Google+ Followers

Friday, March 31, 2017

स्थिति विषपानकर्ता नीलकंठ महादेव शिव और कूर्मावतारी विष्णु की भी गुज़री थी गिरिधर(विवेक) के साथ इस विषमहासमुद्रमंथन/विश्वसाहस्राब्दीमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौरान मतलब 1998/2000 से 25 नवम्बर, 2016 के बीच जब कोई इस दौरान दो मात्र सर्वोच्च मानवता के इतिहास की विभूति सशरीर परमब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराम दोनों का सफर तय किया है। >>>>>>>> जब किशी को केवल श्रीकृष्ण किशी को बनाना था तो फिर राधिका जिसे समझते हैं आप उसका विवाह तो कम से कम समकक्ष समाजिक स्तर पर करवाने की सामर्थ्य रखते आप और न एक गौरी, न एक जानकी/सीता और न एक राधा को आप सुरक्षित कर सके तो जब ऐसा नहीं कर सके वैश्विक मानवीय समाज तो अगर कोई अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु के अनुरोध के बाद व्यवहारिक जीवन में आ भी जाए तो आप उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कहाँ से ला रहे थे, ला रहे हैं और लाएंगे इस ब्रह्माण्ड में ? >>>>>>>> जिन लोगो ने श्रीधर और गिरधर(विवेक) से ईर्स्या और द्वेशवस से सभी मानवीय मर्यादा तार तार कर दी जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण है एक दलित/ईसाई समाज के युवक से पावपूजन विधि से एक ब्राह्मन लडकी का शास्त्रीय विवाह करवाना और ऐसे धार्मिक रूप से अमान्य विवाह को महिमा मन्डित करना और इस प्रकार अशोकचक्र का 2008 के मध्य टूट जाता है और काशी और प्रयागराज के मन्दिरो मे जा कर मुझ गिरधर(विवेक) को सबकी पुनर प्राण प्रतिष्ठा 2008 अगस्त/सितम्बर मे करनी पड़ती है मतलव ये लोग इतने गिर गये थे लोग हम दोनो के विरोध मे की सन्सार के सभी मन्दिरो को शक्ति देने वाले वैश्विक मूल मानवता स्थल प्रयागराज-काशी के मन्दिरो में शक्ति ही शेष नही रह गयी थी जिससे की वे भविष्य में लोगों के सन्ताप हर सकें और आस्था और विशवास की धार्मिक ज्योति प्रज्जवलित रह सके। और भी ज्यादा ध्यान देने योग्य तथ्य यह है की ये जिसका विरोध किऐ वही इन मन्दिरो को सन्जीवनी दिया जो सम्पूर्ण विश्व के मंदिरो को शक्ति और सामर्थ्य देते हैं इस विश्व में धर्म का राज्य जारी रखने हेतु। स्थिति इतनी भयावह थी की हिम्मती से हिम्मती देवी लोग जो मुझे और मेरे बारे में जानती भी थीं वे भी बिना सामूहिक सहमति और संगठित स्वरुप में वे सीधे मेरा सामना करने की स्थिति में नहीं थीं जबकी मेरा कार्य सैद्धान्तिक रूप से 16/29 मई, 2006 और 11/18 सितम्बर, 2007 में पूर्णतः हो चुका था इस प्रयागराज में और मुझे सामान्य सामाजिक व्यवहार करने हेतु निर्देश हो चुका था अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु से। तो आप केवल इतना समझिऐ कि श्रीधर और गिरधर(विवेक) उसी तरह शाश्वत है जिस प्रकार परमब्रह्म श्रीकृष्ण की वाणी और व्यास की लिपि वद्ध गीता मतलव आप अगर उनका ज्यादा विरोध किऐ तो प्रह्लाद बन कर आप के घर से ही निकल आएंगे आप का मद और अभिमान दूर करने हेतु और आदि से लेकर आज तक वही हो रहा है देवियों की कृपा से। स>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

स्थिति विषपानकर्ता नीलकंठ महादेव शिव और कूर्मावतारी विष्णु की भी गुज़री थी गिरिधर(विवेक) के साथ इस विषमहासमुद्रमंथन/विश्वसाहस्राब्दीमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौरान मतलब 1998/2000 से 25 नवम्बर, 2016 के बीच जब कोई इस दौरान दो मात्र सर्वोच्च मानवता के इतिहास की विभूति सशरीर परमब्रह्म श्रीकृष्ण और श्रीराम दोनों का सफर तय किया है। >>>>>>>> जब किशी को केवल श्रीकृष्ण किशी को बनाना था तो फिर राधिका जिसे समझते हैं आप उसका विवाह तो कम से कम समकक्ष समाजिक स्तर पर करवाने की सामर्थ्य रखते आप और न एक गौरी, न एक जानकी/सीता और न एक राधा को आप सुरक्षित कर सके तो जब ऐसा नहीं कर सके वैश्विक मानवीय समाज तो अगर कोई अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु के अनुरोध के बाद व्यवहारिक जीवन में आ भी जाए तो आप उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कहाँ से ला रहे थे, ला रहे हैं और लाएंगे इस ब्रह्माण्ड में ? >>>>>>>> जिन लोगो ने श्रीधर और गिरधर(विवेक) से ईर्स्या और द्वेशवस से सभी मानवीय मर्यादा तार तार कर दी जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण है एक दलित/ईसाई समाज के युवक से पावपूजन विधि से एक ब्राह्मन लडकी का शास्त्रीय विवाह करवाना और ऐसे धार्मिक रूप से अमान्य विवाह को महिमा मन्डित करना और इस प्रकार अशोकचक्र का 2008 के मध्य टूट जाता है और काशी और प्रयागराज के मन्दिरो मे जा कर मुझ गिरधर(विवेक) को सबकी पुनर प्राण प्रतिष्ठा 2008 अगस्त/सितम्बर मे करनी पड़ती है मतलव ये लोग इतने गिर गये थे लोग हम दोनो के विरोध मे की सन्सार के सभी मन्दिरो को शक्ति देने वाले वैश्विक मूल मानवता स्थल प्रयागराज-काशी के मन्दिरो में शक्ति ही शेष नही रह गयी थी जिससे की वे भविष्य में लोगों के सन्ताप हर सकें और आस्था और विशवास की धार्मिक ज्योति प्रज्जवलित रह सके। और भी ज्यादा ध्यान देने योग्य तथ्य यह है की ये जिसका विरोध किऐ वही इन मन्दिरो को सन्जीवनी दिया जो सम्पूर्ण विश्व के मंदिरो को शक्ति और सामर्थ्य देते हैं इस विश्व में धर्म का राज्य जारी रखने हेतु। स्थिति इतनी भयावह थी की हिम्मती से हिम्मती देवी लोग जो मुझे और मेरे बारे में जानती भी थीं वे भी बिना सामूहिक सहमति और संगठित स्वरुप में वे सीधे मेरा सामना करने की स्थिति में नहीं थीं जबकी मेरा कार्य सैद्धान्तिक रूप से 16/29 मई, 2006 और 11/18 सितम्बर, 2007 में पूर्णतः हो चुका था इस प्रयागराज में और मुझे सामान्य सामाजिक व्यवहार करने हेतु निर्देश हो चुका था अपने परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु से। तो आप केवल इतना समझिऐ कि श्रीधर और गिरधर(विवेक) उसी तरह शाश्वत है जिस प्रकार परमब्रह्म श्रीकृष्ण की वाणी और व्यास की लिपि वद्ध गीता मतलव आप अगर उनका ज्यादा विरोध किऐ तो प्रह्लाद बन कर आप के घर से ही निकल आएंगे आप का मद और अभिमान दूर करने हेतु और आदि से लेकर आज तक वही हो रहा है देवियों की कृपा से। स>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, March 30, 2017

कौन कहाँ और किस देश में है, किस स्थान पर है, किस पद पर है इससे मेरा कुछ लेना देना नहीं और न मैं इसके बारे में कोई टिप्पणी कर रहा हूँ और न इससे इस संसार में कोई मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाएगा और न इस सब के आधार पर भविष्य में भी मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने का निर्धारण हो सकेगा क्योंकि मानव जगत कुछ व्यक्तित्व और स्थान अपने आप प्रामाणिक होते ही हैं जो प्रायोजित नहीं किये जाते हैं और न प्रायोजित होते है बल्कि उनको दायित्व निभाने हेतु स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न होने पर वे अपने स्वाभाविक रूप में अपने आप आ जाते है तो जिस स्थान (रामानन्द कुल/भूमि:बिशुनपुर-जौनपुर-223103 और सारंगधर कुल/भूमि:रामापुर-आजमगढ़-223225) और उससे सम्बंधित व्यक्ति व् व्यक्ति समूह को अपना दायित्व पूर्ण करना था उस महाविश्वपरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन/सहस्राब्दीमहासमुद्रमंथन और उसके संक्रमण काल तक में तो वे उसको कर चुके। वैसे भी इस संसार में कौन व्यक्तित्व सबसे ज्यादा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है का निर्धारण तो बचपन से लेकर आज तक के ईस्वर प्रदत्त गुणों और सम्यक परिष्थितिजन्य आचरण और कर्तव्य निपुणता और जीवन में आहार-विहार की सुचिता तथा सत्य के प्रति द्रिढ़निश्चयता और निःस्वार्थ समर्पण भाव और इसके साथ-साथ अपने देश, समाज, कुल और गुरुकुल के रक्षार्थ (सारभौमिक मानवता की सत्यता के प्रति शिष्टाचार पूर्ण दायित्व निर्वहन के साथ मतलब जिससे विदेश में भी बैठे भाई-बहनो के भी अधिकार और कर्तव्य के समीचीन हों आप की व्यवहारिकता से वे दुष्प्रभावित न हों) निःस्वार्थ अपने कर्तव्य निर्वहन हेतु अपने से सम्बंधित जीव-निर्जीव किशी भी प्रियतम वस्तु का भी त्याग और बलिदान करते हुए संसार में स्वाभाविक जीवन चेतना के प्रदर्शन के साथ अपने दायित्यों के प्रति अपने ऐसे जीवन अनुभव के गुणवत्ता पूर्ण अनुकरणीय व्यवहारिक पक्ष को सामाजिक आचरण में मूर्त रूप देने हेतु निर्भीक और बेवाक रूप में उसे प्रदर्शित करते हुए तपोलीनता भी सामिल होती है। सारभौमिक मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज/अल्लाह आबाद/इला आबाद/इला आवास/अल्लाह आवास/त्रिसङ्गं/त्रिवेणी/तीर्थराज/प्राकयञ स्थल/प्राचीनतम सप्तर्षि प्रकृष्टा:प्रकटीकरण हेतु मानवता का प्राचीनतम यज्ञ जिसे ब्रह्मा ने आह्वानित किया था और विष्णु और महेश:शिव ने पूर्णता दी थी सात ब्रह्मर्षि:सप्तर्षि के प्रकटीकरण तक/सप्तर्षि प्रकृष्टा यज्ञ स्थल/इलाहाबाद और काशी/वाराणसी में अपने को केंद्रित कर महाविश्वपरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन/सहस्राब्दीमहासमुद्रमंथन और उसके संक्रमण काल तक मतलब सन 1998/2000 से दिनांक 25, नवम्बर, 2016 तक उपर्युक्त आचरण और दायित्व निर्वहन मानवता के संरक्षण, संवर्धन, संपोषण तथा अनवरत अबाधगति से संचालन हेतु अपनी सहनसीलता और अपने प्रत्येक मानवीय गुणों के साथ अत्यल्प सांसारिक संशाधन का प्रयोग कर इस संसार में किसने किया है एक पूर्णाति पूर्ण विप्र:विपुल प्रदाता(समाज से थोड़ा लेकर अधिकतम प्रदानकर्ता)/द्विज के रूप में ही अपने को बनाये रखते हुए मतलब जो एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए सभी कार्य सम्पादित करने हेतु एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण, एक पूर्णाति पूर्ण क्षत्रिय और एक पूर्णाति पूर्ण वैश्य के दायित्व का भी निर्वहन किया है और इस प्रकार एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए सभी कार्य सम्पादित करने हेतु एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण, एक पूर्णाति पूर्ण क्षत्रिय, एक पूर्णाति पूर्ण वैश्य, एक पूर्णाति पूर्ण इस्लाम और एक पूर्णाति पूर्ण ईसाइयत का भी दायित्व निर्वहन किया है?>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

कौन कहाँ और किस देश में है, किस स्थान पर है, किस पद पर है इससे मेरा कुछ लेना देना नहीं और न मैं इसके बारे में कोई टिप्पणी कर रहा हूँ और न इससे इस संसार में कोई मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ हो जाएगा और न इस सब के आधार पर भविष्य में भी मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने का निर्धारण हो सकेगा क्योंकि मानव जगत कुछ व्यक्तित्व और स्थान अपने आप प्रामाणिक होते ही हैं जो प्रायोजित नहीं किये जाते हैं और न प्रायोजित होते है बल्कि उनको दायित्व निभाने हेतु स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न होने पर वे अपने स्वाभाविक रूप में अपने आप आ जाते है तो जिस स्थान (रामानन्द कुल/भूमि:बिशुनपुर-जौनपुर-223103 और सारंगधर कुल/भूमि:रामापुर-आजमगढ़-223225) और उससे सम्बंधित व्यक्ति व् व्यक्ति समूह को अपना दायित्व पूर्ण करना था उस महाविश्वपरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन/सहस्राब्दीमहासमुद्रमंथन और उसके संक्रमण काल तक में तो वे उसको कर चुके। वैसे भी इस संसार में कौन व्यक्तित्व सबसे ज्यादा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ है का निर्धारण तो बचपन से लेकर आज तक के ईस्वर प्रदत्त गुणों और सम्यक परिष्थितिजन्य आचरण और कर्तव्य निपुणता और जीवन में आहार-विहार की सुचिता तथा सत्य के प्रति द्रिढ़निश्चयता और निःस्वार्थ समर्पण भाव और इसके साथ-साथ अपने देश, समाज, कुल और गुरुकुल के रक्षार्थ (सारभौमिक मानवता की सत्यता के प्रति शिष्टाचार पूर्ण दायित्व निर्वहन के साथ मतलब जिससे विदेश में भी बैठे भाई-बहनो के भी अधिकार और कर्तव्य के समीचीन हों आप की व्यवहारिकता से वे दुष्प्रभावित न हों) निःस्वार्थ अपने कर्तव्य निर्वहन हेतु अपने से सम्बंधित जीव-निर्जीव किशी भी प्रियतम वस्तु का भी त्याग और बलिदान करते हुए संसार में स्वाभाविक जीवन चेतना के प्रदर्शन के साथ अपने दायित्यों के प्रति अपने ऐसे जीवन अनुभव के गुणवत्ता पूर्ण अनुकरणीय व्यवहारिक पक्ष को सामाजिक आचरण में मूर्त रूप देने हेतु निर्भीक और बेवाक रूप में उसे प्रदर्शित करते हुए तपोलीनता भी सामिल होती है। सारभौमिक मानवता के मूल केंद्र प्रयागराज/अल्लाह आबाद/इला आबाद/इला आवास/अल्लाह आवास/त्रिसङ्गं/त्रिवेणी/तीर्थराज/प्राकयञ स्थल/प्राचीनतम सप्तर्षि प्रकृष्टा:प्रकटीकरण हेतु मानवता का प्राचीनतम यज्ञ जिसे ब्रह्मा ने आह्वानित किया था और विष्णु और महेश:शिव ने पूर्णता दी थी सात ब्रह्मर्षि:सप्तर्षि के प्रकटीकरण तक/सप्तर्षि प्रकृष्टा यज्ञ स्थल/इलाहाबाद और काशी/वाराणसी में अपने को केंद्रित कर महाविश्वपरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/महासमुद्रमंथन/सहस्राब्दीमहासमुद्रमंथन और उसके संक्रमण काल तक मतलब सन 1998/2000 से दिनांक 25, नवम्बर, 2016 तक उपर्युक्त आचरण और दायित्व निर्वहन मानवता के संरक्षण, संवर्धन, संपोषण तथा अनवरत अबाधगति से संचालन हेतु अपनी सहनसीलता और अपने प्रत्येक मानवीय गुणों के साथ अत्यल्प सांसारिक संशाधन का प्रयोग कर इस संसार में किसने किया है एक पूर्णाति पूर्ण विप्र:विपुल प्रदाता(समाज से थोड़ा लेकर अधिकतम प्रदानकर्ता)/द्विज के रूप में ही अपने को बनाये रखते हुए मतलब जो एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए सभी कार्य सम्पादित करने हेतु एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण, एक पूर्णाति पूर्ण क्षत्रिय और एक पूर्णाति पूर्ण वैश्य के दायित्व का भी निर्वहन किया है और इस प्रकार एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण रहते हुए सभी कार्य सम्पादित करने हेतु एक पूर्णाति पूर्ण ब्राह्मण, एक पूर्णाति पूर्ण क्षत्रिय, एक पूर्णाति पूर्ण वैश्य, एक पूर्णाति पूर्ण इस्लाम और एक पूर्णाति पूर्ण ईसाइयत का भी दायित्व निर्वहन किया है?>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Wednesday, March 29, 2017

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव+ गंगाधर(शिव)=गंगा (सारंग:अल्का) को अपने अलको में धारण कर अपने सिर पर वसाने वाले सारंगधर (गंगा)धर:गंगानाथ (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव की छाया में कैलास पर्वत वासी हो गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ :शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)
१)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
२) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ। >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव+ गंगाधर(शिव)=गंगा (सारंग:अल्का) को अपने अलको में धारण कर अपने सिर पर वसाने वाले सारंगधर (गंगा)धर:गंगानाथ (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव की छाया में कैलास पर्वत वासी हो गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ :शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

For specific organisation/party oriented person specially and a common man in general:----Confused person should read this article with care which is from my blog "Vivekaand and Modern Tradition" which was posted on the 5th February, 2017: this is just after attending that particular organisation/party meeting at Jwaladevi Inter College, Rashoolaabad, Allahabad: I hope after reading this they are free to locate me by thoughts at any place accoding them. I do not find a place where is not my presence but I am never with those who behave like a demon means who work bad but want to become best master by gathering a number means I do not company such a false and voilence spreading persons who have theire hidden agenda to cut a human being personality and make a best man guilty by all means and uses manpower to demoralise that human being personality. There in not a single person and organisation in this world from which I have some selfish demond. But have ecpectation from such organisation to do his best for humanity in his full capacity because all the countries has taken his share from India through the human resources migrated from here and in such condition on the remaining part of resources there is right of every gentle person remained in India, common person of India and also person feeding the India's need from abroad. >>>>>>>>>>>>>>>>>>5 Februry, 2017: After attending a special invitee meeting at Jwaladevi Intercollege, Rashoolaabad, Prayagraj/Allahabad/Allaha Abad/Allah Avash/Illa Abad/Illa Avas/Tirsangam/Tirthraj/Triveni( a well known centre of World humanilty):>>>>.You consider me a member of your organisation or not iI do not know but I need no certificate from any organisation for volunteership of humanity from local to World level>>>>>>>> प्रिय स्वयं भू सम्पूर्ण भारत पर अपना आधिपत्य समझने वाले परिवार के सदस्यगण! मेरी सीमा तो वैश्विक हो चुकी है आप की सीमा अभी हुई है या नहीं मैं नहीं जनता हूँ पर आप की जानकारी हेतु मैं बताता चलूँ की मंगलवारीय जरूर हूँ तो हाँ तभी तो हनुमान:अम्बेडकर:अम्बावाडेकर (मुझे राम और कृष्ण क्या स्थानीय से अंतराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाले हनुमान: अम्बेडकर: अम्बावाडेकर भी नहीं मिले थे उस महासहस्राब्दी परिवर्तन के प्रारंभिक दौर में इस प्रयागराज में तो मैं वही से प्रारम्भ किया हूँ ) का सब गुण है और उनकी तरह जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी((विवाह पूर्व तक अखण्ड ब्रह्मचर्य और उसके बाद जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी) भी हूँ पर दिन के साथ ग्रह नक्षत्र भी उससे ज्यादा महत्व के हो सकते हैं तो अब वे अब हो चुके हैं मतलब गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग ((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)); के साथ सारंगधर(सारंग:चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; सारँग:गंगा को धारण करने वाले गंगाधर (शिव) ही और अगर सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले विष्णु, सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले, श्रीराम और सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले श्रीकृष्ण) भी होते हुए परमब्रह्म श्रीराम भी हो चुका हूँ तो अगर हनुमान से साथ ही साथ सबका आशीर्वाद आप को चाहिए तो मिलेगा पर आप इतना प्रयास जीवन में कीजियेगा की सृष्टि:सीता और गुरु, श्रीधर(विष्णु) को कोई रावनकुल या अन्य दानव कुल किशी युग में प्रभावित न कर सके और न गुरु, श्रीधर(विष्णु) उनके सांसारिक बोझ से रमे होने का कोई स्वयं मेरे या अन्य किशी सज्जन समाज या भद्र मानव समाज के विरोध में कोई लाभ ले सके? और अगर आगे यह सब आप कर ले गए तो सबका पूर्ण आशीर्वाद मिलेगा मुझे आप के पास या आप को मेरे पास आने की जरूरत नहीं रहेगी।) >><>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत (गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द (जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>> >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव+ गंगाधर(शिव)=गंगा (सारंग:अल्का) को अपने अलको में धारण कर अपने सिर पर वसाने वाले सारंगधर (गंगा)धर:गंगानाथ (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव की छाया में कैलास पर्वत वासी हो गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ :शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

For specific organisation/party oriented person specially and a common man in general:----Confused person should read this article with care which is from my blog "Vivekaand and Modern Tradition" which was posted on the 5th February, 2017: this is just after attending that particular organisation/party meeting at Jwaladevi Inter College, Rashoolaabad, Allahabad: I hope after reading this they are free to locate me by thoughts at any place accoding them. I do not find a place where is not my presence but I am never with those who behave like a demon means who work bad but want to become best master by gathering a number means I do not company such a false and voilence spreading persons who have theire hidden agenda to cut a human being personality and make a best man guilty by all means and uses manpower to demoralise that human being personality. There in not a single person and organisation in this world from which I have some selfish demond. But have ecpectation from such organisation to do his best for humanity in his full capacity because all the countries has taken his share from India through the human resources migrated from here and in such condition on the remaining part of resources there is right of every gentle person remained in India, common person of India and also person feeding the India's need from abroad. >>>>>>>>>>>>>>>>>>5 Februry, 2017: After attending a special invitee meeting at Jwaladevi Intercollege, Rashoolaabad, Prayagraj/Allahabad/Allaha Abad/Allah Avash/Illa Abad/Illa Avas/Tirsangam/Tirthraj/Triveni( a well known centre of World humanilty):>>>>.You consider me a member of your organisation or not iI do not know but I need no certificate from any organisation for volunteership of humanity from local to World level>>>>>>>> प्रिय स्वयं भू सम्पूर्ण भारत पर अपना आधिपत्य समझने वाले परिवार के सदस्यगण! मेरी सीमा तो वैश्विक हो चुकी है आप की सीमा अभी हुई है या नहीं मैं नहीं जनता हूँ पर आप की जानकारी हेतु मैं बताता चलूँ की मंगलवारीय जरूर हूँ तो हाँ तभी तो हनुमान:अम्बेडकर:अम्बावाडेकर (मुझे राम और कृष्ण क्या स्थानीय से अंतराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाले हनुमान: अम्बेडकर: अम्बावाडेकर भी नहीं मिले थे उस महासहस्राब्दी परिवर्तन के प्रारंभिक दौर में इस प्रयागराज में तो मैं वही से प्रारम्भ किया हूँ ) का सब गुण है और उनकी तरह जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी((विवाह पूर्व तक अखण्ड ब्रह्मचर्य और उसके बाद जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी) भी हूँ पर दिन के साथ ग्रह नक्षत्र भी उससे ज्यादा महत्व के हो सकते हैं तो अब वे अब हो चुके हैं मतलब गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग ((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)); के साथ सारंगधर(सारंग:चंद्र को धारण करने वाले चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर:राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव ; सारँग:गंगा को धारण करने वाले गंगाधर (शिव) ही और अगर सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले विष्णु, सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले, श्रीराम और सारंग:सारंग-धनुष धारण करने वाले श्रीकृष्ण) भी होते हुए परमब्रह्म श्रीराम भी हो चुका हूँ तो अगर हनुमान से साथ ही साथ सबका आशीर्वाद आप को चाहिए तो मिलेगा पर आप इतना प्रयास जीवन में कीजियेगा की सृष्टि:सीता और गुरु, श्रीधर(विष्णु) को कोई रावनकुल या अन्य दानव कुल किशी युग में प्रभावित न कर सके और न गुरु, श्रीधर(विष्णु) उनके सांसारिक बोझ से रमे होने का कोई स्वयं मेरे या अन्य किशी सज्जन समाज या भद्र मानव समाज के विरोध में कोई लाभ ले सके? और अगर आगे यह सब आप कर ले गए तो सबका पूर्ण आशीर्वाद मिलेगा मुझे आप के पास या आप को मेरे पास आने की जरूरत नहीं रहेगी।) >><>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत (गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द (जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>> >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव+ गंगाधर(शिव)=गंगा (सारंग:अल्का) को अपने अलको में धारण कर अपने सिर पर वसाने वाले सारंगधर (गंगा)धर:गंगानाथ (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव की छाया में कैलास पर्वत वासी हो गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ :शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

आम जन की तरह मैं भी पालक हूँ दो संतानो का ये इस आम भौतिक संसार या किशी अन्य विभूति के लिए गुणकारी होंगे परमेश्वर स्वयं जाने पर आप लोगों की तरह अपना पितृऋण पूर्ण करने की राह में मैं भी इनके पितृत्व का कर्तव्य निर्वहन कर रहा हूँ अपनी पूरी श्रद्धा और निष्ठा से। इस लिए मुझे पक्षकार आप बनाने से पहले सौ बार आप अपने को मेरे स्थान पर रखकर क्या निर्णय मैं सोच समझकर लिया हूँ उसके वारे में सोचिये क्योंकि एक पक्षीय मैं नहीं सोचता पर उभय पक्षीय होने पर भी मेरी सामर्थ्य और अधिकार के तहत जो मेरे हिस्से में आता है उसको समाप्त करने की अनावश्यक ठीकेदारी मत कीजियेगा आप में से कोई भी अगर भूतकाल की घटनाओ से कुछ भी शिक्षा आप को मिली हो। विवरण इस प्रकार है>>>>>>>>>विष्णुकांत(राशिनाम वेंकटेश): सुबह 5.11 30-09-2010 दिन वृहस्पतिवार जो त्रिदेवो में गुरु बृहस्पति विष्णु का दिन है: श्रीराम को उनका घर मिला यह अलग की उनपर आस्था अन्य धर्मावलंबियों की भी है पूर्वज एक होने की वजह से:>>>>विष्णुकांत=विष्णु के स्वामी=सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)=श्रीराम> विष्णु कान्त= स्वामी विष्णु (मतलब आम जन हेतु स्वामी के प्रयुक्त होने पर)= विष्णु> विष्णुकांत= विष्णु का प्रिय= विष्णु पुत्र (भी हो सकता है पर राशिनाम वेंकटेश इनको विष्णु से नीचे का सम्बन्ध का पद स्वीकार नही करने देता है) >>>>>>>>>>>>>कृष्णकांत(राशिनाम वाशुदेव): रात्रि 8.12, 28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और सोने पर सुहागा कई वर्षों बाद सबसे अधिक समय तक रोहिणी नक्षत्र और ठीक वही दिन बुधवार भी जो कृष्ण का जन्मदिन भी है): कृष्णकांत कृष्ण के स्वामी जो वास्तविकता में कृष्ण ही होंगे क्योंकि ये सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश का एकल स्वरुप) स्वयं कहे गए है या उनके पिता वसुदेव> कृष्णकांत =स्वामी कृष्ण(मतलब आम जन हेतु स्वामी के प्रयुक्त होने पर)=कृष्ण>कृष्णकांत=कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न जो अनिरुध्द के पिता हैं ( भी हो सकता है पर राशिनाम वाशुदेव इनको कृष्ण से नीचे का सम्बन्ध का पद स्वीकार नही करने देता है)। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

आम जन की तरह मैं भी पालक हूँ दो संतानो का ये इस आम भौतिक संसार या किशी अन्य विभूति के लिए गुणकारी होंगे परमेश्वर स्वयं जाने पर आप लोगों की तरह अपना पितृऋण पूर्ण करने की राह में मैं भी इनके पितृत्व का कर्तव्य निर्वहन कर रहा हूँ अपनी पूरी श्रद्धा और निष्ठा से। इस लिए मुझे पक्षकार आप बनाने से पहले सौ बार आप अपने को मेरे स्थान पर रखकर क्या निर्णय मैं सोच समझकर लिया हूँ उसके वारे में सोचिये क्योंकि एक पक्षीय मैं नहीं सोचता पर उभय पक्षीय होने पर भी मेरी सामर्थ्य और अधिकार के तहत जो मेरे हिस्से में आता है उसको समाप्त करने की अनावश्यक ठीकेदारी मत कीजियेगा आप में से कोई भी अगर भूतकाल की घटनाओ से कुछ भी शिक्षा आप को मिली हो। विवरण इस प्रकार है>>>>>>>>>विष्णुकांत(राशिनाम वेंकटेश): सुबह 5.11 30-09-2010 दिन वृहस्पतिवार जो त्रिदेवो में गुरु बृहस्पति विष्णु का दिन है: श्रीराम को उनका घर मिला यह अलग की उनपर आस्था अन्य धर्मावलंबियों की भी है पूर्वज एक होने की वजह से:>>>>विष्णुकांत=विष्णु के स्वामी=सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश)=श्रीराम> विष्णु कान्त= स्वामी विष्णु (मतलब आम जन हेतु स्वामी के प्रयुक्त होने पर)= विष्णु> विष्णुकांत= विष्णु का प्रिय= विष्णु पुत्र (भी हो सकता है पर राशिनाम वेंकटेश इनको विष्णु से नीचे का सम्बन्ध का पद स्वीकार नही करने देता है) >>>>>>>>>>>>>कृष्णकांत(राशिनाम वाशुदेव): रात्रि 8.12, 28-08-2013:श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और सोने पर सुहागा कई वर्षों बाद सबसे अधिक समय तक रोहिणी नक्षत्र और ठीक वही दिन बुधवार भी जो कृष्ण का जन्मदिन भी है): कृष्णकांत कृष्ण के स्वामी जो वास्तविकता में कृष्ण ही होंगे क्योंकि ये सशरीर परमब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश का एकल स्वरुप) स्वयं कहे गए है या उनके पिता वसुदेव> कृष्णकांत =स्वामी कृष्ण(मतलब आम जन हेतु स्वामी के प्रयुक्त होने पर)=कृष्ण>कृष्णकांत=कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न जो अनिरुध्द के पिता हैं ( भी हो सकता है पर राशिनाम वाशुदेव इनको कृष्ण से नीचे का सम्बन्ध का पद स्वीकार नही करने देता है)। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण के दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। तो अब मेरा पूंछना केवल इतना है 30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षा लेने वालों से की वाराणासी/काशी के 24 ऋषिवाले अशोकचक्र का पचीसवाँ ऋषि मतलब सभी मानक २४ ऋषियों को का केंद्र बिंदु मतलब उसको ऊर्जा देने वाला ऋषि मैं अभी हुआ की नहीं या 108 आरियों(अधिकतम ऋषि/गोत्र) वाला सुदर्शन चक्र ही अभी चल रहा है 2008 में मध्य में अशोकचक्र टूटने के बाद मतलब धर्मचक्र/अशोकचक्र/कालचक्र/महादेवचक्र जिसके धारणकर्ता विष्णु है और रक्षक महादेव है वह 24 ऋषियों का वाराणसी/काशी का चक्र कार्य फलन में अभी आया की नहीं (वैसे शेषः दुनिया में 24 ऋषियों का चक्र जो चलता है उसके 7 मौलिक स्तम्भ सप्तर्षि प्रयागराज में ही रहते है)।>>>>>>संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्णके दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षा हुई थी तो मैंने दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण का ही नहीं लगभग सभी भारतीय संस्कृति के विभूतियों का अनुभव कर चुका हूँ अपने जीवन में तो इसमे से दो मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलनात्मक स्थिति मैं इस सम्पूर्ण संसार को बताना चाहूँगा कुछ शब्दो में: एक तो श्रीकृष्ण स्वयं श्रीराम के श्रेष्ठ, ज्येष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकते है इसके लिए कुछ सोचने की बात ही नहीं उससे आगे श्रीराम भी पूर्णाति पूर्ण और श्रीकष्ण भी पूर्णाति पूर्ण पर श्रीराम के सन्दर्भ में स्थूल जगत के प्रति चिंतन उतना ही है जितना के अंतर्जगत का मतलब श्रीकृष्ण सत्य जानते हुए सत्य को किशी भी अवस्था में हांसिल करना चाहते हैं पर श्रीराम उस सत्य को जगत नियम बिना प्रभावित किये हुए मतलब लोगों के आस्था और विश्वास को बिना प्रभावित किये हुए सत्य को स्थूल जगत के सत्य के रूप में निर्विवाद स्थापित करने के प्रति दृढ़संकल्पित होते है। और यही कारन है की मेरी परिक्षा लेने वालों को पता था की मैं गिरिधर हूँ मतलब गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु)) हूँ परंतु क्या श्रीराम भी बन सकता हूँ मतलब पूर्ण विवेक बन सकता हूँ की नहीं मतलब पुरुषार्थ पर विवेक हावी रह पायेगा की नहीं तो पुरुषार्थ पर विवेक हावी नहीं रहा और मैंने अमर्यादित आचरण भी न करते हुए अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त कर लिया 25 नवम्बर, 2016 को। >>>>>>>>>>तो अब मेरा पूंछना केवल इतना है 30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षामेरी परिक्षा लेने वालों से की वाराणासी/काशी के 24 ऋषिवाले अशोकचक्र का पचीसवाँ ऋषि मतलब सभी मानक २४ ऋषियों को का केंद्र बिंदु मतलब उसको ऊर्जा देने वाला ऋषि मैं अभी हुआ की नहीं या 108 आरियों(अधिकतम ऋषि/गोत्र) वाला सुदर्शन चक्र ही अभी चल रहा है 2008 में मध्य में अशोकचक्र टूटने के बाद मतलब धर्मचक्र/अशोकचक्र/कालचक्र/महादेवचक्र जिसके धारणकर्ता विष्णु है और रक्षक महादेव है वह 24 ऋषियों का वाराणसी/काशी का चक्र कार्य फलन में अभी आया की नहीं (वैसे शेषः दुनिया में 24 ऋषियों का चक्र जो चलता है उसके 7 मौलिक स्तम्भ सप्तर्षि प्रयागराज में ही रहते है)।>>>>>>संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्णके दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण के दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। तो अब मेरा पूंछना केवल इतना है 30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षा लेने वालों से की वाराणासी/काशी के 24 ऋषिवाले अशोकचक्र का पचीसवाँ ऋषि मतलब सभी मानक २४ ऋषियों को का केंद्र बिंदु मतलब उसको ऊर्जा देने वाला ऋषि मैं अभी हुआ की नहीं या 108 आरियों(अधिकतम ऋषि/गोत्र) वाला सुदर्शन चक्र ही अभी चल रहा है 2008 में मध्य में अशोकचक्र टूटने के बाद मतलब धर्मचक्र/अशोकचक्र/कालचक्र/महादेवचक्र जिसके धारणकर्ता विष्णु है और रक्षक महादेव है वह 24 ऋषियों का वाराणसी/काशी का चक्र कार्य फलन में अभी आया की नहीं (वैसे शेषः दुनिया में 24 ऋषियों का चक्र जो चलता है उसके 7 मौलिक स्तम्भ सप्तर्षि प्रयागराज में ही रहते है)।>>>>>>संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्णके दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षा हुई थी तो मैंने दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण का ही नहीं लगभग सभी भारतीय संस्कृति के विभूतियों का अनुभव कर चुका हूँ अपने जीवन में तो इसमे से दो मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्ण की तुलनात्मक स्थिति मैं इस सम्पूर्ण संसार को बताना चाहूँगा कुछ शब्दो में: एक तो श्रीकृष्ण स्वयं श्रीराम के श्रेष्ठ, ज्येष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकते है इसके लिए कुछ सोचने की बात ही नहीं उससे आगे श्रीराम भी पूर्णाति पूर्ण और श्रीकष्ण भी पूर्णाति पूर्ण पर श्रीराम के सन्दर्भ में स्थूल जगत के प्रति चिंतन उतना ही है जितना के अंतर्जगत का मतलब श्रीकृष्ण सत्य जानते हुए सत्य को किशी भी अवस्था में हांसिल करना चाहते हैं पर श्रीराम उस सत्य को जगत नियम बिना प्रभावित किये हुए मतलब लोगों के आस्था और विश्वास को बिना प्रभावित किये हुए सत्य को स्थूल जगत के सत्य के रूप में निर्विवाद स्थापित करने के प्रति दृढ़संकल्पित होते है। और यही कारन है की मेरी परिक्षा लेने वालों को पता था की मैं गिरिधर हूँ मतलब गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु)) हूँ परंतु क्या श्रीराम भी बन सकता हूँ मतलब पूर्ण विवेक बन सकता हूँ की नहीं मतलब पुरुषार्थ पर विवेक हावी रह पायेगा की नहीं तो पुरुषार्थ पर विवेक हावी नहीं रहा और मैंने अमर्यादित आचरण भी न करते हुए अपना अभीष्ट लक्ष्य प्राप्त कर लिया 25 नवम्बर, 2016 को। >>>>>>>>>>तो अब मेरा पूंछना केवल इतना है 30 जनवरी, 2012 को गोपीगंज और सीतामढी रस्ते के बीच काशी/वाराणसी मार्ग पर दोपहर 1 बजे के लगभग मेरी परिक्षामेरी परिक्षा लेने वालों से की वाराणासी/काशी के 24 ऋषिवाले अशोकचक्र का पचीसवाँ ऋषि मतलब सभी मानक २४ ऋषियों को का केंद्र बिंदु मतलब उसको ऊर्जा देने वाला ऋषि मैं अभी हुआ की नहीं या 108 आरियों(अधिकतम ऋषि/गोत्र) वाला सुदर्शन चक्र ही अभी चल रहा है 2008 में मध्य में अशोकचक्र टूटने के बाद मतलब धर्मचक्र/अशोकचक्र/कालचक्र/महादेवचक्र जिसके धारणकर्ता विष्णु है और रक्षक महादेव है वह 24 ऋषियों का वाराणसी/काशी का चक्र कार्य फलन में अभी आया की नहीं (वैसे शेषः दुनिया में 24 ऋषियों का चक्र जो चलता है उसके 7 मौलिक स्तम्भ सप्तर्षि प्रयागराज में ही रहते है)।>>>>>>संक्षेप में मेरी परिक्षा लेने वालों को मुझमे आजतक मानवता के इतिहास के दोनों मात्र सशरीर परमब्रह्म श्रीराम और श्रीकृष्णके दर्शन हुए की नहीं और वर्तमान में श्रीराम के दर्शन हुए की नहीं? >>>>>>>अगर ऐसा है तो चिंतामणी जी, चन्द्रभान जी, ज्ञानेंद्र जी और उमाशंकर जी और सम्पूर्ण संसार का भी संशय दूर हो गया होगा की इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं है। >>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Tuesday, March 28, 2017

यह है शिव/शिवा तथा राम/सीता की अन्योन्याश्रिता>>>>>>>त्रयम्बक:त्रिनेत्र: त्रिलोचनःविवेक(शिव व शिवा:पार्वती की आन्तरिक सुरक्षा शक्ती)=महाशिव (राम) >>>>शिव >>ॐ त्रियम्बकम यजामहे सुगंधिम पुस्तिवर्धनम ||---उर्व्वारुकमिव बन्धनात म्रत्योर्मुक्षीय माम्रताम |:>>>शिवा>>>सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते|>>>> शिव और शिवा को त्रयम्बक:त्रिनेत्र:त्रिलोचनःविवेक(शिव व शिवा:पार्वती की आन्तरिक सुरक्षा शक्ती) युक्त रहना ही पड़ता है अगर सांसारिक रूप में जगत जननी सीता की छाया रूपी सृष्टि:मानवता के नियंत्रण/संरक्षण और मानवता के अनियंत्रित होने पर संहार के लिए भी समर्पित और तत्पर और इस हेतु सर्वदा स्वयं समर्थ रहना ही रहना है तो। तो किंचिद अनियंत्रित हो जाने से शिव द्वारा सृष्टि का संहार हुआ तो फिर सृष्टि कि पुनरुत्पत्ति स्वयं इसी सशरीर परमब्रह्म राम से होगी जिसमे महादेव, विष्णु और ब्रह्मा पुरुष के रूप में और सांसारिक रूप में त्रिशक्ति:सीता (अदृश्य रूप जगत जननी जगदम्बा:दुर्गा:देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) की छाया रूपी सृष्टि का प्रकृति के रूप में प्रादुर्भाव होता है। >>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ :सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

यह है शिव/शिवा तथा राम/सीता की अन्योन्याश्रिता>>>>>>>त्रयम्बक:त्रिनेत्र: त्रिलोचनःविवेक(शिव व शिवा:पार्वती की आन्तरिक सुरक्षा शक्ती)=महाशिव (राम) >>>>शिव >>ॐ त्रियम्बकम यजामहे सुगंधिम पुस्तिवर्धनम ||---उर्व्वारुकमिव बन्धनात म्रत्योर्मुक्षीय माम्रताम |:>>>शिवा>>>सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते|>>>> शिव और शिवा को त्रयम्बक:त्रिनेत्र:त्रिलोचनःविवेक(शिव व शिवा:पार्वती की आन्तरिक सुरक्षा शक्ती) युक्त रहना ही पड़ता है अगर सांसारिक रूप में जगत जननी सीता की छाया रूपी सृष्टि:मानवता के नियंत्रण/संरक्षण और मानवता के अनियंत्रित होने पर संहार के लिए भी समर्पित और तत्पर और इस हेतु सर्वदा स्वयं समर्थ रहना ही रहना है तो। तो किंचिद अनियंत्रित हो जाने से शिव द्वारा सृष्टि का संहार हुआ तो फिर सृष्टि कि पुनरुत्पत्ति स्वयं इसी सशरीर परमब्रह्म राम से होगी जिसमे महादेव, विष्णु और ब्रह्मा पुरुष के रूप में और सांसारिक रूप में त्रिशक्ति:सीता (अदृश्य रूप जगत जननी जगदम्बा:दुर्गा:देवकाली (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) की छाया रूपी सृष्टि का प्रकृति के रूप में प्रादुर्भाव होता है। >>>>>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ :सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>>>
ॐ त्रियम्बकम यजामहे सुगंधिम पुस्तिवर्धनम |
उर्व्वारुकमिव बन्धनात म्रत्योर्मुक्षीय माम्रताम |

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते|
१-ॐ नमो देव्ये महादेव्ये शिवाये सततं नमः | नमः प्रक्रतये भद्राए नियताः प्रणताः स्मताम||
२-शरणागतदीनार्त परित्राण परायने | सर्वस्यातिहरे देवी नारायणी नमोस्तुते ||
३-ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी | दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते||
४-सर्वबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः | मनुष्यों मत प्रसादेन भविष्यति न संशयः ||
५-ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके |शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।।

शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायण नमोस्तुते।।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वेशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ।।
रोगनशेषानपहंसि तुष्टा। रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां। त्वमाश्रिता हृयश्रयतां प्रयान्ति।।
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।।
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् । रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

ॐ देवेंद्रानी नमस्तुभ्यं देवेन्द्र प्रिय भामिनी. विवाहं भाग्यमारोग्य शिघ्रलाभं च देहि मे |
ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिनी अधिस्वरी. नंदगोप्सुते देवी! पतिं मे कुरु ते नमः |

--------------------------------------------------------------------------------------
पत्नी मनोरमा देहि मनोव्रतानुसरिनिम | ताद्रिनी दुर्ग संसार सागरस्य कुलोदभवाम||
----------------------------------------------------------------------------------
द्वादश (१२) ज्योतिर्लिंगों की प्रार्थना
___________________________________________________
ॐ सोरास्ट सोमनाथ न,श्रीशैले मल्लिकार्जुनम नम |
उज्जनियाँ महाकालमोंकार ममलेश्वर||
परल्यां वैद्यनाथ व् डाकिन्यां मीमकरण |
सेतुबन्धे तु रामेश, नागेशं दारुकावने ||
वाराणस्यां तु विश्वेशं, त्र्यम्बकं गौतमीतटे |
हिमालये तु केदार, घुश्मेशं च शिवालये ||
एतानि ज्योतिर्लिंगानी सायं प्रातः पठेन्नर |
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेंन विनश्यति |

| गणपति श्रोतम |

ॐ प्रणम्य सिरसा देवं गौरी पुत्रं विनायकं | भक्तावासम शरम्तायु कामार्थ शिधये||
प्रथमं वक्रतुंद्स्च एकदंतं द्वितीयकम | तृतीयं कृष्णपिमाक्षम गजवक्रम चतुर्थकम ||

लम्बोदर्स्च पञ्चम च सस्ठं विकटमेव च | सप्तमं विघ्नराजेंद्रम धुम्रवर्ण तथास्टमम ||
नवमं भालचंद्रम च दसमं तु विनायकं | एकादसम गणपतिः द्वादसम च गजाननं ||

द्वादसेतानी नामानी त्रिसन्धयं यः पठेन्नरः | न च विघ्न भयं तस्य सर्व सिद्धि करं प्रभु ||

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनं, पुत्रार्थी लभते पुत्रं मोक्षार्थी लभते सुगतिम ||

जपदे गणपति श्रोतम षडभिर्मासे फलं लभते, संवस्तरेन्न सिध्यंस्च च लभते नात्र संसयः ||
अस्टभ्यो ब्रह्म्नेस्च लिखित्वा यः समर्पयेत, तस्य विद्या भवेत् सिद्ध्या गणेशस्य प्रसादतः ||>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत (गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द (जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

5 गाँव ((ओरिल: रामापुर-आजमगढ़:सनातन आर्य क्षेत्र-223225 (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) और इन पाँच/छह गाँव के त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण की कुल माता जौनपुर(जमदग्निपुर:ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सप्तर्षियों में सर्वश्रेष्ठ सप्तर्षियों:सात ब्रह्मर्षियों में सर्वश्रेष्ठ भृगु ऋषि के पौत्र और परशुराम के पिता की कर्मभूमि) की हैं और हमारे इस कुल की अधिकाँश माताएं जौनपुर/जमदग्निपुर की ही हैं तो उस दृष्टि के हमारा मातृकुल ही हमारा गुरुकुल वास्तविक रूप में होता है क्योंकि प्रथमगुरु माता ही है तो सम्यक दृष्टि से जब मुझ रामापुर-आजमगढ़:संतान आर्य क्षेत्र-223225 का गुरुकुल या मतलब एक मात्र क्षेत्र जो हर प्रकार से हमारा गुरुकुल सिद्ध हुआ तो समस्त आजमगढ़:सनातन आर्य क्षेत्र का भी गुरु जौनपुर ही है और इसप्रकार जौनपुर/जमदग्निपुर सदा सर्वदा और सर्वकालीन विश्वगुरु है जिसकी पुनर्स्थापना परशुराम के क्षेत्र केरल, गोवा, कोंकड़, मराठवाड़ा, गुजरात, सौराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराँचल और हिमालयी क्षेत्र से होते हुए आसाम और महेंद्रगिरि (कश्यप ऋषि के कहने पर समाधिष्ठ वही हुए और फिर उत्तरांचल और आसाम में प्रकटीकरण जिनका होता रहा है) के निकटवट ओरिसा और आंध्रा से कोई करे न करे और करे तो सर्वथा उचित होगा। वैसे मराठवाड़ा और महेन्द्रगिरि क्षेत्र इसको प्रतिस्थापित करने पर लगा हुआ है वैसे भी शिव और शिवा की आतंरिक सुरक्षा शक्ति का आदिशिव की नगरी के पास ही स्थान है जो जौनपुर/जमदग्निपुर में ही है मतलब वास्तविक त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/विवेक पर तो जौनपुर/जमदग्निपुर का ही अधिकार है। >>>>>>>>>>गुरुकुल: सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव के तृतीय अवकाश कैलाश से बस्ती जनपदगोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर:जमदग्निपुर:ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सप्तर्षियों में सर्वश्रेष्ठ सप्तर्षियों:सात ब्रह्मर्षियों में सर्वश्रेष्ठ भृगु ऋषि के पौत्र और परशुराम के पिता की कर्मभूमि) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद के मूल भूमि के वाशिंदे कुल/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती|

5 गाँव ((ओरिल: रामापुर-आजमगढ़:सनातन आर्य क्षेत्र-223225 (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) और इन पाँच/छह गाँव के त्रिफला पाण्डेय ब्राह्मण की कुल माता जौनपुर(जमदग्निपुर:ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सप्तर्षियों में सर्वश्रेष्ठ सप्तर्षियों:सात ब्रह्मर्षियों में सर्वश्रेष्ठ भृगु ऋषि के पौत्र और परशुराम के पिता की कर्मभूमि) की हैं और हमारे इस कुल की अधिकाँश माताएं जौनपुर:जमदग्निपुर की ही हैं तो उस दृष्टि के हमारा मातृकुल ही हमारा गुरुकुल वास्तविक रूप में होता है क्योंकि प्रथमगुरु माता ही है तो सम्यक दृष्टि से जब मुझ रामापुर-आजमगढ़:संतान आर्य क्षेत्र-223225 का गुरुकुल या मतलब एक मात्र क्षेत्र जो हर प्रकार से हमारा गुरुकुल सिद्ध हुआ तो समस्त आजमगढ़:सनातन आर्य क्षेत्र का भी गुरु जौनपुर ही है और इसप्रकार जौनपुर/जमदग्निपुर सदा सर्वदा और सर्वकालीन विश्वगुरु है जिसकी पुनर्स्थापना परशुराम के क्षेत्र केरल, गोवा, कोंकड़, मराठवाड़ा, गुजरात, सौराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराँचल और हिमालयी क्षेत्र से होते हुए आसाम और महेंद्रगिरि (कश्यप ऋषि के कहने पर समाधिष्ठ वही हुए और फिर उत्तरांचल और आसाम में प्रकटीकरण जिनका होता रहा है) के निकटवट ओरिसा और आंध्रा से कोई करे न करे और करे तो सर्वथा उचित होगा। वैसे मराठवाड़ा और महेन्द्रगिरि क्षेत्र इसको प्रतिस्थापित करने पर लगा हुआ है वैसे भी शिव और शिवा की आतंरिक सुरक्षा शक्ति का आदिशिव की नगरी के पास ही स्थान है जो जौनपुर/जमदग्निपुर में ही है मतलब वास्तविक त्रिलोचन/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/विवेक पर तो जौनपुर/जमदग्निपुर का ही अधिकार है। >>>>>>>>>>गुरुकुल: सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव के तृतीय अवकाश कैलाश से बस्ती जनपदगोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर:जमदग्निपुर:ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सप्तर्षियों में सर्वश्रेष्ठ सप्तर्षियों:सात ब्रह्मर्षियों में सर्वश्रेष्ठ भृगु ऋषि के पौत्र और परशुराम के पिता की कर्मभूमि) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद के मूल भूमि के वाशिंदे कुल/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती| >>>>>>>>>>>>>

गुरुकुल: सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित हो शिव के तृतीय अवकाश कैलाश से बस्ती जनपदगोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर:जमदग्निपुर:ब्राह्मणत्व के सर्वोच्च गुण त्याग में सप्तर्षियों में सर्वश्रेष्ठ सप्तर्षियों:सात ब्रह्मर्षियों में सर्वश्रेष्ठ भृगु ऋषि के पौत्र और परशुराम के पिता की कर्मभूमि) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद के मूल भूमि के वाशिंदे कुल/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती

कुल: सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़: :सनातन आर्य क्षेत्र स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (गंगा को धारण करने वाले गंगाधर:गंगानाथ शिव +सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत (गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत: सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा>>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>>>विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द (जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैं इसी लिए बारम्बार कहता हूँ की प्रतिभा, मेधा, ज्ञान-विज्ञान और पुरुषार्थ की चुनौती न दी जाय सीधी सी बात है की मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और अभीष्ट इस संसार में नहीं है और मैं एक शब्द मानवता मात्र हित हेतु और अपने अभीष्ट ईष्ट केदारेश्वर:आदिशकर: आद्यशंकर:आदित्रिदेव:आद्या हेतु अभीष्ट लक्ष्य प्राप्ति हेतु मैं सबकुछ स्वीकार करता हूँ। >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

मैं इसी लिए बारम्बार कहता हूँ की प्रतिभा, मेधा, ज्ञान-विज्ञान और पुरुषार्थ की चुनौती न दी जाय सीधी सी बात है की मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और अभीष्ट इस संसार में नहीं है और मैं एक शब्द मानवता मात्र हित हेतु और अपने अभीष्ट ईष्ट केदारेश्वर:आदिशकर: आद्यशंकर:आदित्रिदेव:आद्या हेतु अभीष्ट लक्ष्य प्राप्ति हेतु मैं सबकुछ स्वीकार करता हूँ। >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

अब तो विश्वमानवता को तय करना है की किशी को ब्रह्माण्ड की समस्त विद्याओं का ज्ञाता/सर्वज्ञ बनाना है या उसके व्यवहारिक जीवन मात्र के साथअलग-अलग योग्यतायुक्त व्यक्तियों के समाकलन से व्यापक मानवता को ध्यान में रख इस संसार को सुचारुरूप से चलाना है: क्या सर्वज्ञ हो या विषय विशेष का ही सर्वज्ञ हो कोई व्यवहारिक जीवन दीर्घकालिक रूप से जी सकता है? बात की जाय तो फिर लक्ष्य से केवल जुड़े रहने या स्वार्थपूर्ण जुड़े रहने या पूर्ण समर्पित रहने की जाय इससे इतर कुछ करना विषय से हटना ही माना जाता है? >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>

अब तो विश्वमानवता को तय करना है की किशी को ब्रह्माण्ड की समस्त विद्याओं का ज्ञाता/सर्वज्ञ बनाना है या उसके व्यवहारिक जीवन मात्र के साथअलग-अलग योग्यतायुक्त व्यक्तियों के समाकलन से व्यापक मानवता को ध्यान में रख इस संसार को सुचारुरूप से चलाना है: क्या सर्वज्ञ हो या विषय विशेष का ही सर्वज्ञ हो कोई व्यवहारिक जीवन दीर्घकालिक रूप से जी सकता है? बात की जाय तो फिर लक्ष्य से केवल जुड़े रहने या स्वार्थपूर्ण जुड़े रहने या पूर्ण समर्पित रहने की जाय इससे इतर कुछ करना विषय से हटना ही माना जाता है? >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> >>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

गुरु जी अगर मेरे सहनसीलता की क्षमता का कही अंत हो गया होता जो होना नहीं था/है 2057 से पहले तो आप लोग यही कहते की खानदानी पागल था पागल होकर मर गया या विलीन हो गया? जबकी इसे मैं बचकाना व्यवहार मात्र ही कहते हुए कोई प्रतिक्रया नहीं देता हूँ। मैं आप लोग की ऐसी भाषा नहीं देखा पर आप लिपिबध्द भाषा की बात मात्र करते हैं। >>>>.> गुरूजी हमने भी दुनिया देखी थी और हाइ स्कूल के बाद ठीक से पढ़ाई नहीं होने दी गयी थी जिस परिवार और व्यक्ति से सम्बन्ध था तो इसी समाज विशेष के प्रभाव से तो उस भी सहनसीलता को भी देखते हुए भारत में उपश्थित हर जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ/मतावलंबन/हर लगभग हर जीवन स्तर के लोगों के बच्चो को देखा है पर जिस सहनसीलता का परिचय और संगत परिश्थितियों अनुसार विवेक और पुरुषार्थ का परिचय मैंने दिया है उतना इस संसार के किशी भी समाज और व्यक्ति का वंसज नहीं दे सकता है स्वयं मेरा पुत्र भी नहीं क्योंकि मैं भी अब व्यावसायिक शिक्षक हूँ कृषक ब्राह्मण नहीं हूँ तो आप सब उन अंतरास्ट्रीय दृश्य और अदृश्य (मनोवैज्ञानिक) परिश्थितियों को अवलम्बन विहीन हो झेल नहीं सकते थे जिसको झेलने के बाद की मेरी स्थिति का आप आंकलन मात्र कर सकते हैं। >>>>गुरु जी अगर मेरे सहनसीलता की क्षमता का कही अंत हो गया होता जो होना नहीं था/है 2057 से पहले तो आप लोग यही कहते की खानदानी पागल था पागल होकर मर गया या विलीन हो गया? जबकी इसे मैं बचकाना व्यवहार मात्र ही कहते हुए कोई प्रतिक्रया नहीं देता हूँ। मैं आप लोग की ऐसी भाषा नहीं देखा पर आप लिपिबध्द भाषा की बात मात्र करते हैं। >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

गुरु जी अगर मेरे सहनसीलता की क्षमता का कही अंत हो गया होता जो होना नहीं था/है 2057 से पहले तो आप लोग यही कहते की खानदानी पागल था पागल होकर मर गया या विलीन हो गया? जबकी इसे मैं बचकाना व्यवहार मात्र ही कहते हुए कोई प्रतिक्रया नहीं देता हूँ। मैं आप लोग की ऐसी भाषा नहीं देखा पर आप लिपिबध्द भाषा की बात मात्र करते हैं। >>>>.> गुरूजी हमने भी दुनिया देखी थी और हाइ स्कूल के बाद ठीक से पढ़ाई नहीं होने दी गयी थी जिस परिवार और व्यक्ति से सम्बन्ध था तो इसी समाज विशेष के प्रभाव से तो उस भी सहनसीलता को भी देखते हुए भारत में उपश्थित हर जाति/धर्म/सम्प्रदाय/पंथ/मतावलंबन/हर लगभग हर जीवन स्तर के लोगों के बच्चो को देखा है पर जिस सहनसीलता का परिचय और संगत परिश्थितियों अनुसार विवेक और पुरुषार्थ का परिचय मैंने दिया है उतना इस संसार के किशी भी समाज और व्यक्ति का वंसज नहीं दे सकता है स्वयं मेरा पुत्र भी नहीं क्योंकि मैं भी अब व्यावसायिक शिक्षक हूँ कृषक ब्राह्मण नहीं हूँ तो आप सब उन अंतरास्ट्रीय दृश्य और अदृश्य (मनोवैज्ञानिक) परिश्थितियों को अवलम्बन विहीन हो झेल नहीं सकते थे जिसको झेलने के बाद की मेरी स्थिति का आप आंकलन मात्र कर सकते हैं। >>>>गुरु जी अगर मेरे सहनसीलता की क्षमता का कही अंत हो गया होता जो होना नहीं था/है 2057 से पहले तो आप लोग यही कहते की खानदानी पागल था पागल होकर मर गया या विलीन हो गया? जबकी इसे मैं बचकाना व्यवहार मात्र ही कहते हुए कोई प्रतिक्रया नहीं देता हूँ। मैं आप लोग की ऐसी भाषा नहीं देखा पर आप लिपिबध्द भाषा की बात मात्र करते हैं। >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं। >>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>> >>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

जो लोग स्वयंभू सर्वज्ञ हो गए थे और अपने अनुसार मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में प्राप्त कर चुके थे ब्रह्मा (जोशी जी), अटल जी और तथाकथित दलित/ईसाई/पिछड़े समाज की कृपापात्रता से और जिनके कृत्यों और दम्भ से यह समष्टि समाप्तप्राय होने वाली थी और तथाकथित महाशक्ति के बल पर उनकी सर्वज्ञता इतनी थी की वे वास्तविक महाशक्ति जो महाशक्तीयों के भी महाशक्ति है उसको भी नहीं पहचान पा रहे थे जो इस प्रयागराज में ही केंद्रित है ( कस्तूरी कुंडल बसै मृग ढूंढें बन माहि)। स्पष्ट रूप से कहूँ तो लोगों को लग रहा था की संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ब्रिटेन या विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का सर्वोच्च महाशक्ति बैठा था और है भी जबकी वह तो इस केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र में ही केंद्रित कर बैठा हुआ था/है जो अपने ही त्याग, बलिदान और तपोलीनता के बल पर और अपने ही तपिस से निकले तेल से पलते हुए प्रतिपक्ष और कुछ सन्दर्भों में पक्ष का भी आघात सहन करते हुए भी प्रतिकार आज तक नहीं किया है पर समय और सत्य को ही आगे और आगे करता जा रहा है मतलब विश्वमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विषमहासमुद्रमंथन के और से लेकर उसके संक्रमण काल और आज भी मानवता के संरक्षण, संवर्धन और संपोषण तथा अनवरत अविरल निर्वाध प्रवाह हेतु निःस्वार्थ भाव, तत्परता और निष्ठा और समर्पण भाव से कार्यरत है। अब आप सब ही न्याय मूर्ती हो बताइये की उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में इस संसार में कोई है क्या? अभी तक तो नहीं दे सका है यह संसार या कोई देवी भी उसका समाना नहीं कर सकीं जबतक की व्यवहारिक स्वरुप में परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) और स्वयं देविओं का आग्रह और इस हेतु आशीर्वचन नहीं मिला? >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।

जो लोग स्वयंभू सर्वज्ञ हो गए थे और अपने अनुसार मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में प्राप्त कर चुके थे ब्रह्मा (जोशी जी), अटल जी और तथाकथित दलित/ईसाई/पिछड़े समाज की कृपापात्रता से और जिनके कृत्यों और दम्भ से यह समष्टि समाप्तप्राय होने वाली थी और तथाकथित महाशक्ति के बल पर उनकी सर्वज्ञता इतनी थी की वे वास्तविक महाशक्ति जो महाशक्तीयों के भी महाशक्ति है उसको भी नहीं पहचान पा रहे थे जो इस प्रयागराज में ही केंद्रित है ( कस्तूरी कुंडल बसै मृग ढूंढें बन माहि)। स्पष्ट रूप से कहूँ तो लोगों को लग रहा था की संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ब्रिटेन या विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का सर्वोच्च महाशक्ति बैठा था और है भी जबकी वह तो इस केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर केंद्र में ही केंद्रित कर बैठा हुआ था/है जो अपने ही त्याग, बलिदान और तपोलीनता के बल पर और अपने ही तपिस से निकले तेल से पलते हुए प्रतिपक्ष और कुछ सन्दर्भों में पक्ष का भी आघात सहन करते हुए भी प्रतिकार आज तक नहीं किया है पर समय और सत्य को ही आगे और आगे करता जा रहा है मतलब विश्वमहापरिवर्तन/सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विषमहासमुद्रमंथन के और से लेकर उसके संक्रमण काल और आज भी मानवता के संरक्षण, संवर्धन और संपोषण तथा अनवरत अविरल निर्वाध प्रवाह हेतु निःस्वार्थ भाव, तत्परता और निष्ठा और समर्पण भाव से कार्यरत है। अब आप सब ही न्याय मूर्ती हो बताइये की उसका ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में इस संसार में कोई है क्या? अभी तक तो नहीं दे सका है यह संसार या कोई देवी भी उसका समाना नहीं कर सकीं जबतक की व्यवहारिक स्वरुप में परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) और स्वयं देविओं का आग्रह और इस हेतु आशीर्वचन नहीं मिला? >>>>>>मुझ गिरिधर(विवेक/तृयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/महाशिव(राम)) के परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद:शिव तो फिर जनक:ब्रह्मा स्वयं प्रदीप(सूर्य का भी आतंरिक ऊर्जा हेतु स्वयं निहित स्रोत): सूर्यकांत :सूर्यस्वामी:आदित्यनाथ:सत्यनारायण :रामजानकी:रामा हैं।>>>>>>>> >>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।