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Thursday, August 10, 2017

जो बिशुनपुर, जौनपुर-223203 के सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार जो रामानंद/..../रामप्रशाद/रमानाथ(पारशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर/श्रीप्रकाश) मतलब रामानंद कुल के परिवार जो रामानंद की मूल भूमिधरी पर बने रहने का गौरव प्राप्त है ऐसे विष्णु कुल वाले अपने ननिहाल के सहयोग से जो स्वयं रामापुर, आज़मगढ़-223225 का सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(शिव को अर्पित और शिवा का आहार होने वाला) पाण्डेय ब्राह्मण सारंगधर(शिव)/------/देवव्रत(गंगापुत्र) के कुल का सदस्य होते हुए देवव्रत की ही मूल भूमिधरी पर रहने का गौरव प्राप्त किये हुए है, वह अपने शिव स्वरुप का विस्तार करते हुए अभूतपूर्व रूपेण परमब्रह्म अवस्था को प्राप्त हुआ और ब्रह्मा द्वारा दिए गए कार्य को इस प्रयागराज में अपने को अवस्थित कर परिणति तक पहुंचाया, तो जाहिर सी बात है की जो विष्णु हमेशा परमब्रह्म का स्वरुप प्राप्त करते है वे भी शिव और ब्रह्मा की शक्ति अर्जित कर ऐसे परमब्रह्म स्वरुप प्राप्त करते होंगे। लेकिन इस दौरान शिव को परमब्रह्म बनना था तो विष्णु को अभूतपूर्व कस्ट हुआ जितना शिव को नहीं होता था विष्णु को परमब्रह्म रूप में बने रहने हेतु सहयोग देने में तो भविष्य में विष्णु को ही पुनः परमब्रह्म बनाने हेतु ब्रह्मा और शिव को केवल वाह्य सहयोग व् समर्थन विधि को सर्वश्रेष्ठ माना जाय मतलब जो जिसका काम है वही उसे करे तो किशी को कुछ कस्ट नहीं होगा पर क्या किया जाय स्थिति ऐसी थी की इसमे शिव की ही सहन शक्ति ऐसी थी की उन्ही को ही समर्पित होना था। जब मै स्वयं केदारेश्वर/आदिशंकर बन शिव सीमा विस्तार परमब्रह्म तक किया तो फिर बिशुनपुर में कौन महादेव शेष बचा? वहां तो महादेव स्वयं विष्णु भक्त होते हैं, तो कौन और किस प्रकार का महादेव था जो रामानंद के विष्णु कुल की भूमिधरी पर आसीन पारिवारिक सदस्य का विरोध किया? निः संदेह यह धूर्तता थी और उसका परिणाम उनको भुक्तना ही था/होगा। यहाँ यह भी सत्य है की जो राम और कृष्ण मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल रूप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वयं है उसमे पूर्ण ब्रह्मा, पूर्ण विष्णु और पूर्ण शिव होने की दक्षता ही नहीं तीनो शक्ति एक साथ एकल स्वरुप में हे धारण करने की क्षमता स्वयं में ही होती है क्योंकि उसी राम और कृष्ण मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल रूप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश) से ये तीनो निर्गत और विलीन होते हैं|

जो बिशुनपुर, जौनपुर-223203 के सनातन गौतम गोत्रीय व्यासी मिश्रा ब्राह्मण परिवार जो रामानंद/..../रामप्रशाद/रमानाथ(पारशनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर/श्रीप्रकाश) मतलब रामानंद कुल के परिवार जो रामानंद की मूल भूमिधरी पर बने रहने का गौरव प्राप्त है ऐसे विष्णु कुल वाले अपने ननिहाल के सहयोग से जो स्वयं रामापुर, आज़मगढ़-223225 का सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(शिव को अर्पित और शिवा का आहार होने वाला) पाण्डेय ब्राह्मण सारंगधर(शिव)/------/देवव्रत(गंगापुत्र) के कुल का सदस्य होते हुए देवव्रत की ही मूल भूमिधरी पर रहने का गौरव प्राप्त किये हुए है, वह अपने शिव स्वरुप का विस्तार करते हुए अभूतपूर्व रूपेण परमब्रह्म अवस्था को प्राप्त हुआ और ब्रह्मा द्वारा दिए गए कार्य को इस प्रयागराज में अपने को अवस्थित कर परिणति तक पहुंचाया, तो जाहिर सी बात है की जो विष्णु हमेशा परमब्रह्म का स्वरुप प्राप्त करते है वे भी शिव और ब्रह्मा की शक्ति अर्जित कर ऐसे परमब्रह्म स्वरुप प्राप्त करते होंगे। लेकिन इस दौरान शिव को परमब्रह्म बनना था तो विष्णु को अभूतपूर्व कस्ट हुआ जितना शिव को नहीं होता था विष्णु को परमब्रह्म रूप में बने रहने हेतु सहयोग देने में तो भविष्य में विष्णु को ही पुनः परमब्रह्म बनाने हेतु ब्रह्मा और शिव को केवल वाह्य सहयोग व् समर्थन विधि को सर्वश्रेष्ठ माना जाय मतलब जो जिसका काम है वही उसे करे तो किशी को कुछ कस्ट नहीं होगा पर क्या किया जाय स्थिति ऐसी थी की इसमे शिव की ही सहन शक्ति ऐसी थी की उन्ही को ही समर्पित होना था। जब मै स्वयं केदारेश्वर/आदिशंकर बन शिव सीमा विस्तार परमब्रह्म तक किया तो फिर बिशुनपुर में कौन महादेव शेष बचा? वहां तो महादेव स्वयं विष्णु भक्त होते हैं, तो कौन और किस प्रकार का महादेव था जो रामानंद के विष्णु कुल की भूमिधरी पर आसीन पारिवारिक सदस्य का विरोध किया? निः संदेह यह धूर्तता थी और उसका परिणाम उनको भुक्तना ही था/होगा। यहाँ यह भी सत्य है की जो राम और कृष्ण मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल रूप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश) स्वयं है उसमे पूर्ण ब्रह्मा, पूर्ण विष्णु और पूर्ण शिव होने की दक्षता ही नहीं तीनो शक्ति एक साथ एकल स्वरुप में हे धारण करने की क्षमता स्वयं में ही होती है क्योंकि उसी राम और कृष्ण मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल रूप में ब्रह्मा+विष्णु+महेश) से ये तीनो निर्गत और विलीन होते हैं| <<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

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