित मानशिकता वाले येन केन प्रकारेण दुर्व्यसन शिखा और दूसित रास्ते पर ले जाने हेतु बहुत से ठीकेदार इसी मानव समाज में बैठे हुए हैं अपनी अपनी दूकान खोलकर और इतना दुष्साहस की मुझ जैसे व्यक्ति को स्वयं प्रेरित करवाया गया है लेकिन उनकी गणित मेरे पर सही नहीं बैठी और उन्हें निराशा ही हाँथ लगी।

मैं कैसे न कहूँ की संभ्रान्त/प्रतिष्ठित व्यक्ति और परिवार तथा संभ्रान्त गाँव की अच्छी नस्लों को कुत्सित मानशिकता वाले येन केन प्रकारेण दुर्व्यसन शिखा और दूसित रास्ते पर ले जाने हेतु बहुत से ठीकेदार इसी मानव समाज में बैठे हुए हैं अपनी अपनी दूकान खोलकर और इतना दुष्साहस की मुझ जैसे व्यक्ति को स्वयं प्रेरित करवाया गया है लेकिन उनकी गणित मेरे पर सही नहीं बैठी और उन्हें निराशा ही हाँथ लगी।<<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।  

संभ्रान्त/प्रतिष्ठित व्यक्ति और परिवार तथा संभ्रान्त गाँव से होने पर स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के हानि-लाभ मतलब उसका निकटतम कहलाने में बहुत से निजी जीवन को आनन्दित करने वाले जीवन उपक्रमो का त्याग और विषवमन होता रहता है ऐसे में अगर संभ्रान्त/प्रतिष्ठित गाँव और परिवार से कोई है भी और फिर क्षेत्र/विषय विशेष के मूर्धन्य विद्वान/वैज्ञानिक का उसके श्रेष्ठतम प्रदर्शन के बाद उसी के नाम पत्राचार उस गाँव में भी और उसके विद्यालय में भी होने लगता है जहाँ वह शिक्षारत है तो फिर सामाजिक रूप से उसको प्रभावित करना कुछ कुत्सित मानशिकता के लोगों का कार्य बन जाना स्वाभाविक सा हो जाता है। ऐसे में मैं सार्वजनिक रूप से कहना चाहता हूँ की यदि वह व्यक्ति अपनी दैवीय गुणों का सकारात्मक दिशा में समुचित प्रयोग करता है तो फिर निश्चित रूप से कुत्सित मानसिकता के लोगों पर उसका भारी पड़ना स्वाभाविक हो जाता है।

संभ्रान्त/प्रतिष्ठित व्यक्ति और परिवार तथा संभ्रान्त गाँव से होने पर स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के हानि-लाभ मतलब उसका निकटतम कहलाने में बहुत से निजी जीवन को आनन्दित करने वाले जीवन उपक्रमो का त्याग और विषवमन होता रहता है ऐसे में अगर संभ्रान्त/प्रतिष्ठित गाँव और परिवार से कोई है भी और फिर क्षेत्र/विषय विशेष के मूर्धन्य विद्वान/वैज्ञानिक का उसके श्रेष्ठतम प्रदर्शन के बाद उसी के नाम पत्राचार उस गाँव में भी और उसके विद्यालय में भी होने लगता है जहाँ वह शिक्षारत है तो फिर सामाजिक रूप से उसको प्रभावित करना कुछ कुत्सित मानशिकता के लोगों का कार्य बन जाना स्वाभाविक सा हो जाता है। ऐसे में मैं सार्वजनिक रूप से कहना चाहता हूँ की यदि वह व्यक्ति अपनी दैवीय गुणों का सकारात्मक दिशा में समुचित प्रयोग करता है तो फिर निश्चित रूप से कुत्सित मानसिकता के लोगों पर उसका भारी पड़ना स्वाभाविक हो जाता है।>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण। 

अगर ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सनातन काल से सर्वोपरि रहने वाले भृगुवंशी जमदग्नि (भृगु ऋषि के भौतिक पुत्र) के कर्म क्षेत्र जमदग्निपुर (जौनपुर तालुका/कमिश्नरी काशी ) से देश, काल और परिश्थिति के अनुसार व्यक्तिगत मेरिट में कोई आगे नहीं जा सका आज तक तो फिर अनादि आर्य क्षेत्र (आज़मगढ़ तालुका/कमिश्नरी आजमगढ़)) वाशी और जमदग्निपुर में जन्म लिए मुझ विवेक की मेरिट से आगे किसकी मेरिट हो सकती थी? यह थी मेरी हाई स्कूल की मेरिट जब तक की उसे देश(स्थान विशेष से लेकर दूर दराज तक), काल और परिश्थितियों से प्रभावित नहीं किया जा रहा था जैसा की मुझे ज्ञात हो चुका है।

अगर ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सनातन काल से सर्वोपरि रहने वाले भृगुवंशी जमदग्नि (भृगु ऋषि के भौतिक पुत्र)  के कर्म क्षेत्र जमदग्निपुर (जौनपुर तालुका/कमिश्नरी काशी ) से देश, काल और परिश्थिति के अनुसार व्यक्तिगत मेरिट में कोई आगे नहीं जा सका आज तक तो फिर अनादि आर्य क्षेत्र (आज़मगढ़ तालुका/कमिश्नरी आजमगढ़)) वाशी और जमदग्निपुर में जन्म लिए मुझ विवेक की मेरिट से आगे किसकी मेरिट हो सकती थी?  यह थी मेरी हाई स्कूल की मेरिट जब तक की उसे देश(स्थान विशेष से लेकर दूर दराज तक), काल और परिश्थितियों से प्रभावित नहीं किया जा रहा था जैसा की मुझे ज्ञात हो चुका है।>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

देवकाली(महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) मतलब जगत जननी दुर्गा का दुष्टों पर आये हुए क्रोध की ऊर्जा से काला हुआ स्वरुप को बिना जीवबलि दिए हुए पूजको का वंसज मैं विवेक स्वयं के किस कृत्य से त्रिदेव के तीन अंश में से किसी एक त्रिदेव का अनादर किया पर हाँ हम इस देवी के अलावा किशी गौर/धवल वर्ण देवता या देवी का अनावश्यक काली मूर्ती बना पूजा नहीं किया करते हैं वरन उनके विश्वव्यापक वर्ण और रूप में ही पूजते हैं तो यह अगर दोष है किशी की नजर में तो उनके उकसावे में कोई त्रिदेव अपना अनादर समझता है तो समझ सकता है?देवकाली(महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) मतलब जगत जननी दुर्गा का दुष्टों पर आये हुए क्रोध की ऊर्जा से काला हुआ स्वरुप को बिना जीवबलि दिए हुए पूजको का वंसज मैं विवेक स्वयं के किस कृत्य से त्रिदेव के तीन अंश में से किसी एक त्रिदेव का अनादर किया पर हाँ हम इस देवी के अलावा किशी गौर/धवल वर्ण देवता या देवी का अनावश्यक काली मूर्ती बना पूजा नहीं किया करते हैं वरन उनके विश्वव्यापक वर्ण और रूप में ही पूजते हैं तो यह अगर दोष है किशी की नजर में तो उनके उकसावे में कोई त्रिदेव अपना अनादर समझता है तो समझ सकता है? >>>>>>>मैं केवल शिव होकर या विष्णु होकर सरस्वती के मंदिर में रहते हुए मानवता के हर हित हेतु सफल प्रयास किया हूँ ऐसा ही नहीं परंतु मैं भी इस सरस्वती के मंदिर में स्वयं हेतु आवश्यक और निर्धारित न्यूनतम कर्म से कुछ ज्यादा ही करता रहा हूँ तो उस विषय विशेष के सीमित ज्ञान के साथ अन्य प्रचुर ज्ञान की अवस्था से परिपूरित हो ब्रह्मज्ञानी भी रहा और इस प्रकार सम्पूर्ण सहस्राब्दी महापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौर तक मैं इस प्रयागराज के प्रयागराज विश्विद्यालय में सदा त्रिदेव (ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव) की शक्ति से संपन्न रहा, जिसमे बालपन से कृष्ण सम परिश्थितियों से दो चार रहते हुए भी रामानुचारी व्यक्तित्व वाला मैं स्वयं विवेक प्रयागराज स्थित इस प्रयागराज विश्विद्यालय में केंद्रित हो स्वयं पूर्ण शिवशक्ति से आगे बढ़ पूर्ण विष्णुत्व और पूर्ण ब्राह्मणत्व शक्ति अर्जित करते हुए सशरीर परमब्रह्म बना। इसके आगे यह बताना जरूरी नहीं समझता की जो स्वयं शिव हो उसके इष्ट और आदर्श विष्णु होंगे तो ऐसे में वृहस्पतिवार, 30-09-2010 को जन्म लिए प्रथम मनवांछित पुत्र का नाम विष्णुकांत=विष्णु के स्वामी=सशरीर परमब्रह्म= सशरीर ब्रह्म=राम (प्रथम सशरीर ब्रह्म/परमब्रह्म) रखा और बुधवार, 28-08-2013 (श्रीकृष्णजन्माष्टमी) को जन्म लिए दूसरे पुत्र का नाम कृष्णकान्त=स्वामी कृष्ण=कृष्ण के स्वामी= कृष्ण(प्रथम सशरीर ब्रह्म/परमब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)) रखा।

देवकाली(महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) मतलब जगत जननी दुर्गा का दुष्टों पर आये हुए क्रोध की ऊर्जा से काला हुआ स्वरुप को बिना जीवबलि दिए हुए पूजको का वंसज मैं विवेक स्वयं के किस कृत्य से त्रिदेव के तीन अंश में से किसी एक त्रिदेव का अनादर किया पर हाँ हम इस देवी के अलावा किशी गौर/धवल वर्ण देवता या देवी का अनावश्यक काली मूर्ती बना पूजा नहीं किया करते हैं वरन उनके विश्वव्यापक वर्ण और रूप में ही पूजते हैं तो यह अगर दोष है किशी की नजर में तो उनके उकसावे में कोई त्रिदेव अपना अनादर समझता है तो समझ सकता है?देवकाली(महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) मतलब जगत जननी दुर्गा का दुष्टों पर आये हुए क्रोध की ऊर्जा से काला हुआ स्वरुप को बिना जीवबलि दिए हुए पूजको का वंसज मैं विवेक स्वयं के किस कृत्य से त्रिदेव के तीन अंश में से किसी एक त्रिदेव का अनादर किया पर हाँ हम इस देवी के अलावा किशी गौर/धवल वर्ण देवता या देवी का अनावश्यक काली मूर्ती बना पूजा नहीं किया करते हैं वरन उनके विश्वव्यापक वर्ण और रूप में ही पूजते हैं तो यह अगर दोष है किशी की नजर में तो उनके उकसावे में कोई त्रिदेव अपना अनादर समझता है तो समझ सकता है? >>>>>>>मैं केवल शिव होकर या विष्णु होकर सरस्वती के मंदिर में रहते हुए मानवता के हर हित हेतु सफल प्रयास किया हूँ ऐसा ही नहीं परंतु मैं भी इस सरस्वती के मंदिर में स्वयं हेतु आवश्यक और निर्धारित न्यूनतम कर्म से कुछ ज्यादा ही करता रहा हूँ तो उस विषय विशेष के सीमित ज्ञान के साथ अन्य प्रचुर ज्ञान की अवस्था से परिपूरित हो ब्रह्मज्ञानी भी रहा और इस प्रकार सम्पूर्ण सहस्राब्दी महापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौर तक मैं इस प्रयागराज के प्रयागराज विश्विद्यालय में सदा त्रिदेव (ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव) की शक्ति से संपन्न रहा, जिसमे बालपन से कृष्ण सम परिश्थितियों से दो चार रहते हुए भी रामानुचारी व्यक्तित्व वाला मैं स्वयं विवेक प्रयागराज स्थित इस प्रयागराज विश्विद्यालय में केंद्रित हो स्वयं पूर्ण शिवशक्ति से आगे बढ़ पूर्ण विष्णुत्व और पूर्ण ब्राह्मणत्व शक्ति अर्जित करते हुए सशरीर परमब्रह्म बना। इसके आगे यह बताना जरूरी नहीं समझता की जो स्वयं शिव हो उसके इष्ट और आदर्श विष्णु होंगे तो ऐसे में वृहस्पतिवार, 30-09-2010 को जन्म लिए प्रथम मनवांछित पुत्र का नाम विष्णुकांत=विष्णु के स्वामी=सशरीर परमब्रह्म= सशरीर ब्रह्म=राम (प्रथम सशरीर ब्रह्म/परमब्रह्म) रखा और बुधवार, 28-08-2013 (श्रीकृष्णजन्माष्टमी) को जन्म लिए दूसरे पुत्र का नाम कृष्णकान्त=स्वामी कृष्ण=कृष्ण के स्वामी= कृष्ण(प्रथम सशरीर ब्रह्म/परमब्रह्म=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)) रखा।>>>>>>>देवकाली(महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) मतलब जगत जननी दुर्गा का दुष्टों पर आये हुए क्रोध की ऊर्जा से काला हुआ स्वरुप को बिना जीवबलि दिए हुए पूजको का वंसज मैं विवेक स्वयं के किस कृत्य से त्रिदेव के तीन अंश में से किसी एक त्रिदेव का अनादर किया पर हाँ हम इस देवी के अलावा किशी गौर/धवल वर्ण देवता या देवी का अनावश्यक काली मूर्ती बना पूजा नहीं किया करते हैं वरन उनके विश्वव्यापक वर्ण और रूप में ही पूजते हैं तो यह अगर दोष है किशी की नजर में तो उनके उकसावे में कोई त्रिदेव अपना अनादर समझता है तो समझ सकता है?>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

चिंतामणी जी! राजा बलि (दानव समाज) के गुरु शुक्राचार्य एक विद्वान (पढने लिखने में पारन्गत) उल्लू थे/हैं यह अब स्पष्ट हुआ की नहीं। दानव समाज भेंड ही था और भेंड़ ही है पर उसे कोई त्रिदेव नहीं मिला जो की भेंड़ उसे सिद्ध कर सके। ये उल्लू गुरु शुक्राचार्य हैं ही ऐसे की भेंड़ चराने को अगर न मिलता तो देवताओं के गुरु बृहस्पति को जीने नहीं देते।

चिंतामणी जी! राजा बलि (दानव समाज) के गुरु शुक्राचार्य एक विद्वान (पढने लिखने में पारन्गत) उल्लू थे/हैं यह अब स्पष्ट हुआ की नहीं। दानव समाज भेंड ही था और भेंड़ ही है पर उसे कोई त्रिदेव नहीं मिला जो की भेंड़ उसे सिद्ध कर सके।  ये उल्लू गुरु शुक्राचार्य हैं ही ऐसे की भेंड़ चराने को अगर न मिलता तो देवताओं के गुरु बृहस्पति को जीने नहीं देते। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

मैंने प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्वविद्यालय से किशी एक संश्थान या किशी मंत्री विशेष के हित हेतु ही काम नहीं किया था वरन समस्त मानव समष्टि के हित हेतु कार्य किया था।

मैंने प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्वविद्यालय से किशी एक संश्थान या किशी मंत्री विशेष के हित हेतु ही काम नहीं किया था वरन समस्त मानव समष्टि के हित हेतु कार्य किया था। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

जून, 2016 में राजीव भाई के चेन्नई स्थित समाधि स्थल से ही उनको साइबर सामाजिक वेबपेज फेसबुक और इस ब्लॉग के माध्यम से ही श्रद्धांजलि अर्पित की इसी तके नहीं सीमित है अपितु काल के मुँह में जाकर भी भारतदेश के प्रति समर्पित/जीवन समर्पित किये हुए किशी भी पार्टी/संगठन/दल/समाज सेवी नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करना हो तो करूंगा।

जून, 2016 में राजीव भाई के चेन्नई स्थित समाधि स्थल से ही उनको साइबर सामाजिक वेबपेज फेसबुक और इस ब्लॉग के माध्यम से ही श्रद्धांजलि अर्पित की इसी तके नहीं सीमित है अपितु काल के मुँह में जाकर भी भारतदेश के प्रति समर्पित/जीवन समर्पित किये हुए किशी भी पार्टी/संगठन/दल/समाज सेवी  नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करना हो तो करूंगा। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

किसको दोष मैं दू चन्द्रभान जी और चिंतामणि जी! आप ही बताइये की तीन/चार दशक से आप तथाकथित सामाजिक न्याय के संघर्ष में तमिल और तेलगू के प्रभाव में इतने अंधे हो बेहोस थे की बिशुनपुर-223103 के ऐतिहासिक गाँव के चौराहे पर लखनऊ के बड़े भाई साहब के द्वारा ही लक्ष्मीशंकर नाना जो धवल वर्ण के थे उनकी भी काली मूर्ती लगवाई गयी?>>>>>>>> मैं किसको किसको दोष दूं या आप किसको किसको दोष देंगे जब अपने संतति से इतना प्रेम है की उनके गलत कदम को सही साबित करने हेतु पूरी दुनिया एक कर देंगे पर उनको सदमार्ग पर चलने हेतु कुछ नहीं करेंगे आज के ही दिन से जिससे की कम से कम आने वाला दिन ही सही हो सके? मैंने क्यों कहा की तथाकथित सामाजिक न्याय बहाने तीन दसक से पूरा भारत तमिल और तेलगू के हाँथ था:-------क्योंकि दक्षिण भारत की तरह जहाँ पर आदिदेवी सरस्वती, लक्ष्मीकांत और स्वयं गौरी शंकर (जिनका धवल स्वरुप के अलावा कोई स्वरुप है ही नहीं) की मूर्तियाँ अधिकतर काली ही बनाया करते है और उसी तर्ज पर इस उत्तर प्रदेश में भी आप सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी तथा विष्णु और शिव शंकर की भी मूर्ती काली बनाने और लगाने लगे जैसे की देवकाली/काली की मूर्ती आप लगाये हों? इतना ही नहीं विवेकानंद की भी काली ही मूर्ती आप को मिल रही थी इतनी कालिमा आप के अंदर भर दी है/थी तमिल और तेलगु ने उसी सामाजिक न्याय बहाने आप के अंदर घुसने को जो पा गए थे/है।>>>>>>> आप ही बताइये की तीन/ चार दशक से आप तथाकथित सामाजिक न्याय के संघर्ष में तमिल और तेलगू के प्रभाव में इतने अंधे हो बेहोस थे की बिशुनपुर-223103 के ऐतिहासिक गाँव के चौराहे पर लखनऊ के बड़े भाई साहब के द्वारा ही लक्ष्मीशंकर नाना जो धवल वर्ण के थे उनकी भी काली मूर्ती लगवाई गयी? किसको दोष मैं दू चन्द्रभान जी और चिंतामणि जी!>

किसको दोष मैं दू चन्द्रभान जी और चिंतामणि जी! आप ही बताइये की तीन/चार दशक से आप तथाकथित सामाजिक न्याय के संघर्ष में तमिल और तेलगू के प्रभाव में इतने अंधे हो बेहोस थे की बिशुनपुर-223103 के ऐतिहासिक गाँव के चौराहे पर लखनऊ के बड़े भाई साहब के द्वारा ही लक्ष्मीशंकर नाना जो धवल वर्ण के थे उनकी भी काली मूर्ती लगवाई गयी?>>>>>>>> मैं किसको किसको दोष दूं या आप किसको किसको दोष देंगे जब अपने संतति से इतना प्रेम है की उनके गलत कदम को सही साबित करने हेतु पूरी दुनिया एक कर देंगे पर उनको सदमार्ग पर चलने हेतु कुछ नहीं करेंगे आज के ही दिन से जिससे की कम से कम आने वाला दिन ही सही हो सके? मैंने क्यों कहा की तथाकथित सामाजिक न्याय बहाने तीन दसक से पूरा भारत तमिल और तेलगू के हाँथ था:-------क्योंकि दक्षिण भारत की तरह जहाँ पर आदिदेवी सरस्वती, लक्ष्मीकांत और स्वयं गौरी शंकर (जिनका धवल स्वरुप के अलावा कोई स्वरुप है ही नहीं) की मूर्तियाँ अधिकतर काली ही बनाया करते है और उसी तर्ज पर इस उत्तर प्रदेश में भी आप सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी तथा विष्णु और शिव शंकर की भी मूर्ती काली बनाने और लगाने लगे जैसे की देवकाली/काली की मूर्ती आप लगाये हों? इतना ही नहीं विवेकानंद की भी काली ही मूर्ती आप को मिल रही थी इतनी कालिमा आप के अंदर भर दी है/थी तमिल और तेलगु ने उसी सामाजिक न्याय बहाने आप के अंदर घुसने को जो पा गए थे/है।>>>>>>> आप ही बताइये की तीन/ चार दशक से आप तथाकथित सामाजिक न्याय के संघर्ष में तमिल और तेलगू के प्रभाव में इतने अंधे हो बेहोस थे की बिशुनपुर-223103 के ऐतिहासिक गाँव के चौराहे पर लखनऊ के बड़े भाई साहब के द्वारा ही लक्ष्मीशंकर नाना जो धवल वर्ण के थे उनकी भी काली मूर्ती लगवाई गयी? किसको दोष मैं दू चन्द्रभान जी और चिंतामणि जी!>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत से उद्भावित पुरुषों में आद्या आद्यशंकर=आदिशंकर= केदारेश्वर(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) उनके बाद विष्णु और ब्रह्मा का उद्भव तो फिर उसी सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत से उद्भावित स्त्रियों में आद्या आदिदेवी सरस्वती/ब्रह्मादेवी भी स्त्रियों में आद्या हुयी और उसके बाद लक्ष्मी:महामाया और सती:उमा:अपर्णा:गिरिजा:गौरी:पार्वती का उद्भव आता है जिसमे यहाँ तक सम्बन्ध है की सती:उमा:अपर्णा:गिरिजा:गौरी:पार्वती स्वयं ही आदिदेवी(आद्या) मतलब सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक सन्तान, राजर्षि दक्ष प्रजापति(काशिराज) की पुत्री हैं जो त्रिशक्ति धारणकर जगत जननी जगदम्बा(दुर्गा) कहलाती है जिनका सामाजिक स्वरुप हैं मिथिला नरेश, राजर्षि जनक की पुत्री, जगत जननी जानकी:सीता।

सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत से उद्भावित पुरुषों में आद्या आद्यशंकर=आदिशंकर= केदारेश्वर(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) उनके बाद विष्णु और ब्रह्मा का उद्भव तो फिर उसी सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत से उद्भावित स्त्रियों में आद्या आदिदेवी सरस्वती/ब्रह्मादेवी भी स्त्रियों में आद्या हुयी और उसके बाद लक्ष्मी:महामाया और सती:उमा:अपर्णा:गिरिजा:गौरी:पार्वती का उद्भव आता है जिसमे यहाँ तक सम्बन्ध है की सती:उमा:अपर्णा:गिरिजा:गौरी:पार्वती स्वयं ही आदिदेवी(आद्या) मतलब सरस्वती और ब्रह्मा की भौतिक सन्तान,  राजर्षि दक्ष प्रजापति(काशिराज) की पुत्री हैं जो त्रिशक्ति धारणकर जगत जननी जगदम्बा(दुर्गा) कहलाती है जिनका सामाजिक स्वरुप हैं मिथिला नरेश, राजर्षि जनक की पुत्री, जगत जननी जानकी:सीता।>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।  

Sunday, January 29, 2017

विकट प्रश्न अब यही है की एकल स्रोत(=परमब्रह्म परमेश्वर/ब्रह्म ) से तीन स्रोत (=त्रिदेव=त्रिफल=ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव), फिर तीन से सात (=सप्तर्षि=सात सनातन गोत्र) और उसके बाद सात से आठ स्रोत (=सप्तर्षि+कुम्भज:अगस्त्य=अष्टक ऋषि:गोत्र), उसके बाद आठ से चौबीस (अशोकचक्र:कालचक्र:समयचक्र निरूपित 24 मानक ऋषि:गोत्र) और फिर उससे एक सौ आठ(=108 गोत्र: जितनी की सुदर्शन चक्र में आरियां हैं) और फिर उस एक सौ आठ से जनित वर्तमान विश्वव्यापक मानव समाज के सञ्चालन हेतु क्या मानवता के मूल स्थान और मूल देश के निर्दोष लोगों का मौलिक जीवन जीने का अधिकार छीन लिया जाय और सभी को मानवता संचालन हेतु ही प्रयोग कर लिया जाय? मेरे विचार से यह अनुचित होगा तो ऐसे में कुछ प्रतिसत मात्र के चुनिंदा लोगों को ही विश्वव्यापक मानवता सञ्चालन में प्रयोग कर अधिकांशतः लोगों का मौलिक/स्वाभाविक जीवन बहाल किया जाना चाहिए जबकी सहस्राब्दी महापरिवर्तन का संक्रमण काल अब समाप्त हो चुका है ऐसी स्थिति में।

विकट प्रश्न अब यही है की एकल स्रोत(=परमब्रह्म परमेश्वर/ब्रह्म ) से तीन स्रोत (=त्रिदेव=त्रिफल=ब्रह्मा+विष्णु+महेश:महादेव), फिर तीन से सात (=सप्तर्षि=सात सनातन गोत्र) और उसके बाद सात से आठ स्रोत (=सप्तर्षि+कुम्भज:अगस्त्य=अष्टक ऋषि:गोत्र), उसके बाद आठ से चौबीस (अशोकचक्र:कालचक्र:समयचक्र निरूपित 24 मानक ऋषि:गोत्र) और फिर उससे एक सौ आठ(=108 गोत्र: जितनी की सुदर्शन चक्र में आरियां हैं) और फिर उस एक सौ आठ से जनित वर्तमान विश्वव्यापक मानव समाज के सञ्चालन हेतु क्या मानवता के मूल स्थान और मूल देश के निर्दोष लोगों का मौलिक जीवन जीने का अधिकार छीन लिया जाय और सभी को मानवता संचालन हेतु ही प्रयोग कर लिया जाय? मेरे विचार से यह अनुचित होगा तो ऐसे में कुछ प्रतिसत मात्र के चुनिंदा लोगों को ही विश्वव्यापक मानवता सञ्चालन में प्रयोग कर अधिकांशतः लोगों का मौलिक/स्वाभाविक जीवन बहाल किया जाना चाहिए जबकी सहस्राब्दी महापरिवर्तन का संक्रमण काल अब समाप्त हो चुका है ऐसी स्थिति में। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| 

केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर=पुरुषों में आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) :विश्वव्यापक जल समूह के बीच जल स्तर से ऊपर सर्वप्रथम काशी की भूमि को लेकर जल सतह से ऊपर आने वाले महादेव:महेश के इस स्वरुप के बाद ही संसार के अन्य स्थान का महादेव:महेश का स्वरुप आता है। और महादेव के बाद विष्णु और ब्रह्मा स्वरुप का उद्भव इस संसार में होता है उसी परम ऊर्जा के स्रोत परमब्रह्म (परमेश्वर=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म से जिन्हें हम सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म= सर्वशक्तिमान =परमऊर्जा स्रोत कहते हैं| सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत के यहां प्राकृतिक ऊर्जा केलौकिक रूप में सर्वज्ञात मूल स्रोत, सूर्य का भी आयनन सिद्धांत अनुत्तीर्ण हो जाता है और यही इस प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्विद्यालय में हुआ है जो सम्पूर्ण मानव इतिहास के लिए अद्वितीय वैज्ञानिक तथ्य है और जिस चमत्कार के कारन इस्वर के अस्तित्व को कोई आज तक चुनौती नहीं दे सका।

केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर=पुरुषों में आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ);  केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकरKedareshwar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies
केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर=पुरुषों में आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) :विश्वव्यापक जल समूह के बीच जल स्तर से ऊपर सर्वप्रथम काशी की भूमि को लेकर जल सतह से ऊपर आने वाले महादेव:महेश के इस स्वरुप के बाद ही संसार के अन्य स्थान का महादेव:महेश का स्वरुप आता है। और महादेव के बाद विष्णु और ब्रह्मा स्वरुप का उद्भव इस संसार में होता है उसी परम ऊर्जा के स्रोत परमब्रह्म (परमेश्वर=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म से जिन्हें हम सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म= सर्वशक्तिमान =परमऊर्जा स्रोत कहते हैं| सनातन राम=परमब्रह्म=ब्रह्म=सर्वशक्तिमान=परमऊर्जा स्रोत के यहां प्राकृतिक ऊर्जा केलौकिक रूप में सर्वज्ञात मूल स्रोत, सूर्य का भी आयनन सिद्धांत अनुत्तीर्ण हो जाता है और यही इस प्रयागराज स्थित प्रयागराज विश्विद्यालय में हुआ है जो सम्पूर्ण मानव इतिहास के लिए अद्वितीय वैज्ञानिक तथ्य है और जिस चमत्कार के कारन इस्वर के अस्तित्व को कोई आज तक चुनौती नहीं दे सका।>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Saturday, January 28, 2017

भाई साहब यही केवल मेरी आलोचना और मेरा विरोध आप को लाभ अवश्य पंहुचाया पर आप का दुर्भाग्य की रामानंद कुल से आनुवंशिक रूप से होते हुए उस घर पर आप को कभी पैर भी डालने का अवसर नही मिला अन्यथा आप मृदुभाषी और विनम्र और धीर-वीर गंभीर होते। लेकिन आप को बताना चाहूँगा की डाटा प्राप्त करने की कड़ी में सबसे पहले नामी गिरामी शोध संस्थान के कुछ अनुसंधान करता और निदेसक ऐसे है जो मात्र दो वर्ष का ही डेटा दिया और उसके कुछ दिन बाद पत्र लिखकर उसका सहलेखक और सन्दर्भ चाहते है तो जिसने उनके बाद सहर्ष 15-20 वर्ष का स्वनिर्मित डेटा देने को कहा हो उसके बाद तो ऐसे दो शीर्ष अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक को सह लेखक और सन्दर्भ देने को लिखा गया तो कौन सी अनीति हो गयी? भाई साहब आप के पास भी स्वनिर्मित डेटा है और सम्बंधित कौसल भी है विषय विशेष योग्यता में आगे होने के नाते तो क्या आप का ह्रदय मुझे वह डेटा देने का कष्ट सहन कर पाता? हर सम्बन्ध अंतरंग नहीं होता है और आप मेरे हर तरह से सम्बन्धी है आप अब भविष्य में मुझे विश्लेषण कर शोध पत्र प्रकाशित करने हेतु डाटा दिया कीजियेगा? सूरज को दिया नहीं दिखाइयेगा भाई जिस पर आप की नहीं सम्पूर्ण संसार की साँस टिकी है? मेरे चरित्र का आंकलन मेरे स्वाभाविक जीवन जीते हुए समय से कीजिये न की स्वार्थपूर्ण व्यावसायिक जीवन में जिसमे अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता वाली कहावत है और वही आप लोगों ने मेरा आलोचना करते हुए बना दिया है पर अगर आपने गलत किया आगे भी तो न तो इस्वर आप को माफ करेगा न मैं स्वयं जब आनुवंशिक रूप से आप मेरे समकक्ष सार्वजनिक रूप में आ चुके हैं।

भाई साहब यही केवल मेरी आलोचना और मेरा विरोध आप को लाभ अवश्य पंहुचाया पर आप का दुर्भाग्य की रामानंद कुल से आनुवंशिक रूप से होते हुए उस घर पर आप को कभी पैर भी डालने का अवसर नही मिला अन्यथा आप मृदुभाषी और विनम्र और धीर-वीर गंभीर होते।  लेकिन आप को बताना चाहूँगा की डाटा प्राप्त करने की कड़ी में सबसे पहले नामी गिरामी शोध संस्थान के कुछ अनुसंधान करता और निदेसक ऐसे है जो मात्र दो वर्ष का ही डेटा दिया और उसके कुछ दिन बाद पत्र लिखकर उसका सहलेखक और सन्दर्भ चाहते है तो जिसने उनके बाद सहर्ष 15-20 वर्ष का स्वनिर्मित डेटा देने को कहा हो उसके बाद तो ऐसे दो शीर्ष अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक को सह लेखक और सन्दर्भ देने को लिखा गया तो कौन सी अनीति हो गयी? भाई साहब आप के पास भी स्वनिर्मित डेटा है और सम्बंधित कौसल भी है विषय विशेष योग्यता में आगे होने के नाते तो क्या आप का ह्रदय मुझे वह डेटा देने का कष्ट सहन कर पाता?  हर सम्बन्ध अंतरंग नहीं होता है  और आप मेरे हर तरह से सम्बन्धी है आप अब भविष्य में मुझे विश्लेषण कर शोध पत्र प्रकाशित करने हेतु डाटा दिया कीजियेगा? सूरज को दिया नहीं दिखाइयेगा भाई जिस पर आप की नहीं सम्पूर्ण संसार की साँस टिकी है? मेरे चरित्र का आंकलन मेरे स्वाभाविक जीवन जीते हुए समय से कीजिये न की स्वार्थपूर्ण व्यावसायिक जीवन में जिसमे अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता वाली कहावत है और वही आप लोगों ने मेरा आलोचना करते हुए बना दिया है पर अगर आपने गलत किया आगे भी तो न तो इस्वर आप को माफ करेगा न मैं स्वयं जब आनुवंशिक रूप से आप मेरे समकक्ष सार्वजनिक रूप में आ चुके हैं।  >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समय है ज्यादा नहीं कहना चाहिए पर जिस तरह से एक चरण, दो चरण, तीन चरण, चार चरण और पांच चरण के रॉकेट प्रणाली द्वारा उपग्रह को अपनी कक्षा में स्थापित किया जाता है उसी तरह विश्वमानवता के केंद्र प्रयागराज में सहस्राब्दी महापरिवर्तन या विश्वमहापरिवर्तन के दौरान जिस एकमात्र व्यक्ति का पूर्ण सफला हेतु संकल्प हो सकता है वह व्यक्ति मैं ही हूँ और मेरी वर्तमान अवस्था भी इसी राकेट प्रणाली के तहत पाँच राकेट सदृश शक्तियों पर निर्भर थी जिसमे किशी ने मेरे हेतु त्याग किया, किशी ने बलिदान दिया, किशी ने मेरे साथ तप किया, किशी ने रक्षा किया और किशी पूर्ण सफलता और पूर्ण सामाजिक जीवन तक पंहुचा पूर्ण सामान्य नागरिक जीवन दिया। उसमे भी जो पूर्णतः निर्दोष था उसने मेरा सामना किया और जो पथ भ्रमित हुआ वह सामने न आ सका पर सबका परिणामी मैं इस जगत के समक्ष हूँ जो इस प्रयागराज में पूर्ण आत्म विश्वास से कहता है की मैं ही एक मात्र सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण, सर्वोच्च पूर्ण क्षत्रिय, सर्वोच्च पूर्ण वैश्य हूँ जिसको कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य चुनौती नहीं दे सकता है उसमे भी यह सभी अवस्थाएं सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए भी प्राप्त किया हूँ। इतना ही नहीं सर्वोच्च पूर्ण इस्लाम और सर्वोच्च पूर्ण ईसाइयत अवस्था भी सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए प्राप्त किया हूँ पर मैं एक मात्र सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण, सर्वोच्च पूर्ण क्षत्रिय, सर्वोच्च पूर्ण वैश्य अवस्था को ही सर्वोच्च पाया हूँ सामान्य मर्यादित मानव जीवन हेतु और इस्लाम और ईसाइयत मानवता की दो चरम अवस्थाएं है एक सत्य के प्रति संघर्ष की और दूसरा हर अवस्था में मानव जीवन के उपयोग और उसके संरक्षण की।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समय है ज्यादा नहीं कहना चाहिए पर जिस तरह से एक चरण, दो चरण, तीन चरण, चार चरण और पांच चरण के रॉकेट प्रणाली द्वारा उपग्रह को अपनी कक्षा में स्थापित किया जाता है उसी तरह विश्वमानवता के केंद्र प्रयागराज में सहस्राब्दी महापरिवर्तन या विश्वमहापरिवर्तन के दौरान जिस एकमात्र व्यक्ति का पूर्ण सफला हेतु संकल्प हो सकता है वह व्यक्ति मैं ही हूँ और मेरी वर्तमान अवस्था भी इसी राकेट प्रणाली के तहत पाँच राकेट सदृश शक्तियों पर निर्भर थी जिसमे किशी ने मेरे हेतु त्याग किया, किशी ने बलिदान दिया, किशी ने मेरे साथ तप किया, किशी ने रक्षा किया और किशी पूर्ण सफलता और पूर्ण सामाजिक जीवन तक पंहुचा पूर्ण सामान्य नागरिक जीवन दिया। उसमे भी जो पूर्णतः निर्दोष था उसने मेरा सामना किया और जो पथ भ्रमित हुआ वह सामने न आ सका पर सबका परिणामी मैं इस जगत के समक्ष हूँ जो इस प्रयागराज में पूर्ण आत्म विश्वास से कहता है की मैं ही एक मात्र सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण, सर्वोच्च पूर्ण क्षत्रिय, सर्वोच्च पूर्ण वैश्य हूँ जिसको कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य चुनौती नहीं दे सकता है उसमे भी यह सभी अवस्थाएं सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए भी प्राप्त किया हूँ। इतना ही नहीं सर्वोच्च पूर्ण इस्लाम और सर्वोच्च पूर्ण ईसाइयत अवस्था भी सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए प्राप्त किया हूँ पर मैं एक मात्र सर्वोच्च पूर्ण ब्राह्मण, सर्वोच्च पूर्ण क्षत्रिय, सर्वोच्च पूर्ण वैश्य अवस्था को ही सर्वोच्च पाया हूँ सामान्य मर्यादित मानव जीवन हेतु और इस्लाम और ईसाइयत मानवता की दो चरम अवस्थाएं है एक सत्य के प्रति संघर्ष की और दूसरा हर अवस्था में मानव जीवन के उपयोग और उसके संरक्षण की। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| >

मैं इस तथ्य को वैश्विक रूप सार्वजनिक करना चाहता हूँ की इस विश्व में वर्तमान में कोई व्यक्ति या संगठन या सत्ता (सर्वजन की शक्ति का कर्तव्य सर्वजन के कर्मानुसार प्रतिफल देकर पहले मेरे समकक्ष लाये तो) इतना योग्यता नहीं रखता है अपने त्याग और बलिदान द्वारा (उद्यम में लीन हो सकता है पर उसका फल भी चख रहा है पद, प्रतिष्ठा और अपनी स्वयं की समृद्धि के साथ तो त्याग और बलिदान नहीं रहा उसमे वरन उसमे स्वार्थ सिद्ध होते रहने से) जिसका की मैं अपने व्यक्तिगत जीवन संबंधी अनुरोध या निवेदन मानने को मैं बाध्य हूँ जो दूसरों से प्रेरित या दूसरों के दबाव या भय या दूसरों द्वारा अपनी स्वार्थ पूर्ती किये जाने के परिणाम स्वरुप अगर कोई मुझसे अनापेक्षित अनुरोध या निवेदन करता है तो मैं उसको ठुकरा भी सकता हूँ और मेरे द्वारा अनुरोध या निवेदन ठुकरा दिए जाने की अवस्था की सहन शक्ति रखकर ही कोई ऐसा अनापेक्षित अनुरोध या निवेदन करना हो तो करे क्योंकि मुझे इस संसार में किशी बुद्धिबल, धनबल या बाहुबल की कोई चिंता ही नहीं रही है और न कोई मुझे प्रभावित कर या करवा शेष रह पायेगा बिना उसकी प्रायश्चित को अपने समूह या समर्थक के साथ भुगते पर हो सकता है की उसे प्रभावित होने या दण्ड पाने या प्रायश्चित पाने में कुछ समय लग जाय। यह जरूर है की सज्जन और विनम्र व्यक्ति का कोई निवेदन हो जो मेरे हित में हो न हो उसपर मानवता हित हेतु विचार कर उनके उस निवेदन को स्वीकार करने हेतु अपनी स्वीकृत दे दूं कुछ समय के बाद विचार करने पर क्योंकि निवेदन या अनुरोध का उनका प्रस्ताव भी उनके या किशी समूह के द्वारा विचार करने के बाद ही उनके द्वारा भिजवाने में भी कुछ समय लगा होगा तो उसके हेतु जबाब में भी मुझ एकल विचारवान और तदनुरूप व्यवहार वान व्यक्ति को भी तो कुछ समय चाहिए ही न ? जिसका मेरे ऊपर जितना अधिकार होना चाहिए पहले वह उतना कर्तव्य तो करे मेरे हित चिंतन में? मैं मानवता हेतु उस सीमा को पार कर चुका हूँ जहां पर देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि ऋण भी छोटे पड़ चुके है और उसके ही परिणाम स्वरुप सहस्राब्दी महापरिवर्तन या विश्वमहापरिवर्तन के बाद का मेरा आज का स्वरुप है तो फिर किसका अनुग्रह, अनुरोध या निवेदन मानने को मैं बाध्य हूँ पर सज्जन/शाधुजन (नर हो या नारी), गुरु और माता-पिता व् अन्य स्नेही जन का सम्मान करना मेरी नियति में आता है और वह करता रहूँगा पर उनका हर अनुरोध, अनुग्रह, निवेदन न मानने के पीछे उनका दुरुपयोग सम्भव है तो फिर विचार करने के बाद जो उचित रहेगा वही स्वीकार किया जाएगा।

मैं इस तथ्य को वैश्विक रूप सार्वजनिक करना चाहता हूँ की इस विश्व में वर्तमान में कोई व्यक्ति या संगठन या सत्ता (सर्वजन की शक्ति का कर्तव्य सर्वजन के कर्मानुसार प्रतिफल देकर पहले मेरे समकक्ष लाये तो) इतना योग्यता नहीं रखता है अपने त्याग और बलिदान द्वारा (उद्यम में लीन हो सकता है पर उसका फल भी चख रहा है पद, प्रतिष्ठा और अपनी स्वयं की समृद्धि के साथ तो त्याग और बलिदान नहीं रहा उसमे वरन उसमे स्वार्थ सिद्ध होते रहने से) जिसका की मैं अपने व्यक्तिगत जीवन संबंधी अनुरोध या निवेदन मानने को मैं बाध्य हूँ जो दूसरों से प्रेरित या दूसरों के दबाव या भय या दूसरों द्वारा अपनी स्वार्थ पूर्ती किये जाने के परिणाम स्वरुप अगर कोई मुझसे अनापेक्षित अनुरोध या निवेदन करता है तो मैं उसको ठुकरा भी सकता हूँ और मेरे द्वारा अनुरोध या निवेदन ठुकरा दिए जाने की अवस्था की सहन शक्ति रखकर ही कोई ऐसा अनापेक्षित अनुरोध या निवेदन करना हो तो करे क्योंकि मुझे इस संसार में किशी बुद्धिबल, धनबल या बाहुबल की कोई चिंता ही नहीं रही है और न कोई मुझे प्रभावित कर या करवा शेष रह पायेगा बिना उसकी प्रायश्चित को अपने समूह या समर्थक के साथ भुगते पर हो सकता है की उसे प्रभावित होने या दण्ड पाने या प्रायश्चित पाने में कुछ समय लग जाय। यह जरूर है की सज्जन और विनम्र व्यक्ति का कोई निवेदन हो जो मेरे हित में हो न हो उसपर मानवता हित हेतु विचार कर उनके उस निवेदन को स्वीकार करने हेतु अपनी स्वीकृत दे दूं कुछ समय के बाद विचार करने पर क्योंकि निवेदन या अनुरोध का उनका प्रस्ताव भी उनके या किशी समूह के द्वारा विचार करने के बाद ही उनके द्वारा भिजवाने में भी कुछ समय लगा होगा तो उसके हेतु जबाब में भी मुझ एकल विचारवान और तदनुरूप व्यवहार वान व्यक्ति को भी तो कुछ समय चाहिए ही न ? जिसका मेरे ऊपर जितना अधिकार होना चाहिए पहले वह उतना कर्तव्य तो करे मेरे हित चिंतन में? मैं मानवता हेतु उस सीमा को पार कर चुका हूँ जहां पर देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि ऋण भी छोटे पड़ चुके है और उसके ही परिणाम स्वरुप सहस्राब्दी महापरिवर्तन या विश्वमहापरिवर्तन के बाद का मेरा आज का स्वरुप है तो फिर किसका अनुग्रह, अनुरोध या निवेदन मानने को मैं बाध्य हूँ पर सज्जन/शाधुजन (नर हो या नारी), गुरु और माता-पिता व् अन्य स्नेही जन का सम्मान करना मेरी नियति में आता है और वह करता रहूँगा पर उनका हर अनुरोध, अनुग्रह, निवेदन न मानने के पीछे उनका दुरुपयोग सम्भव है तो फिर विचार करने के बाद जो उचित रहेगा वही स्वीकार किया जाएगा। >>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Wednesday, January 25, 2017

2005/2006 तक हुए मुख्य संग्राम में ही रावनकुल और भष्मासुर को मात दे मृत्युदंड दे दिया गया तो उसके बाद भोले-भाले बाबू बोलते हो की इसकी सुरक्षाबल में मेरी तैनाती/नामांकन/पोस्टिंग हो गयी और मैंने किला फतह कर लिया? तो उस सत्य और असत्य की लड़ाई में असत्य को मृत्युदंड दे दिया गया 2006 में तो उस असत्य के ठीकेदार क्यों बनते हो बावले? कोई और मार्ग चुन लो जो पत्थर की लकीर ही नहीं समय की लकीर बन गया उसे क्यों मिटाने की असंभव कोशिस क्यों करते हो? और आप ही नहीं कुछ और सज्जन एक और समय की लकीर मिटाने चले थे जो 29/30 अक्टूबर, 2009 में पड़ चुकी है?

2005/2006 तक हुए मुख्य संग्राम में ही रावनकुल और भष्मासुर को मात दे मृत्युदंड दे दिया गया तो उसके बाद भोले-भाले बाबू बोलते हो की इसकी सुरक्षाबल में मेरी तैनाती/नामांकन/पोस्टिंग हो गयी और मैंने किला फतह कर लिया? तो उस सत्य और असत्य की लड़ाई में असत्य को मृत्युदंड दे दिया गया 2006 में तो उस असत्य के ठीकेदार क्यों बनते हो बावले? कोई और मार्ग चुन लो जो पत्थर की लकीर ही नहीं समय की लकीर बन गया उसे क्यों मिटाने की असंभव कोशिस क्यों करते हो? और आप ही नहीं कुछ और सज्जन एक और समय की लकीर मिटाने चले थे जो 29/30 अक्टूबर, 2009 में पड़ चुकी है? >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

सांसारिक रूप में जो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है अगर मैं उसका पालन कर रहा हूँ तो आप और आपके संगत जन उसका पालन करें क्योंकि वाक्पटुता सत्य को स्थापित न करने के प्रति ज्यादा और सत्य को परेशान करने की मन्सा के प्रति ज्यादा जब-जब होती है तो उसका अंत विध्ध्वंस ही होता है और उसी विध्वंश से वर्ष 2003 से मेरे द्वारा अपने को इस प्रयागराज/भारतवर्ष में पूर्ण रूप से स्थापित कर संरक्षात्मक कार्यरत हो बचाया जा रहा है जबकी वर्ष 2000/2001 में इसी प्रयागराज/भारतवर्ष में मेरी उपस्थिति से ही संरचनात्मक कार्य उस सृष्टि संरक्षात्मक कार्य के अन्तर्गत ही चल रहा है और पूर्णता को भी प्राप्त किया है तो ऐसे में उसपर किशी दूसरे को इतराने का अधिकार नहीं होता है। अतः कर्तव्य अनुरूप सबको अगर मिला है तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनको कर्तव्य अनुरूप नहीं मिलता है इस मायामयी संसार में इसे भी मानना सत्य होगा क्योंकि दुरात्माओं का समन करने में कुछ लोगों की कुछ ऊर्जा लगी रहती है और वह भी उनकी ही सांसारिक सकारात्मक ऊर्जा में आता है।

सांसारिक रूप में जो मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है अगर मैं उसका पालन कर रहा हूँ तो आप और आपके संगत जन उसका पालन करें क्योंकि वाक्पटुता सत्य को स्थापित न करने के प्रति ज्यादा और सत्य को परेशान करने की मन्सा के प्रति ज्यादा जब-जब होती है तो उसका अंत विध्ध्वंस ही होता है और उसी विध्वंश से वर्ष 2003 से मेरे द्वारा अपने को इस प्रयागराज/भारतवर्ष में पूर्ण रूप से स्थापित कर संरक्षात्मक कार्यरत हो बचाया जा रहा है जबकी वर्ष 2000/2001 में इसी प्रयागराज/भारतवर्ष में मेरी उपस्थिति से ही संरचनात्मक कार्य उस सृष्टि संरक्षात्मक कार्य के अन्तर्गत ही चल रहा है और पूर्णता को भी प्राप्त किया है तो ऐसे में उसपर किशी दूसरे को इतराने का अधिकार नहीं होता है। अतः कर्तव्य अनुरूप सबको अगर मिला है तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनको कर्तव्य अनुरूप नहीं मिलता है इस मायामयी संसार में इसे भी मानना सत्य होगा क्योंकि दुरात्माओं का समन करने में कुछ लोगों की कुछ ऊर्जा लगी रहती है और वह भी उनकी ही सांसारिक सकारात्मक ऊर्जा में आता है। >>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Tuesday, January 24, 2017

शुक्राचार्य त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश:महादेव) में से केवल दो से डरते थे जिसमे पहले थे विष्णु और दूसरे थे उनके इष्टदेव महादेव तो अब जो सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हो चुका है उसके सामने शुक्राचार्य अपनी क्षमता का आंकलन कर लीजिये?>>>>>>>प्रोफेसर साहब अभी आप गोता लगाइये इस भवसागर में जिसे मैं लमहों में पर कर चुका हूँ पर आप समृद्ध हो, सज्जन/शाधुजन बने और सांसारिक विघ्नों से आहत न हों इसलिए 2003 से स्थायी रूप से मैं यहाँ जम गया हूँ और कम से कम 2057 तक रहूँगा ही रहूँगा पर आप को सूचित हो की मैं हर माने में आप का ज्येष्ठ हूँ। अतएव आप अपनी कुटिलता और कटुबचन और कुलक्षण व्यवहार छोड़ दीजिये कम से कम मेरे साथ?

शुक्राचार्य  त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश:महादेव)  में से केवल दो से डरते थे जिसमे पहले थे विष्णु और दूसरे थे उनके इष्टदेव महादेव तो अब जो सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हो चुका है उसके सामने शुक्राचार्य अपनी क्षमता का आंकलन कर लीजिये?>>>>>>>प्रोफेसर साहब अभी आप गोता लगाइये इस भवसागर में जिसे मैं लमहों में पर कर चुका हूँ पर आप समृद्ध हो, सज्जन/शाधुजन बने और सांसारिक विघ्नों से आहत न हों इसलिए 2003 से स्थायी रूप से मैं यहाँ जम गया हूँ और कम से कम 2057 तक रहूँगा ही रहूँगा पर आप को सूचित हो की मैं हर माने में आप का ज्येष्ठ हूँ। अतएव आप अपनी कुटिलता और कटुबचन और कुलक्षण व्यवहार छोड़ दीजिये कम से कम मेरे साथ? > >>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| https://vandemataramvivekananddrvkprssbhupuau.blogspot.in/

प्रोफेसर साहब अभी आप गोता लगाइये इस भवसागर में जिसे मैं लमहों में पर कर चुका हूँ पर आप समृद्ध हो, सज्जन/शाधुजन बने और सांसारिक विघ्नों से आहत न हों इसलिए 2003 से स्थायी रूप से मैं यहाँ जम गया हूँ और कम से कम 2057 तक रहूँगा ही रहूँगा पर आप को सूचित हो की मैं हर माने में आप का ज्येष्ठ हूँ। अतएव आप अपनी कुटिलता और कटुबचन और कुलक्षण व्यवहार छोड़ दीजिये कम से कम मेरे साथ? >

प्रोफेसर साहब अभी आप गोता लगाइये इस भवसागर में जिसे मैं लमहों में पर कर चुका हूँ पर आप समृद्ध हो, सज्जन/शाधुजन बने और सांसारिक विघ्नों से आहत न हों इसलिए 2003 से स्थायी रूप से मैं यहाँ जम गया हूँ और कम से कम 2057 तक रहूँगा ही रहूँगा पर आप को सूचित हो की मैं हर माने में आप का ज्येष्ठ हूँ। अतएव आप अपनी कुटिलता और कटुबचन और कुलक्षण व्यवहार छोड़ दीजिये कम से कम मेरे साथ? >>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जहाँ तक मुझे अंतर्बोध हो चुका था 2003 में ही की मैं इस दुनिया में किशी की दया का जन्मजन्मांतर पात्र नहीं था और वास्तविकता यह है की जिसको मुझमे समाहित होना हो या मुझसे चाहत वह मुझमें मिलता और समाहित होता रहा है और आगे भी यही होगा और मैं अपने लिए किशी में मिलने या समाहित होने नहीं जाऊंगा न जाता हूँ और यदि आप को लोकधंधा करना या करवाना है तो वह 2003 से ही कर रहा हूँ अन्यथा मैं जहाँ और जब प्रस्तुत हुआ उसी वक्त वह कार्य और प्रयोजन पूर्ण हुआ मेरे पंहुंचने भर की देर है मुझे इसके लिए यत्न करने की भी जरूरत नहीं। अब भी रावनकुल और उनके समर्थको की समझ में आ जाय तो उनकी और उनके समय और प्रयास की गति हो जाएगी अन्यथा जोर आजमाइस वे करते रहें मेरा कुछ होने वाला नहीं है उनकी तरफ से अक्षम्य अपराध हो जाने की वजह से जिसे तत्कालीन रावण और भस्मासुर नहीं कर सके थे वह वर्तमान रावनकुल-भष्मासुर और उसके समर्थक किये हैं। तो मेरा उनका सम्बन्ध उसी दिन से ख़त्म हुआ और रही बात उनके अभिकर्ताओं की तो उनसे भी संबंध शीघ्र ही ख़त्म होगा मानवता का सम्बन्ध रहे न रहे अगर वे उस रावनकुल और भस्मासुर उनका समर्थन और कार्य अपने संकुचित स्वार्थ और लोभ वस् इसी तरह जारी रहा या वे बहुत बड़े प्रायश्चित के भागीदार अवश्य बनेंगे अपने जीवन में जिससे उनको परमात्मा भी नहीं उबार पाएंगे?

जहाँ तक मुझे अंतर्बोध हो चुका था 2003 में ही की मैं इस दुनिया में किशी की दया का जन्मजन्मांतर पात्र नहीं था और वास्तविकता यह है की जिसको मुझमे समाहित होना हो या मुझसे चाहत वह मुझमें मिलता और समाहित होता रहा है और आगे भी यही होगा और मैं अपने लिए किशी में मिलने या समाहित होने नहीं जाऊंगा न जाता हूँ और यदि आप को लोकधंधा करना या करवाना है तो वह 2003 से ही कर रहा हूँ अन्यथा मैं जहाँ और जब प्रस्तुत हुआ उसी वक्त वह कार्य और प्रयोजन पूर्ण हुआ मेरे पंहुंचने भर की देर है मुझे इसके लिए यत्न करने की भी जरूरत नहीं। अब भी रावनकुल और उनके समर्थको की समझ में आ जाय तो उनकी और उनके समय और प्रयास की गति हो जाएगी अन्यथा जोर आजमाइस वे करते रहें मेरा कुछ होने वाला नहीं है उनकी तरफ से अक्षम्य अपराध हो जाने की वजह से  जिसे तत्कालीन रावण और भस्मासुर नहीं कर सके थे वह वर्तमान रावनकुल-भष्मासुर और उसके समर्थक किये हैं। तो मेरा उनका सम्बन्ध उसी दिन से ख़त्म हुआ और रही बात उनके अभिकर्ताओं की तो उनसे भी संबंध शीघ्र ही ख़त्म होगा मानवता का सम्बन्ध रहे न रहे अगर वे उस रावनकुल और भस्मासुर उनका समर्थन और कार्य अपने संकुचित स्वार्थ और लोभ वस् इसी तरह जारी रहा या वे बहुत बड़े प्रायश्चित के भागीदार अवश्य बनेंगे अपने जीवन में जिससे उनको परमात्मा भी नहीं उबार पाएंगे? >>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|  

सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।

सनातन अंगारिशा गोत्र के अंतर्गत आने वाले धन्वन्तरि/चिकित्सक से प्रेरित समाज बताये की एक भारतरत्न और पूर्व प्रधानमंत्री, दलित समाज के तथाकथित मशीहा और तथाकथित दलित विशेष समाज की पार्टी के संस्थापक और अल्पसंख्यक(ईसाई) समाज से सर्वश्रेष्ठ भारतीय रक्षामंत्री क्या स्त्री समाज के किशी विशेस व्यक्तित्व से मोह ने उनके अंतिम समय में विक्षिप्त होने का कारन है या उनका इस भौतिक संसार के चलाये जाने के रहस्य की जानकारी और उसके निवारण में अपनी अक्षमता(सन्सार चल रहा है तो यह गलतिया व्यक्ति जाने और अनजाने करता है पर बोध हो जाने पर या तो वह इस समाज से अलग हो जाना चाहता है या मानसिक विसंगति का शिकार हो जाता है) और पाप बोध उनको इस स्थिति में ले आया है/था।-----------मै इसका कारन जानते हुए भी सार्वजनिक जीवन जी रहा हूँ और शिक्षा और शोध से जुड़ा हुआ हूँ 2001से तो इनपर आप सबकी राय जानना चाहता हूँ क्योंकि आप मेरे सम्बन्ध में बहुत मत-मतायन देते रहते थे और पूर्व प्रधानमंत्री उपमन्यु गोत्र के थे जो वशिष्ठ के वंसज थे तो मै सनातन वशिष्ठ गोत्र परिवार में जन्म जरूर लिया हूँ यह अलग की यह मेरे सनातन कश्यप गोत्रीय पिता का ननिहाल था जिन लोगों का ननिहाल भी मेरे सनातन गौतम गोत्रीय मामा के खानदान में ही था।>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Gautam, Vyash/Shandilya/Upamanyu/Vashistha, Mareech/ Kashyapa, Angarisha/Bharadwaj, Bhrigu/Jamadagni, Atri/Durvash(Krishnatrey)/Dattatrey/Somatreya, Kaushik/Vishwarath/Vishvamitra is order of the Saptarish.

Gautam, Vyash/Shandilya/Upamanyu/Vashistha, Mareech/ Kashyapa, Angarisha/Bharadwaj, Bhrigu/Jamadagni, Atri/Durvash(Krishnatrey)/Dattatrey/Somatreya, Kaushik/Vishwarath/Vishvamitra is order of the Saptarish.>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

सर्वप्रथम महादेव शिवशंकर के पुत्र कार्तिकेय ने मलय प्रदेश(वर्त्तमान केरला और तमिलनाडु) को अपना क्षेत्र चुना कुम्भज ऋषि/अगस्त्य ऋषि की तरह और उसके बाद भृगु वंशीय परशुराम ने केरल, कर्णाटक का कुछ भाग, महारास्त्र, गुजराज और आंध्र के कुछ भाग को अपना क्षेत्र चुना और केरला रहने लगे, उसके बाद सूर्यवंशीय भगवान् राम ने कर्नाटका के सूर्यवंशियों बाली और सुग्रीव के साथ सम्बन्ध स्थापित किये और रामेश्वरम में शिवा लिंग स्थापित कर तमिल नाडु को उत्तर भारत से जोड़ शैव और वैस्नव एकता कि स्थापना किये। यह है हमारा उत्तर और दक्षिण सम्बन्ध।>>>> 12 Jyotirlingas of Shiva and 52 Shaktipeeth(4 Aadi Shakti Peeth) of AadiiShakti Parvati (Satee) from North to South and East to West also United the India.

सर्वप्रथम महादेव शिवशंकर के पुत्र कार्तिकेय ने मलय प्रदेश(वर्त्तमान केरला और तमिलनाडु) को अपना क्षेत्र चुना कुम्भज ऋषि/अगस्त्य ऋषि की तरह और उसके बाद भृगु वंशीय परशुराम ने केरल, कर्णाटक का कुछ भाग, महारास्त्र, गुजराज और आंध्र के कुछ भाग को अपना क्षेत्र चुना और केरला रहने लगे, उसके बाद सूर्यवंशीय भगवान् राम ने कर्नाटका के सूर्यवंशियों बाली और सुग्रीव के साथ सम्बन्ध स्थापित किये और रामेश्वरम में शिवा लिंग स्थापित कर तमिल नाडु को उत्तर भारत से जोड़ शैव और वैस्नव एकता कि स्थापना किये। यह है हमारा उत्तर और दक्षिण सम्बन्ध।>>>>
12 Jyotirlingas of Shiva and 52 Shaktipeeth(4 Aadi Shakti Peeth) of AadiiShakti Parvati (Satee) from North to South and East to West also United the India.>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|