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Thursday, August 3, 2017

एक अच्छा लगता है या दो अच्छे लगते हैं जिनके नाम पर अनगिनत दुराचारिता करते हो पर जब सभी लोग सभी संयुक्त रूप में अपने सम्यक (अच्छे और बुरे कार्यों के औसत) कार्यों के बल पर अच्छे लगें तो ठीक होता है यही स्थिति है राम/कृष्ण की जो संयुक्त रूप से सम्पूर्ण मानवता को वैसे ही अच्छे करते हैं जैसा की उनके अपने आचरण और कर्तव्य से आम मानव पर प्रभाव| और आप सभी को बताते चलें की किसी क्षेत्र का कोई भी दुर्दांत से लेकर उच्चकोटि का व्यक्ति जिसके पीछे कंश जैसा चातुर्यपूर्ण व्यक्ति लगा हो अगर वह चरित्रहीन हो जाता है तो परिणामी रूप से उसकी संगति/सम्पर्क में रहने वालों के माध्यम से उसके दिन-गिने चुने रह जाते है जो बताता है की कृष्ण भौतिक रूप में अखण्ड ब्रह्मचारी और एक पत्नी ब्रता थे हनुमान की तरह (जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी)| और उनकी रासलीला अन्य लीला उनके दिव्य अलौकिक प्रभाव का नतीजा था जो की भौतिक रूप में न सम्भव था और न हो सकता है और जब जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश से कोई कार्य स्वयं संभव नहीं होता है वे राम/कृष्ण जैसे विभूतियों के अंदर संयुक्त रूप से उद्भवित हो अपने सांसारिक कार्य को सम्पादित करते हैं| सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौरान ऐसी स्थिति रही है और आसुरी शक्तियों पर निर्णायक विजय हांसिल की जा चुकी है जिसका परिणाम आप सबके सामने है| लेकिन प्रश्न इस बात का है की कहीं आसुरी शक्तियां फिर न हावी हों या जो नियंत्रण का संकल्प इस समय निभा रहे हैं उनके विचारों पर स्वयं आसुरी शक्तियों के विचार ही हावी न हो जाय जिससे की सब किये कराये पर अतिशीघ्र ही पानी फिर जाय|

एक अच्छा लगता है या दो अच्छे लगते हैं जिनके नाम पर अनगिनत दुराचारिता करते हो पर जब सभी लोग सभी संयुक्त रूप में अपने सम्यक (अच्छे और बुरे कार्यों के औसत) कार्यों के बल पर अच्छे लगें तो ठीक होता है यही स्थिति है राम/कृष्ण की जो संयुक्त रूप से सम्पूर्ण मानवता को वैसे ही अच्छे करते हैं जैसा की उनके अपने आचरण और कर्तव्य से आम मानव पर प्रभाव| और आप सभी को बताते चलें की किसी क्षेत्र का कोई भी दुर्दांत से लेकर उच्चकोटि का व्यक्ति जिसके पीछे कंश जैसा चातुर्यपूर्ण व्यक्ति लगा हो अगर वह चरित्रहीन हो जाता है तो परिणामी रूप से उसकी संगति/सम्पर्क में रहने वालों के माध्यम से उसके दिन-गिने चुने रह जाते है जो बताता है की कृष्ण भौतिक रूप में अखण्ड ब्रह्मचारी और एक पत्नी ब्रता थे हनुमान की तरह (जिसकी एक नारी सदा ब्रह्मचारी)| और उनकी रासलीला अन्य लीला उनके दिव्य अलौकिक प्रभाव का नतीजा था जो की भौतिक रूप में न सम्भव था और न हो सकता है और जब जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश से कोई कार्य स्वयं संभव नहीं होता है वे राम/कृष्ण जैसे विभूतियों के अंदर संयुक्त रूप से उद्भवित हो अपने सांसारिक कार्य को सम्पादित करते हैं| सहस्राब्दीमहापरिवर्तन/विश्वमहापरिवर्तन और उसके संक्रमण काल के दौरान ऐसी स्थिति रही है और आसुरी शक्तियों पर निर्णायक विजय हांसिल की जा चुकी है जिसका परिणाम आप सबके सामने है| लेकिन प्रश्न इस बात का है की कहीं आसुरी शक्तियां फिर न हावी हों या जो नियंत्रण का संकल्प इस समय निभा रहे हैं उनके विचारों पर स्वयं आसुरी शक्तियों के विचार ही हावी न हो जाय जिससे की सब किये कराये पर अतिशीघ्र ही पानी फिर जाय| >>>>>>>>>>>>>>>>>>> विवेक/त्रयम्बक/त्रिनेत्र/त्रिलोचन (शिव और शिवा:सती:पारवती की आतंरिक सुरक्षा शक्ति) [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)]] ((सार्वभौमिक प्रथम मानव/ऋषि मूल स्थल प्रयागराज से विस्तारित मूल कश्मीर मूल के बस्ती जनपद से आकर रामापुर-223225 (आजमगढ़ स्थित) समेत 5 गाँव ((ओरिल: रामापुर (500 बीघा मूल क्षेत्र) +गुमकोठी+बागबहार+लग्गुपुर+औराडार)) को एक मुस्लिम(इस्लाम अनुयायी गौतम गोत्रीय क्षत्रिय परिवार)) जागीरदार से दान में पाये सनातन कश्यप गोत्रीय त्रिफला(त्रिफल:त्रिपत्र:त्रिदेव:त्रिदेवी: त्रिफला: बेलपत्र: बिल्वपत्र:शिव और शिवा का आभूषण/आहार/अरपणेय/अर्पण्य/अस्तित्व रहा तो स्वयं शिव बना) पाण्डेय ब्राह्मण बाबा सारंगधर (अगर सारंग मतलब चंद्र से भावार्थित हो तो):चंद्रशेखर:चंद्रधर: शशांकधर: राकेशधर: शशिधर:महादेव:शिव, सारंग मतलब गंगा(अल्का: स्वर्गलोक की एक पारी का नाम भी है) से भावार्थित हो तो गंगा को अपने अल्को में रखने वाले गंगाधर:गंगानाथ:शिव (+सारंग (धनुष) धारण करने वाले विष्णु+श्रीराम+श्रीकृष्ण) कुल के देवव्रत(गंगापुत्र)/.../रामप्रसाद/बचनराम (बेचनराम) /प्रदीप : आदित्यनाथ:सत्यनारायण: रामजानकी:रामा का पुत्र और सारभौमिक मूल मानवता स्थल परयागराज से कैलाश परवत वासी होकर मूल जनपद गोरखपुर/गोरक्षपुर से आकर बिशुनपुर-223103 (जौनपुर स्थित) जैसे मूलतः 300 बीघे के एक गाँव को एक क्षत्रिय जागीरदार से दान में पाये सनातन गौतम गोत्रीय व्याशी(वशिष्ठ कुल के व्यासः से व्याशी तो कश्यप का गुरु हो सकता है) मिश्रा ब्राह्मण निवाजी बाबा के रामानंद/----/रामप्रसाद/ रमानाथ:विष्णु (+पारसनाथ:शिव)/श्रीकांत(+श्रीधर:विष्णु+श्रीप्रकाश) कुल का नाती, विवेक(सरस्वती का ज्येष्ठ मानस पुत्र)/त्रयम्बक/त्रिलोचन/त्रिनेत्र /सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम/महाशिव (शिव व् शिवा:सती:पार्वती की भी आतंरिक सुरक्षा शक्ति) जिसकी आंतरिक शक्ति राशिनाम गिरिधर/ गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण/11 शिवावतार धौलागिरी (हिमालय) धारी हनुमान/धरणीधर शेषनाग(लक्ष्मण)/मरुधर (मदिराचलधारी) कुर्मावतारी विष्णु))|| [[ विवेक ((विवेक/सरस्वती का जेष्ठ मानस पुत्र/शिवरामकृष्ण/श्रीरामकृष्ण/रामकृष्ण/श्रीराम/राम(महाशिव)) Born (Actual) on 11-11-1975, 9.15 AM,Tuesday (मंगलवार, कार्तिक शुक्ल पक्ष अस्टमी=गोपा/गोपी/गोवर्धन/गिरिधर/गिरिधारी:इंद्रजीत अस्टमी) ११ नवम्बर विशेष दिन: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस, नक्षत्र: धनिष्ठा, राशि: 1/2 कुम्भ, 1/2 मकर राशि और राशिनाम: गिरिधर((गोवर्धन धारी श्रीकृष्ण, मेरु:मदिराचलधारी कुर्मावतारी विष्णु, धरणीधर शेषनाग((लक्ष्मण)), धौलागिरी(हिमालय) धारी हनुमान/11th शिव अवतार)) शासकीय प्रमाणपत्र में जन्म दिन तिथि: रविवार, 1-08-1976 (तथाकथित दलित गुरु, श्री धनराज हरिजन (धंजू)द्वारा दी गयी जन्म तिथि)]]||*******जय हिन्द(जंम्बूद्वीप = यूरेशिया=यूरोप +एशिया या न्यूनतम ईरान से सिंगापुर और कश्मीर से कन्याकुमारी)--- जय भारत(भारतवर्ष=अखंड-भारत=भरतखण्ड)-- जय श्रीराम/कृष्ण।

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