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Tuesday, February 28, 2017

ओजोन परत का भी प्रतिसत बहुत कम है वायुमंडल में फिर भी पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में इसका स्थान बहुत महत्वपूर्ण है और यह आक्सीजन का अप्रत्यक्ष स्रोत भी है|

ओजोन परत का भी प्रतिसत बहुत कम है वायुमंडल में फिर भी पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में इसका स्थान बहुत महत्वपूर्ण है और यह आक्सीजन का अप्रत्यक्ष स्रोत भी है|

SATYAMEV JAYATE IS OUR MOTTO: सत्यम शिवम् सुन्दरम के भी पुजारी हैं अतः तिरंगे में चार रंग ( अशोक चक्र नीला और केंद्र बिंदु पर अति सीमित स्थान पर है सफेद रंग के साथ) होने के बावजूद हम उसे तिरंगा ही कहते हैं|

SATYAMEV JAYATE IS OUR MOTTO: सत्यम शिवम् सुन्दरम के भी पुजारी हैं अतः तिरंगे में चार रंग ( अशोक चक्र नीला और केंद्र बिंदु पर अति सीमित स्थान पर है सफेद रंग के साथ) होने के बावजूद हम उसे तिरंगा ही कहते हैं|

भारत देह या देश है जिसमे भगवान् के प्रति प्रेम और आस्था हो यह दो शब्दों से मिलकर बना है: भ (भगवान्)+आरत (प्रेम और आस्था में लीन)| श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को कौन्तेय, महाबाहु, धनञ्जय के साथ साथ भारत शब्द से संबोधित किया है क्योंकि अर्जुन को भगवान् में अतिसय आस्था और प्रेम था यह तो देह मतलब शरीर धारी मानव की बात हुई| इसी प्रकार भारत देश वह देश है जिसके निवासी इस्वर में आस्था और प्रेम रखते हैं|

भारत देह या देश है जिसमे भगवान् के प्रति प्रेम और आस्था हो यह दो शब्दों से मिलकर बना है: भ (भगवान्)+आरत (प्रेम और आस्था में लीन)| श्रीमद्भागवत गीता में श्री कृष्ण भगवान् ने अर्जुन को कौन्तेय, महाबाहु, धनञ्जय के साथ साथ भारत शब्द से संबोधित किया है क्योंकि अर्जुन को भगवान् में अतिसय आस्था और प्रेम था यह तो देह मतलब शरीर धारी मानव की बात हुई| इसी प्रकार भारत देश वह देश है जिसके निवासी इस्वर में आस्था और प्रेम रखते हैं|

बड़े वरगद की छाया में छोटा वरगद भले ही बड़ा नहीं हो पाता है पर उसका अस्तित्व मिटाने से नहीं मिटता है और जब बड़े वरगद की छाया समाप्त प्राय हो जाती है तो फिर अवसर आने पर वह अपना प्रभाव दिखाना प्रारम्भ कर देता है।

बड़े वरगद की छाया में छोटा वरगद भले ही बड़ा नहीं हो पाता है पर उसका अस्तित्व मिटाने से नहीं मिटता है और जब बड़े वरगद की छाया समाप्त प्राय हो जाती है तो फिर अवसर आने पर वह अपना प्रभाव दिखाना प्रारम्भ कर देता है। <<<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

There were many dignities guided by God gifted skill and knowledge who sacrificed themself for a common people life in the region specific to all over the World which till date produces a common man life of us and hence we should have our duty to bear some(very partial) load for continue this humanity which may be creat some disturbances to us but it will make our comming generation's life happy. Yes, you may see this effect it is not sure because this needs Forgiveness, Sacrifice and Industriousness as well as more many efforts without any guaranttee of name-fame and enrichment. Jai Hind-Jai Bharat, Jai Shri Ram/Krishna.

There were many dignities guided by God gifted skill and knowledge who sacrificed themself for a common people life in the region specific to all over the World which till date produces a common man life of us and hence we should have our duty to bear some(very partial) load for continue this humanity which may be creat some disturbances to us but it will make our comming generation's life happy. Yes, you may see this effect it is not sure because this needs Forgiveness, Sacrifice and Industriousness as well as more many efforts without any guaranttee of name-fame and enrichment. Jai Hind-Jai Bharat, Jai Shri Ram/Krishna.

Krishna had elder brother Balram who may guide (Krishna may follow it or not) and support him but Ram had no such elder brother but had idea and guidance of Guru Shreshtha Vashishtha and 3 follower younger brothers. 》》》for me Balram is my Parampita Parameshwar(Kashyap Gotriy Triphala:Vilva:Bel: Food of Lord Shiv and Shiva:Sati:Uma:Aparna:Gauri:Girija:Parvati Pandey Sanatan Brahman Sarangdhar/Devavrat kuleen Dr. Premchand i.e. Lord Shiva) and Guru Vashishtha is my Paramguru Parampita Parameshwar (Gautam Gotriya Vyashi:Grand son of Vashishtha Mishra Sanatan Brahman Ramanand Kuleen Shri Shridhar i.e. Lord Vishnu) and followers are the direct and indirect supporters.

Krishna had elder brother Balram who may guide (Krishna may follow it or not) and support him but Ram had no such elder brother but had idea and guidance of Guru Shreshtha Vashishtha and 3 follower younger brothers. 》》》for me Balram is my Parampita Parameshwar(Kashyap Gotriy Triphala:Vilva:Bel: Food of Lord Shiv and Shiva:Sati:Uma:Aparna:Gauri:Girija:Parvati Pandey Sanatan Brahman Sarangdhar/Devavrat kuleen Dr. Premchand i.e. Lord Shiva) and Guru Vashishtha is my Paramguru Parampita Parameshwar (Gautam Gotriya Vyashi:Grand son of Vashishtha Mishra Sanatan Brahman Ramanand Kuleen Shri Shridhar i.e. Lord Vishnu) and followers are the direct and indirect supporters.

SARANG(CHANDRA OR GANGA OR SARANG DHANUSH=SARANG) DHAR=CHANDRASHEKHAR: SHASHIDHAR:RAKESHDHAR:SHASHANKDHAR(SHIV) AND GANGADHAR:GANGANATH(SHIV) and SARANG DHANUSHDHARI=SARANGADHAR VISHNU-RAM-KRISHNA. About to 9 years ago this is the place of same Indian Institute of Science Bangalore, Bangaluru , Karnataka where I denied the offer to go any where in the World and take establishment of life being a passport holder and till date I not renewed my passport even then some people have question about my great determination and faith and they are always in mission to search some one to make my substitute and thus replace me. They should know that every one's substitute is not possible and myself is one of them.

SARANG(CHANDRA OR GANGA OR SARANG DHANUSH=SARANG) DHAR=CHANDRASHEKHAR: SHASHIDHAR:RAKESHDHAR:SHASHANKDHAR(SHIV) AND GANGADHAR:GANGANATH(SHIV) and SARANG DHANUSHDHARI=SARANGADHAR VISHNU-RAM-KRISHNA. About to 9 years ago this is the place of same Indian Institute of Science Bangalore, Bangaluru , Karnataka where I denied the offer to go any where in the World and take establishment of life being a passport holder and till date I not renewed my passport even then some people have question about my great determination and faith and they are always in mission to search some one to make my substitute and thus replace me. They should know that every one's substitute is not possible and myself is one of them.

यह सत्य है कि सीता ने विश्व कि सभी विभूतियों जैसा वर माँ गौरी से मांगा था जिसमे प्रमुख हैं विष्णु, शिव, ब्रह्मा, परशुराम और दुर्वाशा जैसी शक्तिया सामिल हैं पर कहा था कि इन सबके अच्छे गुण हो पर इन सबमे कुछ कमिया है (जिसका वृहद् वर्णन है यहाँ उल्लेख करना जरूरी नहीं) वे गुण मेरे होने वाले पति में न हों तो सब कुछ विचार कर माँ पारवती ने भगवान् श्रीराम को पाया जिसमे विश्व की सभी विभूतियों के तेजस्वी गुण के साथ-२ धीर-वीर-गम्भीर तथा मृदुल स्वाभाव था। ------------मित्रों अगर स्वयं परशुराम कश्यप ऋषि को उद्दंड क्षत्रिय राजाओं से जीती हुई जमीन यदि कश्यप ऋषि को दान दी थी तो कम से कम ब्राह्मणों कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी कश्यप ऋषि ने ली होगी और कश्यप ऋषि में समस्त भूमण्डल का नियंत्रण कर सकने कि क्षमता परशुराम ने पायी होगी तभी तो परशुराम ने ऐसा किया होगा और तभी तो कश्यप (दशरथ) गोत्रीय श्रीराम को अपना Vishnu Dhanush(Sarang) और कश्यप गोत्रीय (वशुदेव) श्रीकृष्ण को चक्र भेंट किया होगा कि ये ब्राह्मणों कि रक्षा करेंगे धर्म कि रक्षा कि सीमा में न कि रावण जैसे अधार्मिक ब्रह्मणो कि रक्षा कि जिम्मेदारी दी थी। -------अतः मित्रों कोई भी कश्यप गोत्रीय चाहे वह सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंसीय/Raghuvanseeya क्षत्रिय श्रीराम हों या चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/Vrishni Vansheeya श्रीकृष्ण हो या कोई भी कश्यप गोत्रीय हो इस संसार में अगर उसका स्वयं का अस्तित्व सुरक्षित है तो वह ब्राह्मणवादी होगा ही होगा अन्यथा वह कश्यप गोत्रीय हो ही नहीं सकता और ब्राह्मणवादी का मतलब यह नहीं कि अधर्म करना और दूसरे धर्म और जाती को सताना या किशी को रावण जैसा ब्राह्मण बनाने से न रोकना या रावण बनाने के लिए बढ़ावा देना वरन ब्राह्मण के मूल उद्देश "समरस समाज कि स्थापना के लिए भरसक प्रयत्न" को करने वाले ब्राह्मण कि सुरक्षा करना।

यह सत्य है कि सीता ने विश्व कि सभी विभूतियों जैसा वर माँ गौरी से मांगा था जिसमे प्रमुख हैं विष्णु, शिव, ब्रह्मा, परशुराम और दुर्वाशा जैसी शक्तिया सामिल हैं पर कहा था कि इन सबके अच्छे गुण हो पर इन सबमे कुछ कमिया है (जिसका वृहद् वर्णन है यहाँ उल्लेख करना जरूरी नहीं) वे गुण मेरे होने वाले पति में न हों तो सब कुछ विचार कर माँ पारवती ने भगवान् श्रीराम को पाया जिसमे विश्व की सभी विभूतियों के तेजस्वी गुण के साथ-२ धीर-वीर-गम्भीर तथा मृदुल स्वाभाव था। ------------मित्रों अगर स्वयं परशुराम कश्यप ऋषि को उद्दंड क्षत्रिय राजाओं से जीती हुई जमीन यदि कश्यप ऋषि को दान दी थी तो कम से कम ब्राह्मणों कि सुरक्षा कि जिम्मेदारी कश्यप ऋषि ने ली होगी और कश्यप ऋषि में समस्त भूमण्डल का नियंत्रण कर सकने कि क्षमता परशुराम ने पायी होगी तभी तो परशुराम ने ऐसा किया होगा और तभी तो कश्यप (दशरथ) गोत्रीय श्रीराम को अपना Vishnu Dhanush(Sarang) और कश्यप गोत्रीय (वशुदेव) श्रीकृष्ण को चक्र भेंट किया होगा कि ये ब्राह्मणों कि रक्षा करेंगे धर्म कि रक्षा कि सीमा में न कि रावण जैसे अधार्मिक ब्रह्मणो कि रक्षा कि जिम्मेदारी दी थी। -------अतः मित्रों कोई भी कश्यप गोत्रीय चाहे वह सूर्यवंशीय/इक्षाकुवंसीय/Raghuvanseeya क्षत्रिय श्रीराम हों या चंद्रवंशीय/यदुवंशीय/Vrishni Vansheeya श्रीकृष्ण हो या कोई भी कश्यप गोत्रीय हो इस संसार में अगर उसका स्वयं का अस्तित्व सुरक्षित है तो वह ब्राह्मणवादी होगा ही होगा अन्यथा वह कश्यप गोत्रीय हो ही नहीं सकता और ब्राह्मणवादी का मतलब यह नहीं कि अधर्म करना और दूसरे धर्म और जाती को सताना या किशी को रावण जैसा ब्राह्मण बनाने से न रोकना या रावण बनाने के लिए बढ़ावा देना वरन ब्राह्मण के मूल उद्देश "समरस समाज कि स्थापना के लिए भरसक प्रयत्न" को करने वाले ब्राह्मण कि सुरक्षा करना।

Friday, February 24, 2017

पता चल गया न की केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर) में और कैलाशनाथ जिनका सीधा सीधा एकनाम मात्र है गिरीश में कौन ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है की अभी भी नहीं समझ में आया या अब भी मेरी कुंडली खोजोगे मेरे घर से लेकर दुनिया के कोने कोने या फिर दुनिया भर की मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में? >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।

पता चल गया न की केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर) में और कैलाशनाथ जिनका सीधा सीधा एकनाम मात्र है गिरीश में कौन ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है की अभी भी नहीं समझ में आया या अब भी मेरी कुंडली खोजोगे मेरे घर से लेकर दुनिया के कोने कोने या फिर दुनिया भर की मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज में? >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

गुरुदेव जोशी आप मुझ पूर्णातिपूर्ण मतलब जो "सत्यम शिवम् सुंदरम" और "सत्यमेव जयते" दोनों हो उससे सदा सदा ही समाज को अपने कृत्य से सदा अपूर्ण करने का प्रयास करने वाले रावन-मेघनाद कुल का समर्थन करवा रहे थे तो वह आप की कौन सी गुरुता थी जब मैं स्वयं आप समेत सम्पूर्ण संसार का का भी अवलंबन था? लक्ष्य तो पूर्ण करवा दिया गया पर उस रावन-मेघनाद कुल विशेष की भौतिकता और आप का अनवरत प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन उसकी स्वयं आप के लिए और आप के सुभेक्षुओं के लिए भी हानिकारक है।

गुरुदेव जोशी आप मुझ पूर्णातिपूर्ण मतलब जो "सत्यम शिवम् सुंदरम" और "सत्यमेव जयते" दोनों हो उससे सदा सदा ही समाज को अपने कृत्य से सदा अपूर्ण करने का प्रयास करने वाले रावन-मेघनाद कुल का समर्थन करवा रहे थे तो वह आप की कौन सी गुरुता थी जब मैं स्वयं आप समेत सम्पूर्ण संसार का का भी अवलंबन था? लक्ष्य तो पूर्ण करवा दिया गया पर उस रावन-मेघनाद कुल विशेष की भौतिकता और आप का अनवरत प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन उसकी स्वयं आप के लिए और आप के सुभेक्षुओं के लिए भी हानिकारक है। >>>>>>>>>>>>तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

इस प्रयागराज में दलित से लेकर कुर्मी (कूर्मावतारी) तक और इस्लामनुयायी से लेकर हिन्दू तक सब ईसाइयत (कृत्य और मतावलंबन) के चक्र से निजात नहीं पा रहे थे और एक दूसरे पर आज तक आरोप मढ़े जा रहे थे और दक्षिण भारत पूर्वोत्तर से भी गयी गुज़री दशा हो गयी थी पर हिन्दू जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने से कुछ बाहर बाहर अभी दिखाई नहीं पड़ रहा था और यहां तक की मेरी कुंडली निकलने की चेतावनी भ्रमित हिन्दू रक्षक समूह देने लगा तो सत्य बताना जरूरी हो गया था की पूरी दुनिया ईसाइयत के ग्रहण से ग्रषित हो चुकी है और अब इससे स्वयं ईसाइयत और इस्लामियत को खतरा है क्योंकि हिन्दू समाज का तथाकथित रक्षक समूह मतिभ्रम वस् काले और गोरे के गोरखधंधे पर उतर आया है और सुदूर दक्षिण से प्रेरित हो सबका एक ही उपाय बता रहा है गधे और घोड़े से खच्चर बन जाएगा मतलब काले और गोरे का गोरखधंधा उनका पूर्ण सफल हो जाएगा तो हिन्दू समाज सर्वशक्तिमान हो जाएगा पर मेरे विचार से यह अपरिहार्य मामलों से हो जाय तो हो जाय पर अति हुए तो ईसाइयत में ही बदल जाएगा फिर मानवता का संघार ही एक रास्ता ही मानवता की रक्षा का विकल्प पुनः होगा जिससे इसे विगत 15 वर्ष पूर्व किशी तरह से बचा जा सका है? भाँग का नशा उतर सकता है पर काले और गोरे के गोरखधंधे का नशा अंत करके हे दम लेता है।

इस प्रयागराज में दलित से लेकर कुर्मी (कूर्मावतारी) तक और इस्लामनुयायी से लेकर हिन्दू तक सब ईसाइयत (कृत्य और मतावलंबन) के चक्र से निजात नहीं पा रहे थे और एक दूसरे पर आज तक आरोप मढ़े जा रहे थे और दक्षिण भारत पूर्वोत्तर से भी गयी गुज़री दशा हो गयी थी पर हिन्दू जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने से कुछ बाहर बाहर अभी दिखाई नहीं पड़ रहा था और यहां तक की मेरी कुंडली निकलने की चेतावनी भ्रमित हिन्दू रक्षक समूह देने लगा तो सत्य बताना जरूरी हो गया था की पूरी दुनिया ईसाइयत के ग्रहण से ग्रषित हो चुकी है और अब इससे स्वयं ईसाइयत और इस्लामियत को खतरा है क्योंकि हिन्दू समाज का तथाकथित रक्षक समूह मतिभ्रम वस् काले और गोरे के गोरखधंधे पर उतर आया है और सुदूर दक्षिण से प्रेरित हो सबका एक ही उपाय बता रहा है गधे और घोड़े से खच्चर बन जाएगा मतलब काले और गोरे का गोरखधंधा उनका पूर्ण सफल हो जाएगा तो हिन्दू समाज सर्वशक्तिमान हो जाएगा पर मेरे विचार से यह अपरिहार्य मामलों से हो जाय तो हो जाय पर अति हुए तो ईसाइयत में ही बदल जाएगा फिर मानवता का संघार ही एक रास्ता ही मानवता की रक्षा का विकल्प पुनः होगा जिससे इसे विगत 15 वर्ष पूर्व किशी तरह से बचा जा सका है? भाँग का नशा उतर सकता है पर काले और गोरे के गोरखधंधे का नशा अंत करके हे दम लेता है। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।

तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें।>>>>>>>.जो सत्यम शिवम् सुंदरम भी हो और सत्यमेव जयते भी हो तो वह <विवेक> है और उसकी दो न मन से कलुषित और न तन से कलुषित सन्ताने क्रमसः विष्णुकांत:विष्णुस्वामी: विष्णु के स्वामी मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्णकांत:कृष्ण के भी स्वामी मतलब कृष्ण ही हो सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब कृष्ण तो हुआ न मैं शिवरामकृष्ण मतलब विवेक। तो आप मुझमे दोनों पा सकते हैं सत्यम शिवम् सुंदरम भी और सत्यमेव जयते भी। तो फिर मेरी कुंडली आप कहाँ से ऐसी पाएंगे की आप अपना उल्लू सीधा कर सकें। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।https://vandemataramvivekanandd

मेरा स्पष्ट मानना है की मेरे घर में मन से कलुषित और तन से कलुषित लोगों को नहीं आना है किशी भी युग में और दूसरा मैं अपना घर स्वयं अपने साथ लिए फिरता हूँ और भी स्वयं मेरे माता और पिता की संतति कलंकित और कलुषित हो ही नहीं सकती और हुई तो समाज को चलाने वाले जाने और समाज के चलाने वालों के दबाव में कार्य करने वाले वैदकी समाज जाने।

मेरा स्पष्ट मानना है की मेरे घर में मन से कलुषित और तन से कलुषित लोगों को नहीं आना है किशी भी युग में और दूसरा मैं अपना घर स्वयं अपने साथ लिए फिरता हूँ और भी स्वयं मेरे माता और पिता की संतति कलंकित और कलुषित हो ही नहीं सकती और हुई तो समाज को चलाने वाले जाने और समाज के चलाने वालों के दबाव में कार्य करने वाले वैदकी समाज जाने। >>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैं तो स्वयं घोषित कर चुका हूँ की वैश्विक युग मतलब विश्वएकगांव जैसे तकनीति सम्पन्न युग में तथाकथित सामाजिक न्याय एक बेईमानी है मेरे जैसे लोगों के साथ और इस सम्बन्ध में आप लोग कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि की इससे स्थानीय से लेकर अंतरास्ट्रीय नीतिकार, प्रशासक, शासक व् मानवीय संशाधन की कमी जूझ रहे देशों का अत्यंत ही लाभकारी हित है इसे जारी रहने में या आनुवांशिक संतति को दूसरों से पलवाने में बहुत से लोगों को आसानी होती चली आ रही है तो फिर जब किशी का तेज नहीं संभालेगा तो उसकी कुंडली खोजेंगे तो मैं अपनी कुंडली इसी के साथ ही बताये चल रहा हूँ और आप को जो पता हो बताइयेगा। >

मैं तो स्वयं घोषित कर चुका हूँ की वैश्विक युग मतलब विश्वएकगांव जैसे तकनीति सम्पन्न युग में तथाकथित सामाजिक न्याय एक बेईमानी है मेरे जैसे लोगों के साथ और इस सम्बन्ध में आप लोग कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि की इससे स्थानीय से लेकर अंतरास्ट्रीय नीतिकार, प्रशासक, शासक व् मानवीय संशाधन की कमी जूझ रहे देशों का अत्यंत ही लाभकारी हित है इसे जारी रहने में या आनुवांशिक संतति को दूसरों से पलवाने में बहुत से लोगों को आसानी होती चली आ रही है तो फिर जब किशी का तेज नहीं संभालेगा तो उसकी कुंडली खोजेंगे तो मैं अपनी कुंडली इसी के साथ ही बताये चल रहा हूँ और आप को जो पता हो बताइयेगा। >>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

इस संसार के कुछ ऐसे सिध्दहस्त प्रशासक, शासक, नीतिकार और हर मानव जीवन के सभी क्षेत्र के स्वयं को स्वयंभू विशेसज्ञ मानने वाले और उनकी टीम इस संसार घूम रही है जो सबकी कुंडली खोजते है फिर अपना उल्लू शीधा करते हैं और कहते हैं की मैंने उस अमुक व्यक्ति नियंत्रित करके संसार का बहुत बड़ा अमोघास्त्र चला लिया जो ब्रह्मअस्त्र को भी मात दे देता है तो मैं अपनी कुंडली लिए हुए फिरता हूँ मुझे नियंत्रीत किया जाय और मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सामने लाया जाय या मेरी कुंडली जो उनको ज्ञात हो उसे सामने लाया जाय? हर पुरुष विदूषक की तरह प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए कम से कम इतना तो समझ लीजिये अगर लोक मर्यादा का ज़रा सा भान हो और हर किशी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ आप नहीं ला सकते है इस संसार में और न सबकी कुंडली जानकार उसको आप नीचा दिखा सकते हैं जो आम मानव जीवन को पटरी पर लाने हेतु संकल्पित हो उसकी कदम कदम पर कुंडली नहीं खोजते हैं और न उसका जयेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तैयार करने की जुगाड़ में रहते हैं कदम कदम पर उसके जीवन लीला के अभिनय को अपमानित करने हेतु ?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक

इस संसार के कुछ ऐसे सिध्दहस्त प्रशासक, शासक, नीतिकार और हर मानव जीवन के सभी क्षेत्र के स्वयं को स्वयंभू विशेसज्ञ मानने वाले और उनकी टीम इस संसार घूम रही है जो सबकी कुंडली खोजते है फिर अपना उल्लू शीधा करते हैं और कहते हैं की मैंने उस अमुक व्यक्ति नियंत्रित करके संसार का बहुत बड़ा अमोघास्त्र चला लिया जो ब्रह्मअस्त्र को भी मात दे देता है तो मैं अपनी कुंडली लिए हुए फिरता हूँ मुझे नियंत्रीत किया जाय और मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ सामने लाया जाय या मेरी कुंडली जो उनको ज्ञात हो उसे सामने लाया जाय? हर पुरुष विदूषक की तरह प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए कम से कम इतना तो समझ लीजिये अगर लोक मर्यादा का ज़रा सा भान हो और हर किशी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ आप नहीं ला सकते है इस संसार में और न सबकी कुंडली जानकार उसको आप नीचा दिखा सकते हैं जो आम मानव जीवन को पटरी पर लाने हेतु संकल्पित हो उसकी कदम कदम पर कुंडली नहीं खोजते हैं और न उसका जयेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तैयार करने की जुगाड़ में रहते हैं कदम कदम पर उसके जीवन लीला के अभिनय को अपमानित करने हेतु ?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>. केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ: भुवनेश्वर ) >>>>हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ:भुवनेश्वर)>>>> हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक|

केदारेश्वर:आदिशिव:आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ:भुवनेश्वर)>>>> हे शेषनाग (अनंत:अमित) कृत नागवंश व् दुर्वाशाकृत कर्णवंश! एकम् सत्, विप्राः बहुधा वदन्ति: Truth:GOD is One, though the wise know it by many name: जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर।>>>>>>>ईश्वर=सत्य एक किन्तु आस्तिक भक्तजन या बुद्धजन उसको कई नामो से जानते हैं: वह शिव हूँ जो राम भी है और कृष्ण भी है; वह राम हूँ जो शिव भी है और कृष्ण भी है; और वह कृष्ण हूँ जो राम भी है और शिव भी है और इस प्रकार मैं विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) मतलब विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) हूँ जो अपने में एकादश शिव है मतलब एकादश रूद्र है>>>>> जो "प्रलयंकारी" शिव से "सत्यम शिवम् सुंदरम" शिव तक की शक्ति से संपन्न है और इस जगत में उसे साकार किया है इसी विश्वमानता के मूल केंद्र प्रयागराज में ही रहकर। >>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, February 23, 2017

07-02-2003 minus 11-11-1975 = 27 years, 2 months and 24 days age only. A perfect Bal Brahmacharya Brahman son of the above age became Parambrahm(Brahma + Vishnu + Mahesh) at the centre of the World humanity i.e at Prayagraj/Allah Aabaad/Ella Aavaash/Ella Aabaad/Allah Aavaash/Allahabad /Triveni/Tri-Sangam for conservation /preservation /cultivation /protection/ innovation of world humanity and given perfection to his work in November, 2016. This is to inform that his involvement in single one form of above said dignities was not sufficient in which form he was present here since 11 September, 2001(having age of 25 years and 10 months only) and was based on the performance of other so called two person. It is also stated that as a common man in general, his presence in Prayagraj was since September, 2000.

07-02-2003 minus 11-11-1975 = 27 years, 2 months and 24 days age only. A perfect Bal Brahmacharya Brahman son of the above age became Parambrahm(Brahma + Vishnu + Mahesh) at the centre of the World humanity i.e at Prayagraj/Allah Aabaad/Ella Aavaash/Ella Aabaad/Allah Aavaash/Allahabad /Triveni/Tri-Sangam for conservation /preservation /cultivation /protection/ innovation of world humanity and given perfection to his work in November, 2016. This is to inform that his involvement in single one form of above said dignities was not sufficient in which form he was present here since 11 September, 2001(having age of 25 years and 10 months only) and was based on the performance of other so called two person. It is also stated that as a common man in general, his presence in Prayagraj was since September, 2000.>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Saturday, February 18, 2017

श्रीधरं माधवं गोपिका वल्लभं, जानकी नायकं रामचंद्रम भजे।

कृष्णदामोदरं राधिकावल्लभम् |
रामनारायणं जानकीवल्लभम् ||
अच्युतम केशवं राम नारायणं,
कृष्ण दमोदरम् वासुदेवं हरिं,
श्रीधरं माधवं गोपिका वल्लभं,
जानकी नायकं रामचंद्रम भजे।
अच्युतम केसवं सत्य भामधावं,
माधवं श्रीधरं राधिका अराधितम,
इंदिरा मन्दिरम चेतसा सुन्दरम,
देवकी नंदनं नन्दजम सम भजे।
विष्णव जिष्णवे शंखिने चक्रिने,
रुकमनी रागिने जानकी जानए,
वल्लवी वल्लभा यार्चिधा यात्मने,
कंस विध्वंसिने वंसिने ते नमः।
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायणा,
श्री पते वासु देवा जीता श्री निधे,
अच्युतानंता हे माधव अधोक्षजा,
द्वारका नायका, द्रोपधि रक्षक।
राक्षस क्शोबिता सीताया शोभितो,
दंडा करण्या भू पुण्यता कारणा,
लक्ष्मना नान्वितो वानरी सेवितो,
अगस्त्य संपूजितो राघव पातु माम।
धेनु कृष्टको अनिष्ट क्रुद्वेसिनाम,
केसिहा कंस ह्रुद वंसिका वाधना,
पूतना नसाना सूरज खेलनो,
बाल गोपलका पातु माम सर्वदा।
विध्यु दुध्योतवत प्रस्फुरा द्वाससम,
प्रोउद बोधवल् प्रोल्लसद विग्रहं,
वन्याय मलय शोभि थोर स्थलं,
लोहिन्तङ्ग्रि द्वयम् वारीजक्षं भजे।
कन्चितै कुण्डलै ब्रज मानानानां,
रत्न मोउलिं लसद कुण्डलं गण्डयो,
हार केयुरगं कङ्कण प्रोज्वलम्,
किङ्किणी मञ्जुल स्यमलं तं भजे।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान खेलते नहीं,
ग्वाल बालों के जैसे खिलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
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Achyutam Keshavam Krishna Damodaram
Rama naraynam Janakivallabham-2
Naam Japate Chalo Kaam Karte Chalo
Har Samay Krishna Ka Dhyaan Karte Chalo-2
Achyutam Keshavam Krishna Damodaram,
Rama Naraynam Janaki Vallabham-2
Yaad Aayegi Unko Kabhi Na Kabhi
Krishan Darshan To Denge Kabhi Na Kabhi-2
Achyutam Keshavam Krishna Damodaram
Rama Naraynam Janaki Vallabham-2

ज्ञानेंद्र जी व् उमाशंकर जी आप लोगों को जानकर अति आनन्द होगा की काशिराज राजर्षि दक्ष प्रजापति (ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र) और राजर्षि मिथिलानरेश:मिथिलेश जनक दोनों एक ही वन्सज थे। >>>>>>जगत जननी जानकी सीता(त्रिदेवियों महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का महालक्ष्मी स्वरुप में सम्मिलित स्वरुप) जिनकी छाया है यह चराचर जगत और जो सामाजिक स्वरूपा है जगत जननी जगदम्बा(त्रिदेवियों महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का महागौरी स्वरुप में सम्मिलित स्वरुप) की दोनों के पिता हैं क्रमशः मिथिला नरेश जनक जो स्वयं में ही राजर्षि और राजर्षि काशिराज दक्ष प्रजापति मतलब ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र (जिनके पास चौदह पुत्रियां थी जिसमे प्रथम सती:उमा:अपर्णा:गौरी:गिरिजा;पार्वती से शिव का विवाह और अन्य 13 से ब्रह्मा के निवेदन पर सप्तर्षि मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप का विवाह हुआ था जिनको ऋषि जगत से मानव जगत में प्रवेशित प्रथम मानव मनु या ईसाइयत और इस्लाम में आदम कहते है: जिनके वन्सज में आते है नर, दानव, गन्धर्व, नागवंश, किन्नर, समस्त देव, सूर्यसारथी अरुण, विष्णु वाहन गरुण, सूर्यदेव (सूर्यवंश वंश), चन्द्रदेव(चंद्रवंश), सावर्ण ऋषि समेत विष्णु के लगभग समस्त अवतार जिसमे से दो मात्र सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म अवतार श्रीराम (दशरथ:कश्यप) और श्रीकृष्ण(वशुदेव:कश्यप) भी सामिल हैं)।>>>>>>आप लोगों को जानकर अति आनन्द होगा की काशिराज राजर्षि दक्ष प्रजापति (ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र) और राजर्षि मिथिलानरेश:मिथिलेश जनक दोनों एक ही वन्सज थे।

ज्ञानेंद्र जी व् उमाशंकर जी आप लोगों को जानकर अति आनन्द होगा की काशिराज राजर्षि दक्ष प्रजापति (ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र) और राजर्षि मिथिलानरेश:मिथिलेश जनक दोनों एक ही वन्सज थे। >>>>>>जगत जननी जानकी सीता(त्रिदेवियों महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का महालक्ष्मी स्वरुप में सम्मिलित स्वरुप) जिनकी छाया है यह चराचर जगत और जो सामाजिक स्वरूपा है जगत जननी जगदम्बा(त्रिदेवियों महा सरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी का महागौरी स्वरुप में सम्मिलित स्वरुप) की दोनों के पिता हैं क्रमशः मिथिला नरेश जनक जो स्वयं में ही राजर्षि और राजर्षि काशिराज दक्ष प्रजापति मतलब ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र (जिनके पास चौदह पुत्रियां थी जिसमे प्रथम सती:उमा:अपर्णा:गौरी:गिरिजा;पार्वती से शिव का विवाह और अन्य 13 से ब्रह्मा के निवेदन पर सप्तर्षि मारीच के एकलौते पुत्र कश्यप का विवाह हुआ था जिनको ऋषि जगत से मानव जगत में प्रवेशित प्रथम मानव मनु या ईसाइयत और इस्लाम में आदम कहते है: जिनके वन्सज में आते है नर, दानव, गन्धर्व, नागवंश, किन्नर, समस्त देव, सूर्यसारथी अरुण, विष्णु वाहन गरुण, सूर्यदेव (सूर्यवंश वंश), चन्द्रदेव(चंद्रवंश), सावर्ण ऋषि समेत विष्णु के लगभग समस्त अवतार जिसमे से दो मात्र सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म अवतार श्रीराम (दशरथ:कश्यप) और श्रीकृष्ण(वशुदेव:कश्यप) भी सामिल हैं)।>>>>>>आप लोगों को जानकर अति आनन्द होगा की काशिराज राजर्षि दक्ष प्रजापति (ब्रह्मा और सरस्वती के एकमात्र भौतिक पुत्र) और राजर्षि मिथिलानरेश:मिथिलेश जनक दोनों एक ही वन्सज थे। >>>>>>>>>>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, February 16, 2017

2001 से पहले बहुत से लोग रहे होंगे और 2001 से लेकर 2003 के बीच केवल तीन [प्रेमचंद(शिव), श्रीधर(विष्णु) और जोशी(ब्रह्मा) जिन्होंने मुझपर विस्वास कर वैश्विक परिश्थितियों के सन्दर्भ में प्रयागराज हेतु सर्वश्रेष्ठ समझा और संकल्पित किया] ही मात्र, पर 7 फरवरी, 2003 में मानवता हेतु प्रयागराज मेरे संकल्पित हो जाने के बाद पूर्ण रूपेण निश्चित हो गया था की इस संसार में मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न कोई था, न है और न होगा? और वह 11/18 सितम्बर, 2007 को सैद्धान्तिक रूप से पूर्ण सत्य सावित हुआ तथा अक्टूबर 2007 से अक्टूबर 2009 तक सार्वजनिक सर्वव्यापक परिक्षण हुआ प्रयागराज से दूर दक्षिण में और 2009 से 2016 तक पुनः प्रयागराज में जारी संघर्ष ने न की केवल स्थानीय अपितु वैश्विक रूप में इस सम्पूर्ण मानव समाज का सप्रमाण चक्रवर्ती ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ घोषित किया। पर मेरे सर्वकालिक रूप से इस संसार में सभी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाने मात्र से समाज अपनी चाल नहीं भूलता तो फिर सांसारिक रूप में ही सब कुछ होता है अगर पूर्ण सत्य न ही सही सामान्य सत्य तक ही चल रहा तब तक (सहन करने की क्षमता तक ही); कारन जब तक जिसकी इक्षा शक्ति और जिजीविषा कार्य करती है ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को चाहिए की सांसारिक लोगों को ऐसी स्थिति में उसका कार्य करते रहने देना चाहिए और अपना सान्सारिक मार्ग चुन समय की गति अबाधगति से बढ़ते रहने देना चाहिए अगर ब्रह्मा का वरदान सतत सृष्टि:सीता की छाया का संचालन जारी रखना है?

2001 से पहले बहुत से लोग रहे होंगे और 2001 से लेकर 2003 के बीच केवल तीन [प्रेमचंद(शिव), श्रीधर(विष्णु) और जोशी(ब्रह्मा) जिन्होंने मुझपर विस्वास कर वैश्विक परिश्थितियों के सन्दर्भ में प्रयागराज हेतु सर्वश्रेष्ठ समझा और संकल्पित किया] ही मात्र, पर 7 फरवरी, 2003 में मानवता हेतु प्रयागराज मेरे संकल्पित हो जाने के बाद पूर्ण रूपेण निश्चित हो गया था की इस संसार में मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न कोई था, न है और न होगा? और वह 11/18 सितम्बर, 2007 को सैद्धान्तिक रूप से पूर्ण सत्य सावित हुआ तथा अक्टूबर 2007 से अक्टूबर 2009 तक सार्वजनिक सर्वव्यापक परिक्षण हुआ प्रयागराज से दूर दक्षिण में और 2009 से 2016 तक पुनः प्रयागराज में जारी संघर्ष ने न की केवल स्थानीय अपितु वैश्विक रूप में इस सम्पूर्ण मानव समाज का सप्रमाण चक्रवर्ती ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ घोषित किया। पर मेरे सर्वकालिक रूप से इस संसार में सभी का ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाने मात्र से समाज अपनी चाल नहीं भूलता तो फिर सांसारिक रूप में ही सब कुछ होता है अगर पूर्ण सत्य न ही सही सामान्य सत्य तक ही चल रहा तब तक (सहन करने की क्षमता तक ही); कारन जब तक जिसकी इक्षा शक्ति और जिजीविषा कार्य करती है ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को चाहिए की सांसारिक लोगों को ऐसी स्थिति में उसका कार्य करते रहने देना चाहिए और अपना सान्सारिक मार्ग चुन समय की गति अबाधगति से बढ़ते रहने देना चाहिए अगर ब्रह्मा का वरदान सतत सृष्टि:सीता की छाया का संचालन जारी रखना है? >>>>>>>>>>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य: १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गायत्री-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।

मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय-गंगा-गीता-गायत्री-गौरी पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज(श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव:शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Sunday, February 12, 2017

इस विगत युग (2000/2001/2003-2007/2009-वर्तमान) को आप महासहस्राब्दी परिवर्तन/महाविश्वपरिवर्तन/महासमुद्रमंथन और उसका संक्रमण काल कह सकते है?>>>>>>>>>>>> जिसने हर जाति/धर्म/सम्प्रदाय/मतावलंबन/संस्था/संगठन/राज्य/देश/राष्ट्र और इस प्रकार सम्पूर्ण विश्व मानवता का अत्यंत ही विकत अवस्था में मानवता के हर सिद्धान्त को पालन करते हुए प्रतिनिधित्व किया हो प्रयागराज/अल्लाह आबाद/अल्लाह आवास/इला आबाद/इला आवास/त्रिवेणी/त्रिसंगम/तीर्थराज में अपने को केंद्रित करते हुए उस दौर (2000/2001/2003-2007/2009-वर्तमान) में जब विश्व को उसके जनमानस के जीवन से ही बढे हुए पाप की अति से निवारण हेतु विश्वसंहार ही एक मात्र विकल्प रहा हो उसका स्वयंसेवकत्व वे लोग/जन समूह/व्यक्ति विशेष जानना और समझना चाहते है जिसमे से कुछ स्वेक्षाचारी लोग हैं जो केवल स्वयम मात्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, कुछ परिवार मात्र का प्रतिनिधित्व कर रहे है और कुछ गली कूचे का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, कुछ लोग कालोनी का प्रतिनिधित्व कर रहे है, कुछ लोग गाँव का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो कुछ लोग तहसील का पतिनिधित्व कर रहे हैं, और कुछ लोग जिलापरिषद, कुछ लोग विधान सभा/विधानपरिषद का प्रतिनिधित्व कर रह हैं और कुछ लोग संसदीय क्षेत्र/राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रह और कुछ लोग प्रान्त/राज्य का प्रतिनिधित्व तो कुछ लोग राष्ट्र/देश का प्रतिनिधित्व कर रहे है तथा उसमे से कुछ लोग जाति विशेष, संगठन विशेष और संस्था विशेष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं? सब कुछ करना चाहिए आप करिये सब स्वयंसेवा में ही आता है पर ऐसे व्यक्ति से उसकी औकात मत पूँछिये जिसने सम्पूर्ण विश्व की मानवता के संरक्षण, संवर्धन और संपोषण और सतत संचलन हेतु स्वयं में निष्कलंक और निष्पाप होते हुए भी अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) के निर्देश पर अपने को समर्पित कर दिया इसी प्रयागराज में और उद्देश्य की पूर्ण सफल प्राप्ती के साथ पुनः अपने अस्तित्व को प्राप्त किया हो अपने दो रत्नों, विष्णुकांत(विष्णु के स्वामी=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)=परमब्रह्म=राम (त्रिदेव की एकल अवश्था) और कृष्णकान्त(स्वामीकृष्ण या कृष्ण के स्वामी स्वयं कृष्ण=ब्रह्मा+विष्णु+महेश मतलब त्रिदेव की एकल अवस्था) के साथ। तो आप कितना भी कुछ कर लें आप संसार वालों को अस्तित्व में बने रहने हेतु उसकी जरूरत थी, है और रहेगी भी और आप लोग उसका निषेध न कर सके हैं आज तक, न कर ही रहे हैं और न कर पाएंगे क्योंकि उसे केवल निरपेक्ष भाव में ही जीना केवल नहीं आता है पर एकल अवश्था का उसका जीवन भी उसे रास आता रहा है जिसमे की श्रिष्टी=सीता की छाया रूपी यह संसार भी दृष्टिगत नहीं होता हैं कहने का अभिप्राय यह है की सृष्टि=सीता और उसकी छाया का भी अस्तित्व उसी में निहित रहा है उससे अलग नहीं रह सका है।

इस विगत युग (2000/2001/2003-2007/2009-वर्तमान) को आप महासहस्राब्दी परिवर्तन/महाविश्वपरिवर्तन/महासमुद्रमंथन और उसका संक्रमण काल कह सकते है?>>>>>>>>>>>> जिसने हर जाति/धर्म/सम्प्रदाय/मतावलंबन/संस्था/संगठन/राज्य/देश/राष्ट्र और इस प्रकार सम्पूर्ण विश्व मानवता का अत्यंत ही विकत अवस्था में मानवता के हर सिद्धान्त को पालन करते हुए प्रतिनिधित्व किया हो प्रयागराज/अल्लाह आबाद/अल्लाह आवास/इला आबाद/इला आवास/त्रिवेणी/त्रिसंगम/तीर्थराज में अपने को केंद्रित करते हुए उस दौर (2000/2001/2003-2007/2009-वर्तमान) में जब विश्व को उसके जनमानस के जीवन से ही बढे हुए पाप की अति से निवारण हेतु विश्वसंहार ही एक मात्र विकल्प रहा हो उसका स्वयंसेवकत्व वे लोग/जन समूह/व्यक्ति विशेष जानना और समझना चाहते है जिसमे से कुछ स्वेक्षाचारी लोग हैं जो केवल स्वयम मात्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, कुछ परिवार मात्र का प्रतिनिधित्व कर रहे है और कुछ गली कूचे का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, कुछ लोग कालोनी का प्रतिनिधित्व कर रहे है, कुछ लोग गाँव का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो कुछ लोग तहसील का पतिनिधित्व कर रहे हैं, और कुछ लोग जिलापरिषद, कुछ लोग विधान सभा/विधानपरिषद का प्रतिनिधित्व कर रह हैं और कुछ लोग संसदीय क्षेत्र/राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रह और कुछ लोग प्रान्त/राज्य का प्रतिनिधित्व तो कुछ लोग राष्ट्र/देश का प्रतिनिधित्व कर रहे है तथा उसमे से कुछ लोग जाति विशेष, संगठन विशेष और संस्था विशेष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं? सब कुछ करना चाहिए आप करिये सब स्वयंसेवा में ही आता है पर ऐसे व्यक्ति से उसकी औकात मत पूँछिये जिसने सम्पूर्ण विश्व की मानवता के संरक्षण, संवर्धन और संपोषण और सतत संचलन हेतु स्वयं में निष्कलंक और निष्पाप होते हुए भी अपने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) के निर्देश पर अपने को समर्पित कर दिया इसी प्रयागराज में और उद्देश्य की पूर्ण सफल प्राप्ती के साथ पुनः अपने अस्तित्व को प्राप्त किया हो अपने दो रत्नों, विष्णुकांत(विष्णु के स्वामी=ब्रह्मा+विष्णु+महेश)=परमब्रह्म=राम (त्रिदेव की एकल अवश्था) और कृष्णकान्त(स्वामीकृष्ण या कृष्ण के स्वामी स्वयं कृष्ण=ब्रह्मा+विष्णु+महेश मतलब त्रिदेव की एकल अवस्था) के साथ। तो आप कितना भी कुछ कर लें आप संसार वालों को अस्तित्व में बने रहने हेतु उसकी जरूरत थी, है और रहेगी भी और आप लोग उसका निषेध न कर सके हैं आज तक, न कर ही रहे हैं और न कर पाएंगे क्योंकि उसे केवल निरपेक्ष भाव में ही जीना केवल नहीं आता है पर एकल अवश्था का उसका जीवन भी उसे रास आता रहा है जिसमे की श्रिष्टी=सीता की छाया रूपी यह संसार भी दृष्टिगत नहीं होता हैं कहने का अभिप्राय यह है की सृष्टि=सीता और उसकी छाया का भी अस्तित्व उसी में निहित रहा है उससे अलग नहीं रह सका है। >>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Saturday, February 11, 2017

शायद विवेकानंद(विवेक+आनन्द)=रामानंद(राम+आनन्द) गया हो पर मेरी नजर में रामानन्द स्वयं में ही विवेकानन्द के गुरु और रामानन्द का गाँव विवेकानन्द का गुरुग्राम अनन्त काल तक रहेगा।>>>>>>उस शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के अभीष्ठ कार्यपूर्ति हेतु कितनी मेरिट का त्याग हुआ, बलिदान हुआ और कितनी मेरिट तपोलीन हुईं आप केवल अपनी दृष्टि सीमा के अंदर ही अपनी नजर में उनकी मेरिट देख रहे हो।>>>>>>>> यह अभी तो केवल केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर=आद्या (+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) पर दाँव लगा था जिसको की नियंत्रित करने वाले अपने में ही पूर्ण विवेक=राम सशरीर उपस्थित थे उसपर भी यह कि दुनिया ही बदल गयी पर जब जब उसी राम=सशरीर परमब्रह्म=ब्रह्म परमेश्वर मतलब दुनिया को बनाने वाले, चलाने वाले और अति होने पर उसका संहार करने वाले मतलब तीनो करने वाले पर असली दाँव लग जाता तो क्या हुआ होता इसे कभी सोचा है आपने जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) विहीन संसार के बारे में आप सोचते रहते हो और अपनी नजर की सीमा में ही उनकी सांसारिक मेरिट देखते हो और उनका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ खोजते हो विकल्प प्रस्तुत करने हेतु?>>>>>>>> उस शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के अभीष्ठ कार्यपूर्ति हेतु कितनी मेरिट का त्याग हुआ, बलिदान हुआ और कितनी मेरिट तपोलीन हुईं आप केवल अपनी दृष्टि सीमा के अंदर ही अपनी नजर में उनकी मेरिट देख रहे हो।

शायद विवेकानंद(विवेक+आनन्द)=रामानंद(राम+आनन्द) गया हो पर मेरी नजर में रामानन्द स्वयं में ही विवेकानन्द के गुरु और रामानन्द का गाँव विवेकानन्द का गुरुग्राम अनन्त काल तक रहेगा।>>>>>>उस शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के अभीष्ठ कार्यपूर्ति हेतु कितनी मेरिट का त्याग हुआ, बलिदान हुआ और कितनी मेरिट तपोलीन हुईं आप केवल अपनी दृष्टि सीमा के अंदर ही अपनी नजर में उनकी मेरिट देख रहे हो।>>>>>>>> यह अभी तो केवल केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर=आद्या (+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) पर दाँव लगा था जिसको की नियंत्रित करने वाले अपने में ही पूर्ण विवेक=राम सशरीर उपस्थित थे उसपर भी यह कि दुनिया ही बदल गयी पर जब जब उसी राम=सशरीर परमब्रह्म=ब्रह्म परमेश्वर मतलब दुनिया को बनाने वाले, चलाने वाले और अति होने पर उसका संहार करने वाले मतलब तीनो करने वाले पर असली दाँव लग जाता तो क्या हुआ होता इसे कभी सोचा है आपने जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) विहीन संसार के बारे में आप सोचते रहते हो और अपनी नजर की सीमा में ही उनकी सांसारिक मेरिट देखते हो और उनका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ, वरिष्ठ खोजते हो विकल्प प्रस्तुत करने हेतु?>>>>>>>> उस शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के अभीष्ठ कार्यपूर्ति हेतु कितनी मेरिट का त्याग हुआ, बलिदान हुआ और कितनी मेरिट तपोलीन हुईं आप केवल अपनी दृष्टि सीमा के अंदर ही अपनी नजर में उनकी मेरिट देख रहे हो। >>>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Friday, February 10, 2017

I feel that my "Vivekanand and Modern Tradition" blog has now enough material for social environmental science basically for the India and hence for the World. अब समझो की मैं कौन हूँ?

I feel that my "Vivekanand and Modern Tradition" blog has now enough material for social environmental science basically for the India and hence for the World. अब समझो की मैं कौन हूँ? <<<<<कर्णपुर ने मुझे खिंचवाने को कहा था पर वह अब तक हो न सका उससे मेरे सब कार्यपूर्ण हो जाने पर भी तो अब क्या खिचवा लेगा सब कानूनी प्रमाणपत्र समेत हर एक प्रमाणपत्र मेरे पास आ चुका है केदारेश्वर=आदिशंकर=आद्यशंकर =आद्या(+महामृत्युंजय+विश्वेश्वर:विश्वनाथ) में पक्ष का मतलब अभीष्ट लक्ष्य का और रही एक विशेष तथ्य तो मैं समय पर लकीर खींचा हूँ जो मिटती नहीं है और न आज तक मेरे किशी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ का उद्भव हुआ? जिस हर एक तथ्य पर मेरा विरोधी खोज खोज कर विरोध करवाना जारी रखा गया और वे हारते गए एक एक कर वे नासमझ लोग पारितोषिक और उत्कोच पा-पा कर और वे आते गए और किनारा पकड़ते गए या अस्तित्व विहीन होते गए; मेरा घर भी उसका हो जाय या मेरा घर उसके साथ हो जाय तब के भी सन्दर्भ में भी उनका स्वप्न नहीं पूरा होने वाला बल्कि वे क्षमा मांगेंगे अपनी अक्षम्य गलती पर या वही हाल होगा जैसा की अंतरार्ष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हर क्षेत्र/जाति/धर्म/सम्प्रदाय/दल/पार्टी/मतावलंबन/समूह/संगठन विशेष/व्यक्ति विशेष/राष्ट्र/राज्य विशेष के आप का पक्ष लिए लोगों का हुआ है जिनका की केवल आप ने उपयोग ही उपयोग किया है बिना पूर्ण सन्दर्भ बताये; मैं घर से बाहर तक के हर एक की पहचान रखता हूँ रूप-रंग से लेकर आनुवांशिक स्तर पर भी पर अब तो स्पष्ट हो ही गया है की मैं अपने हेतु संकल्पित लड़ाई सदा से अकेला लड़ा है और सदा अपराजेय रहा हूँ क्योंकि इस दुनिया का उद्भव, अस्तित्व, संवर्धन, संरक्षण और अंत मुझपर ही निर्भर था, है और रहेगा? >>>>>कर्णपुर अब समझो की मैं कौन हूँ?>>>>>>>>>It was 7th February, 2003 when I enrolled in the Kedareshwar Banerjee Centre of Atmospheric and Ocean Studies, Prayagaraj Vishwavidyalay on the direction of Paramguru Parampita Parameshwar, Shradhdhey Shri Shridhar(Vishnu) and Parampita Parameshwar, Shradhdhey Premchand(Shiv) after giving pre-information of the challengess and the capacity and natur of the side person involved with me and also the international and local envirnmental conditions. This was not just a subject research enrollment but was examination of foregiveness, sacrifice, and industriousness on the world wide level in all phase of human life; which was successfully passed out theoratically on 11, September/18 October 2007 and in all mean (physically) achieved on 29/30 October, 2009 and its certificate achieved in August, 2014 and 24/25 November, 2016. >>>>>>>>><<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण। <<<<<<विवेक>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण श्रध्धेय बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; अगर सारँग मतलब गंगा से भावार्थित हो तो गंगा को धारण करने वाले गंगाधर मतलब शिव ही और अगर सारंग मतलबी धनुष से भावार्थित हो तो सारंग धनुष धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी (वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण श्रध्धेय निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर :विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/-कृष्ण।

(शिव पार्वती से बोले –) राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे । सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥ (शिव पार्वती से बोले –) हे सुमुखी ! राम- नाम ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ के समान हैं. मैं सदा राम का स्तवन करता हूँ और राम-नाम में ही रमण करता हूँ|

(शिव पार्वती से बोले –)
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥
(शिव पार्वती से बोले –) हे सुमुखी ! राम- नाम ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ के समान हैं. मैं सदा राम का स्तवन करता हूँ और राम-नाम में ही रमण करता हूँ|

इति श्रीबुधकौशिक विरचितं श्री राम रक्षा स्तोत्रं सम्पूर्णम|

॥ श्रीरामरक्षास्तोत्रम्‌ ॥

श्रीगणेशायनम: ।


अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य ।
बुधकौशिक ऋषि: ।
श्रीसीतारामचंद्रोदेवता ।
अनुष्टुप्‌ छन्द: । सीता शक्ति: ।
श्रीमद्‌हनुमान्‌ कीलकम्‌ ।
श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥

॥ अथ ध्यानम्‌ ॥

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं ।
पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥
वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं ।
नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥

॥ इति ध्यानम्‌ ॥

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌ ॥१॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्‌ ।
जानकीलक्ष्मणॊपेतं जटामुकुटमण्डितम्‌ ॥२॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्‌ ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्‌ ॥३॥

रामरक्षां पठॆत्प्राज्ञ: पापघ्नीं सर्वकामदाम्‌ ।
शिरो मे राघव: पातु भालं दशरथात्मज: ॥४॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल: ॥५॥

जिव्हां विद्दानिधि: पातु कण्ठं भरतवंदित: ।
स्कन्धौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेशकार्मुक: ॥६॥

करौ सीतपति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्‌ ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु: ।
ऊरू रघुत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्‌ ॥८॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्‌घे दशमुखान्तक: ।
पादौ बिभीषणश्रीद: पातु रामोSखिलं वपु: ॥९॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठॆत्‌ ।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्‌ ॥१०॥

पातालभूतलव्योम चारिणश्छद्‌मचारिण: ।
न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि: ॥११॥

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्‌ ।
नरो न लिप्यते पापै भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥१२॥

जगज्जेत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्‌ ।
य: कण्ठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्द्दय: ॥१३॥

वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्‌ ।
अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमंगलम्‌ ॥१४॥

आदिष्टवान्‌ यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर: ।
तथा लिखितवान्‌ प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक: ॥१५॥

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्‌ ।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान्‌ स न: प्रभु: ॥१६॥

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥१७॥

फलमूलशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्‌ ।
रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ ॥१९॥

आत्तसज्जधनुषा विषुस्पृशा वक्षया शुगनिषङ्‌ग सङि‌गनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणा वग्रत: पथि सदैव गच्छताम्‌ ॥२०॥

संनद्ध: कवची खड्‌गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन्‌मनोरथोSस्माकं राम: पातु सलक्ष्मण: ॥२१॥

रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघुत्तम: ॥२२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम: ।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेय पराक्रम: ॥२३॥

इत्येतानि जपेन्नित्यं मद्‌भक्त: श्रद्धयान्वित: ।
अश्वमेधायुतं पुण्यं संप्राप्नोति न संशय: ॥२४॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्‌माक्षं पीतवाससम्‌ ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नर: ॥२५॥

रामं लक्शमण पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुंदरम्‌ ।
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्‌
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्‌ ।
वन्दे लोकभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्‌ ॥२६॥

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥२७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम ।
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम ।
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥

माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम्‌ ॥३१॥

लोकाभिरामं रनरङ्‌गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्‌ ।
कारुण्यरूपं करुणाकरंतं श्रीरामचंद्रं शरणं प्रपद्ये ॥३२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्‌ ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्‌ ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्‌ ॥३४॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्‌ ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्‌ ॥३५॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम्‌ ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्‌ ॥३६॥

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे ।
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोSस्म्यहम्‌ ।
रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥३७॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥३८॥

इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

॥ श्री सीतारामचंद्रार्पणमस्तु ॥

राम रक्षा स्तोत्रं का हिंदी अनुवाद —

विनियोग:—
इस राम रक्षा स्तोत्र मंत्र के बुध कौशिक ऋषि हैं, सीता और रामचंद्र देवता हैं, अनुष्टुप छंद हैं, सीता शक्ति हैं, हनुमान जी कीलक है तथा श्री रामचंद्र जी की प्रसन्नता के लिए राम रक्षा स्तोत्र के जप में विनियोग किया जाता हैं.
ध्यानं—-
जो धनुष-बाण धारण किए हुए हैं,बद्द पद्दासन की तरह विराजमान हैं और पीतांबर पहने हुए हैं, जिनके आलोकित नेत्र नए कमल दल के समान स्पर्धा करते हैं, जो बाएँ ओर स्थित सीताजी के मुख कमल से मिले हुए हैं- उन आजानु बाहु, मेघश्याम,विभिन्न अलंकारों से विभूषित तथा जटाधारी श्रीराम का ध्यान करें.

अथ रामरक्षा स्तोत्रं—–
श्री रघुनाथजी का चरित्र सौ करोड़ विस्तार वाला हैं| उसका एक-एक अक्षर महापातकों को नष्ट करने वाला है| नीले कमल के श्याम वर्ण वाले, कमलनेत्र , जटाओं के मुकुट से सुशोभित जानकी तथा लक्ष्मण सहित ऐसे भगवान् श्री राम का स्मरण करके. जो अजन्मा एवं सर्वव्यापक, हाथों में खड्ग, तुणीर, धनुष-बाण धारण किए राक्षसों के संहार तथा अपनी लीलाओं से जगत रक्षा हेतु अवतीर्ण श्रीराम का स्मरण करके| मैं सर्वकामप्रद और पापों को नष्ट करने वाले राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करता हूँ. राघव मेरे सिर की और दशरथ के पुत्र मेरे ललाट की रक्षा करें| कौशल्या नंदन मेरे नेत्रों की, विश्वामित्र के प्रिय मेरे कानों की, यज्ञरक्षक मेरे घ्राण की और सुमित्रा के वत्सल मेरे मुख की रक्षा करें| मेरी जिह्वा की विधानिधि रक्षा करें, कंठ की भरत-वंदित, कंधों की दिव्यायुध और भुजाओं की महादेवजी का धनुष तोड़ने वाले भगवान् श्रीराम रक्षा करें. मेरे हाथों की सीता पति श्रीराम रक्षा करें, हृदय की परशुराम को जीतने वाले, मध्य भाग की खर के वधकर्ता और नाभि की जांबवान के आश्रयदाता रक्षा करें| मेरे कमर की सुग्रीव के स्वामी, हडियों की हनुमान के प्रभु और रानों की राक्षस कुल का विनाश करने वाले रघुश्रेष्ठ रक्षा करें| मेरे जानुओं की सेतुकृत, जंघाओं की दशानन वधकर्ता, चरणों की विभीषण को ऐश्वर्य प्रदान करने वाले और सम्पूर्ण शरीर की श्रीराम रक्षा करें.
शुभ कार्य करने वाला जो भक्त भक्ति एवं श्रद्धा के साथ रामबल से संयुक्त होकर इस स्तोत्र का पाठ करता हैं, वह दीर्घायु, सुखी, पुत्रवान , विजयी और विनयशील हो जाता हैं.जो जीव पाताल, पृथ्वी और आकाश में विचरते रहते हैं अथवा छद्दम वेश में घूमते रहते हैं , वे राम नामों से सुरक्षित मनुष्य को देख भी नहीं पाते.
राम, रामभद्र तथा रामचंद्र आदि नामों का स्मरण करने वाला रामभक्त पापों से लिप्त नहीं होता. इतना ही नहीं, वह अवश्य ही भोग और मोक्ष दोनों को प्राप्त करता है| जो संसार पर विजय करने वाले मंत्र राम-नाम से सुरक्षित इस स्तोत्र को कंठस्थ कर लेता हैं, उसे सम्पूर्ण सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं| जो मनुष्य वज्रपंजर नामक इस राम कवच का स्मरण करता हैं, उसकी आज्ञा का कहीं भी उल्लंघन नहीं होता तथा उसे सदैव विजय और मंगल की ही प्राप्ति होती हैं| भगवान् शंकर ने स्वप्न में इस रामरक्षा स्तोत्र का आदेश बुध कौशिक ऋषि को दिया था, उन्होंने प्रातः काल जागने पर उसे वैसा ही लिख दिया| जो कल्प वृक्षों के बगीचे के समान विश्राम देने वाले हैं, जो समस्त विपत्तियों को दूर करने वाले हैं और जो तीनो लोकों में सुन्दर हैं, वही श्रीमान राम हमारे प्रभु हैं| जो युवा,सुन्दर, सुकुमार,महाबली और कमल के समान विशाल नेत्रों वाले हैं, मुनियों की तरह वस्त्र एवं काले मृग का चर्म धारण करते हैं| जो फल और कंद का आहार ग्रहण करते हैं, जो संयमी , तपस्वी एवं ब्रह्रमचारी हैं , वे दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण दोनों भाई हमारी रक्षा करें. ऐसे महाबली – रघुश्रेष्ठ मर्यादा पुरूषोतम समस्त प्राणियों के शरणदाता, सभी धनुर्धारियों में श्रेष्ठ और राक्षसों के कुलों का समूल नाश करने में समर्थ हमारा त्राण करें| संघान किए धनुष धारण किए, बाण का स्पर्श कर रहे, अक्षय बाणों से युक्त तुणीर लिए हुए राम और लक्ष्मण मेरी रक्षा करने के लिए मेरे आगे चलें| हमेशा तत्पर, कवचधारी, हाथ में खडग, धनुष-बाण तथा युवावस्था वाले भगवान् राम लक्ष्मण सहित आगे-आगे चलकर हमारी रक्षा करें| भगवान् का कथन है की श्रीराम, दाशरथी, शूर, लक्ष्मनाचुर, बली, काकुत्स्थ , पुरुष, पूर्ण, कौसल्येय, रघुतम, वेदान्त्वेघ, यज्ञेश,पुराण पुरूषोतम , जानकी वल्लभ, श्रीमान और अप्रमेय पराक्रम आदि नामों का नित्यप्रति श्रद्धापूर्वक जप करने वाले को निश्चित रूप से अश्वमेध यज्ञ से भी अधिक फल प्राप्त होता हैं| दूर्वादल के समान श्याम वर्ण, कमल-नयन एवं पीतांबरधारी श्रीराम की उपरोक्त दिव्य नामों से स्तुति करने वाला संसारचक्र में नहीं पड़ता| लक्ष्मण जी के पूर्वज , सीताजी के पति, काकुत्स्थ, कुल-नंदन, करुणा के सागर , गुण-निधान , विप्र भक्त, परम धार्मिक , राजराजेश्वर, सत्यनिष्ठ, दशरथ के पुत्र, श्याम और शांत मूर्ति, सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर, रघुकुल तिलक , राघव एवं रावण के शत्रु भगवान् राम की मैं वंदना करता हूँ| राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधात स्वरूप , रघुनाथ, प्रभु एवं सीताजी के स्वामी की मैं वंदना करता हूँ| हे रघुनन्दन श्रीराम ! हे भरत के अग्रज भगवान् राम! हे रणधीर, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ! आप मुझे शरण दीजिए. मैं एकाग्र मन से श्रीरामचंद्रजी के चरणों का स्मरण और वाणी से गुणगान करता हूँ, वाणी द्धारा और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान् रामचन्द्र के चरणों को प्रणाम करता हुआ मैं उनके चरणों की शरण लेता हूँ| श्रीराम मेरे माता, मेरे पिता , मेरे स्वामी और मेरे सखा हैं. इस प्रकार दयालु श्रीराम मेरे सर्वस्व हैं. उनके सिवा में किसी दुसरे को नहीं जानता. जिनके दाईं और लक्ष्मण जी, बाईं और जानकी जी और सामने हनुमान ही विराजमान हैं, मैं उन्ही रघुनाथ जी की वंदना करता हूँ| मैं सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर तथा रणक्रीड़ा में धीर, कमलनेत्र, रघुवंश नायक, करुणा की मूर्ति और करुणा के भण्डार की श्रीराम की शरण में हूँ. जिनकी गति मन के समान और वेग वायु के समान (अत्यंत तेज) है, जो परम जितेन्द्रिय एवं बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, मैं उन पवन-नंदन वानारग्रगण्य श्रीराम दूत की शरण लेता हूँ| मैं कवितामयी डाली पर बैठकर, मधुर अक्षरों वाले ‘राम-राम’ के मधुर नाम को कूजते हुए वाल्मीकि रुपी कोयल की वंदना करता हूँ| मैं इस संसार के प्रिय एवं सुन्दर उन भगवान् राम को बार-बार नमन करता हूँ, जो सभी आपदाओं को दूर करने वाले तथा सुख-सम्पति प्रदान करने वाले हैं| ‘राम-राम’ का जप करने से मनुष्य के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं. वह समस्त सुख-सम्पति तथा ऐश्वर्य प्राप्त कर लेता हैं. राम-राम की गर्जना से यमदूत सदा भयभीत रहते हैं| राजाओं में श्रेष्ठ श्रीराम सदा विजय को प्राप्त करते हैं. मैं लक्ष्मीपति भगवान् श्रीराम का भजन करता हूँ. सम्पूर्ण राक्षस सेना का नाश करने वाले श्रीराम को मैं नमस्कार करता हूँ| श्रीराम के समान अन्य कोई आश्रयदाता नहीं. मैं उन शरणागत वत्सल का दास हूँ| मैं हमेशा श्रीराम मैं ही लीन रहूँ. हे श्रीराम! आप मेरा (इस संसार सागर से) उद्धार करें|
(शिव पार्वती से बोले –) हे सुमुखी ! राम- नाम ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ के समान हैं. मैं सदा राम का स्तवन करता हूँ और राम-नाम में ही रमण करता हूँ|
इति श्रीबुधकौशिक विरचितं श्री राम रक्षा स्तोत्रं सम्पूर्णम