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Saturday, August 26, 2017

सर्वकालिक परम सत्य केवल सतही ही नहीं किन्तु बहुआयामी होता है तो उसका आंकलन केवल एक, दो, तीन या चार-पांच आयाम से ही नहीं करते है तो ऐसे में जो सर्वकालिक परमसत्य है उसका विकल्प केवल और केवल स्वयम वही सर्वकालिक परमसत्य ही होता है:----------प्रश्न केवल इतना सा है की हिन्दू सनातन शास्त्रीय विवाह और उसके बाद भी वर स्वयं अपना तो अपना किन्तु वधु का नाम भी सरकारी सहायता प्राप्तकर्ता समूह/कुल/श्रेणी( विश्वव्यापक समाज का पूरक समाज) में सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराये? जो की सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह को अपने आप केवल और केवल छलावा सिद्ध करता है| किन्तु इस अकाट्य मूल प्रश्न का उत्तर लोग नहीं देंगे बाकी सब कुछ अमर्यादित कर चुके और सब कुछ करेंगे अपने कल-बल-छल और साम-दाम-दण्ड-भेद के द्वारा जितनी समर्थ थी किये अब विदेश से उधार लेकर करेंगे किन्तु उनको यही नहीं मालूम के विदेश को भी शक्ति इसी वास्तविक महाशक्ति से ही मिलती रही थी, मिलती रही है और मिलाती रहेगी? तो फिर किये जाने वाला हर प्रयास निष्फल होना था तो हुआ और आगे भी निष्फल होगा क्योंकि जो सत्य नहीं स्वीकारता वह अपने नाश का बीज ही बोता है और इस प्रकार अपना ही नहीं अपने आने वाली पीढ़ी के लिए भी नाश होने की फसल तैयार करता है|

सर्वकालिक परम सत्य केवल सतही ही नहीं किन्तु बहुआयामी होता है तो उसका आंकलन केवल एक, दो, तीन या चार-पांच आयाम से ही नहीं करते हैं  तो  ऐसे मे जो सर्वकालिक परमसत्य है उसका विकल्प केवल और केवल   स्वयम वही ईइसर्वकालिक परमसत्य ही होता है:----------प्रश्न केवल इतना सा है की हिन्दू सनातन शास्त्रीय विवाह और उसके बाद भी वर स्वयं अपना तो अपना किन्तु वधु का नाम भी सरकारी सहायता प्राप्तकर्ता समूह/कुल/श्रेणी( विश्वव्यापक समाज का पूरक समाज) में सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराये? जो की सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह को अपने आप केवल और केवल छलावा सिद्ध करता है|  किन्तु इस अकाट्य मूल प्रश्न का उत्तर लोग नहीं देंगे बाकी सब कुछ अमर्यादित कर चुके और सब कुछ करेंगे अपने कल-बल-छल और साम-दाम-दण्ड-भेद के द्वारा जितनी समर्थ थी किये अब विदेश से उधार लेकर करेंगे किन्तु उनको यही नहीं मालूम के विदेश को भी शक्ति इसी वास्तविक महाशक्ति से ही मिलती रही थी, मिलती रही है और मिलती रहेगी? तो फिर किये जाने वाला हर प्रयास निष्फल होना था तो हुआ और आगे भी निष्फल होगा क्योंकि जो सत्य नहीं स्वीकारता वह अपने नाश का बीज ही बोता है और इस प्रकार अपना ही नहीं अपने आने वाली पीढ़ी के लिए भी नाश होने की फसल तैयार करता है| <<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Friday, August 25, 2017

This is perfect history of humanity

This is perfect history of humanity.<This is need of TIRANGA:TRIDEV:TRIMURTI. <This is because all Saptarshi:Brahmarshi converted them in Rajarshi and Maharshi too (24 Rishis too:Ashok Chakra denotes 24 Rishis (Ashtak Rishi=8 Rishi=Saptarshi+Kumbhaj:Agastya:8th Rishi multilies by 3 = 24 statandard Rishi prooved the Gatatri/Savit Mantra and hence 105 Rishi/Gotra governing world humanity all aroud the World and denoted by 105 Core of the Sudarshan Chakra of Lord Krishna).<Brahmin@Brahma janati sah Brahmanah therefore existance of Kshatriya and Vaisya needed for physical world.< Vipra@Brahmin who take less and give more to the world.<Dwij@Brahmin who treated as god of Earth due to his deed.<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|कृष्ण|

पूर्व में मेरे द्वारा शुक्राचार्य व् उनके अनुयायियों के व्यापार/धंधे को बंद करने के सम्बन्ध में खुलासा:---- क्या उत्तर भारत के कोर हिन्दू समाज को इस भागम भाग वैश्विक व्यवस्था में व्यावसायिक/पेशेवर और व्यवहारिक जीवन जीने वालों के लिए वर्तमान में यह नहीं मान लेना चाहिए अपने संतति/संस्कार/कुल के मान सम्मान की रक्षा हेतु:------ इस संसार में उत्तर भारत के कोर हिन्दू समाज के अलावा सम्पूर्ण विश्व मानता है की मासिकधर्म के बाद नारी जाती पूर्ण पवित्र हो जाती है तो फिर रह जाता है उनका मानसिक सुध्धि/परिवर्तन जिस सम्बन्ध में परिश्थितिजन्य कारणवस या परिश्थितिजन्य भटकाव वस उनसे कोई गलती या चूक हो जाती है किसी से सम्बन्ध बना लेने के कारन, तो ऐसे में उस भटके हुए नारीजन का जन्म-जन्मांतर का पारिवारिक रिस्ता/सम्बन्ध आप अपने को अपमानित और तिरस्कृत करने वाले समाज से अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपमानित जीवन जीने के लिए क्यों कराइयेगा? वैसे विवाह पूर्ण कोई नादान सम्बन्ध या कोई और गलत कदम उत्तर भारतीय हिन्दू समाज में अनुमन्य नहीं है फिर भी आप पुरुष गलती करता है तो आप उसे अपना लेते है पर जिसको ईश्वर ने ही सुध्ध करने/होने की व्यवस्था दी है उसे आप जन्म-जन्मांतर के लिए उसका सम्बन्ध अपने को अपमानित और तिरस्कृत करने वाले समाज से क्यों कराएँगे| टिप्पणी 1:----------- यह लेख पूर्ण पवित्र सम्बन्धयुवक/युवतियों व् युगल को उच्चतम श्रेणी का मानता है उनके लिए नहीं किन्तु इस भागम भाग वैश्विक व्यवस्था में व्यावसायिक/पेशेवर और व्यवहारिक जीवन जीने वालों के लिए उद्धृत किया गया है| हमारे सामाजिक जीवन में पारिवारिक सम्बन्ध की बात होती है जो सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह विधि से मान्य है जिसमे की ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैस्य व् उनके व्युत्पन्न का अपनी जाति में विवाह सर्वोच्च होने के साथ एक दूसरे से भी मान्य है इसके बाद उस समाज के युवक से भी सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह मान्य है जो समाज हमारे सम्पूर्ण देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा, आश्था, निष्ठा और विश्वास रखता हो और अपने को सामाजिक, धार्मिक और कानूनी रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैस्य व् उनके व्युत्पन्न की श्रेणी का मानना ऐसे सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह पूर्व स्वीकार किया हो( इससे अलग किसी भी अवश्था में सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह मान्य नहीं वह केवल छलावा होता है)| सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह के युगल धर्म पति-पत्नी कहे जाते है| अन्य विवाह भी है जो केवल पति-पत्नी कहलाने की ही सीमा में रह जाते है पर धर्म-पति/पत्नी नहीं कहलाते हैं| टिप्पणी 1:-------------वैदेशिक लाभ और वैदेशिक संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु जिस समाज में अश्लीलता परोशकर उस समाज की आधी आबादी को प्रभावित कर उस समाज के संभ्रांत लोगों समेत सामान्य जीवन जीने वाले सज्जन नागरिकों को नीचा दिखाने के उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था और पूर्ण सांसारिक ज्ञान और उसकी परिणति से अन्जान आधी आबादी के मोह में अपमानजनक समझौता करवाया जा रहा था वर्षो से जिसमे बेतहासा वृध्दि हो चुकी थी तो उसके प्रतिजागरण क्या आवश्यक नहीं था? उत्तर है जागरण आवश्यक था और उसको भी उप-उत्पाद के रूप किया गया|----आप की जानकारी के लिए बता दें की कामसूत्र/कामशास्त्र की विद्या के अतिसय दूषित अवस्था तक प्रयोगकर्ता शुक्राचार्य ही हैं जिन्होंने स्त्रीजाति का जीवन नरक किया है जिनको तो वे सभ्य तरीके से संभाल पाते नहीं है ऊपर से सम्मानित और सज्जन लोगों में झूंठे मान-सम्मान की साजिशन लड़ाई करवाकर क्षणिक रूप से स्त्री समाज को अपमानित करवा जीवनभर और युगों युगों के लिए अपनी दूकान चलाते और नारी समाज का जीवन नर्क बनाते हैं| लेकिन अब नारी समाज को भी अपनी थोड़ी मेधा और प्रतिभा दीर्घकालिक उचित और अनुचित ध्यान देने में खर्च करनी पड़ेगी केवल सीधा रास्ता घोड़ा दौडाने की विद्या नहीं रखनी होगी||

पूर्व में मेरे द्वारा शुक्राचार्य व् उनके अनुयायियों के व्यापार/धंधे को बंद करने के सम्बन्ध में खुलासा:---- क्या उत्तर भारत के कोर हिन्दू समाज को इस भागम भाग वैश्विक व्यवस्था में व्यावसायिक/पेशेवर और व्यवहारिक जीवन जीने वालों के लिए वर्तमान में यह नहीं मान लेना चाहिए अपने संतति/संस्कार/कुल के मान सम्मान की रक्षा हेतु:------ इस संसार में उत्तर भारत के कोर हिन्दू समाज के अलावा सम्पूर्ण विश्व मानता है की मासिकधर्म के बाद नारी जाती पूर्ण पवित्र हो जाती है तो फिर रह जाता है उनका मानसिक सुध्धि/परिवर्तन जिस सम्बन्ध में परिश्थितिजन्य कारणवस या परिश्थितिजन्य भटकाव वस उनसे कोई गलती या चूक हो जाती है किसी से सम्बन्ध बना लेने के कारन, तो ऐसे में उस भटके हुए नारीजन का जन्म-जन्मांतर का पारिवारिक रिस्ता/सम्बन्ध आप अपने को अपमानित और तिरस्कृत करने वाले समाज से अपने और अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपमानित जीवन जीने के लिए क्यों कराइयेगा? वैसे विवाह पूर्ण कोई नादान सम्बन्ध या कोई और गलत कदम उत्तर भारतीय हिन्दू समाज में अनुमन्य नहीं है फिर भी आप पुरुष गलती करता है तो आप उसे अपना लेते है पर जिसको ईश्वर ने ही सुध्ध करने/होने की व्यवस्था दी है उसे आप जन्म-जन्मांतर के लिए उसका सम्बन्ध अपने को अपमानित और तिरस्कृत करने वाले समाज से क्यों कराएँगे| टिप्पणी 1:----------- यह लेख पूर्ण पवित्र सम्बन्धयुवक/युवतियों व् युगल को उच्चतम श्रेणी का मानता है उनके लिए नहीं किन्तु इस भागम भाग वैश्विक व्यवस्था में व्यावसायिक/पेशेवर और व्यवहारिक जीवन जीने वालों के लिए उद्धृत किया गया है| हमारे सामाजिक जीवन में पारिवारिक सम्बन्ध की बात होती है जो सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह विधि से मान्य है जिसमे की ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैस्य व् उनके व्युत्पन्न का अपनी जाति में विवाह सर्वोच्च होने के साथ एक दूसरे से भी मान्य है इसके बाद उस समाज के युवक से भी सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह मान्य है जो समाज हमारे सम्पूर्ण देवी देवताओं के प्रति श्रद्धा, आश्था, निष्ठा और विश्वास रखता हो और अपने को सामाजिक, धार्मिक और कानूनी रूप से ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैस्य व् उनके व्युत्पन्न की श्रेणी का मानना ऐसे सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह पूर्व स्वीकार किया हो( इससे अलग किसी भी अवश्था में सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह मान्य नहीं वह केवल छलावा होता है)| सनातन हिन्दू शास्त्रीय विवाह के युगल धर्म पति-पत्नी कहे जाते है| अन्य विवाह भी है जो केवल पति-पत्नी कहलाने की ही सीमा में रह जाते है पर धर्म-पति/पत्नी नहीं कहलाते हैं| टिप्पणी 1:-------------वैदेशिक लाभ और वैदेशिक संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु जिस समाज में अश्लीलता परोशकर उस समाज की आधी आबादी को प्रभावित कर उस समाज के संभ्रांत लोगों समेत सामान्य जीवन जीने वाले सज्जन नागरिकों को नीचा दिखाने के उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था और पूर्ण सांसारिक ज्ञान और उसकी परिणति से अन्जान आधी आबादी के मोह में अपमानजनक समझौता करवाया जा रहा था वर्षो से जिसमे बेतहासा वृध्दि हो चुकी थी तो उसके प्रतिजागरण क्या आवश्यक नहीं था? उत्तर है जागरण आवश्यक था और उसको भी उप-उत्पाद के रूप किया गया|----आप की जानकारी के लिए बता दें की कामसूत्र/कामशास्त्र की विद्या के अतिसय दूषित अवस्था तक प्रयोगकर्ता शुक्राचार्य ही हैं जिन्होंने स्त्रीजाति का जीवन नरक किया है जिनको तो वे सभ्य तरीके से संभाल पाते नहीं है ऊपर से सम्मानित और सज्जन लोगों में झूंठे मान-सम्मान की साजिशन लड़ाई करवाकर क्षणिक रूप से स्त्री समाज को अपमानित करवा जीवनभर और युगों युगों के लिए अपनी दूकान चलाते और नारी समाज का जीवन नर्क बनाते हैं| लेकिन अब नारी समाज को भी अपनी थोड़ी मेधा और प्रतिभा दीर्घकालिक उचित और अनुचित ध्यान देने में खर्च करनी पड़ेगी केवल सीधा रास्ता घोड़ा दौडाने की विद्या नहीं रखनी होगी| ------- ---------- <<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Thursday, August 24, 2017

इस संसार को पता है की शुक्राचार्य ब्रह्मा के मुँह लगे थे अतः उनसे तो नहीं किन्तु विष्णु और अपने इष्टदेव और परमगुरु, शिव से डरते हैं फिर भी इन दोनो से क्यों नहीं डर रहे हैं ? इसका उत्तर है की संसार चलायमान रखना है और पूर्वगत युग में शुक्राचार्य को उनकी असली क्षमता का बाकायदा आंकलन करा दिया गया था और उनको अपने क्षमता की सीमा का भी पता हो गया होगा और तो अब उनको पता हो जाना चाहिए की उनके बिना संसार चल सकता है पर विष्णु और शिव के बिना कदापि नहीं| अतः अब उनको शांत रह अपना परिष्कार करना चाहिए न की शिव और विष्णु को मिटाने का कभी भी और किसी भी युग में प्रयत्न करना चाहिए | क्योंकि उनको विदित हो की मैंने 29/30 नवम्बर को अपना कार्य पूर्ण कर लिया है उनके सहमति और सहयोग के बिना भी पर वे और यह संसार भी मेरे बिना सहयोग और सहमति के नहीं रह सकता हैं कभी भी| तो कोई सम्बन्ध है मेरा और उनका जिसकी गरिमा को वे बनाये रखें और पुनः मिटायें न|

इस संसार को पता है की शुक्राचार्य ब्रह्मा के मुँह लगे थे अतः उनसे तो नहीं किन्तु विष्णु और अपने इष्टदेव और परमगुरु, शिव से डरते हैं फिर भी इन दोनो से क्यों नहीं डर रहे हैं ? इसका उत्तर है की संसार चलायमान रखना है और पूर्वगत युग में शुक्राचार्य को उनकी असली क्षमता का बाकायदा आंकलन करा दिया गया था और उनको अपने क्षमता की सीमा का भी पता हो गया होगा और तो अब उनको पता हो जाना चाहिए की उनके बिना संसार चल सकता है पर विष्णु और शिव के बिना कदापि नहीं| अतः अब उनको शांत रह अपना परिष्कार करना चाहिए न की शिव और विष्णु को मिटाने का कभी भी और किसी भी युग में प्रयत्न करना चाहिए | क्योंकि उनको विदित हो की मैंने 29/30 नवम्बर को अपना कार्य पूर्ण कर लिया है उनके सहमति और सहयोग के बिना भी पर वे और यह संसार भी मेरे बिना सहयोग और सहमति के नहीं रह सकता हैं कभी भी| तो कोई सम्बन्ध है मेरा और उनका जिसकी गरिमा को वे बनाये रखें और पुनः मिटायें न| <<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Wednesday, August 23, 2017

किस बराबरी की बात होती है? ----जिन प्रश्नो का दुनिया में कोई विद्वान से विद्वान उत्तर सार्वजनिक रूप से नहीं दिया उन सब प्रश्नो का उत्तर बहुत सरल विधि से वेवाक स्वरुप में उसके द्वारा अपने ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" में 2006 से लेकर मई, 2013 और पुनः अगस्त, 2013 से लेकर आज तक दिया गया है| कुछ प्रश्नो का उत्तर समय देगा जो उसके निमित्त सांसारिक जीवन को रोचक और रोमांचक बनाये रखने हेतु छोड़ दिया हूँ| तो जाहिर सी बात है की इस संसार के कमजोर दिल वाले लोग उसका साथ प्रत्यक्ष रूप से छोड़ दिए होंगे पर अंतर्मन से जो स्नेहीजन हैं उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा है व्यक्तिगत सम्पर्को से लगातार विदित होता रहा है और पर हाँ समाज में प्रत्यक्ष उसका साथ तो नहीं पर सहयोग छोड़ दिए होगें अपनी सामाजिक दबाव व् मजबूरियों की वजह से तो अब जाहिर से बात है की वह उसके बाद भी वह आत्म निर्भर रूप में अपने व्यवसाय, शिक्षा और शोध में कार्यरत होगा इतना तो समझना ही होगा| विदेश वाले और उनके अभिकर्ता बने लोग इतना जाने की दूरदृष्टि से देखा जाय तो उसके किसी लेख से मानवता को, देश को और विदेश को कोई हानि नहीं होने वाली है अपितु लाभ ही लाभ है केवल वैश्विक सहमति बनाने की कमी हो सकती है| ----और यही कारन रहा है की उसे 2008 में किसी भी देश में ले जाने का प्रस्ताव हुआ था और मै कभी भी विदेश अपने निजी कार्यो से जाने या रहने से इंकार किया उसके बाद से मैंने अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं कराया है क्या किसी प्रतिष्ठित विश्विद्यालय या अन्य विश्विद्यालय के किसी भूविज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर व् जालवायु विज्ञान का शिक्षक बिना पासपोर्ट का होगा? क्या उसकी साँसे नहीं थम जाएगी यदि उससे कह दिया जाय की आप का पासपोर्ट जब्त किया जाता है और आप कभी विदेश मत जाइये या वह अपनी इक्षा से अपना पासपोर्ट न बनवाये या नवीनीकरण न कराये ऐसे विषय के शिक्षक से जिस विषय में जिसमे अंतरास्ट्रीय सम्पर्क और आवा गमन सामान्य प्रक्रिया है| ---------------जो कार्य इस संसार के बड़े से बड़े सेनाध्यक्ष और जननायक से नहीं हो सकता ऐसे कार्य को जौनपुर/जमदग्निपुर-223103 में जन्मे और आजमगढ़-223225 पैतृक निवासी 25 वर्षीय आजीवन पूर्ण अखण्ड ब्रह्मचर्य युवा जो एक पूर्ण स्नातक ब्राह्मण (स्नातक किन्तु राजनीति शास्त्र से परास्नातक के मध्यावधि से कतिपय कारणों से मानसिक अवसाद ग्रस्त जिसके पास केवल जीविका निर्वहन की सीमा भर कृषि जोत न की व्यावसायिक कृषि जोत या अन्य आय का साधन) का पुत्र और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्विद्यालय, जौनपुर/जमदग्निपुर से स्नातक तथा काशी हिन्दू विश्विद्यालय, काशी/वाराणसी से परास्नातक तथा प्रयागराज विश्विद्यालय में शोध छात्र ने 2001 से लेकर 2007 तक केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्द्ययन केंद्र में अपने को अवस्थित रखकर किया और पुनः डॉक्टरेट होकर पराशोधक के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में 2007 के अंतिम दिनों से लेकर अप्रैल, 2008 तक किया और उसके बाद पुनः भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलोर में जिसकी एकनारी सदाब्रह्मचारी होकर मई, 2008 से 2009 के अंतिन दिनों तक किया और पुनः जिसकी एकनारी सदाब्रह्मचारी ही होकर एक शिक्षक में रूप में अक्टूबर, 2009 से लेकर आज तक प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज में रहकर कर रहा है| ------------किस बराबरी की बात होती है? --------------वैदेशिक लाभ और वैदेशिक संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु जिस समाज में अश्लीलता परोशकर उस समाज की आधी आबादी को प्रभावित कर उस समाज के संभ्रांत लोगों समेत सामान्य जीवन जीने वाले सज्जन नागरिकों को नीचा दिखाने के उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था और पूर्ण सांसारिक ज्ञान और उसकी परिणति से अन्जान आधी आबादी के मोह में अपमानजनक समझौता करवाया जा रहा था वर्षो से जिसमे बेतहासा वृध्दि हो चुकी थी तो उसके प्रतिजागरण क्या आवश्यक नहीं था? उत्तर है जागरण आवश्यक था और उसको भी उप-उत्पाद के रूप किया गया|----आप की जानकारी के लिए बता दें की कामसूत्र/कामशास्त्र की विद्या के अतिसय दूषित अवस्था तक प्रयोगकर्ता शुक्राचार्य ही हैं जिन्होंने स्त्रीजाति का जीवन नरक किया है जिनको तो वे सभ्य तरीके से संभाल पाते नहीं है ऊपर से सम्मानित और सज्जन लोगों में झूंठे मान-सम्मान की साजिशन लड़ाई करवाकर क्षणिक रूप से स्त्री समाज को अपमानित करवा जीवनभर और युगों युगों के लिए अपनी दूकान चलाते और नारी समाज का जीवन नर्क बनाते हैं| लेकिन अब नारी समाज को भी अपनी थोड़ी मेधा और प्रतिभा दीर्घकालिक उचित और अनुचित ध्यान देने में खर्च करनी पड़ेगी केवल सीधा रास्ता घोड़ा दौडाने की विद्या नहीं रखनी होगी| ------- ----------जिन प्रश्नो का दुनिया में कोई विद्वान से विद्वान उत्तर सार्वजनिक रूप से नहीं दिया उन सब प्रश्नो का उत्तर बहुत सरल विधि से वेवाक स्वरुप में उसके द्वारा अपने ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" में 2006 से लेकर मई, 2013 और पुनः अगस्त, 2013 से लेकर आज तक दिया गया है| तो जाहिर सी बात है की इस संसार के कमजोर दिल वाले उसका साथ प्रत्यक्ष छोड़ दिए होंगे पर अंतर्मन से जो स्नेहीजन हैं उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा है व्यक्तिगत सम्पर्को से लगातार विदित होता रहा है और पर हाँ प्रत्यक्ष उसका सहयोग छोड़ दिए होगें और उसके बाद भी वह आत्म निर्भर रूप में अपने व्यवसाय, शिक्षा और शोध में कार्यरत होगा इतना तो समझना ही होगा पर विदेश वाले और उनके अभिकर्ता बने लोग इतना जाने की दूरदृष्टि से देखा जाय तो मेरे किसी लेख से मानवता को, देश को और विदेश को कोई हानि नहीं होने वाली है अपितु लाभ ही लाभ है केवल वैश्विक सहमति बनाने की कमी हो सकती है| ----और यही कारन रहा है की मुझे 2008 में किसी भी देश में ले जाने का प्रस्ताव हुआ था और मै कभी भी विदेश अपने निजी कार्यो से जाने या रहने से इंकार किया उसके बाद से मैंने अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं कराया है क्या किसी प्रतिष्ठित विश्विद्यालय या अन्य विश्विद्यालय के किसी भूविज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर व् जालवायु विज्ञान का शिक्षक बिना पासपोर्ट का होगा? क्या उसकी साँसे नहीं थम जाएगी यदि उससे कह दिया जाय की आप का पासपोर्ट जब्त किया जाता है और आप कभी विदेश मत जाइये या वह अपनी इक्षा से अपना पासपोर्ट न बनवाये या नवीनीकरण न कराये ऐसे विषय के शिक्षक से जिस विषय में जिसमे अंतरास्ट्रीय सम्पर्क और आवा गमन सामान्य प्रक्रिया है|----------किस बराबरी की बात होती है?

किस बराबरी की बात होती है? ----जिन प्रश्नो का दुनिया में कोई विद्वान से विद्वान उत्तर सार्वजनिक रूप से नहीं दिया उन सब प्रश्नो का उत्तर बहुत सरल विधि से वेवाक स्वरुप में उसके द्वारा अपने ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" में 2006 से लेकर मई, 2013 और पुनः अगस्त, 2013 से लेकर आज तक दिया गया है| कुछ प्रश्नो का उत्तर समय देगा जो उसके निमित्त सांसारिक जीवन को रोचक और रोमांचक बनाये रखने हेतु छोड़ दिया हूँ| तो जाहिर सी बात है की इस संसार के कमजोर दिल वाले लोग उसका साथ प्रत्यक्ष रूप से छोड़ दिए होंगे पर अंतर्मन से जो स्नेहीजन हैं उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा है व्यक्तिगत सम्पर्को से लगातार विदित होता रहा है और पर हाँ समाज में प्रत्यक्ष उसका साथ तो नहीं पर सहयोग छोड़ दिए होगें अपनी सामाजिक दबाव व् मजबूरियों की वजह से तो अब जाहिर से बात है की वह उसके बाद भी वह आत्म निर्भर रूप में अपने व्यवसाय, शिक्षा और शोध में कार्यरत होगा इतना तो समझना ही होगा| विदेश वाले और उनके अभिकर्ता बने लोग इतना जाने की दूरदृष्टि से देखा जाय तो उसके किसी लेख से मानवता को, देश को और विदेश को कोई हानि नहीं होने वाली है अपितु लाभ ही लाभ है केवल वैश्विक सहमति बनाने की कमी हो सकती है| ----और यही कारन रहा है की उसे 2008 में किसी भी देश में ले जाने का प्रस्ताव हुआ था और मै कभी भी विदेश अपने निजी कार्यो से जाने या रहने से इंकार किया उसके बाद से मैंने अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं कराया है क्या किसी प्रतिष्ठित विश्विद्यालय या अन्य विश्विद्यालय के किसी भूविज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर व् जालवायु विज्ञान का शिक्षक बिना पासपोर्ट का होगा? क्या उसकी साँसे नहीं थम जाएगी यदि उससे कह दिया जाय की आप का पासपोर्ट जब्त किया जाता है और आप कभी विदेश मत जाइये या वह अपनी इक्षा से अपना पासपोर्ट न बनवाये या नवीनीकरण न कराये ऐसे विषय के शिक्षक से जिस विषय में जिसमे अंतरास्ट्रीय सम्पर्क और आवा गमन सामान्य प्रक्रिया है| ---------------जो कार्य इस संसार के बड़े से बड़े सेनाध्यक्ष और जननायक से नहीं हो सकता ऐसे कार्य को जौनपुर/जमदग्निपुर-223103 में जन्मे और आजमगढ़-223225 पैतृक निवासी 25 वर्षीय आजीवन पूर्ण अखण्ड ब्रह्मचर्य युवा जो एक पूर्ण स्नातक ब्राह्मण (स्नातक किन्तु राजनीति शास्त्र से परास्नातक के मध्यावधि से कतिपय कारणों से मानसिक अवसाद ग्रस्त जिसके पास केवल जीविका निर्वहन की सीमा भर कृषि जोत न की व्यावसायिक कृषि जोत या अन्य आय का साधन) का पुत्र और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्विद्यालय, जौनपुर/जमदग्निपुर से स्नातक तथा काशी हिन्दू विश्विद्यालय, काशी/वाराणसी से परास्नातक तथा प्रयागराज विश्विद्यालय में शोध छात्र ने 2001 से लेकर 2007 तक केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवं महासागर अध्द्ययन केंद्र में अपने को अवस्थित रखकर किया और पुनः डॉक्टरेट होकर पराशोधक के रूप में भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर में 2007 के अंतिम दिनों से लेकर अप्रैल, 2008 तक किया और उसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलोर में पुनः जिसकी एकनारी सदाब्रह्मचारी होकर मई, 2008 से 2009 के अंतिन दिनों तक किया और पुनः जिसकी एकनारी सदाब्रह्मचारी ही होकर एक शिक्षक में रूप में अक्टूबर, 2009 से लेकर आज तक प्रयागराज विश्विद्यालय, प्रयागराज में रहकर कर रहा है| ------------किस बराबरी की बात होती है? --------------वैदेशिक  लाभ और वैदेशिक संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु जिस समाज में अश्लीलता परोशकर उस समाज की आधी आबादी को प्रभावित कर उस समाज के संभ्रांत लोगों समेत सामान्य जीवन जीने वाले सज्जन नागरिकों को नीचा दिखाने के उनके मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था और पूर्ण सांसारिक ज्ञान और उसकी परिणति से अन्जान आधी आबादी के मोह में अपमानजनक समझौता करवाया जा रहा था वर्षो से जिसमे बेतहासा वृध्दि हो चुकी थी तो उसके प्रतिजागरण क्या आवश्यक नहीं था? उत्तर है जागरण आवश्यक था और उसको भी उप-उत्पाद के रूप किया गया|----आप की जानकारी के लिए बता दें की कामसूत्र/कामशास्त्र की विद्या के अतिसय दूषित अवस्था तक प्रयोगकर्ता शुक्राचार्य ही हैं जिन्होंने स्त्रीजाति का जीवन नरक किया है जिनको तो वे सभ्य तरीके से संभाल पाते नहीं है ऊपर से सम्मानित और सज्जन लोगों में झूंठे मान-सम्मान की साजिशन लड़ाई करवाकर क्षणिक रूप से स्त्री समाज को अपमानित करवा जीवनभर और युगों युगों के लिए अपनी दूकान चलाते और नारी समाज का जीवन नर्क बनाते हैं| लेकिन अब नारी समाज को भी अपनी थोड़ी मेधा और प्रतिभा दीर्घकालिक उचित और अनुचित ध्यान देने में खर्च करनी पड़ेगी केवल सीधा रास्ता घोड़ा दौडाने की विद्या नहीं रखनी होगी|    ------- ----------जिन प्रश्नो का दुनिया में कोई विद्वान से विद्वान उत्तर सार्वजनिक रूप से नहीं दिया उन सब प्रश्नो का उत्तर बहुत सरल विधि से वेवाक स्वरुप में उसके द्वारा अपने ब्लॉग "Vivekanand and Modern Tradition" में 2006 से लेकर मई, 2013 और पुनः अगस्त, 2013 से लेकर आज तक दिया गया है| तो जाहिर सी बात है की इस संसार के कमजोर दिल वाले उसका साथ प्रत्यक्ष छोड़ दिए होंगे पर अंतर्मन से जो स्नेहीजन हैं उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा है व्यक्तिगत सम्पर्को से लगातार विदित होता रहा है और पर हाँ प्रत्यक्ष उसका सहयोग छोड़ दिए होगें और उसके बाद भी वह आत्म निर्भर रूप में अपने व्यवसाय, शिक्षा और शोध में कार्यरत होगा इतना तो समझना ही होगा पर विदेश वाले और उनके अभिकर्ता बने लोग इतना जाने की दूरदृष्टि से देखा जाय तो मेरे किसी लेख से मानवता को, देश को और विदेश को कोई हानि नहीं होने वाली है अपितु लाभ ही लाभ है केवल वैश्विक सहमति बनाने की कमी हो सकती है| ----और यही कारन रहा है की मुझे 2008 में किसी भी देश में ले जाने का प्रस्ताव हुआ था और मै कभी भी विदेश अपने निजी कार्यो से जाने या रहने से इंकार किया उसके बाद से मैंने अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं कराया है क्या किसी प्रतिष्ठित विश्विद्यालय या अन्य विश्विद्यालय के किसी भूविज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान, महासागर व् जालवायु विज्ञान का शिक्षक बिना पासपोर्ट का होगा? क्या उसकी साँसे नहीं थम जाएगी यदि उससे कह दिया जाय की आप का पासपोर्ट जब्त किया जाता है और आप कभी विदेश मत जाइये या वह अपनी इक्षा से अपना पासपोर्ट न बनवाये या नवीनीकरण न कराये ऐसे विषय के शिक्षक से जिस विषय में जिसमे अंतरास्ट्रीय सम्पर्क और आवा गमन सामान्य प्रक्रिया है|----------किस बराबरी की बात होती है? -<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

शुक्राचार्य मै आप के दिशानिर्देशन में कार्यरत प्रयागराज वालों द्वारा दी गयी परिश्थितिओं में उनके उन दिनों की नादानी के समय से आज तक कार्यरत हूँ जिन दिनों की उनकी कारगुजारी की ही उपज थी विश्व्यापकमहाविभीषिका जिसका परिणाम है विश्वमहापरिवर्तन जो सहस्राब्दीमहापरिवर्तन की शक्ल में आया है और अब उसका संक्रमण ही नहीं उत्तर संक्रमणकाल चल रहा है फिर भी नादानी जारी है बच्चों जैसी तो बचकाने हरकत वालों को बचकाने का परिणाम ही सही मिलेगा तो अवश्य ही! क्या सनातन सशरीर परमब्रह्म राम/कृष्ण का भी कोई एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव हुआ है आज तक की सृष्टि में? तो उत्तर है की सनातन राम और कृष्ण के सिवा बलराम और परशुराम या कोई अन्य राम कभी भी परमब्रह्म अवस्था न प्राप्त कर सका तो ऐसे मे इसमें से कोई सशरीर परमब्रह्म सनातन राम/कृष्ण मतलब शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता है|

शुक्राचार्य मै आप के दिशानिर्देशन में कार्यरत प्रयागराज वालों द्वारा दी गयी परिश्थितिओं में उनके उन दिनों की नादानी के समय से आज तक कार्यरत हूँ जिन दिनों की उनकी कारगुजारी की ही उपज थी विश्व्यापकमहाविभीषिका जिसका परिणाम है विश्वमहापरिवर्तन जो सहस्राब्दीमहापरिवर्तन की शक्ल में आया है और अब उसका संक्रमण ही नहीं उत्तर संक्रमणकाल चल रहा है फिर भी नादानी जारी है बच्चों जैसी तो बचकाने हरकत वालों को बचकाने का परिणाम ही सही मिलेगा तो अवश्य ही! क्या सनातन सशरीर परमब्रह्म राम/कृष्ण का भी कोई एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव हुआ है आज तक की सृष्टि में? तो उत्तर है की सनातन राम और कृष्ण के सिवा बलराम और परशुराम या कोई अन्य राम कभी भी परमब्रह्म अवस्था न प्राप्त कर सका तो ऐसे मे इसमें से कोई सशरीर परमब्रह्म सनातन राम/कृष्ण मतलब शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव) का एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता है|<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

जो संसार किसी के जीते जी सशरीर दफन/समाधि होने से चलायमान है उसमें हर एक सदस्य को अपने किये का भुगतना देर-सबेर करना ही है पर यह भी सत्य है की अनजाने या बलात या पारिश्थितिक मजबूरी का लाभ उठाकर उसे मजबूर कर अगर उससे कोई गलत कराया गया हो तो जिसने इस कार्य को अंजाम दिया उसे भुगतान करना होगा| व्यवहार मे जो कुछ भी हो पर प्रमाणिक सत्य यही है कि अगर समाधिष्ठ/जीते जी दफन होने वाला स्वयम सशरीर सावित है तो फिर इस संसार में कोई वास्तविक रूप में उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कहाॅ|

जो संसार किसी के जीते जी सशरीर दफन/समाधि होने से चलायमान है उसमें हर एक सदस्य को अपने किये का भुगतना देर-सबेर करना ही है पर यह भी सत्य है की अनजाने या बलात या पारिश्थितिक मजबूरी का लाभ उठाकर उसे मजबूर कर अगर उससे कोई गलत कराया गया हो तो जिसने इस कार्य को अंजाम दिया उसे भुगतान करना होगा| व्यवहार मे जो कुछ भी हो पर प्रमाणिक सत्य यही है कि अगर समाधिष्ठ/जीते जी दफन होने वाला स्वयम सशरीर सावित है तो फिर इस संसार में कोई वास्तविक रूप में उसका एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ कहाॅ|<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

मै बता चुका हूँ की डॉ अभयचन्द बाबा जिनका जीवन देश के कोने-कोने तक स्वयंसेवा में ही गुजर गया उन्होंने ही कहा था की जो आज तक के इतिहास में मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्ण दोनों बन चुका हो उसका सामान्य स्वयंसेवक बने रहना वैसे ही है जैसे की डी. एससी. के बाद पुनः प्राथमिक कक्षा में पढ़ने का आचरण करना| फिर भी मै सामान्य स्वयंमसेवक का दायित्व वैसे ही निभा रहा हूँ जैसे की जीवन के हर क्षेत्र में सामान्यजन होकर जी रहा हूँ| तो पुनः बताना चाहूंगा की मै सदा-सर्वदा रामनुचारी आचरण वाला विश्व्यपकमहाविभीषिका के दौरान ब्रह्मज्ञान में होते हुए मतलब ब्रह्मज्ञानी होते हुए भी जहाँ समुचित पात्र के अभाव में विषपानकर्ता नीलकंठ महादेव का दायित्व तो निभा ही रहा था उस पर परमपिता परमेश्वर, प्रेमचन्दःसोमनाथःशिव के आदेशानुसार प्रयागराज में ही बने रहने हेतु मात्र भेजा गया किन्तु परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु के निर्देशानुसार 2003 से कूर्मावतारी विष्णु का दायित्व भी निभाना पड़ा इसी प्रयागराज में अपने को अवश्थित करते हुए ( नीलकंठ महादेव का दायित्व निर्वहन करने के साथ वास्तविक कूर्मावतारी विष्णु की जरूरत के लिए कोई उचित सक्षम पात्र न होने की वजह से)| तो फिर क्या रह गया सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश), कृष्ण होने में तो 16/29 मई 2006 और 11/18 सितम्बर, 2007 को कृष्ण भी हो गया और 2008 में कृष्ण के साथ सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश), राम भी हो गया| ऐसे में 29/30 अक्टूबर, 2009 को सशरीर परमब्रह्म अवश्था के लिए मतलब इस संसार का एकल स्वरुप में ब्रह्मा+ विष्णु+ महेश मतलब इस संसार में सबका एकल स्वरुप में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने में क्या शेष रहा? तो बाबा डॉ अभयचन्द ने क्या गलत कहा था की "जो आज तक के इतिहास में मात्र सो सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्ण दोनों बन चुका हो उसका सामान्य स्वयंसेवक बने रहना वैसे ही है जैसे की डी. एससी. के बाद पुनः प्राथमिक कक्षा में पढ़ने का आचरण करना"|---तो आप लोग अब यही समझिये की सामान्य स्वयसेवक का दायित्व निभा रहा हूँ और जीवन के व्यापक क्षेत्र में सामान्यजन की तरह जीवन यापन कर रहा हूँ| ऐसे में ऐसे दौर से गुजरते हुए जिस किसी को भी आप लोग मेरा प्रतिस्पर्धी तय करते गए वे सब मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकते थे, न हैं और न होंगे और इस संसार में वही नहीं कोई मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ वरिष्ठ आज तक हो ही नहीं सका था, न सका है और न होगा और अगर हुआ भी तो उसमे और हमारे में कोई अंतर नहीं होगा मतलब वह भी मैं ही होऊंगा, हुआ था और हूँ भी| अतः व्यवहारिक प्रतिस्पर्धा कोई जारी रखना चाहे तो रखे मै पूर्ण मनोयोग से मानवता के सुसंचालन हेतु उसका सहज भाव से सहयोग करूंगा इस कार्य में मानवता को गतिमान रखने और संरक्षित रखने की सीमा के अंदर पर कोई अपनी कुटिल चाल की सिद्धि हेतु मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ खड़ा करता रहेगा तो जब की अब मेरा कार्य सिद्ध हो चुका है 29/30 नवम्बर, 2016 में तो फिर अगर बराबरी की बात आयी तो मै उसी तरह की अगर मर्यादा छोड़ उसका जबाब देना सुरु करूंगा तो फिर यह स्वयं उसपर और सम्पूर्ण मानवता पर भरी पडेगा क्योंकि मानवता के अभीष्ट हित हेतु आज भी कोई मेरा स्थान नहीं ले सका है और न ले पायेगा|

मै बता चुका हूँ की डॉ अभयचन्द बाबा जिनका जीवन देश के कोने-कोने तक स्वयंसेवा में ही गुजर गया उन्होंने ही कहा था की जो आज तक के इतिहास में मात्र दो सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्ण दोनों बन चुका हो उसका सामान्य स्वयंसेवक बने रहना वैसे ही है जैसे की डी. एससी. के बाद पुनः प्राथमिक कक्षा में पढ़ने का आचरण करना| फिर भी मै सामान्य स्वयंमसेवक का दायित्व वैसे ही निभा रहा हूँ जैसे की जीवन के हर क्षेत्र में सामान्यजन होकर जी रहा हूँ| तो पुनः बताना चाहूंगा की मै सदा-सर्वदा रामनुचारी आचरण वाला विश्व्यपकमहाविभीषिका के दौरान ब्रह्मज्ञान में होते हुए मतलब ब्रह्मज्ञानी होते हुए भी जहाँ समुचित पात्र के अभाव में  विषपानकर्ता नीलकंठ महादेव का दायित्व तो निभा ही रहा था उस पर परमपिता परमेश्वर, प्रेमचन्दःसोमनाथःशिव के आदेशानुसार प्रयागराज में ही बने रहने हेतु मात्र भेजा गया किन्तु परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर:विष्णु के निर्देशानुसार 2003 से कूर्मावतारी विष्णु का दायित्व भी निभाना पड़ा इसी प्रयागराज में अपने को अवश्थित करते हुए ( नीलकंठ महादेव का दायित्व निर्वहन करने के साथ वास्तविक कूर्मावतारी विष्णु की जरूरत के लिए कोई उचित सक्षम पात्र न होने की वजह से)| तो फिर क्या रह गया सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश), कृष्ण होने में तो 16/29 मई 2006 और 11/18 सितम्बर, 2007 को कृष्ण भी हो गया और 2008 में कृष्ण के साथ सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश), राम भी हो गया| ऐसे में 29/30 अक्टूबर, 2009 को सशरीर परमब्रह्म अवश्था के लिए मतलब इस संसार का एकल स्वरुप में ब्रह्मा+ विष्णु+ महेश मतलब इस संसार में सबका एकल स्वरुप में ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ होने में क्या शेष रहा? तो बाबा डॉ अभयचन्द ने क्या गलत कहा था की "जो आज तक के इतिहास में मात्र सो सशरीर परमब्रह्म (एकल स्वरुप ब्रह्मा+विष्णु+महेश) मतलब राम और कृष्ण दोनों बन चुका हो उसका सामान्य स्वयंसेवक बने रहना वैसे ही है जैसे की डी. एससी. के बाद पुनः प्राथमिक कक्षा में पढ़ने का आचरण करना"|---तो आप लोग अब यही समझिये की सामान्य स्वयसेवक का दायित्व निभा रहा हूँ और जीवन के व्यापक क्षेत्र में सामान्यजन की तरह जीवन यापन कर रहा हूँ| ऐसे में ऐसे दौर से गुजरते हुए जिस किसी को भी आप लोग मेरा प्रतिस्पर्धी तय करते गए वे सब मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकते थे, न हैं और न होंगे और इस संसार में वही नहीं कोई मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ वरिष्ठ आज तक हो ही नहीं सका था, न सका है और न होगा और अगर हुआ भी तो उसमे और हमारे में कोई अंतर नहीं होगा मतलब वह भी मैं ही होऊंगा, हुआ था और हूँ भी| अतः व्यवहारिक प्रतिस्पर्धा कोई जारी रखना चाहे तो रखे मै पूर्ण मनोयोग से मानवता के सुसंचालन हेतु उसका सहज भाव से सहयोग करूंगा इस कार्य में मानवता को गतिमान रखने और संरक्षित रखने की सीमा के अंदर पर कोई अपनी कुटिल चाल की सिद्धि हेतु मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ खड़ा करता रहेगा तो जब की अब मेरा कार्य सिद्ध हो चुका है 29/30 नवम्बर, 2016 में तो फिर अगर बराबरी की बात आयी तो मै उसी तरह की अगर मर्यादा छोड़ उसका जबाब देना सुरु करूंगा तो फिर यह स्वयं उसपर और सम्पूर्ण मानवता पर भरी पडेगा क्योंकि मानवता के अभीष्ट हित हेतु आज भी कोई मेरा स्थान नहीं ले सका है और न ले पायेगा|<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

कोई रास्ट्रियता से ऊपर उठने पर ही अंतररास्ट्रीय होता हैं पर इसका मतलब यह नहीं की रास्ट्रीय हितों का बलिदान देकर हम अन्तर्रस्त्रिय बने, वरन हमारे अंतररास्ट्रीय कार्य ऐसे हों जो अपने रास्त्र के दीर्घ कालिक हित पर चोट न पहुंचाए। यही है हमारा वशुधैव कुटुम्बकम का पाठ। नेहरु, गांधी और सरदार पटेल को जोड़ने की कड़ी यही से हमें प्राप्त होती है।

कोई रास्ट्रियता से ऊपर उठने पर ही अंतररास्ट्रीय होता हैं पर इसका मतलब यह नहीं की रास्ट्रीय हितों का बलिदान देकर हम अन्तर्रस्त्रिय बने, वरन हमारे अंतररास्ट्रीय कार्य ऐसे हों जो अपने रास्त्र के दीर्घ कालिक हित पर चोट न पहुंचाए। यही है हमारा वशुधैव कुटुम्बकम का पाठ। नेहरु, गांधी और सरदार पटेल को जोड़ने की कड़ी यही से हमें प्राप्त होती है।<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

We are first Indian then Hindu, Muslim and Christian.----मेरे देश की अस्मिता ही मिट जायेगी मेरे रहते तो तो हम किश बात के हिन्दू, किस बात के मुस्लिम और किश बात के इसाई। मतलब जिस देश की अस्मिता मिट गयी उस देश के विविध धर्मावलम्बियों के रहते हुए तो सभी धर्मावलम्बी धर्मात्मा के नाम पर भिखारी कहे जायेंगे।---इतना तो जरूर है की जो भारत माँ नहीं कह सकता तो कम से कम उसे भारत रास्ट्र कहने से परहेज नहीं होना चाहिए है।-----At least we should protest against enemies of our country. We defeate them or become winner it is based on our power. Then we can say, "I have proud of our country and religion".

We are first Indian then Hindu, Muslim and Christian.----मेरे देश की अस्मिता ही मिट जायेगी मेरे रहते तो तो हम किश बात के हिन्दू, किस बात के मुस्लिम और किश बात के इसाई। मतलब जिस देश की अस्मिता मिट गयी उस देश के विविध धर्मावलम्बियों के रहते हुए तो सभी धर्मावलम्बी धर्मात्मा के नाम पर भिखारी कहे जायेंगे।---इतना तो जरूर है की जो भारत माँ नहीं कह सकता तो कम से कम उसे भारत रास्ट्र कहने से परहेज नहीं होना चाहिए है।-----At least we should protest against enemies of our country. We defeate them or become winner it is based on our power. Then we can say, "I have proud of our country and religion".<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Tuesday, August 22, 2017

प्रगतिशील सच्चाई का अनुसरण ही आर्यों की निशानी है और यही किशी पुरुष या स्त्री को श्रेष्ठ बनाता है। अतः इसी से किशी के आर्य होने का निर्धारण होता है जो की व्यक्ति के परिवार के संस्कार, उसके पारिस्थितिकीय वातावरण व् सामाजिक पर्यावरणीय संस्कृति और सभ्यता पर भी निर्भर करती है न कि किशी की नश्ल और रंग से पर किन्तु हाँ यह भी सत्य है की अलग-अलग नश्ल और अलग-अलग रँग लोगों का अनुपात अलग-अलग हो सकता है आनुवांशिक विज्ञान के प्रभाव स्वरुप व्यक्ति के शरीर के अंदर बायोकैमिकल प्रवाह के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की स्थायी वैज्ञानिक क्रियाशीलता व् अनुशीलन के आचरण के परिणामतः|-----सकारात्मकता ही पृथ्वी पर मानवता को नियंत्रित करती है। अतः सदैव सकारात्मक करे और सकारात्मक बनें और दूसरों को भी सकारात्मक बनायें और सकारात्मक करने के लिए प्रेरित करें। इसी में मानवता का कल्याण निहित है।

प्रगतिशील सच्चाई का अनुसरण ही आर्यों की निशानी है और यही किशी पुरुष या स्त्री को श्रेष्ठ बनाता है। अतः इसी से किशी के आर्य होने का निर्धारण होता है जो की व्यक्ति के परिवार के संस्कार, उसके पारिस्थितिकीय वातावरण व् सामाजिक पर्यावरणीय संस्कृति और सभ्यता पर भी निर्भर करती है न कि किशी की नश्ल और रंग से पर किन्तु हाँ यह भी सत्य है की अलग-अलग नश्ल और अलग-अलग रँग लोगों का अनुपात अलग-अलग हो सकता है आनुवांशिक विज्ञान के प्रभाव स्वरुप व्यक्ति के शरीर के अंदर बायोकैमिकल प्रवाह के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की स्थायी वैज्ञानिक क्रियाशीलता व् अनुशीलन के आचरण के परिणामतः|-----सकारात्मकता ही पृथ्वी पर मानवता को नियंत्रित करती है। अतः सदैव सकारात्मक करे और सकारात्मक बनें और दूसरों को भी सकारात्मक बनायें और सकारात्मक करने के लिए प्रेरित करें। इसी में मानवता का कल्याण निहित है।<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

अगर साम्यवाद का या अन्य वाद का मतलब जाती और धर्म का अंत करना है तो उस साम्यवाद या अन्य वाद का अंत अपने आप हो जायेगा। समानता केवल उपरी आवरण से नहीं होती वल्कि अंतर्मन और ह्रदय से भी समानता स्थापित होती है और उसके लिए आन्दोलन नहीं अच्छे सामाजिक वातावरण की जरूरत होती है जिसमे सभी अपने कर्तव्यों के करने में आनंद महशूस करें । अतः जाती और धर्म के अंत करने का सपना छोड़ दें आप लोग वह भी भारत में। क्योंकि जाती और धर्म को मानने वाले किशी को दलित नहीं बनाते वरन सामजिक बुराइयां और सामाजिक आवारापन इसके लिए जिम्मेदार है।

अगर साम्यवाद का या अन्य वाद का मतलब जाती और धर्म का अंत करना है तो उस साम्यवाद या अन्य वाद का अंत अपने आप हो जायेगा। समानता केवल उपरी आवरण से नहीं होती वल्कि अंतर्मन और ह्रदय से भी समानता स्थापित होती है और उसके लिए आन्दोलन नहीं अच्छे सामाजिक वातावरण की जरूरत होती है जिसमे सभी अपने कर्तव्यों के करने में आनंद महशूस करें । अतः जाती और धर्म के अंत करने का सपना छोड़ दें आप लोग वह भी भारत में। क्योंकि जाती और धर्म को मानने वाले किशी को दलित नहीं बनाते वरन सामजिक बुराइयां और सामाजिक आवारापन इसके लिए जिम्मेदार है।<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(गंगा=अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी अल्का है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Monday, August 21, 2017

हम सुसंस्कृत हो यह तो उचित है पर विश्व या भारत के अन्य स्थान के व्यक्ति समूह या नागरिकों को या किसी अन्य व्यक्ति को ऐयासपूर्ण जीवन उपलब्ध कराते रहने के लिए हम इतना कठोर जीवन अपना लें की वह क्रूरता की और कठोरता की सीमा पार कर जाय और हमारे और हमारे समाज और राष्ट्र के नागरिकों के जीवन में सामान्य प्रेम भाव और जीवन रस भी न रह जाय तो ऐसे कठोर जीवन का हमें और हमारे समाज और हमारे राष्ट्र के नागरिकों को क्या लाभ?

हम सुसंस्कृत हो यह तो उचित है पर विश्व या भारत के अन्य स्थान के व्यक्ति समूह या नागरिकों को या किसी अन्य व्यक्ति को ऐयासपूर्ण जीवन उपलब्ध कराते रहने के लिए हम इतना कठोर जीवन अपना लें की वह क्रूरता की और कठोरता की सीमा पार कर जाय और हमारे और हमारे समाज और राष्ट्र के नागरिकों के जीवन में सामान्य प्रेम भाव और जीवन रस भी न रह जाय तो ऐसे कठोर जीवन का हमें और हमारे समाज और हमारे राष्ट्र के नागरिकों को क्या लाभ?<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

मौलिक मानव् मूल्य और विषयगत ज्ञान के अलावा ईश्वरीय गुण सम्पन्नता और अद्वितीय व्यक्तित्व भी पुरुषार्थ की गुणवत्ता और महत्ता में परिणामी भूमिका का निर्वहन कर मानवता के सुसंचाल में संख्याबल को मात दे सकता है:-----अगर इस वैश्विक युग/विश्व एक गाँव युग या अखण्ड विश्व युग में हिन्दू धर्म के अंदर किसी भी संस्कार को रूढ़िवादी इस लिए करार दिया जाय की उस पर संख्याबल का विरोध है और ऐसे संस्कार के ऊपर संख्याबल का विचार थोपा जाय तो अगर इसी तरह अगर इस वैश्विक युग/विश्व एक गाँव युग या अखण्ड विश्व युग में संख्याबल के आधार पर ही जीत और हार निर्धारित होना है तो वैश्विक मानवता (विश्व के सभी धर्मो के अनुयायियों) के मूल धर्म मतलब सनातन धर्म मतलब आज भी जो लोग अपने को सनातन धर्मी कहते हैं मतलब आज के इस युग के हिन्दू धर्मियों को ईसाइयत और इस्लाम से हार मान अपने सब संस्कार छोड़ देने चाहिए क्योंकि वे बहुसंख्यक है और आप के अधिकतर संस्कार को वे अमान्य करार देते है?

मौलिक मानव् मूल्य और विषयगत ज्ञान के अलावा ईश्वरीय गुण सम्पन्नता और अद्वितीय व्यक्तित्व भी पुरुषार्थ की गुणवत्ता और महत्ता में परिणामी भूमिका का निर्वहन कर मानवता के सुसंचाल में संख्याबल को मात दे सकता है:-----अगर इस वैश्विक युग/विश्व एक गाँव युग या अखण्ड विश्व युग में हिन्दू धर्म के अंदर किसी भी संस्कार को रूढ़िवादी इस लिए करार दिया जाय की उस पर संख्याबल  का विरोध है और ऐसे संस्कार के ऊपर संख्याबल का विचार थोपा जाय तो अगर इसी तरह अगर इस वैश्विक युग/विश्व एक गाँव युग या अखण्ड विश्व युग में संख्याबल के आधार पर ही जीत और हार निर्धारित होना है तो वैश्विक मानवता (विश्व के सभी धर्मो के अनुयायियों) के मूल धर्म मतलब सनातन धर्म मतलब आज भी जो लोग अपने को सनातन धर्मी कहते हैं मतलब आज के इस युग के हिन्दू धर्मियों को ईसाइयत और इस्लाम से हार मान अपने सब संस्कार छोड़ देने चाहिए क्योंकि वे बहुसंख्यक है और आप के अधिकतर संस्कार को वे अमान्य करार देते है?<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

Sunday, August 20, 2017

श्रीराम और श्रीकृष्ण का शास्त्र सम्मत वर्णित रूप मेघवर्णं (cloud color)=साँवला (सामान्यतः न तो केवल अति शुभ्र ही और न तो केवल अति काला ही ) मतलब जिसमे मिला दो उसी जैसा। शुभ्र वर्ण तो केवल ब्रह्मा और शिव का है। विष्णु का शास्त्र सम्मत वर्णित रूप मेघवर्णं है:-----------------------------------श्रीराम के समानांतर इस्लाम का और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत का संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। न तो श्रीराम के समानान्तर चलने वाला इस्लाम स्वयं श्रीराम का दुश्मन है और न तो श्रीकृष्ण के समानांतर चलने वाला ईसाइयत श्रीकृष्ण का दुश्मन है क्योंकि दोनों जानते हैं की श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों एक है और दोनों ही इस जगत के आधार है|--------------राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।

श्रीराम और श्रीकृष्ण का शास्त्र सम्मत वर्णित रूप मेघवर्णं (cloud color)=साँवला (सामान्यतः न तो केवल अति शुभ्र ही और न तो केवल अति काला ही ) मतलब जिसमे मिला दो उसी जैसा। शुभ्र वर्ण तो केवल ब्रह्मा और शिव का है। विष्णु का शास्त्र सम्मत वर्णित रूप मेघवर्णं है:-----------------------------------श्रीराम के समानांतर इस्लाम का और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत का संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। न तो श्रीराम के समानान्तर चलने वाला इस्लाम स्वयं श्रीराम का दुश्मन है और न तो श्रीकृष्ण के समानांतर चलने वाला ईसाइयत श्रीकृष्ण का दुश्मन है क्योंकि दोनों जानते हैं की श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों एक है और दोनों ही इस जगत के आधार है|--------------राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।>>>>>>>जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>.Reproduced Fact: इस्लामियत और ईसाइयत के एडम/आदम:प्रथम आदमी और सनातन हिन्दू (मूल जो मूलतः ब्राह्मण, क्षत्रिय व् वैश्य जाती/धर्म व् इन तीनों के ही अनेकोनेक व्युत्पन्न है) धर्म के मनु:प्रथम मानव जब कश्यप ऋषि ही थे मतलब दशरथ और वशुदेव ही थे तो मेरे द्वारा (As per English men E-Mails time to time, Hi! five:5:PANDEY द्वारा ) सिद्ध किये हुए 5 प्रमुख तथ्य पूर्णतः सत्य हैं (इस्लाम राम के सामानांतर जरूर चलता पर राम का दुश्मन नहीं और ईसाइयत कृष्ण के सामानांतर जरूर चलता है पर वह कृष्ण का दुश्मन नहीं क्योंकि दोनों नहीं चाहते हैं की रामकृष्ण का अंत हो बल्कि वे इन्हे अपना आधार मानते हैं) १)हिन्द=जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी और भारत=भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत| २) इस्लाम समानांतर चलता है श्रीराम के और ईसाइयत सामानांतर चलती है श्रीकृष्ण के और जिस प्रकार श्रीराम बड़े हैं श्रीकृष्ण के उसी प्रकार इस्लाम बड़ा भाई है ईसाइयत का।दलित समाज श्रीहनुमान के समानांतर चलता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है| 3) हिन्द भूमि(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी) न की केवल भारतवर्ष भूमि(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत) कई बार आर्यावर्त हो चुका है हस्तिनापुर राजा भरत के भारतवर्ष को आर्यावर्त घोषित करने के पहले तो आइये हम विश्व महासंघ को भी आर्यावर्त बनाये मतलब विश्व का हर नागरिक श्रेष्ठ(आर्य) हो(आर्य प्रगतिशील सच्चाई का अनुयायी ही आर्य है)। 4) श्रीराम के समानांतर इस्लाम और श्रीकृष्ण के समानांतर ईसाइयत संचालन ही सिद्ध करता है की तुम (इस्लाम और ईसाइयत) मेरे हो मतलब आप दोनों की उपज भी सनातन धर्मी ही है। यह अलग की गाय, गंगा, गीता, गायत्री और गौरी (नारी समाज का प्रतीक नाम: नारी समाज के प्रति आचरण) पर मतभेद रह गया है। Origin in the different climatic system may causes these differences. 5) इस संसार को चलाने के लिए सनातन हिन्दू संस्कृति के साथ ही साथ अन्य धर्म की शिक्षा-संस्कृति और परम्पराओं की भी जरूरत है भौगोलिक जलवायु खंड को ध्यान में रखते हुए पर इसका मतलब यह नहीं की ये सनातन संस्कृति की सीमा से परे हैं।*******जय हिन्द(जम्बूद्वीप =यूरेसिआ=यूरोप+एशिया= या कम से कम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी), जय भारत(भारतवर्ष=भरत-खंड=अखंड भारत), जय श्रीराम/कृष्ण।>>>>>>>>>>>>>>>>>>अगर इस्लाम(जो श्रीराम के सामानांतर चलता है और श्रीराम के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) को श्रीराम की चाहत है तो श्रीराम बनकर दिखला दो वह आप का हो जाएगा और यदि ईसाइयत(जो श्रीकृष्ण के सामानांतर चलता है और श्रीकृष्ण के न रहने अनियंत्रित हो जाता है) श्रीकृष्ण की चाहत है तो श्रीकृष्ण बनकर दिखला दीजिये वह आप का हो जाएगा और यदि दलित समाज (जो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के समानांतर चलता है और आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान के न रहने पर अनियंत्रित हो जाता है पर अब तो आम्बेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान का नाम जाप करता है पर यही नही जानता की इन्द्रिय नियंत्रण इन्ही से शीखते है) को आंबेडकर/अम्बवादेकर/श्रीहनुमान की चाहत है तो फिर श्रीहनुमान बनकर दिखला दो तो वह आप का हो जाएगा।>>>>>>>>>>राम नाम सनातन संस्कृति का नाम है जिसमे से रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय राम सर्व व्यापक सशरीर परमब्रह्म (ब्रह्मा+विष्णु+महेश)/ब्रह्म हैं। और राम वह है जो शिव की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) को जाला दे या विष्णु की तरह भव सागर के पापों(कुकृत्यों) का नाश कर हमें निर्मल और सज्जन बना दे। तो राम शब्द में ही शिव और विष्णु दोनों के गुण अपने आप में निहित है तो रह जाती है ब्रह्मा की बात तो इसके पीछे तथ्य है की इस श्रिष्टि में केवल राम ही अपने में पूर्णतः विवेक मतलब आदि त्रिदेवी मतलब त्रिदेवियों में आद्या मतलब सरस्वती के ज्येष्ठ मानस पुत्र कहे जाने से सभी त्रिदेवों के गुण इनमे अपने आप में समाहित हो जाता है। तो हम कह सकते हैं की राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न नाम ऐसे ही रघुवंशीय/इक्षाकुवंशीय/सूर्यवंशीय/कश्यप गोत्रीय दसरथ के कुलगुरु वशिष्ठ ने ऐसे ही नहीं दिए थे वरन ये नाम अपने में ही सनातन नाम हैं और उन नामों में ही उनके गुण छुपे हैं। अगर सीता श्रिष्टि तो राम उस श्रिष्टि के प्राण है और इस प्रकार अगर सीता और राम दोनों इस संसार में अस्तित्व में हैं तो दोनों एक दूसरे के पूरक है इससे ज्यादा मैं कह ही क्या सकता हूँ।<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण| 

जो विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो:---- जो सहस्राब्दी परिवर्तन के संक्रमण काल में सभी शोषक देशों द्वारा बनाई भविष्य काल की अनीतियों से प्रभावित हो उपजी विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो इसी केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवमं महासागर अध्धययन केंद्र में आये और गए सिद्धगत जनों का भी तो अब उसी का का वरिष्ठ और कनिष्ठ प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय वाले क्या तय करेंगे उसके सहकर्मियों के अंदर ही जब अपने क्षेत्र का कोई सिद्धगत उम्रगत वरिष्ठ भी उसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता?

जो विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो:---- जो सहस्राब्दी परिवर्तन के संक्रमण काल में सभी शोषक देशों द्वारा बनाई भविष्य काल की अनीतियों से प्रभावित हो उपजी विश्व महाविभीषिका के दौर में अपने से उम्रगत ज्येष्ठ और वरिष्ठ सबका आधार और शिखर सिद्ध हुआ हो इसी केदारेश्वर बनर्जी वायुमंडलीय एवमं महासागर अध्धययन केंद्र में आये और गए सिद्धगत जनों का भी तो अब उसी का का वरिष्ठ और कनिष्ठ प्रयागराज और प्रयागराज विश्विद्यालय वाले क्या तय करेंगे उसके सहकर्मियों के अंदर ही जब अपने क्षेत्र का कोई सिद्धगत उम्रगत वरिष्ठ भी उसका जेष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ नहीं हो सकता?<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

रूप-यौवन और पुरुषार्थ सभी लोगो द्वारा संभाले नहीं सँभलते हैं केवल आई. आई. टी. एवं एम. आई. टी. से शिक्षा क्या ली आप के बेटे ने युगों-युगों से इस आई. आई. टी. एवं एम. आई. टी. समेत नासा और कैम्ब्रिज-ऑक्सफ़ोर्ड और सम्पूर्ण शिक्षा समेत सभी पुरुषार्थ के स्वामी के बाप के बाप लोगों के भी बाप बन बैठे आप के बेटे? आप लोग किस मुख से कहते थे की चारित्रिक और आर्थिक भ्रस्टाचार केवल केवल सावर्ण और गोरे लोगों के लडके ही करते हैं? वस् गलती करने का मौक़ा और ओहदा/स्थान मिलना चाहिए यह गलती सबसे होती है पर जो जन्म जन्म से उच्च संस्कारों और उच्च अनुशासन में पला होता है उससे अवश्य गलतिया अन्य लोगों की तुलना में कम होती है समान मौक़ा और ओहदे/स्थान पर होते हुए भी? तो जिस प्रकार कर्म का असर होता है गतिज पुरुषार्थ/ऊर्जा के रूप में उसी प्रकार जन्म से मिलते रहने वाले संस्कारों से स्थितिज पुरुषार्थ/ ऊर्जा मिलती रहती है और जिसमे दोनों पुरुषार्थ/ऊर्जा होता है वही सर्वशक्तिमान होता है। तो जन्म के संस्कार जिस घर से प्राप्त होते हैं या जिस सामाजिक समूह के वातावरण की देन होते हैं वह परिवार और वह समाज विशेष भी माने रखता है। अतः सम्पूर्ण पृरुषार्थ की दृष्टि से जन्म और कर्म एक दुसरे के पूरक हैं और कोई आचार-विचार-व्यवहार-संस्कार-संस्कृति के साथ साथ उच्च गुण भी रखता है तो निश्चित रूप से वह श्रेष्ठ कहा जाएगा जबकी मौलिक अधिकार और कर्तव्य सबके भले ही समान हों।

रूप-यौवन और पुरुषार्थ सभी लोगो द्वारा संभाले नहीं सँभलते हैं केवल आई. आई. टी. एवं एम. आई. टी. से शिक्षा क्या ली आप के बेटे ने युगों-युगों से इस आई. आई. टी. एवं एम. आई. टी. समेत नासा और कैम्ब्रिज-ऑक्सफ़ोर्ड और सम्पूर्ण शिक्षा समेत सभी पुरुषार्थ के स्वामी के बाप के बाप लोगों के भी बाप बन बैठे आप के बेटे? आप लोग किस मुख से कहते थे की चारित्रिक और आर्थिक भ्रस्टाचार केवल केवल सावर्ण और गोरे लोगों के लडके ही करते हैं? वस् गलती करने का मौक़ा और ओहदा/स्थान मिलना चाहिए यह गलती सबसे होती है पर जो जन्म जन्म से उच्च संस्कारों और उच्च अनुशासन में पला होता है उससे अवश्य गलतिया अन्य लोगों की तुलना में कम होती है समान मौक़ा और ओहदे/स्थान पर होते हुए भी? तो जिस प्रकार कर्म का असर होता है गतिज पुरुषार्थ/ऊर्जा के रूप में उसी प्रकार जन्म से मिलते रहने वाले संस्कारों से स्थितिज पुरुषार्थ/ ऊर्जा मिलती रहती है और जिसमे दोनों पुरुषार्थ/ऊर्जा होता है वही सर्वशक्तिमान होता है। तो जन्म के संस्कार जिस घर से प्राप्त होते हैं या जिस सामाजिक समूह के वातावरण की देन होते हैं वह परिवार और वह समाज विशेष भी माने रखता है। अतः सम्पूर्ण पृरुषार्थ की दृष्टि से जन्म और कर्म एक दुसरे के पूरक हैं और कोई आचार-विचार-व्यवहार-संस्कार-संस्कृति के साथ साथ उच्च गुण भी रखता है तो निश्चित रूप से वह श्रेष्ठ कहा जाएगा जबकी मौलिक अधिकार और कर्तव्य सबके भले ही समान हों।>>>>>>>>> आज वैश्विक चारित्रिक गिरावट के लिए वे सब जिम्मेदार हैं जो मेरा विरोध करते रहे हैं मतलब अधिकार तो दूसरों से छीना है पर उनकी तरह आचार-विचार-व्यवहार-संस्कार-संस्कृति इन पहलुओं के प्रति कर्तव्य जो उनका बनाता था/है उस स्थान को भरने के लिए उनके पास स्वयं कोई पैतृक आधारभूत गुण स्वयं नहीं रहा, केवल और केवल वे भौतिक अधिकार हांसिल किये जो आसानी से मिल सकता था पर वह सांस्कृतिक और नैतिक-आचार-विचार-व्यवहार-संस्कार को दे सकने की अवस्था में वे न तो कभी थे और न हैं। एक युग रहता था की किशी तरह से अपने और अपने परिवार का पेट पालने वाले और नैतिक-आचार-विचार-व्यवहार-संस्कार-संस्कृति से सम्पन्न एक व्यक्ति की दहाड़ भी सौ शाहजादों पर भारी पड़ जाती थी। >>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) ((बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी क्षत्रिय परिवार) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर:चंद्रशेखर:महादेव:शिव कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम(बेचनराम)/प्रदीप:सूर्यकांत:सूर्यस्वामी: आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म तिथि: 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]|| *******जय हिन्द ((जम्बूद्वीप=यूरेशिया=यूरोप +एशिया) या कम से कम ईरान से लेकर सिंगापुर और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी)), जय भारत(अखंडभारत=भरतखंड=भारतवर्ष), जय श्रीराम/कृष्ण।

ऐसे ही महान नीतियों व् विचारों से मुझे नियन्त्रिय किया जाएगा? अगर ऐसा है तो कर चुके आप मुझे नियन्त्रिय? छुद्र मानसिकता और छुद्र राजनीती इसी को कहते हैं जो व्यक्तिगत हित और अधिकार की तिलांजलि देते हुए विश्वमानवता की रक्षा हेतु सर्वोच्च त्याग, बलिदान और तप किया हो और इस प्रकार वैश्विक रूप से हर जातीय व् धार्मिक/पंथीय/सांप्रदायिक/वैचारिक(मतावलम्बी) या अन्य-अन्य अस्त्र का सामना करते हुए अपने अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त किया हो और सबको एक बार अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बीच वैश्विक समाज के सन्दर्भ में सामंजस्य बैठाने के लिए मजबूर किया हो और तब जब उसने 29/30 अक्टूबर, 2009 को यह सिद्ध कर दिया हो की इस संसार में उसका कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में नहीं है तो भी उसी समय से उसका इस संसार में एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ खोजा जा रहा है वह भी अभी तक नहीं खोजा जा सका, न है और न मिल भी सकता है यह तो कुछ हद तक सम्मान जनक रूप से ठीक है पर ग्रामीण जमीन के अपने एक छोटे से टुकड़े को परोक्ष रूप से ही सही विवादग्रस्त कर-करवा कर ऐसे अतिच्छूद्र विवाद में मुझे संलग्न करने का पूर्ण मनोयोग से प्रयास किया जाता है जो सुविचारिक नीतियों से विफल कर दिया जाता है जिस विवाद को प्रायोजित करने के केंद्र में कोई ब्राह्मण, कोई क्षत्रिय व् कोई वैश्य समाज नहीं बल्कि उसके केंद्र में वह उपजातीय/धार्मिक समूह होता है जो अपने लिए विशेष अधिकार माँगते है सेवा और शिक्षा समेत अन्य-अन्य सुविधाओ और अपने उपजातीय/धार्मिक समूह के रक्षण-संरक्षण हेतु विशेष क़ानून तक की सुविधा तक जिसमे शामिल है| ऐसा मत समझिये की ग्रामीण राजनीती और उसकी पृष्ठभूमि मै नहीं समझता वहां के आस-पास और उस ग्राम के भी वाशियों को ध्यान में रखते हुए?

ऐसे ही महान नीतियों व् विचारों से मुझे नियन्त्रिय किया जाएगा? अगर ऐसा है तो कर चुके आप मुझे नियन्त्रिय? छुद्र मानसिकता और छुद्र राजनीती इसी को कहते हैं जो व्यक्तिगत हित और अधिकार की तिलांजलि देते हुए विश्वमानवता की रक्षा हेतु सर्वोच्च त्याग, बलिदान और तप किया हो और इस प्रकार वैश्विक रूप से हर जातीय व् धार्मिक/पंथीय/सांप्रदायिक/वैचारिक(मतावलम्बी) या अन्य-अन्य अस्त्र का सामना करते हुए अपने अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त किया हो और सबको एक बार अपने कर्तव्यों और अधिकारों के बीच वैश्विक समाज के सन्दर्भ में सामंजस्य बैठाने के लिए मजबूर किया हो और तब जब उसने 29/30 अक्टूबर, 2009 को यह सिद्ध कर दिया हो की इस संसार में उसका कोई ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ एकल स्वरुप में नहीं है तो भी उसी समय से उसका इस संसार में एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ खोजा जा रहा है वह भी अभी तक नहीं खोजा जा सका, न है और न मिल भी सकता है यह तो कुछ हद तक सम्मान जनक रूप से ठीक है पर ग्रामीण जमीन के अपने एक छोटे से टुकड़े को परोक्ष रूप से ही सही विवादग्रस्त कर-करवा कर ऐसे अतिच्छूद्र विवाद में मुझे संलग्न करने का पूर्ण मनोयोग से प्रयास किया जाता है जो सुविचारिक नीतियों से विफल कर दिया जाता है जिस विवाद को प्रायोजित करने के केंद्र में कोई ब्राह्मण, कोई क्षत्रिय व् कोई वैश्य समाज नहीं बल्कि उसके केंद्र में वह उपजातीय/धार्मिक समूह होता है जो अपने लिए विशेष अधिकार माँगते है सेवा और शिक्षा समेत अन्य-अन्य सुविधाओ और अपने उपजातीय/धार्मिक समूह के रक्षण-संरक्षण हेतु विशेष क़ानून तक की सुविधा तक जिसमे शामिल है| ऐसा मत समझिये की ग्रामीण राजनीती और उसकी पृष्ठभूमि मै नहीं समझता वहां के आस-पास और उस ग्राम के भी वाशियों को ध्यान में रखते हुए?<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

कुछ लोग अवशेष या सतही रौनक भरे संसारिक व्यवस्था की राजनीति करते है पर यह अवशेष या व्यवस्था कम से कम संरक्षित या बनी है या बनी रहे इसके हेतु कुछ ऐसे भी त्यागी, बलिदानी व तपस्वी/योगी वृत्ति के महान लोग होते हैं जो सर्वदा इसके नेपथ्य में होते है, यह तथ्य मानव जीवन के हर क्षेत्र की इकाई, संस्था, संगठन, दल व राष्ट्र और वैश्विक मानवता के लिए अकाट्य सत्य है|

कुछ लोग अवशेष या सतही रौनक भरे संसारिक व्यवस्था की राजनीति करते है पर यह अवशेष या व्यवस्था कम से कम संरक्षित या बनी है या बनी रहे इसके हेतु कुछ ऐसे भी त्यागी, बलिदानी व तपस्वी/योगी वृत्ति के महान लोग होते हैं जो सर्वदा इसके नेपथ्य में होते है, यह तथ्य मानव जीवन के हर क्षेत्र की इकाई, संस्था, संगठन, दल व राष्ट्र और वैश्विक मानवता के लिए अकाट्य सत्य है|<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण

या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये। विश्व एक गाँव की व्यवस्था के लाभ को लेना प्रारम्भ कर देने वाले हर विश्व नागरिक को वैस्विक संप्रभुता के नियमों का पालन तो करना ही पडेगा और उसका एक ही उपचार है " या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये", इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रह गया है।>>>>> विदेशी मिसनरिया जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करती है और उसके संतुलन को प्रभावित करती हैं, उनके भारत स्थित अभिकर्ता और हिन्दू समाज के ही अन्य वर्ग के कुछ विशेष लोग यदि ब्राह्मण/सवर्ण समाज की लड़कियों के स्थान पर या उनके साथ ब्राह्मण के लड़कों के भी जीवन का ध्यान रखे होते या उनका भी साथ दिए होते और उनको भी अपने घर में जगह दिए होते वाह्य रूप से ही सही या ब्राह्मण/सवर्ण समाज का घर उजाड़ने का व्यापक कार्यक्रम न बनाये होते तो जो कुछ हुआ विगत दो दसक में वह न हुआ होता। जो कुछ हुआ था इन चौदह वर्ष में उसके लिए प्रायश्चित का कोई प्रश्न ही नहीं है वह तो एक झांकी भर था शक्ति प्रदर्शन और समान संप्रभुता के बंटवारे हेतु आधिकारिक रूप से प्रार्थना पत्र भरना भर था। विश्व समाज को पूर्ण रूपेण विचार करना चाहिए था की डॉन भाई(भगवा) की शक्ति/संयुक्त त्रिदेव शक्ति/परमब्रह्म शक्ति से स्व-स्व एकल त्रिदेव शक्ति संतुलन हेतु परमब्रह्म की शक्ति की पूर्ण संप्रभुता का बंटवारा कभी भी होता है तो हिस्सा एक तिहाई, एक तिहाई और एक तिहाई का ही होगा इनसे चाहे जितने जाती/धर्म ने अपना सामाजिक अस्तित्व पाया हो विभाजन होते होते या कोई अपनी संख्या शक्ति कितना ही क्यों न बढ़ा लिया हो जैसे शिव, विष्णु और ब्रह्मा के गुणात्मक विभाजन और सम्मिलन का अपना अलग अलग असर होता है संयुक्त त्रिदेव/परमब्रह्म शक्ति से निकलने पर। या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये। विश्व एक गाँव की व्यवस्था के लाभ को लेना प्रारम्भ कर देने वाले हर विश्व नागरिक को वैस्विक संप्रभुता के नियमों का पालन तो करना ही पडेगा और उसका एक ही उपचार है " या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये", इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रह गया है|

या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये। विश्व एक गाँव की व्यवस्था के लाभ को लेना प्रारम्भ कर देने वाले हर विश्व नागरिक को वैस्विक संप्रभुता के नियमों का पालन तो करना ही पडेगा और उसका एक ही उपचार है " या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये", इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रह गया है।>>>>> विदेशी मिसनरिया जो भारतीय सामाजिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करती है और उसके संतुलन को प्रभावित करती हैं, उनके भारत स्थित अभिकर्ता और हिन्दू समाज के ही अन्य वर्ग के कुछ विशेष लोग यदि ब्राह्मण/सवर्ण समाज की लड़कियों के स्थान पर या उनके साथ ब्राह्मण के लड़कों के भी जीवन का ध्यान रखे होते या उनका भी साथ दिए होते और उनको भी अपने घर में जगह दिए होते वाह्य रूप से ही सही या ब्राह्मण/सवर्ण समाज का घर उजाड़ने का व्यापक कार्यक्रम न बनाये होते तो जो कुछ हुआ विगत दो दसक में वह न हुआ होता। जो कुछ हुआ था इन चौदह वर्ष में उसके लिए प्रायश्चित का कोई प्रश्न ही नहीं है वह तो एक झांकी भर था शक्ति प्रदर्शन और समान संप्रभुता के बंटवारे हेतु आधिकारिक रूप से प्रार्थना पत्र भरना भर था। विश्व समाज को पूर्ण रूपेण विचार करना चाहिए था की डॉन भाई(भगवा) की शक्ति/संयुक्त त्रिदेव शक्ति/परमब्रह्म शक्ति से स्व-स्व एकल त्रिदेव शक्ति संतुलन हेतु परमब्रह्म की शक्ति की पूर्ण संप्रभुता का बंटवारा कभी भी होता है तो हिस्सा एक तिहाई, एक तिहाई और एक तिहाई का ही होगा इनसे चाहे जितने जाती/धर्म ने अपना सामाजिक अस्तित्व पाया हो विभाजन होते होते या कोई अपनी संख्या शक्ति कितना ही क्यों न बढ़ा लिया हो जैसे शिव, विष्णु और ब्रह्मा के गुणात्मक विभाजन और सम्मिलन का अपना अलग अलग असर होता है संयुक्त त्रिदेव/परमब्रह्म शक्ति से निकलने पर। या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये। विश्व एक गाँव की व्यवस्था के लाभ को लेना प्रारम्भ कर देने वाले हर विश्व नागरिक को वैस्विक संप्रभुता के नियमों का पालन तो करना ही पडेगा और उसका एक ही उपचार है " या तो आप वैश्विक संप्रभुता में अपने हिस्से भर का लीजिये या विकल्प के रूप में अपने कर्मों के बदले अधिकार प्राप्त कीजिये और इस प्रकार अपनी संप्रभुता बढाइये", इसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रह गया है। <<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण

ब्रह्मा की मानों या न मानो (क्योंकि जन्म आप को मिल चुका है और इसके बाद आप का जीवन रहे इसी से उनको काम) पर व्यवस्थित जीवन चाहिए तो शिव और और विष्णु की बात तो मानने का प्रयत्न करना ही पडेगा अगर ब्रह्मा का वरदान(श्रिष्टि सदा चलाती रहे=मानव जीवन पृथ्वी पर बना रहे) सत्य होना है तब के लिए, अन्यथा "शिव अगर कल्याणकारी भी हैं तो विनाशक भी हैं और विष्णु अगर प्रजापालक भी हैं तो अनुशाशक भी हैं"। जय हिन्द(कश्मीर से कन्याकुमारी और इरान से सिंगापुर मतलब जम्बूद्वीपे), जय भारत(भरतखंडे=अखंड भारत), जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।

ब्रह्मा की मानों या न मानो (क्योंकि जन्म आप को मिल चुका है और इसके बाद आप का जीवन रहे इसी से उनको काम) पर व्यवस्थित जीवन चाहिए तो शिव और और विष्णु की बात तो मानने का प्रयत्न करना ही पडेगा अगर ब्रह्मा का वरदान(श्रिष्टि सदा चलाती रहे=मानव जीवन पृथ्वी पर बना रहे) सत्य होना है तब के लिए, अन्यथा "शिव अगर कल्याणकारी भी हैं तो विनाशक भी हैं और विष्णु अगर प्रजापालक भी हैं तो अनुशाशक भी हैं"। जय हिन्द(कश्मीर से कन्याकुमारी और इरान से सिंगापुर मतलब जम्बूद्वीपे), जय भारत(भरतखंडे=अखंड भारत), जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण।<<<<<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण