Google+ Followers

Friday, August 18, 2017

क्योंकि मौलिक सत्य मौलिक सत्य ही होता है वह परिवर्तित नहीं होता है मतलब जब प्रामाणिक सत्य की बात आती है तो फिर एक बालब्रह्मचारी और व्यभिचारी, राम और रावण तथा कंश और कृष्ण का माध्य नहीं लिया जा सकता है इसमें बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण होने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता है उसी जन्म से व्यभिचारी, रावण और कंश क्रमसः बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण नहीं हो सकते हैं|>>>>>>>>>माता-पिता/मामा-नाना और निम्न से लेकर उच्चतम पदों पर बैठे सगे-सम्बन्धी तथा गुरु और गुरुदेव तथा अभिसप्त कलयुगी पिता कहलवाने के लिए लोलुप वाह्य समाज द्वारा घोषित छद्म पिता तक साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल अपनाते हुए एक छोटी से छोटी सामाजिक इकाई से लेकर उच्चतम सामजिक इकाई के स्तर तक भी अपने प्रयास द्वारा एक निकृष्ठतम व्यक्ति को श्रेष्ठतम कहलवाने और मनवाने में अपनी सम्पूर्ण शक्ति झोक दिए पर तथाकथित सामाजिक न्याय इसमें काम नहीं आया|>>>>>>>>>>>>>>>क्योंकि मौलिक सत्य मौलिक सत्य ही होता है वह परिवर्तित नहीं होता है मतलब जब प्रामाणिक सत्य की बात आती है तो फिर एक बालब्रह्मचारी और व्यभिचारी, राम और रावण तथा कंश और कृष्ण का माध्य नहीं लिया जा सकता है इसमें बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण होने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता है उसी जन्म से व्यभिचारी, रावण और कंश क्रमसः बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण नहीं हो सकते हैं|

क्योंकि मौलिक सत्य मौलिक सत्य ही होता है वह परिवर्तित नहीं होता है मतलब जब प्रामाणिक सत्य की बात आती है तो फिर एक बालब्रह्मचारी और व्यभिचारी, राम और रावण तथा कंश और कृष्ण का माध्य नहीं लिया जा सकता है इसमें बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण होने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता है उसी जन्म से व्यभिचारी, रावण और कंश क्रमसः बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण नहीं हो सकते हैं|>>>>>>>>>माता-पिता/मामा-नाना और निम्न से लेकर उच्चतम पदों पर बैठे सगे-सम्बन्धी तथा गुरु और गुरुदेव तथा अभिसप्त कलयुगी पिता कहलवाने के लिए लोलुप वाह्य समाज द्वारा घोषित छद्म पिता तक साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल अपनाते हुए एक छोटी से छोटी सामाजिक इकाई से लेकर उच्चतम सामजिक इकाई के स्तर तक भी अपने प्रयास द्वारा एक निकृष्ठतम व्यक्ति को श्रेष्ठतम कहलवाने और मनवाने में अपनी सम्पूर्ण शक्ति झोक दिए पर तथाकथित सामाजिक न्याय इसमें काम नहीं आया|>>>>>>>>>>>>>>>क्योंकि मौलिक सत्य मौलिक सत्य ही होता है वह परिवर्तित नहीं होता है मतलब जब प्रामाणिक सत्य की बात आती है तो फिर एक बालब्रह्मचारी और व्यभिचारी, राम और रावण तथा कंश और कृष्ण का माध्य नहीं लिया जा सकता है इसमें बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण होने के लिए पुनर्जन्म लेना पड़ता है उसी जन्म से व्यभिचारी, रावण और कंश क्रमसः बाल ब्रह्मचारी, राम और कृष्ण नहीं हो सकते हैं| <<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

शिव (आतंरिक सुरक्षा शक्ति त्रिलोचन:त्रिनेत्र:त्रयम्बक:विवेक:महाशिव:राम) ही जिससे रूठ गए हो संसार में उससे कौन प्रेम करेगा और सम्मान देगा उसके साथ धोखा और तिरस्कार ही होगा (सती(पार्वती) और पिता दक्षप्रजापति प्रकरण जिसमे शिव को नाराजकर सती अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने बिना स्वयं और शिव को आमंत्रण पाए शिव की सहमति के बिना अपने मायका जा पहुंची और शिव का तिरस्कार देख यज्ञ कुंड के विलीन हो गयी)|

शिव (आतंरिक सुरक्षा शक्ति त्रिलोचन:त्रिनेत्र:त्रयम्बक:विवेक:महाशिव:राम) ही जिससे रूठ गए हो संसार में उससे कौन प्रेम करेगा और सम्मान देगा उसके साथ धोखा और तिरस्कार ही होगा (सती(पार्वती) और पिता दक्षप्रजापति प्रकरण जिसमे शिव को नाराजकर सती अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने बिना स्वयं और शिव को आमंत्रण पाए शिव की सहमति के बिना अपने मायका जा पहुंची और शिव का तिरस्कार देख यज्ञ कुंड के विलीन हो गयी)|<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

वास्तविक विश्वमहाशक्ति का दूसरा सन्देश: तथाकथित विश्वमहाशक्ति की मूर्खता के कारन उपजे विषाद और क्रोध के फलस्वरूप जिसके 36 घंटे के अनवरत आंसुओं के शैलाब में यह पूरा संसार वह जाता उसे पहले 2001 में परमपिता परमेश्वर और उसके बाद 2003 में परमपिता परमेश्वर और परमगुरु परमपिता परमेश्वर के माध्यम से उसी आंशुओं से उपजे शैलाब के जल का प्रवाह रुकवाया गया था। तो तथाकथित विश्वमहाशक्ति इससे अपनी अवकात का पता हो जाना चाहिए? इस वास्तविक विश्वमशक्ति को न कुछ करना पड़ता है और न कोई कमाण्ड देना पड़ता है और न कोई सेंसर किशी युग में बना जो इसे कैप्चर कर सकता है।

वास्तविक विश्वमहाशक्ति का दूसरा सन्देश: तथाकथित विश्वमहाशक्ति की मूर्खता के कारन उपजे विषाद और क्रोध के फलस्वरूप जिसके 36 घंटे के अनवरत आंसुओं के शैलाब में यह पूरा संसार वह जाता उसे पहले 2001 में परमपिता परमेश्वर और उसके बाद 2003 में परमपिता परमेश्वर और परमगुरु परमपिता परमेश्वर के माध्यम से उसी आंशुओं से उपजे शैलाब के जल का प्रवाह रुकवाया गया था। तो तथाकथित विश्वमहाशक्ति इससे अपनी अवकात का पता हो जाना चाहिए? इस वास्तविक विश्वमशक्ति को न कुछ करना पड़ता है और न कोई कमाण्ड देना पड़ता है और न कोई सेंसर किशी युग में बना जो इसे कैप्चर कर सकता है।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

वास्तविक महाशक्ति का सन्देश: तो तथाकथित महाशक्ति के दबाब में कार्य करना और यह किशी जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ का किशी को कनिष्ठ बनाने का धंधा यह प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज और यह हिंदुस्तान अब से बंद कर दे अन्यथा यह संसार पुनः 14 वर्ष पूर्व की स्थिति में पुनः आने को तैयार रहे? व्यहारिकता में रहेंगे तो व्यहारिकता अपनाई जाएगी तथाकथित महाशक्ति के साथ भी और उसकी चाटुकारिता करने वालों और पाँव पूजने वालों के साथ भी पर अव्यवहारिकता करोगे और किशी जबाने में मेरे पर ही आश्रित और परिजीवी रहे लोगों को भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ के रूप में खड़ा करोगे तो उचित यही नहीं है। हिंदुस्तान के अधिकाँश नेताजन जो ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को किशी का कनिष्ठ बनाने का यह कार्य स्वयं किये हैं या इसके स्रोत रहे है अपने जीवन के अंतिम क्षण इसका अंजाम ईस्वर द्वारा प्रदान दंड के माध्यम से भुगत कर गए हैं अथवा भुगत रहे हैं ? >>>>>>>>>इस दुनिया में जिसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तक दृष्टिगत/भौतिक रूप में उपस्थित नहीं हो इस सृष्टि के इतिहास में और जो सहस्राब्दी परिवर्तन के संक्रमण काल में सभी शोषक देशों द्वारा बनाई भविष्य काल की अनीतियों से प्रभावित हो उपजी विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो इसी केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवमं महासागर अध्धययन केंद्र में आये और गए सिद्धगत जनों का भी तो अब उसी का का वरिष्ठ और कनिष्ठ प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय वाले क्या तय करेंगे उसके सहकर्मियों के अंदर ही जब अपने क्षेत्र का कोई सिद्धगत उम्रगत वरिष्ठ भी उसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता?>>>>>>>तो तथाकथित महाशक्ति के दबाब में कार्य करना और यह किशी जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ का किशी को कनिष्ठ बनाने का धंधा यह प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज और यह हिंदुस्तान अब से बंद कर दे अन्यथा यह संसार पुनः 14 वर्ष पूर्व की स्थिति में पुनः आने को तैयार रहे? व्यहारिकता में रहेंगे तो व्यहारिकता अपनाई जाएगी तथाकथित महाशक्ति के साथ भी और उसकी चाटुकारिता करने वालों और पाँव पूजने वालों के साथ भी पर अव्यवहारिकता करोगे और किशी जबाने में मेरे पर ही आश्रित और परिजीवी रहे लोगों को भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ के रूप में खड़ा करोगे तो उचित यही नहीं है। हिंदुस्तान के अधिकाँश नेताजन जो ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को किशी का कनिष्ठ बनाने का यह कार्य स्वयं किये हैं या इसके स्रोत रहे है अपने जीवन के अंतिम क्षण इसका अंजाम ईस्वर द्वारा प्रदान दंड के माध्यम से भुगत कर गए हैं अथवा भुगत रहे हैं?

वास्तविक महाशक्ति का सन्देश: तो तथाकथित महाशक्ति के दबाब में कार्य करना और यह किशी जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ का किशी को कनिष्ठ बनाने का धंधा यह प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज और यह हिंदुस्तान अब से बंद कर दे अन्यथा यह संसार पुनः 14 वर्ष पूर्व की स्थिति में पुनः आने को तैयार रहे? व्यहारिकता में रहेंगे तो व्यहारिकता अपनाई जाएगी तथाकथित महाशक्ति के साथ भी और उसकी चाटुकारिता करने वालों और पाँव पूजने वालों के साथ भी पर अव्यवहारिकता करोगे और किशी जबाने में मेरे पर ही आश्रित और परिजीवी रहे लोगों को भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ के रूप में खड़ा करोगे तो उचित यही नहीं है। हिंदुस्तान के अधिकाँश नेताजन जो ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को किशी का कनिष्ठ बनाने का यह कार्य स्वयं किये हैं या इसके स्रोत रहे है अपने जीवन के अंतिम क्षण इसका अंजाम ईस्वर द्वारा प्रदान दंड के माध्यम से भुगत कर गए हैं अथवा भुगत रहे हैं ? >>>>>>>>>इस दुनिया में जिसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ तक दृष्टिगत/भौतिक रूप में उपस्थित नहीं हो इस सृष्टि के इतिहास में और जो सहस्राब्दी परिवर्तन के संक्रमण काल में सभी शोषक देशों द्वारा बनाई भविष्य काल की अनीतियों से प्रभावित हो उपजी विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो इसी केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवमं महासागर अध्धययन केंद्र में आये और गए सिद्धगत जनों का भी तो अब उसी का का वरिष्ठ और कनिष्ठ प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय वाले क्या तय करेंगे उसके सहकर्मियों के अंदर ही जब अपने क्षेत्र का कोई सिद्धगत उम्रगत वरिष्ठ भी उसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता?>>>>>>>तो तथाकथित महाशक्ति के दबाब में कार्य करना और यह किशी जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ का किशी को कनिष्ठ बनाने का धंधा यह प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज और यह हिंदुस्तान अब से बंद कर दे अन्यथा यह संसार पुनः 14 वर्ष पूर्व की स्थिति में पुनः आने को तैयार रहे? व्यहारिकता में रहेंगे तो व्यहारिकता अपनाई जाएगी तथाकथित महाशक्ति के साथ भी और उसकी चाटुकारिता करने वालों और पाँव पूजने वालों के साथ भी पर अव्यवहारिकता करोगे और किशी जबाने में मेरे पर ही आश्रित और परिजीवी रहे लोगों को भी मेरा ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ के रूप में खड़ा करोगे तो उचित यही नहीं है। हिंदुस्तान के अधिकाँश नेताजन जो ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ को किशी का कनिष्ठ बनाने का यह कार्य स्वयं किये हैं या इसके स्रोत रहे है अपने जीवन के अंतिम क्षण इसका अंजाम ईस्वर द्वारा प्रदान दंड के माध्यम से भुगत कर गए हैं अथवा भुगत रहे हैं?<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Thursday, August 17, 2017

दयालु मनुष्य, अभिमानशून्य व्यक्ति, परोपकारी और जितेंद्रीय ये चार पवित्र स्तंभ हैं, जो इस पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। ये चारों गुण एक साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र में समाहित होकर पृथ्वी की धारण शक्ति बन गए हैं। राम के इन्हीं वैयक्तिक सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करते रहना मेरा प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा- एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र अधिकतम व्यक्तियों के सामने लाकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्‍गुणों से युक्त आदर्श चरित्र को अनुकरण करने के लिए प्रेरित करना मेरा उद्देश्य है।

दयालु मनुष्य, अभिमानशून्य व्यक्ति, परोपकारी और जितेंद्रीय ये चार पवित्र स्तंभ हैं, जो इस पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। ये चारों गुण एक साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र में समाहित होकर पृथ्वी की धारण शक्ति बन गए हैं। राम के इन्हीं वैयक्तिक सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करते रहना मेरा प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा- एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र अधिकतम व्यक्तियों के सामने लाकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्‍गुणों से युक्त आदर्श चरित्र को अनुकरण करने के लिए प्रेरित करना मेरा उद्देश्य है।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय 10. विभूतियोग: कुछ प्रमुख श्लोक जो स्वयं परमब्रह्म श्रीकृष्ण का परिचय अदिति (कश्यप ऋषि की पत्नी) के पुत्र और इस प्रकार वृष्णि वंश के वंसज (वाशुदेव देवकी पुत्र )के रूप में करवाते हैं और उनके अन्य अन्य प्रमुख स्वरुप :

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय 10. विभूतियोग: कुछ प्रमुख श्लोक जो स्वयं परमब्रह्म श्रीकृष्ण का परिचय अदिति (कश्यप ऋषि की पत्नी) के पुत्र और इस प्रकार वृष्णि वंश के वंसज (वाशुदेव देवकी पुत्र )के रूप में करवाते हैं और उनके अन्य अन्य प्रमुख स्वरुप :
महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा ।
मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः ॥
भावार्थ : सात महर्षिजन, चार उनसे भी पूर्व में होने वाले सनकादि तथा स्वायम्भुव आदि चौदह मनु- ये मुझमें भाव वाले सब-के-सब मेरे संकल्प से उत्पन्न हुए हैं, जिनकी संसार में यह संपूर्ण प्रजा है॥6॥
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः ।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥
भावार्थ : हे अर्जुन! मैं सब भूतों के हृदय में स्थित सबका आत्मा हूँ तथा संपूर्ण भूतों का आदि, मध्य और अंत भी मैं ही हूँ॥20॥
आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान्‌ ।
मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ॥
भावार्थ : मैं अदिति के बारह पुत्रों में विष्णु और ज्योतियों में किरणों वाला सूर्य हूँ तथा मैं उनचास वायुदेवताओं का तेज और नक्षत्रों का अधिपति चंद्रमा हूँ॥21॥
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः ।
इंद्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ॥
भावार्थ : मैं वेदों में सामवेद हूँ, देवों में इंद्र हूँ, इंद्रियों में मन हूँ और भूत प्राणियों की चेतना अर्थात्‌ जीवन-शक्ति हूँ॥22॥
रुद्राणां शङ्‍करश्चास्मि वित्तेशो यक्षरक्षसाम्‌ ।
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम्‌ ॥
भावार्थ : मैं एकादश रुद्रों में शंकर हूँ और यक्ष तथा राक्षसों में धन का स्वामी कुबेर हूँ। मैं आठ वसुओं में अग्नि हूँ और शिखरवाले पर्वतों में सुमेरु पर्वत हूँ॥23॥
पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम्‌ ।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥
भावार्थ : पुरोहितों में मुखिया बृहस्पति मुझको जान। हे पार्थ! मैं सेनापतियों में स्कंद और जलाशयों में समुद्र हूँ॥24॥
महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम्‌ ।
यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः ॥
भावार्थ : मैं महर्षियों में भृगु और शब्दों में एक अक्षर अर्थात्‌‌ ओंकार हूँ। सब प्रकार के यज्ञों में जपयज्ञ और स्थिर रहने वालों में हिमालय पहाड़ हूँ॥25॥
अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः ।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ॥
भावार्थ : मैं सब वृक्षों में पीपल का वृक्ष, देवर्षियों में नारद मुनि, गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ॥26॥
सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन ।
अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम्‌ ॥
भावार्थ : हे अर्जुन! सृष्टियों का आदि और अंत तथा मध्य भी मैं ही हूँ। मैं विद्याओं में अध्यात्मविद्या अर्थात्‌ ब्रह्मविद्या और परस्पर विवाद करने वालों का तत्व-निर्णय के लिए किया जाने वाला वाद हूँ॥32॥
अक्षराणामकारोऽस्मि द्वंद्वः सामासिकस्य च ।
अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः ॥
भावार्थ : मैं अक्षरों में अकार हूँ और समासों में द्वंद्व नामक समास हूँ। अक्षयकाल अर्थात्‌ काल का भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला, विराट्स्वरूप, सबका धारण-पोषण करने वाला भी मैं ही हूँ॥33॥
वृष्णीनां वासुदेवोऽस्मि पाण्डवानां धनञ्जयः ।
मुनीनामप्यहं व्यासः कवीनामुशना कविः ॥
भावार्थ : वृष्णिवंशियों में (यादवों के अंतर्गत एक वृष्णि वंश भी था) वासुदेव अर्थात्‌ मैं स्वयं तेरा सखा, पाण्डवों में धनञ्जय अर्थात्‌ तू, मुनियों में वेदव्यास और कवियों में शुक्राचार्य कवि भी मैं ही हूँ॥37॥<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय 10. विभूतियोग: प्रमुख श्लोक-शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ| पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्‌ । झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ भावार्थ : मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ॥31॥

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय 10. विभूतियोग: प्रमुख श्लोक-शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ|
पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्‌ ।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥
भावार्थ : मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ॥31॥<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय तेरह:क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग: पांचवा श्लोक-किशी व्यक्ति या समाज के जीवन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक---"महाभूतान्यहङ्‍कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च । इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥ भावार्थ : पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और मूल प्रकृति भी तथा दस इन्द्रियाँ, एक मन और पाँच इन्द्रियों के विषय अर्थात शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध॥5॥ शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध इन पाँच इन्द्रियों के विषय से देह रुपी संसार और मानवता रुपी संसार प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। शब्द: वाणी या आवाज का अनुकूल या प्रतिकूल होना; स्पर्श: मधुर या कटु या खुरदरा; रूप: मोहक या विदूसक या भयंकर; रस: मीठा या कडवा या पिपासक; गंध: आकर्षक सुगंध या दुर्गन्ध, और इस प्रकार शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध के अन्य भी प्रकार हो सकते हैं जो किशी व्यक्ति या समाज के जीवन को प्रभावित करते रहते हैं।

श्रीमद्भागवत गीता का अध्याय तेरह:क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग: पांचवा श्लोक-किशी व्यक्ति या समाज के जीवन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक---"महाभूतान्यहङ्‍कारो बुद्धिरव्यक्तमेव च । इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥ भावार्थ : पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि और मूल प्रकृति भी तथा दस इन्द्रियाँ, एक मन और पाँच इन्द्रियों के विषय अर्थात शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध॥5॥ शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध इन पाँच इन्द्रियों के विषय से देह रुपी संसार और मानवता रुपी संसार प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। शब्द: वाणी या आवाज का अनुकूल या प्रतिकूल होना; स्पर्श: मधुर या कटु या खुरदरा; रूप: मोहक या विदूसक या भयंकर; रस: मीठा या कडवा या पिपासक; गंध: आकर्षक सुगंध या दुर्गन्ध, और इस प्रकार शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध के अन्य भी प्रकार हो सकते हैं जो किशी व्यक्ति या समाज के जीवन को प्रभावित करते रहते हैं।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

अगर सनातन हिन्दू धर्म से अलग हट कुछ नए मार्ग पर चलने वाले दूसरे नए धर्मों का भारत में विस्तार हो तो कम से कम दूसरे देशों में जहां पर इस नए धर्मों का उदय हुआ है या इनका विस्तार है आज तो वहा सनातन हिन्दू धर्म का भी अस्तित्व क्रमसः और अधिक मजबूत हो तभी मानवता में संतुलन स्थापित होगा और मानवता प्रफुल्लित होगी।

अगर सनातन हिन्दू धर्म से अलग हट कुछ नए मार्ग पर चलने वाले दूसरे नए धर्मों का भारत में विस्तार हो तो कम से कम दूसरे देशों में जहां पर इस नए धर्मों का उदय हुआ है या इनका विस्तार है आज तो वहा सनातन हिन्दू धर्म का भी अस्तित्व क्रमसः और अधिक मजबूत हो तभी मानवता में संतुलन स्थापित होगा और मानवता प्रफुल्लित होगी।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

हकीकत की दुनिया में जीने वाले के सपने नहीं होते ऐसा किसने कहा है? हकीकत की दुनिया में जीने वाले के भी सपने होते हैं पर उसका ह्रदय विशाल होना चाहिए। यह हकीकत की दुनिया में देखे जाने वाला स्वप्न ही तो था की सम्पूर्ण कायनात/मानवता इसी प्रयागराज में जन्म लेने वाले सात ब्रह्मर्षियों/सप्तर्षियों की संतान सिद्ध कर दी गयी इन मात्र 14(2001-2015) वर्षों में मतलब जिन/जिस वास्तविक ब्राह्मणों/ब्राह्मण का सबसे ज्यादा विरोध हुआ गैर ब्राह्मण समाज की पूर्ण स्थापना के स्वपन को साकार करने के लिए तो वह स्वप्न ही असत्य निकला और इसके विपरीत तो स्वयं एक ब्राह्मण स्वप्नद्रस्ता के स्वप्न के अनुकूल श्रीराम, श्रीकृष्ण समेत समस्त मानवता उसी ब्राह्मण समुदाय की संतान सिद्ध हो गयी।

हकीकत की दुनिया में जीने वाले के सपने नहीं होते ऐसा किसने कहा है? हकीकत की दुनिया में जीने वाले के भी सपने होते हैं पर उसका ह्रदय विशाल होना चाहिए। यह हकीकत की दुनिया में देखे जाने वाला स्वप्न ही तो था की सम्पूर्ण कायनात/मानवता इसी प्रयागराज में जन्म लेने वाले सात ब्रह्मर्षियों/सप्तर्षियों की संतान सिद्ध कर दी गयी इन मात्र 14(2001-2015) वर्षों में मतलब जिन/जिस वास्तविक ब्राह्मणों/ब्राह्मण का सबसे ज्यादा विरोध हुआ गैर ब्राह्मण समाज की पूर्ण स्थापना के स्वपन को साकार करने के लिए तो वह स्वप्न ही असत्य निकला और इसके विपरीत तो स्वयं एक ब्राह्मण स्वप्नद्रस्ता के स्वप्न के अनुकूल श्रीराम, श्रीकृष्ण समेत समस्त मानवता उसी ब्राह्मण समुदाय की संतान सिद्ध हो गयी।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

शिव पुराण में महादेव शिव ने कहा है की राम मेरे ईश्वर पर कृष्ण में मुझमे कोई अन्तर नहीं केवल परिश्थितियाँ समान होनी चाहिए| सम्पूर्ण मानवता को सप्रेम नमस्कार शुभ श्रीकृष्णजन्माष्टमी| राधेकृष्ण/सीताराम/रामजानकी/श्रीराम|.

शिव पुराण में महादेव शिव ने कहा है की राम मेरे ईश्वर पर कृष्ण में मुझमे कोई अन्तर नहीं केवल परिश्थितियाँ समान होनी चाहिए| सम्पूर्ण मानवता को सप्रेम नमस्कार शुभ श्रीकृष्णजन्माष्टमी| राधेकृष्ण/सीताराम/रामजानकी/श्रीराम|.<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|


अगर उच्च आदर्शों पर चलने वाले समाज का निर्माण हम नहीं कर सके सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका से हुए विश्वव्यापक परिवर्तन के बाद भी जिसमे की जाति/धर्म/पंथ/मतावलम्बन में कोई भेद नहीं रह जाता| अतः ऐसे परिदृश्य में वर्तमान विश्वव्यापक समाज के अन्दर मै चाहता हूँ की अगर जाति एक सांस्कारिक जीवन की सच्चाई जब आज भी साबित हो ही रही है तो ऐसे में जातिभेद मिटे पर जाति नहीं, किन्तु कुछ लोग ऐसे हैं समाज में जो जातिभेद नहीं मिटाना चाहते केवल कुछ जातियों और उसके संगत उपजातियों (जाति से अलग किन्तु उसके नश्ल के पूरक) की नश्ल मिटाकर उस जाति समूह को मिटाना चाहते है साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल द्वारा जो की किसी भी अवस्था में संभव नहीं है:---------भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर अंतर्जातीय/अंतर्धार्मिक विवाह हेतु ही जाति कोई सीमा नहीं है संभ्रांत लोगों के मान-अपमान के उद्योग/खेल को जारी रखने हेतु इसके सिवा शिक्षा से लेकर सेवा, राजनीति सहित समाज के हर एक क्षेत्र में हर स्तर और हर जगह जाति/धर्म की सीमा होती है तो ऐसे में इस विषय पर तीन-चार दशक से अधिकाधिक मात्रा में अंतर्जातीय/अंतर्धार्मिक विवाह करने वाली संभ्रांत समाज की उच्चतम शिक्षा व् सामाजिकता प्राप्त की हुई उच्चतम प्रेम आदर्शों वाली देविजनो का क्या कहना है? ----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।

अगर उच्च आदर्शों पर चलने वाले समाज का निर्माण हम नहीं कर सके सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका से हुए विश्वव्यापक परिवर्तन के बाद भी जिसमे की जाति/धर्म/पंथ/मतावलम्बन में कोई भेद नहीं रह जाता| अतः ऐसे परिदृश्य में वर्तमान विश्वव्यापक समाज के अन्दर मै चाहता हूँ की अगर जाति एक सांस्कारिक जीवन की सच्चाई जब आज भी साबित हो ही रही है तो ऐसे में जातिभेद मिटे पर जाति नहीं, किन्तु कुछ लोग ऐसे हैं समाज में जो जातिभेद नहीं मिटाना चाहते केवल कुछ जातियों और उसके संगत उपजातियों (जाति से अलग किन्तु उसके नश्ल के पूरक) की नश्ल मिटाकर उस जाति समूह को मिटाना चाहते है साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल द्वारा जो की किसी भी अवस्था में संभव नहीं है:---------भारत एक ऐसा देश है जहाँ पर अंतर्जातीय/अंतर्धार्मिक विवाह हेतु ही जाति कोई सीमा नहीं है संभ्रांत लोगों के मान-अपमान के उद्योग/खेल को जारी रखने हेतु इसके सिवा शिक्षा से लेकर सेवा, राजनीति सहित समाज के हर एक क्षेत्र में हर स्तर और हर जगह जाति/धर्म की सीमा होती है तो ऐसे में इस विषय पर तीन-चार दशक से अधिकाधिक मात्रा में अंतर्जातीय/अंतर्धार्मिक विवाह करने वाली संभ्रांत समाज की उच्चतम शिक्षा व् सामाजिकता प्राप्त की हुई उच्चतम प्रेम आदर्शों वाली देविजनो का क्या कहना है? ----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Wednesday, August 16, 2017

जिसने एक सामान्यजन से लेकर मानवता के इतिहास में उद्भावित हर विभूतियों जिसमे अबतक हुए मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (राम/कृष्ण) तक की अवश्था का भी आचरण संयोगी/समहृदयी जन के प्रतिकूल आचरण के बाद भी सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका और उसके संक्रमण काल और उसके उत्तर काल में अपने को इसी प्रयागराज में केंद्रित करते हुए किया है उसकी कलम से:------------राधा वह है जो अपने प्रिये के अभीस्त लक्ष्य के प्राप्ति में बाधा न बनने हेतु भौतिक रूप से साथ तो छोड़ दे पर आध्यात्मिक और मानशिक रूप से कृष्ण का ही होकर इस प्रकार रहे ही राधा और कृष्ण में कोई भेद न रह जाय या दोनों इस तरह से एक दूसरे में समाहित हो की उनमे कोई अन्तर ही न रह जाय? और अपने पिता बृषभान के दबाव वस् शादी करे भी तो प्रिये कृष्ण के समान सामाजिक परिश्थितियों वाले (यशोदा के ही रिश्तेदार या अन्य ग्वाले "रायन" से ) से जिससे की प्रिये कृष्ण पर कोई अन्य समाज छीटा काशी भी न कर सके। ऐसी राधा और कृष्ण भारतीय समाज में बहुत से उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने वालों में से हैं। याद रहे इस अवस्था तक कृष्ण स्वयं किशी के यहाँ पनाह लिए हुए थे और पाले पोसे गए थे पर उनके माता-पिता वाशुदेव और देवकी सामान्य जन भी न हो कर एक वंदी थे जिनका सब कुछ कंश के कब्जे में था और उन्ही को छुडाने हेतु मथुरा जाने पर राधा का विवाह रायन से कर दिया गया। कृष्ण कंश वधकरने में सफल भी हुए और फिर नन्द गाँव छोड़ कर पिता के साथ ही चले गए| अतः कृष्ण भी इस अवस्था तक बहुत धनी या भाग्यशाली नहीं कहे जा सकते जिनके जीवन पर भी संकट के बादल बचपन से ही थे और एक-एक कर वे उसे समाप्त करते रह गए इस अवस्था तक।-------------और सीता वह हैं जो अत्यंत पतिव्रता है और पति के साथ जंगल भी जाती हैं और हरण हो जाने पर भी पति के सिवा किशी अन्य को स्वप्न में भी नहीं सोच सकती हैं इसके लिए अग्नि परिक्षा भी देकर सफल निकलती हैं विश्व के सर्व शक्तिमान और सर्व सम्म्पन्न रावण से शादी करने की बात तो दूर। और प्रजापालन में पति के नीतिगत निर्णय और आदर्शो की रक्षा के तहत अपना वनगमन/विछोह/पृथकता की स्वीकारोक्ति भी करे स्वयं प्रामाणिक रूप से सत्य साबित करते हुए भी| ----------------पार्वती की पतिव्रता के बारे में तो कहना ही क्या जो पति का अपमान देख स्वयं को अग्नी में अर्पित कर देती हैं पिता के ही यज्ञ में और पिता को छोड़ने की बात ही क्या और यही स्थित लक्ष्मी और सरस्वती की है क्रमशः विष्णु और ब्रह्मा के साथ। इसी क्रम में सती दुर्वाशा ऋषि/कृष्णात्रेय की माँ सती-ईस्ट, अनुसूइया का क्या कहना है जो तीनो देवियों (लक्ष्मी। सरस्वती और पार्वती ) से भी एक कदम आगे निकली पतिव्रता में। मै स्वयं इस बात का प्रमाण हूँ की आज भी इस तरह के पुरुष हैं भारतवर्ष में पर देवियों की कमी हो रही हैं हर क्षेत्र में एक सामान्य किशान से लेकर एक बहुत बड़े ऋषि महर्षि, श्रेष्ठतम उद्यमी और सेनाध्यक्ष तक के लिए इन राधा, सीता, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती और अनुसूइया जैसे जीवन संगिनियों का आचरण कर पाने के लिए। ---किशी भी स्त्री या पुरुष की भौतिकवादी मंशिकता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है वरन हमारे अंदर दूर्द्रिस्ती की कमी है की हम नैतिकता को भूले जा रहे हैं और कर्त्तव्य परायणता से दूर हट रहे हैं की कोई दूसरा हमारी कमियों पर से पर्दा न उठाये, अतः हम किशी को पागल सिध्ध कर मलाईदार स्थान पर बने रहें और क़ानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर सत्य से बचते रहें पर यह कुछ ही समय तक संभव है। क्योंकि भारत के संविधान के ऊपर भी एक संविधान है और वह है "सत्यमेव जयते का संविधान" और जो व्यक्ति इस पर विशवास करता है उसे दुनिया की कोई शक्ति जमींदोज नहीं कर सकती हैं और इसीलिए भारत भी जमींदोज नहीं किया जा ।----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।

जिसने एक सामान्यजन से लेकर मानवता के इतिहास में उद्भावित हर विभूतियों जिसमे अबतक हुए मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (राम/कृष्ण) तक की अवश्था का भी आचरण संयोगी/समहृदयी जन के प्रतिकूल आचरण के बाद भी सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका और उसके संक्रमण काल और उसके उत्तर काल में अपने को इसी प्रयागराज में केंद्रित करते हुए किया है उसकी कलम से:------------राधा वह है जो अपने प्रिये के अभीस्त लक्ष्य के प्राप्ति में बाधा न बनने हेतु भौतिक रूप से साथ तो छोड़ दे पर आध्यात्मिक और मानशिक रूप से कृष्ण का ही होकर इस प्रकार रहे ही राधा और कृष्ण में कोई भेद न रह जाय या दोनों इस तरह से एक दूसरे में समाहित हो की उनमे कोई अन्तर ही न रह जाय? और अपने पिता बृषभान के दबाव वस् शादी करे भी तो प्रिये कृष्ण के समान सामाजिक परिश्थितियों वाले (यशोदा के ही रिश्तेदार या अन्य ग्वाले "रायन" से ) से जिससे की प्रिये कृष्ण पर कोई अन्य समाज छीटा काशी भी न कर सके। ऐसी राधा और कृष्ण भारतीय समाज में बहुत से उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने वालों में से हैं। याद रहे इस अवस्था तक कृष्ण स्वयं किशी के यहाँ पनाह लिए हुए थे और पाले पोसे गए थे पर उनके माता-पिता वाशुदेव और देवकी सामान्य जन भी न हो कर एक वंदी थे जिनका सब कुछ कंश के कब्जे में था और उन्ही को छुडाने हेतु मथुरा जाने पर राधा का विवाह रायन से कर दिया गया। कृष्ण कंश वधकरने में सफल भी हुए और फिर नन्द गाँव छोड़ कर पिता के साथ ही चले गए| अतः कृष्ण भी इस अवस्था तक बहुत धनी या भाग्यशाली नहीं कहे जा सकते जिनके जीवन पर भी संकट के बादल बचपन से ही थे और एक-एक कर वे उसे समाप्त करते रह गए इस अवस्था तक।-------------और सीता वह हैं जो अत्यंत पतिव्रता है और पति के साथ जंगल भी जाती हैं और हरण हो जाने पर भी पति के सिवा किशी अन्य को स्वप्न में भी नहीं सोच सकती हैं इसके लिए अग्नि परिक्षा भी देकर सफल निकलती हैं विश्व के सर्व शक्तिमान और सर्व सम्म्पन्न रावण से शादी करने की बात तो दूर। और प्रजापालन में पति के नीतिगत निर्णय और आदर्शो की रक्षा के तहत अपना वनगमन/विछोह/पृथकता की स्वीकारोक्ति भी करे स्वयं प्रामाणिक रूप से सत्य साबित करते हुए भी| ----------------पार्वती की पतिव्रता के बारे में तो कहना ही क्या जो पति का अपमान देख स्वयं को अग्नी में अर्पित कर देती हैं पिता के ही यज्ञ में और पिता को छोड़ने की बात ही क्या और यही स्थित लक्ष्मी और सरस्वती की है क्रमशः विष्णु और ब्रह्मा के साथ। इसी क्रम में सती दुर्वाशा ऋषि/कृष्णात्रेय की माँ सती-ईस्ट, अनुसूइया का क्या कहना है जो तीनो देवियों (लक्ष्मी। सरस्वती और पार्वती ) से भी एक कदम आगे निकली पतिव्रता में।
मै स्वयं इस बात का प्रमाण हूँ की आज भी इस तरह के पुरुष हैं भारतवर्ष में पर देवियों की कमी हो रही हैं हर क्षेत्र में एक सामान्य किशान से लेकर एक बहुत बड़े ऋषि महर्षि, श्रेष्ठतम उद्यमी और सेनाध्यक्ष तक के लिए इन राधा, सीता, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती और अनुसूइया जैसे जीवन संगिनियों का आचरण कर पाने के लिए। ---किशी भी स्त्री या पुरुष की भौतिकवादी मंशिकता ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है वरन हमारे अंदर दूर्द्रिस्ती की कमी है की हम नैतिकता को भूले जा रहे हैं और कर्त्तव्य परायणता से दूर हट रहे हैं की कोई दूसरा हमारी कमियों पर से पर्दा न उठाये, अतः हम किशी को पागल सिध्ध कर मलाईदार स्थान पर बने रहें और क़ानून की कमजोरियों का फायदा उठाकर सत्य से बचते रहें पर यह कुछ ही समय तक संभव है। क्योंकि भारत के संविधान के ऊपर भी एक संविधान है और वह है "सत्यमेव जयते का संविधान" और जो व्यक्ति इस पर विशवास करता है उसे दुनिया की कोई शक्ति जमींदोज नहीं कर सकती हैं और इसीलिए भारत भी जमींदोज नहीं किया जा ।----जय हिन्द, जय, भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

हमें विदेशिओं का पोषक/तन्त्र/संशाधन बनने या बनाने के लिए दशकों से जारी आतंरिक नश्लीय संघर्ष के जल प्रवाह को भारत में पूर्णतः बन्द किया जाय जिसकी ओट में अनेकोनेक लोग अपना स्वार्थ्य सिद्ध करते हुए लोगों के मान-अपमान का अपना व्यापार जारी रखें हैं|-------------क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|

हमें विदेशिओं का पोषक/तन्त्र/संशाधन बनने या बनाने के लिए दशकों से जारी आतंरिक नश्लीय संघर्ष के जल प्रवाह को भारत में पूर्णतः बन्द किया जाय जिसकी ओट में अनेकोनेक लोग अपना स्वार्थ्य सिद्ध करते हुए लोगों के मान-अपमान का अपना व्यापार जारी रखें हैं|-------------क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|<<<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|

क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|>>>.जो स्वेक्षा से या आप के साम-दाम-दण्ड-भेद और कल-बल-छल से अपनी नश्ल को नहीं बदलना चाहता है और उसके लिए बड़ा से बड़ा त्याग और जोखिम उठाने के लिए तैयार हो उसकी नश्ल आप बलात नहीं बदल सकते हैं और उसके इस नश्ल रक्षा के प्रयास को आप नश्लवाद भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि वह आप के ऊपर कोई नश्लीय टिप्पणी या वार नहीं कर रहा होता है| ऐसे में यदि आप उसकी नश्ल को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बलात बदलने के लिए प्रयासरत रहते भी हैं तो आप को परोक्ष और प्रत्यक्ष अनिष्ट के लिए तैयार रहना चाहिए|<<<<<<<क्योंकि आत्मरक्षा में नैसर्गिक रूप से सब कुछ जायज है और ऐसा व्यक्ति और समाज अपने नश्ल की रक्षा हेतु किसी हद तक जा सकता है|<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Saturday, August 12, 2017

पुनः सनातन धर्मी संसार के युग की आहट

उस युग का इन्तजार है जब हम सब समस्त मानवता के सभी धर्मावलम्बी अपनी वास्तविकता से परिचित हो स्वतः सनातन धर्म के माध्यम से अपना जीवन सन्चालित करेंगे|

इस संसार से सभी नकाब/पर्दा उठावा तो दूं पर मुझे यह संदेह है इससे सभी शूर्य निस्तेज न हो जायें जो पहले से ही ओज विहीन हो गए है केवल ओस से प्रभावित हो। अतः पर्दा न उठाओ परदे में रहने दो। यह लाज का आवरण हटा तो फिर क्या होगा यह मेरे जैसे लोगों को ही पता है या बहुत अनुभवियों को पता है। अतः कुछ तो सरम की जाय जादा टीका टिप्पणी कम से कम अब बंद हो जाय अपनी नाकामियों को छुपाने के। अंत में मई यही कहूंगा की इस वैश्विक संसार में हिन्दू और उसके सहयोगी, मुस्लिम और उसके सहयोगी तथा इसाइयत और उसके सहयोगी संसार संचालन की आवश्यकता है और परस्पर अनंयोआश्रित है एक दूसरे पर। अतः एक दूसरे का सम्मान करना सीखें।

इस संसार से सभी नकाब/पर्दा उठावा तो दूं पर मुझे यह संदेह है इससे सभी शूर्य निस्तेज न हो जायें जो पहले से ही ओज विहीन हो गए है केवल ओस से प्रभावित हो। अतः पर्दा न उठाओ परदे में रहने दो। यह लाज का आवरण हटा तो फिर क्या होगा यह मेरे जैसे लोगों को ही पता है या बहुत अनुभवियों को पता है। अतः कुछ तो सरम की जाय जादा टीका टिप्पणी कम से कम अब बंद हो जाय अपनी नाकामियों को छुपाने के। अंत में मई यही कहूंगा की इस वैश्विक संसार में हिन्दू और उसके सहयोगी, मुस्लिम और उसके सहयोगी तथा इसाइयत और उसके सहयोगी संसार संचालन की आवश्यकता है और परस्पर अनंयोआश्रित है एक दूसरे पर। अतः एक दूसरे का सम्मान करना सीखें।<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं|

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं| <<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Friday, August 11, 2017

कृष्ण

कृष्ण=शरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरूप मे ब्रह्मा+विष्णु+महेश)<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

राम

ब्रह्मा और उनका विश्वव्यापक विशालकाय मायामयी संसार/मानवता अगर अस्तित्व मे हैं तो यह तभी सम्भव है जब विष्णु अस्तित्व मे हो और विष्णु अस्तित्व मे है जब शिव अस्तित्व मे है और शिव अस्तित्व मे तभी है जब महाशिव(राम)/विवेक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र/त्रयम्बक/परमब्रह्म(ब्रह्म= एकल स्वरूप मे ब्रह्मा+विष्णु+महेश) अस्तित्व मे होन्गे|<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|  

Thursday, August 10, 2017

ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के बेटे-बेटियाँ इस संसार में किसको अच्छे नहीं लगते है और आप इनको अपने घर में पालते हुए भी कहते थे की तिलक, तराजू और तलवार इनको मारो जूतें चार मतलब आप इस संसार को ब्रह्मा, विष्णु और महेश विहीन कर सम्पूर्ण ब्रह्मांड में परमब्रह्म/ब्रह्म में विलीन करना चाह रहे तो क्या यह संभव था? मायामयी संसार का चमत्कार ही आप के जीवन को रोचक बनाता है तो वह चमत्कार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ही कर रहे हैं जगत जननी सीता की छाया रूपी सृष्टि जिसका सञ्चालन ही ब्रह्मा का वरदान है उसको निभाने के लिए तो जिस ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के बेटे-बेटियों को पाल रहे है उनका ठीक से पालन करें इसको शिवा कोई और चारा नहीं है संसार को रोचक बनाने का?

ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के बेटे-बेटियाँ इस संसार में किसको अच्छे नहीं लगते है और आप इनको अपने घर में पालते हुए भी कहते थे की तिलक, तराजू और तलवार इनको मारो जूतें चार मतलब आप इस संसार को ब्रह्मा, विष्णु और महेश विहीन कर सम्पूर्ण ब्रह्मांड में परमब्रह्म/ब्रह्म में विलीन करना चाह रहे तो क्या यह संभव था? मायामयी संसार का चमत्कार ही आप के जीवन को रोचक बनाता है तो वह चमत्कार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ही कर रहे हैं जगत जननी सीता की छाया रूपी सृष्टि जिसका सञ्चालन ही ब्रह्मा का वरदान है उसको निभाने के लिए तो जिस ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य के बेटे-बेटियों को पाल रहे है उनका ठीक से पालन करें इसको शिवा कोई और चारा नहीं है संसार को रोचक बनाने का?<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

तो क्या इसी लिए तथाकथित सामाजिक का आन्दोलन विदेशियों द्वारा और मार्क्सवादियो द्वारा पोषित किया गया था सामाजिक न्यायवादियों के माध्यम से>>>>तथाकथित सामाजिक न्याय वालों तथाकथित सामाजिक न्याय के नाम पर दक्षिण भारत जिनका की लगभग पूर्ण विदेशी कारन/बाजारू कारन हो गया है उनके माध्यम से नश्लीय आन्दोलन/ नश्लीय संकर प्रजातीकरण विगत 30 वर्ष में बहुत जोरो पर हुआ है विदेशी समाज को लाभ पंहुचाने की दृष्टि से मतलब विशेष रूप से बौद्धिक रूप से सम्पन्न और छोटे-मोटे स्तर तक के कार्यों को करने वाले मानवीय संसाधन का वैश्विक विकेन्द्रीकरण करने हेतु जिसका व्यापक असर भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर पड़ा है जो आज वैज्ञानिक युग में और अति तनाव पूर्ण मानवीय जीवन के परिणाम स्वरुप नपुंसकता के युग में छिन्न-भिन्न हो गया है और ऐसा असर इन सबका हुआ है की जिनको इसका लाभ लेने हेतु इस तथाकथित सामाजिक न्याय की अवधारणा और प्रयोग जारी था वह सामाजिक बेईमानी साबित हो रहा है और वैदेशिक जनो के मानवीय सशाधन आयात हेतु बनाया गया हुआ प्रमाणित हो गया है| ऐसे वैज्ञानिक युग जिसमे अपने माता-पिता, कुल, गुरुकुल, जाति/धर्म/पन्थ और अन्य सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर बहुसंख्यक लोग ही अडिग नहीं हैं तो फिर कैसे तथाकथित सामाजिक न्याय से भारतीयों को सम्यक लाभ मिलेगा| क्योंकि सामजिक वैभव का वास्तविक अर्थ है की सुख, स्वास्थ्य, सम्पन्नता और मानसिक शांति यह तुलनात्मक ही सही पर क्या मूल तत्व मानसिक शान्ति का ह्रास उत्तरोत्तर 30 वर्षों में अपने चरम पर नहीं गया है जिसमे आपसी पारिवारिक और सामाजिक भाईचारा नाम की चीज विगत दिनों की बात नहीं हुई है? तो क्या इसी लिए तथाकथित सामाजिक का आन्दोलन विदेशियों द्वारा और मार्क्सवादियो द्वारा पोषित किया गया था सामाजिक न्यायवादियों के मध्यमा से|

तो क्या इसी लिए तथाकथित सामाजिक का आन्दोलन विदेशियों द्वारा और मार्क्सवादियो द्वारा पोषित किया गया था सामाजिक न्यायवादियों के माध्यम से>>>>तथाकथित सामाजिक न्याय वालों तथाकथित सामाजिक न्याय के नाम पर दक्षिण भारत जिनका की लगभग पूर्ण विदेशी कारन/बाजारू कारन हो गया है उनके माध्यम से नश्लीय आन्दोलन/ नश्लीय संकर प्रजातीकरण विगत 30 वर्ष में बहुत जोरो पर हुआ है विदेशी समाज को लाभ पंहुचाने की दृष्टि से मतलब विशेष रूप से बौद्धिक रूप से सम्पन्न और छोटे-मोटे स्तर तक के कार्यों को करने वाले मानवीय संसाधन का वैश्विक विकेन्द्रीकरण करने हेतु जिसका व्यापक असर भारतीय सामाजिक व्यवस्था पर पड़ा है जो आज वैज्ञानिक युग में और अति तनाव पूर्ण मानवीय जीवन के परिणाम स्वरुप नपुंसकता के युग में छिन्न-भिन्न हो गया है और ऐसा असर इन सबका हुआ है की जिनको इसका लाभ लेने हेतु इस तथाकथित सामाजिक न्याय की अवधारणा और प्रयोग जारी था वह सामाजिक बेईमानी साबित हो रहा है और वैदेशिक जनो के मानवीय सशाधन आयात हेतु बनाया गया हुआ प्रमाणित हो गया है| ऐसे वैज्ञानिक युग जिसमे अपने माता-पिता, कुल, गुरुकुल, जाति/धर्म/पन्थ और अन्य सामाजिक और मानवीय मूल्यों पर बहुसंख्यक लोग ही अडिग नहीं हैं तो फिर कैसे तथाकथित सामाजिक न्याय से भारतीयों को सम्यक लाभ मिलेगा| क्योंकि सामजिक वैभव का वास्तविक अर्थ है की सुख, स्वास्थ्य, सम्पन्नता और मानसिक शांति यह तुलनात्मक ही सही पर क्या मूल तत्व मानसिक शान्ति का ह्रास उत्तरोत्तर 30 वर्षों में अपने चरम पर नहीं गया है जिसमे आपसी पारिवारिक और सामाजिक भाईचारा नाम की चीज विगत दिनों की बात नहीं हुई है? तो क्या इसी लिए तथाकथित सामाजिक का आन्दोलन विदेशियों द्वारा और मार्क्सवादियो द्वारा पोषित किया गया था सामाजिक न्यायवादियों के मध्यमा से| <<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

एक ब्राह्मण बने रहने या ब्राह्मण धर्म/जाती/उपजाति नाम रखने की कीमत जो मैंने चुकाई है बचपन से लेकर आज तक तो ऐसे ही हर सनातन हिन्दू अपने जीवन में सनातन हिन्दू होने की कीमत चुकता करता रहे तो किशी भी धर्म और जाती के व्यक्ति के व्यक्तित्व का अवनयन नहीं वरन उन्नयन हो जाएगा। फिर भी मै कहता हूँ की किशी एक जाती/धर्म के बल पर इस मानव संसार को चलाये रखना संभव नहीं है। मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम/एडम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं|

एक ब्राह्मण बने रहने या ब्राह्मण धर्म/जाती/उपजाति नाम रखने की कीमत जो मैंने चुकाई है बचपन से लेकर आज तक तो ऐसे ही हर सनातन हिन्दू अपने जीवन में सनातन हिन्दू होने की कीमत चुकता करता रहे तो किशी भी धर्म और जाती के व्यक्ति के व्यक्तित्व का अवनयन नहीं वरन उन्नयन हो जाएगा। फिर भी मै कहता हूँ की किशी एक जाती/धर्म के बल पर इस मानव संसार को चलाये रखना संभव नहीं है। मेरे द्वारा सिद्ध किया हुआ 5 प्रमुख तथ्य:Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के आदम/एडम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं)
1)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत|
2) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है|
3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)।
4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences.
5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।-------------------सनातन गौतम(न्याय-दर्शन के प्रणेता) गोत्रीय ब्राह्मण परिवार का नाती हूँ मै अतः मुझे पता है की: गौतम गोत्रीय शाक्य(शाकाहारी व् अहिंसक) वंशीय क्षत्रिय सिद्धार्थ गौतम ही गौतम बुद्ध है जो की हिन्दू समाज में एक पंथ का निर्माण किये जो बौद्ध मत है और जिसकी सभी पाण्डु लिपिया हिन्दू ग्रन्थ को ही निरूपित करती हैं पर बौद्ध मत के अनुसार कही-कही उनको परिवर्तित किया गया है। अतः उन सबका स्रोत सनातन हिन्दू धर्म के ग्रन्थ ही हैं। उसी तरह काशी और काबा का सम्बन्ध है जिसमे काशी पुरातन संस्कृति हैकाबा की संस्कृति से। और जब मुस्लिम संस्कृति स्वयं ईसाइयत से पुरानी संस्कृति है तो काशी की संस्कृति ईसाइयत (यरूसलेम) की संस्कृति से भी पुरानी अपने में है ही इसमे दो राय कहाँ। मेरा मत यही की किशी को अपना धर्म परिवर्तन किये बिना ही सनातन हिन्दू संस्कृति से यदि जोड़ा जाता है तो वह उससे ज्यादा अच्छा कदम होगा जिसमे किशी को अपना धर्म त्यागकरवा सनातन हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है। क्योंकि सनातन हिन्दू संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है अतः उसे यथा संभव अपनाते हुए कोई अपने नए धर्म में बना रहता है देश, काल, जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तो इसमे कोई गलत नहीं है। एक और भी अच्छाई है भारत में सभी धर्मो के पाये जाने से की कि जब कोई भारतीय विदेश में कहीं जाता है तो उसे बताना नहीं पड़ता की वहा के विभिन्न धर्म अनुयायियों के साथ कौन सा व्यवहार स्वयं उस भारतीय के लिए सम्बन्ध बिगाड़ने वाला साबित हो सकता है और कौन सा व्यवहार उनको उस भारतीय के करीब ला सकता है। लेकिन इसके साथ की भारत की आत्मा सनातन हिन्दू संस्कृति है इससे इंकार नहीं किया जा सकता है।<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|