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Friday, April 28, 2017

RE:गोमांतक-कर्णाटक (दक्षिण) से लेकर विश्वमानवता के मूल बिंदु प्रयागराज तक दोनों मोर्चों पर अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर सहस्राब्दी महापरिवर्तन और उसके संक्रमणकाल से लेकर आज तक एक ही नाम चल रहा है| >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

RE:गोमांतक-कर्णाटक (दक्षिण)  से लेकर विश्वमानवता के मूल बिंदु प्रयागराज तक दोनों मोर्चों पर अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर सहस्राब्दी महापरिवर्तन और उसके संक्रमणकाल से लेकर आज तक  एक ही नाम चल रहा है| >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

RE:जो लोग कल तक भारतीय ही नहीं या हिन्दू ही नहीं अपितु ब्राह्मण और ब्राह्मण में भेद बतला रहे थे दलित ईसाई शक्ति से समर्थन लेकर वे अब स्थिति सामान्य करा दिए जाने पर मुझे रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण पढ़ा रहे हैं शायद वे महादेव के उस परमशिष्य को भूल गए जो विष्णुअवतार भी है तो उसके बाद महादेव, राम और कृष्ण को मेघनाथ, रावण और कुम्भकर्ण पढियेगा? भृगुवंशीय परशुराम अवतार ही उनके लिए बहुत है उसके बाद ही विष्णुअवतार के मात्र दो परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वरुप मतलब राम और कृष्ण तथा उनके पारस्परिक इष्टदेव महादेव तक की सोचियेगा?>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

RE:जो लोग कल तक भारतीय ही नहीं या हिन्दू ही नहीं अपितु ब्राह्मण और ब्राह्मण में भेद बतला रहे थे दलित ईसाई शक्ति से समर्थन लेकर वे अब स्थिति सामान्य करा दिए जाने पर मुझे रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण पढ़ा रहे हैं शायद वे महादेव के उस परमशिष्य को भूल गए जो विष्णुअवतार भी है तो उसके बाद महादेव, राम और कृष्ण को मेघनाथ, रावण और कुम्भकर्ण पढियेगा? भृगुवंशीय परशुराम अवतार ही उनके लिए बहुत है उसके बाद ही विष्णुअवतार के मात्र दो परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वरुप मतलब राम और कृष्ण तथा उनके पारस्परिक इष्टदेव महादेव तक की सोचियेगा?>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

RE:तो आप सभी पक्ष विचार कीजिये की आप अपने निजी स्वार्थ को प्रभावित न होने की सीमा में हमेशा रहे है और यह परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हमेशा पूर्णरूपेण समर्पित भाव में रहा है और आप में से किसी ने मेरे लिए जो कुछ समर्पित किया है और जिसका लेखा-जोखा आप लेते रहते हैं उसके सम्बन्ध में अगर न्यायपूर्ण व्यवहारिकता मेरी है तो इसका मतलब आप यह मत समझियेगा की मै उस समर्पित विधा को मेरे अपने पूर्ण आदर्शो पर दोषपूर्ण नहीं समझता पर दोषपूर्ण मानता था और दोषपूर्ण मानता हूँ और दोषपूर्ण मानूंगा अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो आप मुझे 2008 के बाद इस प्रयागराज में और इस अवश्था में न देखते और यह सांसारिक मानवीय संचालन व्यवस्था अगर किसी भी सज्जन नर/नारी को जो तत्कालीन वाह्य व् आतंरिक परिश्थितिगत सांसारिकता के वास्तविक प्रभाव से अछूता है को गलत दिशा दे दिए हो तो उनका पारखी हो उनके उन्नयन के प्रति सहृदय भाव रखना आदर्शो से समझौता नहीं बल्कि उनकी उस अवश्था के प्रति जिम्मेदारा आसुरी शक्तिओं का मर्दन है ? तो अब समझ जाइये के मेरी इस संसार में कही उपस्थिति हूँ सामाजिक और मानवीय आदर्शो की नीव को हर समय हर पल ही मजबूत करने वाला है| >>>>>>>>>>>जब परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के प्रभाव से हर पक्ष अपने द्वारा जाने और अनजाने में ईर्ष्या-द्वेष-प्रतिकार-प्रतिशोध और साम-दाम-दण्ड-भेद के माध्यम से उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के प्रति ही किये गए अन्याय का कोई उचित उत्तर न मिले और सभी इस प्रकार निरुत्तर हो अपनी स्वार्थपूर्ण सीमाओं में पुनः सीमित हो जाय तो फिर बन्धन ढीले करने पड़ जाते हैं उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म को सबको अपनी-अपनी करने हेतु पर इन सभी पक्षों के कार्य और स्वार्थपूर्ण युक्ति युक्त कार्य का एक प्रकार सामाजिक सञ्चालन ही समझा जाना चाहिए न की पूर्ण सत्यता क्योंकि पूर्ण सत्यता को तो 29 मई, 2006 को ही प्राप्त किया जा चुका है, 11/18 सितम्बर, 2007 को सैद्धांतिक रूप में उस सत्य की पुष्टि हो चुकी हो और जिसकी भौतिक आधारशिला 29 अक्टूबर, 2009 को रखा जा चुका है और जिसे 19/20 जुलाई, 2011 को संस्थागत और 25 नवम्बर, 2016 को संस्थागत और सामाजिक(कानूनी) रूप में पूर्णातिपूर्ण सत्य के रूप में स्थापित किया जा चुका है उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के द्वारा| >>>>>>>>>>>>..तो आप सभी पक्ष विचार कीजिये की आप अपने निजी स्वार्थ को प्रभावित न होने की सीमा में हमेशा रहे है और यह परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हमेशा पूर्णरूपेण समर्पित भाव में रहा है और आप में से किसी ने मेरे लिए जो कुछ समर्पित किया है और जिसका लेखा-जोखा आप लेते रहते हैं उसके सम्बन्ध में अगर न्यायपूर्ण व्यवहारिकता मेरी है तो इसका मतलब आप यह मत समझियेगा की मै उस समर्पित विधा को मेरे अपने पूर्ण आदर्शो पर दोषपूर्ण नहीं समझता पर दोषपूर्ण मानता था और दोषपूर्ण मानता हूँ और दोषपूर्ण मानूंगा अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो आप मुझे 2008 के बाद इस प्रयागराज में और इस अवश्था में न देखते और यह सांसारिक मानवीय संचालन व्यवस्था अगर किसी भी सज्जन नर/नारी को जो तत्कालीन वाह्य व् आतंरिक परिश्थितिगत सांसारिकता के वास्तविक प्रभाव से अछूता है को गलत दिशा दे दिए हो तो उनका पारखी हो उनके उन्नयन के प्रति सहृदय भाव रखना आदर्शो से समझौता नहीं बल्कि उनकी उस अवश्था के प्रति जिम्मेदारा आसुरी शक्तिओं का मर्दन है ? तो अब समझ जाइये के मेरी इस संसार में कही उपस्थिति हूँ सामाजिक और मानवीय आदर्शो की नीव को हर समय हर पल ही मजबूत करने वाला है| >>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

RE:तो आप सभी पक्ष विचार कीजिये की आप अपने निजी स्वार्थ को प्रभावित न होने की सीमा में हमेशा रहे है और यह परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हमेशा पूर्णरूपेण समर्पित भाव में रहा है और आप में से किसी ने मेरे लिए जो कुछ समर्पित किया है और जिसका लेखा-जोखा आप लेते रहते हैं उसके सम्बन्ध में अगर न्यायपूर्ण व्यवहारिकता मेरी है तो इसका मतलब आप यह मत समझियेगा की मै उस समर्पित विधा को मेरे अपने पूर्ण आदर्शो पर दोषपूर्ण नहीं समझता पर दोषपूर्ण मानता था और दोषपूर्ण मानता हूँ और दोषपूर्ण मानूंगा अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो आप मुझे 2008 के बाद इस प्रयागराज में और इस अवश्था में न देखते और यह सांसारिक मानवीय संचालन व्यवस्था अगर किसी भी सज्जन नर/नारी को जो तत्कालीन वाह्य व् आतंरिक परिश्थितिगत सांसारिकता के वास्तविक प्रभाव से अछूता है को गलत दिशा दे दिए हो तो उनका पारखी हो उनके उन्नयन के प्रति सहृदय भाव रखना आदर्शो से समझौता नहीं बल्कि उनकी उस अवश्था के प्रति जिम्मेदारा आसुरी शक्तिओं का मर्दन है ? तो अब समझ जाइये के मेरी इस संसार में कही उपस्थिति हूँ सामाजिक और मानवीय आदर्शो की नीव को हर समय हर पल ही मजबूत करने वाला है| >>>>>>>>>>>जब परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के प्रभाव से हर पक्ष अपने द्वारा जाने और अनजाने में ईर्ष्या-द्वेष-प्रतिकार-प्रतिशोध और साम-दाम-दण्ड-भेद के माध्यम से उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के प्रति ही किये गए अन्याय का कोई उचित उत्तर न मिले और सभी इस प्रकार निरुत्तर हो अपनी स्वार्थपूर्ण सीमाओं में पुनः सीमित हो जाय तो फिर बन्धन ढीले करने पड़ जाते हैं उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म को सबको अपनी-अपनी करने हेतु पर इन सभी पक्षों के कार्य और स्वार्थपूर्ण युक्ति युक्त कार्य का एक प्रकार सामाजिक सञ्चालन ही समझा जाना चाहिए न की पूर्ण सत्यता क्योंकि पूर्ण सत्यता को तो 29 मई, 2006 को ही प्राप्त किया जा चुका है, 11/18 सितम्बर, 2007 को सैद्धांतिक रूप में उस सत्य की पुष्टि हो चुकी हो और जिसकी भौतिक आधारशिला 29 अक्टूबर, 2009 को रखा जा चुका है और जिसे 19/20 जुलाई, 2011 को संस्थागत और 25 नवम्बर, 2016 को संस्थागत और सामाजिक(कानूनी) रूप में पूर्णातिपूर्ण सत्य के रूप में स्थापित किया जा चुका है उस परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म के द्वारा| >>>>>>>>>>>>..तो आप सभी पक्ष विचार कीजिये की आप अपने निजी स्वार्थ को प्रभावित न होने की सीमा में हमेशा रहे है और यह परमसत्य मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हमेशा पूर्णरूपेण समर्पित भाव में रहा है और आप में से किसी ने मेरे लिए जो कुछ समर्पित किया है और जिसका लेखा-जोखा आप लेते रहते हैं उसके सम्बन्ध में अगर न्यायपूर्ण व्यवहारिकता मेरी है तो इसका मतलब आप यह मत समझियेगा की मै उस समर्पित विधा को मेरे अपने पूर्ण आदर्शो पर दोषपूर्ण नहीं समझता पर दोषपूर्ण मानता था और दोषपूर्ण मानता हूँ और दोषपूर्ण मानूंगा अन्यथा अगर ऐसा नहीं होता तो आप मुझे 2008 के बाद इस प्रयागराज में और इस अवश्था में न देखते और यह सांसारिक मानवीय संचालन व्यवस्था अगर किसी भी सज्जन नर/नारी को जो तत्कालीन वाह्य व् आतंरिक परिश्थितिगत सांसारिकता के वास्तविक प्रभाव से अछूता है को गलत दिशा दे दिए हो तो उनका पारखी हो उनके उन्नयन के प्रति सहृदय भाव रखना आदर्शो से समझौता नहीं बल्कि उनकी उस अवश्था के प्रति जिम्मेदारा आसुरी शक्तिओं का मर्दन है ? तो अब समझ जाइये के मेरी इस संसार में कही उपस्थिति हूँ सामाजिक और मानवीय आदर्शो की नीव को हर समय हर पल ही मजबूत करने वाला है| 
>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Tuesday, April 25, 2017

चन्द्रमा के लिए शुक्लपक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों होता है पर चन्द्रमा के शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष दोनों के लिए उत्तरदायी सूर्य के लिए कृष्णपक्ष होता ही नहीं है उसके लिए तो हमेशा शुल्कपक्ष ही होता है|>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद सेआकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

चन्द्रमा के लिए शुक्लपक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों होता है पर चन्द्रमा के शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष दोनों के लिए उत्तरदायी सूर्य के लिए कृष्णपक्ष होता ही नहीं है उसके लिए तो हमेशा शुल्कपक्ष ही होता है|>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद सेआकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Monday, April 24, 2017

वैसे तो भारत समेत इस सम्पूर्ण संसार को प्रायोजित तरीके से संगठित रूपों में अनार्य बनने को मजबूर किया जा रहा है पर यह मिसाल और मशाल है की अनार्य के घर में आर्य ही निकलते चले आ रहे है क्योंकि इस संसार में आर्य का कोई जबाब नहीं आज से नहीं तब से जब हिन्द=यूरेशिया=यूरोप+एसिआ=जम्बूद्वीप था और उसके बाद हिन्द=कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी होते हुए हिन्द=अखण्ड भारत=भरतखण्ड=भारत वर्ष और अब हिन्द=अटक से कटक और कश्मीर से कन्याकुमारी होने तक भी| >>>>>>>भाइयों मै तो पैतृक रूप से सनातन आर्यक्षेत्र आजमगढ़ से हूँ और मुझे आप लोगों से जाती/कर्म/धर्म/संस्कृति/संस्कार/चरित्र/नैतिक/दर्शन/आचरण सब प्रकार से ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य चाहिए जो लोग एक आर्य(प्रगतिशील सच्चाई/श्रेष्ठविचार) से भी उच्चविचार और आचरण वाले होते हैं जो निःस्वार्थभाव में त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम की प्रतिमूर्ति होते है मतलब जिनके समान हम यदि आचरण न करें तो वे हमसे सदा-सर्वदा श्रेष्ठ होते हैं और अगर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य और उनकी सम्मिलित/व्युत्पन्न संताने हमे मिल गये तो हम इस संसार में आर्यों की जमात सदा-सर्वदा तैयार करते रहेंगे मतलब हमारी मूल पूंजी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनकी सम्मिलित/व्युत्पन्न संताने हैं जो हमको भी शिक्षा, संस्कृत, संस्कार और ज्ञान-विज्ञान का पाठ पढ़ती हैं और हम जिस भी भौतिक सम्पन्नता (सम्पन्नता के स्तर अनेकोनेक हैं पर सम्पन्नता शून्य केवल वह व्यक्ति या व्यक्ति समूह होता है जो विवेक विहीन हो चुका होता है नहीं तो संसार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होता संसार में जो किसी न किसी दृश्टिकोण से सम्पन्न न हो) की अवस्था में होते हैं हमे अपने कार्यव्यवहार और आचरण से उच्च नैतिक और चारित्रिक मूल्यों से परिपूर्ण सफल और स्वाभाविक जीवन देते हैं| >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

वैसे तो भारत समेत इस सम्पूर्ण संसार को प्रायोजित तरीके से संगठित रूपों में अनार्य बनने को मजबूर किया जा रहा है पर यह मिसाल और मशाल है की अनार्य के घर में आर्य ही निकलते चले आ रहे है क्योंकि इस संसार में आर्य का कोई जबाब नहीं आज से नहीं तब से जब हिन्द=यूरेशिया=यूरोप+एसिआ=जम्बूद्वीप था और उसके बाद हिन्द=कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी होते हुए हिन्द=अखण्ड भारत=भरतखण्ड=भारत वर्ष और अब हिन्द=अटक से कटक और कश्मीर से कन्याकुमारी होने तक भी| >>>>>>>भाइयों मै तो पैतृक रूप से सनातन आर्यक्षेत्र आजमगढ़ से हूँ और मुझे आप लोगों से जाती/कर्म/धर्म/संस्कृति/संस्कार/चरित्र/नैतिक/दर्शन/आचरण सब प्रकार से ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य चाहिए जो लोग एक आर्य(प्रगतिशील सच्चाई/श्रेष्ठविचार) से भी उच्चविचार और आचरण वाले होते हैं जो निःस्वार्थभाव में त्याग, बलिदान और तप/योग/उद्यम की प्रतिमूर्ति होते है मतलब जिनके समान हम यदि आचरण न करें तो वे हमसे सदा-सर्वदा श्रेष्ठ होते हैं और अगर ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य और उनकी सम्मिलित/व्युत्पन्न संताने हमे मिल गये तो हम इस संसार में आर्यों की जमात सदा-सर्वदा तैयार करते रहेंगे मतलब हमारी मूल पूंजी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् उनकी सम्मिलित/व्युत्पन्न संताने हैं जो हमको भी शिक्षा, संस्कृत, संस्कार और ज्ञान-विज्ञान का पाठ पढ़ती हैं और हम जिस भी भौतिक सम्पन्नता (सम्पन्नता के स्तर अनेकोनेक हैं पर सम्पन्नता शून्य केवल वह व्यक्ति या व्यक्ति समूह होता है जो विवेक विहीन हो चुका होता है नहीं तो संसार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होता संसार में जो किसी न किसी दृश्टिकोण से सम्पन्न न हो) की अवस्था में होते हैं हमे अपने कार्यव्यवहार और आचरण से उच्च नैतिक और चारित्रिक मूल्यों से परिपूर्ण सफल और स्वाभाविक जीवन देते हैं| >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Saturday, April 22, 2017

कृष्णपक्ष के द्वितीया का चन्द्रमा या शुक्ल पक्ष के द्वितीया का चन्द्रमा या और कोई भी चन्द्रमा होता हो तो वह भी सही, को चाहे कोई भी विशेषण दे दिया जाय या अनगिनत गुणों से विभूषित कर दिया जाय पर सती:पार्वती:उमा: अपर्णा: गिरिजा :गौरी:शिवा: कात्यायिनी:भवानी :अम्बिका:शैलजा :शिवानी:रुद्राणी का वास्तविक निवास तो महादेव:शिव:शंकर:केदारेश्वर :आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(त्रिदेवों में आद्या>>>त्रिदेवियों में आद्या मतलब आदिदेवी सरस्वती:स्वेता हैं):महामृत्युंजय: भुवनेश्वर:विश्वेश्वर के पास ही होता है जो अर्धनारीश्वर स्वरुप के प्रथम प्रणेता हैं | >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र) /.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

कृष्णपक्ष के द्वितीया का चन्द्रमा या शुक्ल पक्ष के द्वितीया का चन्द्रमा या और कोई भी चन्द्रमा होता हो तो वह भी सही, को चाहे कोई भी विशेषण दे दिया जाय या अनगिनत गुणों से विभूषित कर दिया जाय पर सती:पार्वती:उमा: अपर्णा: गिरिजा :गौरी:शिवा: कात्यायिनी:भवानी :अम्बिका:शैलजा :शिवानी:रुद्राणी का वास्तविक निवास तो महादेव:शिव:शंकर:केदारेश्वर :आदिशंकर:आद्यशंकर:आद्या(त्रिदेवों में आद्या>>>त्रिदेवियों में आद्या मतलब आदिदेवी सरस्वती:स्वेता हैं):महामृत्युंजय: भुवनेश्वर:विश्वेश्वर के पास ही होता है जो अर्धनारीश्वर स्वरुप के प्रथम प्रणेता हैं | >>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती: पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र) /.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Friday, April 21, 2017

किसी ऋषी से वरदान भक्त ने माँगा की मै नदी को पानी के ऊपर से पार कर जाऊं तो ऋषी का जबाब था की 2 पण (उस समय दो पैसे की नाव आती रही होगी) की नाव ले लो पार कर लो नदी पानी के ऊपर से इसके लिए दिव्य शक्ति का उपयोग क्यों चाह रहे हो जिसका कोई अभीष्ट प्रयोजन ही न हो मानवता हित में तो इसी तरह जब समाज को जिस स्तर के लोगों की जरूरत हो उसी का प्रयोग करो भाई मेरे जैसे की तुलना करने हेतु सड़कछाप लोगों को क्यों खोज लाते हैं जिन्होंने अपने स्वार्थ्य से हट कोई कार्य ही नहीं किया है समाज के लिए अपना अस्तित्व मिटाकर समाज हित में समर्पित होने वाले से उसकी तुलना क्यों कर रहे हैं?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>तो आप से बता दिया की मै सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हो चुका हूँ इस संसार के आजतक के इतिहास में अधिकतम समय तक तो आप समझ लीजिये की राम और कृष्ण हो चुका हूँ तो आप मुझसे केवल ब्रह्मा, विष्णु, महेश या अन्य किसी-किस सृष्टिगत अभीष्ट विभूति को होने की परिक्षा ले रहे थे, है और लेंगे जबकि मै बता चुका हूँ की मेरा इस प्रयागराज में संकल्पित होना ही मेरे साथ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ऊर्जा का केंद्र यही केंद्रित हुआ है और परिश्थितियों की धीरे-धीरे अनुकूलता और नियंत्रण में मतलब इस सृष्टि के संरक्षण, सम्पोषण और संवर्धन मेरे अंदर निहित ऊर्जा और सामर्थ्य यह संसार धीरे-धीरे पाता गया| इसका मतलब यह नहीं की आप मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ पा जाएंगे जो सम्भव ही नहीं है| मै नाम सहित तो नहीं कहना चाहूंगा पर इतना अवश्य कह सकता हूँ की इस प्रयागराज में उन दिनों में भी, आज भी और आज के बाद भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल रूप में संगत सन्दर्भ में न कोई था, न है और न होगा क्योंकि ऐसा केवल मै, मै और मै ही हो सकता हूँ जिसके साथ ऐसी परिश्थितियां आती गयीं आज तक के मानवता के इतिहास में जो नहीं आयी थीं| तुलसीदास ने कहा है की रघुवर की छवि समान रघुवर छवि बनिया मतलब रघुवर के मुख की उपमा इस ब्रह्माण्ड में केवल रघुवर के मुख से ही की जा सकती है तो ठीक वही स्थिति मेरे सन्दर्भ में है जो की भूतो न भविष्यतः हुआ है| >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

किसी ऋषी से वरदान भक्त ने माँगा की मै नदी को पानी के ऊपर से पार कर जाऊं तो ऋषी का जबाब था की 2 पण (उस समय दो पैसे की नाव आती रही होगी) की नाव ले लो पार कर लो नदी पानी के ऊपर से इसके लिए दिव्य शक्ति का उपयोग क्यों चाह रहे हो जिसका कोई अभीष्ट प्रयोजन ही न हो मानवता हित में तो इसी तरह जब समाज को जिस स्तर के लोगों की जरूरत हो उसी का प्रयोग करो भाई मेरे जैसे की तुलना करने हेतु सड़कछाप लोगों को क्यों खोज लाते हैं जिन्होंने अपने स्वार्थ्य से हट कोई कार्य ही नहीं किया है समाज के लिए अपना अस्तित्व मिटाकर समाज हित में समर्पित होने वाले से उसकी तुलना क्यों कर रहे हैं?>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>तो आप से बता दिया की मै सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म हो चुका हूँ इस संसार के आजतक के इतिहास में अधिकतम समय तक तो आप समझ लीजिये की राम और कृष्ण हो चुका हूँ तो आप मुझसे केवल ब्रह्मा, विष्णु, महेश या अन्य  किसी-किस सृष्टिगत अभीष्ट विभूति को होने की परिक्षा ले रहे थे, है और लेंगे जबकि मै बता चुका हूँ की मेरा इस प्रयागराज में संकल्पित होना ही मेरे साथ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की ऊर्जा का केंद्र यही केंद्रित हुआ है और परिश्थितियों की धीरे-धीरे अनुकूलता और नियंत्रण में मतलब इस सृष्टि के संरक्षण, सम्पोषण और संवर्धन मेरे अंदर निहित ऊर्जा और सामर्थ्य यह संसार धीरे-धीरे पाता  गया| इसका मतलब यह नहीं की आप मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ पा जाएंगे जो सम्भव ही नहीं है|  मै नाम सहित तो नहीं कहना चाहूंगा पर इतना अवश्य कह सकता हूँ की इस प्रयागराज में उन दिनों में भी, आज भी और आज के बाद भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ  एकल रूप में संगत सन्दर्भ में न कोई था, न है और न होगा क्योंकि ऐसा केवल मै, मै और मै ही हो सकता हूँ जिसके साथ ऐसी परिश्थितियां आती गयीं आज तक के मानवता के इतिहास में जो नहीं आयी थीं|  तुलसीदास ने कहा है की रघुवर की छवि समान रघुवर छवि बनिया मतलब रघुवर के मुख की उपमा इस ब्रह्माण्ड में केवल रघुवर के मुख से ही की जा सकती है तो ठीक वही स्थिति मेरे सन्दर्भ में है जो की भूतो न भविष्यतः हुआ है| >>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण। 

मङ्गलकारी हनुमान/अम्बेदकर/अम्बवाडेकर जो लंका को जलाये थे या महामंगलेश्वर जो अयोध्या/कौसल/अवध नगरी को जलाने की धमकी दिए थे लक्ष्मण से तो क्या ऐसे लोग आतंकवादी है या मानवता के अभीष्ट हित हेतु अतिचातुर्यपूर्ण और रहस्य्मय कृत्य है?>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मङ्गलकारी हनुमान/अम्बेदकर/अम्बवाडेकर जो लंका को जलाये थे या महामंगलेश्वर जो अयोध्या/कौसल/अवध नगरी को जलाने की धमकी दिए थे लक्ष्मण से तो क्या ऐसे लोग आतंकवादी है या मानवता के अभीष्ट हित हेतु अतिचातुर्यपूर्ण और रहस्य्मय कृत्य है?>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।  

महादेव के मानद पुत्र हनुमान/अम्बवाडेकर/आंबेडकर मंगलकारी और महादेव के दत्तक पुत्र गणेश/कपिल/विनायक अगर त्रिदेव और त्रिदेवियों के बाद प्रथम पूज्य और विश्वविख्यात मंगलकारी तथा भगवान शिव के द्वारा रक्षित किये जाने वाले और विष्णु के द्वारा धारण किये जाने वाले धर्मचक्र/समयचक्र/24 मानक ऋषि के चक्र/अशोकचक्र/कालचक्र के प्रथम रक्षक और ऋषियों में प्रथम रूद्र कहे जाने वाले विषम परिश्थितियों में अल्प हानि से ही मानवता को उबारने वाले त्रिदेवशक्ति से सम्पन्न अत्रि और परमसती अनुसूइया के पुत्र दुर्वाशा ऋषि महामंगलेश्वर; तो भगवान् राम के पूर्वज अम्बरीष को दुर्वाशा के श्राप से दुर्वाशा द्वारा ही मुक्त कराने वाले विष्णु सर्वमंगलकारी: मंगलम भगवान् विष्णु, मंगलम गरुणध्वजः मंगलम पुण्डरीकाक्षाय मंगलाय तनो हरिः| हिंदी अर्थ भगवान् विष्णु मंगल हैं, गरुड वाहन वाले मंगल हैं (ध्वज:वाहन), कमल के समान नेत्र वाले मंगल हैं (पुण्डरीक:कमलवत, अक्ष:आँख ), हरि मंगल के भंडार हैं। मंगल अर्थात् जो मंगलमय हैं, शुभ हैं, कल्याणप्रद हैं ऐसे हैं भगवान् विष्णु|

महादेव के मानद पुत्र हनुमान/अम्बवाडेकर/आंबेडकर मंगलकारी और महादेव के दत्तक पुत्र गणेश/कपिल/विनायक अगर त्रिदेव और त्रिदेवियों के बाद प्रथम पूज्य और विश्वविख्यात मंगलकारी तथा भगवान शिव के द्वारा रक्षित किये जाने वाले और विष्णु के द्वारा धारण किये जाने वाले धर्मचक्र/समयचक्र/24 मानक ऋषि के चक्र/अशोकचक्र/कालचक्र के प्रथम रक्षक और ऋषियों में प्रथम रूद्र कहे जाने वाले विषम परिश्थितियों में अल्प हानि से ही मानवता को उबारने वाले त्रिदेवशक्ति से सम्पन्न अत्रि और परमसती अनुसूइया के पुत्र दुर्वाशा ऋषि महामंगलेश्वर; तो भगवान् राम के पूर्वज अम्बरीष को दुर्वाशा के श्राप से दुर्वाशा द्वारा ही मुक्त कराने वाले विष्णु सर्वमंगलकारी: मंगलम भगवान् विष्णु, मंगलम गरुणध्वजः मंगलम पुण्डरीकाक्षाय मंगलाय तनो हरिः| हिंदी अर्थ भगवान् विष्णु मंगल हैं, गरुड वाहन वाले मंगल हैं (ध्वज:वाहन), कमल के समान नेत्र वाले मंगल हैं (पुण्डरीक:कमलवत, अक्ष:आँख ), हरि मंगल के भंडार हैं। मंगल अर्थात् जो मंगलमय हैं, शुभ हैं, कल्याणप्रद हैं ऐसे हैं भगवान् विष्णु| >>>>>>>>>>>>>>वंदना----
प्रवक्ष्याम्यधुना ह्येतद्वैष्णवं पञ्जरं शुभम्।
नमो नमस्ते गोविन्द चक्रं गृह्य सुदर्शनम्।।
प्राच्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।
गदां कौमोदकीं गृह्य पद्मनाभ नमोस्तु ते।।
याम्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।
हलमादाय सौनन्दं नमस्ते पुरुषोत्तम।।
प्रतीच्यां रक्ष मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।
मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम्।।
उत्तरस्यां जगन्ननाथ भवन्तं शरणं गत:।
खड्गमादाय चर्माथ अस्त्रशस्त्रादिकं हरे।।
नमस्ते रक्ष रक्षोघ्र ऐशान्यां शरणं गत:।
पाञ्चजन्यं महाशङ्खमनुघोष्यं च पङ्कजम्।।
प्रगृह्य रक्ष मां विष्णो आग्रेय्यां यज्ञशूकर।
चन्द्रसूर्य समागृह्य खड्गं चान्द्रमसं तथा।।
नैर्ऋत्यां मां च रक्षस्व दिव्यमूर्ते नृकेसरिन्।
वैजयन्ती सम्प्रगृह्य श्रीवत्सं कण्ठभूषणम्।।
वायव्यां रक्ष मां देव हयग्रीव नमोस्तुते।
वैनतेयं समरुह्य त्वन्तरिक्षे जनार्दन।।
मां रक्षस्वाजित सद नमस्तेस्त्वपराजित।
विशालाक्षं समारुह्य रक्ष मां तवं रसातले।।
अकूपार नमस्तुभ्यं महामीन नमोस्तु ते।
करशीर्षाद्यङ्गलीषु सत्य त्वं बाहुपञ्जरम्।।
कृत्वा रक्षस्व मां विष्णो नमस्ते पुरुषोत्तम।
एतदुक्तं शङ्काराय वैष्णवं पञ्जरं महत्।।
पुरा रक्षार्थमीशान्यां: कात्यायन्या वृषध्वज।
नाशयामास सा येन चामरं महिषासुरम्।।
दानव रक्तबीजं च अन्यांश्च सुरकण्टकान्।
एतज्जपन्नरो भक्तया शत्रून् विजयते सदा।।
समस्त चराचर प्राणियों एवं सकल विश्व का
कल्याण करो प्रभु>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

वैश्विक समाज में मूल तत्व मतलब मूल त्रिदेव कर्म(+जन्म/संस्कार/संस्कृति/व्यक्तित्व) आधारित ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् व्यापक रूप में वैश्विक समाज हेतु मूल तत्व पञ्च तत्व हैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् इस्लाम तथा ईसाइयत और इन्ही मूल पञ्च तत्व के इर्द-गिर्द घूमता हुआ है हमारा वैश्विक जीवन जिसमे से भारत और भारतीयों में वैष्णव विचार प्रभावी और मजबूत होने से वैश्विक रूप में शैवत्व की भी जड़/मूल उतना ही मजबूत होता है और यही है विष्णु शिव की अन्योन्याश्रिता और एक दूसरे के प्रति अगाध अन्तर्निहित व् स्वाभाविक आस्था का राज मतलब भारत में वैष्णवत्व जितना ही अधिक मजबूत होगा शैवत्व का सन्सार पर नियंत्रण उतना ही आसान होगा|>>>>>>>>>.जो आनुवांशिक रूप से सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव :त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय (सशरीर मूल पञ्चतत्व) ब्राह्मण गावं रामापुर-223225, आर्यमगढ़(सनातन आर्य क्षेत्र) से होने के कारन मूलतः राम और रामानुचारी रहा हो; पिता के वशिष्ठ गोत्रीय सनातन मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल, भर्रारी-223103, जौनपुर (जमदग्निपुर) में जन्म; सनातन व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास)-गौतम गोत्रीय मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल बिशुनपुर (जिनके आदर्श विष्णु और कुलदेवता/रक्षक महादेव शिव है)-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर)के लिए उनका रक्षक शिब, और बिशुनपुर के मूल रामानन्द कुल की मूल भूमि पर वासिंदे मतलब ननिहाल(नाना/मामा के घर) में पले-बढे-पढ़े होने पर रामानन्द कुल के लिए कृष्ण तो कुल मिलकर बिशुनपुर के लिए शिव और कृष्ण दोनों हो तो ऐसे में अगर वह राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था से मानवता और प्रेम की मर्यादा की रक्षा हेतु अपना अवनमन कर केवल शिव व् शिवानुचारी बना हो तो उसकी अतिरिक्त ऊर्जा कहाँ जाती तो फिर वह कूर्मावतारी विष्णु और फिर ब्रह्मज्ञानी होते हुए राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था की पुनर्प्राप्ति कर लिया तो उसका इस संसार में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कौन जो स्वयं तीन देव और स्वयं सीता(जगत जननी जगदम्बा=दुर्गा=देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की छाया मतलब जगत जननी जानकी (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) को जन्म देने वाला हो जिनकी छाया समान है यह चर-अचर सृष्टि/प्राणी समाज|>>>>>>>>>>>फिर भी प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा >>>>>>>>>>>>>>>मतलब यह संसार मिथ्या होकर भी अस्तित्व विहीन नहीं है तो उसी सीता की छाया रुपी सृष्टि मतलव मायामयी संसार मतलव सृष्टि के सुचारु रूप से सञ्चालन हेतु यम-नियम और समस्त जगबंधन को सर्वोपरि मानते हुए जहाँ तक सम्भव हो वहां तक निभाना ही उसकी नियति है|>>>>तो जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/विवेक(आद्या/आदित्रिदेवी/त्रिदेवियों में आद्या/महादेवी सरस्वती का मानस पुत्र; तो जिसको सरस्वती अपना मानस पुत्र मानती हैं तो कम से कम उसके पास समस्त ज्ञान, विज्ञान, मेधा, प्रतिभा के साथ सर्वकालिक चिर संस्कार और संस्कृति अवश्य ही होगी जिसको वह किसी भी अवश्था में छोड़ नहीं सकता और उस संस्कृति संस्कार के लिए वह अन्य वैयक्तिक गुण को कुछ समय हेतु गौंड रख सकता है जिसे वह आदिदेवी सरस्वती की अनुकम्पा से पुनः प्राप्त कर सकता है)/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक(शिव व् शिवा:सती:पार्वती:उमा:अपर्णा: गिरिजा:गौरी की आतंरिक स्वयंनिहित सुरक्षा शक्ति) हो उसकी समस्त मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ का आंकलन नहीं किया करते है जितना समस्त जगत के पास है उतना सब उसी का है क्योंकि अगर वह नही तो यह जगत नहीं पर जगत नहीं भी है तो केवल उसी का ही अस्तित्व होता है|>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

वैश्विक समाज में मूल तत्व मतलब मूल त्रिदेव कर्म(+जन्म/संस्कार/संस्कृति/व्यक्तित्व) आधारित ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् व्यापक रूप में वैश्विक समाज हेतु मूल तत्व पञ्च तत्व हैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व् इस्लाम तथा ईसाइयत और इन्ही मूल पञ्च तत्व के इर्द-गिर्द घूमता हुआ है हमारा वैश्विक जीवन जिसमे से भारत और भारतीयों में वैष्णव विचार प्रभावी और मजबूत होने से वैश्विक रूप में शैवत्व की भी जड़/मूल उतना ही मजबूत होता है और यही है विष्णु शिव की अन्योन्याश्रिता और एक दूसरे के प्रति अगाध अन्तर्निहित व् स्वाभाविक आस्था का राज मतलब भारत में वैष्णवत्व जितना ही अधिक मजबूत होगा शैवत्व का सन्सार पर नियंत्रण उतना ही आसान होगा|>>>>>>>>>.जो आनुवांशिक रूप से सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव :त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय (सशरीर मूल पञ्चतत्व) ब्राह्मण गावं रामापुर-223225, आर्यमगढ़(सनातन आर्य क्षेत्र) से होने के कारन मूलतः राम और रामानुचारी रहा हो; पिता के वशिष्ठ गोत्रीय सनातन मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल, भर्रारी-223103, जौनपुर (जमदग्निपुर) में जन्म; सनातन व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास)-गौतम गोत्रीय मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल बिशुनपुर (जिनके आदर्श विष्णु और कुलदेवता/रक्षक महादेव शिव है)-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर)के लिए उनका रक्षक शिब, और बिशुनपुर के मूल रामानन्द कुल की मूल भूमि पर वासिंदे मतलब ननिहाल(नाना/मामा के घर) में पले-बढे-पढ़े होने पर रामानन्द कुल के लिए कृष्ण तो कुल मिलकर बिशुनपुर के लिए शिव और कृष्ण दोनों हो तो ऐसे में अगर वह राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था से मानवता और प्रेम की मर्यादा की रक्षा हेतु अपना अवनमन कर केवल शिव व् शिवानुचारी बना हो तो उसकी अतिरिक्त ऊर्जा कहाँ जाती तो फिर वह कूर्मावतारी विष्णु और फिर ब्रह्मज्ञानी होते हुए राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था की पुनर्प्राप्ति कर लिया तो उसका इस संसार में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कौन जो स्वयं तीन देव और स्वयं सीता(जगत जननी जगदम्बा=दुर्गा=देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की छाया मतलब जगत जननी जानकी (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) को जन्म देने वाला हो जिनकी छाया समान है यह चर-अचर सृष्टि/प्राणी समाज|>>>>>>>>>>>फिर भी प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा >>>>>>>>>>>>>>>मतलब यह संसार मिथ्या होकर भी अस्तित्व विहीन नहीं है तो उसी सीता की छाया रुपी सृष्टि मतलव मायामयी संसार मतलव सृष्टि के सुचारु रूप से सञ्चालन हेतु यम-नियम और समस्त जगबंधन को सर्वोपरि मानते हुए जहाँ तक सम्भव हो वहां तक निभाना ही उसकी नियति है|>>>>तो जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/विवेक(आद्या/आदित्रिदेवी/त्रिदेवियों में आद्या/महादेवी सरस्वती का मानस पुत्र; तो जिसको सरस्वती अपना मानस पुत्र मानती हैं तो कम से कम उसके पास समस्त ज्ञान, विज्ञान, मेधा, प्रतिभा के साथ सर्वकालिक चिर संस्कार और संस्कृति अवश्य ही होगी जिसको वह किसी भी अवश्था में छोड़ नहीं सकता और उस संस्कृति संस्कार के लिए वह अन्य वैयक्तिक गुण को कुछ समय हेतु गौंड रख सकता है जिसे वह आदिदेवी सरस्वती की अनुकम्पा से पुनः प्राप्त कर सकता है)/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक(शिव व् शिवा:सती:पार्वती:उमा:अपर्णा: गिरिजा:गौरी की आतंरिक स्वयंनिहित सुरक्षा शक्ति) हो उसकी समस्त मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ का आंकलन नहीं किया करते है जितना समस्त जगत के पास है उतना सब उसी का है क्योंकि अगर वह नही तो यह जगत नहीं पर जगत नहीं भी है तो केवल उसी का ही अस्तित्व होता है|>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Thursday, April 20, 2017

जो आनुवांशिक रूप से सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव :त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय (सशरीर मूल पञ्चतत्व) ब्राह्मण गावं रामापुर-223225, आर्यमगढ़(सनातन आर्य क्षेत्र) से होने के कारन मूलतः राम और रामानुचारी रहा हो; पिता के वशिष्ठ गोत्रीय सनातन मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल, भर्रारी-223103, जौनपुर (जमदग्निपुर) में जन्म; सनातन व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास)-गौतम गोत्रीय मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल बिशुनपुर (जिनके आदर्श विष्णु और कुलदेवता/रक्षक महादेव शिव है)-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर)के लिए उनका रक्षक शिब, और बिशुनपुर के मूल रामानन्द कुल की मूल भूमि पर वासिंदे मतलब ननिहाल(नाना/मामा के घर) में पले-बढे-पढ़े होने पर रामानन्द कुल के लिए कृष्ण तो कुल मिलकर बिशुनपुर के लिए शिव और कृष्ण दोनों हो तो ऐसे में अगर वह राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था से मानवता और प्रेम की मर्यादा की रक्षा हेतु अपना अवनमन कर केवल शिव व् शिवानुचारी बना हो तो उसकी अतिरिक्त ऊर्जा कहाँ जाती तो फिर वह कूर्मावतारी विष्णु और फिर ब्रह्मज्ञानी होते हुए राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था की पुनर्प्राप्ति कर लिया तो उसका इस संसार में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कौन जो स्वयं तीन देव और स्वयं सीता(जगत जननी जगदम्बा=दुर्गा=देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की छाया मतलब जगत जननी जानकी (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) को जन्म देने वाला हो जिनकी छाया समान है यह चर-अचर सृष्टि/प्राणी समाज|>>>>>>>>>>>फिर भी प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा >>>>>>>>>>>>>>>मतलब यह संसार मिथ्या होकर भी अस्तित्व विहीन नहीं है तो उसी सीता की छाया रुपी सृष्टि मतलव मायामयी संसार मतलव सृष्टि के सुचारु रूप से सञ्चालन हेतु यम-नियम और समस्त जगबंधन को सर्वोपरि मानते हुए जहाँ तक सम्भव हो वहां तक निभाना ही उसकी नियति है|>>>>तो जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/विवेक(आद्या/आदित्रिदेवी/त्रिदेवियों में आद्या/महादेवी सरस्वती का मानस पुत्र; तो जिसको सरस्वती अपना मानस पुत्र मानती हैं तो कम से कम उसके पास समस्त ज्ञान, विज्ञान, मेधा, प्रतिभा के साथ सर्वकालिक चिर संस्कार और संस्कृति अवश्य ही होगी जिसको वह किसी भी अवश्था में छोड़ नहीं सकता और उस संस्कृति संस्कार के लिए वह अन्य वैयक्तिक गुण को कुछ समय हेतु गौंड रख सकता है जिसे वह आदिदेवी सरस्वती की अनुकम्पा से पुनः प्राप्त कर सकता है)/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक(शिव व् शिवा:सती:पार्वती:उमा:अपर्णा: गिरिजा:गौरी की आतंरिक स्वयंनिहित सुरक्षा शक्ति) हो उसकी समस्त मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ का आंकलन नहीं किया करते है जितना समस्त जगत के पास है उतना सब उसी का है क्योंकि अगर वह नही तो यह जगत नहीं पर जगत नहीं भी है तो केवल उसी का ही अस्तित्व होता है|>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

जो आनुवांशिक रूप से सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव :त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय (सशरीर मूल पञ्चतत्व) ब्राह्मण गावं रामापुर-223225, आर्यमगढ़(सनातन आर्य क्षेत्र) से होने के कारन मूलतः राम और रामानुचारी रहा हो; पिता के वशिष्ठ गोत्रीय सनातन मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल, भर्रारी-223103, जौनपुर (जमदग्निपुर) में जन्म; सनातन व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास)-गौतम गोत्रीय मिश्र ब्राह्मण वाले ननिहाल बिशुनपुर (जिनके आदर्श विष्णु और कुलदेवता/रक्षक महादेव शिव है)-223103, जौनपुर(जमदग्निपुर)के लिए उनका रक्षक शिब, और बिशुनपुर के मूल रामानन्द कुल की मूल भूमि पर वासिंदे मतलब ननिहाल(नाना/मामा के घर) में पले-बढे-पढ़े होने पर रामानन्द कुल के लिए कृष्ण तो कुल मिलकर बिशुनपुर के लिए शिव और कृष्ण दोनों हो तो ऐसे में अगर वह राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था से मानवता और प्रेम की मर्यादा की रक्षा हेतु अपना अवनमन कर केवल शिव व् शिवानुचारी बना हो तो उसकी अतिरिक्त ऊर्जा कहाँ जाती तो फिर वह कूर्मावतारी विष्णु और फिर ब्रह्मज्ञानी होते हुए राम (सशरीर परमब्रह/ब्रह्म=सशरीर ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवश्था की पुनर्प्राप्ति कर लिया तो उसका इस संसार में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कौन जो स्वयं तीन देव और स्वयं सीता(जगत जननी जगदम्बा=दुर्गा=देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) की छाया मतलब जगत जननी जानकी (महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी)) को जन्म देने वाला हो जिनकी छाया समान है यह चर-अचर सृष्टि/प्राणी समाज|>>>>>>>>>>>फिर भी प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा >>>>>>>>>>>>>>>मतलब यह संसार मिथ्या होकर भी अस्तित्व विहीन नहीं है तो उसी सीता की छाया रुपी सृष्टि मतलव मायामयी संसार मतलव सृष्टि के सुचारु रूप से सञ्चालन हेतु यम-नियम और समस्त जगबंधन को सर्वोपरि मानते हुए जहाँ तक सम्भव हो वहां तक निभाना ही उसकी नियति है|>>>>तो जो शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)/विवेक(आद्या/आदित्रिदेवी/त्रिदेवियों में आद्या/महादेवी सरस्वती का मानस पुत्र; तो जिसको सरस्वती अपना मानस पुत्र मानती हैं तो कम से कम उसके पास समस्त ज्ञान, विज्ञान, मेधा, प्रतिभा के साथ सर्वकालिक चिर संस्कार और संस्कृति अवश्य ही होगी जिसको वह किसी भी अवश्था में छोड़ नहीं सकता और उस संस्कृति संस्कार के लिए वह अन्य वैयक्तिक गुण को कुछ समय हेतु गौंड रख सकता है जिसे वह आदिदेवी सरस्वती की अनुकम्पा से पुनः प्राप्त कर सकता है)/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक(शिव व् शिवा:सती:पार्वती:उमा:अपर्णा: गिरिजा:गौरी की आतंरिक स्वयंनिहित सुरक्षा शक्ति) हो उसकी समस्त मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ का आंकलन नहीं किया करते है जितना समस्त जगत के पास है उतना सब उसी का है क्योंकि अगर वह नही तो यह जगत नहीं पर जगत नहीं भी है तो केवल उसी का ही अस्तित्व होता है|>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मेरे यहाँ डिजिटल लेखों के कुछ लिखने और पढ़ने से किसी जाती/धर्म/पंथ/रूप/रंग/भाषा/लिंग/राष्ट्र/संगठन/दल के किसी सज्जन व्यक्ति पर कोई गलत असर नहीं होगा (कुछ लोगों पर जरूर इसका असर होगा वे पक्ष और विपक्ष जहाँ भी खड़े होंगे क्योंकि मैं पक्ष और विपक्ष दोनों से हूँ और दोनों को आइना दिखा रहा हूँ जो चाहे इस आईने में सत्य से निःशुल्क साक्षात्कार कर ले) क्योंकि सन्मार्ग पर चलने वालों के सहयोग हेतु मैं समर्पित हूँ और उन्ही को प्रोत्साहित करता हूँ और यह की धनबल, बहुबल, और बुध्धिबल के कुप्रभाव में ये सज्जन न आएं, न झुकें और न प्रभावित हों और ऐसे आम समाज को वाह्य रूप से नियंत्रित करने वाले सज्जन समाज तथा निम्न, मध्यम, सामान्य भौतिक जीवन से लेकर उच्च्स्थ भौतिक जीवन जीते हुए स्वयंनियन्त्रीय तथा दूसरों को भी नियंत्रित करने का प्रयास करने वाले सज्जन=संत समाज की संख्या वृध्धि भी मेरा परम उद्देश्य रहा है डिजिटल लेखों के माध्यम से। पर हर सत्यम शिवम् सुंदरम के सिध्धांत के पालक को भगवान श्रीकृष्ण की तर्ज पर ही सही "सतयमेव जयते" की पूर्ण प्राप्ति हेतु ही पूर्ण सत्य से केवल किसी-किसी सन्दर्भ (केवल अत्यल्प सन्दर्भ में ही) में विरत होना चाहिए न की पूर्ण सत्य प्राप्ति के झूंठे आडम्बर को खड़ा करते हुए स्वयं तथा दूसरों को इस भव-सागर में डुबोते रहे भविष्य में पूर्ण सत्य=ईस्वर प्राप्ति का झूंठा भरोसा देते हुए।>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मेरे यहाँ डिजिटल लेखों के कुछ लिखने और पढ़ने से किसी जाती/धर्म/पंथ/रूप/रंग/भाषा/लिंग/राष्ट्र/संगठन/दल के किसी सज्जन व्यक्ति पर कोई गलत असर नहीं होगा (कुछ लोगों पर जरूर इसका असर होगा वे पक्ष और विपक्ष जहाँ भी खड़े होंगे क्योंकि मैं पक्ष और विपक्ष दोनों से हूँ और दोनों को आइना दिखा रहा हूँ जो चाहे इस आईने में सत्य से निःशुल्क साक्षात्कार कर ले) क्योंकि सन्मार्ग पर चलने वालों के सहयोग हेतु मैं समर्पित हूँ और उन्ही को प्रोत्साहित करता हूँ और यह की धनबल, बहुबल, और बुध्धिबल के कुप्रभाव में ये सज्जन न आएं, न झुकें और न प्रभावित हों और ऐसे आम समाज को वाह्य रूप से नियंत्रित करने वाले सज्जन समाज तथा निम्न, मध्यम, सामान्य भौतिक जीवन से लेकर उच्च्स्थ भौतिक जीवन जीते हुए स्वयंनियन्त्रीय तथा दूसरों को भी नियंत्रित करने का प्रयास करने वाले सज्जन=संत समाज की संख्या वृध्धि भी मेरा परम उद्देश्य रहा है डिजिटल लेखों के माध्यम से। पर हर सत्यम शिवम् सुंदरम के सिध्धांत के पालक को भगवान श्रीकृष्ण की तर्ज पर ही सही "सतयमेव जयते" की पूर्ण प्राप्ति हेतु ही पूर्ण सत्य से केवल किसी-किसी सन्दर्भ (केवल अत्यल्प सन्दर्भ में ही) में विरत होना चाहिए न की पूर्ण सत्य प्राप्ति के झूंठे आडम्बर को खड़ा करते हुए स्वयं तथा दूसरों को इस भव-सागर में डुबोते रहे भविष्य में पूर्ण सत्य=ईस्वर प्राप्ति का झूंठा भरोसा देते हुए।>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Wednesday, April 19, 2017

कृष्ण पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा (देवकाली=महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी के सबसे प्रियपुत्र मतलब शुक्ल पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को तो स्वयं शिव:सारंग(चंद्र)धर धारण करते हैं न की कृष्ण पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को) का सामूहिक छाया चित्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं समझता पर जरूरत पडी तो उस जिन्न को भी बोतल से निकला जाएगा तो यहां बताना चाहूंगा की मौनं स्वीकार लक्षणम सूक्ति सत्य नहीं है: >>>>मेरा सन्देश है की उत्तर प्रदेश को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक, सांस्कारिक समेत स्थानीय से लेकर वैश्विक जीवन के सभी पक्षों पर सम्यक उत्तर देते रहने वाला प्रदेश बने रहने देना चाहिए तो इसको दिग्दर्शन ध्रुव के रूप में न देखते हुए संचेतन ध्रुव मतलब हर सांसारिक पहलू पर उठे प्रश्न के निराकरण हेतु उत्तरदायी प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश ही कम से कम बनाइये तो सब कुछ ठीक हो जाएगा|>>>>>> मौन रहना स्वीकारोक्ति और विरोध दोनों का लक्षण है: जब प्रसंग और परिश्थिति आनंदित करने वाला पक्ष साबित होता है पर भाव प्रकट करना मर्यादा से परे ले जाता हो तो भी मौन और जब विरोध करने पर मर्यादा का चले जाना हो तब भी मौन?>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

कृष्ण पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा (देवकाली=महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी के सबसे प्रियपुत्र मतलब शुक्ल पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को तो स्वयं शिव:सारंग(चंद्र)धर धारण करते हैं न की कृष्ण पक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को) का सामूहिक छाया चित्र प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं समझता पर जरूरत पडी तो उस जिन्न को भी बोतल से निकला जाएगा तो यहां बताना चाहूंगा की मौनं स्वीकार लक्षणम सूक्ति सत्य नहीं है: >>>>मेरा सन्देश है की उत्तर प्रदेश को सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक, सांस्कारिक समेत स्थानीय से लेकर वैश्विक जीवन के सभी पक्षों पर सम्यक उत्तर देते रहने वाला प्रदेश बने रहने देना चाहिए तो इसको दिग्दर्शन ध्रुव के रूप में न देखते हुए संचेतन ध्रुव मतलब हर सांसारिक पहलू पर उठे प्रश्न के निराकरण हेतु उत्तरदायी प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश ही कम से कम बनाइये तो सब कुछ ठीक हो जाएगा|>>>>>> मौन रहना स्वीकारोक्ति और विरोध दोनों का लक्षण है: जब प्रसंग और परिश्थिति आनंदित करने वाला पक्ष साबित होता है पर भाव प्रकट करना मर्यादा से परे ले जाता हो तो भी मौन और जब विरोध करने पर मर्यादा का चले जाना हो तब भी मौन?>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

जो स्वयं गिरिधर ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) और विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) हो वह किसी हिन्दू या मुस्लिम या ईसाई या अन्य कोई धर्मी या अन्य किसी पंथ के नामी गिरामी कुर्मावतारी चेहरे को अपना दाहिना हाँथ बना उसके भरोसे इस प्रयागराज में या कहीं भी या कभी भी जीवन नही जीता है, तो भ्रम किसी को हो की कुर्मावतारी ही प्रयागराज में सर्वश्रेष्ठ हथियार हैं तो वह भ्रम अब दूर कर लिया जाय। गिरिधर-विवेक 2001 से अनवरत इस प्रयागराज और विश्व मानवता को अपनी अतुल्य सेवा दे रहा है मतलब सीत युध्ध का जबाब सीत युध्ध से और अन्य-युद्ध का जबाब अन्य युध्ध से और महत्तम लक्ष्य एक और केवल एक है और वह है मानवता की किसी भी प्रकार अभीष्ट सेवा बिना किसी पारितोषिक के, बिना डर और भय दिखाये, और बिना किसी का डर और भय महसूस किये। >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

जो स्वयं गिरिधर ((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) और विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) हो वह किसी हिन्दू या मुस्लिम या ईसाई या अन्य कोई धर्मी या अन्य किसी पंथ के नामी गिरामी कुर्मावतारी चेहरे को अपना दाहिना हाँथ बना उसके भरोसे इस प्रयागराज में या कहीं भी या कभी भी जीवन नही जीता है, तो भ्रम किसी को हो की कुर्मावतारी ही प्रयागराज में सर्वश्रेष्ठ हथियार हैं तो वह भ्रम अब दूर कर लिया जाय। गिरिधर-विवेक 2001 से अनवरत इस प्रयागराज और विश्व मानवता को अपनी अतुल्य सेवा दे रहा है मतलब सीत युध्ध का जबाब सीत युध्ध से और अन्य-युद्ध का जबाब अन्य युध्ध से और महत्तम लक्ष्य एक और केवल एक है और वह है मानवता की किसी भी प्रकार अभीष्ट सेवा बिना किसी पारितोषिक के, बिना डर और भय दिखाये, और बिना किसी का डर और भय महसूस किये। >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैं प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय या दुनिया के किसी भी विद्वान और योगी, ऋषी और महर्षि का सम्मान क्या करता जब मेरे सभी आदर्शों जो अतुल्य थे/हैं/रहेंगे, को इस दुनिया को चलाने का दम भरने वाले नीचा दिखा रहे अपनी रणनीति के कुचक्र की चाल को परिणाम देने के लिए|आप की जानकारी के लिए आज तक उन आदर्शों से ऊंचा आदर्श प्रस्तुत नहीं कर सके इस दुनिया वाले। मैं अपने कश्यप गोत्रीय बड़े भाई साहब को भी अपना शोध गुरु नहीं मान रहा था और शोध गुरु माना तब जब मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर, मेरे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास से व्याशी मिश्रा ब्राह्मण मामा श्रध्देय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, मेरे खानदानी सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र:बिल्वपत्र:शिव और शिवा पर अर्पणेय/भोज्य/भोजन/आहार) पाण्डेय ब्राह्मण ताऊजी श्रध्देय डॉ प्रेमचंद(शिव) का विशेष आदेश हुआ उनकी पूरी पहचान बताते हुए (जिनके रहते हुए भी अभीष्ठ कार्य को मैं असम्भव बता चुका था मेरे समर्पित हो जाने के बावजूद भी और कुछ हद तक यह सत्य भी साबित हुआ स्वयं मुझ स्वयं समर्पित को भी समर्पण की मूर्त अवस्था से लड़ाई के मैदान में स्वयं उतरना पड़ा 16 मई, 2006 को अभिष्ठतम लक्ष्य प्राप्ति को पूर्णता देने वाले वार के लिए और वह पूर्ण भी हुआ और मूर्त रूप मिला 2007, 2008 के क्रम से आगे जाते हुए 2009 में)। मैं क्या करता विकल्प स्वरुप यह तभी बताऊंगा जब पहले जैसी स्थिति किसी में लाने की शक्ति हो तभी, जो कि संभव नहीं है। तो कौन मेरा वरिष्ठ हुआ जब स्वयं मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर, मेरे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास से व्याशी मिश्रा ब्राह्मण मामा श्रध्देय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, मेरे खानदानी सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र:बिल्वपत्र:शिव और शिवा पर अर्पणेय/भोज्य/भोजन/आहार) पाण्डेय ब्राह्मण ताऊजी श्रध्देय डॉ प्रेमचंद(शिव) द्वारा मेरा समर्पण हुआ? ऐसे शिव (प्रेमचंद) व विष्णु(श्रीधर) के आदर्शो के अनुरूप मैं जिसे जो मान ही लिया था और यदि वे उस योग्य थे/नहीं थे/हैं या किसी द्वारा नियंत्रित भी हुए हो और उनको वह मानने पर मेरा जो हानि लाभ हुआ उसकी चिंता मैं नहीं करता और इस प्रकार उनको अपने से वरिष्ठ मानने में कोई आतंरिक या वाह्य प्रतिरोध नहीं। पर जो प्राथमिक नियमों पर ही नहीं उचित बैठते तो उनको कौन वरिष्ठ मनेगा? >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैं प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय या दुनिया के किसी भी विद्वान और योगी, ऋषी और महर्षि का सम्मान क्या करता जब मेरे सभी आदर्शों जो अतुल्य थे/हैं/रहेंगे, को इस दुनिया को चलाने का दम भरने वाले नीचा दिखा रहे अपनी रणनीति के कुचक्र की चाल को परिणाम देने के लिए|आप की जानकारी के लिए आज तक उन आदर्शों से ऊंचा आदर्श प्रस्तुत नहीं कर सके इस दुनिया वाले। मैं अपने कश्यप गोत्रीय बड़े भाई साहब को भी अपना शोध गुरु नहीं मान रहा था और शोध गुरु माना तब जब मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर, मेरे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास से व्याशी मिश्रा ब्राह्मण मामा श्रध्देय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, मेरे खानदानी सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र:बिल्वपत्र:शिव और शिवा पर अर्पणेय/भोज्य/भोजन/आहार) पाण्डेय ब्राह्मण ताऊजी श्रध्देय डॉ प्रेमचंद(शिव) का विशेष आदेश हुआ उनकी पूरी पहचान बताते हुए (जिनके रहते हुए भी अभीष्ठ कार्य को मैं असम्भव बता चुका था मेरे समर्पित हो जाने के बावजूद भी और कुछ हद तक यह सत्य भी साबित हुआ स्वयं मुझ स्वयं समर्पित को भी समर्पण की मूर्त अवस्था से लड़ाई के मैदान में स्वयं उतरना पड़ा 16 मई, 2006 को अभिष्ठतम लक्ष्य प्राप्ति को पूर्णता देने वाले वार के लिए और वह पूर्ण भी हुआ और मूर्त रूप मिला 2007, 2008 के क्रम से आगे जाते हुए 2009 में)। मैं क्या करता विकल्प स्वरुप यह तभी बताऊंगा जब पहले जैसी स्थिति किसी में लाने की शक्ति हो तभी, जो कि संभव नहीं है। तो कौन मेरा वरिष्ठ हुआ जब स्वयं मेरे परमगुरु परमपिता परमेश्वर, मेरे सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी (वशिष्ठ के पौत्र व्यास से व्याशी मिश्रा ब्राह्मण मामा श्रध्देय श्रीश्रीधर(विष्णु) और परमपिता परमेश्वर, मेरे खानदानी सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र:बिल्वपत्र:शिव और शिवा पर अर्पणेय/भोज्य/भोजन/आहार) पाण्डेय ब्राह्मण ताऊजी श्रध्देय डॉ प्रेमचंद(शिव) द्वारा मेरा समर्पण हुआ? ऐसे शिव (प्रेमचंद) व विष्णु(श्रीधर) के आदर्शो के अनुरूप मैं जिसे जो मान ही लिया था और यदि वे उस योग्य थे/नहीं थे/हैं या किसी द्वारा नियंत्रित भी हुए हो और उनको वह मानने पर मेरा जो हानि लाभ हुआ उसकी चिंता मैं नहीं करता और इस प्रकार उनको अपने से वरिष्ठ मानने में कोई आतंरिक या वाह्य प्रतिरोध नहीं। पर जो प्राथमिक नियमों पर ही नहीं उचित बैठते तो उनको कौन वरिष्ठ मनेगा? >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

Tuesday, April 18, 2017

कागज की क़श्ती से कोई भवसागर पार करने का कुतर्क करे फिर तो उसके बचपना के साथ सुर से सुर मिलना ही पड़ता है उसकी तात्कालिक प्रसन्नता के लिए न तो इससे सर्वकालिक सत्य बदल नहीं जाता है सर्वदा-सर्वदा के लिए व्यवहारिक या सैद्धांतिक सभी रूपों में: >>>...ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य व् उनके व्युत्पन्न संतति तथा इस्लाम व् ईसाइयत जब आप सब मेरे ही सहारे अस्तित्व में हैं तो फिर रावणकुल की मोहमाया कैसी वह भी तो मेरे ही सहारे अस्तित्व में है तो रावणकुल से मेरा कैसा तुलनात्मक अध्ययन जब उसका अस्तित्व तो मेरे परजीवी के समान ही रहा है आप चाहे तो उसका स्वतंत्र अस्तित्व अगर आप समझ भी रहे हों तो उसे मेरे में विलय कर दें पर मेरा अस्तित्व उसमे या किसी में विलीन होने के लिए किसी का उपयुक्त विलायक बन सकने की क्षमता कहाँ? क्योंकि बिना मेरे अस्तित्व के किसी का भी भौतिक अस्तित्व संभव नहीं? तो रावणकुल का मोह आप सबको घातक न सिद्ध हो जाय इस हेतु चेतनाचूर्ण के रूप में प्रारंभिक सन्देश दे रहा हूँ क्योकि आप का और रावणकुल का अस्तित्व दोनों के अस्तित्व के लिए संजीविनी मै ही साबित हुआ हूँ और मै ही हूँ पर रावणकुल के कृत्य से उसका यहाँ उपयुक्त स्थान नहीं बनता है| >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

कागज की क़श्ती से कोई भवसागर पार करने का कुतर्क करे फिर तो उसके बचपना के साथ सुर से सुर मिलना ही पड़ता है उसकी तात्कालिक प्रसन्नता के लिए न तो इससे सर्वकालिक सत्य बदल नहीं जाता है सर्वदा-सर्वदा के लिए व्यवहारिक या सैद्धांतिक सभी रूपों में: >>>...ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य व् उनके व्युत्पन्न संतति तथा इस्लाम व् ईसाइयत जब आप सब मेरे ही सहारे अस्तित्व में हैं तो फिर रावणकुल की मोहमाया कैसी वह भी तो मेरे ही सहारे अस्तित्व में है तो रावणकुल से मेरा कैसा तुलनात्मक अध्ययन जब उसका अस्तित्व तो मेरे परजीवी के समान ही रहा है आप चाहे तो उसका स्वतंत्र अस्तित्व अगर आप समझ भी रहे हों तो उसे मेरे में विलय कर दें पर मेरा अस्तित्व उसमे या किसी में विलीन होने के लिए किसी का उपयुक्त विलायक बन सकने की क्षमता कहाँ? क्योंकि बिना मेरे अस्तित्व के किसी का भी भौतिक अस्तित्व संभव नहीं? तो रावणकुल का मोह आप सबको घातक न सिद्ध हो जाय इस हेतु चेतनाचूर्ण के रूप में प्रारंभिक सन्देश दे रहा हूँ क्योकि आप का और रावणकुल का अस्तित्व दोनों के अस्तित्व के लिए संजीविनी मै ही साबित हुआ हूँ और मै ही हूँ पर रावणकुल के कृत्य से उसका यहाँ उपयुक्त स्थान नहीं बनता है| >>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप :सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैंने कहा था की मै मानवता हित हेतु अपने जीवन से जुडी अपनी प्रियतम से प्रियतम सजीव-निर्जीव वस्तु का त्याग कर सकता हूँ और किया हूँ तो फिर आप यह भी समझ लीजिये की अगर मैं किसी के साथ अन्याय भी नहीं कर सकता तो फिर क्या उस त्यागी हुई सजीव व् निर्जीव वस्तु के साथ अन्याय करूंगा? उत्तर है की कदापि नहीं फिर तो मानवता हित में त्यागी हुई सजीव व् निर्जीव वस्तु कोई हरण करके भी हर नहीं सकता है| अगर ऐसा किसी के साथ है तो वह किस शरीर धारी शिव, राम, कृष्ण के व्यक्तिगत और एकल स्वरुप में समकक्ष नहीं और अगर यह हैं तो वह शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) ही है| और फिर जो कोई भी शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का हो गया है तो अगर मानवता हित हेतु उसका त्याग शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) से हुआ हो या इस बीच उसका हरण हुआ हो साम-दाम-दण्ड-भेद या येन-केन प्रकारेण तो फिर भौतिक रूप में वह किसी का भी रहे पर वास्तव में वह उसी शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का ही होकर रहता है आतंरिक रूप में उसको कोई अलग नहीं कर सकता है और न उसके साथ शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) कोई अन्याय करता है| तो अब भी जिसमे शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के त्याग, बलिदान और तप/योग की परिक्षा लेने का सामर्थ्य वास्तविक रूप में हो उनके प्रिय से प्रियतम सजीव-निर्जीव वस्तु के त्याग, बलिदान और तप/योग की परिक्षा ले सकता है और हाँ कुछ लोग त्यागी सजीव-निर्जीव वस्तु के अपने हित में प्रयोग हेतु उनकी परीक्षा लेना जारी रखे हैं लेकिन भरपाई भी करनी पड़ेगी उनको मानवता हित का कार्य पूर्ण होने पर|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

मैंने कहा था की मै मानवता हित हेतु अपने जीवन से जुडी अपनी प्रियतम से प्रियतम सजीव-निर्जीव वस्तु का त्याग कर सकता हूँ और किया हूँ तो फिर आप यह भी समझ लीजिये की अगर मैं किसी के साथ अन्याय भी नहीं कर सकता तो फिर क्या उस त्यागी हुई सजीव व् निर्जीव वस्तु के साथ अन्याय करूंगा? उत्तर है की कदापि नहीं फिर तो मानवता हित में त्यागी हुई सजीव व् निर्जीव वस्तु कोई हरण करके भी हर नहीं सकता है| अगर ऐसा किसी के साथ है तो वह किस शरीर धारी शिव, राम, कृष्ण के व्यक्तिगत और एकल स्वरुप में समकक्ष नहीं और अगर यह हैं तो वह शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) ही है| और फिर  जो कोई भी शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का हो गया है तो अगर  मानवता हित हेतु उसका त्याग शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) से हुआ हो या इस बीच उसका हरण हुआ हो साम-दाम-दण्ड-भेद या येन-केन प्रकारेण तो फिर भौतिक रूप में वह किसी का भी रहे पर वास्तव में वह उसी  शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का ही होकर रहता है आतंरिक रूप में उसको कोई अलग नहीं कर सकता है और न उसके साथ शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) कोई अन्याय करता है| तो अब भी जिसमे शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) के त्याग, बलिदान और तप/योग की परिक्षा लेने का सामर्थ्य वास्तविक रूप में हो उनके प्रिय से प्रियतम सजीव-निर्जीव वस्तु के त्याग, बलिदान और तप/योग की परिक्षा ले सकता है और हाँ कुछ लोग त्यागी सजीव-निर्जीव वस्तु के अपने हित में प्रयोग हेतु उनकी परीक्षा लेना जारी रखे हैं लेकिन भरपाई भी करनी पड़ेगी उनको मानवता हित का कार्य पूर्ण होने पर|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

महादेव शिवशंकर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) के सबसे प्रियतम पुत्र शुक्लपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को धारण करते हैं न की कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को| वैसे भी विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] का शुक्लपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा से तुनात्मक अध्ययन प्रारम्भ करना ही महामूर्खता है पर यहाँ कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा से उनका तुलनात्मक अध्ययन जारी रहा तो फिर भी जिसने इसे कुछ समय तक के लिए ही सही अंजाम दिया वह स्वयं शिव, शिवा और महाशिव(राम) का कोपभाजक अवश्य हो सकता था/है/होगा पर ऐसा क्यों नहीं हो रहा तो उसका कारन है समयचक्र=कालचक्र=धर्मचक्र=अशोकचक्र=24 मानक रिषिचक्र को अपने स्वाभाविक रूप के कार्यफलन तैयार करने का समय देना|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा: Image is secured for proof.

महादेव शिवशंकर देवकाली(महासरस्वती+महालक्ष्मी+महागौरी) के सबसे प्रियतम पुत्र शुक्लपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा  को धारण करते हैं न की कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा को|  वैसे भी विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] का  शुक्लपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा से तुनात्मक अध्ययन प्रारम्भ करना ही महामूर्खता है  पर यहाँ कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा से उनका तुलनात्मक अध्ययन जारी रहा तो फिर भी जिसने इसे कुछ समय तक के लिए ही सही अंजाम दिया वह स्वयं शिव, शिवा और महाशिव(राम) का कोपभाजक अवश्य हो सकता था/है/होगा पर ऐसा क्यों नहीं हो रहा तो उसका कारन है समयचक्र=कालचक्र=धर्मचक्र=अशोकचक्र=24 मानक रिषिचक्र को अपने स्वाभाविक रूप के कार्यफलन तैयार करने का समय देना|>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>कृष्णपक्ष के द्वितीया के चन्द्रमा: Image is secured for proof.

संस्कृति व् संस्कार, आत्मचिंतन, दूरदृष्टि, आत्मबल तथा गंभीरता मतलब स्थितिज ऊर्जा से लेकर मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ मतलब गतिज ऊर्जा का सकारात्कम और नकारात्मक पक्ष सबको सम्यक रूप से देखने पर काशी हिन्दू विश्विद्यालय के अपने उम्रगत अनुज आयुर्विज्ञानी अविनाश ( न की अविनाश चंद्र जिनका मतलब अविनाशी चन्द्रमा होता है और जिनकी ज्योति का स्रोत सूर्य हैं और सूर्य की ऊर्जा का अन्तः निहित स्वकेन्द्रित स्रोत प्रदीप=सूर्यकांत=सुर्यस्वामी=आदित्यनाथ=सत्यनारायण= रामजानकी=रामा हैं ) और रसायन विज्ञानी पुरुषोत्तम से मैं ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ था, हूँ और रहूँगा और अब आप आम मानव समाज के किसी समकक्ष के बारे में ज्यादा बढ़चढ़कर मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ की बात न कीजियेगा| >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

संस्कृति व् संस्कार, आत्मचिंतन, दूरदृष्टि, आत्मबल तथा गंभीरता मतलब स्थितिज ऊर्जा से लेकर मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ मतलब गतिज ऊर्जा का सकारात्कम और नकारात्मक पक्ष सबको सम्यक रूप से देखने पर काशी हिन्दू विश्विद्यालय के अपने उम्रगत अनुज आयुर्विज्ञानी अविनाश ( न की अविनाश चंद्र जिनका मतलब अविनाशी चन्द्रमा होता है और जिनकी ज्योति का स्रोत सूर्य हैं और सूर्य की ऊर्जा का अन्तः निहित स्वकेन्द्रित स्रोत प्रदीप=सूर्यकांत=सुर्यस्वामी=आदित्यनाथ=सत्यनारायण= रामजानकी=रामा हैं ) और रसायन विज्ञानी पुरुषोत्तम से मैं ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ था, हूँ और रहूँगा और अब आप आम मानव समाज के किसी समकक्ष के बारे में ज्यादा बढ़चढ़कर मेधा, प्रतिभा और पुरुषार्थ की बात न कीजियेगा| >>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

तो मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी व् अन्य सहकर्मी गण मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न थे, न हैं और न हो सकते हैं क्योंकि मैंने सम्पूर्ण संसार समेत उनको भी उपर्युक्त प्रकार से आधार दिया है और स्वयं विषपान कर उनको उपयुक्त माहौल दिया है| पर हाँ मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ हैं और वह हैं सिर्फ मेरी बड़ी बहन के कारणों से और मेरे नारी समाज के प्रति अगाध सम्मान और आस्था व् निष्ठा की वजह से? मै तो पूर्णाती पूर्ण हो चुका हूँ फिर भी देवी जी लोगों की आस्था को बनाये रखा जबकि मेरे ऊपर किसी निरपेक्ष और धार्मिक अनुष्ठान के कार्य में सहभागिता का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था/है/होगा|>>>>>>>>>गुरुदेव, जोशी मेरे मानवता के रक्षार्थ विषपान कर्ता नीलकंठ की दशा में इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिस्ठ उस समय नहीं था और थे तो केवल आप, परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु), परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) और यहां पर आप चेलों की ब्रह्मागिरि ही केवल चल रही थी पूर्व की तरह दो वर्ष तक और इसीलिये मैंने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु), परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) द्वारा आपके कार्य हेतु निर्देशित किये जाने पर ही 2003 में नीलकंठ की दशा में कूर्मावतारी विष्णु बन अपनी लाश समान काया पर इस संसार को धारण किये रखा पूर्णरूपेण प्रयागराज विश्वविद्यालय स्थित इसी केदारेश्वर बनर्जी केंद्र पर अपने को केंद्रित किये हुए| और जब मै अपने को केंद्रित करते हुए इस संसार के हर सदस्य का पुत्र बन मानवता हेतु अपने को समर्पित कर दिया तो फिर उसके बाद सैद्धांतिक लक्ष्य, 29 मई, 2006 को और रहा सहा सैद्धांतिक लक्ष्य 11/18 सितंबर, 2007 को और भौतिकऔर सैद्धांतिक रूप में रूप में 29 सितम्बर, 2009 को तथा भौतिक, सैद्धांतिक तथा कानूनी/सामाजिक रूप में 25 नवम्बर, 2016 को पूर्ण कर लिया तो फिर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवस्था में संदेह क्या| हाँ वह वही अवस्था थी जिस अवस्था में आप हमें देखते थे और मेरे साथ जैसा व्यवहार किये वही आपका वास्तविक व्यवहार था और परिणाम उसी के अनुसार ही मिलना है अनावश्यक प्रायोजन और गुना-गणित से कुछ हांसिल नहीं होना है | जो जैसा आचरण और कार्य किया उसको उसका अधिकार मिला और मिल रहा पर जिसके लिए न कोई त्याग, न कोई बलिदान और न कोई सकारात्मक तप किया उसका कोई भागीदार कैसे बन जाएगा? और भी की जो सर्वकालिक सत्य है उसको तुक-ताल-तिकड़म और साम-दाम-दण्ड-भेद से आप नहीं बदल सकते हैं|>>>>>>>>>तो मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी व् अन्य सहकर्मी गण मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न थे, न हैं और न हो सकते हैं क्योंकि मैंने सम्पूर्ण संसार समेत उनको भी उपर्युक्त प्रकार से आधार दिया है और स्वयं विषपान कर उनको उपयुक्त माहौल दिया है| पर हाँ मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ हैं और वह हैं सिर्फ मेरी बड़ी बहन के कारणों से और मेरे नारी समाज के प्रति अगाध सम्मान और आस्था व् निष्ठा की वजह से? मै तो पूर्णाती पूर्ण हो चुका हूँ फिर भी देवी जी लोगों की आस्था को बनाये रखा जबकि मेरे ऊपर किसी निरपेक्ष और धार्मिक अनुष्ठान के कार्य में सहभागिता का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था/है/होगा|>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

तो मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी व् अन्य सहकर्मी गण मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न थे, न हैं और न हो सकते हैं क्योंकि मैंने सम्पूर्ण संसार समेत उनको भी उपर्युक्त प्रकार से आधार दिया है और स्वयं विषपान कर उनको उपयुक्त माहौल दिया है| पर हाँ मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ हैं और वह हैं सिर्फ मेरी बड़ी बहन के कारणों से और मेरे नारी समाज के प्रति अगाध सम्मान और आस्था व् निष्ठा की वजह से? मै तो पूर्णाती पूर्ण हो चुका हूँ फिर भी देवी जी लोगों की आस्था को बनाये रखा जबकि मेरे ऊपर किसी निरपेक्ष और धार्मिक अनुष्ठान के कार्य में सहभागिता का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था/है/होगा|>>>>>>>>>गुरुदेव, जोशी मेरे मानवता के रक्षार्थ विषपान कर्ता नीलकंठ की दशा में इस संसार में मेरा कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिस्ठ उस समय नहीं था और थे तो केवल आप, परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु), परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) और यहां पर आप चेलों की ब्रह्मागिरि ही केवल चल रही थी पूर्व की तरह दो वर्ष तक और इसीलिये मैंने परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु), परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव) द्वारा आपके कार्य हेतु निर्देशित किये जाने पर ही 2003 में नीलकंठ की दशा में कूर्मावतारी विष्णु बन अपनी लाश समान काया पर इस संसार को धारण किये रखा पूर्णरूपेण प्रयागराज विश्वविद्यालय स्थित इसी केदारेश्वर बनर्जी केंद्र पर अपने को केंद्रित किये हुए| और जब मै अपने को केंद्रित करते हुए इस संसार के हर सदस्य का पुत्र बन मानवता हेतु अपने को समर्पित कर दिया तो फिर उसके बाद सैद्धांतिक लक्ष्य, 29 मई, 2006 को और रहा सहा सैद्धांतिक लक्ष्य 11/18 सितंबर, 2007 को और भौतिकऔर सैद्धांतिक रूप में रूप में 29 सितम्बर, 2009 को तथा भौतिक, सैद्धांतिक तथा कानूनी/सामाजिक रूप में 25 नवम्बर, 2016 को पूर्ण कर लिया तो फिर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अवस्था में संदेह क्या| हाँ वह वही अवस्था थी जिस अवस्था में आप हमें देखते थे और मेरे साथ जैसा व्यवहार किये वही आपका वास्तविक व्यवहार था और परिणाम उसी के अनुसार ही मिलना है अनावश्यक प्रायोजन और गुना-गणित से कुछ हांसिल नहीं होना है | जो जैसा आचरण और कार्य किया उसको उसका अधिकार मिला और मिल रहा पर जिसके लिए न कोई त्याग, न कोई बलिदान और न कोई सकारात्मक तप किया उसका कोई भागीदार कैसे बन जाएगा? और भी की जो सर्वकालिक सत्य है उसको तुक-ताल-तिकड़म और साम-दाम-दण्ड-भेद से आप नहीं बदल सकते हैं|>>>>>>>>>तो मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी व् अन्य सहकर्मी गण मेरे ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ न थे, न हैं और न हो सकते हैं क्योंकि मैंने सम्पूर्ण संसार समेत उनको भी उपर्युक्त प्रकार से आधार दिया है और स्वयं विषपान कर उनको उपयुक्त माहौल दिया है| पर हाँ मेरे सगोत्रीय बड़े भैया, जीजा जी व् गुरु जी ज्येष्ठ, श्रेष्ठ हैं और वह हैं सिर्फ मेरी बड़ी बहन के कारणों से और मेरे नारी समाज के प्रति अगाध सम्मान और आस्था व् निष्ठा की वजह से? मै तो पूर्णाती पूर्ण हो चुका हूँ फिर भी देवी जी लोगों की आस्था को बनाये रखा जबकि मेरे ऊपर किसी निरपेक्ष और धार्मिक अनुष्ठान के कार्य में सहभागिता का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था/है/होगा|>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी:त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर(अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर:शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का:स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।