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Saturday, August 12, 2017

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं|

जो राम और कृष्ण बन सकता है मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म(एकल स्वरुप में ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश) बन सकता है उसे ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अलग-अलग स्वरुप धारण करने या इस संसार की आज तक की किसी भी विभूति उन विभूतियों की स्वाभाविक परिश्थिति उत्पन्न हो जाने की स्थिति में वह स्वरुप या किरदार धारण करने में क्या असंभव है और इसमें क्या आश्चर्य की क्या बात है ?>>>>>>>>>>>>>>> राम(सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म) का विकल्प स्वयं राम मतलब सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म मतलब कृष्ण मतलब राम=कृष्ण| दिक्कत इस बात की है की इस संसार में किसी एक समय और परिश्थिति के लिए सशरीर परमब्रह्म कोई एक ही हो सकता है तो कोई उसे राम के रूप में देख ले और तो कोई उसे कृष्ण के रूप में देख ले यह तभी तो ही यह संभव है| क्योंकि राम और कृष्ण को सशरीर सशरीर परमब्रह्म/ब्रह्म (जो इस सम्पूर्ण मानवता के इतिहास में इस संसार में केवल एक ही था/है/होगा) होने की केवल एक ऐसी ही दशा संभव है और दोनों एक हैं मतलब सशरीर परमब्रह्म के स्वरुप हैं मतलब उसी को राम बनना हैं और उसी को कृष्ण अन्यथा दोनों एक साथ एक रूप में सशरीर परमब्रह्म कैसे हो सकते है| उदहारण के लिए तुलसीदास के लिए ब्रज में कृष्ण उनको राम स्वरुप में दिखाई दिए थे तभी तुलसी का सर उनके सामने झुका था न तो फिर मेरे लिए दुविधा 30 जनवरी, 2012 को सीतामढ़ी(सीता समाहित स्थल) और गोपीगंजे के बीच क्यों उत्पन्न की गयी और उत्पन्न की जा रही है जब मेरे घर में मेरा ही एक स्वरुप विष्णुकांत=राम और मेरा ही एक स्वरुप कृष्णकान्त-कृष्ण आ चुके हैं| <<<<HI FIVE (PANDEY)>>>>A perfect Brahman, a perfect Kshatriya and a perfect Vaishya in a perfect Brahman.>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण|

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