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Monday, August 7, 2017

वास्तविक सन्दर्भ में सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल से लेकर उत्तरकाल/आजतक विश्वमानता केंद्र प्रयागराज-काशी में विष्णुकांत/कृष्णकान्त=राम/कृष्ण=सशरीर परमब्रम्ह/ब्रह्म के सम्पूर्ण मर्यादाओं समेत क्रमिक दायित्व का निर्वहन मुख्य रूप से विवेक(गिरिधर) ही कर रहे हैं जिसमे रक्षण, संरक्षण, संवर्धन और संचालन क्रमिक रूप से शामिल हैं तो ऐसे में सर्वोच्च शिखर वाली अवश्था में वह ब्रह्मज्ञानी स्वयं था, परमपिता परमेश्वर प्रेमचंद(शिव) से शक्ति लेकर जुलाई, 2001 में विषपानकर्ता महादेव भी बना और परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) से शक्ति लेकर 7 फरवरी, 2003 को कूर्मावतारी विष्णु भी बना इसी प्रयागराज में क्योंकि गुरुदेव जी परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) के आदेशानुसार बिना कार्यसिध्ध हुए और ब्राह्मण कन्या और ब्राह्मण समाज के इज्जत का सम्मान करते हुए कुछ अपनी जबान या लेखनी से नहीं बोलना था तो 2006 तक चुप रहा है 29 मई, 2006 को सैद्धांतिक रूप से कार्य पूरा कर अपने ब्रह्मज्ञान को अप्रत्यक्ष रूप से ऑरकुट और उसी पोस्ट को "Vivekanand and Modern Tradition" नामक ब्लॉग पर उतारने के लिए लिखता और मिटाता रहा जिसे मई, 2013 को पूर्ण रूपेण मिटा दिया गया था और पुनः अगस्त, 2013 से फेसबुक और इसी ब्लॉग पर पुनः लिख रहा हूँ जिसे अगस्त 2013 से 175000 लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से ब्लॉग के माध्यम से और अनगिनत 2006 से मई, 2013 तक ब्लॉग और सीधे सीधे ऑरकुट और फेसबुक पर पढ़ा है, तो ऐसे में ब्रह्मज्ञानी होने का दायित्व ही नहीं अधिकार मेरा स्वयं का है और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव:सोमनाथ) की शिवशक्ति और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) की सांसारिकता/भौतिकता मुझे प्राप्त रही/हुई है| मानवता संरक्षण की सर्वोच्च शिखर अवश्था से मानवता के संवर्धन की तरफ सर्वोच्च अवस्था से अवतरण और क्रमिक रूप से सामान्य संचलन की भी अवस्था आ जानेर पर दायित्व सीमित हो जाने पर भी अपनी मर्यादित अवस्था को अक्षुण्य रखा हूँ| मैंने अपने बाल्यकाल से ही सामान्य जीवन में भी रामोचित/राम सम्मत आचरण किया है अपने जीवन क्षेत्र में तो वर्तमान समय में भी मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव नहीं है कम से कम 2057 तक क्योंकि उतनी ऊर्जा मेरे में आज भी संचित है मेरे सर्वोच्च शिखर के दायित्व और मर्यादा निर्वहन की सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन की विभीषिका तथा उसके संक्रमण काल के दौरान और आज उसके बाद भी किसी भी श्रेष्ठतम दायित्व और मर्यादा का निर्वहन कर सकता हूँ पर क्या इससे सबको उचित अवसर मिल पायेगा? आपसे प्रश्न है की जिसकी इतनी योग्यता हो की किसी भी समस्या के पूर्वकाल और उत्तरकाल दोनों को समझता तो वह क्या ऐसी समस्या का सीधा हल नहीं निकलेगा? तो क्या ऐसे में समय और सांसारिकता का कोई मतलब रह जाएगा अगर हर वह समस्या जो विश्वमानवता के लिए हितकारी हो उसका का भी बिना उचित कारण समझे हल सम्भव करा दिया जाय? लेकिन इसका यह मतलब नहीं की जो समस्या मानवता के लिए हल करना उचित हो उसका भी हल नहीं निकला जाय| अतः 2057 तक तो कम से कम असंभावित रूप से मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ किसी को पकड़ कर खड़ा करने के बजाय मुझे सामान्य अवश्था में बने रहने देकर अन्य को अवसर अगर आप देंगे तो ज्यादा ठीक रहेगा आप लोगों के लिए भी और मानवता के लिए भी| ऐसे में मुझे आशा है की जिसकी सिद्धि असंभव हो वैसे प्रतिस्पर्धा न कराएँगे तो ही ठीक रहेगा|

वास्तविक सन्दर्भ में सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन  और उसके संक्रमण काल से लेकर उत्तरकाल/आजतक विश्वमानता केंद्र प्रयागराज-काशी में विष्णुकांत/कृष्णकान्त=राम/कृष्ण=सशरीर परमब्रम्ह/ब्रह्म के सम्पूर्ण मर्यादाओं समेत क्रमिक दायित्व का निर्वहन मुख्य रूप से विवेक(गिरिधर) ही कर रहे हैं जिसमे रक्षण, संरक्षण, संवर्धन और संचालन क्रमिक रूप से शामिल हैं तो ऐसे में सर्वोच्च शिखर वाली अवश्था में वह ब्रह्मज्ञानी स्वयं था, परमपिता परमेश्वर प्रेमचंद(शिव) से शक्ति लेकर जुलाई, 2001 में विषपानकर्ता महादेव भी बना और परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) से शक्ति लेकर 7 फरवरी, 2003 को कूर्मावतारी विष्णु भी बना इसी प्रयागराज में क्योंकि गुरुदेव जी परमगुरु परमपिता परमेश्वर श्रीधर(विष्णु) के आदेशानुसार बिना कार्यसिध्ध हुए और ब्राह्मण कन्या और ब्राह्मण समाज के इज्जत का सम्मान करते हुए कुछ अपनी जबान या लेखनी से नहीं बोलना था तो 2006 तक चुप रहा है 29 मई, 2006  को सैद्धांतिक रूप से कार्य पूरा कर अपने ब्रह्मज्ञान को अप्रत्यक्ष रूप से ऑरकुट और उसी पोस्ट को "Vivekanand and Modern Tradition" नामक ब्लॉग पर उतारने के लिए लिखता और मिटाता रहा जिसे मई, 2013 को पूर्ण रूपेण मिटा दिया गया था और पुनः अगस्त, 2013 से फेसबुक और इसी ब्लॉग पर पुनः लिख रहा हूँ जिसे अगस्त 2013 से 175000 लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से ब्लॉग के माध्यम से और अनगिनत 2006 से मई, 2013 तक ब्लॉग और सीधे सीधे ऑरकुट और फेसबुक पर पढ़ा है, तो ऐसे में ब्रह्मज्ञानी होने का दायित्व ही नहीं अधिकार मेरा स्वयं का है और परमपिता परमेश्वर, प्रेमचंद(शिव:सोमनाथ) की शिवशक्ति और परमगुरु परमपिता परमेश्वर, श्रीधर(विष्णु) की सांसारिकता/भौतिकता मुझे प्राप्त रही/हुई है| मानवता संरक्षण की सर्वोच्च शिखर अवश्था से मानवता के संवर्धन की तरफ सर्वोच्च अवस्था से अवतरण और क्रमिक रूप से सामान्य संचलन की भी अवस्था आ जानेर पर दायित्व सीमित हो जाने पर भी अपनी मर्यादित अवस्था को अक्षुण्य रखा हूँ| मैंने अपने बाल्यकाल से ही सामान्य जीवन में भी रामोचित/राम सम्मत आचरण किया है अपने जीवन क्षेत्र में तो वर्तमान समय में भी मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ संभव नहीं है कम से कम 2057 तक क्योंकि उतनी ऊर्जा मेरे में आज भी संचित है मेरे सर्वोच्च शिखर के दायित्व और मर्यादा निर्वहन की सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहाविभीषिका/विश्वमहापरिवर्तन की विभीषिका तथा उसके संक्रमण काल के दौरान और आज उसके बाद भी किसी भी श्रेष्ठतम दायित्व और मर्यादा का निर्वहन कर सकता हूँ पर क्या इससे सबको उचित अवसर मिल पायेगा? आपसे प्रश्न है की जिसकी इतनी योग्यता हो की किसी भी समस्या के पूर्वकाल और उत्तरकाल दोनों को समझता तो वह क्या ऐसी समस्या का सीधा हल नहीं निकलेगा? तो क्या ऐसे में समय और सांसारिकता का कोई मतलब रह जाएगा अगर हर वह समस्या जो विश्वमानवता के लिए हितकारी हो उसका का भी बिना उचित कारण समझे हल सम्भव करा दिया जाय? लेकिन इसका यह मतलब नहीं की जो समस्या मानवता के लिए हल करना उचित हो उसका भी हल नहीं निकला जाय| अतः 2057 तक तो कम से कम असंभावित रूप से मेरा एकल ज्येष्ठ, श्रेष्ठ और वरिष्ठ किसी को पकड़ कर खड़ा करने के बजाय मुझे सामान्य अवश्था में बने रहने देकर अन्य को अवसर अगर आप देंगे तो ज्यादा ठीक रहेगा आप लोगों के लिए भी और मानवता के लिए भी| ऐसे में मुझे आशा है की जिसकी सिद्धि असंभव हो वैसे प्रतिस्पर्धा न कराएँगे तो ही ठीक रहेगा|>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक(/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण

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